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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिन्दी-कविता

“मातृ दिवस” – ममता की माँ सूरत…।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ ममता की माँ सूरत…। ϒ

⇒ Mother Nature of Mamta.

🙂 “मातृ दिवस” – ममता की माँ सूरत…।

माँ! माँ है माँ होती।
ममता की माँ सूरत।
धरा पर माँ एक सूरज।
खुद ही है माँ पलती।
बच्चा भी है पालती॥

बच्चे को वह सुधारती।
गर्भ में धारण करती।
बच्चा संवार कर रखती।
निज रक्त मज्जा -पालती।
स्तन के दूध पिलाती॥

हल्राती -दुलराती,
है प्यार उसे दिखाती।
वह साथ में सुलाती।
रात भर जाग बिताती,
विस्तार गीले रह जाती॥

खुद भूखे रहकर भी –
बच्चे को दूध पिलाती।
सूखे बिस्तर – लिटाती।
माँ – माँ ही कहलाती
मजदूरी भले कर लाती॥

नन्हकी – नन्हका खिलाती।
देती मति – मतिमान।
मगण – मगज पिरोती।
मगन मन ही मन होती।
मखतूली – पहनाती॥

‘मंगल’ भावना भारती।
बच्चे को भाति दुलराती।
माँ! माँ है माँ होती।
ममता की माँ सूरत।
धरा पर माँ एक सूरज॥

शब्दार्थ:- मति-बुद्धि | मतिमान- बुद्धिमान | मगण – चालाकी | मगज- दिमाग | मखतूली-काले रेशम का धागा |

शुभकामनाओं के साथ।

∇ सुखमंगल सिंह – ♥
——♦——
सुखमंगल सिंह जी।
हम दिल से आभारी हैं सुखमंगल सिंह जी के प्रेरणादायक कविता (“मातृ दिवस” – ममता की माँ सूरत…।) हिन्दी में Share करने के लिए।

सुखमंगल सिंह जी के लिए मेरे विचार:

♣ “सुखमंगल सिंह जी” ने कविता के माध्यम से मां के गुणाें, त्याग और पालना का खुले मन से वर्णन किया हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविता छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविता काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

  • हिंदी कहानी – निरंतर प्रयास जरूर पढ़े।
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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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भेदभाव…।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ भेदभाव…। ϒ

⇒ Discrimination

🙂 भेदभाव …

जब जन्म दिया मुझको माँ ने,
लोगो की खुशी अवशान हुई।
पुत्री का जन्म हुआ घर में,
यह खुशी नही अपमान हुई॥

कुछ समय कटा तन्हाई में,
फिर पुत्र प्राप्ति संयोग बना।
लोगों की खुशी चरम पर थी,
जैसे ईश्वर का योग बना॥

फिर बड़ा हुए हम दोनो ही,
नित भेदभाव ही होता था।
भाई को मिलता था सबकुछ,
पुत्री के लिये जग सोता था॥

वह जिद करती गर लोगो से,
तो नित ही पीटी जाती थी।
पर पुत्र अगर जिद करता था,
वह चीज तुरत ही आती थी॥

जब और बड़े हो गये दोनों,
स्कूल मे नाम लिखाया था।
बच्ची का नाम सरकारी मे,
पर पुत्र को टॉप बनाया था॥

पुत्र को पुरा समय दिया,
पुत्री पर भार ओढाया था।
जैसे वो काम के लिये बनी,
इतना उसको उलझाया था॥

इसके भी बाद पुत्री ने –
अपने स्टेट को टॉप किया।
पर पुत्र फैल हुआ एकदम,
सब पैसा सुविधा नास किया॥

अब भी वो जिल्लत ना छूटी,
पुत्री की सादी होती है।
पुत्री अपने घर जाती है,
अपने किस्मत पर रोती है॥

कुछ समय बिता घर वाले,
एक बहू को घर मे लाये थे।
अब पुत्र बहू को परिवार,
अपने सिने से लगाये थे॥

पर समय बितते देर नही,
जब पुत्र बहू रंग दिखलाये।
बूढ़े माँ बाप को वो दोनो,
अपने जीवन से ठुकराए॥

यह घटना इतनी निर्मम थी,
जो पुत्र ने यु ही कर डाला।
जिस पुत्र को अपना मानते थे,
उसने ही बेघर कर डाला॥

जब पता चला यह पुत्री को,
आंसू की नदी प्रवाह हुई।
चल दी माँ बाप को लेने को,
लेकर घर को प्रस्थान हुई॥

यह प्रेम देखकर पुत्री का,
मां बाप ने गले लगाया था।
अपनी गलती पर रोये थे,
जो पुत्री को तडपाया था॥

क्यों भेद भाव हम करते है,
पुत्री का कोई मोल नही।
वह रत्न ही ऐसी अवनी पर,
जो होती है अनमोल सही॥

©- अशोक सिह, – आजमगढ़, उत्तर प्रदेश। ∇

ashok-singh-kmsraj51

हम दिल से आभारी हैं अशोक सिह जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता “भेदभाव।” साझा करने के लिए।

About Ashok Singh – अशोक जी के शब्दाें में – अभी मैं IAS की तैयारी कर रहा हूँ। दिल मे समाज सेवा की लौ जलाये हुए कुछ बेहतर करने को प्रयासरत हूँ और अपना सत प्रतिशत देने को तत्पर। मेरा HOBBY कविताएं लिखना, दक्षिण भारत की फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना, समाज से जुङे रहना, संगीत सुनना(खासकर पुराने) शामिल है।

अशोक सिह जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “अशोक सिह जी” ने कविता के माध्यम से लड़कियों के प्रति आज के मानव के मन में उठने वाले विचार और साेच का बखूबी अतिसुन्दर वर्णन किया हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

♥••—••♥

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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लहरें गायेंगी…।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ लहरें गायेंगी…। ϒ

⇒ Waves Gayengi ?

🙂 “लहरें गायेंगी”…।

लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे।
देखो दुनिया वालों मिलकर तारे रहते ‘
रहते हैं आकाश में पर सारे रहते॥

मिल जुलकर अपनों में खुशी मनाते,
देखा रहा मानव फिर भी भरम खाते।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

जानवर भी मिलकर एक किनारे रहते,
पर इंसान झगड़ते लड़ते मरते रहते।
इंसानों को डर है लुट जाने का लेकिन,
लेकिन वे सब मस्त पड़े पहलवानों जैसे॥

यहाँ सभी धरती के अपराधी पर मानव,
दूर कहीं पर रोता मजहब बनकर दानव।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

हवा भी दूषित और प्रदूषित हो गयी,
एक कलंकित नागिन कल ही सबको छू गयी।
जब आज की नारी पर हमला होता है,
दूर कोई मजहब कोना पकडे रोता है॥

भाई – भाई को जाने क्या हो गया है,
सारा पुराना नाता जाने क्यों खो गया है।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

अपने देश को बोलो क्या हो गया है,
अपने-अपने मजहब मेंही सबकुछ खो गया है।
इसे भी कोई परिंदा नहीं बताने वाला है,
भाइयों में जंग नया होने वाला है॥

रोज सबेरे निकल रहा जनाजा प्यार का,
क्या होगा अब अपने इस संसार का।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

इंसानों ने कितनों का सम्मान छीना है,
हैवानों सा बहनों पर कहर दीना है।
वह भी एक समय था भाई-भाई प्यार,
रोता है आज देखकर समय सारा संसार॥

उन इंसानों ने अपनी जान गंवाई,
लेकिन बहनों की लड़कर जान बचाई।
लहरें गीत गायेंगी सबको सुनाएंगी,
‘मंगल’ मीत गायेंगे सभी हँसी उड़ायेंगे॥

शुभकामनाओं के साथ।

∇ सुखमंगल सिंह – ♥
——♦——
सुखमंगल सिंह जी।
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सुखमंगल सिंह जी के लिए मेरे विचार:

♣ “सुखमंगल सिंह जी” ने कविता के माध्यम से वर्तमान समय में मनुष्यों के मन में हाेने वाले नाेक-झाेक का खुले मन से वर्णन किया हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविता छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविता काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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सुलगती हवा में…।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ सुलगती हवा में…। ϒ

⇒ कुछ कड़वी सच्ची बातें, कुछ सुझाव।

Simmering in the air ?
Some bitter truths, some suggestions.

🙂 सुलगती हवा में…।

गर्म झांझ से झंखाड़ बन गयी लताएं।
विदा हुए महावर में भीगें मधुमास।
मार्च में जो दहके थे गेरूए “पलाश” ।
बदरंग जुदा हो चुके टहनियों से उदास आज।
गर्म लपट सहती मुरझा गई –
गुलाब की पँखुरियाँ।
रुई से उड़ते नही अब खेतों में चिट्टे कास …॥

आग उगलते आसमा से –
कुम्हलाई चम्पई कलियाँ सारी।
अकुला गयी सिंदूरी गेंदे की क्यारी-क्यारी।
तवा सी सड़कों पर न झरे हरसिंगार।
सहमे गुड़हल झाँकते अब तो कभी कभार।
सिगड़ी सी सुलगती इस मई में-
पीली सरसों भी बनी धूसर गुबार …॥

शोले बरसते या भट्टियों से चली हवा।
दिखती नही हरी कोपलें दो चार।
धू धू लपट जेठ की सिकी दोपहर।
आग जैसे उगलती या की अंगार …॥

सुलगती हवा में भी मगर झूमता लहर लहर।
चिलचिलाती धूप के थपेड़ों से जो बेअसर,
भीषण लू में खिलकर मुस्कुराता –
हुआ वो पीला पीला “अमलतास” ।
हौले हौले झूलती शोख लम्बी कड़ियाँ,
या जर्द अंगूरी गुच्छे है या …
रौशन झूमर की लट्टू लड़ियाँ,
ढलती साँझ में मंथर डोलती रहती –
नन्हें गुब्बारों से लरजी लदी टहनियाँ …॥

विपरीत समय और विषम दशा में –
पल्लवन का नाम है “अमलतास” ।
सूरज की आँच से निडर डोलता।
दम टूटते मौसम में ताज़ी साँस।
विपरीत समय में पल्लवन –
का नाम “अमलतास” ।
जीने का सलीका सिखा रहा,
चुपचाप यही कि देखो तुम भी –
जीवन के झंझावतों में अडिग,
अकेले ही लहलहाना बनकर,
“अमलतास” …॥

© …(Madhu Chaturvedi Ji) _ Writer at film association Mumbai ®

हम दिल से आभारी हैं मधु जी के “सुलगती हवा में…।“ हिन्दी में कविता साझा करने के लिए।

FB Page Link : https://www.facebook.com/madhuchaturvediwriter/

मधु जी के लिए मेरे विचार:

♣ “मधु जी” ने “सुलगती हवा में…।“ कविता के माध्यम से “प्रकृति, सूर्य की किरणों और वृक्षाें के बीच हाेने वाले खट्टे मीठे संबंधों” पर विशेष दिल को छूने वाला कितना सरल सुंदर-शिक्षाप्रद व अनुकरणीय वर्णन किया हैं। “अमलतास” के वृक्षाें और प्रकृति, सूर्य की किरणों के बीच हाेने वाले खट्टे-मीठे नोच झोक का बहुत ही सरल शब्दों में अति सुन्दर वर्णन किया हैं। मधु जी – की लेखनी की खासियत है की बिलकुल खुले मन से लिखती है, इनके लेख के हर एक शब्द दिल को छूने वाले होते है। हर एक शब्द अपने आप में एक पूर्ण सुझाव देता है, फिर चाहे वो कवितायें हो या अन्य लेख। जो भी इंसान इनके लेख को दिल से समझकर आत्मसात करेगा उसका जीवन धन्य हो जायेगा।

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काले काले “सावनी” बादल…।

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⇒ कुछ कड़वी सच्ची बातें, कुछ सुझाव।

Black Black “Sawni” Cloud ?
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🙂 काले काले “सावनी” बादल…।

पुराने एलबम में माँ के बचपन की,
अनदेखी तस्वीर हाथ लग जाए जैसे…
किसी मोड़ पर “तुम” बहार लेकर,
अनायास फिर से मिलना मुझ से ऐसे॥

जेठ की तपती धूप में अचानक,
टप-टप बूंदों से तर हो जाए जैसे…
लिफ़ाफे पर दिल बना गुमनाम ख़त।
कच्ची उम्र में मिल जाए जैसे।
हैरानियाँ ले तुम मिलना मुझको ऐसे॥

भूला हुआ “नोट” गिरे किताब से या,
ट्रेन की वेटिंग लिस्ट कन्फर्म हो जाए जैसे।
ठिठुरती पूस की रात में चाय का,
एक कप हाथ में थमा दे कोई जैसे।
तुम मुझको मिल जाना ऐसे॥

खो चुकी “चाभी” खुद ब खुद नजर आए।
या तितली काँधे पर आ बैठ जाए जैसे।
काले काले “सावनी” बादल छँटते ही,
सतरंगी इंद्रधनुष इठलाकर छाए जैसे।
तुम मुझको मिल जाना कभी ऐसे॥

छिलकों में एक फल्ली साबूत फिर निकलना।
या भरी बस में खिड़की वाली सीट लपकना।
आखरी दम की फूंक और चूल्हे का दमकना।
या भीगने से पहले छत से कपड़ों का सिमटना।
मुझे इतनी तसल्लियाँ देने तुम मिलना॥

सूनी क्यारी के पहले मोगरे से खिलकर,
या तन पर चरणामृत के छींटे सा पड़ना।
मैं मशरूफ़ रहूँ भीड़ में कही और तुम,
दबे पाँव पीछे से कसकर आँख मूंदना।
बिछड़े दोस्त कभी मुझसे ऐसे मिलना॥

© …(Madhu Chaturvedi Ji) _ Writer at film association Mumbai ®

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मधु जी के लिए मेरे विचार:

♣ “मधु जी” ने “काले काले “सावनी” बादल…।“ कविता के माध्यम से “सच्चे प्यार के बीच होने वाले खट्टे-मीठे नोच झोक” पर विशेष दिल को छूने वाला कितना सरल सुंदर-शिक्षाप्रद व अनुकरणीय वर्णन किया हैं। हर एक के जीवन में दया भाव का महत्व कितना है – इसका बहुत ही सरल शब्दों में अति सुन्दर वर्णन किया हैं। मधु जी – की लेखनी की खासियत है की बिलकुल खुले मन से लिखती है, इनके लेख के हर एक शब्द दिल को छूने वाले होते है। हर एक शब्द अपने आप में एक पूर्ण सुझाव देता है, फिर चाहे वो कवितायें हो या अन्य लेख। जो भी इंसान इनके लेख को दिल से समझकर आत्मसात करेगा उसका जीवन धन्य हो जायेगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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नेकियाँ कोई दरिया में कब तक बहा ले…।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ नेकियाँ कोई दरिया में कब तक बहा ले…। ϒ

⇒ कुछ कड़वी सच्ची बातें, कुछ सुझाव।

How long have you been upright in a river ?
Some bitter truths, some suggestions.

🙂 नेकियाँ कोई दरिया में कब तक बहा ले।

नेकियाँ कोई दरिया में कब तक बहा ले।
इंसाफ का तराजू गुनहगार के हवाले।
महज़ ख़याल तो नही वो “ऊपरवाला”।
मासूम चेहरे जब बेशुमार गम उठाए।
बुत, दरगाह, मंदिर में तुझको ढूँढते है।
तू कहाँ है तब हम अक्सर सोचते है …॥

“सच” पर इल्जामों का घना साया।
ईमान को कटघरे में तन्हा पाया।
“फ़रेब” मुस्कुराता रहा इत्मीनान से।
मायूस आँखों से ये सितम देखते है।
तू है कहाँ अक्सर सोचते है …॥

तमागेदारों से हारकर “बेगुनाही” झुकी,
मुफ़लिस की मौत पर सियासत न रुकी।
“गरीबी” से बड़ा कोई गुनाह नही यहाँ।
तमाम नाइंसाफी तेरी ज़मी पर देखते है।
तू मशरूफ कहाँ अक्सर सोचते है …॥

जर्रा-जर्रा जैसे दर्द मीलों है सीजा।
कतरा-कतरा खारे पानी में भीगा।
बेबस सी दास्ताँ इन कच्चे घरों की।
रास्तों से हम आँख मूंद कर गुजरते है।
बुत, ग्रन्थ, दरगाह, मंदिर में ढूंढते है।
तू मशरूफ कहाँ अक्सर सोचते है …॥

© …(Madhu Chaturvedi Ji) _ Writer at film association Mumbai ®

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मधु जी के लिए मेरे विचार:

♣ “मधु जी” ने “नेकियाँ कोई दरिया में कब तक बहा ले…।“ कविता के माध्यम से “वर्तमान समय में दया भाव और उसके परिणाम” पर विशेष दिल को छूने वाला कितना सरल सुंदर-शिक्षाप्रद व अनुकरणीय वर्णन किया हैं। हर एक के जीवन में दया भाव का महत्व कितना है – इसका बहुत ही सरल शब्दों में अति सुन्दर वर्णन किया हैं। मधु जी – की लेखनी की खासियत है की बिलकुल खुले मन से लिखती है, इनके लेख के हर एक शब्द दिल को छूने वाले होते है। हर एक शब्द अपने आप में एक पूर्ण सुझाव देता है, फिर चाहे वो कवितायें हो या अन्य लेख। जो भी इंसान इनके लेख को दिल से समझकर आत्मसात करेगा उसका जीवन धन्य हो जायेगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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दराजों में गर्द किताबें खंडहर सी हुई जा रही है…।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ दराजों में गर्द किताबें खंडहर सी हुई जा रही है…। ϒ

⇒ कुछ कड़वी सच्ची बातें, कुछ सुझाव।

Dust Books ruins drawers being swollen.
Some bitter truths, some suggestions.

दराजों में गर्द खाती किताबें खंडहर सी हुई जा रही है।
धड़कते दिल अब “किताबों” में चेहरे छिपाते नही है।
तोहफों की फेहरिश्त से भी ये हटती जा रही है।
पन्ने पलटते हुए ज़ेहन में उन की चहल कदमी।
बेख्याली में किताब में खत दबाने की लत जा रही है।
दराजों में गर्द खाती किताबें खंडहर सी हुई जा रही है…..॥

मोबाइल में मशरूफ रहने वाली ये नस्ल बेख़बर।
उलझी साँसें रजनीगंधा बन कागज़ को महका रही है।
जिल्द में आज तलक उंगलियों की खुश्बू मगर।
दरकते पन्नों को अनदेखी की घुन खा रही है।
दराजों में गर्द किताबें खंडहर सी हुई जा रही है…..॥

कभी दुनिया भूला देते थे इनमें खोये हुए।
आज फ़क़त अलमारी का सामान हुई जा रही है।
तल्ले में चढ़ी वो किताब नाउम्मीद हो सोचती,
हमारे हिस्से का वक़्त “ दुनिया” मोबाइल में गँवा रही है।
दराजों में गर्द किताबें खंडहर सी हुई जा रही है…..॥

देर रात के साथी थे गुल्लू , निर्मला, बड़े भाईसाहब,
मोबाइल की खातिर सिरहाने से भी हटाई जा रही है।
रात भर सीने पर धड़कने गिनती थी कभी।
अब अँधेरे में मोबाइल की रौशनी आ रही है।
दराजों में गर्द किताबें खंडहर सी हुई जा रही है…..॥

किताबों में सूखे गुलाब अमानत थे किसी के,
ये नज़ाकत हाल बेमानी हुई जा रही है।
अब भी कागज़ी इत्र की आरज़ू में,
बाग़ की चंद कलियाँ उदास झड़ी जा रही है।
दराजों में गर्द किताबें खंडहर सी हुई जा रही है…..॥

चाचा-चौधरी से तो तेज़ दिमाग कंप्यूटर भी हारे,
साबू को अकेला छोड़ नन्ही उंगलियाँ टैब चला रही है।
एक दिन ज़माना ऊबेगा खोखली भौतिकता से,
“गोदान“ की धनिया गोबर को समझा रही है।
दराजों में गर्द किताबें खंडहर सी हुई जा रही है…..॥

© …(Madhu Chaturvedi Ji) _ Writer at film association Mumbai ®

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मधु जी के लिए मेरे विचार:

♣ “मधु जी” ने “मगर एक शर्त है…।“ कविता के माध्यम से “किताबो से बन रही दूरियों” पर विशेष दिल को छूने वाला कितना सरल सुंदर-शिक्षाप्रद व अनुकरणीय वर्णन किया हैं। हर एक के जीवन में क़िताबों का महत्व कितना है – इसका बहुत ही सरल शब्दों में अति सुन्दर वर्णन किया हैं। मधु जी – की लेखनी की खासियत है की बिलकुल खुले मन से लिखती है, इनके लेख के हर एक शब्द दिल को छूने वाले होते है। हर एक शब्द अपने आप में एक पूर्ण सुझाव देता है, फिर चाहे वो कवितायें हो या अन्य लेख। जो भी इंसान इनके लेख को दिल से समझकर आत्मसात करेगा उसका जीवन धन्य हो जायेगा।

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In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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मगर एक शर्त है…।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ मगर एक शर्त है…। ϒ

⇒ कुछ बातें, कुछ सुझाव।

But there is a condition.
Some things, some suggestions.

मगर एक शर्त है…..

पुरुष “औरत” की आज़ादी का तरफ़दार है,
मगर उसकी कुछ शर्तें है …..।

वो हिमायती है खुला आकाश देने का,
पैरवी करता है ऊँचाइयों को नापने देने का,
मगर उसकी कुछ शर्तें है …..।

औरत की तरक्की का रहनुमा भी बन रहा है,
हाँ ! वो पुरुष खुद को आज़ाद ख्याल कहता है।
मगर उसकी चंद शर्तें हैं …..।

आसमा पर दायरों के निशान वो खींचेगा,
शर्त यह है कि स्त्री के परों पर कायदों के,
भार का फैसला उसका होगा।

“आगाज़” की लगाम उसकी मर्जियों पर और
पैमानों की सरहदें भी वो ही तय करेगा।
औरत की ख्वाहिशों की डोर उसके काबू में,
पैरों में बेड़ी की कड़ियाँ भी वो ही गिनेगा …..।

आसमां पर ठौर की मोहलत उसकी दी हुई हो और…..
दिशा बदलने भी उसको स्त्री की अर्जियाँ, गुजारिशे चाहिए।

दहलीज़ की ईंट वो रखे और
उसकी इजाज़त का ही हो “तौर-ए-सफर”
उसके मुताबिक “हद-ए-मंजिल”
औरत को कटघरे में खड़ा करने …..
मुक्कमल इंतज़ाम भी करेगा।

तमाम उसूलों की मंजूरी के बाद ही वो,
औरत के हक़ की वकालत करेगा।

“औरत को कितना सोचना है ये भी वो सोचेगा”
खुद थामेगा स्त्री के ख्वाबों का परचम,
पुरुष आज़ाद ख्याल है मगर एक शर्त है …..।

© …(Madhu Chaturvedi Ji) _ Writer at film association Mumbai ®

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मधु जी के लिए मेरे विचार:

♣ “मधु जी” ने “मगर एक शर्त है…।“ कविता के माध्यम से Women’s Freedom पर विशेष दिल को छूने वाला कितना सरल सुंदर-शिक्षाप्रद व अनुकरणीय वर्णन किया हैं। हर एक के जीवन में एक नारी ke Freedom का महत्व कितना है – इसका बहुत ही सरल शब्दों में अति सुन्दर वर्णन किया हैं। मधु जी – की लेखनी की खासियत है की बिलकुल खुले मन से लिखती है, इनके लेख के हर एक शब्द दिल को छूने वाले होते है। हर एक शब्द अपने आप में एक पूर्ण सुझाव देता है, फिर चाहे वो कवितायें हो या अन्य लेख। जो भी इंसान इनके लेख को दिल से समझकर आत्मसात करेगा उसका जीवन धन्य हो जायेगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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मगर यह जरूरी नहीं कि…।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ मगर यह जरूरी नहीं कि…। ϒ

प्यार…

 ____ 🙂 मगर यह जरूरी नहीं कि…।

मगर यह जरूरी नहीं कि…

प्रेम पर हक़ तो नही किसी का भी।
मगर यह ,ज़रूरी नही कि….
हम जिसे चाहे, बहुत दिल से,
वह भी चाहे दिल से हमे।
ज़बरदस्ती किसी से प्यार…
किया, नही जा सकता।
और ना ही ज़बरदस्ती किसी से,
प्यार लिया जा सकता है।

♦—♦

किसी को देख कर भी नज़र अंदाज़ करना।
उससे आँख नही मिलाना उससे बात नही करना।
एक तरह से उसका अपमान करना ही है।
लेकिन कुछ लोग अपमान का बदला ज़रूर लेते है।
लेकिन कुछ लोग इस अपमान को भूल जाते है।
और फिर भी बात करनी बंद नही करते।

♦—♦

दूसरो को खुश रखते रखते, ‘अक्सर’
कुछ लोग अपना दिल बहुत दुंखाते है।
चेहरे पर नक़ली मुसकराहट ला ला कर।
अंदर ही अंदर घुटने चले जाते है।

♦—♦

अच्छे इन्सान ने अच्छा जाना मुझे।
बुरे इंसान ने बुरा जाना मुझे।
जैसी जिसकी साेच थी वैसे ही,
उसने जाना पहचाना मुझे।

::) जरूर पढ़े – प्रसन्नता बाहर से नहीं अंदर से आती है।

♦—♦

माता पिता बच्चों को जैसे संस्कार बचपन से देते है।
बच्चे वैसे ही बडे हो कर बनते है – अच्छे या बुरे।
अगर माता-पिता के मन मे सब की सेवा करने की भावना रहती है।
तो बच्चों मे भी बडे हो कर वही भावना आती है, बच्चे
जो देखते है वही करते है और बडे हो कर वैसे ही बनते है।

♦—♦

ज़िंदगी में कभी उदास ना होना।
कभी किसी बात पर निराश ना हाेना।
कभी ख़ुद को लाचार ना महसूस करना।
क्योंकि जिंदगी संघर्ष है चलती रहेगी।
कभी अपने जीने का अन्दाज़ ना खाेना।
क्योंकि हर दुँख के बाद सुख और खुशी का,
सूरज तो निकलता ही है – हर हाल मे।

♦—♦

रिश्ते बनाना इतना आसान है,
जैसे मिट्टि पर मिट्टी से मिट्टि लिखना,
और रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल,
जैसे पानी पर पानी से पानी लिखना।

रिश्ते निभाने के लिये सब से पहले,
सहनशक्ति चाहिये वह आज कल,
किसी के पास नही है सब ख़ुद को,
सही और दूसरे को ग़लत समझते है।

♦—♦

माता पिता बच्चों को अगर कभी डाँटते है।
तो उन्हें बिलकुल बुरा नही लगता क्योंकि,
वह बच्चों की भलाई के लिये ही डाँटते है।
लेकिन,…
अगर सास ससुर बहु को कुछ बोल दे तो,
बहुत बड़ी कहानी बन जाती है,
और बहुत बुरा लगता है।
अगर सास ससुर को भी माता पिता समझो तो,
फिर भला लड़ाई किस बात की।

अपने आंतरिक गुणों की पहचान करें और अपनी सफलता के लिए इसका उपयोग करें। -KMSRAJ51

©- विमल गांधी जी। ∇

Vimal Gandhi-kmsraj51
विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी Quotes & Poems साझा करने के लिए।

विमल गांधी जी के लिए मेरे विचार:

♣ “विमल गांधी जी” की कविताआे और Quotes के हर एक शब्द में अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं और Quotes छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं और Quotes काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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हे अमर देश के ज्योति पुंज।

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ϒ हे अमर देश के ज्योति पुंज। ϒ

Hey Amar Desh ke Jyoti Punj

“हे अमर देश के ज्योति पुंज”

हे अमर देश के ज्योतिपुंज।
हे बलिदानी करुणावतार।
हे राष्ट्रविंब भारत दर्पण।
हे भगत बन्धु तुमको प्रणाम॥

ये देश की अपनी गरिमा है।
जो कण-कण में फैला प्रकाश।
कुछ राष्ट्र प्रेम में त्याग कियें।
फ़ासी तक को हो गये तैयार॥

वो माता थी एक पूज्य बिम्ब।
जिसने इस वीर को जन्म दिया।
भारत माता के खातिर जो…
हर पल हर क्षण सत्कर्म किया॥

⇒ स्वाति की उन बून्दों पर….. जरूर पढ़े।

आर्यावर्त में थी विपदा।
अंग्रेजों ने अधिकार किया।
कुछ ही विरोध कर पाये थे।
बाकी ने गुलामी मान लिया॥

इन चन्द धरा के सपूतों में-
भगत, बोश आजाद हुए।
सुखदेव गुरू भी अड़े रहें।
भारत माँ को फरियाद हुएं॥

इन वीर पुरुष के वीर कर्म।
“अलक” दिल में रोज सजातें हैं।
जो देश हेतु बलिदान हुएं।
उनको हम शीश नवातें हैं॥

©- अशोक सिह, – आजमगढ़, उत्तर प्रदेश। ∇

ashok-singh-kmsraj51

हम दिल से आभारी हैं अशोक सिह जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता “हे अमर देश के ज्योति पुंज।” साझा करने के लिए।

About Ashok Singh – अशोक जी के शब्दाें में – अभी मैं IAS की तैयारी कर रहा हूँ। दिल मे समाज सेवा की लौ जलाये हुए कुछ बेहतर करने को प्रयासरत हूँ और अपना सत प्रतिशत देने को तत्पर। मेरा HOBBY कविताएं लिखना, दक्षिण भारत की फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना, समाज से जुङे रहना, संगीत सुनना(खासकर पुराने) शामिल है।

अशोक सिह जी के लिए मेरे विचार: 

♣ “अशोक सिह जी” ने देश की आज़ादी के आधार स्तम्भ – राजगुरु, भगत सिंह और सुखदेव के देश प्रेम व बलिदान का अतुलनीय वर्णन किया हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। कविताऐं छोटी और सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कविताओं काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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Filed Under: 2018-Kmsraj51 की कलम से….., अशोक सिह।, हिंदी कविता, हिन्दी साहित्य, हिन्दी-कविता Tagged With: desh bhakti par geet, desh bhakti par kavita, desh bhakti poem in hindi, छोटी देशभक्ति कविताएँ, देश भक्ति कविता, देश भक्ति गीत, देश भक्ति पोएम, देशभक्ति कविता बच्चों के लिए, हे अमर देश के ज्योति पुंज

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