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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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समय पर कविता

समय।

Kmsraj51 की कलम से…..

Time | समय।

समय पर कविता: जीवन का सबसे कीमती खज़ाना – एक प्रेरणादायक हिंदी कविता

समय — जो हर किसी के जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक है। यह किसी के लिए नहीं रुकता, न धनवान के लिए, न निर्धन के लिए। जो इसे पहचान लेता है, वही सफलता की राह पर आगे बढ़ता है, और जो इसे व्यर्थ गंवा देता है, वह पछतावे में जीवन बिताता है। प्रस्तुत है एक भावनात्मक और प्रेरणादायक कविता जो हमें याद दिलाती है कि हर पल अनमोल है, और इसे संजोना ही जीवन की सच्ची साधना है।

पल पल बीतता जाए
ये समय है कभी किसी
के बस में न आए।

न कोई अपना न कोई पराया
जिसने अपना समझा वही
वश में कर पाया।

दिन रात चलता रहता
कभी किसी का इंतजार
नहीं करता।

कब सुबह हुई कब हो गई शाम
ये समय है इसके नहीं चुका
पाएंगें दाम।

धनी निर्धन का नहीं
कोई मलाल
धनी वही जिसने लिया
इसे सम्भाल।

कब पैदा हुए, कब हुए जवान
कब जवानी ढली
कब आया बुढ़ापा
चेत नहीं पाया इंसान।

पछतावे बिन नहीं कोई
विकल्प
व्यर्थ न गंवाएं,लें
आज ही ये संकल्प।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • Conclusion : “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — समय एक ऐसी धारा है जो कभी रुकती नहीं — यह निरंतर आगे बढ़ती रहती है। यह हमें अवसर भी देती है और परीक्षा भी लेती है। जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है, वह जीवन में हर मुकाम हासिल कर सकता है। इस कविता का सार यही है कि हर क्षण का सदुपयोग करें, वर्तमान को जीएं और भविष्य को बेहतर बनाएं।

    याद रखें — “समय को जीतने वाला ही सच्चा विजेता होता है।”

—————

यह कविता (समय।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्रीमती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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Note:-

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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दौर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Daur | दौर।

वो छब्बीस थी,
और अब इंतजार सताईस का था।
वो दौर मौज मस्ती का था,
और अब ये दौर ज़ोर अजमाइश का था।

कहतें है इंतजार का फल मीठा होता है,
जो होता है वो ठीक ही होता है।
दिल यहां से जाने को भी नही कर रहा है,
पर एक वो भी है जो हमें बुला रहा है।

वो दौर अपनी मन मर्जी का था,
जब दो को वहां जाना हुआ था।
ये दौर उत्सुकता वाला है,
जब एक को यहां आना हुआ है।

ये दौर – दौर की बात है,
हर दौर का अपना मज़ा है।
हम हर दौर को गौर से जीते हैं,
बस यूं समझिए हम वो है जो,
पानी को भी अमृत समझ के पीते हैं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जीवन के हर दौर में उतार-चढ़ाव आते रहते है, जब शरीर ऊर्जावान हो, तब सिर्फ सोचते ही न रहे, अच्छे कार्य करते रहे। उतावलेपन में कभी भी गलत कार्य ना करे। “कहतें है इंतजार का फल मीठा होता है” अगर आपके कर्म अच्छे है तो देर से ही सही आपको शांतिमय ख़ुशी मिलेगी। एक बात याद रखें की कोई भी दौर सदैव नही रहेगा, दौर बदलते रहेंगे, इसलिए कभी भी चिंतित व निराश होकर बैठ ना जाना, रुक ना जाना। जय माता दी!

—————

यह कविता (दौर।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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“मातृ दिवस” – ममता की माँ सूरत…।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ ममता की माँ सूरत…। ϒ

⇒ Mother Nature of Mamta.

🙂 “मातृ दिवस” – ममता की माँ सूरत…।

माँ! माँ है माँ होती।
ममता की माँ सूरत।
धरा पर माँ एक सूरज।
खुद ही है माँ पलती।
बच्चा भी है पालती॥

बच्चे को वह सुधारती।
गर्भ में धारण करती।
बच्चा संवार कर रखती।
निज रक्त मज्जा -पालती।
स्तन के दूध पिलाती॥

हल्राती -दुलराती,
है प्यार उसे दिखाती।
वह साथ में सुलाती।
रात भर जाग बिताती,
विस्तार गीले रह जाती॥

खुद भूखे रहकर भी –
बच्चे को दूध पिलाती।
सूखे बिस्तर – लिटाती।
माँ – माँ ही कहलाती
मजदूरी भले कर लाती॥

नन्हकी – नन्हका खिलाती।
देती मति – मतिमान।
मगण – मगज पिरोती।
मगन मन ही मन होती।
मखतूली – पहनाती॥

‘मंगल’ भावना भारती।
बच्चे को भाति दुलराती।
माँ! माँ है माँ होती।
ममता की माँ सूरत।
धरा पर माँ एक सूरज॥

शब्दार्थ:- मति-बुद्धि | मतिमान- बुद्धिमान | मगण – चालाकी | मगज- दिमाग | मखतूली-काले रेशम का धागा |

शुभकामनाओं के साथ।

∇ सुखमंगल सिंह – ♥
——♦——
सुखमंगल सिंह जी।
हम दिल से आभारी हैं सुखमंगल सिंह जी के प्रेरणादायक कविता (“मातृ दिवस” – ममता की माँ सूरत…।) हिन्दी में Share करने के लिए।

सुखमंगल सिंह जी के लिए मेरे विचार:

♣ “सुखमंगल सिंह जी” ने कविता के माध्यम से मां के गुणाें, त्याग और पालना का खुले मन से वर्णन किया हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविता छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविता काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

  • हिंदी कहानी – निरंतर प्रयास जरूर पढ़े।
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In English

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लहरें गायेंगी…।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ लहरें गायेंगी…। ϒ

⇒ Waves Gayengi ?

🙂 “लहरें गायेंगी”…।

लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे।
देखो दुनिया वालों मिलकर तारे रहते ‘
रहते हैं आकाश में पर सारे रहते॥

मिल जुलकर अपनों में खुशी मनाते,
देखा रहा मानव फिर भी भरम खाते।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

जानवर भी मिलकर एक किनारे रहते,
पर इंसान झगड़ते लड़ते मरते रहते।
इंसानों को डर है लुट जाने का लेकिन,
लेकिन वे सब मस्त पड़े पहलवानों जैसे॥

यहाँ सभी धरती के अपराधी पर मानव,
दूर कहीं पर रोता मजहब बनकर दानव।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

हवा भी दूषित और प्रदूषित हो गयी,
एक कलंकित नागिन कल ही सबको छू गयी।
जब आज की नारी पर हमला होता है,
दूर कोई मजहब कोना पकडे रोता है॥

भाई – भाई को जाने क्या हो गया है,
सारा पुराना नाता जाने क्यों खो गया है।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

अपने देश को बोलो क्या हो गया है,
अपने-अपने मजहब मेंही सबकुछ खो गया है।
इसे भी कोई परिंदा नहीं बताने वाला है,
भाइयों में जंग नया होने वाला है॥

रोज सबेरे निकल रहा जनाजा प्यार का,
क्या होगा अब अपने इस संसार का।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

इंसानों ने कितनों का सम्मान छीना है,
हैवानों सा बहनों पर कहर दीना है।
वह भी एक समय था भाई-भाई प्यार,
रोता है आज देखकर समय सारा संसार॥

उन इंसानों ने अपनी जान गंवाई,
लेकिन बहनों की लड़कर जान बचाई।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

शुभकामनाओं के साथ।

∇ सुखमंगल सिंह – ♥
——♦——
सुखमंगल सिंह जी।
हम दिल से आभारी हैं सुखमंगल सिंह जी के प्रेरणादायक कविता (लहरें गायेंगी।) हिन्दी में Share करने के लिए।

सुखमंगल सिंह जी के लिए मेरे विचार:

♣ “सुखमंगल सिंह जी” ने कविता के माध्यम से वर्तमान समय में मनुष्यों के मन में हाेने वाले नाेक-झाेक का खुले मन से वर्णन किया हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविता छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविता काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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समय की कीमत समझाते…।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ समय की कीमत समझाते…। ϒ

⇒ Explain the value of time

“जूनियरहाईस्कूल की शिक्षा”
‘मंगल ‘गुरुओं की बात बताते।

आप बीती जो सो कह जाते।
नैतिकता का गुर सिखाते।
पीने खाने की बात बताते।
पढ़ना लिखना समझाते।
समय की कीमत समझाते॥

शिक्षा-शिक्षित की चाह बढाते।
आगे बढ़ने की राह दिखाते।
खेती-बारी करना सिखाते।
समय की कीमत समझाते॥

साथ हाथ मिलना बताते।
बाएं-दायें चलना सिखाते।
पढ़ाई अच्छी पढ़ाते।
समय की कीमत को समझाते॥

साहित्य और सन्देश दे जाते।
कविता -आलेख -महत्व बताते।
धैर्य-धर्म की मर्यादा सिखाते।
समय की कीमत समझाते॥

धरम की महत्ता बताते।
कीमत कर्म की समझाते।
मानवता क पाठ पढ़ाते।
समय की कीमत समझाते॥

प्रथम गुरु ,गुरु नाम बताते।
मातु-पिता क प्यार समझाते।
गुरुओं ने ज्ञान सिखाते।
समय की कीमत समझाते॥

सार्थ -सारथि में मेल कराते।
पुस्तकीय भी पाठ रटाते।
सद्भावना का ज्ञान सुनाते।
समय की कीमत समझाते॥

व्याकरणिक ज्ञान कराते।
वीरों की गाथा थे गाते।
महिलाओं के मान बढाते।
समय की कीमत समझाते॥

पुस्तकीय प्रेम करना बताते।
समाज में रहना सिखाते।
गावं क भी महत्व बताते।
समय की कीमत समझाते॥

मालिक-मजदूर के प्रेम बताते।
त्योहारों की खुशियाँ समझाते।
दान-दक्षिणा का मान बताते।
समय की कीमत समझाते॥

प्रार्थना की महत्ता बताते।
प्रकृति सत्ता समझाते।
भेद- भाव सुदूर भगाते।
समय की कीमत समझाते॥

भाग्य कर्म से बनता बताते।
धर्म से जीवन सुखमय सिखाते।
ज्ञान से समाज निर्माण बताते।
समय की कीमत समझाते॥

सुबह -सुबह उठना बताते।
भोरहरियय निपटना कह जाते।
नहा धोकर पढ़ना समझाते।
समय की कीमत समझाते॥

जनगण मन का पाठ पढाते।
वन्देमातरम का महत्व बताते।
राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा लहराते।
समय की कीमत समझाते॥

प्रेयर में जो पाठ पढ़ाते।
प्रभु से विनती करना सिखाते।
ज्ञान का दान प्रभु से मंगवाते।
समय की कीमत समझाते॥

प्रभु शरणम का पाठ पढ़ाते।
ईश्वर कृपा हेतु कह जाते।
दानी -विज्ञानी सीख सिखाते।
समय की कीमत समझाते॥

ब्रह्मचर्य कत पाठ पढ़ाते।
सुशिक्षा का ज्ञान कराते।
मुंडन -उपनयन महत्व बताते।
समय की कीमत समझाते॥

पाप -पुन्य भेद समझाते।
सेना -योद्धा के पाठ पढ़ाते।
न्याय,दण्ड-विधान बताते।
समय की कीमत समझाते॥

धन-दौलत उपयोग सिखाते।
विविध व्यापार गुर बताते।
समृद्धि एश्वर्य का भान कराते।
समय की कीमत समझाते॥

सद्गुण और पुरुषार्थ समझाते।
उन्नति शान्ति का मार्ग बताते।
यदाकदा माया से दूर ले जाते।
समय की कीमत समझाते॥

दीर्घायु होने का पाठ पढ़ाते।
आयुर्वेद का ज्ञान कराते।
शक्ति -बल का मर्म बताते।
समय की कीमत समझाते॥

पशु -प्राण रक्षा ज्ञान समझाते।
जल – पृथ्वी का महत्व बताते।
कृषि विज्ञान की शक्ति समझाते।
समय की कीमत बतलाते॥

लेखन कला -सभ्यता सिखाते।
योग – तप का पाठ पढ़ाते।
जीवन- मृत्यु का कह जाते।
समय की कीमत समझाते॥

आस्तिक-नास्तिक – भेद सुनाते।
राजा – प्रजा का कर्म बताते।
युद्धकला की विधि सिखाते।
समय की कीमत समझाते॥

सूर्य – सोम का प्रभाव सुनाते।
अग्नि- वायु के महत्व बताते।
सत्य -अहिंसा का राज बताते।
समय की कीमत समझाते॥

शुभकामनाओं के साथ।

∇ सुखमंगल सिंह – ♥
——♦——
सुखमंगल सिंह जी।
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सुखमंगल सिंह जी के लिए मेरे विचार:

♣ “सुखमंगल सिंह जी” की कविता के हर एक शब्द में समय की कीमत का अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविता छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविता काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

  • हिंदी कहानी – निरंतर प्रयास जरूर पढ़े।
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of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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