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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2014 - KMSRAJ51 KI PEN SE .....

हम भाग्यशाली है ~ We are lucky !!


kmsraj51 की कलम से …..
luck

^^ हम भाग्यशाली है ^^

जीवन एक सफर हैं
जहां हैं पहाड़ भी नदी नाले भी
जहां फुलवारी भी है जंगल भी
जहां खुशी भी है गम भी
जहां दुख भी है सुख भी
जहां सूरज रोज उगता है
जंहा चंद्रमा भी उगता हैं
जहां हम कठपुतली है
क्या स्वार्थ था भगवान् का
क्या स्वार्थ था मम्मी का
क्या स्वार्थ था पापा का
जो हमें संसार में लाये
हमें पढ़ाने लिखाने में
कोई कसर नहीं छोड़ी
क्या स्वार्थ था भारत माँ का
जो हमें इस पावन मिटटी पर
जन्म लेने का मौक़ा दिया
जंहा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने
जन्म लेकर इस मिटटी को
सदा सदा के पावन कर गए
आगे हमें देखना जरुरी हैं
क्यों मैं निस्वार्थ हो नहीं सकता
फिर सोचेंगे कौन ज्यादा
या कौन कम स्वार्थी हैं !!!!!
——– प्रेमचंद मुरारका

I am grateful to Mr. “प्रेमचंद मुरारका”,for sharing this inspirational poetry.


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5-kms0005


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काश माँ आज जिंदा होती !!

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ काश माँ आज जिंदा होती। ϒ

कुछ बरस पहले हमारी माँ आज ही के दिन साथ छोड़ चली गयी थी। आज उनकी बहुत याद आती है और जीवन की ये कमी कभी पूरी ना होगी।

अपनी पूजनीय माँ को समर्पित,

काश माँ आज जिंदा होती।
काश मेरी माँ जिंदा होती।

सुख-दुख में साथ होती।
कुछ कहता उससे,
कुछ उसकी सुनता।

कोई अरमान अधूरा ना रहता।
दुनिया में मेरी भी बात होती।

काश माँ आज जिंदा होती।
माँ तू क्या गयी…
मेरी जान ही गयी।

अब फ़र्ज़ निभाने को जीता हूँ।
कब दिन निकले कब रात होती।

काश माँ आज जिंदा होती।
माँ से अच्छा कोई नहीं।

मतलब के बाकी यार।
जरूरत पड़े आये सब पास।

रिश्तों में कोई मिठास ना होती।
काश माँ आज जिंदा होती।

मालिक नहीं देखा हमने।
माँ में रब ही देखा है।

जीना-चलना माँ सिखाती।
माँ ईश्वर जैसी ही है होती।
काश माँ आज जिंदा होती।

♦ Ravinder Ravi ‘Sagar’ ♦
I am grateful to Ravinder Ravi ‘Sagar’ for sharing this inspirational poetry.

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

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cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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लड़की को मत समझो बेकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ लड़की को मत समझो बेकार। ϒ

poems on girls…

लड़की को मत समझो बेकार।
लड़की को मत समझो बेकार।
इसके बिना है अधूरा हर परिवार।।

बहन बनकर जिसने है …
हर भाई को प्यार से सम्भाला।

बेटी बनकर जिसने है भरा …
हर बाप के दिल में खुशियों का उजाला।।

फ्रेंड बनकर समझाया जिसने।
शादी कर के दूसरा घर चलाया भी इसने।।

लड़की न होती तो आज माँ न होती।
माँ न होती तो आज जननी कौन होती?

जीना बस लड़को का नही है अधिकार।
लड़की से ही है खुश हर परिवार।।

लड़की को मत समझो बेकार।
इसके बिना है अधूरा हर परिवार।।

Stop Living In The Past, Spend Time In Future.
“अतीत में रहना बंद करो, भविष्य में समय व्यतीत करें।”

_____

♥ मनहूस या लाड़ली।… जरूर पढ़े।

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Happiness !!


kmsraj51 की कलम से …..
happiness

खुशियां

मुझे थोड़ी सी खुशियां मिलती हैं
और मैं वापस आ जाता हूं काम पर
जबकि पानी की खुशियों से घास उभरने लगती है
और नदियां भरी हों, तो नाव चल पड़ती है दूर-दूर तक।

वहीं सुखद आवाजें तालियों की
प्रेरित करती है नर्तक को मोहक मुद्राओं में थिरकने को
और चांद सबसे खूबसूरत दिखाई देता है
करवां चौथ के दिन चुनरी से सजी सुहागनों को

GIRL-HAPPY

हर शादी पर घोड़े भी दूल्हे बन जाते हैं
और बड़ा भाई बेहद खुश होता है
छोटे को अपनी कमीज पहने नाचते देखकर

एक थके हुए आदमी को खुशी देती है उसकी पत्नी
घर के दरवाजे के बाहर इंतजार करती हुई
और वैसी हर चीज हमें खुशी देती है
जिसे स्वीकारते हैं हम प्यार से।


Note::-
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Krishna Mohan Singh
Founder & CEO

About kmsraj51(KMS)

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Women`s Day !!



kmsraj51 की कलम से …..
women`s dayWomen`s Day !!

Women in Freedom Struggle

विश्व में भारत ही ऐसा देश है, जिसकी स्वतंत्रता के लिए पुरूषों के साथ महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर अपना पूरा योगदान दिया। गाँधी जी के आह्वान पर अनेक महिलाओं ने विभिन्न क्रांतिकारी गतिविधियों में अपने प्राणों की परवाह किये बिना स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। जिन महिलाओं ने कभी घर से बाहर कदम भी नही रखा था, उन्होने भी भारत माता की आजादी के लिए अनेक महिलाओं को नेतृत्व प्रदान किया। हजारों महिलाओं ने स्वतंत्रता के यज्ञ को अपनी आहुती से सफल बनाया। सत्याग्रह के दौरान लगभग 15000 से भी ज्यादा महिलाएं जेल गईं। उन्होने जेलखानों को आराधना गृह का नाम दिया। लाठियों या गोलियों की परवाह न करते हुए अनगिनत महिलाओं ने इस देश की बेटी एवं बहु होने का फर्ज हँसते-हँसते अदा किया। ये महिलाएं नारी शक्ति के लिए प्रेरणा स्वरूप हैं, इन्होने अपने अदम्य साहस से भारत माता को गुलामी की जंजीर से मुक्त कराकर स्वतंत्रता का शंखनाद किया…………..

मैडम भिकाजी कामाः- ये भारत की प्रथम क्रान्तिकारी महिला थीं। विदोषों में निष्काशित जीवन व्यतीत करते हुए भारत की लङाई को जिवित रखा। 24 सितंबर 1861 को बंब्ई में एक पारसी परिवार में जन्म हुआ था। विदोषों में रहते हुए ये प्रमुख रूप से श्यामा जी, लाला हरदयाल, वीर सावरकर, आदि के साथ सक्रिय रहीं। 1907 में जर्मनी में अंर्तराष्ट्रिय समाजवादी सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इन्हे राष्ट्रिय ध्वज फैराने का गौरव प्राप्त हुआ था। इंग्लैण्ड में इन्हे अपराधी घोषित किया गया और वहां से निकल जाने का हुक्म दिया गया। ये इंग्लौण्ड से फ्रांस आ गईं, वहां से इन्होने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों को जारी रखा। 13 अगस्त 1936 को आपका निधन हो गया।

श्रीमति एनीबेसेन्टः- एक अक्टुबर 1847 को लंदन में जन्मी एनीबेसेन्ट एक आइरिश महिला थीं। परन्तु भारतिय दर्शन एवं संस्कृति से प्रभावित होकर भारत आईं। उन्होने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1917 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनी। 1919 में होमरूल लीग की स्थापना की। कांग्रेस के अधिवेशनो में वे सदैव पूर्ण स्वराज की मांग उठाती रहीं। एनीबेसेन्ट गरमदल की प्रमुख नेता थीं। 1916 में बनारस हिंदुविश्वविद्यालय की स्थापना में इनका महत्वपूर्ण योगदान था। 86 वर्ष की आयु में 20 सितंबर1933 को मद्रास में उनका निधन हो गया।

कु. प्रीती लता:- यह एक सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी महिला थीं। प्रीती लता का जन्म 8 मई 1911 को चटगॉव में हुआ था, जो अब बंगाला देश में है। चटगॉव शस्त्रागार काण्ड में आपने भाग लिया था। ये इस काण्ड में गंभीर रूप से जख्मी हो गीई थी। अंग्रेज सिपाहियों ने उन्हे घेर लिया था। अंग्रेजो के हाँथ वे न लगें इसलिए उन्होने सायनाइड खाकर अपने को देश के लिए बलिदान कर दिया।

कस्तूरबा गाँधीः- राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पत्नी, कस्तूरबा गाँधी का जन्म 1869 में पोरबंदर में हुआ था। स्वतंत्रता के कार्यक्रमों में वे सदैव गाँधी जी के साथ रहीं और अनेक बार जेल गईं अंतिम बार 9अगस्त 1942 को उन्हे गाँधी जी के साथ आगा खाँ जेल में नजरबंद कर दिया गया था, वहीं बन्दी जीवन में ही 22 फरवरी 1944 को उनका निधन हो गया।

कु. खुर्शिद बैन नौरोजीः- राष्ट्रीय नेता दादा भाई नौरोजी की पोती कु. खुर्शिद बैन नौरोजी का जन्म 1894 में हुआ था। विदेषों से शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद इनपर वहाँ का रंग नही चढा। भारत की स्वतंत्रता के लिए लोगों को जागरूक करती रहीं और आजादी के आन्दोलन में 8 बार जेल गईं। सन् 1966 में आपकी मृत्यु हुई।

कमला देवी चट्टोपाध्याः- 3 अप्रैल 1903 समाज सेविका कमला देवी चट्टोपाध्या का जन्म बंगौलर में हुआ था। राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के लिए चलाए गये सभी आन्दोलनो में उन्होने हिस्सा लिया और अनेकों बार जेल भी गईं। आजादी के दौरान सोशलिष्ट पार्टी की स्थापना में उनका प्रमुख योगदान रहा।

सरोजनी नायडु:- प्रथम श्रेणीं की राष्ट्रीय नेता एवं सुप्रसिद्ध कवित्री सरोजनी नायडु का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। ओजस्वी कविताओं के कारण भारत कोकिला के नाम से प्रख्यात सरोजनी नायडु को 1925 के कानपुर राष्ट्रीय अधिवेशन में कांग्रेस की अध्यक्ष चुना गया था। एतिहासिक दांडी यात्रा में गाँधी जी के साथ थीं। गाँधी इरविन पैक्ट के अर्न्तगत दूसरे गोलमेज सम्मेलन में गाँधी जी के साथ लंदन गईं थीं। सभी राष्ट्रीय आन्दोलन में उन्होने हिस्सा लिया और अनेक बार जेल यात्राएं की। आगा खाँ जेल में नजर बंदी के दौरान ये भी गाँधी जी के साथ थीं। भारत की स्वतंत्रता के बाद सरोजनी नायडु को पहली महिला गर्वनर नियुक्त किया गया था।

कु. कल्पना दत्तः- एम.ए. तक शिक्षा प्राप्त कल्पना दत्त का जन्म चटगॉव में हुआ था। चटगॉव शस्त्रागार काण्ड में सूर्यसेन के नेतृत्व में क्रियाशील रहीं किन्तु उस समय पुलिस उन्हे गिरफ्तार नही सकी। 1933 में कङे संघर्ष के बाद सूर्यसेन के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। 12 फरवरी 1934 को आजीवन कारावास की सजा दी गई।

विजय लक्ष्मी पंडितः- मोती लाल नेहरु की पुत्री विजय लक्ष्मी का जन्म 1900 में इलाहाबाद में हुआ था। सदैव स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहते हुए नमक सत्याग्रह में हिस्सा लेने के साथ ही विदेशी कपङों की दुकानो पर धरने दिये। 1937 में जब प्रांतिय सरकारों की स्थापना हुई तब उत्तर प्रदेश के मंत्रीमंडल में पहली महिला मंत्री का कार्यभार संभाला।

डॉ. सुशिला नैय्यरः- इनका लगभग समस्त परिवार स्वतंत्रता संग्राम से जुङा हुआ था। बङे भाई प्यारे लाल नैय्यर गाँधी जी के सचिव थे। ये प्रायः सेवा ग्राम में रहती थीं। 1942 में नजरबंद के दौरान आगा खाँ जेल में 21 महिने रहीं। इन्होने सेवा ग्राम में कस्तूरबा हेल्थ सोसाइटी की स्थापना की जिसके माध्यम से आपने, आस-पास के गाँवों के लोगों के लिए उपाचार की व्यवस्था की। सेवाग्राम में ही गाँधी जी की स्मृति में महात्मा गाँधी साइंस इन्सटीट्यूशनकी स्थापना की थी। 3 जनवरी 2001 को सुशिला नैय्यर जी का निधन सेवाग्राम में हुआ।

अरुणा आसफ अलीः- राष्ट्रीय नेता आसफअली की पत्नी अरुणा आसफ अलि का जन्म 1906 में हुआ था। लाहौर और नैनिताल में शिक्षा प्राप्त अरुणा, नमक सत्याग्रह और असहयोग आन्दोलन में प्रमुख रूप से सक्रिय रहीं। 1942 के भारत छोङो आन्दोलन में आपका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनिय है। 9 अगस्त 1942 को जब अनेक बङे नेताओं को गिरफ्तार किया गया तो इन्होने भुमिगत रहकर राष्ट्रीय आन्दोलन को गतिशील बनाए रखा। तत्कालीन सरकार ने इनकी गिरफ्तारी के लिए 5000 नकद पुरस्कार की घोषित किया था, लेकिन ये अंत तक पुलिस के हाँथ नहीं आईं इसलिए अरुणा आसफ अलि को 1942 की हिरोइन कहा जाता है। जब 26 जनवरी 1946 को अंग्रेज सरकार ने इनके वारंट को रद्द करने की घोषणा की तभी ये सार्वजनिक रूप से सामने आईं।

राजकुमारी अमृत कौरः- सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और गाँधी जी की निकट सहयोगिनी थीं। 2 फरवरी 1889 को कपूरथला में जन्मी राजकुमारी अमृत कौर ने ऐशो आराम का जीवन त्यागकर देश की स्वतंत्रता हेतु अनेकों बार जेल गईं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात ये प्रथम केन्द्रिय मंत्रीमंडल में स्वास्थ मंत्री बनी।

लेडी अब्दुल्ल कादिरीः- 1883 में लाहौर में जन्मी लेडी अब्बदुल कादिरी ने 1922 से खिलाफत आन्दोलन और सविनय अवज्ञा आनदोलन में प्रमुख रूप से हिस्सा लिया था। लेडी अब्दुल्ल कादिरी का कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश में लखनऊ में था।

अम्तु सलाम बेनः- गाँधी जी के सभी प्रमुख रचनात्मक कार्यो में निकट से जुङी रहीं। 1942 के आन्दोलन में रेहाना बहन के साथ सक्रिय रहीं। 1946 में नोआखली के सामप्रदायिक दंगो के शिकार लोगों की सहायता हेतु शान्ति यात्रा में गाँधी जी के साथ थीं।

दुर्गा बाई देशमुखः- सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सेविका दुर्गा बाई देशमुख का जन्म 1909 में आन्ध्रप्रदेश में हुआ था। एल.एल.बी तक शिक्षा प्राप्त की थी। स्वदेशी आन्दोलन में इन्होने अपने विवाह के समय के सभी विदेषी कपङों को जला दिया था। अपने किमती आभूषणों को देश हित के लिए गाँधी जी को समर्पित कर दिया था। राष्ट्रीय कार्यक्रमों के आन्दोलन में ये तीनबार जेल गईं थीं। 9 मई 1981 को आपका निधन हैदराबाद में हुआ था।

दुर्गा भाभीः- दुर्गा का जन्म 7 अक्टुबर 1907 को लाहौर में हुआ था। इनके पति भगवति चरण बोहरा सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी थे। दुर्गा भाभी ने लगभग सभी क्रान्तिकारी गतिविधियों में अपना योगदान दिया। दुर्गा भाभी क्रान्तिकारियों के छिपने के लिए गुप्त व्यवस्था करती थीं। चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, यशपाल आदि क्रान्तिकारियों की गतिविधियों से निकट से जुङी हुईं थीं।

कु. बिना दासः- 24 अगस्त 1911 में बंगाल में जन्मी बिना दास ने बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की थी। अध्ययन के दौरान ही ये क्रान्तिकारी गतिविधियों में सक्रिय हो गईं थीं। 6 फरवरी 1932 को कॉलेज के एक समारोह में बंगाल के गर्वनर स्टेनले जेक्सन पर गोली चला दी, लेकिन गर्वनर बच गये तब इन्हे पकङ लिया गया और 9 वर्ष की कङी कैद की सजा दी गई। 1942 के आन्दोलन में भी सक्रिय रहीं किन्तु तब इनको अंग्रेज गिरफ्तार न कर सके।

श्रीमति जानकी देवी बजाजः- प्रसिद्ध उद्योगपति जमना लाल बजाज की पत्नि श्रीमति जानकी देवी बजाज ने अपने घर की सभी विदेशी वस्तुओं को जला दिया था। सरकार विरोधी भाषणों के कारण उन्हे अंग्रेज सरकार ने कुछ समय तक जेल में रखा था।

श्रीमति सुचेता कृपलानीः- 1908 में अम्बाला में जन्मी सुचेता कृपलानी देशभक्त, आचार्य जे बी कृपलानी की पत्नी थीं। श्रीमति सुचेता कृपलानी भारत छोङो आन्दोलन में अरुणा आसफ अलि के साथ भुमिगत रहकर आन्दोलन का संचालन करती रहीं। इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. की परिक्षा पास की थी। आजादी के उपरान्त अनेक बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुईं। अक्टुबर 1963 से 1967 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। ये स्वतंत्र भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं। आजादी के बाद देश में कई जगह साम्प्रदायिक दंगे भङक उठे थे, सुचिता कृपलानी ने दंगा पिङीत लोगों को राहत पहुँचाने का कार्य किया था।

बहन सत्यवतिः- दिल्ली की सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा समाज सेविका सत्यवति का जन्म 1906 में दिल्ली में हुआ था। लगभग सभी आन्दोलनों में सक्रिय भागीदारी देते हुए, खराब स्वास्थ के बावजूद कई बार जेल भी गईं। उस समय की टी.बी. जैसी गंभीर बिमारी के बावजूद उन्होने अपने प्रयासो से दिल्ली में महिलाओं के मन में स्वतंत्रता के प्रति जागरुकता का शंखनाद किया। सत्यवति जी की प्रेरणा से हजारों महिलाओं ने उनका अनुसरण करते हुए स्वतंत्रता के आंदोलन में अपना योगदान दिया।

मृदुला सारा भाईः- 1911 में अहमबदाबाद में जन्मी मृदुला सारा भाई का समस्त परिवार स्वतंत्रता के आन्दोलनो में सक्रिय रहा। स्वतंत्रता के लिए अनेकों बार जेल गईं और जब भारत विभाजन में साम्प्रदायिक दंगे भङके तो दंगा पिङीत लोगों की सहायता में सक्रिय रहीं।

लाडो रानी जुत्सीः- लाडो रानी जुत्सी ने पंजाब में महिलाओं का जागरुक किया और महिलाओं को एकत्र कर शराब की दुकाने बंद कराने एवं विदेषी वस्तुओं के बहिष्कार में महत्वपूर्ण भुमिका का निर्वाह किया। 1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान इन्हे एक वर्ष तक के लिए जेल में बंद कर दिया गया था। 1932 में विषेधाग्या भंग करने के आरोप में पुनः 18 महिने के लिए जेल गईं।

सरला बहनः- 5 अप्रैल 1900 में लंदन में जन्मी कु. कैथलिन 1938 में समाज सेवा के लिए भारत आईं। गाँधी जी से प्रभावित होकर उनके अनेक कार्यक्रमें से जुङी रहीं। 1942 के भारत छोङो आन्दोलन में विशेष रूप से सक्रिय रहीं। ये जीवन पर्यन्त अलमोङा में समाज सेवा का कार्य करती रहीं। इस क्षेत्र में रचनात्मक कार्यो को बढाने हेतु कौशानी आश्रम की स्थापना की। 40 वर्षों तक निरंतर देश सेवा के उपरान्त 8 जुलाई 1962 को उनका निधन हो गया।

रानी गाइनडिल्युः- जॉन ऑफ आर्क नाम से प्रख्यात रानी गाइनडिल्यु का जन्म 26 जनवरी 1915 को नागालैण्ड में हुआ था। ये सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी महिला थीं। रानी गाइनडिल्यु ने 17 वर्ष की अल्प आयु में ही अपने हजार अनुयाइयों के साथ अंग्रेजों के प्रति गोरिल्ला युद्ध छेङ कर उन्हे पराजित किया। 17 अक्टूबर 1942 को इन्हे अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया तथा गंभीर प्रताङना दी गई। आजिवन कारावास का दंड मिला। जब प्रान्तिय शासन आरंम्भ हुआ तब अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को छोङा गया किन्तु जवहारलाल नेहरु के प्रयासों के बावजूद इन्हे रिहा नही किया गया। भारत की आजादी के उपरान्त ही इनको जेल से रिहाई मिली, तद्पश्चात ये जीवन भर लोकप्रिय नागानेता के रूप में सामाजिक सुधार के कार्यक्रमों में सक्रिय रहीं।

सुशिला दीदीः- प्रसिद्ध क्रान्तिकारी महिला सुशिला दीदी का जन्म 5 मार्च 1905 को गुजरात में हुआ था। काकोरी कांड के केस में खर्च हो रहे रूपये हेतु इन्होने अपने सारे जेवर दान कर दिये थे। अपने अध्ययन काल के दौरान से ही ये चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, भगवतिचरण वोहरा एवं दुर्गा भाभी के साथ क्रानितिकारी गतिविधियों में सदैव सक्रिय रहीं। दिल्ली में वायसराय लार्ड इरविन की ट्रेन उङाने की जो योजना बनाई गयी थी। उसमें इन्होने क्रान्तिकारियों तक सभी सुचनाएं पहुँचाने का दायित्व निभाया था।

स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्य न्यौछावर करने वाली अमर बलिदानी महिलाओं को कभी भी भुलाया नही जा सकता, उनके बलिदान को महिला दिवस पर नमन करने का प्रयास है। भारत की स्वतंत्रता से लेकर स्वयं की एवं समाज तथा देश की रक्षा करने में सक्षम है नारी, सिर्फ उसे अपनी शक्ति को आज के परिपेक्ष में नई पहचान की जरूरत है, जिससे कोई भी उसके साथ अराजकता का व्यवहार न कर सके।
Everyday remind yourself that You are the best.
Happy Women’s Day

Anita Sharma
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सफलता के लिए ज़रूरी है Focus !!

kmsraj51 की कलम से …..
SUCCESSSuccess Key

यह पोस्ट गोपाल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत है…..

सफलता के लिए ज़रूरी है Focus !

ऐसा क्यों होता है कि कई बार सब कुछ होते हुए भी हम वो नहीं कर पाते जिसको करने के बारे में हमने सोचा होता है ….दृढ निश्चय किया होता ……खुद को promise किया होता है कि हमें ये काम करना ही करना है …चाहे जो हो जाए ….!!!

“सब कुछ होते हुए” से मेरा मतलब है आपके पास पर्याप्त talent, पैसा , समय , या ऐसी कोई भी चीज जो उस काम को करने के लिए ज़रूरी है ; होने से है .

2009-10 में मैंने अपने दोस्तों के साथ मिल कर Bodhitree Consulting Group (BCG) की शुरुआत की थी , इसके अंतर्गत हमने कुछ Personality Development ओर Quizzing से related programs भी किये , जो काफी पसंद किये गए ,….पर within 6-7 months BCG को बंद करना पड़ा .

आज जब मैं इस बारे में सोचता हूँ कि आखिर BCG क्यों unsuccessful रहा …तो मुझे ऐसी कोई वजह नहीं दिखती जो इस ओर इशारा करे की हमारे team में Talent, Time , या पैसे की कमी थी ….हमारे अन्दर जोश भी काफी था ….पर फिर भी हम इस venture को successful नहीं बना पाए .

तो आखिर वजह क्या थी ?


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वजह थी FOCUS.

चूँकि BCG शुरू करने का initiative मेरा ही था इसलिए मुझे इसपर पूरी तरह से अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए था …..पर मैं उस वक़्त अपनी Tata Aig की जॉब में इतना अधिक involve था कि मैं BCG पर focus नहीं कर पाया …और सबकुछ होते हुए भी हम इसे सफल नहीं बना पाए .

यह एक शाश्वत सत्य है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में हम जिस चीज पर ध्यान केन्द्रित करते हैं उस चीज में आश्चर्यजनक रूप से विस्तार होता है . इसलिए सफल होने के लिए हमें अपने चुने हुए लक्ष्य पर पूरी तरह से focussed होना होगा ; और तभी हम उसे हकीकत बनते देख पायेंगे .

Focus करने का क्या अर्थ है ?

एक idea लो . उस idea को अपनी life बना लो – उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो , उस idea को जियो . अपने दिमाग , muscles, nerves, शरीर के हर हिस्से को उस आईडिया में डूब जाने दो , और बाकी सभी ideas को किनारे रख दो . यही सफल होने का तरीका है , यही वो तरीका है जिससे महान लोग निर्मित होते हैं .

Friends, उपरोक्त कथन Swami Vivekananda के हैं और मुझे लगता है कि Focus शब्द को शायद ही इससे अच्छे ढंग से समझा जा सकता है .

इस कथन में जहाँ स्वामी जी ने किसी एक आईडिया को अपनाना आवश्यक बताया है वहीँ दूसरी तरफ इस दौरान अन्य ideas को किनारे रखने के लिए भी कहा है. और सही मायने में यही है Focussed होना.

Focus करता क्या है ?

आपने बचपन में lens ज़रूर use किया होगा ….lens देखने में तो एक साधारण कांच का टुकड़ा लगता है …पर जब हम उसे कागज़ के किसी एक हिस्से पर focus करते हैं तो थोड़ी देर में वो कागज़ जलने लगता है …..

Focus चीजों को संभव बनाता है ….जब आप भी अपने goal पर focused रहते हैं तो मार्ग में आने वाली बाधाएं जल कर ख़ाक हो जाती हैं , आपका रास्ता साफ़ हो जाता है , और आप अपना goal achieve कर पाते हैं . Focus आपको सिर्फ यह नहीं बताता कि करना क्या है , यह भी बताता है कि क्या नहीं करना है .Focus आपको आपके goal से बांधता ही नहीं , आपको बेकार की चीजों में बंधने से बचाता भी है .

मैं हमेशा से सोचता था की मुझे कुछ बड़ा achieve करना है . मेरे लिए बड़े का अर्थ कभी lucrative jobs और अधिक पैसे कमाना नहीं रहा है, हालांकि मैं भी financially abundant होना चाहता हूँ … पर मेरे लिए जो काम बड़ा है वो है अधिक से अधिक लोगों का जीवन बेहतर बनाना . और कुछ हद्द तक मैं ऐसा अपनी NGO Kartavya के through कर पाया …पर वो मेरे लिए satisfactory नहीं था . इसीलिए जब मैंने AchhiKhabar.Com(AKC) की शुरआत की तभी मैंने ठान लिया था की अब मैं अपना पूरा focus इसी एक चीज पर रखूँगा , और तब तक रखूँगा जब तक मैं इसमें सफल नहीं हो जाता , इस दौरान मैं किसी और चीज पर ध्यान नहीं दूंगा …यहाँ तक की अपनी NGO की तरफ भी , और ना ही अपनी जॉब में exceptional होने की कोशिश करूँगा , अब मेरा एक ही लक्ष्य होगा AKC को अपनी पहली major Success Story बनाना . और आज इसे Worl’d Most Read Hindi Blog* बना कर मैं कुछ हद्द तक सफल भी हुआ हूँ , पर अभी भी मैं इसे major success नहीं कह सकता , इसमें कुछ और समय लगेगा. 🙂

क्या Focused रहना आसान है ?

नहीं , पिछले डेढ़ साल में AKC पर अपना focus बनाये रखने के लिए मैंने बहुत सी चीजों को ना कहा है ; including better job opportunities, foreign travel breaks, other promising income generating ideas, etc. Friends, अगर आपको कुछ World Class करना है तो आपको पूरी तरह से उस काम में डूबना होगा और तब तक लगे रहना होगा जब तक की आप अपने efforts को physical reality में तब्दील होते हुए ना देख लें .बीच में बहुत सारे distractions आयेंगे ; पर उस वक़्त आपको अपना focus नहीं loose करना है ….और ऐसा तभी संभव होगा जब आप अपने काम या idea में पूरी तरह से believe करते हैं . इस मुश्किल समय में जब mind में self doubt आने लगता है तब आपका belief system ही आपको distract होने से बचा सकता है . इसलिए काम शुरू करने से पहले ही आप उस पर अच्छी तरह से सोच विचार कर लीजिये , in fact आप अपने friends को आपको उस idea या plan को लेकर challenge करने के लिए भी कह सकते हैं . और अगर कोई भी तर्क -वितर्क आपकी आईडिया को लेकर आपके अन्दर doubt डालता है तो आप उस पर पुनः विचार कर सकते हैं . कुछ शुरू करने से पहले आपका अपने काम के successful होने पर believe करना बहुत ज़रूरी है आगे यही आपके FOCUS को उस पर बनाये रखने में मदद करेगा .

तो क्या focus करने का ये मतलब है कि हम और कोई काम करे ही नहीं ?

नहीं , आप और काम करते हुए भी अपना focus किसी एक चीज पर बनाये रख सकते हैं . For example: Mahendra Singh Dhoni Railways में TTE की job करते थे पर फिर भी उनका focus cricket था . आप रोज TV पर कितने ही singers और dancers को देखते हैं , वो भी और लोगों की तरह पढने जाते हैं या job करते हैं पर उनका focus तो singing या dancing होता है . इसी तरह मैंने आपके साथ World’s Youngest CEO , Suhas Gopinath की story share की थी , पढाई करते वक़्त भी उनका focus अपनी company establish करने का था ; और इसी एकाग्रता के दम पर उन्होंने छोटी सी उम्र में multi million dollar company खड़ी कर दी.

देखिये , जब तक आपके मन का काम आपको financially support नहीं करने लगता तब तक कुछ ना कुछ तो करते रहना होगा ….पर ध्यान देने की बात ये है कि आपको और चीजों को सिर्फ करना है …पर आपने अपने लिए जो Goal decide किया है उसे achieve करने के लिए आपको उसमे डूबना है , और यही आपकी success और failure के बीच का सबसे बड़ा differentiator होगा.

इतना याद रखिये कि अपने जीवन में एक normal focussed व्यक्ति एक talented unfocussed व्यक्ति से कहीं ज्यादा achieve कर सकता है . और सच पूछिए तो अगर हमने इस अनमोल जीवन को छोटी – मोटी चीजें करने में ही बिता दिया तो हमारे life की कोई value नहीं रहेगी …..हमारी अपनी नज़रों में भी ….इसलिए बड़े लक्ष्य बनाइये और उस पर focussed होकर उसे achieve करिए ….तभी जीने का असली मजा है .

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क्या बनना चाहेंगे आप : Fault Finder या Solution Seeker ?

kmsraj51 की कलम से …..
SOLUTION

यह पोस्ट गोपाल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत है …..


बात बहुत पुरानी है , 13-14 साल पुरानी ….मैं Gorakhpur से Lucknow या शायद Lucknow से Gorakhpur जा रहा था …train मुसाफिरों से भरी हुई थी , गप लड़ाने वालों के ठहाकों और चाय -समोसा बेचने वालों के शोर के बीच एक तीखी आवाज़ कान के पर्दों को लगभग चीरते हुए मुझसे टकराई ….”सरकार चोर है. ”

और उसके बाद ऐसी लाइनों की झड़ी सी लग गयी ,क्या युवा , क्या अधेड़ और क्या बुजुर्ग हर एक व्यक्ति system को कोसने में लग गया …मैं वहीँ बैठा ये सब सुन रहा था , कुछ देर सुनता रहा , पर किसी को positively बात ना करते देख मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी discussion में शामिल हो गया .

मैंने कहा , “ system तो हमी लोगों से बना है , अगर ये गड़बड़ है तो इसे ठीक भी हमी को करना होगा .”
“ हम कैसे ठीक कर सकते हैं , हमारे हाथ में क्या है , ये तो सरकार की जिम्मेदारी है …” ’ उधर से जवाब आया और ऐसे करते-करते बात बहस में बदल गयी …जहाँ तक मुझे याद है मेरी last lines कुछ ऐसे थीं ….”आप नहीं बदल सकते तो न सही मैं बदलूँगा system को …”

Friends, भारत में Fault Finders की कमी नहीं है …करोड़ों हैं …ज़रुरत तो Solution Seekers की है …किसी समस्या को देखकर उसे लगातार कोसना आपको part of problem बना देता है , and in fact ऐसा करके आप problem को बढाते ही हैं घटाते नहीं …so never be a part of problem try to be a part of solution.

क्या होता है जब हम Fault Finding में लगे रहते हैं ?

हम negative सोचते हैं , अपनी energy का गलत इस्तेमाल करते हैं , अपने life में और भी अधिक stress और tension attract करते हैं और सबसे बड़ी चीज हम fault को fault ही रहने देते हैं.

क्या होता है जब हम Solution Seeking में लगे रहते हैं ?

हम positive सोचते हैं , अपनी energy का सही इस्तेमाल करते हैं ,अपनी life में और भी अधिक happiness और self satisfaction attract करते हैं और सबसे बड़ी चीज हम fault को fault नहीं रहने देते उसका solution निकाल लेते हैं .

तो फिर क्या बनना पसंद करेंगे आप Fault Finder या Solution seeker?

फैसला आसान है , हर कोई यही कहेगा की वो solution seeker बनना पसंद करेगा . पर ये बोलने जितना आसान नहीं है . कोई बरसो से fault finding में लगा हो तो ये चीज उसकी habit में आ जाती है .

तो सबसे पहले आप ऐसा करिए की खुद को observe करिए , कहीं ये संक्रमण आपके अन्दर तक तो नहीं फ़ैल गया है , कहीं आप चाय में चीनी कम होने जैसी छोटी सी fault से लेकर चीनीयों की घुसपैठ जैसी गंभीर समस्या तक हर जगह fault ही तो नहीं find करते रहते ???

अब आपको इस संक्रमण को दूर करना होगा , आप इसे कई तरीकों से कर सकते हैं :

For instance जैसे ही आपको लगे कि आपने fault finding चालू कर दी है तो topic को नयी दिशा देते हुए उसके solution के बारे में बात करना शुरू कर दीजिये …. “ सरकार निठल्ली है , भला चीन कैसे हमारी सीमा में घुस सकता है …., हमें अपनी सीमा पर और सैनिक लगाने चाहिए और satellite से नज़र रखनी चाहिए …हमें International community में भी lobbying करनी चाहिए …”
आप मन ही मन ये निश्चय कर सकते हैं कि आज से आप हर एक चीज, हर एक situation चाहे वो कितनी बुरी ही क्यों न हो कुछ न कुछ अच्छा खोज कर दिखायेंगे…
अगर आदत कुछ ज्यादा ही लग गयी है तो आप अपनी फाल्ट फाइंडिंग को लिमिट भी कर सकते हैं…मैं हर रोज अधिक से अधिक तीन बातों पर negatively बात करूँगा..कोटा पूरा होते ही मैं सिर्फ और सिर्फ positive aspects पर फोकस करूँगा….and so on …
Well, हो सकता है कि “ fault finding” आपको आम सी बात लगे , और आप इसे seriously न लें पर यकीन जानिये अगर आप इससे suffer कर रहे हैं तो ये आपके personal development में एक बहुत बड़ा bottleneck है …क्योंकि जब आप अपने mind को fault find करने के लिए train कर देते हैं तो वो सिर्फ सरकार और देश की ही नहीं आपकी अपने लाइफ की भी fault गिनाता रहता है , आप ना जाने कब औरों को कोसते -कोसते खुद को भी कोसने लगते हैं …और इसी का बिगड़ा हुआ रूप depression में बदल जाता है ….मैं आपको डरा नहीं रहा , बस alert कर रहा हूँ , Fault Finder नहीं Solution Seeker बनिए …क्योंकि हर कोई यही चाहता है …आपका देश , आपकी company , आपकी family और आपका inner -self हर कोई यही चाहता है ….so don’t be a Fault Finder be a Solution Seeker.

All the best 🙂

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क्यों बचें Facebook से ? 7 reasons !!

kmsraj51 की कलम से …..


Facebook (Fb) world की दूसरी सबसे ज्यादा visit की जाने वाली site है …(पहली Google है ).

Dislike-Facebook-150x150Facebook Over-use

इसे बनाने वाले दुनिया के youngest billionaire Mark Zukerberg ने भी कभी नहीं सोचा था की ये इतनी जल्दी इतनी popular हो जाएगी . In fact , अगर आप Fb पे नहीं हैं तो लोग आपको आश्चर्य से देखते हैं . ..” Fb पे नहीं है ………….जी कैसे रहा है …… 🙂 !!!” and all that.

आज Fb पे 1 billion+ registered user हैं, यानि दुनिया का हर सातवाँ आदमी Fb पे है and in all probability आप भी उन्ही में से एक होंगे . और शौक से Fb use करते होंगे . पर जो सोचने की बात है वो ये कि क्या आप Fb use करते ; overuse करते हैं …या फिर कहीं आप इसके addict तो नहीं !

Let’s say use करने का मतलब है कि आप Fb पर daily 1 घंटे से कम समय देते हैं , और overuse करने का मतलब है 1 घंटे से ज्यादा . और हाँ , use करने से बस ये मतलब नहीं है कि आप physically system के सामने या अपने smart phone को हाथ में लेकर use करते हैं even अगर आप Fb के बारे में सोचते हैं तो वो भी time usage में count होगा after all वो उतने देर के लिए आपका mind space occupy कर रहा है .

और अगर आप सोच रहे हैं कि कहीं मैं addict तो नहीं हूँ तो इन traits को देखिये , अगर ये आपमें हैं तो आप addict हो सकते हैं :

आप का दिमाग अकसर इसी बात में लगा रहता है कि आपकी पोस्ट की गयी चीजों पर क्या कमेंट आया होगा, कितने लोगों ने लाइक किया होगा.
आप बिना मतलब बार-बार फेसबुक स्क्रीन रिफ्रेश करते हैं कि कुछ नया दिख जाए.
अगर थोड़ी देर आपका internet नहीं चला तो आप updates चेक करने साइबर कैफे चले जाते हैं या दोस्त को फ़ोन करके पूछते हैं.
आप टॉयलेट में भी मोबाइल या लैपटॉप लेकर जाते हैं कि Fb use कर सकें
आप सोने जाने से पहले सभी को Good Night करते हैं और सुबह उठ कर सबसे पहले ये देखते हैं की आपकी गुड नाईट पर क्या reactions आये.
अब मैं आपको अपने usage के बारे में बताता हूँ , on an average मैं daily 10 minutes से भी कम Fb use करता हूँ including Fb के बारे में सोचने का time. हाँ, इसे आप under usage भी कह सकते हैं . 🙂 In my opinion ideally Fb आधे घंटे से अधिक नहीं use करना चाहिए पर फिर भी मैंने over usage को 1 घंटे से ऊपर रखा है .

और अब आपकी बात करते हैं , आप कितनी देर Fb use करते हैं ?

Well, अगर ये daily 1/2 घंटे से अधिक है तो आप अपना time waste कर रहे हैं , unless until आप purposefully ऐसा कर रहे हैं . Purposefully means आप अपना बिज़नस प्रमोट कर रहे हैं, किसी social cause के लिए campaign चला रहे हैं या कोई और meaningful काम कर रहे हैं , इन cases में अपना टाइम देना worth है .

किस तरह के लोग Fb ज़रुरत से अधिक use करते हैं :

In my opinion :

• जिनके पास कोई meaningful goal नहीं है …… the wanderers

• जो लोगोंका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं करना चाहते हैं ….the attention seekers.

• जो अपनी life से अधिक दूसरों की life में interest रखते हैं …..the peepers

क्या नुकसान कर सकता है Facebook का over usage ?

इसकी लिस्ट तो बहुत लम्बी है लेकिन आज मैं आपके साथ 7 ऐसे points share कर रहा हूँ , तो आइये देखते हैं इन्हें :

1) आप unknowingly अपनी happiness का control दूसरों को दे देते हैं ?

कैसे ? दरअसल अब आपकी happiness इस बात पर depend करने लगती है कि Fb पे आपकी बातों , आपकी pics को कितने लोग like कर रहे हैं , कितने लोग उसपर comments कर रहे हैं …कैसे comments कर रहे हैं …etc. For instance आपने एक नई watch ली और उसकी photo post की …obviously आपको watch बहुत पसंद थी इसलिए आपने ली …पर जब Fb पे उसे अधिक लोग like नहीं करते और कोई उसका मज़ाक बना देता है तो आप दुखी हो जाते हैं . और उसका उल्टा भी सही है …आप को कोई चीज पसंद नहीं है पर बाकी लोग उसको अच्छा कह देते हैं तो आप खुश हो जाते हैं …so in a way आप अपनी happiness का control अपने Fb friends को दे देते हैं . मैं ये नहीं कहता कि ये सभी के साथ होता है पर इतना ज़रूर है कि हम कहीं न कहीं इन चीजों से affect होते हैं .

And over a long period of time ये छोटे छोटे इफेक्ट्स बड़े होते जाते हैं और हमें पता भी नहीं चलता कि हम अपना real self कहाँ छोड़ आये.

2) आपको दूसरों की blessings और अपनी shortcomings दिखाई देने लगती है ?

Fb पर लोग generally अपनी life की अच्छी अच्छी बातें ही share करते हैं …लोग अपने साथ हो रही अच्छी चीजें बताते हैं , उनके status कुछ ऐसे होते हैं “ My new machine” , “ Lost in London”..etc

In reality आप भी ऐसा ही करते हैं , पर अन्दर ही अन्दर आप अपनी असलीयत भी जानते हैं , पर दूसरों के case में आप वही देखते हैं जो वो आपको दिखाते हैं , आपको उनकी नई car नज़र आती है पर उसके साथ आने वाला EMI नहीं , आपको friend का swanky office तो दीखता है पर उसके साथ मिलने वाली tension नहीं . और ऐसा होने पर आप उनकी खुशियों को अपने ग़मों से compare करने लगते हैं और ultimately low feel करने लगते हैं .

Fb की वजह से depression में जाने वालों की संख्या दिन ब दिन बढती जा रही है , just beware कि आप भी इसके शिकार न हो जाएं .

3) Real Friends और relationships suffer करते हैं :

कई बार लोग बहुत proudly बताते हैं , “ Fb पे मेरे 500 friends हैं …” I am sure उनमे से आधे अगर सामने से गुजर जाएं तो वो उन्हें पहचान भी नहीं पायंगे . हकीकत में Fb पे हमारे friends कम और acquaintances ज्यादा होते हैं . खैर ये कोई खराब बात नहीं है …लेकिन अगर हम इन more or less fake relations को ज़रुरत से अधिक time देते हैं तो कहीं न कहीं हमें अपनी family और friends को जो time देना चाहिए उससे compromise करते हैं . I know हमारे close friends और relations भी Fb पे होते हैं , but frankly speaking Fb पर वो भी हमारे लिए आम लोगों की तरह हो जाते हैं , क्योंकि Fb तो एक भीड़ की तरह है …और भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता ….जो सामने पड़ा …like किया , comment दिया और आगे बढ़ गए ….individuals को attention देना ये Fb की आत्मा में ही नहीं है .

4) आप mainly addicts से communicate करने लगते हैं :

शायद आपने Pareto principle के बारे में सुना होगा …इस principle का कहना है कि 80% चीजों के लिए 20% चीजें जिम्मेदार होती हैं .

For eg. किसी company की 80 % sales 20% customers की वजह से होती है .

ऐसा ही कुछ Fb पे भी होता है …80% updates 20% लोगों द्वारा ही की जाती है …और आप बार बार उन्ही से linkup होते रहते हैं …and basically ये वही Addict kind of लोग होते हैं जो बस Fb से चिपके ही रहते हैं . और ऐसे लोगों से interact करना शायद ही कभी आपको काम की चीजें बता पाएं . ये mostly waste of time ही होता हैं .

5) आपको Socially active होने का भ्रम हो जाता है और reality इसके उलट होती है :

Facebook पे होने से कई लोग खुद को socially active समझने लगते हैं , और friends को hi -bye कर के अपना role पूरा समझ लेते हैं . धीरे -धीरे ये बिलकुल mechanical हो जाता है …आप Fb पे तो hi करते हैं लेकिन जब उसी दोस्त से college या office में मिलते हैं तो react भी नहीं करते …it is like आपकी online presence मायने रखती हो पर आपका खुद का मौजूद होना बेमानी हो .

और जब आप ऐसे behave करते हैं तो लोग आपको avoid करने लगते हैं और कहीं न कहीं आपको fake समझने लगते हैं . यानि आपको तो लगता है कि आप सबसे touch में हैं पर इसके उलट आप अपना touch खोते जाते हैं .

6) आपकी health पर बुरा असर पड़ता है :

Fb पर लगे रहने से आपको फिजिकल और मेंटल दोनों तरह की प्रॉब्लम हो सकती हैं. आपकी आँखें कमजोर पड़ सकती हैं, गलत posture में बैठने से आपको स्पॉन्डिलाइटिस हो सकता है . और डिप्रेशन में जाने का खतरा तो हमेशा ही बना रहता है.

7) आप अपनी life के सबसे energetic days lazy entertainment में लगा देते हैं :

Fb use करने वालों की demography देखी जाए तो इसे सबसे अधिक teens और twenties के young लोग use करते हैं . अगर आप इस age group से बाहर हैं तो ये point आपके लिए applicable नहीं है.

Teenage और twenties life का वो time होता है जब आपके अन्दर energy की कोई कमी नहीं होती …कभी सोचा है कि इस वक्त भगवान् आपको सबसे अधिक energy क्यों देते है ….क्योंकि ये हमारे life making years होते हैं ….इस समय आपके सामने करने को बहुत कुछ होता है …..पढाई का बोझ या घर की जिम्मेदारी उठाने का challenge…अपना career chose करने और competition beat करने की कशमकश …अपने दिल कि सुनकर कुछ कर गुजरने की चाहत …parents के सामने हाथ फैलाने की जगह उनका हाथ थामने कि जिद्द …और ये सब करने के लिए उर्जा चाहिए …energy चाहिए ; but unfortunately Fb का over usage करने वाले उसे गलत जगह invest करते हैं . जहाँ उनके पास करने को इतने ज़रूरी काम हैं वो एक कोने में बैठ कर , and in ,most of the cases लेट कर …अपनी life के ये energetic days एकदम unproductive चीज में लगा देते हैं .

Friends अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि Fb एक शोर -शाराबे से भरे mall की तरह है …यहाँ थोडा वक़्त बीतायेंगे तो अच्छा लगेगा लेकिन अगर वहीँ घर बना कर रहने लगेंगे तो आपकी ज़िन्दगी औरों की आवाज़ के शोर में बहरी हो जाएगी . उसे बहरा मत होने दीजिये ….अपना time अपनी energy कुछ बड़ा , कुछ valuable , कुछ शानदार करने में लगाइए और जब आप ऐसा करेंगे तो आपके इस काम को सिर्फ आपके friends ही नही बल्कि पूरी दुनिया Like करेगी , और ऊपर वाला comment देगा , “gr8 job my son”

All the best!

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कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत ?

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत ? ϒ
morning yoga

Early to bed and early to rise makes a man healthy wealthy and wise

Hi friends,

हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr. Steve Pavlina ने लिखा है . इसका title है “How to become an early riser.“. ये बताना चाहूँगा कि इन्ही के द्वारा लिखे गए लेख ”20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य ” का Hindi version इस ब्लॉग पर सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखों में से एक है.

तो आइये जानें कि हम कैसे डाल सकते हैं सुबह जल्दी उठने की आदत.

कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत?

It is well to be up before daybreak, for such habits contribute to health, wealth, and wisdom.
-Aristotle

सूर्योदय होने से पहले उठाना अच्छा होता है , ऐसी आदत आपको स्वस्थ , समृद्ध और बुद्धिमान बनती है .

-अरस्तु

सुबह उठने वाले लोग पैदाईशी ऐसे होते हैं या ऐसा बना जा सकता है ? मेरे case में तो निश्चित रूप से मैं ऐसा बना हूँ . जब मैं बीस एक साल का था तब शायद ही कभी midnight से पहले बिस्तर पे जाता था . और मैं लगभग हमेशा ही देर से सोता था. और अक्सर मेरी गतिविधियाँ दोपहर से शुरू होती थीं .

पर कुछ समय बाद मैं सुबह उठने और successful होने के बीच के गहरे सम्बन्ध को ignore नहीं कर पाया , अपनी life में भी . उन गिने – चुने अवसरों पर जब भी मैं जल्दी उठा हूँ तो मैंने पाया है कि मेरी productivity लगभग हमेशा ही ज्यादा रही है , सिर्फ सुबह के वक़्त ही नहीं बल्कि पूरे दिन . और मुझे खुद अच्छा होने का एहसास भी हुआ है . तो एक proactive goal-achiever होने के नाते मैंने सुबह उठने की आदत डालने का फैसला किया . मैंने अपनी alarm clock 5 am पर सेट कर दी …

— और अगली सुबह मैं दोपहर से just पहले उठा .

ह्म्म्म…………

मैंने फिर कई बार कोशिश की , पर कुछ फायदा नहीं हुआ .मुझे लगा कि शायद मैं सुबह उठने वाली gene के बिना ही पैदा हुआ हूँ . जब भी मेरा alarm बजता तो मेरे मन में पहला ख्याल यह आता कि मैं उस शोर को बंद करूँ और सोने चला जून . कई सालों तक मैं ऐसा ही करता रहा , पर एक दिन मेरे हाथ एक sleep research लगी जिससे मैंने जाना कि मैं इस problem को गलत तरीके से solve कर रहा था . और जब मैंने ये ideas apply कीं तो मैं निरंतर सुबह उठने में कामयाब होने लगा .

गलत strategy के साथ सुबह उठने की आदत डालना मुश्किल है पर सही strategy के साथ ऐसा करना अपेक्षाकृत आसान है .

सबसे common गलत strategy है कि आप यह सोचते हैं कि यदि सुबह जल्दी उठाना है तो बिस्तर पर जल्दी जाना सही रहेगा . तो आप देखते हैं कि आप कितने घंटे की नीद लेते हैं , और फिर सभी चीजों को कुछ गहनते पहले खिसका देते हैं . यदि आप अभी midnight से सुबह 8 बजे तक सोते हैं तो अब आप decide करते हैं कि 10pm पर सोने जायेंगे और 6am पर उठेंगे . सुनने में तर्कसंगत लगता है पर ज्यदातर ये तरीका काम नहीं करता .

ऐसा लगता है कि sleep patterns को ले के दो विचारधाराएं हैं . एक है कि आप हर रोज़ एक ही वक़्त पर सोइए और उठिए . ये ऐसा है जैसे कि दोनों तरफ alarm clock लगी हो —आप हर रात उतने ही घंटे सोने का प्रयास करते हैं . आधुनिक समाज में जीने के लिए यह व्यवहारिक लगता है . हमें अपनी योजना का सही अनुमान होना चाहिए . और हमें पर्याप्त आराम भी चाहिए .

दूसरी विचारधारा कहती है कि आप अपने शरीर की ज़रुरत को सुनिए और जब आप थक जायें तो सोने चले जाइये और तब उठिए जब naturally आपकी नीद टूटे . इस approach की जड़ biology में है . हमारे शरीर को पता होना चाहिए कि हमें कितना rest चाहिए , इसलिए हमें उसे सुनना चाहिए .

Trial and error से मुझे पता चला कि दोनों ही तरीके पूरी तरह से उचित sleep patterns नहीं देते . अगर आप productivity की चिंता करते हैं तो दोनों ही तरीके गलत हैं . ये हैं उसके कारण :

यदि आप निश्चित समय पे सोते हैं तो कभी -कभी आप तब सोने चले जायेंगे जब आपको बहुत नीद ना आ रही हो . यदि आपको सोने में 5 मिनट से ज्यादा लग रहे हों तो इसका मतलब है कि आपको अभी ठीक से नीद नहीं आ रही है . आप बिस्तर पर लेटे -लेटे अपना समय बर्वाद कर रहे हैं ; सो नहीं रहे हैं . एक और problem ये है कि आप सोचते हैं कि आपको हर रोज़ उठने ही घंटे की नीद चाहिए , जो कि गलत है . आपको हर दिन एक बराबर नीद की ज़रुरत नहीं होती .

यदि आप उतना सोते हैं जितना की आपकी body आपसे कहती है तो शायद आपको जितना सोना चाहिए उससे ज्यादा सोएंगे —कई cases में कहीं ज्यादा , हर हफ्ते 10-15 घंटे ज्यदा ( एक पूरे waking-day के बराबर ) ज्यादातर लोग जो ऐसे सोते हैं वो हर दिन 8+ hrs सोते हैं , जो आमतौर पर बहुत ज्यादा है . और यदि आप रोज़ अलग -अलग समय पर उठ रहे हैं तो आप सुबह की planning सही से नहीं कर पाएंगे . और चूँकि कभी -कभार हमारी natural rhythm घडी से मैच नहीं करती तो आप पायंगे कि आपका सोने का समय आगे बढ़ता जा रहा है .

मेरे लिए दोनों approaches को combine करना कारगर साबित हुआ . ये बहुत आसान है , और बहुत से लोग जो सुबह जल्दी उठते हैं , वो बिना जाने ही ऐसा करते हैं , पर मेरे लिए तो यह एक mental-breakthrough था . Solution ये था की बिस्तर पर तब जाओ जब नीद आ रही हो ( तभी जब नीद आ रही हो ) और एक निश्चित समय पर उठो ( हफ्ते के सातों दिन ). इसलिए मैं हर रोज़ एक ही समय पर उठता हूँ ( in my case 5 am) पर मैं हर रोज़ अलग -अलग समय पर सोने जाता हूँ .

मैं बिस्तर पर तब जाता हूँ जब मुझे बहुत तेज नीद आ रही हो . मेरा sleepiness test ये है कि यदि मैं कोई किताब बिना ऊँघे एक -दो पन्ने नहीं पढ़ पाता हूँ तो इसका मतलब है कि मै बिस्तर पर जाने के लिए तैयार हूँ .ज्यादातर मैं बिस्तर पे जाने के 3 मिनट के अन्दर सो जाता हूँ . मैं आराम से लेटता हूँ और मुझे तुरंत ही नीद आ जाति है . कभी कभार मैं 9:30 पे सोने चला जाता हूँ और कई बार midnight तक जगा रहता हूँ . अधिकतर मैं 10 – 11 pm के बीच सोने चला जाता हूँ .अगर मुझे नीद नहीं आ रही होती तो मैं तब तक जगा रहता हूँ जब तक मेरी आँखें बंद ना होने लगे . इस वक़्त पढना एक बहुत ही अच्छी activity है , क्योंकि यह जानना आसान होता है कि अभी और पढना चाहिए या अब सो जाना चाहिए .

जब हर दिन मेरा alarm बजता है तो पहले मैं उसे बंद करता हूँ , कुछ सेकंड्स तक stretch करता हूँ , और उठ कर बैठ जाता हूँ . मैं इसके बारे में सोचता नहीं . मैंने ये सीखा है कि मैं उठने में जितनी देर लगाऊंगा ,उतना अधिक chance है कि मैं फिर से सोने की कोशिश करूँगा .इसलिए एक बार alarm बंद हो जाने के बाद मैं अपने दिमाग में ये वार्तालाप नहीं होने देता कि और देर तक सोने के क्या फायदे हैं . यदि मैं सोना भी चाहता हूँ , तो भी मैं तुरंत उठ जाता हूँ .

इस approach को कुछ दिन तक use करने के बाद मैंने पाया कि मेरे sleep patterns एक natural rhythm में सेट हो गए हैं . अगर किसी रात मुझे बहुत कम नीद मिलती तो अगली रात अपने आप ही मुझे जल्दी नीद आ जाती और मैं ज्यदा सोता . और जब मुझमे खूब energy होती और मैं थका नहीं होता तो कम सोता . मेरी बॉडी ने ये समझ लिया कि कब मुझे सोने के लिए भेजना है क्योंकि उसे पता है कि मैं हमेशा उसी वक़्त पे उठूँगा और उसमे कोई समझौता नहीं किया जा सकता .

इसका एक असर ये हुआ कि मैं अब हर रात लगभग 90 मिनट कम सोता ,पर मुझे feel होता कि मैंने पहले से ज्यादा रेस्ट लिया है . मैं अब जितनी देर तक बिस्तर पर होता करीब उतने देर तक सो रहा होता .

मैंने पढ़ा है कि ज्यादातर अनिद्रा रोगी वो लोग होते हैं जो नीद आने से पहले ही बिस्तर पर चले जाते हैं . यदि आपको नीद ना आ रही हो और ऐसा लगता हो कि आपको जल्द ही नीद नहीं आ जाएगी , तो उठ जाइये और कुछ देर तक जगे रहिये . नीद को तब तक रोकिये जब तक आपकी body ऐसे hormones ना छोड़ने लगे जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर आप तभी bed पे जाएँ जब आपको नीद आ रही हो और एक निश्चित समय उठें तो आप insomnia का इलाज कर पाएंगे .पहली रात आप देर तक जागेंगे , पर बिस्तर पर जाते ही आपको नीद आ जाएगी . .पहले दिन आप थके हुए हो सकते हैं क्योंकि आप देर से सोये और बहुत जल्दी उठ गए , पर आप पूरे दिन काम करते रहेंगे और दूसरी रात जल्दी सोने चले जायेंगे .कुछ दिनों बाद आप एक ऐसे pattern में settle हो जायेंगे जिसमे आप लगभग एक ही समय बिस्तर पर जायंगे और तुरंत सो जायंगे .

इसलिए यदि आप जल्दी उठाना चाहते हों तो ( या अपने sleep pattern को control करना चाहते हों ), तो इस try करिए : सोने तभी जाइये जब आपको सच -मुच बहुत नीद आ रही हो और हर दिन एक निश्चित समय पर उठिए .

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कब तक करते रहेंगे हेल्थ को अनदेखा ?


kmsraj51 की कलम से …..
PEN KMSRAJ51-PEN


Helalth-is-Wealth-150x150Do you really believe health is wealth?


Friends कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिसे हम जानते हैं कि हमें करना चाहिए पर फिर भी हम नहीं करते . उन्ही में से एक है . “अपनी सेहत पर ध्यान देना .”

हम कहते हैं “Health comes first” , पर हकीकत में हम इसे last preference देते हैं .
हम कहते हैं “Health is wealth”, पर जीते ऐसे हैं मानो “Wealth is health”

हममें से 95% लोग ऐसा ही करते हैं ; और मैं भी उन्ही 95% लोगों में हूँ या कह सकते हैं कि तीन दिन पहले तक था ..जो अपनी health पर ध्यान नहीं देते …. पर अब मैं 5% ध्यान देने वालों के group में jump करना चाहता हूँ . शुरुआत तीन दिन पहले की है , पिछले तीन दिनों से मैं सुबह उठ कर exercise कर रहा हूँ … इसे जारी रख पाऊँ ऐसी उम्मीद करता हूँ , और आज publicly इस बारे में बता कर शायद मैं इस दिशा में और भी मजबूती से बढ़ पाउँगा … let’s see!!!

और ऐसा नहीं है कि ये पहली बार शुरू किया है … पहले भी कई शुरुआत कर चुके हैं पर कुछ दिनों बाद आप जानते ही हैं क्या होता है …. और कैसे नहीं जानेंगे आपके साथ भी तो यही होता आया है … 🙂

पर मैं इस बार पीछे नहीं हटने वाला , अपनी daily routine में मैं exercise को ज़रूर include करूँगा और तब तक करूँगा जब तक ये brush करने या रोज नहाने जितना आम ना हो जाये …मेरी habit में ना आ जाये …

तो इसके लिए मैं क्या करने वाला हूँ ; इस बारे में बताता हूँ पर उससे पहले आइये समझने की कोशिश करते हैं कि हम अपनी health को ignore क्यों करते रहते हैं :

क्योंकि हमें प्यास लगने पे कुआँ खोदने की आदत है :

अधिकतर लोग बिजली बिल / टेलीफोन बिल कब जमा करते हैं ….last day पर … जब तक काम सर पर नही आ जाता हम उसे टालते रहते हैं … और यही health के साथ भी होता है ….. चूँकि अभी हमारी health normal है , इसलिए हमे इस और ध्यान देने की कोई urgency नहीं लगती , लगता है सब ठीक ही तो है , फिर अभी walk पे जाने की , jogging करने की क्या जल्दी है कुछ दिन बाद शुरू कर सकते हैं … but as we all know ऐसा हम कई सालों से सोचते आ रहे हैं, पर करते कभी नहीं .

हम सोचते हैं बुरी चीजें दूसरों के साथ ही हो सकती हैं :

Health के case में हम अपना बुरा कभी नहीं सोचते …. हाँ और चीजों में खूब बुरा सोच लेते हैं पर सेहत के मामले में हम अलग हैं …य़े जानते हुए भी की करोड़ों Indian diabetic हैं हम कभी नहीं सोचते की हमारी lazy lifestyle की वजह से हमें भी diabetes हो सकता है … हम इस ओर गलती से भी ध्यान नहीं देते कि अगर लाखों लोगों को young age में ही दिल की बीमारी हो रही है तो कल को हमें भी हो सकती है …मानो हम man नहीं superman हों !!!

हम सोचते हैं कि बाद में भी ध्यान दे दिया तो काम चल जायेगा :

पर ऐसा नहीं है , पहले तो ये “बाद ” जल्दी आता नहीं है , और दूसरा जिस वक़्त हम health को postpone करते जाते हैं उसी वक़्त हम bad health या बीमारी को advance करते जाते हैं . यानि हम खुद को समझा तो लेते हैं कि बाद में cover कर लेंगे पर जिस तरह school में शुरू से पढाई से जी चुराने वाला student कभी अंत में पढ़ कर 100% score नहीं कर पाटा , उसी तरह कोई इंसान सालों तक ignore करने के बाद अंत में ध्यान देने पर 100% health नहीं पा सकता , इसलिए हमे आज से ही इस direction में ध्यान देना चाहिए .

क्योंकि हमारा environment ऐसा है :

अगर आप सुबह walk पर जाएं तो आपको ज्यादातर old age people, या मोटापे से परेशान लोग ही दिखेंगे …ये वो हैं जिन्हे प्यास लग चुकी है , उनकी life में health issues आ चुके हैं …पर जो young हैं …अभी healthy हैं वो नदारद हैं … हमारा कोई दोस्त jogging पे नहीं जाता , gym के दर्शन नहीं करता इसलिए अगर हम नहीं करते तो क्या बुरा करते हैं ….friends, health पर ध्यान न देना दरअसल एक बीमारी है पर चूँकि 95% लोग बीमार हैं इसलिए इसे ही normal life मान लिया गया है …. पर as you know सच्चाई कुछ और ही है !

Well, अब मैं अपना plan बताता हूँ :

बड़ा simple है ; मैंने decide किया है कि मैं सुबह fresh होने के बाद का 30 minute exercise को दूंगा .

फिर चाहे मैं 6 बजे उठूँ या 9 बजे …ज़ब भी उठूंगा 30 minute health को दूंगा …. हम ब्रश के साथ भी तो यही करते हैं , isn’t it? क्या कोई ऐसा भी है जो देर से उठने पर brush नहीं करता …. सभी करते हैं … जब उठते हैं तब करते हैं … और वही मैं exercise के साथ करूँगा ….

इसमें क्या challenges आ सकते हैं ?

इससे मैं office के लिए late हो सकता हूँ …. मेरी आज plan की गयी blog post कल के लिए postpone हो सकती है …अखबार पढ़ने में gap हो सकता है …but let it be… हम हमेशा कहते हैं सेहत से बढ़कर कुछ नहीं , सेहत है तो दौलत है , and all that gyan … पर दिक्कत ये है कि सिर्फ कहते हैं practically कभी apply नहीं करते , इस बार मैं करने जा रहा हूँ …. मैं अपने आसपास मौजूद बीमार लोगों को देख रहा हूँ और मैंने इस बार अंदर से महसूस किया है कि “healthy” रहने से बड़ा और कोई asset हो ही नहीं सकता …

एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ …

एक सेठ था ,वो दिन- रात business बढ़ाने में लगा रहता था , उसका goal था कि उसे शहर का सबसे अमीर आदमी बनना है . धीरे -धीरे उसने ये goal पूरा भी कर लिया , इस कामयाबी की ख़ुशी में उसने एक शानदार घर बनवाया। गृह प्रवेश के दिन उसने एक बहुत बड़ी पार्टी दी और जब सारे मेहमान चले गए तो वो अपने कमरे में सोने के लिए गया .

वो जैसे ही बिस्तर पर लेटा एक आवाज़ उसके कानो में पड़ी ,

” मैं तुम्हारी आत्मा हूँ … और अब मैं तुम्हारा शरीर छोड़ कर जा रही हूँ !!”

सेठ सकते में आ गया और बोला , ” अरे तुम ऐस नहीं कर सकती, तुम चली जाओगी तो मैं तो मर जाऊँगा …देखो मैंने कितनी बड़ी कामयाबी हांसिल की है… तुम्हारे लिए करोड़ों रूपये का घर भी बनवाया है … इतनी सुख -सुविधाएं तुम्हे कहीं नहीं मिलेंगी … यहाँ से मत जाओ …”

आत्मा बोली , ” मेरा घर तो तुम्हारा शरीर था …. पर करोड़ों का घर बनवाने के चक्कर में तुमने इस अमूल्य शरीर का ही नाश कर डाला ,…तुम ठीक से चल नहीं पाते …ऱात को तुम्हे नींद नहीं आती … तुम्हारा दिल भी कमजोर हो चुका है …. तनाव की वजह से ना जाने और कितनी बीमारियों का घर बन चुका है तुम्हारा शरीर …… तुम ही बताओ क्या तुम ऐसे किसी घर में रहना चाहोगे जहाँ चारो तरफ गंदगी हो … जिसकी छत टपक रही हो …. जिसके खिड़की -दरवाजे टूटे हों …., नहीं चाहोगे ना !!! …. इसलिए मैं भी ऐसी जगह नहीं रह सकती ….”

और ऐसा कहते हुए आत्मा सेठ के शरीर से निकल गयी …और सेठ की मृत्यु हो गयी .

Friends, ये कहानी बहुत से लोगों की हकीकत है … मैं ये नहीं कहता की आप अपने goals pursue मत करिये , पर मैं ये ज़रूर कहूंगा कि जो भी करिये Health को सबसे ऊपर रखिये …. नहीं तो सेठ की तरह goal achieve कर लेने के बाद भी अपनी success को enjoy नहीं कर पाएंगे .

अंत में Swami Vivekananda के एक quote से अपनी बात ख़तम करना चाहूंगा …

“You will be nearer to heaven through football than through the study of the Gita.
तुम गीता का अध्ययन करने के बजाये फ़ुटबाल के जरिये स्वर्ग के ज्यादा निकट होगे .”

… गीता पढ़िए …. पर फ़ुटबाल खेलना मत भूलिए …. अपने goal के पीछे दौड़िये पर अपनी health को पीछे मत छोड़िये ….

All the best! 🙂

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