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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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सुखमंगल सिंह की कविताएं

विपदा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vipada | विपदा।

Do every task in life in a balanced manner, and save money for sudden bad times, otherwise you will get anxious.

रही पति की अच्छी पगार,
थी होटल में खाती।
व्यंजन कैसे खाने में,
आसपास बताती थी।

कह देता यदि कोई भी
पास कुछ रखा करो!
लेती सिकोड़ मुंह अपना,
भौहें तन जाती जी।

मंगल बने दीवार बच्चे,
वरना होटल में ठहरती।
बिताती रात भर वहीं,
सुबह – सुबह घर आती।

शौहर जब भी बोलता,
उसके सर चढ़ जाती।
दिये दहेज पापा की,
बार बार वह चिल्लाती।

विधान विधाता का क्या,
जानता कौन भला है।
विपत्ति विक्रमादित्य पर,
भूनी मछली जल में पड़ी।

है रोटी कपड़ा और मकान,
सीना तान बैठा सब कोई।
मैं विष्णु का आहार जो,
शास्त्रीय ही बतलाता है।

फिर भी घमंड में मानव,
अपना अपना सुनाता है।
दुनिया से कैसा एम प्रेम,
सोर हर ओर रहा कैसा?
झगड़े झंझट से मुक्ति ले,
दुपट्टे में छुप जाती थी।

जलना जीवन का ध्येय है,
जलना बना ली है सीमा।
कूंजती कोयल काली,
डोलती मद मतवाली।

शौहर पगार पतली पड़ी,
बजा हृदय में विकल राग।
घिर गयी घटा सी उलझन,
दाने दाने को तरस रही।

दशा देख नभ हुआ अधीर,
झर झर नयनों बह रहे नीर।
कोलाहल पथ चल के आयी,
अंतस में नव हर्ष – विषाद।

कास संभल के जीवन जीती,
लहरों का नहीं होता उन्माद।
संस्कृति – सभ्यता में चलती,
जो जीवन का रहस्य खास।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कविता में एक पत्नी की कहानी है, जो अपने पति की जब ज्यादा पगार होती है तब खूब होटल में ही खाना खाती है और जब पति कुछ बोलता तो उसे कैसे खाना खाने का तरीका सिखाती है। वह अपने पति से कहती है कि वह कभी भी अपने पास कुछ न रखें, लेकिन जब पति कुछ बोलता तो उसे पापा के द्वारा दिए दहेज का जिक्र कर जाती हैं, और वह चिल्लाती है। समय एक जैसा नहीं रहता हैं, मानव अपने घमंड में क्यों सबकुछ भूल कर अपना ही अहित करता जाता है, जैसे इस पत्नी ने किया अपने पति की बात ना मानकर अपने पुरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया। अब तो बजा हृदय में विकल राग, घिर गयी घटा सी उलझन, दाने दाने को तरस रही। इसलिए जीवन में हर कार्य एक संतुलन में रहकर करें, और अचानक से आने वाले ख़राब समय(बुरा समय) के लिए बैकअप योजना (पैसा बचाकर रखे) नहीं तो फिर बहुत ज्यादा परेशान हो जायेंगे।

—————

यह कविता (विपदा।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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अयोध्या।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ayodhya | अयोध्या।

कण-कण वासी, अवध निवासी,
मानवता के त्राता, जगत के सुखदाता।
दानव – दुष्ट – दलन अवतारी,
श्रृष्टि सृजन सद्धर्म प्रभारी।
सहज शेष शारदा संग में,
भव – भय भन्जन जग हितकारी।

सरयू अमिय प्रदाता, श्रृष्टि जगत विख्याता,
मानवता के त्राता, जगत के सुख दाता।

बंदर संग मदारी भेषा,
दरस-परस शिव अति लवलेशा।
बाल सुलभ श्री राम दरस पा,
अति सुख पावे नर हरि भेषा।

समता मूलक ध्ताया त्रिपुर विनाशक ज्ञाता,
मानवता की त्राता, जगत के सुख दाता।

जल निधि वक्षस्थल पर धाये,
राम सेतु निर्माण कराये।
मर्कट बंदर भालू के संग,
लांघि समंदर लंका आये।

‘मंगल’ भाष्य विधाता, जीवन ज्योति प्रदाता,
मानवता के त्राता, जगती के सुख दाता।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जिस भूमि पर प्राचीन समय से ही महापुरुष तपस्या करते आये है, निष्काम उपासकों की पुण्य गाथा से कण – कण सुशोभित है प्राचीन पुरी अयोध्या धाम। महाबली हनुमान जी के आराध्य की नगरी अयोध्या धाम। सरयू नदी के तट पर प्राचीन पुरी अयोध्या धाम जहां जगत पिता श्री हरि खुद आये श्री राम रूप में, पूरी मानव जाती को मर्यादा व धर्म का सीख देने। दुष्टों का संहार कर, जगत में शांति की पुनः स्थापना कर, प्रेम, पवित्रता व त्याग के साक्षात रूप श्री राम। अयोध्या धाम पुनः विश्व में “वसुधैव कुटुम्बकम्” सनातन धर्म के मूल संस्कार को मानवों में भरने का कार्य करेगा।

—————

यह कविता (अयोध्या।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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योग दिवस – 21 जून

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Divas June 21 | योग दिवस – 21 जून

आज 21 जून के अंक
अखिल संस्कृति के मनस – प्रवाह।
योग का यह सुंदर उद्देश्य,
जगाया जन चेतन मन चाह।

प्रेरणा का पावन उद्गार,
योग से होते सभी निरोग।
यही सम्यक संत विचार,
विश्व महिमा मंडित उद्योग।

पिलाते कटुता कूट स्नेह,
पढ़ाते मानवता का पाठ।
यही सम मिश्र अहिंसा सत्य,
काछते सब सेवा का ठाट।

राग – रंग संगम ‘मंगल’ भाव,
सुझा देते सबको यह राह।
योग का यह सुंदर उद्देश्य,
जगाया जन चेतन मन चाह।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे।

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यह कविता (योग दिवस – 21 जून) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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कोरोना भारतीय सेनेटाइजेशन को समझता था।

Kmsraj51 की कलम से…..

Corona Understand Indian Sanitization | कोरोना भारतीय सेनेटाइजेशन को समझता था।

भारतीय सेनेटाइजेशन को समझता था,
लेकिन कुछ दूसरों के पल्ले नहीं पड़ता था।
जब पूरी दुनिया में कोरोना पूरी तरह छाया,
सब दुनिया के लोगों को भारतीयता समझ में आया।

मुंह पर सभी लोगों ने अपने से मांस्क लगाया,
और हाथ पांव धोकर ही पावन भोजन पाया।
बाहर से घर आते ही आकर पहले नहाया,
कपड़ों को खुद धोकर ही डेटॉल आदि लगाया।

जूता चप्पल प्राचीन काल से बाहर रखा जाता था,
हाथ पैर धो कर ही मनुष्य भोजन पाता था।
चुपके से घर अंदर मौजा पहने प्रवेश कर जाता,
दादी माई की कड़क आवाज और डॉ ट खाता।

पत्नी कहती आपको समझ में नहीं है कुछ आता,
धोकर ही सब्जी – भाजी क्यों बनाई जाती है।
शौचालय को खुद ही चमकाया जाता है,
कोना – कोना का कचरा रोज साफ किया जाता।

रोज – रोज झाड़ू – पोछा क्यों घुमाया जाता है,
संपूर्ण कमरों को सप्ताह भर में धोया जाता है।
सारी दुनिया मेरी यह बात समझ में पाई थी,
संसार में इसीलिए कोरोना वायरस जी आई थी।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — भारतीय सेनेटाइजेशन को पूरी दुनिया ने अच्छा माना और समझा, पूरी दुनिया के लोगों को भारतीयता व भारतीयों की दया समझ में आया। मुंह पर सभी लोगों ने अपने से मांस्क लगाया, और हाथ पांव धोकर ही पावन भोजन पाया। जूता चप्पल हमारे यहां प्राचीन काल से ही बाहर रखा जाता था और हाथ पैर धो कर ही मनुष्य भोजन पाता था। अगर कभी चुपके से घर अंदर मौजा पहने प्रवेश कर जाता, तो दादी माई की कड़क आवाज और डॉ ट खाता। सारी दुनिया के लोगो को स्वच्छता की सीख़ देने के लिए ही इस संसार में कोरोना वायरस जी आई थी। हम सभी को गर्व है अपने प्राचीन भारतीय संस्कृति पर, जो हमे स्वच्छता के साथ जीवन जीना सिखाया था। जैसे – जैसे समय बदला वैसे – वैसे इंसान के सोचने व समझने की छमता ख़त्म होती जा रही है, अपने प्राचीन महत्वपूर्ण संस्कारों को भूलता जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप कई तरह के समस्याओं से परेशान है, फिर भी भौतिक विकास के नाम प्रकृति के पञ्च तत्वों से खिलवाड़ करने से नही चूक रहा है। हे मानव अब भी समय है सुधर जाओ वर्ना ये पृथ्वी रहने लायक नहीं रहेगी। याद रखें की – जिस देश के लोग अपनी प्राचीन संस्कृति, संस्कार व सभ्यता को भूल जाते है, उनको विलुप्त होने से कोई भी नहीं बचा पायेगा। इसलिए अपने अंदरऔर वर्तमान पीढ़ी व आने वाली नई पीढ़ी को प्राचीन भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता का पूर्ण ज्ञान दो, और उन्हें अनुसरण करना भी सिखाओ।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (कोरोना भारतीय सेनेटाइजेशन को समझता था।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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कृष्ण जन्माष्टमी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कृष्ण जन्माष्टमी। ♦

सौ जन्मों के पापों से छुटकारा मिलता है,
कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव सबसे उपयुक्त पर्व है।
हजारों एकादशी का व्रत करने से जो पुण्य मिलता है,
जन्माष्टमी पर्व पर व्रत करने से ही मनुष्य तर जाता है।

ब्रह्म वैवर्त पुराण आदि में भी चित्रण किया गया है,
भविष्य पुराण में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर वर्णन है।
पुत्र जन्म का समाचार सुन दयानंद से हृदय भरे आया,
ब्राह्मणों को दान दिया स्वस्तिवाचन जात कर्मों को कराया।

देवता की विधि पूर्वक पूजा – पाठ मंत्रोचार करवाया,
गौ और तिल के साथ पहाड़ सुनहरे वस्त्र भूषण दान दिया।
ब्रह्मण सूत माधव और बंदी जन आशीर्वाद देने लगे,
गाने लगे गायक, दुंदुभी और भेरियां भी बजने लगीं।

बृज के सभी हाल बागवानी और आंगनबाड़ी सजने लगी,
इत्र और जल का छिड़काव चारों तरफ किया जाने लगा।
रंग बिरंगी वस्त्र पुष्प और पल्लवों में वंदन द्वार सजाया गया,
गाय बैल और बछड़ों के अंगो में हल्दी तेल लेप किया गया।

गेरू से पीठ पर हाथ के पंजों से रंगीन संस्कृतिक निशान लगे,
मोर पंख और फूलों के हार से जानवरों को पहनाया गया।
ग्वाल वाल सब मिलकर हाथों में भेट लिए नंद बाबा के घर चले,
सुनकर यशोदा को पुत्र हुआ है गोपियों को भी आनंद मिला।

विशेष तरह से ही सुंदर वस्त्र आभूषण अंजन से श्रृंगार किया,
भेंट की सामग्री के संग गोपिकाएं मिलनें यशोदा जी के पास चलीं।
झल फल झल फल चलते समय कानों का सुंदर कुंडल डोल रहा,
गले पड़े हुमेल और मणियों के कुण्डल सुशोभित हो रहे थे।

जिस मार्ग में आगे बढ़ती थीं उसमें चोटियों के गुथे पुष्प बरसते,
हाथों की जड़ाऊ कंगन रुक रुक कर चमकने लगता।
नंद बाबा के घर जाकर सभी लोग नवजात को आशीर्वाद देतीं,
हल्दी मिला हुआ पानी छिड़क कर मंगल गान करती थीं।

जब नंद बाबा की ब्रृज में प्रकट हुए भगवान श्री कृष्णा
उस समय उनकी जन्म का महान उत्सव मनाया गया।
नंद बाबा के व्रज में रिद्धि -सिद्धियां अठखेलियां खेलने लगी,
लक्ष्मीनिया का क्रिडास्थल श्रीकृष्ण का निवास स्थान बन गया।

गोकुल के नन्द बाबा मथुरा चले कंस को वार्षिक कर चुकाने,
बात जान कर वसुदेव भाई नन्द जी से मिलने मथुरा चले गए।
आपस में दोनों लोग मिलकर प्रेम से विह्वल हो रहे थे,
वासुदेव नें नंद जी से कुशल मंगल पूछकर कहने लगे।

बड़े ही सौभाग्य की बात है कि तुम्हें संतान प्राप्त हुआ,
आनंद का विषय है कि आज हम लोग का मिलना हुआ।
सगे प्रेमियों का मिलना कामनाएं पूर्ण होना बड़ा दुर्लभ है,
सगे संबंधी और प्रेमियों का एक स्थान पर रहना संभव नहीं है नहीं।

यद्यपि सबको प्रिय लगता पर सबके प्रारब्ध अलग-अलग होते हैं,
मेरा लड़का अपनी मां रोहणी के साथ ब्रज में भाई रहता है!
जिसका पालन पोषण तुम और यशोदा ही करतीं हैं,
तुम्हीं को वह सम्मान के साथ माता – पिता मानता है।

धर्म अर्थ और काम मनुष्य के लिए स्वजनों को सुख देने वाला हो,
अपने स्वजनों को दुख देने वाला कार्य हितकारी नहीं होता है।
नंद जी और वसु देव ने सुख और दुख की बातें आपस में की,
वसुदेव ने नंद जी से मथुरा में अधिक दिन नहीं ठहरें कहीं।

हम दोनों मिल चुके गोकुल में बड़े – बड़े उत्पात हो रहे हैं,
तब गोपो के साथ नंद छकड़ों पे सवार होकर गोकुल की यात्रा की।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — इतिहास इस बात का साक्षी है, दुष्ट कभी सुधरते नहीं, दुष्टों का संहार करना ही पड़ता है दुनिया व समाज में शांति और खुशहाली के लिए, फिर चाहे युग (समय) कोई भी हो। कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। वे माता देवकी और पिता वासुदेव की ८वीं संतान थे। श्रीमद भागवत के वर्णन अनुसार द्वापरयुग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज करते थे। उनका एक आततायी पुत्र कंस था और उनकी एक बहन देवकी थी। श्रीकृष्ण के आगमन से ब्रज भूमि तथा गोकुल में बचपन की अठखेलियों से गोकुलवासी अत्यंत खुश थे। क्या गोप क्या गोपिया, उनकी क्रीड़ाओं और लीला से अत्यंत हैरान व प्रसन्न थे। हैरान इसलिए क्योंकि इससे पहले अद्भुत लीला उन्होंने अपने जीवन काल में कभी नही देखीं थी, और खुश इसलिए क्योंकि श्रीकृष्ण की लीलाओं से सभी को आनंद आता था। माता यशोदा श्रीकृष्ण का लालन पालन कर अत्यंत ही हर्षित थी। नन्द व माता यशोदा श्रीकृष्ण के पालक माता-पिता थे। श्रीकृष्ण ने इंसान के जीवन में धर्म, अर्थ, कर्म व काम का क्या महत्व हैं इसे बहुत ही सरल रूप से समझाया है। इस कविता में कवि सुखमंगल सिंह जी ने श्रीकृष्ण के जीवन व उनके द्वारा की गई लीलाओं का बहुत ही मनोरम व सुन्दर वर्णन किया है।

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यह कविता (कृष्ण जन्माष्टमी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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योग निद्रा कीं दुष्ट संहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ योग निद्रा कीं दुष्ट संहार। ♦

योग निद्रा का कर ध्यान,
मधु कैटभ किया संधान।
धरा पे जो कुटिल कामी,
चुनक मारती कल्यानी?

खल कामी खड्योत पर,
कर लो जी अनुसंधान।
चक्र सुदर्शन विष्णु का
बोल रे जय श्री राम।

दुष्टों से धरा खाली हो,
शिव शक्ति बहाली हो।
भारत मां की रखवाली,
शास्त्र समस्त संधान।

दुष्ट दमन श्री राम किये,
प्रेम ने बोला जय श्री राम।
बानर – भालू संग लिया,
रावण ऊपर प्रहार किया।

खर दूषण त्रिसरा मारा,
बाली मुक्तिधाम सिधारा।
सुग्रीव का साथ निभाया,
सेनापति जामवंत बनाया।

तीर समुद्र जब सेना आई,
तब समझ नहीं, आंख दिखाई।
समुद्री तंहा रघनाथ तप कीना,
अनसुनी, श्रीराम क्रोध दुना।

धनुष बाण का किया संधान,
समुद्र कांपते आया मान।
रघुनंदन आगे शीश झुकाया,
राम सेना लंका भिजवाया।

महामाया देवी मोह स्वरूपा,
जो दुष्टों की रहती है भूखा।
सिंह वाहिनी की है गर्जना,
विश्व में हलचल बढ़ तीखा।

समुद्र का पूछता जल युग,
धरा पर हलचल भय मुक्त।
महामाया ने दुष्ट को मारा,
दैत्य को जिसे नहीं सहारा।

असिलोमा नामक दैत्य सेना,
बिडाल! राक्षस दौड़ा आया।
सिन्हनाद ओर लक्ष्य कराया,
महिषासुर को मां दौड़ आई।

महिषासुर दौड़ा दौड़ा आया,
भगवती पर अस्त्र चलाया।
संग्राम में तैयार दैत्य की हार,
आसुरों पर परमेश्वरी संहार।

देवी शक्ति का खडग प्रहार,
महा दैत्यों का किया संहार।
संग्राम महोत्सव में बदल गया,
ढोल नगाड़ा ताशा बज रहा।

देवी दैत्यों की कमर तोड़ी,
कितनों की गर्दन मरोड़ डाली।
जगदंबा का करो मन से ध्यान,
संतुष्ट हो जाएगा सारा जहान।

देवी करती है सबका कल्याण,
देवताओं पर है उसका ध्यान।
कहता मंगल देवी सबसे महान,
जगत का मां करती कल्याण।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — इतिहास इस बात का साक्षी है, दुष्ट कभी सुधरते नहीं, दुष्टों का संहार करना ही पड़ता है दुनिया व समाज में शांति और खुशहाली के लिए, फिर चाहे युग (समय) कोई भी हो। अगर रावण सुधरने वाला होता तो प्रभु श्री राम उसका वध कभी भी नहीं करते, माना की रावण बुद्धिमान था लेकिन था तो दुष्ट, अपनी दुष्टता के कारण ही रावण मारा गया। अगर महिषासुर सुधर जाता तो माँ दुर्गा को उसका वध नहीं करना पड़ता। इसलिए युग चाहे कोई भी हो दुष्ट की एकमात्र सजा है, उसका वध, अगर दुष्ट का वध नहीं किया गया तो अपने देश, समाज और पूरी दुनिया के लिया नासूर बन जायेगा।

—————

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यह कविता (योग निद्रा कीं दुष्ट संहार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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न्यायालय जज काशी – ज्ञानवापी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ न्यायालय जज काशी – ज्ञानवापी। ♦

भाषित शिव गौरी गोसाईइन को,
एक हफ्ते में अपनों आवेदन कीजै।
शिवलिंग! चारों तरफ कचरा अंबार,
समाधिष्ट शिव पूजन कर त्रिपुरारि।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आदेश दियो,
7/11 पर 26 मई 2022 समय लियो।
जिला न्यायालय वा पर करेगा विचार,
26 मई को सुनवाई को हो गया तैयार।

सिविल जज सीनियर डिवीजन से,
दोनों पक्ष कमीशन की रिपोर्ट मांगे।
एडवोकेट कमिश्नर के वीडियो ग्राफी,
25 मई 2022 को मिलेगी सभी जांचें।

ज्ञानवापी परिसर हिंदू पक्ष को मिले,
तत्काल पूजा-पाठ दर्शन मांग किये।
वादी अधिवक्ता शिवलिंग जहां वहां,
पूजा सबै हिंदू वन को अधिकार मिले।

निवासी बीरपुर विशेष बाद दाखिल की,
किरण सिंह पत्नी विशेष जिला गोंडा दीं।
विश्व बौद्धिक सनातन संघ प्रमुख जी बोले,
जिला जज 24 मई सुनवाई का पन्ना खोलें।

संघ का बाद न्यायालय ने स्वीकार किया,
विपक्षी को जिला न्यायालय ने नोटिस दीया।
तहखाने की दीवाल तोड़ने का आदेश नहीं दिया,
शिवलिंग के नीचे की दीवार पर विचार नहीं हुआ।

पूर्व महंत विश्वनाथ मंदिर कुलपति तिवारी,
का आवेदन पत्र नहीं छुआ।
शिवलिंग के पास कचरा हटाने आदि मांग पर,
8 हफ्ते तक सुनवाई लगातार चलती रहेगी?

नियमित दर्शन पूजन श्रृंगार गौरी पर न्यायालय सुनवाई की,
सभी पक्षकारों से उनकी आपत्ति जज ने मांग की।
27 व 28 मई को सुनने पर न्यायालय किया इनकार,
26 मई 2022 को वाद सुनने पर हुआ विचार।

न्यायालय कक्ष में केवल 36 लोग ही जाएंगे,
पक्ष और विपक्ष दोनों अनुमति लेकर आएंगे।
जिला जज की अदालत 26 मई फिर लगेगी,
लंबित 35 ग, आवेदन पर भी सुनवाई करेगी।

प्लेस आफ वरशिप एक्ट 1991 का मुस्लिम हवाला,
देवी देवताओं के प्रबंध के अधिकार मेरा सवाल बा।
सक्षम न्यायालय को आदेश देने का अधिकार बा,
सही न्याय करने का न्यायालय को पूरा अधिकार बा।

ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपा जाए,
पूजा-पाठ और दर्शन करने का मिले अधिकार।
मुस्लिम पक्ष को प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए,
मंगलवार को वादी पक्ष ने अदालत में बाद पेश किया।

जज सीनियर डिवीजन की अदालत में आवेदन दिया,
बुधवार 25 मई 2022 को अदालत करेगी सुनवाई।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती है। लिखित प्रमाण है, नग्गी आँखों से साफ़ साफ़ दीखता है की ज्ञानवापी परिसर, प्राचीन विशाल विश्वेस्वर शिव मंदिर है। जिसमे शिवलिंग के साथ-साथ माता गौरी और गणेश व अन्य देवी देवताओं का मूर्ति स्थापित है। पुरे मंदिर परिसर के सभी दीवारों पर, तहखाने में, पिलरों पर प्रमाण है, जिसके साथ छेड़खानी की गई है, एक दुष्ट कौम द्वारा। हम सनातनी धैर्य के साथ प्रेम पूर्वक मात्र अपने आराध्य महादेव का पूर्ण ज्ञानवापी परिसर वापस चाहते हैं। हमे पूर्ण विश्वास है सम्पूर्ण ज्ञानवापी परिसर हमे जल्द ही मिलेगा। न्यायालय जज काशी द्वारा जल्द ही निर्णय लिया जायेगा। हर हर महादेव!

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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ज्ञानवापी परिसर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ज्ञानवापी परिसर। ♦

ज्ञानवापी परिसर सारे जहां जानता,
शिव जी ने पार्वती को ज्ञान दिया है।
धर्म संस्कृत की अनुपम प्रगति का,
शिव ब्रह्मज्ञान आशीष रूप दिया है।

अदालत के आदेश का पालन हुआ,
अधिवक्ता आयुष मिशन साथ दिया।
चप्पे -२ की वीडियोग्राफी कराई गई,
धार्मिक कलाकृति की फोटो ली गई।

स्थापत्य शैली की आकृतियां मिली,
अंकिता कृतियों की रिकॉर्डिंग हुई।
दस दिन पहले डाली मिट्टी भी मिली,
विद्युत की कमी से ही बैटरी लाई गई।

तह खाने में घोर अंधेरा छाया था,
जांच करता इसीलिए भन्नाया था।
12 मई को फिर सर्वे का आदेश हुआ,
14 और 15 मई को सर्वे किया गया।

6 मई को सर्वे की कारवाई शुरू हुई,
विरोध हंगामे के बीच सर्वे रोका गया।
नारा और फिर भी प्रदर्शन किया गया,
शासन की मुस्तैदी से घटना नहीं हुई।

जांच टीम में दोनों पक्ष के साथ रहे,
14 को 8 से 12:00 बजे तक जांच।
दूसरे दिन 2022 को जांच टीम गई,
दोनों पक्षों से जांच में सहयोग किया।

तह खाना इमेज से चुनी दीवाल थी,
श्रृंगार गौरी की मूर्ति को छुपा दी?
सफेद सिमेंट तहखाने में शामिल है,
यही दुस्साहसिक और मनमानी की?

व्यास जी के बंद कमरे का सर्वे आज,
15 मई 2022 को नहीं हो सका है।
ज्ञानवापी परिसर में एक सुरंग मिली,
गुफ़ा – आखिरी छोर अभी संदेह में है?

खाने में 15th सदी की मूर्ति मिली,
अभी एक तहखाना अंदर राज खुला।
तहखानो में बहुत सारा मलवा मिला,
आकृति के अंश होने का आशंका रहा?

सारा मलवा फर्श पर बिखरा मिला,
महमूद शाह, जहांगीर औरंगजेब का,
ज्ञान वापी तोड़ा हुआ उड़ा दिखा?
सर्वे आफ इंडिया इसकी पहचान करेगा।

मिला हुआ मलवा पूरा छाना जाएगा,
छानने के बाद सत्य सामने आएगा।
सर्वे में कुछ पेपर तथ्य सामने आया,
सर्वे टीम उसे जाँच वास्ते में बंद कर वाया।

तहखाने में पेंटिंग कुछ कराई गई है,
किस सदी का है नहीं बताई गई है।
आगे जांच उस पर कराया जाएगा,
कोर्ट के माध्यम से सामने आएगा।

बरामदे और खंभों के भी फोटो लिया,
क्या उस फर्स में कुछ परिवर्तन हुआ?
प्राचीन मूर्तियों को दबा दिया गया,
कलाकृतियां कुछ लोगों से कह रही?

ज्ञान के परिसर में मिले अवशेषों से,
जांच करने से उसका पता चलेगा।
ग्वालियर की रानी का बनवाया मंडप,
में एक सुरंग का भी पता चलता है।

इस सुरंग का रास्ता कहां जाता है,
सुरंग बनाई रामनगर में क्या मिलती?
राजघाट से पुरातत्व में जा खुलती?
वा सुरंग और कहीं भी यह जाती है।

500 मीटर के दायरे में दुकान बंद,
पैदल चलने वालों पर भी निगाह जी।
सर्वे टीम ने पूरा टाइम काम किया है,
तहखाने दो कमरों के ताला खुला मिला।

तीसरे कमरे के दरवाजे का ताला तोड़ा,
और चौथे कमरे में फाटक नहीं था।
अंदर की चुनी गई दीवार के पीछे क्या,
उसे तोड़ने का न्यायालय आदेश नहीं।

तालाब गुंबद की भी रिकॉर्डिंग हुई,
60 – 65 % सर्वे का काम पूरा हुआ।
अधिवक्ता आयुक्त और टीम साथ थी,
काशी वासियों ने शांति सौहार्द मिली।

फर्श के नीचे गर जांच किया जाता,
बहुत सारा तथ्य निकल सामने आता!
न्यायालय न्याय प्रिय व्यवहार करता है,
सच को सच सदा कहा जाता रहता है।

•—• ♥ •—•

हिंदू पक्ष का दावा मिल रहे साक्ष ज्ञानवापी में,
मुस्लिम पक्ष वहीं कहे नहीं मिले साक्ष वहां पर।
गहमागहमी वही हुई थी जहां जांच चली थी,
जांच टीम वजू स्थल तहखाने का सर्वे कराए॥

जिले जिलों से दौड़ते दौड़ते नमाजी वहां पर आए,
जो कभी नहीं पढ़ता नमाज यहां वह भी यहां आया।
शासन की चाक चौबंद व्यवस्था रहने से,
आतताई भी वहां आकर बस केवल घबराया॥

परिषद के वजू खाने में बाबा का शिवलिंग दिखाया,
शिवलिंग को देखकर अधिवक्ता जैन अदालत पहुंचे।
न्यायाधीश ने उनके निवेदन पर वजू खाने की,
जगह को सील करने का आदेश फिर दिया॥

जिलाधिकारी वाराणसी कौशल राज शर्मा जी ने,
सुरक्षा हेतु सीआरपीएफ कमांडेंट से बात किया।
मुस्लिम पक्ष ने शिवलिंग मिलने के दावे से इंकार किया,
आपसी सामंजस्य बनाने के लिए सभी से बात किया॥

परिसर में शिवलिंग का होना मंदिर का सबूत मिला,
जांच टीम के सामने परिसर में अन्य अवशेष मिला।
मिला हुआ शिवलिंग 12 फीट लंबा, 8 फीट चौड़ा था,
ज्ञानवापी कूप खुदाई में और नीचे शिवलिंग कहा गया॥

16 मई 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई,
वादी पक्ष ने कहा ज्ञानवापी के अंदर शिवलिंग मिला।
उसके साथ-साथ अनेक मंदिर की चीजें भी सामने आई।
एक घंटे तक न्यायालय में तथ्य पेश किया गया,
अगली सुनवाई 20 मई को निर्धारित की गई॥

मौजा शहर खास परगना देहात अमानत बनारस की,
गाटा संख्या 9130 1 बीघा 9 विश्वा छ: धूर में!
मुस्लिम पक्ष के नमाज पढ़ने का विपक्षी अनुरोध किया,
कोर्ट में दावा साबित नहीं कर पाने पर खारिज हुआ॥

ऑल इंडिया अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के संस्थापक,
कांग्रेस नेता मोहम्मद शोएब ने अपने वक्तव्य में कहा-
ज्ञानवापी परिसर में मूर्तियां हैं तो हिंदू को दे देना होगा,
आक्रांता मुसलमान जिन मंदिरों को तोड़ा हिंदू को देना होगा॥

सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग क्षेत्र को,
संरक्षित करने को अपना निर्देश दिया।
जांच की कार्रवाई रोकने की मांग को खारिज किया,
पीठ वजू खाने के इस्तेमाल की इजाजत से भी इनकार किया॥

सुप्रीम न्यायालय ने सिविल जज से जिला जज के पास,
वाराणसी ज्ञानवापी क्षेत्र का पूरा मामला ट्रांसफर किया।
शीर्ष कोर्ट ने यूपी सरकार वा० डीएम पुलिस कमिश्नर,
काशी – विश्वनाथ मंदिर बोर्ड ट्रस्ट आदि को भी नोटिस जारी किया॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती है। लिखित प्रमाण है, नग्गी आँखों से साफ़ साफ़ दीखता है की ज्ञानवापी परिसर, प्राचीन विशाल विश्वेस्वर शिव मंदिर है। जिसमे शिवलिंग के साथ-साथ माता गौरी और गणेश व अन्य देवी देवताओं का मूर्ति स्थापित है। पुरे मंदिर परिसर के सभी दीवारों पर, तहखाने में, पिलरों पर प्रमाण है, जिसके साथ छेड़खानी की गई है, एक दुष्ट कौम द्वारा। हम सनातनी धैर्य के साथ प्रेम पूर्वक मात्र अपने आराध्य महादेव का पूर्ण ज्ञानवापी परिसर वापस चाहते हैं। हमे पूर्ण विश्वास है सम्पूर्ण ज्ञानवापी परिसर हमे जल्द ही मिलेगा। हर हर महादेव!

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रूसी महाबली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रूसी महाबली। ♦

समय बहुत रूस दिया यूक्रेन को,
अमेरिका नाटो के चढ़ाने में चढ़ा।
ब्रिटेन नाटो के हथियारों से लड़ा,
हॉस्पिटल स्कूल में सेना उतार दिया॥

ग्रामीण शहरी नागरिकों को दिया हथियार,
ड्रोन और मिसाइल से लगातार किया प्रहार।
फिर भी यूक्रेन के सैनिक कर रहे सरेंडर बार-बार,
रूसी सेना जगह बदल कर कर रही है पलटवार॥

रूस ने यस – 500 महा युद्ध में दिया उतार,
अमेरिका यूरोप नाटो में मचा भारी हाहाकार।
पुतिन ने महायुद्ध में अपना पराक्रम दिखाया,
विनाशक हथियार से दुश्मन को पहले कंपाया॥

S – 500 का किसी भी देश में तोड़ नहीं,
उसके सामने दुश्मन का कोई वेपन दिखेगा नहीं।
दुश्मन को खोज खोज एस – 500 मार गिराएगा,
दूर दूर तक कहीं भी दुश्मन नहीं दिखलाएगा॥

लेजर गाइडेड बम से भी रूस करेगा प्रहार,
दुश्मन के रडार सिस्टम को जो करेगा बर्बाद।
मिसाइल और विमान पर करेगा भारी वार,
दुश्मन के खेमे में मच जाएगा भारी हाहाकार॥

अमेरिका का मिनट मैन हो जाएगा बेकार,
अमेरिका – यूरोपीय देश का रूस लाया काल।
10 बैलिस्टिक मिसाइल पर एक साथ प्रहार,
अमेरिका का बाम्बा भी दिखने लगेगा निस्सहाय॥

सरमट मिसाइल से अमेरिका यूक्रेन पर प्रहार,
जो बाइडन की कोशिश की चौधराहट पर वार।
यूक्रेन रूस महायुद्ध पर मंगल कर रहा विचार,
दुनिया में दुनिया देख रही भीषण युद्ध हाहाकार॥

रूस के पुतिन, यूरोप पर करेंगे वार,
क्रीमिया जामिया फिनलैंड को बेकार।
टर्की, नार्थ कोरिया, चीन, रूस तैयार,
यूरोप अमेरिका हो जाएगा लाचार॥

रूस और टर्की करेगा चारों तरफ वार,
फिनलैंड का मंसूबा हो जाएगा बेकार।
चीन करेगा ताइवान पर भीषण प्रहार,
अमेरिका पर सभी घेरकर करेंगे वार॥

चक्रव्यूह चारों तरफ से पूरा पूरा तैयार,
चार यार मिल कर अमेरिका पर वार।
चारों यार नाटो खात्मे की कसम खाई,
नाटो के अस्तित्व खत्म करेंगे भाई॥

फिनलैंड – यूक्रेन साथ की कसम खाई,
नाटो से मिलने के लिए आवेदन लगाई।
दक्षिणकोरिया यूक्रेन ताइवान घबराए,
चारों यार मिलकर एक बिगुल बजाया॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — समय बहुत रूस दिया यूक्रेन को, अमेरिका नाटो के चढ़ाने में चढ़ा। ब्रिटेन नाटो के हथियारों से लड़ा, हॉस्पिटल स्कूल में सेना उतार दिया। अब तो रूस ने यस – 500 महायुद्ध में दिया उतार है अमेरिका यूरोप नाटो में मचा है भारी हाहाकार। पुतिन ने महायुद्ध में अपना पराक्रम दिखाया, विनाशक हथियार से दुश्मन को पहले कंपाया। S – 500 का किसी भी देश में अब तक तोड़ नहीं, उसके सामने दुश्मन का कोई भी वेपन दिखेगा नहीं। अब तो दुश्मन को खोज-खोज कर एस – 500 मार गिराएगा, दूर दूर तक कहीं भी दुश्मन नहीं दिखलाएगा।

—————

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यह कविता (रूसी महाबली।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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काशी में देव विग्रह का वीडियोग्राफी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ काशी में देव विग्रह का वीडियोग्राफी। ♦

न्यायालय के आदेश पर,
ज्ञानवापी परिसर का सर्वे।
सीनियर डिवीजन सिविल,
जज रवि कुमार दिवाकर।

वीडियो ग्राफी के आदेश में,
कमीशन कार्रवाई सीमा तक।
अदालत ने कहा कमीशन,
कार्रवाई आदेश हमने दिया है।

श्रृंगार गौरी और देव विग्रह से,
सबूत सुरक्षित रखा जाएगा।
काशी के ज्ञानवापी मस्जिद में,
देवताओं के साक्ष संकलित होंगे।

अंजुमन इंतजा मियां का कहना,
मस्जिद! गैर मुस्लिम घुसने न देंगे।
अधिवक्ता आयुक्त कमीशन,
10 मई को रिपोर्ट दाखिल करें।

6 मई 2022 को दोनों पक्षों को,
कमीशन कार्रवाई सूचित किया।
अधिवक्ता आयुक्त साक्ष को,
सुरक्षित स्थान पर उसे रखेंगे।

मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र में,
फोर्स मौके पर एलर्ट जारी है।
भीड़ – भाड़ रोकने के लिए,
पूरा इंतजाम यहां किया गया।

कानून व्यवस्था को प्रभावित,
करने वालों पर सख्ती होगी।
जनता से शांति बनाने के लिए,
पुलिस अपील कर रही दिखी।

सुप्रीम कोर्ट आदेश पालन में,
माइक रिपोर्ट हाईकोर्ट रद्द किया।
विश्व में बढे प्रदूषण नियंत्रण –
न्यायालय ने निज आदेश दे दिया।

प्राचीन विश्वनाथ के अवशेषों को,
एकत्रित सबकुछ किया जाएगा।
मंदिर के उत्तर पश्चिम दिशा में,
दूर-दूर तक जबकि बने बंकर है।

दक्षिण दिशा में भी मंदिर के,
सड़क पार वर्ग विशेष के बंकर है।
पुलिस आयुक्त के निगाह ने,
जुड़ा नहीं सुरक्षा के अंदर है।

अधिकांश लोगों से बात करने पर,
उनको कोई आपत्ति नहीं बताया।
धर्म के ठेकेदारों ने ही केवल,
इस आदेश का विरोध जताया है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — 6 मई 2022 को दोनों पक्षों को कमीशन कार्रवाई सूचित किया। अधिवक्ता आयुक्त साक्ष को सुरक्षित स्थान पर उसे रखेंगे। प्रश्न हमारा यह है मुस्लिम संप्रदाय से की अगर काशी के ज्ञानवापी मस्जिद में कुछ भी गलत नहीं है तो फिर ये आपत्ति क्यों? आखिर क्या छिपाने की कोशिश कर रहे है ये? इनको तो खुश होना चाहिए, की सत्य बाहर आ रहा हैं। जो सत्य है उसे तो बाहर आना ही चाहिए। वह डर रहे है की प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती हैं। उनके डर का मुख्य कारण यही हैं। सत्य तो बाहर आएगा ही चाहे ये लाख कोशिश कर ले, विरोध करने की या रोकने की। सभी को शांतिपूर्ण तरीके से कोर्ट की कारवाही को होने देना चाहिए।

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