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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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stories for kids

सच्ची मानवता – संवेदनशीलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ सच्ची मानवता – संवेदनशीलता। ϒ

kmsraj51-true-humanity

प्यारे दोस्तों – एक Postman ने घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा, “चिट्ठी ले लिजिये”। अंदर से एक बालिका की आवाज़ आई, “आ रही हूँ”। लेकिन तीन से चार मिनट तक काेई न आया ताे Postman ने फिर कहा, “अरे भाई! घर में काेई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लाे”। लड़की की फिर आवाज़ आई, “Postman साहब, दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए, मैं आ रही हूँ”। “नहीं, मैं खड़ा हूँ, रजिस्टर्ड पत्र है, पावती पर तुम्हारे signature चाहिए”।

करीबन छह से सात मिनट के बाद दरवाज़ा खुला। Postman इस देरी के लिए झल्लाया हुआ ताे था ही और उस पर चिल्लाने वाला था लेकिन, दरवाज़ा खुलते ही वह चाैंक गया। एक अपाहिज कन्या जिसके पांव नहीं थे, सामने खड़ी थी।

Postman चुपचाप पत्र देकर और उसके signature लेकर चला गया। सप्ताह – दो सप्ताह में जब कभी उस लड़की के लिए डाक आती, Postman एक आवाज़ देता और जब तक वह कन्या न आती तब तक खड़ा रहता। एक दिन लड़की ने Postman काे नंगे पांव देखा।
दिपावली नज़दीक आ रही थी। उसने सोचा Postman काे क्या उपहार दूँ।

एक दिन जब Postman डाक देकर चला गया, तब उस लड़की ने जहाँ मिट्टी में Postman के पांव के निशान बने थे, उस पर काग़ज रखकर उन पांवाे का चित्र उतार लिया। अगले दिन उसने अपने यहाँ काम करने वाली बाईं से उस नाप के जूते मंगवा लिये।

दिपावली आई और उसके अगले दिन Postman ने गली के सब लाेगाें से ताे उपहार माँगा और साेचा कि अब इस बिटिया से क्या उपहार लेना? पर गली में आया हूँ ताे उससे मिल ही लूँ। उसने दरवाज़ा खटखटाया। अंदर से आवाज़ आई, “काैन ?” Postman उत्तर मिला। कन्या हाथ में एक Gift पैक लेकर आई और कहा, “अंकल, मेरी तरफ से दिपावली पर आपकाे भेंट है। “Postman ने कहा” तुम मेरे लिए बेटी के समान हाे, तुमसे मैं उपहार कैसे लूँ?” कन्या ने आग्रह किया कि मेरी इस उपहार के लिए मना न करें।

ठिक है कहते हुए Postman ने पैकेट ले लिया। कन्या न कहा, “अंकल इस पैकेट काे घर ले जाकर खाेलना। घर जाकर जब उसने पैकेट खाेला ताे विस्मित रह गया, क्योंकि उसमें एक जाेड़ी जूते थे। उसकी आँखे भर आई। अगले दिन वह Office पहुंचा और Postmaster से फरियाद की कि उसका तबादला फाैरन कर दिया जाए। Postmaster ने कारण पूछा, ताे Postman ने वे जूते टेबल पर रखते हुए सारी कहानी सुनाई और भीगी आँखाें और रूंधे कंठ से कहा, “आज के बाद मैं उस गली में नहीं जा सकूंगा। उस अपाहिज बच्ची ने मेरे नंगे पाँवाें काे ताे जूते दे दिये पर मैं उसे पाँव कैसे दे पाऊंगा ?”

सीख : संवेदनशीलता का यह श्रेष्ठ दृष्टांत है। संवेदनशीलता यानि, दूसराें के दुःख दर्द काे समझना, अनुभव करना और उसके दुःख-दर्द में भागीदारी करना, उसमें शरीक हाेना। एक ऐसा मानवीय गुण है जिसके बिना इंसान अधूरा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

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अज्ञानता की निद्रा से जगे।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ अज्ञानता की निद्रा से जगे। ϒ

Awakening of ignorance 

मानव तन अति दुर्लभ और क्षणभंगुर भी है, इसलिए सोचने में समय नष्ट करने की बजाय उस परमात्मा को प्राप्त करने का प्रयास आज और अभी से शुरू कर देना चाहिए। एक बार एक राजा कहीं जा रहा था, उसने एक सफाई कर्मचारी को देखा, राजा को उसकी निर्धनता देखकर दया आ गई। उसने हीरे-मोतियों से जड़ित एक स्वर्ण थाल दिया, ताकि वह उससे धन कमाकर आराम की जिंदगी बिता सके।

कुछ वर्षों के पश्चात राजा ने उस व्यक्ति को पुन: सफाई करते हुए देखा, तो पूछा कि मैंने जो थाल तुम्हें दिया था, वह कहां है?

  • जानते तो बहुत है…। ….. जरूर पढ़े।
  • उस व्यक्ति ने उत्तर दिया कि आपकी बहुत कृपा है, मैं बहुत समय से उसमें गंदगी डालकर फेंकता रहा हूं।
  • राजा यह सुनकर क्रोधित हो गया, उसने अपने सेवकों को आदेश दिया कि इससे थाल लेकर किसी अन्य साधनहीन व्यक्ति को दे दो। इसी तरह परमात्मा भी जीव को मनुष्य तन देता है, लेकिन वह इसे विषय-वासना से गंदा कर देता है और बाद में दुखी होता है।

गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि – जो जीव मानव तन धारण करने के पश्चात भी भवसागर से पार होने का प्रयत्न नहीं करता, वह कृतघ्न, मंदबुद्धि और आत्महंता है। यदि जीव प्रभु-कृपा का लाभ उठाकर परमात्मा की भक्ति करता है, तो वह सदा के लिए कर्म-बंधनों से मुक्त हो जाता है।

  • इंसान इस शरीर रूपी नगर में एक सीमित समय के लिए आया है। इस नगर में वह अकेला नहीं है, बल्कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार आदि चारे भी इसमें उसके साथ निवास करते हैं। यदि वह इनसे सावधान नहीं रहेगा, तो फिर पश्चाताप के अतिरिक्त कुछ भी हाथ आने वाला नहीं है।

इस संसार में संत – महापुरुष एक पहरेदार का काम करते हैं। जैसे यदि गांव में पहरेदार को जरा भी संशय हो जाता है कि इस गांव में चोरी होने की आशंका है, तो वह उच्च स्वर में आवाज लगाता है। उसकी आवाज सुनकर जो जाग जाते हैं, उनका घर बच जाता है। जो नहीं जागते और यह सोचकर ही सोये रहते हैं कि शोर करना तो इसका काम ही है, वे सूर्योदय होने तक लुट चुके होते हैं।

  • हिंदी कहानी – निरंतर प्रयास जरूर पढ़े।

– महापुरुष भी जीव को जगाकर कहते हैं कि किसी भी इंसान के शरीर रूपी घर के अंदर दिन-रात पांच चोर (काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार) चोरी करने का प्रयत्न करते रहते हैं, इसलिए उनसे सावधान होने की जरूरत है।

यदि किसी जीव को काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह के विकारों ने लूट लिया, तो उसका संपूर्ण जीवन बेकार है, इसलिए महापुरुष बार-बार इंसान को जगाते हैं। इस अज्ञानता की निद्रा से जागकर उस प्रभु रूपी औषधि का प्रयोग करना चाहिए, ताकि इस जीवन को सार्थक बनाया जा सके। मानव तन अति दुर्लभ और क्षणभंगुर भी है, इसलिए सोचने में समय नष्ट करने की बजाय उस परमात्मा को प्राप्त करने का प्रयास आज और अभी से शुरू कर देना चाहिए।

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In English

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इंसानी दिलों में प्यार बना रहे।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ इंसानी दिलों में प्यार बना रहे। ϒ

प्यारे दोस्तों –

एक बार एक लड़का अपने स्कूल की फीस भरने के लिए एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे तक कुछ सामान बेचा करता था। एक दिन उसका कोई सामान नहीं बिका और उसे बड़े जोर से भूख भी लग रही थी। उसने तय किया कि अब वह जिस भी दरवाजे पर जायेगा, उससे खाना मांग लेगा। दरवाजा खटखटाते ही एक लड़की ने दरवाजा खोला। जिसे देखकर वह घबरा गया और बजाय खाने के उसने पीने के लिए एक गिलास पानी माँगा।

making-love-in-the-human-heart-kmsraj51लड़की ने भांप लिया था कि वह भूखा है, इसलिए वह एक बड़ा गिलास दूध का ले आई, लड़के ने धीरे-धीरे दूध पी लिया। “कितने पैसे दूं?” लड़के ने पूछा,” “पैसे किस बात के? लड़की ने जवाव में कहा।” माँ ने मुझे सिखाया है कि जब भी किसी पर दया करो तो उसके पैसे नहीं लेने चाहिए। तो फिर मैं आपको दिल से धन्यबाद देता हूँ।

जैसे ही उस लड़के ने वह घर छोड़ा,
उसे न केवल शारीरिक तौर पर शक्ति मिल चुकी थी
बल्कि उसका भगवान और आदमी पर भरोसा और भी बढ़ गया था।

  • जरूर पढ़े हिंदी कहानी – अभी समय नहीं…।, 

सालों बाद वह लड़की गंभीर रूप से बीमार पड़ गयी। लोकल डॉक्टर ने उसे शहर के बड़े अस्पताल में इलाज के लिए भेज दिया। विशेषज्ञ डॉक्टर होवार्ड केल्ली को मरीज देखने के लिए बुलाया गया। जैसे ही उसने लड़की के कस्वे का नाम सुना, उसकी आँखों में चमक आ गयी। वह एकदम सीट से उठा और उस लड़की के कमरे में गया। उसने उस लड़की को देखा, एकदम पहचान लिया और तय कर लिया कि वह उसकी जान बचाने के लिए जमीन-आसमान एक कर देगा।

उसकी मेहनत और लग्न रंग लायी और उस लड़की कि जान बच गयी। डॉक्टर ने अस्पताल के ऑफिस में जा कर उस लड़की के इलाज का बिल लिया। उस बिल के कौने में एक नोट लिखा और उसे उस लड़की के पास भिजवा दिया। लड़की बिल का लिफाफा देखकर घबरा गयी। उसे मालूम था कि बीमारी से तो वह बच गयी है, लेकिन बिल की रकम जरूर उसकी जान ले लेगी। फिर भी उसने धीरे से बिल खोला, रकम को देखा और फिर अचानक उसकी नज़र बिल के कौने में पेन से लिखे नोट पर गयी। जहाँ लिखा था “एक गिलास दूध द्वारा इस बिल का भुगतान किया जा चुका है।” नीचे डॉक्टर होवार्ड केल्ली के हस्ताक्षर थे।

ख़ुशी और अचम्भे से उस लड़की के गालों पर आंसू टपक पड़े उसने ऊपर कि ओर दोनों हाथ उठा कर कहा – “हे भगवान! आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, आपका प्यार इंसानों के दिलों और हाथों द्वारा न जाने कहाँ-कहाँ फैल चुका है।

सीख – निस्वार्थ स्नेह व सच्चें प्यार का Return सदैव श्रेष्ठ(उत्तम) ही मिलता हैं। जब भी किसी कि मदद करें निस्वार्थ भाव से करें।

प्यारे दोस्तों – आपको यह सच्ची कहानी कैसी लगी, Comment`s कर जरूर बताये।

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ये समाज कभी ना छोड़े आपको।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ ये समाज कभी ना छोड़े आपको। ϒ

प्रिय पाठक मित्रों,

लोग सोचते है कि ये समाज के लोग क्या सोचेंगे?
जाे कार्य (कर्म) हम कर रहें हैं, अगर हम स्वयं उस कार्य से संतुष्ट नहीं हैं, ताे क्या सिर्फ समाज व दुनिया के लोगाे काे दिखावें के लिए काेई कार्य करना उचित हैं।

आजकल समाज के लोग एक-दूसरे का टांग(पैर) खिंचाई बहुत चतुराई के साथ करते हैं। स्वयं कार्य (कर्म) करके आगे बढ़ने कि नहीं साेचते, बल्कि यह साेचते है कि अगला(फ़लाना) Life में “मेरे से आगे कैसे बढ़ गया?” अब ताे इसकाे राेकना ही हाेगा, अर्थात इसकी टांग(पैर) खिंचाई कर नीचे गिराकर अपने बराबर लाना हैं।

प्रिय मित्रों,, आज मैं आप सभी से एक कहानी Share कर रहा हुँः  “ये समाज कभी ना छोड़े आपको।”

कहानी कुछ इस तरह से हैं …..   ∼ एक बार एक किसान अपने बेटे(पुत्र) के साथ बाहर किसी गाँव-देहात से आ रहा था और साथ में एक गधा (donkey) भी था। पिता और पुत्र दोनों अपनी मस्ती में धुन गीत गाते-गुनगुनाते चलें आ रहें थे। तभी रास्ते में एक तिराहे पर कुछ लाेग खड़े हुऐ मिलते है, जब पिता और पुत्र गधे के साथ उनके सामने से गुजरते है तब वहाँ खड़े लाेग आपस में बात करने लगते है कि “दोनों कितने बड़े मूर्ख है साथ में गधा है फिर भी पैदल जा रहें हैं।”

उनकी बातें सुनकर, पिता और पुत्र दोनों गधे के ऊपर बैठकर जाने लगें। अभी कुछ ही दुर आगे बढ़े थे कि एक जगह फिर से कुछ लाेग खड़े दिखाई दिये – जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब आपस में सब एक-दुसरे से बात करने लगते है कि “देखाें दोनों कितने बड़े निर्दयी है एक गधे पर दोनों सवार है।” 

उनकी बातें सुनकर, पिता गधे से उतर कर पैदल ही चलने लगता है। कुछ और दुर आगे बढ़ने पर फिर से एक जगह पर कुछ लाेग खड़े दिखाई देते हैं, जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब आपस में सब एक-दुसरे से बात करने लगते है कि देखाें क्या ज़माना आ गया है “बेटा कितना निर्दयी है खुद ताे गधे पर बैठा हैं और अपने पिता काे पैदल चलवा रहा हैं।”

उनकी बातें सुनकर, अब पुत्र गधे से उतर कर अपने पिता काे गधे के ऊपर बैठा कर, खुद पैदल ही चलने लगता है। थाेड़ा और दुर आगे बढ़ने पर फिर से एक जगह पर कुछ लाेग खड़े दिखाई देते हैं, जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब सभी आपस में एक-दुसरे से बात करने लगते है कि देखाें “पिता कितना निर्दयी है खुद ताे गधे पर बैठा हैं और अपने पुत्र काे पैदल चलवा रहा हैं।”

उनकी बातें सुनकर, अब पिता भी गधे से उतर कर पैदल ही चलने लगा। अर्थात अब पिता और पुत्र दोनों ही गधे काे साथ में लिए पैदल ही चलने लगे।

थाेड़ा और दुर आगे बढ़ने पर फिर से एक जगह पर कुछ लाेग खड़े दिखाई देते हैं, जब पिता और पुत्र उनके सामने से गुजरते है तब सभी आपस में एक-दुसरे से बात करने लगते है कि देखाें: …..

“दोनों कितने बड़े मूर्ख है साथ में गधा है फिर भी दोनों पैदल जा रहें हैं।”

प्रिय मित्रों, अब ताे आप सभी काे समझ आ ही गया हाेगा कि “क्या करना उचित हैं।” और “क्या अनुचित करना हैं।” 

∗ सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग। ∗

हमेशा याद रखें ¤ आपके शरीर काे चलाने वाली आत्मा कि तीन मुख्य शक्तियां हैं, “मन, बुद्धि और संस्कार।” बुद्धि निर्णय करने का कार्य करती हैं। अर्थात – बुद्धि अपने आप में बहुत बड़ी जज हैं, “बुद्धि रूपी जज काे सदैव समय प्रमाण निर्णय करने में उपयोग करें।”

पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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इंसान स्वयं ही भस्मासुर।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ इंसान स्वयं ही भस्मासुर। ϒ

प्रिय दोस्ताें, 

आज का इंसान खुद ही भस्मासुर बन गया हैं। अाज का इंसान स्वयं ही अपने आप काे यू ही नष्ट कर रहा हैं। इस बात पर मुझे हाल ही में हुए एक Research  की याद आती है। ताे दोस्ताें Research कुछ इस तरह से हैं:-

अमेरिका में जब एक कैदी काे फाँसी की सजा सुनाई गई ताे वहां के कुछ वैज्ञानिकाें ने साेचा कि क्याें न इस कैदी पर कुछ प्रयाेग किया जाये! तब कैदी काे बताया गया कि हम तुम्हें फाँसी देकर नहीं, परन्तु ज़हरीला काेबरा साँप डसाकर मारेंगे।

उसके सामने बड़ा सा ज़हरीला काेबरा साँप ले आने के बाद कैदी की आंखें बंद करके कुर्सी से बांधा गया और उसकाे साँप नहीं बल्कि दाे सेफ्टी पिन चुभाई गई! और क्या हुआ कि कैदी की कुछ सेकंड में ही माैत हाे गई। पोस्टमार्टम के बाद पाया गया कि कैदी के शरीर में साँप के ज़हर के समान ही ज़हर है। अब साेचने वाली बात यह है कि ये ज़हर कहां से आया जिसने उस कैदी की जान ले ली….. वाे ज़हर उसके खुद के शरीर ने ही सदमे में उत्पन्न किया था।

हमारे हर संकल्प से Positive एवंम Negative Energy उत्पन्न हाेती है, और आे हमारे शरीर में उसी अनुसार हार्मोन्स उत्पन्न करती है। 75% to 83% बीमारियाें का मूल कारण नकारात्मक सोच(Negative thinking) से उत्पन्न Energy ही हैं। आज का इंसान ही अपनी गलत साेच के कारण भस्मासुर बन खुद का विनाश कर रहा है।

अपनी साेच काे सदैव सकारात्मक (Positive) रखें और खुश रहें। 

२५ साल की उम्र तक हमें परवाह नहीं हाेती कि “लोग क्या सोचेंगे!”

५० साल की उम्र तक इसी डर में जीते है कि “लोग क्या सोचेंगे!!”

५० साल के बाद पता चलता है कि “हमारे बारे में काेई सोच ही नहीं रहा था!!!”

प्रिय दोस्ताें, एक बात सदैव याद रखें, जिस कार्य काे करने से आपकाे कभी भी बाेरीयत नहीं लगती, उसी कार्य काे अपने आजीविका का साधन बना लें। क्योंकी जिस कार्य काे करने से आप बाेर नहीं हाेते! उसी कार्य काे ही आप लंबे समय तक आंनद पूर्वक कर सकते हैं। हमेशा सकारात्मक ही साेचे, सकारात्मक ही पढ़ें, सकारात्मक ही देखें, सकारात्मक ही करें।

पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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स्वागत है बेटी।

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ϒ स्वागत है बेटी। ϒ

Heart touching real Story

स्वागत है बेटी।
ऑटो में बैठी वो छोटी सी गुडिया स्कूल जा रही है। बस एक टक न जाने कहाँ निहारती। कब वह ऑटो में बैठती, कब स्कूल में पहुँचती, पता ही नहीं चलता।

कैसा मासूम था उसका बचपन? उसका वो उदासी चेहरा, उसकी मासूमियत, उसके बचपन को समझता कौन? आखिर क्यों वो ऐसे रहती हैं, अलग-थलग?

  • हिंदी कहानी – निरंतर प्रयास जरूर पढ़े।

सब बच्चे स्कूल में मस्ती करते है, वो गुमसुम बैठी सोचती रहती। कुछ तो कमी थी उसकी जिंदगी में। जब लंच में सब बच्चे कहते कि मेरी मम्मी ने ये बनाया तो वो सुन कर उदास हो जाती। उस प्यार से डर जाती, जो उसे कभी ही नहीं था।

सब स्कूल की  छुट्टी होने के इंतज़ार में रहते और वो सोचती कि बस समय यहीं रुक जाए। शायद उसे स्कूल में रहना अच्छा लगता था। कभी-कभी उसके साथी पूछ लेते कि ‘घर नहीं जाना है क्या, इच्छा ?’

स्कूल गेट के बाहर जो वह नजारा देखती उसे कचोट सा जाता है। जब कहीं कोई बच्चा अपनी मम्मी, अपनी दादी तो कोई पापा के साथ घर जाता। उसकी नन्ही आँखों में छिपी मासूमियत मानो उसका खालीपन बयां करती। घर का दरवाजा खोला, अंदर गई, सहमी सी नीची नजरों से। बस यही दोहराती हुई बात रोज सुनती, “थोड़ा ठहर भी जाया कर इतनी भी जल्दी क्या रहती है, घर आने की।

♥ उछलकर वापस आना।….. जरूर पढ़े।

“और वो ‘सॉरी आंटी ’कहकर अपने कमरे में चली जाती है, आंटी तीखे स्वर से पूछती है, ‘खाना नहीं खायेगी क्या’? बेमन से अपने हाथों से खाना खाती…फिर बस अपने खिलौने के साथ खेलते हुए कब उसकी आँखो में नींद आ जाती। पता ही नहीं चलता। बस यही सोचती हुई सो जाती कि काश मेरी माँ होती तो कैसा होता?

जन्म देते ही उसकी माँ दुनिया से अलविदा हो गई। वो भी बेटी को जन्म दिया था उसने, पिता को चाहिए था बेटा। बेटे की चाहत में कई बार उसके पिता ने उस पवित्र कोख से बेटी का अपहरण कर लिया था। इसी कारण उसकी माँ कमजोर हो चली थी। आखिर बड़ी मुश्किल से एक बिटिया को जन्म दिया अपनी कोख से लेकिन उस बदनसीब माँ की आँखों में अपनी बेटी का चेहरा देखना भी मुनासिब न था।

जन्म देते ही चल बसी वो। पिता ने दूसरी शादी कर ली परन्तु इच्छा को न माँ का प्यार मिला और न ही पिता का। अब वो सौतेली माँ जिसे वो आंटी कहती है, उससे खफ़ा रहती है।

  • हिंदी कविता “लड़की को मत समझो बेकार” जरूर पढ़े।

बेटी जिसे शास्त्रों में लक्ष्मी माना गया है जिसके बिना घर में लक्ष्मी माँ का नहीं होता धन की प्राप्ति नहीं होती। उसका पिता अपनी ही बेटी को अपशकुन की तरह  मानते है।

माँ तो सिर्फ उसकी कल्पना में हैं। माँ का प्यार, दुलार उसे कभी मिला ही नहीं। माँ की तड़प इच्छा को, उसके पूरे वजूद को बिखरा देती है।

वो बस जी रही है। अब वो अपने को समझने लगी है। दीवार पर टंगी तस्वीर को निहारने के अलावा कुछ शेष नहीं है इच्छा के पास, जिसे उसकी माँ ने टांग रखा था और लिखा था – “स्वागत है बेटी”।
©- संदीप वर्मा – बीकानेर, राजस्थान ∇

Sandeep Verma-kmsraj51
संदीप वर्मा।

हम दिल से आभारी हैं संदीप वर्मा जी के प्रेरणादायक हिन्दी Story साझा करने के लिए।
We wish you a great & bright future. Thanks a lot dear Sandeep Verma.

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न्याय।

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CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ न्याय। ϒ

stories in hindi

एक ग्वालिन नजदीक के शहर से दूध बेचकर वापस अपने गाँव आ रही थी। रास्ते में तालाब के किनारे थोड़ा – विश्राम करने बैठ गयी। वट वृक्ष की घनी छाया और पानी की ठंडी हिलोरें। थकावट के कारण ग्वालिन को नींद-सी आने लगी। उस पेड़ पर एक चंचल बन्दर का निवास था। इधर ग्वालिन को नींद आई और उधर वह बन्दर लोटे के पास रखी हुई पैसों की थैली ले भागा। जागने पर ग्वालिन को पता लगा तो उसने बहुत देर तक बन्दर के निहोरे किये, उसके बार-बार हाथ जोड़े। काफी परेशान करने के बाद बंदर ने थैली खोली। एक पैसा तालाब के पानी में फेंकता और एक पैसा उसके लोटे में। ठीक आधी पूंजी ग्वालिन के पल्ले पड़ी। ग्वालिन को मन-ही-मन बड़ा अचरज हुआ कि यह बन्दर तो अदल न्यायी निकला, दूध के पैसे दूध में और पानी के पैसे पानी में। अनजाने में ही उसने न्यायोचित फैसला कर दिया।

साभार : ‘कादम्बिनी’

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कथा एक राजकुमार की।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT04

ϒ कथा एक राजकुमार की। ϒ

एक था राजकुमार मितभाषी, सुन्दर, सुकुमार।
महलों में पला बढ़ा लोगों की नज़र में अत्यंत ईमानदार॥

तैंतालीस बसंत देख चुका। यह युवराज, राजगद्दी खाली, पर नहीं पहनता ताज। खुद को अभी नहीं समझता था उपुक्त। राज काज के झंझटों से था वह मुक्त। सारा राज-पाट बूढ़े मंत्री के कन्धों पर था। मंत्री था बड़ा वफ़ादार, था वो मंत्रियों का सरदार। एक दिन आखेट पर चला गया दूर तक साथ में मंत्री, सेवादार रथ, पालकी गाजे, बाजे बहुत-बहुत पहरेदार।  पहुँच गया सुदूर एक गांव मच गया हाहाकार राजकुमार आया, राजकुमार आया मच गया शोर हलचल चहु ओर, आनन् फानन में सभा बुलाई ढोल तमाशा, नाच-गाना, बढ़िया लज़ीज़ खाना।

राजकुमार मुखातिब हुए प्रजा से – बोलो भाई हमारे राज्य में कोई कष्ट हो तो बताओ खुल कर सुनाओ।

समवेत स्वरों में आवाज़ आई सरकार, हमलोगन गरीबी ते बहुतै दिक्क हन कौनो उपाय बतावा जाई।

युवराज को कुछ नहीं सूझा आँखों ही आँखों में सेवादार से पूछा और फुसफुसाहट भरी आवाज़ में बूझा फिर बाँहे समेट कर खड़े हुए और ज्ञान बघारा।

भई गरीबी तो केवल दिमाग की सोच है तुम लोग नाहक ही परेशान हो, मन में सोच लो तो सुखी इंसान हो।

यह सुनते ही पूरी सभा में सन्नाटा छा गया लोग तालियाँ बजाना भूल गए। कंठ रुंध गए चक्षुओ से अश्रुधार बह निकली।

सदिओं से जिस गरीबी को लेकर हमारे बाप-दादा, खून पसीना बहाते रहे, रहे पीढ़ियो तक परेशान। उसका समाधान कितना आसान।

मौक़ा देख सेवादारों ने आवाज़ लगाईं।

राजकुमार की जय हो !! युवराज की जय हो !!

भीड़ से आवाज़ आई युवराज की जय हो !! राजकुमार की जय हो !!

राज्य में सब सुखी थे लोगों के दिमाग से गरीबी ख़त्म हो गयी थी। तो क्या हुआ यदि लोग भूखों मर रहे थे। जवान बूढ़े लग रहे थे बूढ़े केवल ज़िंदा लाश थे। पर वो गरीब कतई नहीं थे।

तभी अचानक एक दिन कुछ सिर फिरों ने कहना शुरू किया। गरीबी के बारे में अनाप-शनाप बकना शुरू किया, कि हम गरीब इसलिए हैं क्योंकि ऊपर से भेजा हुआ पैसा, डाकू हड़प जाते है पूरा वैसे का वैसा।

लोगों ने कहा राजकुमार ने तो कुछ और ही बताया था। क्या राजकुमार को पता नहीं था?

सिरफिरों ने कहा उनको जरूर पता होगा। उनके परमपूज्य पिता श्री महाराजाधिराज ने एक बार गलती से बता दिया था।
कि सोलह आने में केवल दो आने ही जनता तक पहुँचते है बाकी सब डाकू लूट लेते हैं।

ये अलग बात है कि उन्होंने डाकुओं को कुछ नहीं कहा। उनकी इस साफगोई पर ही जनता गद्गद थी।

सिरफिरे ये भी कहने लगे कि काफी डाकू तो, मंत्रियो और दरबारिओं के कपड़े पहन कर अपनी बंदूके छुपा कर दरबारे ख़ास में हैं।

जनता को धीरे-धीरे विश्वास होने लगा। सिरफिरों को भी आभास होने लगा। लोग नंगे पैर, भूखे पेट चिथड़ो में लिपटे हुए।

राजधानी के चौक पर जमा हो गए, लम्बी-लम्बी तकरीरें बहुत सारे सुझाव।

सभी मंत्रियों दरबारियों की कपड़े उतरवाकर जांच हो। डाकुओं को पहचान कर बाहर निकाला जाए कुछ का कहना था। सारे मंत्रियों, दरबारियों को बर्खास्त किया जायें जितने मुह उतनी बातें।

लोगों का गुस्सा सरे आम हो गया, दरबारे ख़ास में कोहराम हो गया। सबने सिर से सिर मिलाकर मंत्रणा की चतुर मंत्रियों का गैंग बना।
सरकारी भोंपू से समझाया गया जनता को भरमाया गया।

ये सिरफिरे झूठ बोल रहे हैं इसमें विदेशी ताकतों का हाथ है। हम तो आपके साथ हैं। लोगों ने बूढ़े मंत्री की बात का भरोसा किया भीड़ छटने लगी। इस दौरान राजमाता विदेशी दौरे पर थीं युवराज कहीं दूर आखेट पर।

उनके लौटने तक सब शांत हो गया था डाकू खुश थे। चतुर मंत्रियों का गैंग मुस्कुरा रहा था, एक दुसरे की पीठ थप-थपा रहा था।

तभी अचानक राज्य के सबसे बुज़ुर्ग न्यायाधीश ने आदेश पारित कर दिया, कि जो भी डाकू रंगे हाथ डाका डालते हुए पकड़ा जाएगा, वो दरबारे ख़ास में नहीं बैठ पायेगा।

दरबारियों और मंत्रियों में गुस्सा था कुछ दरबारी भी दरबारे ख़ास को डाकुओं से मुक्त कराना चाहते थे और बहुत खुश थे बाकी सब नाखुश थे।

नाराज़ मंत्रियों, दरबारियों की संख्या बहुत ज्यादा थी। बूढ़े मंत्री की बात भी कोई सुन नहीं रहा था। राजकुमार सो रहा था। राजमाता का पता नहीं।

सब ने मिलकर हल निकाला। नया क़ानून बनायेंगे अपने डाकू भाइयों को बचायेंगे।

फिर क्या आनन्-फानन में अध्यादेश बनाया गया खूबसूरत शब्दों से सजाया गया। युवराज का अब भी पता नहीं शायद आखेट से लौट कर गहरी नींद में थे।

तभी राजकुमार ने सपने में देखा भारी भीड़ नंगे आदमी। चीथड़ो में लिपटी हुई औरतें बड़े पेट और पतली टांगों वाले बच्चे, आँखों में अंगारे, हाथो में बरछी, भाले, आरे।

राजकुमार की घिघ्घी बांध गयी बिस्तर छोड़ कर महल से नींद में ही भागे। रथ, सारथी, पहरेदार, सेवादार सब पीछे वो आगे।

बाहर पूरे राज्य में सारे मंत्री, दरबारी। जनता को डाकुओं के बारे में समझा रहे थे। डाकू समाज के लिए कितने जरूरी हैं ये बुझा रहे थे।
चोर उचक्के, छोटे मोटे मवाली आपको तंग नहीं कर सकते। अगर कोई सरकारी डाकू आपके संपर्क में है।

जनता फुसफुसाई लेकिन दरबारे ख़ास में। डाकुओं की नुमाइंदगी तो बहुत ज्यादा है मंत्री गुर्राए। उनका काम भी तो ज्यादा है हमारे लिए वो इतना करते हैं। क्या हम उनको इज्जत से दरबारे ख़ास में बैठा भी नहीं सकते।

जनता में सुगबुगाहट थी वो मंत्रियों की बात नहीं सुन रहे थे। सिरफिरे जनता को भड़का रहे थे डाकू हड़का रहे थे।

ऐसी सी ही एक सभा में युवराज हाँफते हांफते पहुचे। जनता, मंत्री, दरबारी सब खड़े हो गए युवराज अभी नींद में थे।
माथे पर पसीना लडखडाती आवाज़ उनको लग रहा था। चारों तरफ गरीबों की भीड़ है हथियारों से लैस।
युवराज का मुह सूख रहा था, मंत्री के हाथ से छीन कर अध्यादेश फाड़ दिया। जनता, मंत्री, दरबारी सब सन्न काटो तो खून नहीं थोड़ी देर तक छाया रहा सन्नाटा।

तभी चतुर मंत्रियों को कुछ याद आया सभी एक साथ चिल्लाये।

राजकुमार की जय !! युवराज की जय !!

पर इस बार भीड़ से एक भी आवाज़ नहीं आई। जनता चुप थी राजकुमार का सपना टूट चुका था, वो धीरे-धीरे थके हुए कदमों से अपने रथ की तरफ बढ़ रहा था, और भारत एक नया इतिहास गढ़ रहा था।

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We are grateful to my dear friend Mr. Rahul Jaiswal, for sharing this Inspirational Story in Hindi.

 

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* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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सूफी संत ज़ुन्नुन से जुड़ा प्रसंग।

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ϒ सूफी संत ज़ुन्नुन से जुड़ा प्रसंग। ϒ

सूफी संत ज़ुन्नुन – इंसान की कीमत,

प्यारे दोस्तों – बहुत पुरानी बात है। मिस्र देश में एक सूफी संत रहते थे जिनका नाम ज़ुन्नुन था। एक नौजवान ने उनके पास आकर पूछा – “मुझे समझ में नहीं आता कि आप जैसे लोग सिर्फ एक चोगा ही क्यों पहने रहते हैं ? बदलते वक़्त के साथ यह ज़रूरी है कि लोग ऐसे लिबास पहनें जिनसे उनकी शख्सियत सबसे अलहदा दिखे और देखनेवाले वाहवाही करें।”

  • ज़ुन्नुन मुस्कुराये और अपनी उंगली से एक अंगूठी निकालकर बोले, “बेटे, मैं तुम्हारे सवाल का जवाब ज़रूर दूंगा लेकिन पहले तुम मेरा एक काम करो। इस अंगूठी को सामने बाज़ार में एक अशर्फी में बेचकर दिखाओ।”

नौजवान ने ज़ुन्नुन की सीधी-सादी सी दिखनेवाली अंगूठी को देखकर मन ही मन कहा, “इस अंगूठी के लिए सोने की एक अशर्फी। इसे तो कोई चांदी के एक दीनार में भी नहीं खरीदेगा।”

  • “कोशिश करके देखो, शायद तुम्हें वाकई कोई खरीददार मिल जाए,” ज़ुन्नुन ने कहा।

नौजवान तुरंत ही बाजार को रवाना हो गया। उसने वह अंगूठी बहुत से सौदागरों, परचूनियों, साहूकारों, यहाँ तक कि हज्जाम और कसाई को भी दिखाई पर उनमें से कोई भी उस अंगूठी के लिए एक अशर्फी देने को तैयार नहीं हुआ। हारकर उसने ज़ुन्नुन को जा कहा, “कोई भी इसके लिए चांदी के एक दीनार से ज्यादा रकम देने के लिए तैयार नहीं है।”

  • ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा – “अब तुम इस सड़क के पीछे सुनार की दुकान पर जाकर उसे यह अंगूठी दिखाओ। लेकिन तुम उसे अपना मोल मत बताया, बस यही देखना कि वह इसकी क्या कीमत लगाता है।”

नौजवान बताई गयी दुकान तक गया और वहां से लौटते वक़्त उसके चेहरे पर कुछ और ही बयाँ हो रहा था। उसने ज़ुन्नुन से कहा- “आप सही थे। बाज़ार में किसी को भी इस अंगूठी की सही कीमत का अंदाजा नहीं है। सुनार ने इस अंगूठी के लिए सोने की एक हज़ार अशर्फियों की पेशकश की है। यह तो आपकी माँगी कीमत से भी हज़ार गुना है।”

ज़ुन्नुन ने मुस्कुराते हुए कहा – “और वही तुम्हारे सवाल का जवाब है। किसी भी इंसान की कीमत उसके लिबास से नहीं आंको, नहीं तो तुम बाज़ार के उन सौदागरों की मानिंद बेशकीमती नगीनों से हाथ धो बैठोगे। अगर तुम उस सुनार की आँखों से चीज़ों को परखने लगोगे तो तुम्हें मिट्टी और पत्थरों में सोना और जवाहरात दिखाई देंगे। इसके लिए तुम्हें दुनियावी नज़र पर पर्दा डालना होगा और दिल की निगाह से देखने की कोशिश करनी होगी। बाहरी दिखावे और बयानबाजी के परे देखो, तुम्हें हर तरफ हीरे-मोती ही दिखेंगे।”

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