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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Motivational Poetry

फर्क – Difference !!

Happy Anniversary !!
anniversary-1x

kmsraj51 की कलम से …..
9-3-14 kmsraj51

Differenceफर्क

फर्क

आदर्श होना बेहतर है,
बस शर्त ये रहे,
दोहराए जा रहे आदर्श
बल्ली की तरह हों,
भीतर और बाहर से एक जैसे,
ठोस रुप लिए,
जो आदर्श बांस की तरह
खोखले और लचर हैं,
उनकी नियति में
ठठरी की तरह बंधना ही है ।

पुरुषोत्तम होने में कुछ बुरा नहीं
मर्यादा का ख्याल रखने में कुछ ग़लत नहीं,
बुरा है, ग़लत है,
बिना सोचे समझे बस
आज्ञा में सिर हिला देना
फिर चाहे जंगल में भटकना हो
या एक औरत का पांच पुरूषों में बंटना।

शांत चित्त होने में खराबी कुछ नहीं
बस ये फर्क मालूम रहे,
किस जगह पर गाल बढ़ाना है
किस जगह पर हाथ उठाना है
क्रोध भी जीवन का सृष्टा हो सकता है
औऱ शांत मन
एक कदम के फासले पर कायर ।

Note::-
यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है::- kmsraj51@yahoo.in . पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

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Filed Under: 2014 - KMSRAJ51 KI PEN SE ....., Education-शिक्षा !!, Hindi - Quotes, Hindi Poetry, INDIAN NATIONAL, Success, TU NA HO NIRASH KABHI MAN SE ....., तू ना हो Nirash कभी मन से ........, पवित्र 'सकारात्मक सोच' Tagged With: 2014 Top Poetry, Child Poetry, Collection of Hindi Poetry, Difference, father poetry, inspirational kids poetry, kids poetry, kms, Kmsraj51, Krishna Mohan Singh, Motivational Poetry, mrssonkms, mrssonkmsraj51, mrssonkmsraj51 & groups of companis, poetry in hindi, Short Hindi Poetry, word of poetry, फर्क

’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो !!


Happy Anniversary!
anniversary-1x

09-March-2013 to 09-March-2014

http://kmsraj51.wordpress.com/

kmsraj51 की कलम से …..

’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो

अप्रैल माह की सातवीं और अंतिम रचना एक गीत है जिसके रचनाकार निशीथ द्विवेदी की यह हिंद-युग्म पर पहली दस्तक है। अक्टूबर 1979 मे जन्मे निशीथ शाजापुर (म.प्र) से तअल्लुक रखते हैं। निशीथ ने रासायनिक अभियांत्रिकी मे आइ आइ टी रुड़की से बी टेक और आइ आइ टी दिल्ली से एम टेक की उपाधि हासिल की है। कविताकर्म मे रुचि रखने वाले निशीथ सम्प्रति आयुध निर्माणी भंडारा मे कार्यरत हैं।
हम यहाँ माँ विषयक हृदयस्पर्शी कविताएं पहले भी पढ़ते रहे हैं, वही पिता के जिम्मेदारी और अनुशासन के तले दबे व्यक्तित्व का कोमल पक्ष अक्सर कविताओं मे उतनी प्रमुखता से उजागर नही हो पाता है। प्रस्तुत कविता अपने पारंपरिक कलेवर मे एक पिता की ऐसी ही अनुच्चारित भावनाओं मे छिपे प्रेम और विवशता को स्वर देती है।

गीत

माँ को गले लगाते हो, कुछ पल मेरे भी पास रहो !
’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो !
मैनेँ भी मन मे जज़्बातोँ के तूफान समेटे हैँ,
ज़ाहिर नही किया, न सोचो पापा के दिल मेँ प्यार न हो!

थी मेरी ये ज़िम्मेदारी घर मे कोई मायूस न हो,
मैँ सारी तकलीफेँ झेलूँ और तुम सब महफूज़ रहो,
सारी खुशियाँ तुम्हेँ दे सकूँ, इस कोशिश मे लगा रहा,
मेरे बचपन मेँ थी जो कमियाँ, वो तुमको महसूस न हो!

हैँ समाज का नियम भी ऐसा पिता सदा गम्भीर रहे,
मन मे भाव छुपे हो लाखोँ, आँखो से न नीर बहे!
करे बात भी रुखी-सूखी, बोले बस बोल हिदायत के,
दिल मे प्यार है माँ जैसा ही, किंतु अलग तस्वीर रहे!

भूली नही मुझे हैँ अब तक, तुतलाती मीठी बोली,
पल-पल बढते हर पल मे, जो यादोँ की मिश्री घोली,
कन्धोँ पे वो बैठ के जलता रावण देख के खुश होना,
होली और दीवाली पर तुम बच्चोँ की अल्हड टोली!

माँ से हाथ-खर्च मांगना, मुझको देख सहम जाना,
और जो डाँटू ज़रा कभी, तो भाव नयन मे थम जाना,
बढते कदम लडकपन को कुछ मेरे मन की आशंका,
पर विश्वास तुम्हारा देख मन का दूर वहम जाना!

कॉलेज के अंतिम उत्सव मेँ मेरा शामिल न हो पाना,
ट्रेन हुई आँखो से ओझल, पर हाथ देर तक फहराना,
दूर गये तुम अब, तो इन यादोँ से दिल बहलाता हूँ,
तारीखेँ ही देखता हूँ बस, कब होगा अब घर आना!

अब के जब तुम घर आओगे, प्यार मेरा दिखलाऊंगा,
माँ की तरह ही ममतामयी हूँ, तुमको ये बतलाऊंगा,
आकर फिर तुम चले गये, बस बात वही दो-चार हुई,
पिता का पद कुछ ऐसा ही हैँ फिर खुद को समझाऊंगा!

Note::-
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तुम करना मुझको माफ़ ~ Do you forgive me !!

kmsraj51 की कलम से …..
pen-kms

poetryहिंदी कविता !!


एक पुरानी कविता आपके बीच रख रहा हूँ ….जो आपके मस्तिस्क में भी एक पुराना चेहरा उभार सकता है ,निवेदन करता हूँ—-

तुम करना मुझको माफ़, तुम्हे प्यार नही मै दे पाया !
जीवन के हर रंगो का, उपहार नहीं मै दे पाया !!

तुम अमलताश की पुष्पकली ,
मै पतझड़ का हूँ तीव्र शूल !
धरती के आतप में झुलसा ,
जीवन के दुःख का अदना मूल !!
तूम नही अधूरी ग़ज़ल शुभे,
तुम तुलसी के मानस सा पावन हो !
तुम हिमगिरी में सहसा कौंधी ,
बादल के बिजली सा मनभावन हो !!
उस चमक शिखा के रंगो का उपहार नही मै दे पाया…..
तुम करना मुझको माफ़ ,तुम्हे प्यार नही मै दे पाया !!!!!!


Real Art

यही कामना है मेरी की मन की ,
शैय्या का तुम्हे मनीष मिले !
किंचित पाऊ गर मै जीवन में ,
तो तुमको वह आशीष लगे !
तुम जिसकी शीतलता में शयन करो,
वह व्यक्ति नही जीवनवट हो !
जिन अधरों का चुम्बन पाओ ,
वह अधर नही गंगातट हो !
ऐसे जीवन के लघुसुख का विस्तार नही मै दे पाया…….
तुम करना मुझको माफ़ तुम्हे प्यार नही मै दे पाया!!!!!!!!

We are grateful to Mr. गौरव श्रीवास्तव “गौर” {बलरामपुर (उप्र.)} for sharing this inspirational Hindi Poetry with kmsraj51. Thank you for your support.


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