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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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विवेक कुमार की कविताएं

आओ गांधीगिरी अपनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aao Gandhigiri Apnaye | आओ गांधीगिरी अपनाएं।

Evil could not touch him, could not stop his path. While walking on the path of action, do not step back from struggles.

आज 2 अक्तूबर का शुभ दिन आया,
गांधी जी की है याद कराया।
सत्य अहिंसा जिनको भाया,
जिसने अंग्रेजो के छक्के छुड़ाया।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

तन पे धोती हाथों में लाठी,
देश का जन-जन उनका सहपाठी।
न लाठी न बंदूक, फिर भी काम दुरुस्त,
गोरे के सारे षडयंत्र उनके सामने सुस्त।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

बुराई जिसे छू न सका,
राह उनकी न रोक सका।
कर्म पथ पर चलते सही,
संघर्षों से पीछे हटे नहीं।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

अहिंसा के बनकर पुजारी,
अंग्रेजों के भागने की आई बारी।
सोने की चिड़ियां हुई आजाद,
ये आजादी रहेगा सबको याद।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

चट्टानों सा अविचल, करते काम शुरू,
देश को राह दिखाये जैसे गुरु।
उनके सिद्धांतों ने दिलाया मान,
राष्ट्र को मिला खोया सम्मान।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

बापू ने जो सपना था देखा,
सत्य अहिंसा जिनका सखा।
बापू की धार न हो बेकार,
आओ मिलकर इसे करें साकार।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

गांधी एक नाम नहीं विचार है,
इन्हें अपनाने का चलो करते प्रयास है।
जो हो न सके गोली बंदूक से,
वो होगा सत्य अहिंसा के जोर से।
स्वतंत्रता तो सबको भाएं,
आओ गांधीगिरी अपनाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में गांधी जी की के महत्वपूर्ण सिद्धांतों और उनके स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका को महत्वपूर्ण रूप से प्रमोट किया गया है। कविता में सत्य और अहिंसा के महत्व, गांधी जी के संघर्ष और उनके महत्वपूर्ण भूमिका का स्मरण किया गया है। इसके साथ ही, लोगों से गांधीगिरी को अपनाने की प्रेरणा दी गई है, ताकि वे सत्य और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता पूर्वक हर दिशा में अच्छे से काम कर सकें।

—————

यह कविता (आओ गांधीगिरी अपनाएं।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बेटी है वरदान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Beti Hai Vardan | बेटी है वरदान।

a girl can do everything and be strong through pain and still smile.

बेटी है वरदान,
करें न इनका अपमान।
बेटी होती सबसे खास,
छीना जाता क्यूं इनकी सांस।

कुदरत का अनमोल रतन,
जीवन देने का करो जतन।
दुनियां की दौलत उसने पाई,
जिसके घर बेटी है आई।

घर की रौनक होती बेटी,
हर बगिया महकाती बेटी।
मान सम्मान दिलाती बेटी,
त्याग और बलिदान की मूरत होती।

मुश्किल घड़ी में साथ निभाती,
कभी नहीं वो घबड़ाती।
चंचलता से वो भरी पड़ी,
विकट पल में भी रहती खड़ी।

लक्ष्मी का वो होती रूप,
समय देख हो जाती चुप।
21 वीं सदी की नई सोंच,
बेटा बेटी में न कोई खोंच।

बेटा-बेटी जब एक समान,
क्यूं न करें इनपर अभिमान।

इनके पक्के इरादे का जोड़ नहीं,
हिला दे इन्हें ऐसा कोई तोड़ नहीं।
बेटी ही मान, बेटी ही सम्मान,
बेटी है कुदरत का अनूठा वरदान।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में बेटियों के महत्व को बताया गया है। यह कविता बेटी को वरदान मानने की बात करती है और बेटियों का कभी भी अपमान न करने की बात कही गई है। बेटी विशेष होती है और वही घर की रौशनी, दौलत, और समाज में मान-सम्मान का प्रतीक होती है। उनके त्याग और समर्पण को महत्वपूर्ण माना गया है और उन्हें समर्थन और सुरक्षा देना जरूरी है। बेटियाँ लक्ष्मी के रूप में होती हैं और उनके साथ अच्छे से बात व व्यवहार करने की नई सोच की आवश्यकता है, जिसमें बेटा और बेटी को समान दृष्टिकोण से देखा जाता है।

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यह कविता (बेटी है वरदान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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शिक्षक को सम्मान चाहिए।

Kmsraj51 की कलम से…..

Teacher Needs Respect | शिक्षक को सम्मान चाहिए।

राही को जो राह दिखाए,
गिरते को ऊपर उठाए।
कच्ची मिट्टी से घड़े बनाए,
धार उनकी कुंद बनाए।
अपनी बिना परवाह किए,
छात्रों का भविष्य बनाए।

मुसीबत आने पर भी,
डिगते नही पथ से कभी।
पथ प्रदर्शक, ज्ञान के दाता,
परखुशी इन्हें खूब है भाता।
सच्चाई की राह दिखाते,
घुलमिल वो सभी से जाते।

त्याग और बलिदान की मूरत,
इनका है राष्ट्र को जरूरत।
देते सेवा हरपल हरदम,
फिर भी जोश न होता कम।
अपने सारे दुख दर्द सहते,
मुंह से कभी उफ न करते।

इतने सारे जतन है करते,
फिर क्यूं इन्हें अपमान है मिलते।
दिल में छुपी एक कसक है,
शिक्षक दिवस पर बयां करते है।
जब गुरु होते है राष्ट्र निर्माता,
प्रताड़ित क्यूं इन्हें किया जाता।

छात्र हित हेतु सर्वस्व करते कुर्बान,
इनपे होना चाहिए राष्ट्र को अभिमान।
स्वाभिमान का इन्हें दान चाहिए,
शिक्षक को सम्मान चाहिए।
शिक्षक को सम्मान चाहिए।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में गुरु या शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका को बड़ी उच्चता और सम्मान के साथ दर्शाया गया है। यह कविता गुरु या शिक्षक के योगदान को गर्व और सम्मान से देखती है और उनके शिक्षा देने के कार्य की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। इसके अलावा, छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने का महत्व भी बताया गया है और उन्हें सच्चाई की ओर मोड़ने के लिए उत्साहित किया गया है। इसके साथ ही, शिक्षकों को पूर्ण सम्मान और आदर देने की आवश्यकता की भी अपील की गई है।

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यह कविता (शिक्षक को सम्मान चाहिए।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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रक्षाबंधन का संकल्प।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rakshabandhan Ka Sankalp | रक्षाबंधन का संकल्प।

प्रेम और विश्वास का प्रतीक,
स्नेह और दुलार बड़ा ही नीक।
अदभुत अनोखा अटूट बंधन,
मस्तक पर धारित तिल चंदन।
जैसे आकाश और गगन,
वैसे भाई और बहन।
जैसे धूप और छाया,
वैसे अदृश्य प्रेम की माया।

सारे जग में सबसे सच्चा,
धागा जिसमें सबसे कच्चा।
पर कच्चा है कमजोर नहीं,
और टूट जाए वो डोर नहीं।
रक्षा के सूत्र से जिसे पिरोया,
पावन धागों में जिसे संजोया।
रक्षा का संकल्प है जिसमें,
तोड़ दे वो दम है किसमें।

सावन का अनुपम त्योहार,
होता भाई बहन का प्यार।
हर भाई का आज है कहना,
खुश रहना वो मेरी बहना।
संकल्प आज दुहराते है,
तुझे सशक्त सबल बनाएंगे।
फौलाद जैसे जीवट बनाएंगे,
ताकि पकड़ न सके कोई तेरा हाथ।

ऐसे दूंगा सदा ही तेरा साथ,
मगर विपरीत परिस्थितियों में,
जब अपनी रक्षा तू खुद करेगी,
धरा तुझपे नाज करेगी।
संकल्प पूरा होगा हमारा,
देखेगा संसार ये सारा।
बहन का आशीष भाई का प्यार,
ऐसा अनुपम है यह त्योहार।
रक्षा का जिसमें गहरा बंधन,
कहलाता है वो रक्षाबंधन।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता रक्षाबंधन के त्योहार के महत्वपूर्ण आदर्शों और भाई-बहन के प्यार को सुंदरता से प्रकट करती है। इस कविता में रक्षाबंधन को प्रेम और विश्वास का प्रतीक कहकर वर्णित किया गया है, जो भाई-बहन के बीच एक सजीव और मजबूत बंधन को दर्शाता है। इसके साथ ही, यह उनके स्नेह और दुलार की महत्वपूर्णता को भी व्यक्त करता है। कविता में बड़े ही अद्भुत और अनोखे बंधन के बारे में बताया गया है, जिसका तिलक चंदन के तिल की तरह मस्तक पर है। इसके साथ ही, आकाश और गगन, धूप और छाया की तरह, भाई-बहन का रिश्ता भी अत्यधिक महत्वपूर्ण और अदृश्य होता है। कविता में दिखाया गया है कि भाई-बहन के रिश्ते में सच्चाई और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, जिसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जा सकता है। रक्षाबंधन के सूत्र ने उन्हें मजबूत बनाया है और यह सुनिश्चित करता है कि उनका बंधन कभी नहीं टूटेगा। कविता आगामी वर्षों में भी भाई-बहन के प्यार के महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य में उनकी आपसी समर्थन और आशीर्वाद की महत्वपूर्णता को दर्शाती है। कविता के अंत में, भाई का सदैव उसके साथ रहने का आश्वासन देते हुए, बहन को उसकी स्वयं रक्षा करने की साहस दी जाती है, जिससे धरती भी गर्वित होती है। कुल मिलाकर, यह कविता रक्षाबंधन के त्योहार के माध्यम से भाई-बहन के अदृश्य और अटूट प्रेम का संदेश देती है, जिसका रंग और महत्व हमारे संबंधों को बढ़ावा देने में आता है।

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यह कविता (रक्षाबंधन का संकल्प।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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30 मिनट का डेली डोज।

Kmsraj51 की कलम से…..

30 Minute Daily Dose | 30 मिनट का डेली डोज।

30 मिनट का डेली डोज,
भगाए हमारे सारे रोग।
योग का हमें मिला वरदान,
क्यूं न करें इसका निदान।

सूर्य नमस्कार का करें प्रयोग,
तन मन स्वस्थ हेतु करें उपयोग।
योग से जीवन होता निरोग,
यही है एक सुंदर संयोग।

शरीर को रखता चुस्त दुरुस्त,
बीमारी को जड़ से करता पस्त।
योग करें, भाई योग करें,
दूर सभी हम रोग करें।

आलस दूर भागता है,
तन स्वस्थ सुखी बनाता है।
चलो आज एक जन संदेश फैलाए,
बिजी लाइफ से कुछ समय बचाएं।

करें 30 मिनट का नित्य डेली डोज,
पास न फटकेगा कोई रोग।

जिसका आज शरीर है निरोग,
वही सुखी, ये जान ले लोग।
योग करें, भाई योग करें,
दूर सभी हम रोग करें।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे। आओ हम सब मिलकर, योग दिवस मनायें। पद्मासन हो वज्रासन हो, या हो चकरा आसन, ध्यानमग्न हो बैठ जायें, बिना करे प्राशन। आओ हम सब मिलकर योग दिवस मनायें।

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यह कविता (30 मिनट का डेली डोज।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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चलो हम नववर्ष मनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ चलो हम नववर्ष मनाएं। ♦

चलो आज करें शुरुआत,
निराशाओं को देकर मात।
मन के मैल को हटाएं,
तम को मन से दूर भगाएं।
जीवन में रौशनी फैलाएं,
चलो हम नववर्ष मनाएं।

दे बेसहारे को सहारा,
भूखे को देकर निवाला।
भटके को दिखाकर राह,
सबके मंगल की कर चाह।
मन से ईर्ष्या द्वेष मिटाएं,
चलो हम नववर्ष मनाएं।

सब पर स्नेह लुटाकर,
मन को मंदिर बनाकर।
भेद-भाव मिटाकर,
स्वार्थ मोह सब त्यागकर।
परहित पर जीवन अर्पित कर,
चलो हम नववर्ष मनाएं।

आओ हमसब मिलकर,
एक नई उमंग जगाकर।
ऐसा वातावरण बनाएं,
नव ज्योति का प्रकाश फैलाएं।
चारों ओर खुशहाली लाएं,
चलो हम नववर्ष मनाएं।

दीप से दीप जलाकर,
हाथ से हाथ मिलाकर।
चाहूं ओर सुख शांति लाएं,
न रहे कोई भूखा बेसहारा।
ऐसी निर्मल धारा बहाएं,
चलो हम नववर्ष मनाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मानव सेवा ही प्रभु सेवा है, सभी आपस में मिलजुलकर जरूरतमंदो की मदद करें। देकर बेसहारे को सहारा और भूखे को देकर निवाला। भटके को दिखाकर राह सदैव ही सबके मंगल की कर चाह। मन से ईर्ष्या द्वेष मिटाएं, चलो हम नववर्ष मनाएं। सब पर दिल से स्नेह लुटाकर, मन को मंदिर बनाकर। आपसी भेद-भाव मिटाकर, स्वार्थ मोह सब त्यागकर। परहित पर जीवन अर्पित कर, चलो हम नववर्ष मनाएं। हम अपनी रक्षा के लिए केवल शस्त्र उठाएं, निर्दोषों पर अत्याचार न करें कभी। उमंग के दीप से दीप जलाकर, हाथ से हाथ मिलाकर। आओ चाहूं ओर सुख शांति लाएं, कोशिश हो हम सबकी न रहे कोई भूखा बेसहारा। ऐसी निर्मल धारा हम बहाएं, चलो हम नववर्ष मनाएं।

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यह कविता (चलो हम नववर्ष मनाएं।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मां के नव रुपों का दर्शन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मां के नव रुपों का दर्शन। ♦

मां की महिमा है बड़ी निराली,
उनके रूपों में दर्शन देती मां काली।
नवरात्रा में मां के नव रूपों के दर्शन को है मन खाली,
तरस रही अंखियां, बजा रही ताली।
मां के नव रूपों में रचा बसा जग संसार,
जगत जननी मां जगदम्बा तेरी महिमा अपरम्पार।

मां अपने प्रथम रूप में,
पहाड़ की बेटी शैलपुत्री का दरस दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी शैलपुत्रयै नमः
मंत्र उनका, नंदी है वाहन जिनका।

मां अपने द्वितीय रूप में,
भक्ति और तपस्या की,
मां ब्रह्मचारिणी का भाव दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी ब्रह्मचारणयै नमः
मंत्र उनका, रुद्राक्ष की माला सुशोभित करता जिनका।

मां अपने तृतीय रूप में,
राक्षसों का नाश करने वाली,
चंद्रघंटा का रौद्र रूप दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी चंद्रघणटयै नमः
मंत्र उनका, बाघ है वाहन जिनका।

मां अपने चतुर्थ रूप में,
ब्रह्मांडीय अंडे की देवी का रूप दिखाती।
उच्चारित करें ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मंडायै नमः
मंत्र उनका, महाशक्ति का रूप है जिनका।

मां अपने पंचम रूप में,
मातृत्व और बच्चों की देवी,
स्कंदमाता का ममत्व दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी स्कंदमातायै नमः
मंत्र उनका, शेर है वाहन जिनका।

मां अपने षष्ठ रूप में,
शक्ति की देवी कात्यायनी का दरस दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
मंत्र उनका, योद्धा चरण में दुर्गा है जिनका।

मां अपने सप्तम रूप में,
शुभता और साहस की देवी,
कालरात्रि का दरस दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी कलरात्रयै नमः
मंत्र उनका, गधा वाहन है जिनका।

मां अपने अष्टम् रूप में,
सौंदर्य और महिलाओं की देवी,
महागौरी का आभास कराती।
उच्चारित करें ॐ देवी महागौरयै नमः
मंत्र है उनका, बैल है वाहन जिनका।

मां अपने अंतिम नवम रूप में,
अलौकिक शक्तियों की देवी की छवि दिखाती।
उच्चारित करें ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धादतयै नमः
मंत्र उनका, कमल का फूल वाहन है जिनका।
मां के रूपों में रचा बसा जब संसार,
जगत जननी मां जगदम्बा तेरी महिमा अपरम्पार।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माता रानी के नव रूपों व गुणों का मनोरम वर्णन किया हैं। आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (मां के नव रुपों का दर्शन।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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हिंदी मेरी जान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हिंदी मेरी जान। ♦

अभिव्यक्ति का माध्यम है हिन्दी,
दिल में प्रेम जगाती हिंदी।
जीवन सरस बनाती हिंदी,
हिंदी से ही है हमारी शान।
हिंदी ही हमारा अभिमान,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

हिंदी से होती हमारी पहचान,
इससे बढ़ता राष्ट्र का मान।
हर क्षेत्र में अपना सिक्का जमाती,
लोगों के मन को है लुभाती।
भाव का करती संचार,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

जो पूरे राष्ट्र को एकसुत्री धागा में है जोड़,
वो मजबूत डोर है हिंदी।
जन-जन की भाषा है हिंदी,
प्रेम भाईचारे का प्रतीक है हिंदी।
इतना बेमिसाल, जिसकी पहचान,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

विशेषताओं से भरे भाषा का,
प्रसार जो होना चाहिए हुआ नहीं।
आओ मिलकर करें प्रचार,
हिंदी का करें खूब विस्तार।
मिलेगा इसे वाजिब हक और सम्मान,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अभिव्यक्ति का माध्यम है हिन्दी, दिल में सदैव ही प्रेम जगाती हिंदी, जीवन सरस बनाती हिंदी, हिंदी से ही है हमारी शान। हिंदी ही हमारा अभिमान, वह हिंदी मेरी जान है, हम इस पर कुर्बान। जो पूरे राष्ट्र को एकसुत्री धागा में है जोड़ती वो मजबूत डोर है हिंदी। जन-जन की भाषा है हिंदी, प्रेम भाईचारे का प्रतीक है हिंदी। इतना बेमिसाल, जिसकी पहचान, वह हिंदी मेरी जान। विशेषताओं से भरे भाषा का, प्रसार जो होना चाहिए हुआ नहीं। आओ हमसब मिलकर करें प्रचार, हिंदी का करें खूब विस्तार। तब मिलेगा इसे वाजिब हक और सम्मान, हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान। 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया। पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर, 1953 को मनाया गया था।

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यह कविता (हिंदी मेरी जान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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हां मुझे शिक्षक होने पर गर्व है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हां मुझे शिक्षक होने पर गर्व है। ♦

हां मुझे शिक्षक होने पर गर्व है,
राष्ट्र का निर्माता एवं भविष्य का रक्षक हूं।
हां मुझे गर्व है कि मैं एक शिक्षक हूं,
मैं वो कुम्हार हूं,
जो कच्ची मिट्टी से घड़ा बनाता है।

मैं वो तेल हूं,
जो ज्ञान का दीप जलाता है।
मैं वो मार्गदर्शक हूं,
जो भटके को राह दिखाता है।
मैं वो सत्य हूं,
जो शिक्षा की गंगा बहाता है।

मैं वो राह हूं,
जो बच्चे बूढ़े सब का हमसफर बन जाता है।
मैं वो कलाकार हूं,
जो बिन रंग के जीवन रंगीन बनाता है।
मैं उस पल को जीता हूं,
जब मुझे लोग निर्माता कहते है।

मैं वो सखा हूं,
जो हर पल सजग रहने का पाठ पढ़ाता है।
मैं किसी का मां तो किसी का पिता हूं,
किसी का आस किसी का विश्वास हूं।
कामयाबी की डोर,
उम्मीदों को उड़ान देने वाला पंख हूं।
हां, मैं एक शिक्षक हूं,
हां, मुझे शिक्षक होने पर गर्व है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में गुरु की जगह कोई भी नही ले सकता। एक सच्चा गुरु सदैव ही सन्मार्ग पर चलकर मर्यादा पुरुषोत्तम ज्ञान व ध्यान से भरपूर जीवन जीने की कला सीखाता है। गुरु सदैव ही जीवन के हर क्षेत्र में वृद्धि चाहते है, उन्नत और प्रगतिशील जीवन के सूत्रधार है गुरु। एक शिक्षक ही होते है जो हमे अच्छी और बुरी आदतों का पहचान करवाते है और वो हमारी बुरी आदतों को छोड़वाने का दिल से पूर्ण प्रयास भी करते हैं। हमें अच्छी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करते है, सदैव ही आगे बढ़ने का सही ज्ञान देते है।

—————

यह कविता (हां मुझे शिक्षक होने पर गर्व है।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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शिक्षादान महादान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षादान महादान। ♦

ईश्वर से जिसका है ऊंचा मान,
जिसके ज्ञान से मिलता,
जग को मान और सम्मान।
निष्पक्ष, निष्पाप, निर्मल,
ऐसी काया है जिनके पास।
वो कोई और नहीं,
शिक्षक ही है वो नाम।

शिक्षा देना है उनका काम,
लालच लोभ से परे हट।
सतत कर्तव्यपथ पर चलते,
अविचल, अडिग, उत्साही बन।
देते अपने कार्यों को अंजाम,
छात्र को देते उनकी मंजिल तमाम,
पर हित का रखते, हर पल ध्यान।

छात्र उपलब्धि पर उनकी पीठ थपथपाए,
अपने अरमानों को दरकिनार कर।
छात्र को दे जो ऊंची उड़ान,
ऐसे शिक्षक पर हमें है अभिमान।
शिक्षा का जो करे दान,
उससे बड़ा ना कोई महान।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में शिक्षादान से बड़ा कोई भी दान नहीं, शिक्षादान ही महादान हैं, शिक्षा से ही किसी भी इंसान के जीवन में आने वाली समस्याओं से बाहर निकला जा सकता हैं। एक शिक्षक ही होते है जो हमे अच्छी और बुरी आदतों का पहचान करवाते है और वो हमारी बुरी आदतों को छोड़वाने का दिल से पूर्ण प्रयास भी करते हैं। हमें अच्छी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करते है, सदैव ही आगे बढ़ने का सही ज्ञान देते है। वो शिक्षक ही होते है जो हमें ईर्ष्या, हिंसा, अधर्म, चोरी जैसी बुरी आदतों से दूर रखते है। शिक्षक ही, सही आचरण, नैतिकता का पाठ पढ़ाते है, कर्तव्य, संयम और धैर्य से सही पथ पर चलना सिखाते है। भारत में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्म दिवस अर्थात 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। उन्होंने अपने छात्रों से अपने जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस मनाने की इच्छा जताई थी। पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ राधाकृष्‍णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

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यह कविता (शिक्षादान महादान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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