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सुशीला देवी की कविताएं

गाओ रे शुभ मंगल गीत रे!

Kmsraj51 की कलम से…..

Gao Re Shubh Mangal Geet Re | गाओ रे शुभ मंगल गीत रे!

सावन माह में गाओ मिलकर शुभमंगल गीत रे…।
भारतीय वैज्ञानिक कर आए चांद पर जीत रे…॥

पावन माह अगस्त की पावन तिथि तेईस बनी गवाह।
चंद्रयान 3 की सफलता से हर दिल ने किया वाह – वाह॥

हो गई है इसरो में इन भारतीयों की जश्न की जीत रे…।
भारत माता के लाल निभा आए रिश्तों की प्रीत रे…॥

चांद के दक्षिणी छोर पर ज्यों ही तिरंगा लहराने लगा।
हर हाथ देकर सलामी खुशी से हर दिल मुस्कराने लगा॥

चंद्रयान ने पद~चिन्हों को इस कदर चंद्रसतह पर अंकित किया।
जैसे हर भारतवासी ने — सौ वर्ष की उम्र को हो जिया॥

भारत माता के गौरव को वैज्ञानिकों ने चार चांद लगा दिए।
बिन दिवाली के ही जलने लगे घर~घर खुशी के दीए॥

विश्व में भारतीयों ने एक नया रच ही डाला इतिहास।
6:04 मिनट के पल को बना ही दिया बिलकुल खास॥

आज हर उस शख्सियत को भारतीयों का हार्दिक नमन।
जिनके अथक परिश्रम से धरती मां का चंदा मामा से हुआ मिलन॥

उन पांच की कार्यकारिणी ने विजयी विश्व का तिरंगा लहराया।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के विश्व गुरु होने का परचम छपवाया॥

बधाई गाओ रे… मंगल गीत की… चंद्र जीत की…।
भारतमाता और चंदा मामा के प्रीत की बधाई गाओ रे…॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अगस्त माह की पावन तिथि 23 को 6:04 मिनट के पल को बना ही दिया बिलकुल खास, विश्व में भारतीयों ने एक नया रच ही डाला इतिहास। चांद की दक्षिणी छोर पर तिरंगे की लहराने की तस्वीर जब दिखाई दी, जिससे हर भारतीय के दिल में गर्व और खुशी की भावना उत्तेजित होती है। चंद्रयान-3 ने चंद्रसतह पर पद-चिन्हों को अंकित करके यह संकेत दिया कि भारतवासियों ने भी विजय की उम्र जी ली है, जैसे उन्होंने सौ वर्ष की उम्र को जी लिया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के माध्यम से भारत माता की गरिमा को बढ़ावा दिया है और घर-घर में खुशियों के दीप जलने लगे हैं। इस कविता में चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के साथ-साथ भारतीय वैज्ञानिकों की मेहनत, उनके संघर्ष और उनके योगदान का सम्मान किया गया है। वे पांच कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा नेतृत्व किये गए हैं जिन्होंने भारत की महत्वपूर्ण स्थिति को दुनिया में प्रमोट किया है। इसके साथ ही, विश्व में भारतीय वैज्ञानिकों की गरिमा को बढ़ावा देने का यह एक महत्वपूर्ण कदम है। कविता के अंत में, सभी को चंद्रमा के प्रति जीत की बधाई देने की आवश्यकता है, और सबको इस उपलक्ष्य में गाने की आवश्यकता है। चंद्रमा की जीत की ओर एक मंगल गीत के रूप में सबको उत्साहित किया गया है, ताकि वे अपने योगदान से भारत की महत्वपूर्णता को और भी ऊंचाईयों तक पहुँचा सकें। आज हर उस शख्सियत को भारतीयों का हार्दिक नमन:, जिनके अथक परिश्रम से धरती मां का चंदा मामा से हुआ मिलन।

—————

यह कविता (गाओ रे शुभ मंगल गीत रे!) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हरियाली तीज।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hariyali Teej | हरियाली तीज।

माह श्रावण, शुक्ल पक्ष की तृतीया को पर्व हरियाली तीज आया।
अंकुर फूटेंगे अब तो हरे-भरे पौधों के, इसने सुप्त बीजों को जगाया।

आओं जानें, ये हरियाली तीज क्यूँ कहलाये।
यही तो आकर, सब त्योहारों के बीज बिखेर जायें।

फिर प्रकृति ओढ़ ले, धानी चुनरिया बहार की।
महिलाओं के मयूर मन नाचें, खुमारी छाए प्यार की।

माँ पार्वती-शिवजी की आराधना कर, सुहागिनें व्रत करती हैं।
मांग में सुहाग की लंबी उम्र, सौभाग्यवती का सिंदूर भरती हैं।

तन पुलकित, मन आनंदित, ए तीज! आने पर तेरे।
आ अब लगा दे सुहागिनों की मेहंदी, हाथों के मुहाने पर मेरे।

सावन के आते ही, तेरे आने को सब बाट निहारें।
इस रुत पिया बोले, बस हम तो है तुम्हारें।

हरी-भरी कांच की चूड़ियाँ सज आयें, अब इन कलाइयों में।
लाकर कोथली बढ़ आएँ, प्यार बहन-भाइयों में।

शाखाओं पर पड़े झूलें भी, झूम-झूम कर गुहार लगाये।
ए हरियाली तीज! तेरे आगमन से चहुँ ओर, प्रीत-प्यार ही समाये।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माँ पार्वती-शिवजी की आराधना कर, सुहागिनें व्रत करती हैं। मांग में सुहाग की लंबी उम्र, सौभाग्यवती का सिंदूर भरती हैं। तन पुलकित, मन आनंदित, ए तीज! आने पर तेरे। आ अब लगा दे सुहागिनों की मेहंदी, हाथों के मुहाने पर मेरे। हरियाली तीज, एक प्रमुख हिन्दू त्योहार, जो प्रायः श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य पतिव्रता सुधा की भक्ति और पतिव्रता धर्म का पालन करना होता है। हरियाली तीज का नाम इसकी हरा-भरा प्राकृतिक आवाज के आधारित होता है, जिसमें पर्यावरण की हरियाली का आभास होता है। इस दिन महिलाएं हरिद्वार, गंगा तट, उत्तराखंड के मंदिरों में जाती हैं और गंगाजल से स्नान करती हैं। महिलाएं सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं और विशेष रूप से तरह-तरह की गायन, नृत्य और खेल-कूद के आयोजन करती हैं। हरियाली तीज का आयोजन खुशियों और उत्साह के साथ होता है, जहां महिलाएं हरियाली रंगीन वस्त्र पहनती हैं और खुशी के गीत गाती हैं। इस त्योहार का एक और महत्वपूर्ण पहलू बरसाती ऋतु के आगमन की सूचना देना है, जिससे किसान वर्ग अपनी खेती की तैयारियों में लग जाते हैं। समग्र रूप से, हरियाली तीज एक उत्सवपूर्ण और धार्मिक त्योहार है, जो महिलाओं को शक्ति, समर्पण और पतिव्रता धर्म के माध्यम से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

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यह कविता (हरियाली तीज।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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राष्ट्र प्रेम।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rashtra Prem | राष्ट्र प्रेम।

सच्चा प्रेम-भाव ही देश के प्रति, राष्ट्र-प्रेम कहलायें,
जब तेरे कर्मों से, देश की उन्नति एक कदम अग्रसर हो जायें।

बना लीजिए देश-भक्ति को अपने ह्रदय का दर्पण,
सच्चा भाव, भारत-माता के चरणों में कर दो अर्पण।

माना महान देशभक्त, शहीद, शूरवीर न कहला पायें हम,
पर उनके रास्ते की धूल तो, बन जाये हम।

तुम्हारा हर नेक भाव, सदकर्म ही राष्ट्र-भक्ति बन जाएं।
जब बूँद पड़े समुन्द्र में, तो सागर ही कहलाये।

क्षेत्र चाहे जो भी चुनों, बशर्ते भारत – माँ हमें तो तेरी शान बढ़ानी है,
तेरी शौहरत, शौर्य का रुतबा बुलंद हो, बस वही तेरे नाम की मधुर तान सुनानी है।

कलम की ताकत ने तो, सदैव ही अपना जलवा दिखाया इस जग में,
लेखनी से ह्रदय-पटल पर छप कर, समा जाए रग-रग में।

लेखनी से हम विश्व-बंधुत्व को कायम रखने में एक कदम आगे बढ़ाए,
कलम से लोगों के ह्रदय-पटल पर अंकित हो ऐसा, जो भारत-माता के प्रेम को ही दर्शाए।

समय आ गया, उजागर कर दो अब, अपने राष्ट्र-प्रेम के भावों को,
कुछ छाप छोड़े ऐसी कि आने वाली पीढ़ी भी, प्यार करें उन राहों को।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — राष्ट्र प्रेम हमें अपने देश के प्रति अपनाए गए गहरे स्नेह और समर्पण की महत्वपूर्णता को समझाता है। यह हमें याद दिलाता है कि हमें अपने देश के उच्चतम हित को सर्वोपरि रखना चाहिए और समृद्धि और सामर्थ्य के साथ उसके विकास में योगदान करना चाहिए। राष्ट्र प्रेम और स्वतंत्रता दिवस हमें एक मजबूत, एकता में बँधने वाले और स्वतंत्र भारत की दिशा में प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। यह दिन देशभक्ति और राष्ट्रीय गर्व की भावना को महसूस कराता है और लोग विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों ने कितनी संघर्षशीलता और बलिदान के बाद हमें आजादी दिलाई थी। राष्ट्र प्रेम और स्वतंत्रता दिवस भारतीय जनता के लिए महत्वपूर्ण और गर्व की बात है।

—————

यह कविता (राष्ट्र प्रेम।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: 15 august poetry in hindi, 15 अगस्त पर कविता : राष्ट्र प्रेम, 15 अगस्त पर देशभक्ति कविता, sushila devi, sushila devi poems, कवयित्री सुशीला देवी की कविताएं, देशभक्ति कविता, बच्चों के लिए स्वतंत्रता दिवस पर आसान कविताएं व गीत, राष्ट्र प्रेम, राष्ट्र प्रेम - सुशीला देवी, सुशीला देवी, सुशीला देवी की कविताएं, स्वतंत्रता दिवस पर कविता हिंदी में

डिजिटल जमाना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Digital Era | डिजिटल जमाना।

अब डिजिटल जमाना हो गया,
सब कुछ फोन में ही खो गया।

सुबह से शाम तक, दिन से रात तक,
चाय की चुस्की से लेकर,
रात के खाने की बात तक।

अब फोन साथी हमारा प्यारा हो गया,
इसने न जाने कितनों का चैन खोया,
इसे देखते रहने की चाह में दिन-रैन रोया।

क्या करे, हम सब की एक मजबूरी,
फोन से ही सारे काम आसान हो गये,
माना कि फोन बहुत ही जरूरी है।

इसके बिना जिन्दगी अधूरी है,
पर इसको अपनी उँगलियों पर नचाना है।

बनानी इक दूरी है, क्योंकि…
अधिकता हर चीज की बुरी है।

समय की जरूरत है,
चलना है समय के साथ,
पर इसके इशारों पर चले,
ना बाँधों इतने, अपने हाथ।

सोचो इसके साथ रहते हमने,
कितना खोया, कितना पाया है।

फोन की तलब लगी इतनी,
फोन हमें किस मोड़ पर ले आया है।

अब डिजिटल जमाना हो गया,
सब कुछ फोन में ही खो गया।

फन्नी वीडियो देखकर,
अब हँसी नहीं, चिंता होती है।

फोन के साथ रहते,
दूसरे कामों की क्या दुर्दशा होती है।

माँ फोन करती-2 जब,
अपने बच्चे को ही उल्टा
लटका कर पकड़ती है।

अब सोचो! मंथन करो,
उस मासूम बच्चे की
जुबां से क्या दुआ निकलती है।

न खाने-पीने की,
ना जागने सोने की खबर।

जहाँ देखों वही पर,
इसके ज्यादा दुष्प्रभावों की नजर।

हाय रे !
डिजीटल होने की दौड़ ने,
हमें कहाँ लाकर छोड़ा है।

नांदान बच्चे सीखें ना जाने क्या क्या,
इसके अच्छे गुणों से मुँह मोड़ा हैं।

अंत में रखना ध्यान इक छोटी सी बात,
चाहें फोन का दिन-रात रखो साथ।

इसमें कभी इतना ना होना व्यस्त,
कि छूट जाएँ अनमोल रिश्तों का हाथ।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आधुनिकता और डिजिटल उपकरण, स्मार्टफोन इत्यादि का उपयोग अच्छे कार्यों के लिए ही करें, याद रखें — डिजिटल उपकरण के कही आप या आपके बच्चें गुलाम ना बन जाए। माना की डिजिटल उपकरण, स्मार्टफोन इत्यादि जरुरी है लेकिन इनका दुरुपयोग करना ठीक नहीं है। सोचने और जानने की शक्ति प्रभावित करता है स्मार्टफोन, बच्चों में किसी चीज़ को सीखने की ललक बहुत ज्यादा होती है, तो अधिक जिज्ञासा के कारण वह गलत चीज़ें भी सीख सकते हैं। इसके अलावा मेंटल हेल्थ पर भी नकारात्मक प्रभाव होता है अवसाद, नींद पूरी न होना जैसी समस्या होती है। बच्चें मोबाइल का प्रयोग जितना कम समय के लिए करेंगे उतना बेहतर है। स्मार्टफोन के प्रयोग से आजकल के बच्चें ज्यादा गुस्से वाले व चिड़चिड़े हो गए है।

—————

यह कविता (डिजिटल जमाना।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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निर्जीव से मोह।

Kmsraj51 की कलम से…..

Nirjeev Se Moh | निर्जीव से मोह।

समय की जरूरतों के हिसाब से,
एक निर्जीव चीज ने हर घर में,
प्रवेश ले लिया।

कुछ न होते हुए भी वो,
वो सब कुछ बन गया वो,
ऐसा मोहपाश दे दिया।

खा गया जो लोगों की भूख – प्यास,
अपनों से मिलने का प्यारा अहसास,
खुद से रिश्ता खास दे गया।

अखबार की उस खबर ने खो दिया होश,
जिसमें प्यारी बहना को भाई ने भर कर जोश,
मौत का ग्रास दे गया।

ये यंत्र जो आजकल की दुनिया पर हुआ भारी,
हर व्यक्ति को लगी इसकी भयानक बीमारी,
अपना नाम हर श्वास पर दे गया।

माना कि आधुनिकता की दौड़ में,
जरुरत इसकी जिंदगी के हर मोड़ पे,
ऐसा ये जोकर का ताश दे गया।

हम सजीवों पर क्यों हो रहा है इसका पहरा,
क्यों ज्यादा वक्त दिल निर्जीव मोबाइल पर ही ठहरा,
ये तन~मन का नाश दे गया।

निर्जीव को निर्जीव ही रहने दे हम,
प्यार सजीव रिश्तों से होने न पाए कम,
सजीवो से प्रेम ही जीने की आस दे गया।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जो जिवंत (सजीव) है प्यार उससे कभी भी कम ना हो ऐसा आदत होना चाहिए सदैव ही हम सबका। निर्जीव से मोह ठीक नही है, निर्जीव का उपयोग मात्र जरूरत तक ही सीमित रखें, निर्जीव के गुलाम ना बन जाये। आधुनिक युग में किसी भी टेक्नोलॉजी का उपयोग केवल अच्छे कार्य को करने के लिए करे। उसका कभी भी शैतानो की तरह दुरुपयोग ना करो। याद रखें – हर निर्जीव वस्तु के फायदे है तो उनसे नुकसान भी है, आप केवल फायदे के लिए सही तरीके से उपयोग करें, उसके गुलाम बनकर शैतान की तरह काम मत करो। इन निर्जीव वस्तुओं की वजह से आपसी प्रेम कम ना हो।

—————

यह कविता (निर्जीव से मोह।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद।

Kmsraj51 की कलम से…..

Novel Samrat Munshi Premchand | उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद।

हिंदी और उर्दू के महानतम,
भारतीय लेखकों में, जिसने,
हिंदी साहित्य का प्रकाश फैलाया।
नमन मुंशी प्रेमचंद जी को,
जिनका नाम इस लेखनी में,
उच्च शिखर पर आया।

लेखनी में अपनी जिसने,
एक आम आदमी के,
हर वर्ग के दुखों को समेटा।
हर दृष्टि से पारिवारिक, सामाजिक,
राजनैतिक पहलुओं को साहित्य में लपेटा।

लेखक प्रेमचंद अपनी कथाओं,
कहानियों में खुद ही पात्र बनाए।
तभी आज भी वो अपनी कथा,
कहानियों में जीवंत नजर आए।

दलित, किसानों, गरीबों का,
लेखक मसीहा बनकर आए।
कल्पना नहीं कोई, सीधे ही,
दिल की भावनाओं से जुड़ जाये।

साहित्य में मुंशी प्रेमचंद ने,
हिंदी और उर्दू की पताका है लहराई।
लोकनाट्य व नौटंकी को दोबारा,
स्थापित करने में अहम भूमिका है निभाई।

वो तो आधुनिक हिंदी,
कहानी के पितामह कहलाये।
अपनी लेखनी से, उपन्यास सम्राट,
की उपाधि से सज आये।

साहित्य के मील का पत्थर भी,
महान सम्राट प्रेमचंद जी कहलाये।
उनको शत-शत नमन करके,
आओं, हम उनके साहित्य मील का,
एक सूक्ष्म कंकड़ ही बन जाये।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्रेमचंद का जन्म वाराणसी के निकट, लमही नाम के गांव में 31 जुलाई, 1880 को हुआ था। प्रेमचंद के पिताजी मुंशी अजायब लाल और माता आनन्दी देवी थी। मुंशी प्रेमचंद जी का मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। इन्होंने अपने प्रिय मित्र मुंशी दयानारायण निगम के सुझाव पर अपना नाम धनपतराय की जगह प्रेमचंद रखा और इसी नाम से कहानियों और उपन्यासों के रूप में अपने विचारों और भावों को अभिव्यक्ति दी। उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी, दो बैलों की कथा आदि तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। उनमें से अधिकांश हिन्दी तथा उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं। प्रेमचंद को मुंशी प्रेमचंद के नाम से जाना जाता है जो कि एक सचेत नागरिक, संवेदनशील लेखक और सकुशल प्रवक्ता थे।

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यह कविता (उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
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  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
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  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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हे भोले सुनो पुकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hey Bhole Suno Pukaar | हे भोले सुनो पुकार।

तेरा सावन का महीना जैसे ही आया।
मेघों ने खूब जम के जल बरसाया॥

तेरे भक्त चले शिवलिंग का जल लाने।
तुझे हर्षित कर तेरे आशीष को पाने॥

माना की बंधी है गंगा जटाओं में तेरी।
पर काल ने न जाने कैसी माला है फेरी॥

चहुँ ओर हो रहा है सब कुछ जल मगन।
केवल सताए एक जीवन जीने की लगन॥

लगे ऐसा जैसे तुमने जटाओं को हो खोला।
जैसे भक्ति को कलयुग में शायद हो तोला॥

सावन में पानी ने इस कदर नहीं की थी मनमानी।
जुबां कहे न आंखों के आंसू, कहे दर्द की जुबानी॥

हे भोले भंडारी!
समा लो अपनी जटाओं में इस पानी की लीला को।
माफ कर देना इंसान के गुनाहों के हर गिला को॥

पानी के तांडव को रोक लो कोई जीवन राग गाकर।
डमरू की तान पर मोहक अपना नृत्य दिखाकर॥

अभिषेक तो तेरे शिवलिंग पर प्रकृति ने सर्वप्रथम किया।
सावन आते ही जो इतना जल, जो धरा पर बरसा दिया॥

हे महादेव!
उसी जलाभिषेक को स्वीकार सुंदर सावन दे दो माह।
खुशी में बदल जाए पानी से त्रस्त दिलों की आह॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सावन के महीने को भगवान शिव की भक्ति का भी महीना कहते हैं। यह ग्रीष्म ऋतु के बाद आता है और लोगों को गर्मी के कहर से राहत देता है। सावन के महीने में बहुत बरसात होती है जिससे मौसम सुहावना हो जाता है। सावन माह में भोले के भक्ति में डूबकर, शिवलिंग पर “जल अभिषेक” करना बड़े ही पुण्य का कर्म है। मौसम सुहावना हो तो लोग ऐसे ही वक्त पर अपने परिवार के साथ बाहर घूमते हैं और सावन के खुशनुमा मौसम का आनंद लेते हैं।

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यह कविता (हे भोले सुनो पुकार।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
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  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
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  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
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  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
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  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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वो माँ ही तो है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vo Maa Hi Toh Hai | वो माँ ही तो है।

लाती जो अपने सन्तान की होठों पर मुस्कान है।
माँ की ममता में मुस्कराता ये जहान है।
वो माँ ही तो है॥

खुद गीले में सोकर बच्चें को सूखा देती बिछोना।
जिसको कभी पसंद न आये अपने बच्चों का रोना।
वो माँ ही तो है॥

संतान की खातिर टकरा जाए जो भगवान से।
सुखों का कोहिनूर ढूंढ लाये हीरों की खान से।
वो माँ ही तो है॥

जिसके आंचल का साया पाना चाहे भगवान भी।
जिसकी गोद में खेलने का रखे अरमान भी।
वो माँ ही तो है॥

जिसके त्याग, तप से ब्रह्मांड भी गुंजायमान है।
जिसकी ममता के आगे तो झुकता भी भगवान है।
वो माँ ही तो है॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माँ से ही इस संसार का अस्तित्व है। माँ को धन्यवाद देने और आदर के लिये हर साल 5 मई को मातृ दिवस के रुप में मनाया जाता है। माँ वह है जो हमें जन्म देती है, यहीं कारण है कि संसार में हर जीवनदायनी वस्तु को माँ की संज्ञा दी गयी है। यदि हमारे जीवन के शुरुआती समय में कोई हमारे सुख-दुख में हमारा सदैव ही ध्यान रखती है तो वो माँ ही तो है। मां हमारा पालन-पोषण करके हमें सक्षम बनाती है, हमारे शरीर को बल देती है जिससे हम अपने भविष्य को संवारने की क्षमता प्राप्त करते हैं। जब कभी हम उदास और हतास होते हैं तो मां ब्रह्मांड की उस ऊर्जा की तरह काम करती है जो प्रत्यक्ष रूप से हमारे अंदर आकर बस तो नहीं सकती पर हमें ऊर्जावान अवश्य बना देती है। भगवान से भी बढ़कर। माँ वह शक्ति है जिसके गर्भ से स्वयं भगवान भी जन्म लेकर माँ की गोद में खेलना चाहते है। इस संसार में अगर आपसे कोई निस्वार्थ प्रेम करता है तो वो माँ ही तो है। हर बच्चे को सच्चे तन मन से अपने माता – पिता का सदैव आदर, सम्मान व सेवा करनी चाहिए इस धरा पर माता – पिता ही भगवान है इस बात को भूल ना जाए आप सभी। जय माता दी!

—————

यह कविता (वो माँ ही तो है।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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कोहरे का प्रकोप।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कोहरे का प्रकोप। ♦

उत्तरी भारत में सर्दी से मुख ऐसा मोड़ा सुनहरी धूप ने,
ठंडक में ढल गया दिन, रात सिर्फ एक ही रूप में।

अभी कुछ दिन से ही ठंडक ने अहसास कराया,
आसमां से लेकर धरा तक सफेद धुंध की चादर को फैलाया।

सर्दी ने अपना वो रंग कुछ झटके में ही दिखा डाला,
नब्जों में खून ही जमा दिया पड़ा जो धुंध से पाला।

सड़कों पर वाहनों की रफ्तार हो ही जानी चाहिए कम,
फिर इस भागदौड़ की जिंदगी में किसी की आंखें न हो नम।

क्यों रक्तरंजित हो उठी है ये सड़कें इन शहर, नगरों की,
अंधाधुंध वाहनों की चाल से कोई लाल रंग न दिखे डगरों की।

ये इंसान का जीवन तो बहुत ही कीमती बहुत अनमोल,
धीरे – धीरे कदम बढ़ाकर मंजिल की ओर राहें खोल।

वक्त के संग प्रकृति का ये रूप भी बदल ही जायेगा,
गर जल्दबाजी में कुछ खोया तो वो कभी नही पाएगा।

माना कि इस कोहरे ने अपना जम कर पाला है बरसाया,
इसके बरसने से ही तो फसलों ने अपने यौवन को पाया।

जब दूर तलक निगाह न देख पाए तो देखे केवल पास का,
निराशा की किसी भी स्थिति में दामन न छोड़े आस का।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — उत्तर भारत में सर्दी से मुख ऐसा मोड़ा सुनहरी धूप ने की अब ठंडक में ढल गया है पूरा दिन और रात सिर्फ एक ही रूप में महसूस हो रहा। अभी बस कुछ ही दिन से ही ठंडक ने अपना अहसास कराया व आसमां से लेकर धरा तक सफेद धुंध की चादर को फैलाया है। सर्दी ने अपना वो रंग कुछ झटके में ही दिखा डाला, जिससे नब्जों में खून ही जमा दिया पड़ा जो धुंध से अचानक से पाला। कोहरे में सभी वाहन चलाने वालों को रोड़ पर बहुत ही सावधानी से धीमी गति से वाहन चलाना चाहिए, जिससे कोई दुर्घटना न हो। कुछ दिनों तक ज्यादा ठंडक पड़ना भी जरूरी है, कुछ फसलों के अच्छे पैदावार के लिए जैसे – गेहूं की फसल। जब जीवन में दूर-दूर तक नज़र ना आये कुछ तो, भी कभी आस ना छोड़े धीरे-धीरे ही कदम बढ़ाते चले, आगे रास्ता मिलता जायेगा।

—————

यह कविता (कोहरे का प्रकोप।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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माँ तेरी प्रीत निराली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ तेरी प्रीत निराली। ♦

अम्बे माँ, सदैव तेरी ही प्रीत की डोरी से बँधी रहूँ।
तेरे दिव्य अनुपम दर्शनों के अथाह सागर में बहूँ॥

तेरे आशीष के अमृतधारा से, ये प्यास बुझती रहे।
नैनों को तृप्त करने वाली, तेरी सलोनी सूरत सजती रहे॥

माँ, सदैव तेरा ही रूप सजा रहे, मेरे दिल के दर्पण में।
जिन्दगी में सर्वस्व तूही है, परम् आनंद है, तेरा तुझें समर्पण में॥

माँ तुझे और तेरे साकार रूप के चरणों में सब कुछ न्यौछावर।
अर्ज बस यही, ताउम्र इस नाचीज़ को लगाये रखना अपने दर॥

माँ, तेरा दुलार हमें इस कदर दीवाना कर गया।
तेरा प्रेम हमें बस इतना ही मस्ताना कर गया॥

कोई क्या कहेगा, नही होती अब इस बात की फिक्र।
अब हर कर्म में होता, बस एक तेरे नाम का जिक्र॥

जैसे मदमस्त हो, शमां के पास आकर परवाना।
कदम-कदम पर तेरे आशीष के शुकराने में, झूमें दिल मस्ताना॥

तेरी पावन वाणी से आशीष निकले, वो पूरा हो जाता है।
तेरे वरहस्त के वरों से ये जीवन सफल हो जाता है॥

हे जगदाती माँ!
तेरी कृपादृष्टि की छत्रछाया में सदैव हमारा बसेरा हो।
हे जगदाती तेरे नाम की ज्योति से, मेरा हर सवेरा हो॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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