• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for vivek kumar

vivek kumar

शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Shiksha Mein Kranti Abhi Baaki Hai | शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है।

# शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है | # एक शिक्षक की प्रेरणादायक यात्रा 

एक शिक्षक का जुनून अभी बाकी है…

सफर शुरू हुआ था
एक छोटे से ग्रामीण विद्यालय से,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय गवसरा मुसहर से—
जहाँ संसाधन कम थे,
इमारत की सुविधाएँ कम थीं,
लेकिन बच्चों की आँखों में
सपने कम नहीं थे।

वहाँ समाज के उस तबके के बच्चे थे
जिनके लिए शिक्षा तक पहुँचना भी
एक चुनौती हुआ करती थी।
महादलित समाज, अल्पसंख्यक, अत्यंत पिछड़े
और पिछड़े परिवारों के बच्चे—
उनके बीच खड़ा एक शिक्षक
सिर्फ पाठ नहीं पढ़ा रहा था,
वह भविष्य लिखने की कोशिश कर रहा था।

मैंने किताबों से पहले
बच्चों को पढ़ा,
उनकी रुचि पढ़ी,
उनकी समस्याएँ पढ़ीं,
उनके घरों की परिस्थितियाँ पढ़ीं।

अभिभावकों से मिला,
जनप्रतिनिधियों से मिला,
प्रधानाध्यापक से मिला,
लोगों को जोड़ा,
क्योंकि मेरा विश्वास था—

“विद्यालय अकेला बच्चों का भविष्य नहीं बदल सकता,
समाज को भी शिक्षा की इस यात्रा में साथ आना होगा।”

फिर मैंने देखा
पाँचवीं के बाद कई बच्चियाँ
विद्यालय से दूर हो जाती थीं।
विद्यालय की दूरी,
परिवार की मजबूरी
और सामाजिक परिस्थितियाँ
उनके सपनों के रास्ते में खड़ी थीं।

मन में एक सवाल उठता था—

क्या किसी बच्ची का सपना
सिर्फ इसलिए छोटा हो जाए
कि उसके गाँव में आगे की पढ़ाई का विद्यालय नहीं है?

नहीं!

तभी मैंने तय किया—
लड़कियों की शिक्षा के लिए
कुछ करना होगा।

संसाधन कम थे,
लेकिन हौसला बड़ा था।

2007 में
TLM प्रदर्शनी से एक नया अध्याय शुरू हुआ।
बच्चों के साथ मिलकर
सीखने को आसान और रोचक बनाने वाली
शिक्षण-सामग्री तैयार की।

पहली कोशिश में
द्वितीय स्थान मिला।

लेकिन मंजिल कहाँ थी?

अगले वर्ष
फिर कोशिश की,
और इस बार
प्रथम स्थान।

फिर सीआरसी से बीआरसी तक
यह कारवाँ चलता रहा।

कभी साधन मिले,
कभी नहीं मिले।

कभी लोगों ने कहा—
“इतनी मेहनत क्यों करते हैं?”
कभी कहा गया—
“इससे क्या फायदा होगा?”

लेकिन मेरे भीतर एक आवाज थी—

“अगर बच्चों के सीखने में एक प्रतिशत भी सुधार होगा,
तो यह प्रयास बेकार नहीं जाएगा।”

एक बार प्रदर्शनी के लिए
संसाधन और उचित स्टॉल तक उपलब्ध नहीं था।
लोगों ने कहा—
छोड़ दीजिए।

लेकिन मैंने नहीं छोड़ा।

जहाँ जगह मिली,
वहीं से शुरुआत की।

क्योंकि शिक्षक के लिए
मंच बड़ा होना जरूरी नहीं,
उसका उद्देश्य बड़ा होना चाहिए।

मेहनत रंग लाई।
बीआरसी स्तर पर भी
प्रथम स्थान मिला।

और फिर वही प्रयास
बालिकाओं की शिक्षा के लिए
एक बड़ी जीत में बदल गया।

प्रखंड प्रमुख ने अपना वचन निभाया
और मेरा विद्यालय
राजकीय प्राथमिक विद्यालय से
उत्क्रमित मध्य विद्यालय गवसरा मुसहर बना।

उस दिन सिर्फ विद्यालय अपग्रेड नहीं हुआ था—

उस दिन कई बच्चियों के सपनों की
कक्षा पाँच से कक्षा आठ तक की यात्रा शुरू हुई थी।

और मैंने जाना—

एक शिक्षक की छोटी-सी कोशिश
किसी बच्चे के जीवन में
बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है।

फिर कारवाँ आगे बढ़ता गया।

अंततः
विद्यालय मध्य से उच्च माध्यमिक में परिणत हुआ।

बाल संसद,
मानव शृंखला,
स्लोगन,
कलाकृतियाँ,
बाल मेले,
रोचक गतिविधियाँ—
हर अवसर को मैंने
बच्चों के सीखने का अवसर बनाया।

2021 में प्रखंड स्तर पर
मेरे नवाचारों को सम्मान मिला,
2021-22 में जिला स्तर पर
शिक्षक सम्मान मिला।

लेकिन सम्मान के बाद भी
सफर रुका नहीं।

2024 में
जब एक नई भूमिका मिली—
+2 हिंदी शिक्षक के रूप में
भोला सिंह उच्च माध्यमिक विद्यालय पुरुषोत्तमपुर में—
तो लगा जैसे
जीवन ने मुझे फिर एक नई कक्षा दे दी है।

नई कक्षा,
नई उम्र के विद्यार्थी,
नई चुनौतियाँ
और नई जिम्मेदारियाँ।

मैंने हिंदी को
सिर्फ एक विषय नहीं माना।

मैंने बच्चों से कहा—

हिंदी सिर्फ परीक्षा पास करने की भाषा नहीं,
हिंदी हमारे विचारों को
अभिव्यक्ति देने की शक्ति है।

व्याकरण को रोचक बनाया,
रोल-प्ले और गतिविधियों को अपनाया,
हर कक्षा में प्रेरक संवाद जोड़े,
सामान्य ज्ञान के प्रश्नों से
बच्चों की जिज्ञासा जगाई।

युथ क्लब और इको क्लब के माध्यम से
बच्चों को गतिविधियों से जोड़ा।

और फिर 2025 में
मुझे राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान मिला।

लेकिन आज भी
मैं खुद से यही कहता हूँ—

सम्मान मंजिल नहीं है,
सम्मान तो उस रास्ते की
एक छोटी-सी पहचान है।

बीस वर्ष से अधिक बीत गए…

लेकिन मेरे भीतर का शिक्षक
आज भी थका नहीं है।

आज भी जब किसी कार्यक्रम का
प्रस्ताव स्वीकार करता हूँ,
तो रात में नींद कम
और विचार ज्यादा आते हैं—

कैसे होगा?
क्या नया करूँ?
बच्चों को और बेहतर कैसे जोड़ूँ?
इस बार पहले से अच्छा कैसे करूँ?

क्योंकि—

शिक्षक की उम्र बढ़ सकती है,
लेकिन उसका जुनून बूढ़ा नहीं होना चाहिए।

आज शिक्षक दिवस पर
मैं अपने सभी शिक्षक साथियों से
एक विनम्र अपील करना चाहता हूँ—

आइए,
हम सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा न करें,
बच्चों के सपने पूरा करने का माध्यम बनें।

सिर्फ अंक न देखें,
बच्चे की प्रतिभा देखें।

सिर्फ कमजोर बच्चे की कमी न देखें,
उसके भीतर छिपी संभावना देखें।

सिर्फ विद्यालय की दीवारें न देखें,
उन दीवारों के भीतर
बनते हुए भविष्य को देखें।

और अगर संसाधन कम हों,
तो निराश मत होना—

क्योंकि संसाधनों से बड़ा
शिक्षक का संकल्प होता है।

अगर रास्ते में बाधाएँ आएँ,
तो रुकना मत—

क्योंकि एक शिक्षक के कदम रुकते हैं,
तो किसी बच्चे का सपना रुक सकता है।

आइए,
हर बच्चे को अवसर दें,
हर बच्ची को उड़ान दें,
हर कक्षा को प्रयोगशाला बनाएं,
हर विद्यालय को उम्मीद का केंद्र बनाएं।

क्योंकि—

एक शिक्षक बदलेगा,
तो एक कक्षा बदलेगी।

एक कक्षा बदलेगी,
तो एक विद्यालय बदलेगा।

एक विद्यालय बदलेगा,
तो एक समाज बदलेगा।

और जब शिक्षक मिलकर बदलेंगे—

तब शिक्षा में क्रांति आएगी!

लेकिन याद रखिए—

क्रांति अभी बाकी है…
क्योंकि बच्चों के सपने अभी बाकी हैं।

मेरा सफर अभी बाकी है…
क्योंकि शिक्षा का बदलाव अभी बाकी है।

मेरी उम्र बढ़ी है,
मेरा जुनून नहीं।

बीस साल बीत गए,
लेकिन मेरे अंदर का शिक्षक
आज भी कहता है—

**“कुछ और करना है…

बच्चों के लिए कुछ और करना है…”**

और जब तक
किसी बच्चे की आँख में सपना है,
जब तक किसी बच्ची को
अपने भविष्य के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है,
जब तक किसी शिक्षक के भीतर
कुछ बेहतर करने की आग बाकी है—

**तब तक…

शिक्षा में क्रांति बाकी है।**

**और मेरे अंदर…

एक शिक्षक का जुनून बाकी है।**

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता एक समर्पित शिक्षक की बीस वर्षों की संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक यात्रा का जीवंत वर्णन है। यह दर्शाती है कि कैसे एक शिक्षक का दृढ़ संकल्प और जुनून सीमित संसाधनों के बावजूद समाज और बच्चों का भविष्य बदल सकता है।

    कविता के मुख्य बिंदु

    • वंचितों के लिए जमीनी संघर्ष: यात्रा एक संसाधनहीन ग्रामीण विद्यालय से शुरू होती है, जहाँ महादलित और पिछड़े वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं। शिक्षक ने केवल किताबें नहीं पढ़ाईं, बल्कि बच्चों की पारिवारिक परिस्थितियों को समझकर पूरे समुदाय और अभिभावकों को शिक्षा से जोड़ा।

    • बालिका शिक्षा के लिए पहल: पाँचवीं के बाद लड़कियों का स्कूल छूटना देखकर उन्होंने व्यवस्था बदलने की ठानी। उनके निरंतर प्रयासों से विद्यालय को प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक अपग्रेड किया गया, जिससे अनेक बच्चियों की आगे की पढ़ाई का रास्ता खुला।

    • नवाचार और रचनात्मक शिक्षण: 2007 से TLM (शिक्षण सामग्री) प्रदर्शनियों, बाल संसद, मानव शृंखला और इको क्लब जैसी गतिविधियों के जरिए पढ़ाई को रोचक बनाया। +2 शिक्षक की नई भूमिका में उन्होंने हिंदी को रटने का विषय नहीं, बल्कि वैचारिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनाया।

    • सम्मान और अटूट जुनून: अपने नवाचारों के लिए उन्हें प्रखंड, जिला और 2025 में राज्य स्तरीय सम्मान मिला। हालांकि, वे इन पुरस्कारों को मंजिल नहीं मानते। बीस साल बाद भी उनका उत्साह, नींद और बच्चों के लिए कुछ नया करने की बेचैनी आज भी जस की तस है।

    • शिक्षक समाज से आह्वान: कविता के अंत में साथी शिक्षकों से अपील की गई है कि वे केवल पाठ्यक्रम पूरा करने या अंक देखने तक सीमित न रहें। संसाधनों के अभाव से निराश होने के बजाय वे बच्चों की प्रतिभा निखारें।

    जब तक हर बच्चे का सपना पूरा नहीं हो जाता और हर बच्ची को संघर्ष से मुक्ति नहीं मिल जाती, तब तक शिक्षा में असली क्रांति आनी बाकी है।

—————

यह कविता (शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2026 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi poem on education, Shiksha mein kranti abhi baki hai, teacher motivation, Teachers Day Poem in Hindi, vivek kumar, vivek kumar poems, ग्रामीण शिक्षा, प्रेरणादायक हिंदी कविता संग्रह, बालिका शिक्षा, शिक्षक का जुनून, शिक्षक दिवस कविता, शिक्षा पर कविता, शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है, हिंदी कविता सारांश

दो वक्त की रोटी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Do Waqt Ki Roti | दो वक्त की रोटी।

एक दिन पत्नी ने भर्राए स्वर में पूछा—

“क्या मेरी पहचान बस इतनी-सी रह गई है?
सुबह से शाम तक चूल्हे की धुएँ में घुलती रहूँ,
और लोग कहें…
मैं तो बस एक नौकरानी हूँ।
बताओ, तुमने मुझे दिया ही क्या है?”

पति ने सिर झुका लिया,
कुछ पल तक शब्द भी खामोश रहे।
फिर उसने गहरी साँस ली और कहा—

“अगर दो वक्त की रोटी बनाना
तुम्हें नौकरानी होने का एहसास देता है,
तो ज़रा उस इंसान का भी दर्द समझो,
जो दो वक्त की रोटी के लिए
हर रोज़ अपना पूरा जीवन दाँव पर लगा देता है।”

वह सुबह अँधेरे में घर से निकलता है,
और शाम को थककर लौटता है।
धूप उसे जलाती है,
बारिश उसे भिगोती है,
सर्द हवाएँ उसके शरीर को चीरती हैं।
मालिक की डाँट भी सहता है,
किस्मत की मार भी सहता है।
फिर भी होंठों पर एक ही दुआ रहती है—
“बस मेरे घर का चूल्हा जलता रहे।”

तुम्हारे हाथों की रोटी
इस घर का स्वाद है,
और मेरे माथे का पसीना
उसी रोटी का आटा है।

तुम्हारी ममता से घर महकता है,
मेरी मेहनत से घर चलता है।
एक ने घर बनाया है,
दूसरे ने उसे बसाया है।

न तुम मेरी नौकरानी हो,
न मैं तुम्हारा मालिक।
हम तो उस रिश्ते के दो पहिए हैं,
जिसका नाम परिवार है।

याद रखना…
रोटी सिर्फ आटे और पानी से नहीं बनती,
उसमें पति के संघर्ष का पसीना भी होता है,
और पत्नी के प्रेम की आँच भी।

जिस दिन रिश्तों में
‘मैं’ और ‘तू’ का हिसाब शुरू हो जाता है,
उसी दिन अपनापन कम होने लगता है।

आओ, एक-दूसरे की कमियाँ नहीं,
एक-दूसरे की मेहनत देखें।
क्योंकि…

पति कमाकर घर चलाता है,
पत्नी सँभालकर घर बसाती है।
दोनों का संघर्ष अलग-अलग है,
लेकिन दोनों का सम्मान एक समान है।

यही सम्मान घर को मकान बनने से बचाता है,
और यही प्रेम दो वक्त की रोटी को
जीवन का सबसे बड़ा प्रसाद बना देता है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता पति-पत्नी के बीच आपसी सम्मान, समझ और साझेदारी का भावपूर्ण संदेश देती है। कविता में पत्नी घर के काम और रोटी बनाने को लेकर स्वयं को नौकरानी जैसा महसूस करती है। तब पति उसे समझाता है कि जिस दो वक्त की रोटी को बनाना उसे बोझ लगता है, उसी रोटी के लिए वह प्रतिदिन कठिन परिश्रम करता है और अनेक संघर्षों को सहता है।

    कविता बताती है कि पत्नी की मेहनत और प्रेम से घर बसता है, जबकि पति की मेहनत और संघर्ष से घर चलता है। दोनों में कोई मालिक या नौकर नहीं, बल्कि दोनों परिवार रूपी गाड़ी के दो समान पहिए हैं। रोटी में जहाँ पत्नी के प्रेम और ममता की आँच होती है, वहीं पति के पसीने और संघर्ष की कमाई भी शामिल होती है।

    कवि का मुख्य संदेश है कि रिश्तों में ‘मैं’ और ‘तू’ का हिसाब करने के बजाय एक-दूसरे के संघर्ष और योगदान को समझना चाहिए। पति और पत्नी का संघर्ष भले ही अलग-अलग हो, लेकिन दोनों का सम्मान समान है। यही आपसी प्रेम, सम्मान और समझ एक साधारण मकान को खुशहाल घर बनाते हैं और दो वक्त की रोटी को जीवन का सबसे बड़ा प्रसाद बना देते हैं।

—————

यह कविता (दो वक्त की रोटी।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2026 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi Poems, vivek kumar, vivek kumar poems, आपसी सम्मान, कविता का सारांश, दो वक्त की रोटी, दो वक्त की रोटी कविता, पति पत्नी का संघर्ष, पति पत्नी का सम्मान, परिवार का महत्व, पारिवारिक कविता, रिश्तों में प्रेम, विवेक कुमार, हिंदी कविता

तिरंगा का करें सम्मान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Tiranga Ka Kare Samman | तिरंगा का करें सम्मान।

“तिरंगा हमारी पहचान, शहीदों की अमर निशानी और भारत की शान।”

तिरंगा है भारत की शान,
इसमें बसती देश की जान।
केसरिया कहता साहस–त्याग,
श्वेत सिखाता सत्य–ज्ञान।

हरा रंग हरियाली बोले,
खेत–खलिहान, वन–उपवन डोले।
अशोक चक्र हर पल सिखाए,
रुकना नहीं, आगे ही बढ़ना बोले।

इस ध्वज तले सोई कुर्बानी,
हर धागे में अमर कहानी।
वीरों ने हँसकर प्राण दिए,
तब पाई हमने ये आज़ादी।

ना झुके कभी ये आन–बान,
ना होने दें इसका अपमान।
हर घर में हो इसका आदर,
हर दिल में बसे इसका मान।

आओ आज ये प्रण हम ठानें,
तन–मन से इसे पहचानें।
कर्म, सेवा, सत्य के पथ पर,
चलकर भारत को महान बनाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता तिरंगे के गौरव, महत्व और देशभक्ति की भावना को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है। कवि बताता है कि तिरंगा भारत की शान और आत्मा का प्रतीक है। इसके तीनों रंग साहस, त्याग, सत्य, ज्ञान और हरियाली जैसे मूल्यों का संदेश देते हैं। अशोक चक्र निरंतर आगे बढ़ते रहने और प्रगति का प्रतीक है।कविता में यह भी दर्शाया गया है कि तिरंगे में वीर शहीदों की कुर्बानियाँ और आज़ादी की अमर गाथाएँ समाई हुई हैं। हमें इस ध्वज का सम्मान बनाए रखना चाहिए और कभी इसका अपमान नहीं होने देना चाहिए। अंत में कवि सभी को सत्य, सेवा और कर्म के मार्ग पर चलकर देश को महान बनाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।

—————

यह कविता (तिरंगा का करें सम्मान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2026 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: poet vivek kumar poems, Tiranga Ka Kare Samman, vivek kumar, तिरंगा, तिरंगा का करें सम्मान, देश प्रेम, देशभक्ति कविता, प्रेरणादायक कविता, भारत माता, भारतीय ध्वज, राष्ट्रीय गौरव, शहीदों की कुर्बानी, स्वतंत्रता संग्राम, हिंदी राष्ट्रभक्ति कविता

बाल विवाह – एक अभिशाप।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baal Vivaah Ek Abhishaap | बाल विवाह – एक अभिशाप।

बाल विवाह के खिलाफ कविता | बेटी की आवाज़, समाज के नाम संदेश

“बेटी बोझ नहीं, भविष्य है — उसे सपने पूरे करने का अधिकार दो।”

बेटी ने पूछा बापू से —
“इतनी ब्याह की क्या जल्दी?”
थोड़ी तो बढ़ जाने दो,
अभी तो मैं नादान हूँ,
थोड़ी तो ढल जाने दो।
अनजान डगर पर चलने से पहले,
जीवन को तो समझ लेने दो।

अभी तो बचपन भी न जिया,
थोड़ा तो जी जाने दो।
खेलों की किलकारी बाकी है,
किताबों से दोस्ती बाकी है,
सपनों की उड़ान अधूरी है,
आँखों में आस अभी बाकी है।

माँग में सिंदूर भरने से पहले,
हाथों में कलम थमा लेने दो,
घर की ज़िम्मेदारी से पहले,
मुझे खुद को पहचान लेने दो।

मैं बोझ नहीं, उम्मीद हूँ पापा,
कल का उजाला हूँ पापा,
आज अगर मुरझा दी गई,
तो कैसे खिल पाऊँ पापा?

कुड़वी रस्मों की बेड़ियाँ,
मेरे पाँव से हटा लेने दो,
बेटी हूँ, इंसान हूँ मैं,
मुझे भी जीने का हक़ दो पापा।

जो आज पढ़ेगी, वही कल
घर को रोशन करेगी,
अधपकी उम्र में ब्याही गई
किस्मत से ही हारेगी।

इस अभिशाप से समाज को
आज ही बचा लेने दो,
बेटी को बेटी रहने दो,
उसे जबरन बहू मत बन जाने दो।

बापू, मेरी एक बात सुन लो —
ये परंपरा नहीं, अपराध है,
जो कलियों को रौंद दे,
वो संस्कृति नहीं, अभिशाप है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बेटी की पीड़ा, चेतना और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। बेटी अपने पिता से कम उम्र में विवाह न करने की विनती करती है और कहती है कि वह अभी जीवन, शिक्षा और अपने सपनों को समझना चाहती है। वह बताती है कि बचपन, खेल, पढ़ाई और आत्म-परिचय अभी अधूरे हैं, जिन्हें पूरा करने का उसे अवसर मिलना चाहिए।

    कविता में बेटी स्वयं को बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद और उजाले के रूप में प्रस्तुत करती है। वह समाज की कड़वी परंपराओं और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को अपराध और अभिशाप बताती है। कवि का संदेश स्पष्ट है कि बेटी को पढ़ने, जीने और स्वयं निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षित बेटी ही परिवार और समाज को उज्ज्वल बना सकती है।

—————

यह कविता (बाल विवाह – एक अभिशाप।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2026 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: baal vivaah ek abhishaap poem in hindi, vivek kumar, कविता हिंदी में, नारी सशक्तिकरण कविता, बाल विवाह एक अभिशाप, बाल विवाह एक अभिशाप कविता हिंदी में, बाल विवाह कविता, बाल विवाह विरोध, बेटियों का अधिकार, बेटी पर कविता, बेटी बचाओ कविता, विवेक कुमार, शिक्षा और सशक्तिकरण, सामाजिक कुरीतियाँ, हिंदी सामाजिक कविता

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kya Badlaav Layega Naya Saal | क्या बदलाव लायेगा नया साल।

नववर्ष 2026 पर प्रेरणादायक हिंदी कविता | उम्मीद और बदलाव

बीते को भुलाना, नए को अपनाना,
जो खोया उसका रोना, पाए पर इतराना,
अच्छाई से दोस्ती, बुराई से घबड़ाना,
खट्टी मीठी यादों का बीता सफर सुहाना,

यादों के झरोखों से बज रहा तराना,
गजब फलसफा है मेरे भाई,
जेहन में मेरे पुनः एक बात दोहराई,
अधूरी आस क्या इस वर्ष होगी पास,

नववर्ष के आगमन ने ज्यों ही खुशियां फैलाई,
तभी एक बार फिर उद्गार उमड़ आई,
2026, क्या बदलाव है लाई?
क्या सच्चाई की जीत और बेईमानी की होगी हार,

ईर्ष्या द्वेष मिटाकर भाईचारे का सपना होगा साकार,
क्या बेरोजगारी मिटेगी, रोजगार मिलेगी,
अमन चैन से भरी जिंदगी कटेगी,
कभी दिलासा कभी डर का छाया साया,

उम्मीदों ने मुझे हौसला है दिलाया,
डर को है झुकाना, हिम्मत को बढ़ाना,
शिक्षा, स्वच्छता और
सामाजिक कार्य को अपनाना,
इस मंत्र को कभी न भुलाना,

यही बात जन-जन को है समझाना,
बदलाव को है अपने देश में लाना,
नववर्ष में यही गीत गुनगुनाना।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बीते वर्ष की स्मृतियों, अनुभवों और सीख को आत्मसात करते हुए नववर्ष से जुड़ी आशाओं और आत्ममंथन को अभिव्यक्त करती है। कवि कहता है कि जीवन में बीते दुख-सुख, हार-जीत, अच्छाई-बुराई सभी का अपना महत्व होता है, जिनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। यादों की खट्टी-मीठी अनुभूतियाँ मन में नए प्रश्न और नई उम्मीदें जगाती हैं।

    नववर्ष 2026 के आगमन पर कवि समाज और देश में सकारात्मक बदलाव की कामना करता है—सच्चाई की जीत, बेईमानी की हार, ईर्ष्या-द्वेष का अंत और भाईचारे का विस्तार। बेरोजगारी के समाप्त होने, रोजगार बढ़ने और अमन-चैन से भरे जीवन की आकांक्षा व्यक्त की गई है।

    कविता का संदेश है कि डर को परे रखकर हिम्मत बढ़ाई जाए और शिक्षा, स्वच्छता व सामाजिक कार्यों को अपनाकर देश में वास्तविक परिवर्तन लाया जाए। अंततः यह कविता नववर्ष को केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मसुधार और सामाजिक जिम्मेदारी का संकल्प बनाने का आह्वान करती है।

—————

यह कविता (क्या बदलाव लायेगा नया साल।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2026 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: vivek kumar, vivek kumar poems, उम्मीद और हौसले पर हिंदी कविता, क्या बदलाव आएगा नया साल कविता हिंदी में, नए साल की उम्मीदें, नए साल में बदलाव पर हिंदी कविता, नववर्ष 2026 पर प्रेरणादायक हिंदी कविता, प्रेरणादायक हिंदी कविता संग्रह, भाईचारे पर कविता, विवेक कुमार, शिक्षा और स्वच्छता पर कविता, सच्चाई और बदलाव कविता, समाज और देश के लिए नववर्ष संदेश कविता, सामाजिक बदलाव पर कविता

ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gyan Ki Jyot Jaga De Maa | ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

Mother Hansvahini is requested to fill his empty dictionary and remove the darkness of ignorance.

हे मां शारदे,
वीणावादिनी मां,
ज्ञान की देवी,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां,
मैं हूं तुच्छ अज्ञानी,
मुझे ज्ञान का मार्ग दिखा दे मां।

हे मां हंसवाहिनी,
अंधकार निवारणी,
मेरा शब्दकोश है खाली,
भर दे तू इसे बजाकर ताली,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां बागेश्वरी,
तू बजाती सुरों की बांसुरी,
मेरे कलम की लेखनी को दे धार,
लेखनी आपसे, आप सबके द्वार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां भारती,
ज्ञान सबमें तू ही भरती,
तमस दूर हो हृदय हमारे,
आशा और विश्वास तुम्हारे,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां ज्ञानदा,
आंखों पर पड़े न मेरे परदा,
मां मेरी कविता में तू,
भर दे वीणा की झंकार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां वाग्देवी,
मुझे दे सद्बुद्धि,
भेंट करूं तुझे कलम पुष्प से,
गूंथे हुए सब हार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
मां ज्ञान की ज्योत जगा देना।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता मां सरस्वती की वंदना करते हुए ज्ञान और बुद्धि की प्रार्थना करती है। कवि मां शारदा से निवेदन करता है कि वह अपनी वीणा के मधुर स्वर से उसे ज्ञान का प्रकाश प्रदान करें, क्योंकि वह अज्ञानी और तुच्छ है। मां हंसवाहिनी से आग्रह किया गया है कि वह उसके खाली शब्दकोश को भर दें और अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करें। मां बागेश्वरी से कवि अपनी लेखनी को धार देने की प्रार्थना करता है ताकि वह सभी तक ज्ञान का प्रकाश पहुंचा सके। मां भारती से अनुरोध किया गया है कि वह सभी के हृदय से अज्ञान का तमस (अंधकार) दूर करें और आशा तथा विश्वास का संचार करें। मां ज्ञानदा से कवि यह विनती करता है कि उसकी आंखों पर अज्ञान का कोई पर्दा न पड़े और उसकी कविता में वीणा की झंकार भर जाए। अंत में, मां वाग्देवी से वह सद्बुद्धि की कामना करता है और अपनी कविता को एक पुष्पहार के रूप में अर्पित करने की इच्छा व्यक्त करता है। संपूर्ण कविता ज्ञान प्राप्ति की प्रार्थना और मां सरस्वती की स्तुति में समर्पित है।

—————

यह कविता (ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: gyan ki jyot jaga de maa poem, Hindi Poems, vivek kumar, vivek kumar poems, ज्ञान की ज्योत जगा दे मां, ज्ञान की ज्योत जगा दे मां - विवेक कुमार, विवेक कुमार, विवेक कुमार जी की कविताएं

मेरा चांद मुझे आया है नजर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mera Chand Mujhe Aaya Hai Nazar | मेरा चांद मुझे आया है नजर।

she starts her fast by staying without water, she pleads to Karva Mata, may my beloved live a thousand or two thousand years, don't make me wait anymore, just show me your face. I have seen my moon.

कब आओगे,
कर रही इंतजार,
नैना हो रही लाचार,
सज संवर कर बैठी तैयार,
सजाकर माथे पर बिंदिया,
साथ में गले का हार,
रचा रखी हाथों में मेहंदी,
बस कर रही एक पुकार,
कब आओगे?

जिसका है इंतजार,
हर सुहागिन जिसकी करती आस,
दिल में बसा राखी विश्वास,
निर्जला रह, करती व्रत की शुरुआत,
करवा माता से लगाती गुहार,
पिया की उम्र हो हजार दो हजार,
अब न तरसाओ,
जरा दर्श तो दिखलाओ।

तेरे दीदार में मन हो रहा अधीर,
अब तो आ जाओ,
नयनों की प्यास बुझाओ,
पूरी कर दो मेरी आस,
आ जाओ मेरे पास।

क्यों रूठकर बैठे हो,
कहां छुपकर बैठे हो,
आ जाओ भी एक बार,
पुकार सुन,
शायद चांद को आई रहम,
जिस चांद का कर रही थी इंतजार,
वो चांद मुझे आया है नजर।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता एक सुहागन के इंतजार और प्रेम की गहराई को दर्शाती है। कविता में वह अपने पति के आगमन की प्रतीक्षा कर रही है, सज-धजकर तैयार बैठी है, माथे पर बिंदी और हाथों में मेहंदी रचाई है। उसका मन व्याकुल है, और वह लगातार अपने पति के लौटने की पुकार कर रही है। करवा चौथ के व्रत में वह निर्जला रहकर, करवा माता से अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर रही है।वह पति से रूठने या छुपने का कारण पूछती है, और उसे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पुकारती है। अंत में, उसे प्रतीक्षा में राहत मिलती है जब वह चांद को देखती है, जिसका उसे लंबे समय से इंतजार था।

—————

यह कविता (मेरा चांद मुझे आया है नजर।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2024-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: mera chand mujhe aaya hai nazar, poet vivek kumar poems, vivek kumar, मेरा चांद मुझे आया है नजर, विवेक कुमार, विवेक कुमार जी की कविताएं

गांधीगिरी अपनाओ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gandhigiri Apanao | गांधीगिरी अपनाओ।

A graphic representation featuring the word "Gandhi" repeated multiple times, highlighting its cultural and historical importance.

अहिंसा
की हो बात,
स्वतंत्रता
की मिले सौगात,
सादगी
जिसकी पहचान,
सत्य
जिसका कमान,
बापू
तुम हो महान।

सत्याग्रह
जिसकी शक्ति,
गांधी
थे वो व्यक्ति,
निडरता
जिससे मिला न्याय,
ब्रह्मचर्य
तालु पर नियंत्रण पाए,
बापू
इसीलिए महान कहलाए।

धोती
जिसकी पहचान,
लाठी
शास्त्र समान,
कर्मठता
ब्रह्म का वरदान,
सरलता
जीवन को बनाए आसान,
बापू
तुम्हीं हो राष्ट्र का सम्मान।

आज का दौड़
भ्रष्टाचार,
मन का गौर
गलत विचार,
सत्य का नाश
बना लाश,
माहौल का विनाश
बन गया दास,
फिर कैसे होगा विकास?

आ जाओ
फिर एक बार,
बदलेगी
दिशाएं चार,
सत्य
पसारेगा पैर,
हिंसा
की अब तो खैर,
बापू
आ जाओ करने सैर।

सोच
मन की बदलो,
बोल
मीठे ही बोलो,
सद्भावना
दिल से जोड़ो,
अहिंसा
का दामन न छोड़ो,
गांधीगिरी
से अब नाता जोड़ो।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि महात्मा गांधी (बापू) को महानता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अहिंसा, सत्य, और सादगी उनके जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत थे। सत्याग्रह और ब्रह्मचर्य से उन्होंने निडरता और आत्म-नियंत्रण का प्रदर्शन किया, और इसी कारण उन्हें महान माना गया। उनकी पहचान धोती, लाठी और सरल जीवन शैली से होती थी, जो उन्हें राष्ट्र का सम्मानित व्यक्ति बनाती है। कवि आज के भ्रष्ट और हिंसक माहौल की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि गांधी जी के विचार और सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। वे आह्वान करते हैं कि हम गांधीगिरी (गांधी के विचारों) से जुड़ें, मन को शुद्ध करें, और अहिंसा, सत्य, और सद्भावना का पालन करें ताकि समाज में बदलाव आ सके।

—————

यह कविता (गांधीगिरी अपनाओ।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2024-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Gandhigiri Apanao, kavi vivek kumar poems, vivek kumar, vivek kumar poems, अहिंसा पर कविता, गांधी जयंती पर कविता, गांधी जी पर कविता हिंदी में, गांधी जी पर छोटी सी कविता, गांधीगिरी अपनाओ, गांधीगिरी अपनाओ - विवेक कुमार, बापू पर कविता हिंदी, महात्मा गांधी के विषय पर बेहतरीन कविता, विवेक कुमार, विवेक कुमार जी की कविताएं

हे मुरारी अब लाज बचाओ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hey Murari Ab Laaj Bachao | हे मुरारी अब लाज बचाओ।

Oh Murari, now save the honour of every woman from such monsters. Oh Murari, now save the honour from the evil eyes of vultures. Oh Murari, now save the honour.

ये कैसी विपदा आन पड़ी,
चहुंओर अंधियारा छाया है।
अपने ही बने भक्षकगण से,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

सृष्टि की जननी का मान नहीं,
जहां नारी का सम्मान नहीं।
ऐसे हैवानों से हर नारी का,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

हे सृष्टि के पालकदाता,
अब तेरा ही बस सहारा है।
गिद्दों की गंदी नजरों से,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

आतताइयों से भरी महफिल में,
द्रौपदी की लाज बचाने।
जिस तरह तुम आए थे,
हे मुरारी सब की लाज बचाओ।

ऐसी घृणित सोंच मिटाने,
सबके दिल को सात्विक बनाने।
मात्र तेरा ही एक सहारा है,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

जग की विनती सुनकर,
हर नारी की पुकार पर,
एक बार फिर आ जाओ,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि समाज में महिलाओं की स्थिति गंभीर हो गई है, जहां उनके सम्मान और सुरक्षा को खतरा है। कवि भगवान कृष्ण से प्रार्थना कर रहे हैं कि वे इस संकट से नारी की रक्षा करें, जैसे उन्होंने महाभारत में द्रौपदी की लाज बचाई थी। कवि कहते है कि जब तक समाज में महिलाओं का सम्मान नहीं होगा, तब तक सृष्टि की जननी का भी मान नहीं होगा। कवि भगवान से निवेदन कर रहे हैं कि वे इस संसार में व्याप्त बुराई, हैवानियत, और घृणित सोच को समाप्त करें और समाज को सात्विक और पवित्र बनाएं।

—————

यह कविता (हे मुरारी अब लाज बचाओ।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2024-KMSRAJ51 की कलम से Tagged With: Hey Murari Ab Laaj Bachao, Poem On Janmashtami In Hindi, vivek kumar, vivek kumar poems, कृष्ण जन्माष्टमी, कृष्ण जन्माष्टमी पर कविता, जन्माष्टमी पर प्यारी सी कविता, विवेक कुमार, विवेक कुमार जी की कविताएं, हिन्दी कविता - हे मुरारी अब लाज बचाओ, हे मुरारी अब लाज बचाओ - विवेक कुमार, हे मुरारी अब लाज बचाओ।

भाई का पैगाम।

Kmsraj51 की कलम से…..

Brother’s message | भाई का पैगाम।

The brother explains to his sister that she should not depend on anyone for her protection, but should make herself strong and self-reliant.

रक्षाबंधन पर,
भाई का पैगाम,
सभी बहनों के नाम।

ओ मेरी बहना,
राखी तू जरूर बांधना,
रक्षा का मैं वचन भी दूंगा।

मगर,
इस कलयुगी युग में,
राक्षसी प्रवृत मानवों में।

आस पास के,
गैर तो गैर अपने लोगों में,
कौन कैसा है पहचानने में।

खा जायेगी तू धोखा,
गिरगिट जैसी रंग बदलती दुनिया में,
गुम हो जाएगी तुम्हारी पहचान।

सुन री बहना,
साये की तरह मेरा साथ नहीं,
इस बात का तूझे ख्याल है रखना।

मुझ पर निर्भर,
मत रह ये बहना,
तुम ही हो घर का गहना।

सुन तू,
नाजों से पली,
तू कोमल सी कली।

हैवानों की नजर,
इसीलिए तुझ पर गरी,
तू लगती हो सुंदर परी।

रुक,
इस मिथ्या को तोड़,
रिश्तों के बंधन छोड़।

नियत अब,
तू पहचाना सीख,
न मांग तू किसी से भीख।

समाज में छवि,
दया कोमलता की प्रतिमूर्ति,
ममता की जो करती है पूर्ति।

समय आने पर,
तू ही चंडी तू काली है,
जग की करती रखवाली है।

निर्भया बनो,
उठो जागो और याद कर,
अपनी शक्ति का संचार कर।

सृष्टि की,
जननी तू पालक तू,
जीवन का आधार हो तू।

फिर,
चंद वहशी से मत डर,
उठ, कर उनका प्रतिकार।

वचन,
आज रक्षाबंधन पर दो,
अन्मविश्वास खुद में ला दो।

तू,
अबला नहीं,तू सबला है,
कोमल नहीं तू कठोर है।

अब,
ना डर प्रतिकार कर,
खुद की रक्षा स्वयं कर।

लोगों की सोंच,
बदलेगी आएगी वो सुबह,
हाथ लगाते होंगे वो तबाह।

सनक ऐसी पाल,
अच्छे के लिए अच्छा,
बुरे के लिए काल बन।

फिर कोई तुझे,
छूने से भी घबड़ाएगा,
सपना मेरा साकार हो जायेगा।

अब,
भाई की न करना फरियाद,
तू ही है मेरी बहना फौलाद।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में एक भाई अपनी बहन को रक्षाबंधन के अवसर पर संदेश भेजता है, जिसमें वह उसे अपनी सुरक्षा के लिए जागरूक और आत्मनिर्भर बनने की सलाह देता है। भाई बहन से कहता है कि वह राखी जरूर बांधे, और वह उसकी रक्षा का वचन भी देता है। लेकिन साथ ही वह इस कलयुगी युग में चारों ओर फैले खतरों और मानवों की राक्षसी प्रवृत्तियों से सतर्क रहने के लिए भी कहता है। भाई अपनी बहन को यह समझाता है कि उसे खुद की रक्षा के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना चाहिए। वह उसे याद दिलाता है कि समाज में उसे कोमल और दयालु समझा जाता है, लेकिन समय आने पर उसे अपनी शक्ति को पहचानना होगा और चंडी व काली जैसी शक्तिशाली रूप धारण कर समाज की रक्षा करनी होगी। भाई यह भी कहता है कि उसे किसी भी बुराई का डटकर मुकाबला करना चाहिए और खुद की सुरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। अंत में, वह बहन से वादा लेता है कि वह शक्ति रूप बनेगी, अपनी शक्ति को पहचानेगी और खुद को सबला मानेगी। भाई बहन से कहता है कि अब वह किसी पर निर्भर न रहे और खुद ही अपनी रक्षा करे, जिससे समाज में बदलाव आए और बुरे लोग उससे डरने लगें।

—————

यह कविता (भाई का पैगाम।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2024-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी साहित्य, हिन्दी-कविता Tagged With: kavi vivek kumar poems, Poems on Raksha Bandhan, vivek kumar, vivek kumar poems, भाई का पैगाम - विवेक कुमार, भाई का पैगाम कविता, रक्षा बंधन पर कविता, रक्षाबंधन पर कविता, राखी पर कविता, विवेक कुमार

Next Page »

Primary Sidebar

Recent Posts

  • शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है।
  • दो वक्त की रोटी।
  • उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार।
  • योग दिवस – 2026
  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है।

दो वक्त की रोटी।

उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार।

योग दिवस – 2026

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.