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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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poonam gupta

श्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ श्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती। ♦

श्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय उत्तर प्रदेश में मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के यहां हुआ था उनकी माता का नाम राज दुलारी था। शास्त्री जी के पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। पिता के निधन के बाद उनकी परवरिश उनके नाना जी के यहां हुई, प्राथमिक शिक्षा उनकी वहीं हुई इसके बाद हरिश्चंद्र चंद्र हाई स्कूल की शिक्षा काशी विद्यापीठ में हुई।

काशी विद्यापीठ से शात्री की उपाधि मिलते ही अपने नाम से जाति सूचक शब्द श्रीवास्तव हमेशा के लिए हटा दिया और अपने नाम के आगे शास्त्री लगा लिया।

श्री लाल बहादुर शास्त्री ने नारा “करो या मरो” का नारा दिया इस नारे ने देश में प्रचंड क्रांति को जन्म दिया। उनका एक और नारा “जय जवान जय किसान” आज भी लोगों को याद है।

अंग्रेजो के खिलाफ महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन में श्री लाल बहादुर शास्त्री थोड़े समय के लिए (1921) में जेल गए रिहा होने पर राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय काशी विद्यापीठ वर्तमान में (महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ) में अध्ययन किया संस्कृत भाषा में स्नातक की शिक्षा के बाद भारतीय सेवा संघ से जुड़ गए। स्वतंत्रता संग्राम के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों व आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका निभाई। कई बार जेल भी गए। उसमें 1921 का असहयोग आंदोलन 1930 का दांडी मार्च और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उल्लेखनीय है।

1929 में इलाहाबाद आने के बाद टंडन जी के साथ भारत सेवक संघ की इलाहाबाद इकाई के सचिव के रूप में काम करना शुरू किया नेहरू जी के साथ उनकी निकटता बढ़ी।

1961 में मंत्रिमंडल में गृहमंत्री का पद मिला, नेहरू जी के मरने के बाद शास्त्री जी 1964 में वह भारत के प्रधानमंत्री बने। पड़ोसी पाकिस्तान से युद्ध के दौरान दिखाई गई साहस के लिए बहुत प्रशंसा हुई।

श्री शास्त्री जी की मृत्यु 1966 में हुई उनके मरणोपरांत “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया। शास्त्री जी को उनकी सादगी और देशभक्ति के लिए आज भी पूरा देश श्रद्धा से नमन करता है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — श्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सात मील दूर एक छोटे से रेलवे टाउन, मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे। जब लाल बहादुर शास्त्री केवल डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। उनकी माँ अपने तीनों बच्चों के साथ अपने पिता के घर जाकर बस गईं। शास्त्री जी को उनकी सादगी और देशभक्ति के लिए आज भी पूरा देश श्रद्धा से नमन करता है।

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यह लेख (श्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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नवरात्रि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नवरात्रि। ♦

आया नवरात्रि का त्यौहार,
घर-घर में घट स्थापना हो रही है।
सजा माता का दरबार,
माता की पूजा अर्चना हो रही है।

सिंह पर सवार माता आयी,
भक्तों की सुनने पुकार।
छायी चारों तरफ खुशियां,
आयी मंदिरों में हो रही जय जयकार।

जो भी आता माँ के द्वार,
भक्ति श्रद्धा से शीश नवाता।
खाली झोली भरती माता,
मन चाहें मुरादें पाता।

माँ की महिमा को सबने गाया,
दुर्गा माँ ने पार लगाया।
माँ के चरणों में सुख,
समृद्धि, प्रेम का वरदान पाया।

कर लो माँ की नवरुपों में पूजा,
अर्चन भक्ति का उत्सव आया।
संसार मे माँ से बढ़कर,
कोई नहीं और पाया।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (नवरात्रि।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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विश्व साक्षरता दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विश्व साक्षरता दिवस। ♦

आठ सितंबर को सब मिलकर,
विश्व साक्षरता दिवस मनाएं,
हम सब मिलकर ऐसा अभियान चलाएं।
जीवन में पढ़ना, लिखना जरूरी है,
यह बात सबको बताएं,
इस अभियान में सबको शिक्षा का महत्व बताएं।

देश में कोई अनपढ़ न रहें,
यही बात बार-बार दोहराएं।
देश में सब शिक्षित हो,
भारत की शान बढ़ाएं।
जन जन को साक्षर बनाना है,
ऐसी अलख जगाएं,
देश में साक्षरता का ऐसा इंकलाब लाएं।

जब हम साक्षर होंगे,
देश हमारा आगे बढ़ेगा।
शिक्षित होगा समाज,
देश भी खुशहाल बनेगा।
देश के प्रति हम भी,
कुछ कर्तव्य निभाएं।
पढ़ लिख कर हम प्रगति,
करें देश का गौरव बढ़ाएं।
आओ सब मिलकर,
विश्व साक्षरता दिवस मनाएं।

हमको कितना कुछ देती है शिक्षा, शिक्षा हर इंसान को महान बनाता है॥
पहले तुम खुद को शिक्षित बनाओ, अपने बच्चों को तुम ख़ूब पढ़ाओ॥

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आठ सितंबर को सब मिलकर, विश्व साक्षरता दिवस मनाएं, हम सब मिलकर ऐसा अभियान चलाएं। जीवन में पढ़ना, लिखना जरूरी है, यह बात सबको बताएं। विश्व साक्षरता दिवस। इस दिन को शिक्षा के प्रचार के उद्देश्य से दुनिया भर में मनाया जाता है। किसी भी देश के विकास के लिए साक्षरता बहुत ही महत्वपूर्ण है। यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) के अनुसार, यह दिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को व्यक्तियों, समुदायों और समाजों के लिए साक्षरता के महत्व और अधिक साक्षर समाजों के लिए गहन प्रयासों की आवश्यकता की याद दिलाने के लिए मनाया जाता है।

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यह कविता (विश्व साक्षरता दिवस।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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हिंदी भाषा और लिपि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हिंदी भाषा और लिपि। ♦

विधा — आलेख।

विश्व की प्राचीन समृद्ध, सरल भाषा होने के साथ-साथ हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा भी है। वह दुनिया में हमें सम्मान भी दिलाती है, हिंदी ने हमें विश्व में एक नई पहचान दिलाई है। हिंदी दिवस भारत में हर वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एकमत से यह निर्णय लिया – कि हिंदी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी इस निर्णय को प्रतिपादित महत्व देते हुए हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर सन 1953 से संपूर्ण भारत में हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

हिंदी भाषा विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली दूसरी भाषा है। हिंदी राजभाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पसंद किया जाने लगा है। इसका एक कारण यह भी है भारतवर्ष की संस्कृति और संस्कारों का प्रतिबिंबित देश है।

आज विश्व के कोने-कोने से विद्यार्थी भारतीय संस्कृति और भाषा को सीखने के लिए आते हैं। भारत जब अंग्रेजों के अधीन था तब भी देश के महामानव और महान नेताओं ने एक राज्य भाषा की आवश्यकता को समझा। उन्होंने आजादी के साथ-साथ हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण कार्य किये। राष्ट्रभाषा हिंदी को राज भाषा की उपाधि दी है, उन्होंने कहा “राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा होता है” प्रत्येक राष्ट्र की अपनी राष्ट्रभाषा होती है।

राष्ट्रभाषा के जरिए ही हम राष्ट्र की एकता भाईचारे, सौहार्द, सद्भावना जैसे गुण, नागरिक में कर्तव्य का विकास करने में सहायक होता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान सभा ने हिंदी भाषा को देश की राजभाषा के रूप में सावधानिक मर्यादा प्रदान की है।

हिंदी दिवस को बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हिंदी दिवस, हिंदी सप्ताह, हिंदी पखवाड़ा आज कई रूपों में इस कार्यक्रम को मनाने का सिलसिला जारी है। खासकर सरकार के सभी कार्यालय उपक्रमों, निगमों, संस्थानों में यह दिवस बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

बैंक, रेलवे, तेल कंपनी सरकारी दफ्तर आदि संस्थानों में हिंदी दिवस पर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित होती है। भाषण में बड़े-बड़े महानुभावों को आमंत्रित किया जाता है, हिंदी में काम करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कार भी दिया जाता है। सरकारी क्षेत्रों में हिंदी को बढ़ावा देने हेतु पूरे सितंबर महीने तक अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदी भाषा के विकास में प्राप्त उपलब्धि को स्मरण किया जाता है।

पूरे भारतवर्ष में हिंदी सर्वाधिक बोली जाती है देश की 80% जनता हिंदी भाषा समझ सकती है। तथा अपने विचार को प्रकट कर सकती है, हिंदी भाषा सहज और सरल है इसे संस्कृत की भगनी भी कहा जाता है। हिंदी भाषा में प्रादेशिक भाषाओं का भी उपयोग किया जाता है। हिंदी भाषा देवनागरी लिपि है, पंजाबी, उड़िया, गुजराती, राजस्थानी आज कई भाषाओं के शब्द देखने को मिलते हैं। सभी भारतवासी को हिंदी भाषा पर गर्व है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हिंदी ने हमें एक नई पहचान दिलाई है, यह संपूर्ण विश्व में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है। हिंदी विश्व की सबसे प्राचीन, सरल और समृद्ध भाषाओं में से एक है। हिंदी संवैधानिक तौर पर राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई, लेकिन हम भारतीय हिंदी को ही अपनी राष्ट्रभाषा मानते हैं। पूरे भारतवर्ष में हिंदी सर्वाधिक बोली जाती है देश की 80% जनता हिंदी भाषा समझ सकती है। तथा अपने विचार को प्रकट कर सकती है, हिंदी भाषा सहज और सरल है इसे संस्कृत की भगनी भी कहा जाता है। हिंदी भाषा में प्रादेशिक भाषाओं का भी उपयोग किया जाता है। हिंदी भाषा देवनागरी लिपि है, पंजाबी, उड़िया, गुजराती, राजस्थानी आज कई भाषाओं के शब्द देखने को मिलते हैं। सभी भारतवासी को हिंदी भाषा पर गर्व है।

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यह लेख (हिंदी भाषा और लिपि।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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योग दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ योग दिवस। ♦

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। पहला अंतराष्ट्रीय योग दिवस 2015 में मनाया गया था तबसे ही इसकी शुरूआत हुई। इस दिन विश्व में करोड़ो लोगों ने योग किया। योग व्यायाम एक प्रभावशाली प्रकार है जिसके माध्यम से शरीर के अन्य अंगों को मजबूत बनाया जा सकता है।

मन, मस्तिष्क और आत्मा में संतुलन बनाया जाता है योग से अनेक प्रकार के लाभ होते है जब हम ज्यादा थकान महसूस करते है तो योगा करने से हमें थोड़ी शांति मिलती है ये अनेक प्रकार से लाभकारी है यही कारण है योग से शारीरिक और मानसिक बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है।

योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द के युज शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है आत्मा का सार्वभोमिक मिलन चेतना से होता है।

योग दस हजार वर्ष से अपनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में योग साधु, संतों के द्वारा प्राचीन काल से अपनाया गया है। योग की महिमा को आधुनिक युग में एक विधा के रूप अपनाया गया है।

आज की जीवन शैली को देखते हुए यह बहुत जरूरी हो गया है कि हम अपनी व्यस्त जिंदगी में से थोड़ा समय निकाल कर योग करें और अपने स्वास्थ्य को ठीक रखें। जब शरीर स्वस्थ होगा तो मन भी स्वस्थ होगा। जब ही देश का हर एक नागरिक स्वस्थ होगा तब ही वो देश की सेवा में अपना सहयोग दे पाएंगे।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ही इस दिन को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया था। योग का अभ्यास एक बेहतर इंसान बनने के साथ एक तेज दिमाग, स्वस्थ दिल और एक सुकून भरे शरीर को पाने के तरीकों में से एक है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — योग आकाश के नीचे लगभग किसी भी बीमारी को ठीक कर सकता है। वास्तव में यह कहना उचित होगा कि यदि आप प्रतिदिन योग का अभ्यास करते हैं तो आप सभी रोगों से मुक्त रह सकते हैं। योग एक कला है जो हमारे शरीर, मन और आत्मा को एक साथ जोड़ता है और हमें मजबूत और शांतिपूर्ण बनाता है। योग आवश्यक है क्योंकि यह हमें फिट रखता है, तनाव को कम करने में मदद करता है और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखता है और एक स्वस्थ मन ही अच्छी तरह से ध्यान केंद्रित करने में सहायता कर सकता है। योग के अभ्यास की कला व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। यह भौतिक और मानसिक संतुलन कर के शान्त शरीर और मन प्राप्त करवाता हैं। तनाव और चिंता का प्रबंधन करके आपको राहत देता हैं। यह शरीर में लचीलापन, मांसपेशियों को मजबूत करने और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ाने में भी मदद करता हैं।

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गर्मी की छुट्टी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गर्मी की छुट्टी। ♦

गर्मी की छुट्टियों का सबको इंतजार रहता था,
शाम को खेलना कूदना याद आता है।

खेलते थे दोस्तों के साथ मस्ती करते थे,
उन छुट्टियों जैसी ख़ुशी कहीं नहीं मिलती थी।

सब भाई बहन इकट्ठा होकर खूब मस्ती करते थे,
नानी के घर जाकर दूध मलाई खाते थे।

दोपहर में सब कैरम, लूडो, साँप सीढ़ी खेला करते थे,
शाम को सब लोग आइसक्रीम खाने जाते थे।

लस्सी, बेल का शरबत, छाछ बड़े मजे से पीते थे,
रात को नानी, दादी से कहानी सुना करते थे।

आज सब बड़े, बच्चे मोबाइल पर समय बिताते है,
पहले के समय में, आज बहुत बदलाव आया।

अब बच्चे मोबाइल और वीडयो पर गर्मी की छुट्टी बिताते है,
सब खेल बदल गए बच्चो के टीवी पर समय पास करते है।

सब कुछ बदला अब नये युग का जन्म हुआ,
गर्मी की छुट्टी के वो दिन कभी वापिस नहीं आएंगे।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — ये लंबी छुट्टीयां, स्कूल और अध्ययन से राहत दिलाती है। आराम करने, खेल का आनंद लेने और कुछ मजेदार और रचनात्मक गतिविधियों का अभ्यास करने का यह सबसे अच्छा समय होता है अपने दोस्तों और भाई बहनों के साथ। गर्मी की छुट्टी आनंद लेने, मस्ती औऱ आराम करने जैसे पर्याप्त मनोरंजक अवसरों को अपने साथ लाता है। लेकिन अब के समय में पहले जैसा वह खेलकूद और मस्ती भरी शरारतें कहाँ रही। अब तो सभी अपने-अपने मोबाइल में ही गेम भी खेलते है और मोबाइल पर ही समय बिताते हैं।

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यह कविता (गर्मी की छुट्टी।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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शहीद दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शहीद दिवस। ♦

भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव भारत के सच्चे क्रांतिकारी थे देश प्रेम की खातिर हँसते – हँसते अपने प्राण दे दिए। 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। शहीद भगत सिंह जी का जन्म 28 सितंबर 1907 में भारत के गाँव बंगा जिला लायलपुर में हुआ था।

देशप्रेम की भावना बचपन से ही थी चंद्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर के “नाैजवान भारत सभा” का गठन किया भारत की स्वतंत्रता के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया, लाहौर में बनी सेंडर्स की हत्या। उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय संसद में बम विस्फोट करके आंदोलन को आगे बढ़ाया उन्होंने असेम्बली में बम फेंक कर भागने से मना कर दिया। इसके परिणाम स्वरूप अंग्रेज सरकार ने 23 मार्च 1931 को अन्य साथियों के साथ फाँसी पर लटका दिया भगत सिंह को एक सच्चे क्रांतिकारी के रूप में याद किया जाता है।

सुखदेव जी का जन्म 15 मई 1907 को भारत के लुधियाना के एक गाँव में हुआ। इनका पूरा नाम सुखदेव थापर था देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। अंग्रेजों के अत्याचारों से आहत देशवासियों के लिए कुछ करने का जज्बे की भावना से सुखदेव ने अंग्रेजों को मिलने के लिए मजबूर कर दिया और भारत को अंग्रेजों के चुंगल से मुक्त करने का प्रण लिया।

सुखदेव ने प्रसिद्ध क्रांतिकारीयो के साथ मिलकर “नाैजवान भारत सभा” का गठन किया कई गतिविधि जैसे 1929 में जेल की भूख हड़ताल में सक्रिय भूमिका निभाई। सब साथियों ने मिलकर 8 अप्रैल 1929 को सेंट्रल असेंबली में बम विस्फोट के कारण सुखदेव और उनके सहयोगियों को गिरफ़्तार कर अपराधो का दोषी ठहराकर फैसले के रूप में मौत की सजा सुनाई।

क्रांतिकारी राजगुरू का जन्म 24 अगस्त 1908 में भारत के महाराष्ट्र राज्य पुणे जिले में खेड़े गाँव मे हुआ। इनका पूरा नाम शिवराम हरिराजगुरु था। चंद्रशेखर आजाद से इतने प्रभावित हुए कि उनकी पार्टी हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी से तत्काल जुड़ गए। राजगुरु एक अच्छे निशानेबाज थे। 19 दिसम्बर 1928 को अपने साथियों के साथ मिलकर अंग्रेज पुलिस ऑफिसर जे.पी सांडर्स की हत्या की थी। इसके बाद 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली में सेंट्रल असेम्बली में हमला करने में राजगुरु का बड़ा का हाथ था। उनको पकड़ने के लिये पुणे जाते समय इनको गिरफ्तार किया गया; इन्हें भी भगतसिंह, सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फाँसी पर लटका दिया गया।

भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव भारत के सच्चे देशभक्त थे। जिन्होंने अपनी देशभक्ति को अपने प्राणों से भी अधिक महत्व दिया। 23 मार्च 1931 को हँसते – हँसते न्यौछावर करने वाले सभी क्रांतिकारयो को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है। यह दिवस देश के प्रति सम्मान और भारतीय होने का गौरव का अनुभव कराता है यह दिवस श्रद्धांजलि का दिवस है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भारत के तीन महान स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने के लिए पूरे देश में हर वर्ष 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। यह दिवस देश के प्रति सम्मान और भारतीय होने का गौरव का अनुभव कराता है यह दिवस श्रद्धांजलि का दिवस है।

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यह लेख (शहीद दिवस।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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व्यक्तित्व।

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♦ व्यक्तित्व। ♦

व्यक्तित्व का आशय व्यवहार के सभी गुणों नाम ही व्यक्तित्व है। प्रत्येक मनुष्य में कुछ विशेष गुण होते है; अच्छे व्यक्तित्व का जीवन में बहूत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वो अन्य लोगों से अलग ही पहचाने जाने जाते है। व्यक्ति की सम्पूर्ण छवि का नाम ही व्यक्तित्व है। रंग रूप कैसा भी हो सीरत अच्छी होनी चाहिए सुंदर लोग भी अपनी पहचान बनाने में पीछे रहते है; और साधारण दिखने वाले लोग अपनी गुणों और अच्छे विचार अच्छे आचरण से लोंगो को प्रभावित कर जाते है उनके व्यक्तित्व में वो बात होती है।

जो दूसरों में नहीं। यदि आपकी छवि सकारात्मक है तो आप दूसरों की नजर में तारीफ के काबिल है। अगर नकारात्मक छवि है तो आप अपमान का कारण बन सकते है। सहनशील कर्तव्यपरायण और रहन-सहन मधुरवाणी शालीनता से सबको अपनी ओर आकर्षित करते है, वो अच्छे व्यक्तित्व वाले लोग होते है। जो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं वो लोग देश और समाज की सेवा करने
के लिए तत्पर रहते है।

ये उनको अपने घर के लोंगो से मिलते है जहाँ वो अपने अच्छे व्यक्तित्व का विकास करने में सहायक सिद्ध होते है। व्यक्ति का व्यक्तित्व के अनेक रूपों गुणों और तत्त्वों के योग पर बल दिया जाता है।

भारतीय दर्शन में व्यक्तित्व के तीन प्रकार बतलाये हैं…

  • सतोगुणी
  • रजोगुणी
  • तमोगुणी

इनमें सतोगुणी व्यक्तित्व सर्वोत्तम होता है। सतोगुणी व्यक्तित्व सत् (अच्छे) गुणों युक्त, उच्च आदर्शों, नैतिक मूल्यों तथा चरित्रवान् होता है। सतोगुणी व्यक्तित्व वाला इंसान का खानपान भी पूर्ण रूप से शुद्ध शाकाहारी होता हैं। इसके विपरीत तमोगुणी व्यक्ति कामी, क्रोधी, आलसी तथा अमानवीय गुणों से युक्त होता है। तमोगुणी व्यक्ति का खानपान भी पूर्ण रूप से मांसाहार होता हैं। रजोगुणी व्यक्ति में इन दोनों के मध्य की स्थिति होती है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्रत्येक व्यक्ति में कुछ विशेष गुण या विशेषताएं होती है। जो दूसरे व्यक्ति में नहीं होतीं। इन्हीं गुणों एवं विशेषताओं के कारण ही प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे से भिन्न होता है। व्यक्ति के इन गुणों का समुच्चय ही व्यक्ति का व्यक्तित्व कहलाता है। ये बिलकुल सत्य हैं की – सहनशील कर्तव्यपरायण और रहन-सहन मधुरवाणी शालीनता से सबको अपनी ओर आकर्षित करते है, वो अच्छे व्यक्तित्व वाले लोग होते है। जो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं वो लोग देश और समाज की सेवा करने के लिए तत्पर रहते है।

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यह लेख (व्यक्तित्व।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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सौंदर्य।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सौंदर्य। ♦

सौंदर्य जो मन को सुंदर लगे जिसे देखकर हमें खुशी का अहसास हो, जो जीवन को खुशी और उल्लास से भर दे। ईश्वर ने जो संसार मे सौंदर्य दिया है वो मन को सुकून देता है।

जब हमें कोई चीज, कोई व्यक्ति या कोई कार्य हमारे मन को खुशी का अहसास दिलाता है वो सौन्दर्य की भाषा को परिभाषित करता है। जो हमारे मन को खुशी और उल्लास देता है संसार के हर कण में सौंदर्य विद्यमान है। कोयल की कू – कू और नदियों का बहता कल – कल करता पानी भी अपना सौंदर्य का आभास कराता है।

प्रकृति भी हरियाली से अपनी छटा बिखेरती है पर्वत, नदी, झरने, समुद्र की लहरें औऱ चिड़ियों का चहकना और भवरो का फूलों के ऊपर मंडराना और सूरज की किरणों से निकलती किरणें और रात को चंद्रमा का सौंदर्य अलग ही आभा बिखेरता है। हम हर चीज को नजरिये से देखे तो सब में सौंदर्य ही नजर आएगा।

आंतरिक सौंदर्य ही वास्तविक सौंदर्य है। खुद में हर व्यक्ति संपूर्ण और सौंदर्य से भरा हुआ होता है। असल में सौंदर्य देखने वाले की नजरिये (दृष्टि) में होती है, हम किसी व्यक्ति को किस नजरिए से देखते हैं यह हम पर ही निर्भर करता है, हर व्यक्ति में अच्छाई और बुराई दोनों ही होती है पर वह अपने अवगुणों को अपने सौंदर्य से ढक लेता है। ये कड़वा है मगर सत्य है… सुंदरता का मतलब सिर्फ रूपवान होना ही नहीं है। किसी के आकर्षक चेहरे को देखकर ही सौंदर्यबोध करना गलत है। असली सुंदरता तो गुणवान होने में है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्रकृति के सौंदर्य का क्या कहना जिधर भी नज़र पहुंचे सौंदर्य ही सौंदर्य जो मन को प्रफुल्लित करे। जब हम अच्छे से हर चीज को अच्छे नजरिये से देखे तो सब में सौंदर्य ही सौंदर्य नजर आएगा। सौंदर्य हमारे नज़रिये पर निर्भर करता है। मन को पूर्ण सुकून प्रकृति के सौंदर्य से ही प्राप्त होता है। जब भी हम प्रकृति के बीच में होते है, पवित्र ऊर्जा को महसूस करते है। इसलिए जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके प्रकृति के सौंदर्य को निहारे। प्रकृति के बीच रहे, आपको सच्चा मन को सुकून मिलेगा।

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यह लेख (सौंदर्य।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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