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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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You are here: Home / Archives for सुखमंगल सिंह की कविताएं

सुखमंगल सिंह की कविताएं

अपने मत पर करो विचार!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अपने मत पर करो विचार! ♦

जगह – जगह छलियों का बढ़ रहा है रेला,
पूर्वांचल में आ आकर करना चाहते हैं खेला।
महाराष्ट्र में साधु के साथ क्या हुआ था देखा,
जगह जगह लग रहा है लोगों का बड़ा मेला।

यूक्रेन हालत देख वहां के राष्ट्रपति की सुनो बात,
सभी नागरिकों को लड़ने को क्यों बोल रहे आज!
पाकिस्तान और चीन आंख गड़ाए है आज,
कल तक थलसेना को मजबूत करता देश।

वर्तमान परिस्थिति वायुसेना मजबूत करना आज,
तुम्हारा एक वोट देश के लिए कीमती है आज।
देश को बचाने के लिए आप खड़े हैं क्या आज,
या जन विनाश के लिए आपका वोट है बताएं आप।

जगह जगह पर मेरे भाइयों का बढ़ रहा है प्रभाव,
पूर्वांचल में बुद्धिजीवी का क्या हो गया है अभाव।
जगह जगह सी उत्तर प्रदेश में आ रहे झमेले बाज,
आपकी शांति सद्भाव पर करना चाहते कुठाराघात।

पूर्वांचल के विकास पर करना चाहते हैं लोग प्रहार,
आपको करना चाहते हैं लोग यहां जार – जार!
बुद्धि शक्ति पहरा आप अपने में मस्त विकास,
सबको पहचान कर, आप अपना मत करो विचार।

आपके प्रदेश में इस बार फिर अगर अंधेरा आएगा,
सैकड़ों मुबारक तुंहारा अंधेरा नहीं छठ पाएगा।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — आपका वोट आपका सुरक्षित भविष्य निर्धारित करेगा, याद रखें अपना वोट सोच समझ कर प्रदेश हित और राष्ट्र हित को ध्यान में रख कर दे। कही ऐसा ना हो जाए की गलत व्यक्ति और गलत पार्टी को वोट देकर आपका भविष्य सदैव के लिए अंधकारमय और असुरक्षित हो जाए। वर्तमान की घटनाओं से सबक ले (अफगानिस्तान और तालिबान तथा यूक्रेन और रूस की घटना) याद रखें – राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है। वतन हमारी आन हमारा सम्मान है उस मां को हमारा सलाम वंदे मातरम् …वंदे मातरम् …वंदे मातरम्॥

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (अपने मत पर करो विचार!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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वर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं। ♦

गुलाब खिलते रहे सदा आपकी जिंदगी की राहों में,
हंसी चमकती रहे हमेशा आपकी निगाहों में!
खुशियों की लहर मिलती रहे हर कदम पर आपको,
देता है हमारा यह दिल दुआ बार – बार आपको।

गुलों की शाख से हमने खुशबू चुरा के लाया है,
और गगन के पांव से घुंघरू चुरा के लाया है।
थिरकते कदमों से आया है सुनहरा नया साल,
आपके लिए यह वर्ष खुशियां चुरा के लाया है।

नया साल आता रहे जीवन में बनके नवीन उजाला,
खुल जाए आपका जिससे किस्मत का बंद ताला।
हमेशा आप पर रहें मेहरबान कल्याण करने वाला,
ईश्वर से यही दुआ करता है आपका यह चाहने वाला।

कैलेंडर बदल जाएंगे आने वाले नए साल में,
कपड़े भी बदल लिए होंगे आप नए साल में!
संस्कार को बदलने की यदि कोशिश करेंगे आप,
संस्कृति बदल जाएगी इतना तो लो मान आप।

आया है नया साल मन के मैल को भी निकालने,
बाबा विश्वनाथ के दरबार में शंखनाद को बजाने।
विश्व प्रसिद्ध माँ गंगा आरती दुनिया को उजाला करने,
मानवता और करुणा से संवेदना को जन्म देने।

स्वच्छता की ओर और बढ़ाएगा कदम नया साल,
गरीबों का हक दिलाने वाला हो यह नया साल।
अब तक जिसने मारा है गरीबों का अपने देश में,
गरीबों का हक मारने वालों को देगा जेल नया साल।

चावल का उत्पादन देश में बढ़ाएगा नया साल,
बेरोजगारों को रोजगार दिलाएगा यह नया साल।
पर्यावरण की रक्षा में कदम बढ़ाएगा नया साल,
विकास की यात्रा में खुशियां लाएगा नया साल।

राम जन्मभूमि से शांति सद्भाव फैलाएगा नया साल,
दशरथ जी का महल सुख की सिहरन है नया साल।
न्याय पूर्ण उत्तम समाज बनाएगा यह नया साल,
आतंकवादियों पर कहर बनकर आया है नया साल।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — ये नया वर्ष खुशियां लेकर आया, मानवता और करुणा से संवेदना फैलाएगा। आइए हम सब मिलकर स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाएं। पर्यावरण की रक्षा में आइए हम सब मिलकर ये संकल्प ले, प्रत्येक व्यक्ति एक – एक पेड़ जरूर लगाएंगे, और जब तक पेड़ अपना स्व खुराक न लेने लगे तब तक उसका देख रेख पूर्ण मन से करेंगे। राम जन्मभूमि से शांति सद्भाव फैलाएगा ये नया साल। आइए हम सब मिलकर भारत भूमि के पूर्ण विकास में अपना अमूल्य योगदान दे, सच्चे तन मन से। न्याय पूर्ण उत्तम समाज बनाने में सभी सहयोग करें। गरीबों का हक दिलाने वाला हो यह नया साल। अब तक जिसने भी मारा है गरीबों का हक़ अपने देश में, गरीबों का हक मारने वालों को देगा जेल ये नया साल। मन के मैल को भी निकाल कर, बाबा विश्वनाथ के दरबार में शंखनाद को बजाने आया है ये नया साल। विश्व प्रसिद्ध माँ गंगा आरती दुनिया को उजाला करने, मानवता और करुणा से संवेदना को जन्म देने।

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यह कविता (वर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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नारी है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नारी है। ♦

पुरुष की बराबरी में सीमा पर जाती,
फिर भी दहेज की बलि चढ़ जाती।
कड़वा सत्य है समाज में नहीं आती,
नारी पुरुष से कम क्यों दिखाई जाती?

भिन्न – भिन्न रंगों के गाने गाते जाती,
बुरी नजर वालों को राख में मिलाती।
वक्त पर फूल और कांटा बन जाती है,
लक्ष्मी दुर्गा और काली कहलाती है।

बहन स्वरुप में स्नेह प्यार लुटाती है,
माता के रूप में ममता दिखाती है।
शोभित आभूषण युक्त होकर शिवाली,
युद्ध क्षेत्र में महाकाल पीर घरवाली।

प्रीति करने में सक्षम वहराधा रानी,
गृहस्थ करने में भी एक खानदानी है।
सम्मान की रक्षा के लिए वह काली,
दुश्मनों के लिए विकराल रूप वाली।

औरत है समस्याएं आती – जाती हैं,
सहती है, भावनाओं में नहीं बहती!
टूटती और बिखरती सहती जाती है,
कड़वी सच्ची, सच्चाई स्वीकारती है।

देवी का दर्जा मिला, उसने मांगा नहीं,
कितनी सशक्त है वह, यह जाना नहीं।
हर जीत में उसका जलवा, माना नहीं,
महान बल पर खास जिद, ठाना नहीं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कड़वा है मगर सत्य है ये नारी तू नारायणी, जननी तू, माँ के रूप में प्यार ममता, स्नेह, लालन-पालन, जीवन के अंतिम पल तक दिखाती है। बहन स्वरुप में स्नेह प्यार सदैव लुटाती है। बुरी नजर वालों को राख में मिलाती तू, वक्त पर फूल और कांटा बन जाती है, लक्ष्मी, दुर्गा और काली कहलाती है। सदैव ही पुरुष की बराबरी में सीमा पर जाती, फिर भी दहेज की बलि क्यों चढ़ जाती। ये नारी है समस्याएं आती – जाती हैं, सहती है, भावनाओं में नहीं बहती! टूटती और बिखरती सहती जाती है, कड़वी सच्ची, सच्चाई स्वीकारती है। देवी का दर्जा मिला उसे, उसने कभी मांगा नहीं, कितनी सशक्त है वह, यह जाना नहीं। हर जीत में उसका जलवा, माना नहीं, महान बल पर खास जिद, ठाना नहीं कभी। नारी तू नारायणी।

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यह कविता (नारी है।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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बलगम से निजात पाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बलगम से निजात पाएं। ♦

जाड़े का मौसम आया,
छाती पर बलगम छाया।
बूढ़ा जवान लड़का आया,
दादी मां ने काढ़ा पिलाया।

काढ़ा कैसे उसने बनाया,
उसमें उसने क्या मिलाया।
एक इंच का अदरक लाया,
तेजपात दो पत्ते पकाया।

पत्ते के दो टुकड़ा कर डाला,
साफ पानी में उसे धो डाला।
एक गिलास पानी में उबाला,
आधा पानी बचा, पी डालें।

काढे में कुछ शहद मिलाया,
गुनगुने काढ़े में उसे हिलाया।
धीरे-धीरे उसे उसने हलराया,
शिप शिप – पीने को बताया।

तेजपात बलगम निकालता,
छाती को वह निरोगी बनाता।
कोलेस्टॉल बनने नहीं देता,
यूरिक एसिड को कम करता।

अदरक से इंफेक्शन दूर होता,
मुख के छाले ठीक हो जाता।
शरीर में ताकत व बल लाता,
यह क्रीम नाशक है कहलाता।

शहद बल बुद्धि को तेज करता,
नस के ब्लॉकेज को दूर करता।
काया में अतुलित स्फूर्ति आती,
कामकाज में मन नहीं घबराता।

प्रतिदिन सर्दी में काला बनाएं,
तेजपात – अदरक को पकाएं।
एक गिलास पानी उसमें मिलाएं,
आधा बचे उसे पीने को बचाएं।

सर्दी और बरसात में प्रयोग करें,
अपनी काया इससे निरोध करें।
अपने घर में सबको इसे पिलाएं,
पास पड़ोस में लोगों को बताएं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कड़वा है मगर सत्य है ये जो मौसम चल रहा है कभी ज्यादा सर्दी कभी हल्का गर्म, ऐसे मौसम में अचानक से होने वाले सर्दी, जुकाम और खांसी व बलगम से राहत पाने के लिए काढ़ा बहुत ही लाभकारी है सभी के लिए। इस मौसम में काढ़ा कैसे बनाए कवि ने ये समझने की कोशिश की है, और काढ़ा से होने वाले फायदे को भी बताने की कोशिश की है। काढ़ा वायरल इन्फेक्शन से भी बचता है। इम्यून सिस्टम सही रहता है काढ़ा पिने से।

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यह कविता (बलगम से निजात पाएं।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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बड़ा दिन २५ दिसंबर – खानपान कर ध्यान!

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♦ बड़ा दिन २५ दिसंबर – खानपान कर ध्यान! ♦

बड़ा दिन आए तो रखो छोटे दिन पर भी ध्यान,
जिसमें होते शुभ कामना के पूर्व नियम विधान।
नियम और कानून के बदलाव से बनते हैं काम,
खान पान के जीवन में रखना पड़ता है ध्यान।

चना बाजरा की रोटी मानव को बनाता बलवान,
पिज्जा – बर्गर खाने से पेट रोगी लीवर ट्रांसप्लांट।
घी मक्खन खाने से ज्ञानी और रहोगे बुद्धिमान,
केक आदि खाने से लीवर हो जाएगा बेजान।

दही और बेसन मिलाकर बृहस्पति का पकवान,
गुरु बृहस्पति खुश होगे तो हो जाओगे महान।
प्राचीन परंपरा में वैज्ञानिक खानपान का विधान,
संस्कार और आध्यात्म का उसमें होता था ज्ञान।

मनमानी पर अंकुश होता, लोग होते थे गुणवान,
नियम संयम से खान पान के जीवन में सुख धाम।
छोटा बड़ा सभी मिलकर करते सबका सम्मान,
ज्ञान और आध्यात्मिक बल से देश मेरा महान।

यीशु के प्रेम विज्ञान के दिन गिरजाघरों में गान,
वक्ता को फादर कह कर-कर के करते सम्मान।
सनातन धर्मी मानते हैं फादर एक है मान,
इसको कृपा निधान कहते करता है कल्याण।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कड़वा है मगर सत्य है “चना बाजरा की रोटी मानव को बनाता बलवान, पिज्जा – बर्गर खाने से पेट रोगी लीवर ट्रांसप्लांट। इसलिए घी व मक्खन खाने से ज्ञानी और रहोगे बुद्धिमान, केक आदि खाने से लीवर हो जाएगा बेजान। समय से पहले हो जायेगा राम नाम सत्य तुम्हारा। इसलिए अपना खानपान सुधारों, अपनाओ सादा जीवन उच्च विचार, सादा भोजन उच्च विचार, सादा जीवन उच्च व्यवहार। अगर रहना है निरोग तो अपनाओ योग। योगी जीवन सबसे सुन्दर जीवन। करें योग रहे निरोग, आओ हम सब मिलकर करें ये संकल्प इस संसार को सुखमय बनाये। सभी तरह के फ़ास्ट फ़ूड का करें पूर्ण रूप से त्याग, तभी तुम पावोगे – निरोगी काया, सुखमय जीवन। सादा और स्वस्थ भोजन खाने की आदत डालो। ज्ञान, ध्यान और योग को अपने जीवन का अटूट अंग बना लो, तभी रहोगे स्वस्थ और मस्त। अपना व अपनों का जीवन सुखमय बनाएं, खुद भी और अपनों को सादा और स्वस्थ भोजन खाने की आदत डलवाये।

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यह कविता (“बड़ा दिन २५ दिसंबर” – खानपान कर ध्यान!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जल ही जीवन है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जल ही जीवन है। ♦

निर्मल जल बहता पड़ोस में,
अपनी कैसे प्यास बुझाएं।
ललई के नल की टोटी से,
कितना फैला दुर्गंध बताएं॥

व्याकुल मन पानी को तरसे,
बारिश देख मन मोर हरषे।
पर्वत – घाटी वा जंगल में,
तन मन व्याकुल हो तरसे॥

रात रात भर जागा फिर भी,
जाति पांति का जल गिरता।
मानव श्रृंखला बना सजती,
जल संरक्षण किनारे लगती॥

इच्छाएं सपने बुनती रहती,
जीवन है कहती रहती।
जल दान में उज्ज्वल भविष्य,
फोटो गैलरी से होते प्रसिद्ध॥

जगह जगह जलके संयंत्र,
कुछ बोले बड़ा खडयंत्र।
सरकारी जल जीवन मिशन,
लाए जनता में अमन चैन॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — हे मानव अब भी समय है संभल जा तू और पानी की बर्बादी को बंद कर दे। वरना बिन पानी सब सुन हो जायेगा, तेरा जीना दूभर हो जायेगा इस धरा पर। पानी 100 डिग्री सेल्सियस पर उबलने लगता है, जबकि 0 डिग्री सेल्सियस पर बर्फ के रूप में जम जाता है। धरती की सतह पर तकरीबन 326 मिलियन क्यूबिक मील की दूरी तक पानी फैला हुआ है। पृथ्वी पर मौजूद पानी का एक प्रतिशत से भी कम पीने योग्य है, बाकी समुद्र के खारे पानी और बर्फ के रूप में जमा हुआ है।

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यह कविता (जल ही जीवन है।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर। ♦

खार ही खार जिसके हो मन में भरा,
पलटकर पूर्वांचल एक्सप्रेस वे देखे जरा।
राह में अकबरपुर प्रतीक्षा में है खड़ा,
बोलता है वह मीठी बोली मैं ही सदा॥

नफरतों को जो मन में छुपाए हुए हो,
दिल्ली से बलिया सुंदर सजाए बड़ा।
मुस्करा रहा आजमगढ़, मऊ देखकर,
गांव के लिंक अंबेडकर नगर देखकर॥

खैर पूछेगा पर जब सामने आएगा,
बाराबंकी, सुल्तानपुर, गाजीपुर से जाएगा।
आवाजाही की सुविधा सुंदर सुलभ,
जाम से अकबरपुर निजात पाएगा॥

एक दिन काम आएगी करामात यह,
फोरलेन सड़क सब जब हो जाएगी।
छोड़कर आदतों को सब अपनी बुरी,
रास्ते पर चलने जनता आ जाएगी॥

मेरे दिल ने कभी तो यह भी है चाहा,
परंपराओं को अपने सिर पर बिठाया।
शब्दों को मैंने भाव ओढ़े गहना बनाया,
लहराती सरयू तट पर लहरें नेक नियत लाया॥

कवि वाल्मीकि श्रवण क्षेत्र रामायण रच डाला,
श्रृंगी ऋषि का सेवा गंज क्षेत्र मन को भाने वाला।
फलाहारी बाबा का बसखारी में एक आश्रम आला,
रामबाग के संत अवध दास का आश्रम बड़ा निराला॥

मेरा योगी बांध रहा है गांव – गांव में टीले – पीले,
खारेपन को रोक रहा है और परोसता मीठी झीलें।
साकेत को सजाने की कसमें उसने संकल्पित कर ली,
मान रखोगे क्या उन सारे संकल्पों वचनों की॥

गोपाल बाग राजेसुल्तानपुर का पहले ही नाम पड़ा,
मलेक्ष काल में इसका नाम बदलकर सुल्तानपुर जड़ा।
इसके उत्तर में श्री श्री लल्लन ब्रह्मचारी जी का धाम है,
आश्रम घिनहापुर का देश में अपना एक स्थान है॥

जलालपुर के संत पलटू साहब का एक इतिहास है,
डगमगाती नाव कि यह आश्रम बड़ी दृढ़ पतवार है।
घन निशा में नसीरपुर की भुजिया माता दृष्टि देती,
भयंकर भंवर से निकाल कर जिंदगी सवार देती॥

सरयू, मड़हा, विसुई नदी अंबेडकर नगर में बहती है,
थिरुई, मझुई, तमसा नदी भी सबकी दु:ख हरती है।
स्थापत्य कला में अंबेडकर नगर जिला महान है,
हंसवर, मकरही – देवरिया स्टेट का दर्जा ज्ञानवान है॥

लोरपुर – रियासत और चाहोड़ा घाट मंदिर विद्यमान है,
प्राचीन इतिहास में इसका सुंदर और खूबसूरत नाम है।
29 सितम्बर 1995 में अंबेडकर नगर जिला नाम मिला,
तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती का ह्रदय खिला,
1 जनवरी सन 1996 में आलापुर तहसील नाम दिया,
राज्यपाल मोतीलाल वोरा ने आकर शिलान्यास किया॥

भीटी, मसढ़ा, शुकुल बाजार, हंसवर के झील है,
चार झीलों से आक्षादित यह पसंद चारो धाम है।
डरबन, देव हट, गढवा और हंसवर जिसका नाम है,
चारों झीलों का पुनर निर्माण करना सरकार के काम है॥

डम डम डमरु बजा शिव बाबा सीमा सीहमई में,
शिव महिमा, शिव मंदिर, बारंबार पारा में गाते हैं।
संत गोविंद साहब जी का विश्व प्रसिद्ध मेला लगता,
अहिरौली गोविंद साहब मैं वर्ष में यह आता रहता॥

योगी सरकार ने अंबेडकर नगर पर ध्यान दिया,
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन प्लांट मिला।
सी एच सी जलालपुर में ऑक्सीजन प्लांट लगेगा,
जनपद ऑक्सीजन संकट से हमेशा दूर रहेगा॥

योगी जनपद में ट्रामा सेंटर का निर्माण करेंगे,
पी जी आई लखनऊ जाने से मरीज बचेंगे।
मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले, जिले में सजने लगे,
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज होने लगे॥

आयुष्मान कार्ड अंबेडकर नगर जिले में मिलने लगे,
मुफ्त इलाज की सुविधा पांच लाख की मिलने लगा।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना चलने लगा,
साढ़े छ: लाख कार्ड धारकों को मुफ्त अनाज मिलने लगा॥

वृद्धजन को वृद्धा पेंशन का पूरा लाभ दिया,
किसान को किसान पेंशन का खाता में भुगतान किया।
मेधावी छात्र – छात्राओं को वाजिफे का लाभ दिया,
ग्रामीण ढेरों में भी गरीबों को पक्का छत मिला॥

इतिहासकार जिले के गुण का करते सदा से गुणगान,
यहां के साहित्यकार रहे हैं बड़े – बड़े गुणवान।
जिले के पत्रकारों ने पत्रिका से छेत्र को प्रकाशित किया,
देश दुनिया के लिए रचयिता वाल्मीकि रामायण रचे॥

यहां के योगाचार्य करते रहते हैं योग का प्रचार,
भारत की संस्कृति को देश विदेश में बताते हैं धर्माचार्य!
प्रवक्ताओं कि इस क्षेत्र में लगी हुई है कतार,
अपने प्रवचन से ही लोगों में भरते हैं संस्कार॥

इस क्षेत्र के लेखकों ने अपनी लेखनी से रचा इतिहास,
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री विचारों का देते रहते विचार!
सत्य मार्ग पर चलने का भाव भरते हैं लोगों में संस्कार,
अयोध्या नगरी का लेखक करता सदा – सदा सत्कार॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — क्षेत्र अंबेडकर नगर के साथ – साथ उसके आस पास के सभी जिलों का व वहां के वर्तमान और इतिहास पर नजर डाला है। बहुत ही सरल शब्दो का प्रयोग करते हुए, विधि पूर्वक सभी मुख्य महान संतो से लेकर अच्छे कार्यों का वर्णन किया है। लगभग पूर्वांचल पर नजर डाला है। वर्तमान सरकार के द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों का वर्णन भी बखूबी किया है।

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मनुष्य की चाह।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मनुष्य की चाह। ♦

कार्य कितना भी कठिन हो,
मनुष्य जो चाह दे।
पथ पर पड़े कांटे जटिल,
क्षण भर में ढाह दे।

दुनिया दागी – गमगीन,
जिंदा दिलवर ला दे।
है कौन इन्सा जहां में,
मोहब्बत की गीत सुना दे।

दिल पर पत्थर रख बैठा जहां,
माहौल खुशनुमा बना दे।
शहर आईना निहार बैठा,
कोई तो चिराग जला दे।

शांति वीरान हुए जुल्म बहुत,
यारी पक्की करा दे।
सूख गई स्याह गुलशन की,
महफिल का रंग जमा दे।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कोई भी कार्य कितना भी कठिन क्यों न हो, जब इंसान सच्चे मन से उस कार्य को करना चाहे तो, वह कार्य आसान हो जाता है। बस जरूरत है सच्चे मन से दृढ़ता के साथ उस कार्य की शुरुआत कर पूर्ण करने की।

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यह कविता (मनुष्य की चाह।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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साहित्य और हथियार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ साहित्य और हथियार। ♦

साहित्य जीवन की शक्ति है,
जीना जीवन का अभिव्यक्ति।
साहित्य का पढ़ना भक्ति है,
साहित्य रचना अभिव्यक्ति है॥

अभिव्यक्ति समर्थ शक्ति है,
शक्ति में निहित भक्ति है।
साहित्य जीवन की शक्ति है,
भक्ति सत साहित्य प्रवीण है॥

इतिहास अतीत बताता है,
अतीत – मार्ग दर्शाता है।
साहित्य आगे चलने वाली ढाल,
शिक्षा विवेक शील हथियार है॥

शिक्षा से बदलाव आता है,
स्वावलंबी बनने में मददगार है।
और शिक्षा सदमार्ग दिखाती है,
शिक्षा लोकप्रिय बनाती है॥

हथियार रक्षा करता रहता है,
संस्कृति रक्षा आवश्यक है।
संस्कृति में सद्भाव पलता है,
सद्भाव सच्चा प्रेम रखता है॥

प्रेम से समाज बनता है,
समाज नेक काम करता है।
व्यवसाय में कभी केवल,
जज्बात नहीं चलती है।
सब कुछ होता है परंतु,
यह बात नहीं होती है॥

शोहरत इज्जत पाने में,
मैं! जिसने नीलाम किया।
वही आज इस दुनिया में,
सबमें बड़ा महान हुआ॥

उसी को ऊंचा नाम मिला,
जिसने सभी का गुणगान किया।
सबका उसने सम्मान किया,
उसको दुनिया ने मान लिया॥

लोगों को बर्बाद करने वाला,
पहले खुद बरबाद होता है।
सत्यवादी मार्ग बताने वाला,
घमंड का विनाश करता है॥

इच्छाएं अनंत राह चलने वाली,
विनम्रता उचाई देने वाली है।
संतोष से खुशियां मिलने वाली,
सद कर्म अच्छाई सिखाता है॥

सत कर्म मनुष्य करने वाला,
वक्त भांप कर चलने वाला।
जीवन में सदा संतोषी स्वभाव,
ही, सबकी भलाई करने वाला॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — किसी भी इंसान और समाज के लिए साहित्य और हथियार की क्या अहमियत है? किसी भी इंसान और समाज को कब साहित्य का और कब हथियार का उपयोग करना चाहिए? साहित्य और हथियार क्यों सभी के लिए जरूरी है? साहित्य बुद्धिमत्ता के लिए और आत्मरक्षा के लिए हथियार क्यों जरूरी है?

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यह कविता (साहित्य और हथियार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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