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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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poetry in hindi

चिट्ठी या खत।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ चिट्ठी या खत। ♦

chitthee-ya-khat-kmsraj51.png

इस इंटरनेट की दुनिया से, पाया हमने बहुत कुछ।
नई-नई दुनिया देखी, ज्ञान बढ़ाया बहुत कुछ।
जिज्ञासा मिटाई, जाना बहुत कुछ।
तो वहीं, मासूम गौरिया और चिट्ठियां॥

खोया भी हमने बहुत कुछ।
कभी पोस्ट कार्ड, कभी अन्तर्देशिये।
कभी सफेद लिफाफे वाली चिट्ठियाँ।
कहीं पे देती खुशखबरी, कहीं बांटती गम।
और कहीं बहनो ने भेजी राखियां॥

अगर कहीं डाकिये के पीछे, बच्चे मचाए शोर।
तो समझ लो परीक्षफल लेकर आयी चिट्ठियाँ।
जो भी हों, उन चिट्ठियों की अहमियत ही बहुत थी।
हर बार डाकिये से पूछना, हमारी आयी चिट्ठियाँ॥

वो चिठ्ठी का आना, सबको पढ़ के सुनाना।
कभी माँ का मामा, बुआ को चिठ्ठी लिखवाना।
कभी कोने से फ़टी, गमी का इशारा देती चिट्ठियाँ।
तो कहीं पीले चावल भेज कर, विवाह का संदेसा…
….. देती चिठियाँ॥
♦ भावना भारद्वाज ♦

♥⇔♥

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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क्या हार जाऊँ मैं इनसे ?

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ क्या हार जाऊँ मैं इनसे ? ♦

kya-haar-jaoon-main-inase-kmsraj51.png

एक पीड़ा सघन सक्षम।
नेत्र अश्रुओं से देती भर।
लड़ूँ जिजीविषा ले अश्रु से।
या पीड़ा के मन भाऊँ।
क्या हार जाऊँ मै इनसे ॥

चुकता जाता जीवन पल पल।
शिथिल गात अवरुद्ध उच्छवास ले।
नित संघर्षो से जूझूँ या
स्वीकार थकन बस अलस जिऊँ।
क्या हार जाऊँ मैं इनसे॥

तरु बगिया के चिड़िया चुनमुन।
बढते उड़ते, थकते नहीं पल भर।
जीते जीवन दाने चुनचुन।
नित उड़ान निज मन की भरते।
मैं कैसे समेट लूँ डैने॥

पार नभ के किस विध जाऊँ।
भवसागर में डुबा उमंगें।
विगत मोह डूबूँ उतराऊँ।
क्या मैं हार जाऊँ ?
♥ आशा सहाय ♥

♥⇔♥

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

 

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अन्नदाता – किसान…।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ अन्नदाता – किसान…। ϒ

अन्नदाता

Farmer poetry in hindi

खून पसीने की फिर वही कहानी…..

झुलस रहा है बदन धूप में,
आखों में आशाएं भी है,
सर पर है मटियाला साफा,
पैरों में गरीबी साये भी है।

दूर तलक दिखते खेत है,
सूरज उनको तपाये भी है,
सूखे से भयभीत है किसान,
जो कर्ज में खुद को दबाए भी है।

जब बादल घिरते आसमान में,
लेती अँगड़ाई जब पुरवाई भी है,
मिट्टी में रहती नमी उस पल,
तब दिखती खेतों में हरियाली भी है।

प्याज से सूखी रोटी खाते है,
गीत वो सावन के गाते है,
श्रम से सींचे खेत है उन्होंने,
अनाज दूसरे छीन ले जाते है।

भूखे परिवार का पेट है भरते,
बेटी ब्याहने की चिंताएं भी है,
दो रोज का आराम मयस्सर नहीं,
खुद को पसीने में नहलाये भी है।

रक्षक सरकारी प्रताड़ित है करते,
साहूकार खूब धमकाते भी है,
चुनावों में जब बात है होती,
तब मन में जगती अभिलाषाएं भी है।

फिर छा जाता है वही अंधेरा,
होती फिर वही निराशा भी है,
खून पसीने की फिर वही कहानी,
वही किसान की पीड़ा भी है।

मौसम आते रूप बदल- बदल,
कुछ कुछ होती बरसाते भी है,
बच्चों की पढ़ाई दिन-रात सताती,
जीवन में काली घटाएं भी है।

जिम्मेदारियों का बोझ है सर पर,
दम तोड़ती सुख की लालसाएं भी है,
वह लाचार किसान है भारत का,
खादी और खाकी उनको सताए भी है।

आलस जरा न उसमें रहता ,
कष्टों के बीच वह मुस्कुराए भी है,
फिर क्यों बेबस है किसान आज ,
जो फाँसी को गले लगाये भी हैं।

©- डॉ मुकेश कुमार, – दिल्ली। ∇

♥ शिक्षक (हिंदी विषय) और मेंटोर शिक्षक रा. रा.क्षेत्र दिल्ली ♥

dr-mukesh-kumar-kmsraj51

हम दिल से आभारी हैं ♥ डॉ मुकेश कुमार – जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता “किसान” साझा करने के लिए।

About Dr. Mukesh Kumar – डॉ मुकेश कुमार जी के शब्दाें में –

लेखन – विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में।
रुचि: – कविता, कहानी, समीक्षा, शैक्षिक मुद्दों और समसामयिक मुद्दों आदि पर लिखना।
पिछले 19 वर्षों से साहित्य सेवा में अपनी भागीदार।
हिंदी साहित्य से जुड़े लेखकों एवं उनकी रचनाओं को पढ़ना।

योग्यता – पी. एच. डी. ♦ एम. एड. ♦ जे.आर. एफ.
शोध विषय – (पी. एच. डी.) विद्यासागर नोटियाल : व्यक्तित्व एवं कृतित्व,

शोध विषय : एम. एड
(बहुभाषिकता एवं अधिगम : नई युक्तियाँ सामग्रियां और संभावनाएं)

डॉ मुकेश कुमार जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “डॉ मुकेश कुमार जी” ने कविता के माध्यम से खून पसीने की फिर वही कहानी, अन्नदाता किसान के मेहनती जीवन की कड़वी सच्चाई – “किसान”, का सुंदर वर्णन किया है। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

♥••—••♥

ϒ यह कविता जरूर पढ़े – मजदूर…। ϒ

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Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

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मजदूर…।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ मजदूर…। ϒ

Worker – Poetry in Hindi

तपती धूप का आसमां है सर पर,
हवा भी आग उगल रही है,
सड़के नही लाल अंगारे है,
देखकर पैरों के छाले, रूह काँपे जा रही है॥

मन की पीड़ा बहुत बुरी है,
आँखे अब घिरने लगी है,
उन भिखमंगों से क्या कहें,
आत्माएं जिनकी आज मरने लगी हैं॥

जब मतलब आया घर-घर आए,
वोट मांगने हाथ फैलाए,
खा गरीब का सारा खाना,
खुद को उनका हमदर्द बताए॥

देख दुर्दशा आज मेरी,
वो जरा भी तरस न खाए,
खुद से जवाब न बन सका,
तब भीड़ किराए की मुझे बताए॥

भूख की लंबी कतार की व्यथा,
पैदल यात्रा, सड़क पर मौत,
महामारी का दौर, रेल दुर्घटना,
आने वाला युग लिखेगा, इस दर्द की गाथा॥

मैं केवल मजदूर नही हूँ,
भारत का मैं मजबूर भी हूँ,
जनतन्त्र की रीढ़ में,
तुम्हारी मैं तकदीर भी हूँ॥

जीवन भले ही झुलस रहा हो,
भुखमरी, बेबसी की आग में
मैं लड़खड़ाया और सम्भला भी,
इन बेजुबानों के राज में॥

मैं देश का मेहनती वर्ग हूँ,
जो मरकर भी कभी मरता नहीं,
खून पसीना बहाकर जीता हूँ,
मुसिबतों से कभी डरता नहीं॥

©- डॉ मुकेश कुमार, – दिल्ली। ∇

♥ शिक्षक (हिंदी विषय) और मेंटोर शिक्षक रा. रा.क्षेत्र दिल्ली ♥

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हम दिल से आभारी हैं ♥ डॉ मुकेश कुमार – जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता “मजदूर” साझा करने के लिए।

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(बहुभाषिकता एवं अधिगम : नई युक्तियाँ सामग्रियां और संभावनाएं)

डॉ मुकेश कुमार जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “डॉ मुकेश कुमार जी” ने कविता के माध्यम से – मजदूर के जीवन की कड़वी सच्चाई – “मजदूर”, का सुंदर वर्णन किया है। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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ग़ाफ़िल दीवाना इतना।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ ग़ाफ़िल दीवाना इतना। ϒ

ग़म में ग़ाफ़िल दीवाना इतना, कि
ग़म की अंधेरी रात में।
ग़म ही चिराग़ हो गया।
जलती रही उसकी चिता रात भर…

बिना किसी के आग दिए ही।
अपने ग़म कि गर्मी से राख हो गया।
सहर की हवाओं ने उड़ा दी।
उसकी चिता की राख।

फ़िज़ा में दूर कही वो खो गया।
सर्द हवाओं ने हमें बताया।
बदनसीब दीवानों का…
क़िस्सा और एक ख़ाक हो गया।

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ – हैदराबाद, तेलंगाना ®

हम दिलसे आभारी है – डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी के, हिंदी में कविता शेयर करने के लिए।

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी के लिए मेरे विचार:

♣ “डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी” ने “ग़ाफ़िल दीवाना इतना।…“ काे कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इक – इक शब्द दिल की गहराइयों तक उतरते है। आपके लेखन की खासियत है की बिलकुल खुले मन से लिखते है, आपके लेख के हर एक शब्द दिल को छूने वाले होते है। हर एक शब्द अपने आप में एक पूर्ण सुझाव देता है, फिर चाहे वो नज़्म, गज़ल हो या कवितायें हो या अन्य लेख। जो भी इंसान इनके लेख को दिल से समझकर आत्मसात करेगा उसका जीवन धन्य हो जायेगा।

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Filed Under: 2018-Kmsraj51 की कलम से….., डॉ. रूपेश जैन 'राहत", हिंदी कविता, हिन्दी साहित्य, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi poetry on life, poetry in hindi, roopesh jain, कविता, कविता इन हिंदी, कविताएँ हिंदी में, ग़ाफ़िल दीवाना इतना।, छोटी कविता हिंदी में, डॉ. रूपेश जैन 'राहत', पोएट्री इन हिंदी, हिंदी कविता, हिंदी कविता संग्रह

उड़ने की ख़ातिर।

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ϒ उड़ने की ख़ातिर। ϒ

जिस शाख़ से हैं हम।
आकाश की ऊँचाई पर।
उड़नें की ख़ातिर।
उस शाख़ से जुदा होते।

लोगों को देखा है।
अपनों से जुदा हुए।
लोगों की याद में,
इस शाख़ को…

रोते देखा है।
फिर भी फ़क़त मैं जुड़ा हूँ।
उस शाख़ से बाकी,
उस शाख़ से जुदा होते,
लोगों को देखा है।

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ – हैदराबाद, तेलंगाना ®

हम दिलसे आभारी है – डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी के, हिंदी में कविता शेयर करने के लिए।

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी के लिए मेरे विचार:

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चैन से जीना सीख लिया।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ चैन से जीना सीख लिया। ϒ

गले लगते दोस्त बोला क्या छोड़ दिया चैन से जीना सीख लिया।
सारा दिन फेसबुक पर रहना छोड़ दिया चैन से जीना सीख लिया।

व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी हर रोज नए पचड़े सर दर्द की नई दुकान।
दिन भर पिंगों-फारवर्ड करना छोड़ दिया चैन से जीना सीख लिया।

अब कहें क्या नया चलन चला है दीवाने फ़ुज़ूल वीडियो बनाने का।
घडी-घडी यूट्यूब लोड करना छोड़ दिया चैन से जीना सीख लिया।

सारे काम यूँही धरे रह गए बस इक फोटू का इन्तजार शामों-सहर।
हमनें इंस्टाग्राम फॉलो करना छोड़ दिया चैन से जीना सीख लिया।

घर बैठे न होता काम समस्या सुलझाने सड़क पे उतरना पड़ता हैं।
‘राहत’ हमनें हैश टैग करना छोड़ दिया चैन से जीना सीख लिया।

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ – हैदराबाद, तेलंगाना ®

हम दिलसे आभारी है – डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी के, हिंदी में कविता शेयर करने के लिए।

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी के लिए मेरे विचार:

♣ “डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी” ने “चैन से जीना सीख लिया।…“ काे कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इक – इक शब्द दिल की गहराइयों तक उतरते है। आपके लेखन की खासियत है की बिलकुल खुले मन से लिखते है, आपके लेख के हर एक शब्द दिल को छूने वाले होते है। हर एक शब्द अपने आप में एक पूर्ण सुझाव देता है, फिर चाहे वो नज़्म, गज़ल हो या कवितायें हो या अन्य लेख। जो भी इंसान इनके लेख को दिल से समझकर आत्मसात करेगा उसका जीवन धन्य हो जायेगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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कैसी हो गयी है जिन्दगी।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ कैसी हो गयी हैं जिन्दगी। ϒ

ना कुछ सोचो ना कुछ करो, क्योंकि…
चाय के प्यालों से होंठों का फासला हो गयी है जिंदगी।

भूख से बिलखती रूहों को मत देखो।
शान-औ-शौकत के भोजों१ में खो गयी है जिंदगी।

बस सहारा ढूढ़ते, सड़क पे फट गए जूतों से क्या-
सुबह शाम बदलती गाड़ियों का कारवाँ हो गयी है जिंदगी।

तन पे फटे हुए कपडे मत देखो-
नए तंग मिनी स्कर्ट सी छोटी हो गयी है जिंदगी।

पानी की तड़प भूल कर-
महगीं शराब की बोतलों में खो गयी है जिंदगी।

फुटपाथ पे सोती हजारों निगाहों की कसक छोड़ के,
इक तन्हा बदन लिए, हजारों कमरों में सो गयी है जिंदगी।

हजारों सवाल खामोश खड़े; बस।
सुलगती सिगरेट के धुएं सी हो गयी है जिंदगी।

शब्दार्थ:
१. भोजों = दावतों

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ – हैदराबाद, तेलंगाना ®

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युवा समाज बदलते जा रहे हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ युवा समाज बदलते जा रहे हैं। ϒ

kavita hindi mein

दिन हो, रात हो अब युवा हिन्द के करते आराम नहीं।
समाज बदल रहा है युवा, व्याकुलता का अब काम नहीं।

भारत माता की वेदी पर निज प्राणों का उपहार लाये हैं।
शक्ति भुजा में, ज्ञान गौरव जगाने भारत के युवा आये हैं।

नित नए प्रयासों से समाज को आगे ले जा रहे है।
देखो युवा क्या – क्या नये उद्यम ला रहे है।

बिन्नी के साथ ‘फ्लिपकार्ट’ आया – देश में नया रोजगार लाया।
कुणाल और रोहित की ‘स्नैपडील’ – कंस्यूमर को हो रहा गुड फील।
देश की बेटियाँ कहाँ पीछे रहीं – राधिका की ‘शॉप-क्लूज़’ आ गयी॥

हुनर नहीं बर्बाद होता अब तहखानों में –
जीवन रागनियाँ मचल रही नव-गानों में।

समझ चुके हैं बिना प्रयास पुरुषार्थ क्षय है।
आगे बढ़ चले अब, भारत माता की जय है।

तप्त मरु को हरित कर देने की आस लगाये हैं।
युवा सुख-सुविधाओं की नए परम्परा लाये है।

भाविश का ‘ओला’ समय से घर पहुँचता।
शशांक का ‘प्रैक्टो’ डॉक्टर से मिलवाता।

दीपिंदर का ‘जोमाटो’ खाना खिलवाता।
समर का ‘जुगनू’ ऑटोरिक्शा दिलवाता।

विजय का ‘पेटीऍम’ ट्रांजेक्शन की जान।
सौरभ, अलबिंदर का ‘ग्रोफर्स’ खरीदारों की शान।

शिरीष आपटे की जल प्रणाली देश के काम आ रही।
बीएस मुकुंद की ‘रीन्यूइट’ सस्ते कंप्यूटर बना रही।

बिनालक्ष्मी नेप्रम ‘वुमेन गन सर्वाइवर नेटवर्क’ चला रहीं।
सची सिंह रेलवे स्टेशन पर लावारिसों को राह दिखा रहीं।

प्रीति गाँधी की मोबाइल लाइब्रेरी सबको ज्ञान बाँट रही।
डॉ. बोडवाला की ‘वन-चाइल्ड-वन-लाइट’ जीवन में जान डाल रही।

जादव पायेंग “फॉरेस्ट मॅन ऑफ इंडिया” जूझा अकेला।
आज १३६० एकड़ में ‘मोलाई’ का जंगल फैला।

तरक्की की कलम से भाग्य लिखते जा रहे हैं।
नव पथ पर निशाँ बनते जा रहे हैं।

नित नए नाम जुड़ते जा रहे हैं।
युवा समाज बदलते जा रहे हैं।

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ – हैदराबाद, तेलंगाना ®

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सर झुकाना आ जाये…।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ सर झुकाना आ जाये…। ϒ

🙂 हिंदी गज़ल – सर झुकाना आ जाये …

नज़ाकत-ए-जानाँ1 देखकर सुकून-ए-बे-कराँ2 आ जाये।
चाहता हूँ बेबाक इश्क़ मिरे बे-सोज़3 ज़माना आ जाये।

मुज़्मर4 तेरी अच्छाई हम-नफ़्स मुझमे, क़िस्मत मिरी।
लिखे जब तारीख़े-मुहब्बत5 तो हमारा फ़साना आ जाये।

माना हरहाल मुस्कुराते रहना है रिवायत-ए-जवानी6,
जुस्तजू इतनी दौर-ए-ग़म7 में रिश्ते निभाना आ जाये।

बे-लिहाज़8 बस्ती में हो चला मतलब-आश्ना9 हर कोई।
भरोसा रखने से बेहतर दर्द-ए-बेकसी10 भुलाना आ जाये।

इबादत-गुज़ार11 हूँ मिरे मालिक़ इनायत बख्शते रहना।
दुआ ‘राहत’ नाम तिरा आये तो सर झुकाना आ जाये।

◊—◊

शब्दार्थ:

१ नज़ाकत-ए-जानाँ -: प्रिय की सादगी

२ सुकून-ए-बे-कराँ -:  अशांत की शांति/ असीम शांति

३ बे-सोज़ -: जिसमें जलन न हो

४ मुज़्मर -: छुपी हुई

५ तारीख़े-मुहब्बत -: प्रेम का इतिहास

६ रिवायत-ए-जवानी -: युवा होने के नाते, युवाओं की परंपरा

७ दौर-ए-ग़म -: पीड़ा का समय

८ बे-लिहाज़ -:बेशर्म

९ मतलब-आश्ना -: मतलब से प्यार करने वाला

१० दर्द-ए-बेकसी – असहाय होनें की पीड़ा

११ इबादत-गुज़ार – भक्त, प्रार्थना करने वाला

© डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ – हैदराबाद, तेलंगाना ®

हम दिल से आभारी हैं डॉ. रूपेश जैन -राहत- जी के प्रेरणादायक हिन्दी ग़जल “सर झुकाना आ जाये…।” साझा करने के लिए।

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