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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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vivek kumar poems

योग करें निरोग रहें।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Karen Nirog Rahen | योग करें निरोग रहें।

Life Yoga for some time, keep everyone completely healthy, some important yoga postures, Surya Namaskar or Tadasana, Dhruvasana or Chakrasana, Sarvangasana or Halasana, Dhanurasana.

जीवन हमारा है अनमोल,
इसका नहीं है कोई तोल।
शिक्षित सुयोग्य होकर भी,
लापरवाही क्यूं करते सभी।

व्यस्त चर्या में सब है मगन,
रोग का सब दे रहे समन।

यदि काया निरोग रखना है,
तो डेली वेज योग करना है।
अपने लिए वक्त निकालिए,
जीवन स्वास्थ्यकर बनाइए।

कुछ समय का जीवन योग,
रखें सबको बिल्कुल निरोग।
योग के कुछ प्रमुख आसन,
सूर्य नमस्कार या ताड़ासन।

ध्रुवासन हो या हो चक्रासन,
सर्वांगासन हो या हलासन।

धनुरासन हो या भुजंगासन,
पद्मासन के संग वज्रासन।
हर आसन का अपना मोल,
धरा का बच्चा बच्चा बोल,
योग हमसब को करना है।

इसके छात्रछाया में रहना है,
अनुलोम विलोम प्राणायाम,
सबके लिए संजीवनी आम।

खुद जुड़े औरों को जोड़े,
योग से कभी मुंह न मोड़ें।
सब मिलकर आज ये कहे,
डेली योग करें निरोग रहें।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने जीवन को अनमोल बताते हुए इसकी कीमत को समझाया है। शिक्षित और सुयोग्य होने के बावजूद लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहते हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद, स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कवि ने सुझाव दिया है कि यदि हम अपनी काया को निरोग रखना चाहते हैं, तो हमें रोजाना योग का अभ्यास करना चाहिए। योग के लिए समय निकालना और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि जीवन स्वस्थ और निरोगी बना रहे। कवि ने कुछ प्रमुख योग आसनों का उल्लेख किया है जैसे सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, ध्रुवासन, चक्रासन, सर्वांगासन, हलासन, धनुरासन, भुजंगासन, पद्मासन और वज्रासन। हर आसन का अपना महत्व है और वे शरीर को निरोगी बनाए रखने में सहायक होते हैं। इसके अलावा, अनुलोम विलोम प्राणायाम को भी सभी के लिए संजीवनी के रूप में वर्णित किया गया है। कवि ने यह संदेश दिया है कि हमें न केवल खुद योग से जुड़ना चाहिए, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। अंत में, कवि सबको मिलकर यह संकल्प लेने के लिए प्रेरित करता है कि “हम नियमित रूप से योग करें और निरोग रहें।”

—————

यह कविता (योग करें निरोग रहें।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बेबस शिक्षक।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bebas Shikshak | बेबस शिक्षक।

studied with great care, Without sleep, without yawning.

बड़े जतन से की पढ़ाई,
बिना नींद बिन जम्हाई।
बड़े शौक थे देंगे ज्ञान,
बढ़ेगा मान और सम्मान।

यही सोच ले भरी उड़ान,
मिली शिक्षा की कमान।
बन गया शिक्षक महान,
न रहा खुशी का ठिकान।

मिली जिम्मेदारी से हुआ रत,
बच्चों की पढ़ाई में हुआ मस्त।
सोचा था शिक्षा का करूंगा दान,
परिवार पर भी रखूंगा ध्यान।

बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा बनाया लक्ष्य,
ईमानदारी से किए काम का मिला साक्ष्य।
काम से खुश एवम् संतुष्ट था,
काफी समय गुजर गया था।

अचानक शिक्षा विभाग में,
हुआ आमूलचूल परिवर्तन।
छात्र हित के नाम पर,
शिक्षक के काम पर।

शुरू हुई धमाचौकरी,
कठिन हुई अब नौकरी।
न होली, छठ न ही दिवाली,
सभी त्योहार अब खाली-खाली।

घर छूटा अपने छूटे, छूट गया समाज,
जीना दुर्लभ हो गया आज।
छात्र सह शिक्षक हो रहे बेरंग,
पढ़ाई तभी होगी जब होंगे संग।

आदेशालोक में पर्व त्योहार की छुट्टी हुई रद्द,
छुट्टी में भी शिक्षक स्कूल पहुंचे पढ़ाने गद्द।
जब बच्चे नहीं आयेंगे स्कूल,
शिक्षक क्या करेंगे जाकर स्कूल।

पढ़ाई लगातार हो अच्छी बात है,
रुचिकर हो ये गुणवत्तापूर्ण बात है।
कम समय में बेहतर ज्ञान,
होना चाहिए इसका भान।

पर्व त्योहार भी पढ़ाई का ही है पार्ट,
खुशनुमा माहौल में पढ़ाना भी है आर्ट।

जबर्दस्ती जब मुंह में न जाता खाना,
कैसे मिलेगा ज्ञान का खजाना।
नौकरी में ना कभी करना नहीं,
बेबस शिक्षक हूं कुछ कहना नहीं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता शिक्षक के जीवन की एक दृष्टि प्रस्तुत करती है। शिक्षक ने अपने काम में समर्पित बलिदान दिया, लेकिन अचानक शिक्षा विभाग में परिवर्तन हो गया और उन्हें धमाचौकी झेलनी पड़ी। इसके बाद, उनकी जिंदगी में कई बदलाव आए, जैसे कि त्योहारों की छुट्टियों का रद्द होना और नौकरी की प्रतिस्पर्धा। फिर भी, उन्होंने पढ़ाई को महत्व दिया और अपने छात्रों की शिक्षा में समर्पित रहा। वे यह सिखाते हैं कि पढ़ाई केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि प्रसन्नता और रुचि के साथ भी होती है। शिक्षक की भूमिका इस कविता में उजागर की गई है, जो समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण होती है।

—————

यह कविता (बेबस शिक्षक।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आओ गांधीगिरी अपनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aao Gandhigiri Apnaye | आओ गांधीगिरी अपनाएं।

Evil could not touch him, could not stop his path. While walking on the path of action, do not step back from struggles.

आज 2 अक्तूबर का शुभ दिन आया,
गांधी जी की है याद कराया।
सत्य अहिंसा जिनको भाया,
जिसने अंग्रेजो के छक्के छुड़ाया।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

तन पे धोती हाथों में लाठी,
देश का जन-जन उनका सहपाठी।
न लाठी न बंदूक, फिर भी काम दुरुस्त,
गोरे के सारे षडयंत्र उनके सामने सुस्त।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

बुराई जिसे छू न सका,
राह उनकी न रोक सका।
कर्म पथ पर चलते सही,
संघर्षों से पीछे हटे नहीं।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

अहिंसा के बनकर पुजारी,
अंग्रेजों के भागने की आई बारी।
सोने की चिड़ियां हुई आजाद,
ये आजादी रहेगा सबको याद।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

चट्टानों सा अविचल, करते काम शुरू,
देश को राह दिखाये जैसे गुरु।
उनके सिद्धांतों ने दिलाया मान,
राष्ट्र को मिला खोया सम्मान।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

बापू ने जो सपना था देखा,
सत्य अहिंसा जिनका सखा।
बापू की धार न हो बेकार,
आओ मिलकर इसे करें साकार।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

गांधी एक नाम नहीं विचार है,
इन्हें अपनाने का चलो करते प्रयास है।
जो हो न सके गोली बंदूक से,
वो होगा सत्य अहिंसा के जोर से।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में गांधी जी की के महत्वपूर्ण सिद्धांतों और उनके स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका को महत्वपूर्ण रूप से प्रमोट किया गया है। कविता में सत्य और अहिंसा के महत्व, गांधी जी के संघर्ष और उनके महत्वपूर्ण भूमिका का स्मरण किया गया है। इसके साथ ही, लोगों से गांधीगिरी को अपनाने की प्रेरणा दी गई है, ताकि वे सत्य और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता पूर्वक हर दिशा में अच्छे से काम कर सकें।

—————

यह कविता (आओ गांधीगिरी अपनाएं।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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बेटी है वरदान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Beti Hai Vardan | बेटी है वरदान।

a girl can do everything and be strong through pain and still smile.

बेटी है वरदान,
करें न इनका अपमान।
बेटी होती सबसे खास,
छीना जाता क्यूं इनकी सांस।

कुदरत का अनमोल रतन,
जीवन देने का करो जतन।
दुनियां की दौलत उसने पाई,
जिसके घर बेटी है आई।

घर की रौनक होती बेटी,
हर बगिया महकाती बेटी।
मान सम्मान दिलाती बेटी,
त्याग और बलिदान की मूरत होती।

मुश्किल घड़ी में साथ निभाती,
कभी नहीं वो घबड़ाती।
चंचलता से वो भरी पड़ी,
विकट पल में भी रहती खड़ी।

लक्ष्मी का वो होती रूप,
समय देख हो जाती चुप।
21 वीं सदी की नई सोंच,
बेटा बेटी में न कोई खोंच।

बेटा-बेटी जब एक समान,
क्यूं न करें इनपर अभिमान।

इनके पक्के इरादे का जोड़ नहीं,
हिला दे इन्हें ऐसा कोई तोड़ नहीं।
बेटी ही मान, बेटी ही सम्मान,
बेटी है कुदरत का अनूठा वरदान।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में बेटियों के महत्व को बताया गया है। यह कविता बेटी को वरदान मानने की बात करती है और बेटियों का कभी भी अपमान न करने की बात कही गई है। बेटी विशेष होती है और वही घर की रौशनी, दौलत, और समाज में मान-सम्मान का प्रतीक होती है। उनके त्याग और समर्पण को महत्वपूर्ण माना गया है और उन्हें समर्थन और सुरक्षा देना जरूरी है। बेटियाँ लक्ष्मी के रूप में होती हैं और उनके साथ अच्छे से बात व व्यवहार करने की नई सोच की आवश्यकता है, जिसमें बेटा और बेटी को समान दृष्टिकोण से देखा जाता है।

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यह कविता (बेटी है वरदान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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शिक्षक को सम्मान चाहिए।

Kmsraj51 की कलम से…..

Teacher Needs Respect | शिक्षक को सम्मान चाहिए।

राही को जो राह दिखाए,
गिरते को ऊपर उठाए।
कच्ची मिट्टी से घड़े बनाए,
धार उनकी कुंद बनाए।
अपनी बिना परवाह किए,
छात्रों का भविष्य बनाए।

मुसीबत आने पर भी,
डिगते नही पथ से कभी।
पथ प्रदर्शक, ज्ञान के दाता,
परखुशी इन्हें खूब है भाता।
सच्चाई की राह दिखाते,
घुलमिल वो सभी से जाते।

त्याग और बलिदान की मूरत,
इनका है राष्ट्र को जरूरत।
देते सेवा हरपल हरदम,
फिर भी जोश न होता कम।
अपने सारे दुख दर्द सहते,
मुंह से कभी उफ न करते।

इतने सारे जतन है करते,
फिर क्यूं इन्हें अपमान है मिलते।
दिल में छुपी एक कसक है,
शिक्षक दिवस पर बयां करते है।
जब गुरु होते है राष्ट्र निर्माता,
प्रताड़ित क्यूं इन्हें किया जाता।

छात्र हित हेतु सर्वस्व करते कुर्बान,
इनपे होना चाहिए राष्ट्र को अभिमान।
स्वाभिमान का इन्हें दान चाहिए,
शिक्षक को सम्मान चाहिए।
शिक्षक को सम्मान चाहिए।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में गुरु या शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका को बड़ी उच्चता और सम्मान के साथ दर्शाया गया है। यह कविता गुरु या शिक्षक के योगदान को गर्व और सम्मान से देखती है और उनके शिक्षा देने के कार्य की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। इसके अलावा, छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने का महत्व भी बताया गया है और उन्हें सच्चाई की ओर मोड़ने के लिए उत्साहित किया गया है। इसके साथ ही, शिक्षकों को पूर्ण सम्मान और आदर देने की आवश्यकता की भी अपील की गई है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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रक्षाबंधन का संकल्प।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rakshabandhan Ka Sankalp | रक्षाबंधन का संकल्प।

प्रेम और विश्वास का प्रतीक,
स्नेह और दुलार बड़ा ही नीक।
अदभुत अनोखा अटूट बंधन,
मस्तक पर धारित तिल चंदन।
जैसे आकाश और गगन,
वैसे भाई और बहन।
जैसे धूप और छाया,
वैसे अदृश्य प्रेम की माया।

सारे जग में सबसे सच्चा,
धागा जिसमें सबसे कच्चा।
पर कच्चा है कमजोर नहीं,
और टूट जाए वो डोर नहीं।
रक्षा के सूत्र से जिसे पिरोया,
पावन धागों में जिसे संजोया।
रक्षा का संकल्प है जिसमें,
तोड़ दे वो दम है किसमें।

सावन का अनुपम त्योहार,
होता भाई बहन का प्यार।
हर भाई का आज है कहना,
खुश रहना वो मेरी बहना।
संकल्प आज दुहराते है,
तुझे सशक्त सबल बनाएंगे।
फौलाद जैसे जीवट बनाएंगे,
ताकि पकड़ न सके कोई तेरा हाथ।

ऐसे दूंगा सदा ही तेरा साथ,
मगर विपरीत परिस्थितियों में,
जब अपनी रक्षा तू खुद करेगी,
धरा तुझपे नाज करेगी।
संकल्प पूरा होगा हमारा,
देखेगा संसार ये सारा।
बहन का आशीष भाई का प्यार,
ऐसा अनुपम है यह त्योहार।
रक्षा का जिसमें गहरा बंधन,
कहलाता है वो रक्षाबंधन।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता रक्षाबंधन के त्योहार के महत्वपूर्ण आदर्शों और भाई-बहन के प्यार को सुंदरता से प्रकट करती है। इस कविता में रक्षाबंधन को प्रेम और विश्वास का प्रतीक कहकर वर्णित किया गया है, जो भाई-बहन के बीच एक सजीव और मजबूत बंधन को दर्शाता है। इसके साथ ही, यह उनके स्नेह और दुलार की महत्वपूर्णता को भी व्यक्त करता है। कविता में बड़े ही अद्भुत और अनोखे बंधन के बारे में बताया गया है, जिसका तिलक चंदन के तिल की तरह मस्तक पर है। इसके साथ ही, आकाश और गगन, धूप और छाया की तरह, भाई-बहन का रिश्ता भी अत्यधिक महत्वपूर्ण और अदृश्य होता है। कविता में दिखाया गया है कि भाई-बहन के रिश्ते में सच्चाई और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, जिसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जा सकता है। रक्षाबंधन के सूत्र ने उन्हें मजबूत बनाया है और यह सुनिश्चित करता है कि उनका बंधन कभी नहीं टूटेगा। कविता आगामी वर्षों में भी भाई-बहन के प्यार के महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य में उनकी आपसी समर्थन और आशीर्वाद की महत्वपूर्णता को दर्शाती है। कविता के अंत में, भाई का सदैव उसके साथ रहने का आश्वासन देते हुए, बहन को उसकी स्वयं रक्षा करने की साहस दी जाती है, जिससे धरती भी गर्वित होती है। कुल मिलाकर, यह कविता रक्षाबंधन के त्योहार के माध्यम से भाई-बहन के अदृश्य और अटूट प्रेम का संदेश देती है, जिसका रंग और महत्व हमारे संबंधों को बढ़ावा देने में आता है।

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यह कविता (रक्षाबंधन का संकल्प।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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30 मिनट का डेली डोज।

Kmsraj51 की कलम से…..

30 Minute Daily Dose | 30 मिनट का डेली डोज।

30 मिनट का डेली डोज,
भगाए हमारे सारे रोग।
योग का हमें मिला वरदान,
क्यूं न करें इसका निदान।

सूर्य नमस्कार का करें प्रयोग,
तन मन स्वस्थ हेतु करें उपयोग।
योग से जीवन होता निरोग,
यही है एक सुंदर संयोग।

शरीर को रखता चुस्त दुरुस्त,
बीमारी को जड़ से करता पस्त।
योग करें, भाई योग करें,
दूर सभी हम रोग करें।

आलस दूर भागता है,
तन स्वस्थ सुखी बनाता है।
चलो आज एक जन संदेश फैलाए,
बिजी लाइफ से कुछ समय बचाएं।

करें 30 मिनट का नित्य डेली डोज,
पास न फटकेगा कोई रोग।

जिसका आज शरीर है निरोग,
वही सुखी, ये जान ले लोग।
योग करें, भाई योग करें,
दूर सभी हम रोग करें।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे। आओ हम सब मिलकर, योग दिवस मनायें। पद्मासन हो वज्रासन हो, या हो चकरा आसन, ध्यानमग्न हो बैठ जायें, बिना करे प्राशन। आओ हम सब मिलकर योग दिवस मनायें।

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हमारा बिहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Our Bihar | हमारा बिहार।

आर्यावर्त की जान,
जो है हिंद की पहचान,
आर्यभट्ट की धरती पर, बस एक ही नाम,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

कुंवर से जिनकी शान,
मुजफ्फरपुर की लीची, जिनकी पहचान।
मां जानकी की नगरी से बढ़ता, राज्य का सम्मान,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

जहां बुद्ध ने पाया ज्ञान,
जिनपर हमें है अभिमान।
शिक्षा का गौरव नालंदा, देश की पहचान,
वही है मेरा बिहार, वो हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

प्रथम गणराज्य की छवि महान,
वो वैशाली ही एक नाम।
जिनकी अमिट पहचान,
वो हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

पशुओं के मेले सोनपुर से बढ़ता, वैभव और सम्मान,
जैनों के पहले तीर्थंकर, महावीर भगवान।
ये है मेरा बिहार ये हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार, ये है हमारा बिहार।

लिट्टी चोखा व्यंजन, अपने में है खास,
मधुबनी की पेंटिंग का, नहीं है कोई काट।
सिल्क सिटी का पहनावा, आता सबको रास,
ये है मेरा बिहार, ये हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार हमारा बिहार।

प्रथम नागरिक बने, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद,
चंपारण से बापू ने किया, आंदोलन शुरुआत।
दशरथ मांझी के सामने, पहाड़ भी हुआ निढ़ाल,
ऐसा मेरा बिहार,
बिहार बिहार बिहार हमारा बिहार।

आरक्षण ने दिलाया, बराबर का अधिकार,
महिलाओं में आया, सबलता का एहसास।
ये है हमारा बिहार, ये हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — बिहार राज्य प्राचीन काल से ही ज्ञान, धर्म व शिक्षा का केंद्र रहा है, ये बुद्ध की भूमि हैं, यहाँ से ज्ञान व शिक्षा पूरी दुनिया को मिलता आया है। बिहार दिवस (भोजपुरी: 𑂥𑂱𑂯𑂰𑂩 𑂠𑂱𑂫𑂮) हर साल २२ मार्च को मनाया जाता है। यह बिहार राज्य के गठन को चिह्नित करता है। इसी दिन अंग्रेजों ने १९१२ में बंगाल से बिहार को अलग कर एक राज्य बनाया था। इस दिन बिहार में सार्वजनिक अवकाश होता है। बिहार भारत के राज्यों में से एक राज्य है। बिहार को राजनीति तथा सांस्कृतिक का एक केंद्र बिंदु कहा जाता है। बिहार राज्य में गंगा नदी और उनकी अन्य सहायक नदियों का स्थान बसा है।

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यह कविता (हमारा बिहार।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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होली के रंग खुशियों के संग।

Kmsraj51 की कलम से…..

Holi ke Rang Khushiyon ke Sang | होली के रंग खुशियों के संग।

फागुन की बयार लाए, मौसम की फुहार,
उदास मन में लाए नवीनता की बहार।
सूने चमन में छाए, उमंगों की खुमार,
अनकहे रिश्तों में लाए बेहतरीन निखार।

टूटे दिलों को जोड़े ऐसे रंगतों में सुमार,
फगुआ, आमोद प्रमोद का एकमात्र त्योहार।
आपसी भाईचारे को बनाता खास,
प्रेम बंधुत्व में घोलता, नई मिठास।

सूने जीवन को रंगीन बना, करता सपने साकार,
आपसी रंजिश मिटा, लोग होते गुलजार।
एक दूजे संग कड़वाहट भूला, होते एक,
लाल हरी पीली मगर गुलाल होते एक।

गालों पर लगी रंगों की लाली,
हाथ में सजी गुलाल से भरी थाली।
लगाकर एक दूसरे को गले, जतलाते प्यार,
ये बस एक रिवाज नहीं, है अनोखा त्योहार।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — होली अर्थात – प्रेम, स्नेह व स्वार्थ से मुक्त आत्मिक रिश्ता, जहां अपने विकारों को त्याग कर, सभी के प्रति करुणा का भाव मन में रख सबका भला करना। सभी गीले शिकवे भुला कर प्रेम से सबका सम्मान करना व गले लगाना, सबकी मदद करने का भाव मन में प्रकट हो। रंगो की तरह सदैव ही जीवन खुशहाल हो सभी का यही संदेश देता ये महापर्व होली।

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यह कविता (होली के रंग खुशियों के संग।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

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आन बान आउर शान बा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aan Baan Aur Shaan Ba | आन बान आउर शान बा।

आन बान आउर शान बा,
तिरंगा हम्मर जान बा।
मर जाईब, मिट जाईब,
इसकी खातिर दुनिया से,
भी लड़ जाईब।

सर पे कफ़न,
हाथ में कलम की धार बा।
सच्चाई, ईमानदारी,
अहिंसा हम्मर पहचान बा।

लोकतंत्र हमनी के सम्मान बा,
बसुधैव कटुंबकम,
बंधुता रग रग में बसल बा।
मिट्टी की सौंधी खुशबू
जिसका स्वाभिमान बा,
ओ कोई और नहीं,
हमर हिंदुस्तान बा।

आजादी के लिए कुर्बान,
वीरों की शहादत पर गर्व बा।
फर्ज की खातिर सभी जन,
जहां तिरंगे को कफन…
बनाने की रखते चाह बा।

उस राष्ट्र पे हमें नाज बा,
जहां गांधी, सुभाष, भगत जन्म लिए।
जान हथेली पर लिए हुए,
अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए।
उन नामों पे हम सब को गर्व बा,
आन बान आउर शान बा,
तिरंगा हम्मर जान बा।

जय हिन्द – जय भारत।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हम सभी का शान है तिरंगा, हमे गर्व है अपने तिरंगे पर, माँ भारती की सेवा के लिए सर पे कफ़न, हाथ में कलम की धार बा। सच्चाई, ईमानदारी, अहिंसा हम सबका पहचान है। हमे गर्व है अपने लोकतंत्र पर, हम सब बसुधैव कटुंबकम की भाषा जानते है, लेकिन यदि कोई गलत नज़र वाली आँख उठाएगा तो उसका जवाब भी देना जानते है। जिस मिट्टी की सौंधी खुशबू जो मिट्टी हम सभी का स्वाभिमान बा, ओ कोई और नहीं, हमारा हिंदुस्तान बा। आजादी के लिए कुर्बान हुए अपने वीरों की शहादत पर गर्व है हमे। फर्ज की खातिर सभी जन, जहां तिरंगे को कफन… बनाने की रखते चाह वह प्यारा हमर हिंदुस्तान बा। जय हिन्द – जय भारत।

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