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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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vivek kumar poems

मेरे पापा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मेरे पापा। ♦

मेरे पापा,
मेरे है पालकदाता।
अंदर से कोमल,
मेरी खुशी के लिए कुछ भी कर जाते।
सबसे प्यारे, सबसे न्यारे,
ऐसे है पापा हमारे।

अंगुली पकड़ चलना सिखाया,
कंधे पर बिठा प्यार जताया।
हर स्थिति से लडने का हुनर सिखाया,
सीने से लगाकर प्यार जताया।

मेरे सभी नाज नखरे, वो हंसकर उठाते,
वृक्ष की भांति संरक्षण देते।
त्याग समर्पण की वो पराकाष्ठा,
मेरे संवारने हेतु उनकी निष्ठा,
जीवन भर न भूल पाऊंगा।

उनका कर्ज न कभी उतार पाऊंगा,
मगर बुढ़ापे की लाठी बन,
अपना फर्ज जरूर निभाऊंगा।
उनके आशीष को दिल से लगाकर,
चरणों में उनके मस्तक सदा नमाऊंगा,
उनके सपनों को सच करके दिखलाऊंगा।

सबसे प्यारे, सबसे न्यारे,
मेरे पापा, मेरे भगवान हमारे।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — पापा का प्यार निराला है, पापा के साथ रिश्ता न्यारा है, इस रिश्ते जैसा कोई और नहीं यही रिश्ता दुनिया में सबसे प्यारा है। मेरे होठों की हँसी मेरे पापा की बदौलत है, मेरी आँखों में खुशी मेरे पापा की बदौलत है, पापा किसी भगवान से कम नही क्योकि मेरी ज़िन्दगी की सारी खुशी पापा की बदौलत है। ये बाप तुझे अपना सब कुछ दे जाएगा, और तेरे कंधे पर दुनिया से चला जाएगा। पिता हैं तो हमेशा बच्चो का दिल शेर होता हैं। वो इस छोटी सी दुनिया में मेरा अनंत संसार है। एक पापा की बदौलत ही मेरा जीवन खुबसूरत बन पाया।

—————

यह कविता (मेरे पापा।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, विवेक कुमार जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Papa Par Kavita in Hindi, Poem on Father in Hindi, vivek kumar poems, कोट्स, पिता पर कविता, पिता पर कविता – पिता क्या है?, मेरे पापा, विवेक कुमार, विवेक कुमार की कविताएं, शायरी व स्टेटस

शुभागमन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शुभागमन। ♦

निश्छल चंचल मन,
आंखों में संजोएं, सपनों की उमंग।
फंख फैलाए भरने को गगन की उड़ान,
नव आगंतुकों हेतु सज चुका है, शिक्षा का दरबार।
आइए पधारिए हमारे भविष्य के कर्णधार,
शिक्षा की दहलीज पर है आपका वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

चली बयार,
आ गई नामांकन की बहार।
नन्हें – मुन्हें की उड़ी फुहार,
मनमोहक, मनभावन लगता जैसे त्योहार।
आमंत्रित करता सूबे सह मुजफ्फरपुर का हर विद्यालय परिवार,
शिक्षा की दहलीज पर है वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

सजेगी बगिया चमन होगा गुलजार,
नव कोंपल के आगमन से खिल उठेगा,
शिक्षा का बाग, होगा नया आगाज।
भंवरे गुनगुनाएंगे सुनकर,
प्यारी मीठी मंद मंद मुस्कान।
पधारों हे राष्ट्र के कर्णधार,
शिक्षा की दहलीज पर है वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

प्रथम अप्रैल से आपकी राह निहारे,
नामांकन की बांट जोहते।
पाठशाला ही है जिसकी शान,
जो दिलाएगा उन्हें मान और सम्मान।
तभी बढ़ेगा राष्ट्र का अभिमान,
शिक्षा की दहलीज पर है वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

सभी अभिभावकों से विवेक की विनती है हरबार,
चल रही नामांकन की बयार।
कराइए छह वर्ष के नन्हें मुन्ने का दाखिला इसबार,
खुद आइए, संग लाइए।
बगिया के फूलों का चहकता मेहमान,
शिक्षा की दहलीज पर करते वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — शिक्षा हमें विभिन्न प्रकार का ज्ञान व कौशल प्रदान करता है। यह सीखने की निरंतर, धीमी और सुरक्षित प्रक्रिया है, जो हमें ज्ञान प्राप्त करने में मदद करती है। यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो हमारे जन्म के साथ ही शुरु हो जाती है और हमारे जीवन के साथ ही खत्म होती है। सजेगी बगिया चमन होगा गुलजार, नव कोंपल के आगमन से खिल उठेगा, शिक्षा का बाग, होगा नया आगाज। भंवरे गुनगुनाएंगे सुनकर, प्यारी मीठी मंद मंद मुस्कान। पधारों हे राष्ट्र के कर्णधार, शिक्षा की दहलीज पर है वंदन अभिनंदन, शुभागमन, शुभागमन…।

—————

यह कविता (शुभागमन।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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खाली समय।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ खाली समय। ♦

जब भी बैठिए खाली,
बजाइए जरूर ताली।
शरीर की करती रखवाली,
जैसे हो बाहर वाली।

जब मिले फुर्सत के क्षण,
ईश्वर का कर लो भजन।
मिलेगी मन को शांति,
ना रहेगा कोई भ्रांति।

जब मिले खाली के दो पल,
ऐसा कर जो सोचा हो बिता कल।
खुद से करें बात,
करें कुछ नया करामात।

आंखों को घुमाएं गोल गोल,
जैसे सूरज और चंदा गोल मटोल।
कोयल की निकाले बोली,
जैसे दे रहा हो कोई गाली।

हरकतें करें ऐसी,
दिल खुश हो जाए वैसी।
कभी उठक, कभी बैठक,
साथ में दीजिए आंखों को थोड़ी ठंडक।

आंखों में लगाइए काली,
जैसे हो सुरमा भोपाली।
एक मिनट के लिए हो जाओ मौन,
मिल जायेगा कुछ चैन।

चाय की चुस्की प्याली में,
नयन मटकाईये खाली में।
सिर खुजलाईए बाल खींचिए,
दाएं देखिए, बाएं देखिए।

अजब वाक्या याद कर,
मुस्कान बिखेरिए खुलकर।
खाली समय में भी काफी काम है,
नसीब में कहां लिखा आराम है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जब हो फुरसत का समय प्रभु का भजन भी कर लिया करो। खाली समय में दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर चाय पीते हुए कुछ फुरसत के पल बिता भी लिया करो, ना जाने कब ये शरीर साथ छोड़ दे, इसलिए प्रेम से दो शब्द बोल लिया करो सभी से। जब भी मिलो किसी से मुस्कुराते हुए मिलो और समय-समय पर ख़ुशी होने पर ताली भी बजा लिया करो मेरे यार। चार दिन की ज़िन्दगी है सभी से हँस बोलकर प्रेम से बिताया करो मेरे यार।

—————

यह कविता (खाली समय।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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मेरी मां का प्यार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मेरी मां का प्यार। ♦

प्रेम वात्सल्य की मिशाल,
मेरी मां है सबसे कमाल।
मुझे गर्व है कि मैं हूं उनका लाल,
ममता की प्रतिमूर्ति है वो बेमिशाल।

करुणा बरसाती, अपने ही लाल,
नाजों से पाला, सीने से लगाकर।
सारे गम सहती, रखती दर्द संभाल,
कभी गुस्साती, कभी प्यार की मेहर बरसाती।

धूप छांव से हमें बचाती,
सूरत देखकर सब समझ जाती।
आज तक ये बात मुझे समझ न आती,
खुद भूखे रह, बड़े चाव से मुझे खिलाती।

मैं पूछता मां, तुमने किया है भोजन,
बड़े प्यार से मुझे समझाती जैसे करती भजन।
मेरे हल्के जख्म पर, आंसू छलकाती,
उसपर अपने प्यार का मरहम लगाती।

लगा सीने से मर्म बताती,
सजगता का पाठ पढ़ाती।
अपना सर्वस्व मुझ पर लुटाती,
ऐसी मां का करता हूं चरण वंदन,
मेरी मां का प्यार, सबसे कुंदन।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — किसी भी बच्चे को माँ की गोद में जो सुख मिलता है – वो संसार में कही और नहीं मिल सकता, तथा जो निडरता और ज्ञान पिता से मिलता है वो किसी भी विश्वविद्यालय से नही मिल सकता। घुटनों से रेंगते-रेंगते, कब पैरों पर खड़ा हुआ, तेरी ममता की छाँव में, जाने कब बड़ा हुआ.. काला टीका दूध मलाई आज भी सब कुछ वैसा है, मैं ही मैं हूँ हर जगह, माँ प्यार ये तेरा कैसा है? सीधा-साधा, भोला-भाला, मैं ही सबसे अच्छा हूँ, कितना भी हो जाऊ बड़ा, “माँ!” मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ। काँटो भरी इस मुश्किल राह पर चलना सिखाता कौन… माँ अगर तुम न होती तो मुझे लोरी सुनाता कौन… खुद जागकर सारी रात चैन की नींद सुलाता कौन… माँ अगर तुम न होती तो मुझे चलना सिखलाता कौन..?

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यह कविता (मेरी मां का प्यार।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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मेरी दुनिया मेरे पापा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मेरी दुनिया मेरे पापा। ♦

मां की ममता का कोई जोड़ नहीं,
पापा के प्यार का कोई तोड़ नहीं।
मां के आंचल में ममता, पसारता पांव,
पेड़ रूपी पिता के नीचे है, निर्मल छांव।
मां होती ईश्वर का रूप,
पिता होते उन्हीं के दूत।
सबसे न्यारे, सबसे प्यारे,
मेरी दुनिया, मेरे पापा संवारे।

मां हमारी जीवनदायिनी,
पिता हमारे संरक्षण दाता।
मां ममता की होती मूरत,
पिता में दिखता, पालक की सूरत।
मां हमपर करुणा बरसाती,
पिता करते, सर्वस्व न्यौछावर।
सबसे प्यारे, सबसे न्यारे,
मेरी दुनिया, मेरे पापा संवारे।

पिता वृक्ष की, देते हरदम आभास,
जीवन में उनसे पूरा है, आस।
मां में बसता है, मेरी जान,
मगर पिता से ही है, मेरी पहचान।
बिन सिकन सब दुख सहकर,
करते मेरे सपने साकार।
सबसे प्यारे, सबसे न्यारे,
मेरी दुनिया, मेरे पापा संवारे।

मां की गोद संग, पिता के कंधे का सहारा,
है दोनों मेरी आंखों के तारा।
ऊपर से सख्त, भीतर से नरम,
ऐसे पिता है, मेरे लिए परम।
मेरे संघर्ष में, हौसले की है दीवार,
इनका कर्ज है, मुझपर अपार।
सबसे प्यारे, सबसे न्यारे,
मेरी दुनिया, मेरे पापा संवारे।

जीवन में उनके कर्ज न उतार पाएंगे,
मगर बुढ़ापे की लाठी जरूर बन जायेंगे।
उनके आशीष को दिल से लगाकर,
उनके चरणों में मस्तक सदा नमायेंगे।
अपनी आंखों में उन्होंने जो, देखा सपना,
सच करके दिखलाएंगे।
सबसे प्यारे, सबसे न्यारे,
मेरी दुनिया, मेरे पापा संवारे।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — किसी भी बच्चे को माँ की गोद में जो सुख मिलता है – वो संसार में कही और नहीं मिल सकता, तथा जो निडरता और ज्ञान पिता से मिलता है वो किसी भी विश्वविद्यालय से नही मिल सकता। वैसे – माता और पिता दिवस ताे हर मनुष्य काे अपने अंतिम श्वास तक मनाना चाहिये। एक सच्चा पिता सदैव ही अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिये दिन-रात अनवरत (continuously) कार्य करता हैं। जहा माता अपने बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखती हैं ताे वही पिता उन्हे सही ज्ञान और समझ देते हैं। जहा प्रथम गुरु माँ हैं ताे वही पिता गुरु हाेने के साथ-साथ सच्चा संरक्षक भी हाेता हैं। हमे अपने पिता से ये सीख भी मिलती है की – समस्या से बचना ही आवश्यक नहीं है, समझदार वाे हैं जाे समस्या से टकराये, और उसे मिटाकर ही दम ले। इतिहास वही बदलते हैं जाे दिन में सपने देखते हैं।

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यह कविता (मेरी दुनिया मेरे पापा।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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बुद्ध एक नाम नहीं भाव है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बुद्ध एक नाम नहीं भाव है। ♦

बुद्ध एक नाम नहीं भाव है,
जगत के लिए सत्य की राह है।

जिनके जीवन से सीख मिलती अपार है,
जहां धन वैभव का था भंडार।

सुख सुविधा का था बहार,
उस घर में भी लेकर जन्म।

न मिला मन की शांति,
छोड़ दिया घरबार।

ज्ञान की प्राप्ति लिए,
निकल पड़े वन की ओर।

जहां सुखाया तन,
रमाया साधना में मन।

पाया बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान,
बन गए महान।

त्याग और बलिदान की प्रतिमूर्ति समान,
सत्य का कराया भान।

आज ही के दिन किया महापरिनिर्वाण,
बुद्ध पूर्णिमा है जिसका नाम।

बुद्ध एक नाम नहीं भाव है,
जिसे अपनाकर मिलता शांति बेहिसाब है।

“बुद्धं शरणं गच्छामि”
“धम्मं शरणं गच्छामि”
“संघं शरणं गच्छामि”

बुद्ध एक नाम नहीं भाव है।
जो जगत को दिखाता मार्ग तमाम है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — बुद्ध अर्थात प्रेम, करुणा, शील, त्याग की ज्योति, जिन्होंने हर इंसान को आत्मा के सत्य गुणों व शक्तियों से अवगत कराया सरल शब्दों में। सच्चे सुख का अनुभव करवाया सभी को। धन व संपत्ति में सच्चा सुख नही है, सच्चा सुख क्या है इससे भी अवगत कराया सभी को। इस संसार के सुख से भी ऊपर भी ऊपर सच्चा आनंद क्या है इसकी भी अनुभूति गहराई से करवाया। बुद्ध जैसे अवतार का आगमन इस धरा पर 2000 से 3000 वर्षों एकाध ही होते हैं। आओ हम सभी मिलकर महात्मा बुद्ध द्वारा बताये गए मार्ग पर चलकर अपना व इस संसार का उद्धार करें।

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यह कविता (बुद्ध एक नाम नहीं भाव है।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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सुन ले पुकार चलो शिक्षा के द्वार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सुन ले पुकार चलो शिक्षा के द्वार। ♦

जीवन है अनमोल, नहीं है इसका कोई तोल,
बिन शिक्षा जीवन का, नहीं है कोई मोल।
शिक्षा से ही मिलता है जग में, मान और सम्मान,
इसी से मिलता है हमें, जीवन का हर ज्ञान।
शिक्षा बिन अधूरा, हम सब का जीवन,
अगर जीवन को बनाना है धारदार,
सुन लें पुकार चलो शिक्षा के द्वार॥

सारे काम छोड़कर, चलना है स्कूल,
गांठ ये बांध लो, होकर के कूल।
जीवन है अपना, जीना है सपना,
उन सपनों की भरने उड़ान।
शिक्षा ही है बस एक गहना, बात मेरी मान,
अगर जीवन को बनाना है धारदार,
सुन ले पुकार चलो शिक्षा के द्वार॥

ओ मछली पकड़ने वालों, ओ बिन मतलब,
भटकने वालों, बात अब ये मान लो।
शिक्षा के महत्व को पहचान लो,
जीवन संवर जायेगा, इससे नाता जोड़ लो।
शिक्षा का अधिकार मिला है, बात ये जान लो,
अगर जीवन को बनाना है धारदार,
सुन लें पुकार चलो शिक्षा के द्वार॥

सूबे सह राष्ट्र के सभी अभिभावकगण से,
आरजू विनती विवेक की है आज से।
जब शिक्षा ही घरद्वार तो फिर कैसी तकरार,
सारे काम छोड़कर, ज्ञान के मंदिर में बच्चों को खुद पहुंचाए जरूर।
हर हाल में बच्चों को भेजिए स्कूल, बिलकुल टेंशन भूल,
अगर बच्चे के जीवन को बनाना है धारदार,
सुन लें पुकार चलो शिक्षा के द्वार॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — शिक्षा मनुष्य के अंदर अच्छे विचारों को भरती है और अंदर में प्रविष्ठ बुरे विचारों को निकाल बाहर करती है। शिक्षा मनुष्य के जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। यह मनुष्य को समाज में प्रतिष्ठित करने का कार्य करती है। इससे मनुष्य के अंदर मनुष्यता आती है। शिक्षा हमें विभिन्न प्रकार का ज्ञान और प्रैक्टिकल कौशल को प्रदान करती है। यह सीखने की एक निरंतर, धीमी और सुरक्षित प्रक्रिया है, जो हमें ज्ञान प्राप्त करने में मदद करती है। यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो हमारे जन्म के साथ ही शुरु हो जाती है और हमारे जीवन के साथ ही खत्म होती है। ज्ञान धन सदैव ही हमारी मदद करती है, चाहे परिस्थिति, काल व जगह कैसी भी हो। शिक्षा लोगों के मस्तिष्क को बड़े स्तर पर विकसित करने का कार्य करती है।

—————

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आओ मिलकर चलें स्कूल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आओ मिलकर चलें स्कूल। ♦

नन्हें नन्हें कदमों से,
चहलकदमी करते हुए।
प्रकृति की अनुपम बेला में,
भरकर चेहरे पर मुस्कान।
सपनों का संग करके ध्यान,
साथियों संग एक होकर।
सब कुछ जाओ तुम भूल,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

घर से निकले,
आशा संग उमंग लिए।
चारों तरफ बजती शिक्षा की धुन,
यही है इसका सबसे बड़ा गुण।
कुछ बनने की अब चली पवन,
साथियों संग एक होकर।
सब कुछ जाओ तुम भूल,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

चलो ज्ञान का दीप जलाएं,
मिलकर हमसब हाथ बढ़ाएं।
कदम से कदम मिलाएं,
एक एक कर संग हो जाएं।
शिक्षा का अलख जगाएं,
साथियों संग एक होकर।
सब कुछ जाओ तुम भूल,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

हेमा आओ, रानी आओ,
पुन्नू आओ, साक्षी आओ।
हम भी आएं तुम भी आओ,
संग मिलकर अब एक हो जाओ।
मीना मंच और बाल संसद संग,
सब मिलकर गाएं एक ही धुन।
स्कूल चले स्कूल चले स्कूल चले हम,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

जज्बा और विश्वास लिए,
कंधे पर बस्ते का बोझ लिए।
निकल पड़े होकर निडर,
पाने की चाहत ने आखिर।
दिया शिक्षा का अनुपम वरदान,
साथियों संग एक होकर।
सब कुछ जाओ तुम भूल,
आओ मिलकर चलें स्कूल॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — बचपन स्कूल और हम बच्चे व हमारा बचपन। बचपन का उमंग व जोश – उत्साह के साथ सबकुछ भूलकर नन्हें नन्हें कदमों से चहलकदमी करते हुए, प्रकृति की अनुपम बेला में भरकर चेहरे पर मुस्कान, सपनों का संग करके ध्यान, साथियों संग एक होकर, आओ मिलकर हमसब चलें स्कूल। कदम से कदम मिलाकर सत्यता का पाठ पढ़ने-पढ़ाने हम बच्चे मन के सच्चे अपने नन्हें नन्हें कदमों से चहलकदमी करते हुए आओ मिलकर हमसब चलें स्कूल।

—————

यह कविता (आओ मिलकर चलें स्कूल।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली। ♦

जीवन के बयार में, उड़ रही प्रेम की बोली,
लोग हो गए सेल्फिस वेल्फिस, तंग हो गई टोली।
नहीं रहा अब नाज और नखरा, कैद हो गई बोली,
बदल रही फिज़ा, खो रही दोस्तों की खोली।
प्यार के दो मीठे बोल के लिए, तरस रही आली,
दिल से दिलों की टोली, यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

जीवन पथ पर अग्रसर संघर्ष रूपी पथिक को,
न खाने की फुर्सत ही है, न अपनों के लिए वक्त।
इस आपाधापी ने संबंधों में घोला विष,
प्यार ने छोड़ी राह, कड़वाहटों ने दामन थामा।
साल भर के गीले शिकवे मिटाती, रंगों की लाली।
दिल से दिलों की टोली यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

रिश्तों में आई दरार भरती हमारी, रंगों की थाली,
हर चेहरे पर रंग चढ़ाती, खासियत है इसकी निराली।
हर सूखे चेहरे पर लाती, मुस्कान की लाली,
बड़ी निराली बड़ी सुहानी खुशियों की हमझोली।
दिल के ढीले तारों को कसकर, शरगम बजाती ताली,
दिल से दिलों की टोली यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

सादगी और विश्वास का प्रतीक है हमारी होली,
रंगों से रंग मिलकर, दोस्तों दुश्मन भी गले मिल जाते है।
का पावन संदेश जन जन तक फैलती,
भाईचारे संग दिलों का संगम, यही है इसकी बोली।
अनोखा अनूठा विश्वास से भरा है हमारी होली।
दिल से दिलों की टोली यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

मेरे प्रिय पाठकों सपरिवार तहे दिल से होली महापर्व की शुभकामनाएं।–KMSRAJ51

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — होली रंगों का ही नहीं सामाजिक भेदभाव मिटाने एवं सामूहिकता का पर्व भी है। होली बुराई पर अच्छाई के प्रतीक का पर्व भी है। इस बार हम होलिका दहन के साथ कोरोना वायरस का भी दहन करें तो फिर पहले की तरह सौहार्द्र पूर्ण वातावरण में एक-दूसरे से गले मिलते हुए होली मना सकेंगे। होली रंगों का त्योहार है और जीवन में रंग तभी तक हैं, जब तक परिवार-समाज सुरक्षित है।

—————

यह कविता (दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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सत्य के राही शिव।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सत्य के राही शिव। ♦

शिव ही सत्य की ज्योत है,
उनके बिना न कोई होत है।
जीवन संघर्ष रूपी प्याला है,
नीलकंठ ने पिया विष का प्याला है।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

कहा जाता इन्हे सृष्टि के रचनाकार,
ऐसे निराले है हमारे भोले कलमकार।
इनके नाम में ही छुपा है जीवन का सार,
इसी से हम सभी का होगा बेड़ा पार।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

शिव के नाम से दिनचर्या होती आसान,
बढ़ता जग में आन बान और शान।
अन्याय के खिलाफ जो, लड़ना सिखाए,
सत्य के पथ पर हमें चलना।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

दिल और दिमाग के द्वंद से, आत्मनियंत्रण कराए,
खुद को नियंत्रित करने का ज्ञान।
शिव अपने महायोगी रूप से सिखलाते,
शांतचित रहने का सलीका तमाम।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

त्रिशूल और डमरू, धन और संपदा का सूचक,
सिखलाता भौतिकवाद के पीछे तू न भाग।
विष का कर पान, नीलकंठ ने विश्व को दिया,
नकारात्मकता छोड़, सकारात्मकता का संकेत सरेआम।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

शिव अपनी इच्छा को परे रख, दिया संदेश,
इच्छाएं होती जुनून, करती सर्वनाश।
अर्धनारीश्वर शिव पार्वती रूप से,
पत्नी को दिलाया मान और सम्मान।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

हाथ में धारित त्रिशूल बताता,
न कर हावी, न खुद पर घमंड।
महायोगी रूप बताया, पर न मोहमाया में,
नटराज रूप से मिलता, नृत्य की है सीख।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

मेरे प्रिय पाठकों आपको सपरिवार तहे दिल से महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं।–KMSRAJ51

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — ज्ञान और बुद्धि के बिना ये जीवन किसी काम का नहीं। भगवान शिव के करोड़ों भक्त महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिवजी की चार पहर की पूजा-अर्चना करते हैं, महादेव उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है। इस दिन भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को सच्चे मन से दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना चाहिए। जो भी भक्त सच्चे मन से इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना व ध्यान करता है उसकी सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। महाशिवरात्रि मतलब पावन रात्रि वह रात्रि जिसमे अपने सम्पूर्ण विकारों को जलाकर भष्म कर भगवान शिवजी से सर्व सद्गति प्राप्त करने की रात्रि। आओ हम सब मिलकर सच्चे मन से महापर्व महाशिवरात्रि को मनाए।

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यह कविता (सत्य के राही शिव।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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