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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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भोला शरण प्रसाद

जरूरत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जरूरत। ♦

मेरे दोस्त, तुम्हारी नजरें गर पाक है,
तो कसम खुदा की, पर्दे की जरूरत नहीं।
काले – काले बादल को गर बरसना है,
तो उसे गरजने की जरूरत नहीं।

बेइंतहां मुहब्बत करते हो अगर,
तो इज़हार क्यूं नहीं करते।
मेरे दोस्त मुहब्बत छुपाए नहीं छुपती,
इसे छुपाने की जरूरत क्या है।

चाहे रहो भौंरा या गिद्ध बन जाओ,
गर तेरे खून में फितरत है शिकार करने की,
तो इस सैयाद को डरने की जरूरत क्या है।
तुम्हारी आंखें ही काफी हैं रमजा के लिए,
बोलने की जरूरत क्या है।

मैं तेरी ख़ामोशी समझता हूं, मेरे दोस्त,
कुछ भी बोलने की जरूरत क्या है।
सच बोलना और लिखना मेरी फितरत है बुरी,
अंजाम से डरता नहीं, कभी विचार करता नहीं।

नाज़ है तुझपे, तेरे जैसा होशियार तो नहीं,
रहता हूं जमीन पर, पर जमींदार नहीं।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सच्चा प्यार एक-दूसरे के लिए एक मजबूत, गहरा और स्थायी स्नेह है। यह किसी के लिए गर्मजोशी और देखभाल की भावना है, और उन्हें खुश करने की इच्छा है। सच्चे प्यार में आपसी सम्मान, विश्वास और निस्वार्थता की भावना के साथ-साथ एक-दूसरे के लिए त्याग करने की इच्छा शामिल है। यह एक ऐसा प्यार है जो बिना शर्त है, जिसका अर्थ है कि यह एक-दूसरे के कार्यों या भावनाओं पर निर्भर नहीं है, बल्कि स्वतंत्र रूप से और बिना शर्त के दिया जाता है। सच्चा प्यार एक दुर्लभ और खास चीज है, और यह उन लोगों के लिए बहुत खुशी और खुशी ला सकता है जो इसका अनुभव दिलसे करते हैं।

—————

यह कविता (जरूरत।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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नव वर्ष समारोह 2023

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नव वर्ष समारोह – 2023 ♦

हम गरीबों के लिए क्या नया साल साहब,
दो वक्त की रोटी के लिए हो गई सुबह से शाम साहब।
मेरे होठों की मुस्कान सबको दिखती है,
मगर दिल का जख्म किसी को दिखती नहीं।

मेरी आंखों से निकले आंसू सबको दिखती है,
मेरी आंसूओं में छिपा दर्द किसी को दिखती नहीं।
इंसान मैं भी हूं, मेरे दिल में है एक अरमान,
नए साल के जश्न में देखूं , सबके चेहरे पे मुस्कान।

तोहफा देने के काबिल नहीं,
पैसा हो जेब में दुनिया सुहानी लगती है।
दौलत में है इतनी ताकत, मिट जाती है दूरियां,
सारी दुनिया अपनी लगती है।

इल्तज़ा है खुदा से, मिटा दो सारी दूरियां,
ना कोई अमीर ना कोई गरीब, ना हो कोई मजबूरियां।
धरती ही जन्नत बन जाए,
शफ़त पे हो तबस्सुम, उल्फत के तराने।

गले से गले मिलें, जो भी आएं नया साल मनाने,
गया दिसंबर, जनवरी आई, नए साल की सबको बधाई।
हैं बख्ताबर, भारत देश की माटी पाई,
सभी देश वासियों को मेरी तरफ से नए साल की हार्दिक बधाई।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — क्या नया साल 2023 सभी के लिए खुशियाँ लेकर आएगा? या फिर गरीबों के लिए नए साल का कोई मतलब नहीं। नया साल केवल अमीरों के चोचले है। क्या केवल तारिक बदलेगा या फिर ये नया साल सभी के लिए खुशियों का सौगात लेकर आएगा? आओ हमसब मिलकर ये संकल्प ले इस नए साल 2023 में खूब मेहनत करेंगे और नए भारत के ग्रोथ में सहयोग करेंगे, जरूरतमंदों की मदद करेंगे। सभी देशवासियों को मेरी तरफ से नए साल की हार्दिक बधाई।

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यह कविता (नव वर्ष समारोह – 2023) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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भूखा इंसान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भूखा इंसान। ♦

चाहे हो किसी की सरकार,
ना खुश हो ना तू नाज़ कर।
गर हो भारत मां के सच्चे सपूत,
तहे दिल से भूखों का इलाज कर।

वो होंगे कितने बेशर्म,
जो दबा कर रखे हैं संपत्ति करोड़ों की।
गर हो तुम सच्चे सपूत,
भ्रष्टचारियों के खिलाफ़ आवाज़ बुलन्द कर।

ऐसे कानून का ईजाद कर,
छीन न पाए कोई गरीबों की रोटियां।
फिर तू जो चाहे तेरी मर्जी,
जनता जनार्धन पर आजीवन राज कर।

गरीबों की कोइ सुनता नहीं,
उनके लिए लड़ते लड़ते खुद हो गए अमीर।
जनता है भोली भाली,
इनको बताओ और इंकलाब का आगाज़ कर।

कोइ नहीं बांटता मुफ्त में रेवड़ी,
आत्मसम्मान से कैसा सौदा,
झूठी रेवड़ी से इंकार कर।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नेता लोग झूठा वादा कर जीत जाते है और गरीबों की कोइ सुनता भी नहीं, उनके लिए लड़ते-लड़ते खुद हो गए अमीर सभी नेता लोग। क्यों नहीं किसी ऐसे कानून का ईजाद करें की कोई भी छीन न पाए कोई गरीबों की रोटियां। फिर तू जो चाहे तेरी मर्जी, जनता जनार्दन पर आजीवन राज कर। बेचारी जनता है भोली भाली, इनको बताओ और इंकलाब का आगाज़ कर, इन्हे अपनी वास्तविक शक्ति से अवगत कराएं। एक बात सदैव ही याद रखें – कोई भी आपको इस संसार में मुफ्त में कुछ भी नहीं देता, उसका कुछ न कुछ स्वार्थ छीपा ही रहता है। गर हो भारत मां के सच्चे सपूत, तहे दिल से भूखों का इलाज कर तू। जरा सोचो वो होंगे कितने बेशर्म, जो दबा कर रखे हैं संपत्ति करोड़ों की। गर हो तुम सच्चे सपूत, भ्रष्टचारियों के खिलाफ़ आवाज़ बुलन्द कर, और उन्हें उनके कर्मों की सजा दे जल्द से जल्द।

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यह कविता (भूखा इंसान।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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अहंकार विनाश की जननी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अहंकार विनाश की जननी। ♦

पद, प्रतिष्ठा, दौलत, शक्ति, अहंकार की जननी है। अहंकार विनाश की पहली सीढ़ी है। रावण बहुत ज्ञानी था, अगर वास्तव में ज्ञानी होता तो आज पूज्य होता। ज्ञानी का अहंकारी होना, दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं अपितु, उसे विनाशकारी बना देता है। इतिहास गवाह है- सुन्दर स्त्री बाद में शूर्पनखा निकली, सोने का हिरण बाद में मारीच निकला और भिक्षा मांगने वाला साधु रावण निकला, सभी रुप बदलने की कला में निपुण थे। कला-ज्ञान का गलत उद्देश्य एंव उपयोग करने के कारण समाज में नफरत की दृष्टि से देखे जाते हैं- हर जगह भ्रम, शंका और अविश्वास पैदा करने वाले कभी सम्मान नहीं पा सकते।

⇒ प्रेम और सम्मान का आधार विश्वास है।

प्रेम और सम्मान का आधार विश्वास है, अशोक वाटिका में सीता मां राम नाम की मुद्रिका मिलने पर विश्वास कर लेती है। उन्हें प्रभु राम पर इतना विश्वास है। रामायण विश्वास करना ही तो सिखाती है। माँ कठोर हुई लेकिन विश्वास नहीं छूटा, परिस्थितियाँ विषम हुई लेकिन विश्वास बना रहा, लक्ष्मण को मरणासन्न देखा लेकिन धैर्य और विश्वास बना रहा, वानर और रीछ की सेना थी लेकिन विजय अवश्य मिलेगी, ये विश्वास बना रहा, प्रेम की परीक्षा हुई लेकिन विश्वास नहीं टूटा चाहे भरत का विश्वास हो, शबरी का हो, विभीषण का हो, जामवंत का हो, या किसी भी सहयोगी का हो-विश्वास ही नहीं, अगाध विश्वास था। हर इंसान का जीवन शंका भ्रम, निराशा असफलता, दुःख और रावण जैसे पापियों से भरा है, केवल विश्वास की नौका ही इस भवसागर से पार कर सकती है।

⇒ ज्ञान और ज्ञानी के कारण ही मानव सर्वश्रेष्ठ प्राणी।

आज ज्ञान और ज्ञानी के कारण ही मानव सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना जाता है। महर्षि वाल्मिकी, महर्षि वेद व्यास, महर्षि दयानन्द सरस्वती, स्वामी विवेकानन्द, गुरु नानक जी, गौतम बुद्ध, महर्षि महेश योगी, महर्षि योगानन्द अपने ज्ञान एंव अनुभव से प्रभु से निकटता का मार्ग बताकर मानव समाज को सुखशांति से जीने का रास्ता दिखाया। अंधविश्वास के पर्द को हटाया। किसी गुरु ने स्वंय की पूजा करने की वकालत नहीं की। श्रद्धा और प्रेम से उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनकी भक्ति एंव उनके प्रति सम्मान है।

⇒ हर मुसीबत में अन्तरात्मा की आवाज सुनने वाले।

जब उल्टी दृष्टि से कोई दुनिया को देखेगा तो हर वस्तु उल्टी दिखाई देगी। यदि अंधेरे कमरे में अपने को बन्द कर लें तो समस्त ब्रह्माण्ड अंन्धकार से भरा दिखाई देगा और प्रकाश में हर चीज स्पष्ट एंव चमकती हुई दिखाई देगी, हर इन्सान ईश्वर के हाथ का खिलौना है जो खुद ईश्वर बन बैठेगा उसकी हालत रावण और कंश जैसी होगी, संसार के सभी जीव जन्तुओं को परमात्मा भाव से देखो, अपने को सेवक समझ कर, स्वामी बनकर नहीं। हर मुसीबत में अन्तरात्मा की आवाज सुनने वाले, परमात्मा के करीब होने का अनुभव करते हैं, पूर्ण शांति उनके कदमों को चूमती है।

⇒ ईर्ष्या का भूत।

ईर्ष्या का भूत मानसिक तनाव उत्पन्न करने में मुख्यरुप से अपनी भूमिका अदा करता है। पराई उन्नति देखकर जलना ज्ञानी का नहीं, अज्ञानी का स्वभाव है। सीख ग्रहण करना ज्ञानी को महाज्ञानी बना देता है। शिष्ट, सहृदय, निष्कपट और मित्रता पूर्ण व्यवहार ही प्रसन्न बने रहने, तनाव मुक्त होने के लिए पर्याप्त है। महाज्ञानी वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजिनियर, शिक्षक संयमित रहते हुए मानव समाज के कल्याण के लिए सदा तत्पर रहते है। क्रोध और अभिमान से कोसों दूर, मानसिक शक्ति की कमी हो जाने पर क्रोध का वेग विवेक से नहीं रुकता। क्रोध आने पर विवेक दूर भाग जाता है।

⇒ क्रोध का लक्ष्य हानी करना होता है।

जब उन्मत्त हाथी जंजीर तोड़ लेता है तो महावत दूर भाग जाता है। क्रोध का लक्ष्य हानी करना होता है। हानी होने के बाद मनुष्य अपने को कोसने लगता है, निराशावादी बन जाता है। चतुराई स्वंय खत्म हो जाती है। क्रोध का निराकरण विरक्ति और प्रेम से होता है। संसार के प्रति अमोह का व्यवहार तथा सभी प्राणियों के प्रति मैत्री भावना रखने पर, क्रोध की स्थिति में अविवेक युक्त काम करने से रोक देता है।

अगर दुर्योधन मैत्री भाव रखता तो “महाभारत” नहीं होता, युद्ध से केवल विनाश होता है। प्रेम से निर्माण होता है। स्वार्थ और सर्वोच्च होने का अभिमान मानव समाज को खोखला कर देता है। सेवाभाव, “वसुधैव कुटुम्बकम” का भाव ही मानव समाज की रक्षा कर सकता है। अगर प्राचीन काल में सभी विद्यायों को गुप्त न रखकर सार्वनिक किया जाता तो, प्राचीन भारत का ज्ञान जो अद्धितीय था, वह आज भी होता, गुप्त रखने के कारण आज लुप्त हो गया।

“कद्रदानों के लिए कद्रदान हूँ मैं,
बेरहम नहीं, मेहरबान हूँ मैं।
भरोसा है जिहें मुझ पर
उनके के लिए कभी दोस्त, कभी इन्सान हूँ मैं॥”

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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नैतिक शिक्षा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नैतिक शिक्षा। ♦

नैतिक मूल्यों का ह्रास —

सच्चाई से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता जीवन के हर क्षेत्र में नैतिक मूल्यों का ह्रास दृष्टिगोचर हो रहा है। राजनीति हो, व्यव्साय हो, समाज हो, कार्यालय हो या विद्यालय, हर जगह मानवीय मूल्यों में गिरावट परिलक्षित हो रही है वर्त्तमान समय में मानव इतना स्वार्थान्ध हो गया है कि उसे अपने स्वार्थ के अलावा, कुछ दिखाई नहीं देता। सिध्दान्तों, आदर्शों एंव मान्यताओं का विचार केवल किताब के पन्नों में सिमट कर रह गया है।

परमार्थ का चिन्तन व्यर्थ समझा जाने लगा हर इन्सान यह साबित करने में लगा है कि उससे अच्छा, ईमानदार कोई नहीं, फिर इतना अपराध, अन्याय कौन कर रहा है। समाज एंव देश का चारित्रिक पतन क्यों हो रहा है। हर आदमी दूसरे को दोषी मानता है, सुधार चाहता है लेकिन स्वंय को छोड़कर, यह उत्तरदायित्व केवल विद्यालय का
नहीं है। कोई भी विघालय व्देष, घृणा, हिंसा, धूसखोरी, मिलावट, धोखा एंव भ्रष्टाचार की शिक्षा नहीं देता है।

चारित्रिक पतन को रोकने के लिए…

गाय हमेशा शुध्द दूध देती है लेकिन पानी मिलाने वालों की कमी नहीं है। सुगन्धित फूलों को बचाने के लिए जहरीले पौधों को हटाना ही होगा। जब तक नैतिक शिक्षा, ईमानदारी, भाईचारा, देश प्रेम का भाव नहीं होगा तब तक भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा। नैतिक शिक्षा द्वारा मनुष्य के जीवन में सुख, शांति, प्रेम, भाईचारा, त्याग, सौहार्द एंव विश्ववंधुत्व की भावना जागृत होती है। जब तक चारित्रिक उत्थान न हो तब तक सामजिक, राजनीतिक, आर्थिक एंव वैज्ञानिक प्रगति व्यर्थ है। इच्छा शक्ति, दृढ संकल्य एंव ईमानदारी ही सभी कार्यों को सफल बनाता है। नैतिक शिक्षा-धर्म, भाषा, वर्ण, लिंग, जाति, ऊँच-नीच आदि की भावना समाप्त कर निष्पक्ष रुप से विचार करने
एंव व्यव्हार करने की प्रवृति जागृत करता है। चारित्रिक पतन को रोकने के लिए समाज का शिक्षित होना अति आवश्यक है।

सही शिक्षा-योग्य, कुलीन, अनुभवी, चरित्रवान, शिक्षक ही दे सकते हैं हर क्षेत्र में, हर व्यक्ति में, हर संस्था में सुधार की जरुरत है- नए समाज एंव देश के निर्माण के लिए।
भ्रष्टाचार तभी खत्म होगा जब कोई भ्रष्ट न हो।

“येंषा न विघा न तपो न दान
झानं न शीलं न गुणो न धर्म ।
ते मर्त्यलोके भूवि भारभूतां
मनुष्य रुपेण मृगाश्चरन्ति ।।”

शिक्षा ही अस्त्र एंव शस्त्र दोनों है। सर्प को देखकर मनुष्य खौफ खाता है लेकिन चन्दन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। शिक्षा और योग्य शिक्षक ही इन्सान को चन्दन बनाते है। जो अपनी सुगन्ध, त्याग, नम्रता, बुद्धि, से देश का नाम रौशन करते हैं। इन्सान किसी को दोषी ठहराने के लिए अंगुली उठाता है तो तीन अंगुली उसके स्वंय के तरफ इशारा करती है।

“प्रेम की मीनार उठाएं,
नफरत की दीवार गिराएं।
झूठ की बाढ़ को बांध न सकें तो,
सच की राह में रोड़ा भी न बने॥”

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सही शिक्षा-योग्य, कुलीन, अनुभवी, चरित्रवान, शिक्षक ही दे सकते हैं हर क्षेत्र में, हर व्यक्ति में, हर संस्था में सुधार की जरुरत है- नए समाज एंव देश के निर्माण के लिए। भ्रष्टाचार तभी खत्म होगा जब कोई भ्रष्ट न हो। नैतिक शिक्षा। शिक्षा ही अस्त्र एंव शस्त्र दोनों है। सर्प को देखकर मनुष्य खौफ खाता है लेकिन चन्दन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। शिक्षा और योग्य शिक्षक ही इन्सान को चन्दन बनाते है। जो अपनी सुगन्ध, त्याग, नम्रता, बुद्धि, से देश का नाम रौशन करते हैं। इन्सान किसी को दोषी ठहराने के लिए अंगुली उठाता है तो तीन अंगुली उसके स्वंय के तरफ इशारा करती है।

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यह लेख (नैतिक शिक्षा।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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शिक्षक की महिमा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षक की महिमा। ♦

कांटों में उलझा हुआ है,
मेरे दिल का ख्वाब।
बच्चा है हर आंगन का,
खिलता हुआ गुलाब।

कभी न भूलो अपना काम,
जग में तुझे करना है नाम।
जब भी आए संकट तुझको,
लेना तुम प्रभु का नाम।

मैं रोता हुआ गया,
विद्यालय के प्रांगण में।
बहुत बच्चे बिलख रहे थे,
मैंडम, सर दौड़े आए,
लेलिया अपने आलिंगन में।

घुटनों से रेंगते-रेंगते,
कब पैरों पर खड़ा हुआ।
शिक्षक-शिक्षिका के,
ममता की छांव में,
न जाने कब बड़ा हुआ।

कोई अभियन्ता, कोई नेता,
कोई बना अधिकारी।
कोई डाक्टर कोई सैनिक,
तो कोई बना कर्मचारी।

जो लोहे को कनक बनाया,
वो सम्मान कभी न पाया।
जिसकी दानिशमंदी ने,
सबको अब्बल बना दिया।

आज विवश हो कर सर झुकाता है,
जिसकी शिक्षा ने सबको मानव बना दिया।
बार-बार नमन है गुरु चरणों में,
मुझे काबिल बनाने के लिए।

मैं तो राह में पड़ा कंकड़ था,
कोटी-कोटी नमन,
मुझको हीरा बनाने के लिए।
मैं सीधा-साधा “भोला” – भाला,
सबकी नजरों में अच्छा हूँ।

चाहे मैं कुछ भी बन जाऊँ,
मैं आज भी आपका बच्चा हूँ।
गुरु – शिष्य का नाता देखो,
पिता – पुत्र से कहीं महान।

कली को आपने फूल बनाया,
महक उठा सारा हिन्दुस्तान।
गुरु बिन ज्ञान कोई न पाया,
अनुभव की आप हो खान।

शिष्य देखता प्यासी नजरों से,
गुरु होते अमृत की खान।
माँ शारदा, भगवान चित्रगुप्त से,
पहले वंदन, करता हूँ गुरु चरणों में।

कैसे लिखूं महिमा उनकी,
अभिलाषा है मेरी,
हाथ हो गुरु का,
जब शीश हो गुरु चरणों में।

कलम में वो ताकत है,
जो तलवार में नहीं होती।
कई सिकन्दर डूब गये,
वक्त के चक्कर में।
झोपड़ी जैसी रौनक,
दरबार में नहीं होती।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — “गुरु समान दाता नहीं, याचक शीष समान। तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान॥” भावार्थ:- “गुरु के समान कोई दाता नहीं और शिष्य के सदृश याचक नहीं। त्रिलोक की सम्पत्ति से भी बढ़कर ज्ञान-दान गुरु ने दे दिया।” गुरु और पारस – पत्थर में अन्तर है, यह सब सन्त जानते हैं। पारस तो लोहे को सोना बनाता है, परन्तु गुरु शिष्य को अपने समान महान बना लेता है। गुरु कुम्हार है और शिष्य घड़ा है। गुरु ही हैं जो भीतर से हाथ का सहारा देकर, बाहर से चोट मार-मारकर और गढ़-गढ़ कर शिष्य की बुराई को निकालते हैं।

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यह कविता (शिक्षक की महिमा।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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आतंकवाद।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आतंकवाद। ♦

आओ साथ मनाऐं ईद और होली,
क्यूं चलाते हो अपनों पर गोली।
गोली का जवाब सदभाव नहीं हो सकता,
हत्या करने वालों के लिए,
अहिंसा का प्रस्ताव हो नहीं सकता।

नाग कभी शांति का बीज बो, नहीं हो सकता,
लाख दूध पिलाओं भेड़िया शाकाहारी हो नहीं सकता।
इतिहास गवाह है हत्यारी बन्दूको ने,
कभी तर्पण नहीं किया,
आतंकवाद ने आज तक समर्पण नहीं किया।

गर शांति चाहिए कश्मीर की वैली में,
कलेजा ठोक कर उत्तर देना सिखो।
इजरायल की शैली में आतंकवाद तो,
कुचला जाता है, पत्थर दिल बनकर,
देखलिया अंजाम रहम दिल बनकर।

निर्दोष का खून बहाना छोड़े,
ना किसी का आशियाना तोड़े।
भटके हुए नौजवानों को राह पर लाना होगा
उजड़े हुए चमन को, फिर से जन्नत बनाना होगा।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — शांति चाहिए कश्मीर की वैली में, कलेजा ठोक कर उत्तर देना सिखो। इजरायल की शैली में आतंकवाद तो, कुचला जाता है, पत्थर दिल बनकर, देखलिया अंजाम रहम दिल बनकर। ये कड़वा है मगर सत्य है आतंकवाद का कोई भी नियम व कानून नहीं होता है वो केवल अपनी माँगों को ही पूरा करने के लिये सरकार के ऊपर दबाव बनाने के साथ ही आतंक को हर जगह फैलाने के लिये निर्दोष लोगों के समूह या समाज पर हमला करते रहते हैं। उनकी माँगे बेहद खास व खतरनाक होती है, जो वो चाहते हैं केवल उसी को पूरा कराते हैं किसी भी कीमत पर। ये आतंकवाद मानव जाति के लिये बहुत ही बड़ा खतरा है।

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यह कविता (आतंकवाद।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari Etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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सफल जीवन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सफल जीवन। ♦

इस संसार में कहीं भी, कोई भी, कभी भी किसी के भी साथ हमेशा नहीं रह सकता। यह एक कटु सत्य है। जो भी आपस में जुड़े हुए हैं, आज न कल उन्हें एक-दूसरे से बिछड़ना ही पड़ेगा। रिश्ता चाहे पत्नी का हो, पुत्र का हो, पुत्री का हो, धन का हो, मकान का हो, अपने शरीर का हो, एक दिन छोड़कर जाना ही पड़ेगा। माया, मोह, भ्रम में इन्सान सत्य से भटक जाता है।

एक ही अन्न खाकर बच्चा जवान होता है, वही अन्न खाकर जवान बूढ़ा होता होता है, और बूढ़ा व्यक्ति धीरे-धीरे मौत के मुँह में चला जाता है— आखिर क्यों ?

• पाप-पुण्य का फल •

हर इन्सान अकेले पैदा होता है, अकेले दर्द का एहसास करता है और अकेले ही मरता भी है। पाप-पुण्य का फल अकेले ही भोगता है। अधर्म की कमाई से परिवार का पालन-पोषण करने वाले अकेले ही पाप की गठरी सिर पर लादकर घोर नरक में जाते है। दर्द में कोई दवा दे सकता है लेकिन अनुभव स्वंय ही करनी पड़ती है।

सदगुणों की शुरुआत स्वंय से ही करनी होती है। जब तक खुद की उंगली पर कुमकुम नहीं लगेगा तब तक दूसरे के ललाट पर तिलक नहीं लगा सकते। सारे सुख एंव दुःख का कारण मन है। मन की बात न सुनकर आत्मा की आवाज सुनने पर, दुःख और सुख का अनुभव स्वतः समाप्त हो जायेगा। यदि खेत में बीज न डाला जाए तो घास-फूस अपने आप निकल जाते हैं।

• अच्छे व बुरे विचार •

दिमाग में अगर अच्छे विचार न भरे जाऍं तो बुरे विचार अपने आप जगह बनाकर इन्सान की जिन्दगी को बर्बाद कर देगें, भोजन, न पचने पर रोग बढ़ता है, पैसा न पचने पर व्यभिचार और दिखावा बढ़ता है, बात न पचने पर चुगली बढ़ती है, प्रशंसा न पचने पर, अहंकार बढ़ता है, निंदा न पचने पर, दुश्मनी बढ़ती है, दुःख न पचने पर निराशा बढ़ती है, सुख न पचने पर, पाप बढ़ता है, दौलत न पचने पर, खतरा बढ़ता है।

जवानी, धन-संम्पत्ति, सत्ता, मूर्खता, अहंकार, शक्ति, व्यक्ति को मार्ग से भटका देती है। व्यक्ति बुराइयों में फॅंसकर, डूब जाता है और अपने साथ-साथ दूसरे का भी जीवन नष्ट कर देता है। अच्छे कर्म ही इन्सान को बुराइयों से दूर रख सकता है।

• हर कर्म धर्मानुसार •

भगवान शिव, भोला, शंकर, औघर दानी की आराधना के पवित्र सावन महीने में शिव जी की सवारी नंदी बैल जो हमेशा साथ रहता है, आखिर क्यों ? यह धर्म का स्वरुप है। बैल की सवारी का मतलब हर कर्म धर्मानुसार करना। जिस मानव के जीवन में धर्म ही नहीं हो वह साधन सम्पन्न होने के बावजूद भी उसका जीवन दुःखों से भरा रहेगा।

प्रसन्नता भीतर की स्थिति है। धर्म के मार्ग पर चलने से नव संकल्पों का सृजन होता है और आत्मा तृप्त रहती है। शिव को देवों के देव महादेव कहते हैं उनके पास धर्म रुपी साधना है, सुख धन से नहीं धर्म से प्राप्त होता है। विष पीने के बाद भी, औघर दानी है, वो राजा नहीं है लेकिन सर्वप्रिय और पूज्य है त्याग की मूर्ति हैं। आदि काल से भगवान शिव की पूजा होती आ रही है।

• ढाई अक्षर में ही सारी दुनिया निहित है —

ढाई अक्षर की महिमा जो समझ लिया, वो वास्तव में झानी और महापुरुष हो गया…

ढाई अक्षर के ब्रहमा, ढाई अक्षर की सृष्टि,
ढाई अक्षर के विष्णु, ढाई अक्षर की कान्ता (राधा),
ढाई अक्षर की दुर्गा, ढाई अक्षर की शक्ति,
ढाई अक्षर की श्रध्दा, ढाई अक्षर की भक्ति
ढाई अक्षर का ध्यान, ढाई अक्षर का त्याग,
ढाई अक्षर का धर्म, ढाई अक्षर का कर्म,
ढाई अक्षर का ग्रन्थ, ढाई अक्षर का सन्त,
ढाई अक्षर का मन्त्र, ढाई अक्षर का यन्त्र,
ढाई अक्षर का जन्म, ढाई अक्षर की अस्थि,
ढाई अक्षर की अर्थी,
ढाई अक्षर में ही सारी दुनिया निहित है, जो समझ लिया वो स्वामी विवेकानन्द।

महर्षि महेश योगी, महर्षि में ही, परमहंस योगानन्द, महर्षि दयानंद, गुरु नानक, श्री अरविन्दो धोष हो गये, ‘राम’ में दो अर्थ व्यंजित हैं- दुःख में हे राम, पीड़ा में अरे राम, लज्जा में हाय राम, अशुभ में अरे राम-शम, अभिवादन में राम-राम, शपथ में राम दुहाई, अझानता में राम जाने, अनिश्चितता में राम भरोसे, अचूकता के लिए रामबाण, मृत्यु के लिए राम नाम सत्य, सुशासन के लिए राम राज्य, निर्बल के बल राम। हमारे अन्दर जो कुछ अनुकरणिय है वह राम है, शाश्वत है।

⇒ ज्ञानी कौन ?

इन्सान मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, इत्यादि में जाता है। तीर्थ स्थल में जाकर सदबुध्दि के लिए प्रार्थना करता है। जब भगवान के दरबार में सर्प, मोर, चूहा, शेर, बैल एक साथ रह सकते हैं तो अपने को सबसे उत्तम और ज्ञानी कहने वाला मनुष्य क्यों नहीं ? अज्ञानी सर्प, मोर, चूहा, बैल, शेर, एक जगह शांति पूर्वक महादेव की शरण में रहते हैं, लेकिन मनुष्य अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, जलन के कारण विनाश का कारण बन
जाता है। सुख-शांति से दूर दर्द भरी जिन्दगी जीने के लिए मजबूर हो जाता है।

सही ज्ञान धर्म के मार्ग पर चलकर ही सच्चा सुख व शांति मिलता है। सही ज्ञान ही “सफल-जीवन” की कुन्जी है।

“न जीवन न मृत्यु, क्या है तेरे हाथ,
गले से गले लगाओ, जीलो कुछ दिन साथ”

⇒ अमरत्व प्राप्त करने के लिए धर्म के मार्ग पर चले…

भगवान शिव, राम, कृष्ण, चित्रगुप्त, ब्रह्मा, विष्णु ने अपने नाम के आगे सिंह, शर्मा, दुबे, प्रसाद नहीं लगाया, भगवान महावीर ने जैन नहीं लगाया क्योंकि वो किसी जाति के नहीं है, वो सर्वव्यापी, सर्वप्रिय, सर्वज्ञानी हैं वो कण-कण में हैं, सभी उनकी पूजा करते हैं। जब तक इन्सान अपने-आप को पूरे मानव समाज के लिए समर्पित नहीं करेगा, त्यागी नहीं बनेगा, जीवन सुखमय एंव सफल नहीं बनेगा। अपनी पहचान बनाते-बनाते धरती छोड़ देता है फिर भी पहचान खुद-ब-खुद मिट जाती है। अमरत्व प्राप्त करने के लिए धर्म के मार्ग पर ही चलना होगा।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्रसन्नता भीतर की स्थिति है। धर्म के मार्ग पर चलने से नव संकल्पों का सृजन होता है और आत्मा तृप्त रहती है। शिव को देवों के देव महादेव कहते हैं उनके पास धर्म रुपी साधना है, सुख धन से नहीं धर्म से प्राप्त होता है। विष पीने के बाद भी, औघर दानी है, वो राजा नहीं है लेकिन सर्वप्रिय और पूज्य है त्याग की मूर्ति हैं। दिमाग में अगर अच्छे विचार न भरे जाऍं तो बुरे विचार अपने आप जगह बनाकर इन्सान की जिन्दगी को बर्बाद कर देगें। हर इन्सान अकेले पैदा होता है, अकेले दर्द का एहसास करता है और अकेले ही मरता भी है। पाप-पुण्य का फल अकेले ही भोगता है। इस संसार में कहीं भी, कोई भी, कभी भी किसी के भी साथ हमेशा नहीं रह सकता। यह एक कटु सत्य है।

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यह लेख (सफल जीवन।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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राखी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ राखी। ♦

यमुना ने यम को बांधी राखी,
राखी बनाया अमर, यम को मौत कभी न आती।

बहन भाईयों को दिल से दुआ दे जाती,
अमर रहना मेरे भाई, मन की बात कह जाती।

भरी सभा में किया था नग्न,
द्रोपदी को दुर्योधन की पापी टोली ने।

लाज बचाने आ गए, कृष्ण कन्हैया,
लेके वस्त्र अपनी झोली में।

कृष्ण ने फर्ज निभाया भाई का,
द्रोपदी बहन की लाज बचाने को।

राखी की शक्ति देखो, कृष्ण दौड़े,
दुष्टों को मजा चखाने को।

भाई बहन को भूल न जाए,
ये राखी याद दिलाती है।

जिस भाई को बहन नहीं,
उसको राखी बहुत रुलाती है।

भाई नहीं तो क्या हुआ,
यह भाई से भरा संसार है।

मानो तो सब भाई हैं,
नहीं तो सब बेकार है।

राम भी तरस गए,
बहन का प्यार पाने को।

शांता बिछड़ गई बचपन में,
तड़प उठे राम राखी बंधवाने को।

हर किसी को बहन हो प्रभु,
राखी का त्योहार मनाने को।

हर बहन को भाई मिले,
रक्षा का वचन निभाने को।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार का प्रतिक है, जिसे राखी का त्योहार भी कहा जाता है। रक्षा बंधन पर बहन, भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके दीर्घायु व सुखी जीवन की प्रार्थना करती है। इसके साथ ही बहन अपने भाई से अपनी सुरक्षा का वचन लेती है, की जीवन में जब भी उस पर कोई मुसीबत आएगा उसका भाई उसकी मदद के लिए आ जायेगा। कृष्ण ने फर्ज निभाया भाई का, द्रोपदी बहन की लाज बचाने को। राखी की शक्ति देखो, कृष्ण दौड़े, दुष्टों को मजा चखाने को। रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत समेत अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

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यह कविता (राखी।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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भारत के लाल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भारत के लाल। ♦

मेरी नौका है पुरानी,
ये नदी भी है अन्जानी।
डरने वाले कभी दरिया पार नहीं करते,
कायरों की दुनिया ख्वाबों में होती हैं।

कायर वो गद्दार कभी तिरंगे से प्यार नहीं करते,
दुश्मन को भारतीयों की एकता व हौसला बहुत अखरता है।
वो वाकिफ नहीं, हर भारतीय के रगों में,
सुभाष एंव खुदीराम बोस का लहू दौड़ता हैं।

उसे क्या मालूम, हर घर में महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज,
राजेन्द्र, जय प्रकाश, वीर कुंवर ही पलता हैं।
हमें सिखाया पुर्वजों ने, जब तक सफल न हो,
संघर्ष का मैदान छोड़कर, कायरों की तरह मत भागो।

लाल बहादुर शास्त्री जैसे कर्मठ की कभी हार नहीं होती,
कुछ किए बिना कभी जय जयकार नहीं होती।
तुम भारत मां के लाल हो, इस गुलशन के गुलाब हो,
दुश्मन का सपना कभी सच न हो,
तुम्ही कल के आफताब हो।

न गुलाब चाहिए, न माहताब चाहिए,
भारत के सपूतों की ऑंखों में, भारत मां के लिए प्यार चाहिए।
दुश्मन का प्यार तो है बस दिखाने के लिए,
ढूढ़ते हैं वो बहाने हर वक्त जुल्म ढ़ाने के लिए।

अपने आप कश्ती किनारे तक नहीं जाती कभी,
हौसला, हिम्मत चाहिए किनारा पाने के लिए।
तिरंगा देखकर, दुश्मन हुए भयभीत,
भगदड़ मच गई है, तुम्हारी होगी जीत।

भारत के लाल तेरी जीत बनेगी मिसाल,
शेर सा दहार सुनकर, दुश्मन होगा बेहाल।
लगा दो आग, जहां बारूद रखता हैं,
बना दो कब्र उनकी जो टेढ़ी नजर से देखता हैं।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह भारत भूमि वीरों की भूमि है, उसे क्या मालूम, हर घर में महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज, राजेन्द्र, जय प्रकाश, वीर कुंवर ही पलता हैं। हमें सिखाया पुर्वजों ने, जब तक सफल न हो, तब तक संघर्ष का मैदान छोड़कर, कायरों की तरह मत भागो। हम भारत वासी दिल से प्रेम करने वाले को प्रेम करते है और जो हमें आँख दिखाते है उनका आँख भी निकाल लेते है। हम कभी किसी पर पहले वार नही करते है लेकिन अगर दुश्मन हम पर वार करे तो हम हाथ पर हाथ धरे बैठे भी नहीं रहते है। हमें गर्व है अपने वीर सेनानी लाल बहादुर शास्त्री जी पर, उन्होंने दुश्मन को दिखाया हिन्दुस्तानी चाटा। एक बात याद रखे नफरतों की फिजाओं में कभी भी प्यास मुहब्बतों की नहीं बुझती। चाहे कोई भी पड़ोसी देश हो हमारा हमसे प्यार करेगा, हम भी उन पर प्यार बरसायेंगे, लेकिन अगर हमसे गद्दारी करेंगे तो उसका जवाब उसी की भाषा में हमें देना आता हैं, जय हिन्द – जय हिन्द की सेना।

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