Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जान तेरी। ♦

बिछुड़न तेरी
तड़प मेरी।
धड़कन तेरी,
आह! मेरी।
सौदाई तेरी,
मोहब्बत मेरी।
यादें तेरी,
इंतजार मेरा।
बेवफाई तेरी,
वफ़ा मेरी।
भूलना तेरा,
यादें मेरी।
लड़ाई तेरी,
प्रेम मेरा।
धोखा तेरा,
विश्वास मेरा।
फटकार तेरी,
मिलान मेरा।
महबूबा तेरी,
हमदर्द मेरा।
जान तेरी,
दिल मेरा।
सांसे तेरी,
तू मेरा।
♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦
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- “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सब शिकायतें तेरी मंज़ूर है लेकिन हमसे कभी भी रूठकर बैठी न रहना। मेरी तरफ से सदैव ही तुझें प्यार व वफ़ा मिलेगी।
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यह कविता (जान तेरी।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।
आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—
मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।
सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।
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आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में देखो कमजोर नहीं है। आधुनिक युग में जागरूकता ने नारी को ऊंचाइयों पर ला दिया। अब बात साइकिल, स्कूटी, कार तक सीमित नहीं रही। महिलाएं अब रेलगाड़ी चलाने लगी। आसमान में जहाज उड़ाने लगी है।विश्व में देश का नाम आगे बढ़ाने लगी है। खेलों में भी अपना परचम लहरा रही हैं।
अरे! रोशनी आज मीरा को तू अपने साथ ले जाना। मैं आज देर से आऊंगी, शाम को आते वक्त अपने साथ लेकर आना परंतु मालकिन मेरे घर कैसे, जाते हुए विद्या ने बोला अरे! बस आज की ही बात है और साहब भी बाहर गए हैं। फिर दिन में मीरा अकेली कैसे रहेगी परंतु मालकिन विद्या ने बात काटते हुए कहा परंतु वरंतू कुछ नहीं तू ले जा और हां दिन में कुछ खिला देना गरम-गरम बनाकर।
जब हम नियमित पेड़-पौधे लगाएंगे, प्रदूषण को कम करेंगे तभी पर्यावरण दिवस मनाने का फायदा होगा।
आप सभी ने सुना होगा कि बच्चे देख कर ही सीखते हैं। जैसा हम करते हैं बच्चे भी हमारा अनुकरण करते हैं। इस आधुनिक युग में जब से फोन ने सबकी जिंदगी में कदम रखा है पुस्तकों का महत्व ही खत्म होता जा रहा है। परंतु कुछ समय पहले ऐसा नहीं था।

आजकल परीक्षा में ज्यादा अंक लाने की प्रवृत्ति दिन – प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अभिभावक चाहते हैं कि मेरे बच्चे पूरे के पूरे परीक्षा में अंक लाएं। चारों तरफ बस होड़ लगी हुई है एक – दूसरे से ज्यादा अंक लाने की। इस बात पर जोर क्यों नहीं दिया जाता कि अंको की अहमियत तभी है जब हमें पूरे पाठ्यक्रम का ज्ञान होगा। कई बार ऐसा होता है, आप लोगों ने सुना भी होगा और देखा भी है, कम अंक लाने वाला विद्यार्थी जीवन में सफल हो जाता है और हमेशा कक्षा में अव्वल रहने वाला विद्यार्थी कई बार पीछे छूट जाता है। इसका यह अर्थ नहीं है कि दोनों ने पढ़ाई नहीं की दोनों ने पढ़ाई की होती है परंतु कई बार बच्चे सिर्फ किताबों तक ही सीमित रह जाते हैं। वास्तविकता से उन्हें कोई लेना – देना नहीं होता।

