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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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LIFE

Soul Sustenance & Message for the day 11-04-2014

kmsraj51 की कलम से …..

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Soul Sustenance 11-04-2014
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Universal Concepts About The Supreme Being or God – Part 2

Just as a candle flame emerges from a point source and assumes an oval form, mystics and saints throughout the passage of time have had visions of God as a point of self-luminous light with an oval aura.

Most religions have images, idols or memorials, having one name or the other to represent God as light or as an oval shape.

Throughout India there are statues of an oval-shaped image. They are called Shivalingas, and are thought to represent the Creator Himself. The names of the temples of Shiva confirm this: Somnath, the Lord of Nectar; Vishwanath, The Lord of the Universe; Mukteshwara, the Lord of Liberation, etc..

In the Old Testament of the Bible, it is mentioned that Moses had a vision of light as a burning bush in the desert. Jesus also referred to God as light. In some Christian ceremonies, during the ceremonies, an ostensorio is held up. The ostensorio is a golden ball with many rays radiating from it. Perhaps this is a symbolic representation of God.

Guru Nanak, the founder of Sikhism called Him Ek Omkar, Nirakar, the one non-physical (bodiless) being or soul.

According to Islamic legend, when Adam left paradise he came to a low hill upon which he saw a shining white oval stone. Around this stone he circled seven times praising God. He then built the Kaaba. By the time of Abraham it needed to be rebuilt as a temple to honour the one God. The town of Mecca grew around this spot. This oval stone, later called Sang-e-aswad and now ‘blackened’ by the kisses of millions of sinners, so they say, is the only object of worship in the whole of Islam.

(To be continued tomorrow …)

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Message for the day 11-04-2014
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Where there is faith, there is greatness.

Expression: To have faith means to recognize the positivity in the self, in others and in situations. It also means a deep connection with God. The one who has faith is able to bring out the greatness in everything and everyone. So such a person reveals his greatness wherever he is.

Experience: When I have unbroken faith, I have the understanding that everything that happens is for some good cause. So, I am satisfied with everything that happens in my life. So I am creative in my responses to the environment, which in turn, makes me truly great.

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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मन के हारे हार है मन के जीते जीत !!

kmsraj51 की कलम से …..
nature_KMSRAJ51

“मन के हारे हार है मन के जीते जीत”

दोस्तों ,

बहुत दिनों से आप अपने आपको थका हुआ और कमजोर महसूस कर रहे हैं! मन में भी नकारात्मक भाव आ रहे हैं ,कोई उमंग महसूस नहीं हो रही है ! जिंदगी बोझिल सी हो रही है! ऐसे में आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं! वो आपकी पूरी जांच करने के बाद गंभीर स्वर में आपसे कहता है,–‘माफ़ कीजिएगा! लेकिन आपकी reports देख कर मुझे लगता है की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है,थोडा अपना ध्यान रखिए!!

आप ये सुन कर shocked हो जाते हैं! लेकिन अब इसके बाद जो आपकी प्रतिक्रिया होती है,वो महत्वपूर्ण है!

इस खबर को सुनने के बाद आप दो तरह से प्रतिक्रिया कर सकते हैं!

पहला, ये सुनते ही आपका मन कहता है, देखा, मैं तो पहले ही कह रहा था कुछ तो गड़बड़ है! तुम बीमार होने वाले हो! आप तुरंत doctor के prediction के आगे हथियार डाल देते हैं! आपकी नकारात्मक सोच आपकी उम्र को 10 साल आगे की स्थिति में पहुंचा देती है!!

आप हताश और निराश से कुर्सी से उठते हैं! किसी पराजित आदमी की तरह अपने कंधे झुका कर clinic से बाहर निकलते हैं! घर आकर चुपचाप या तो बिस्तर या TV के आगे बैठ जाते हैं!

आपके मन में ये prediction मजबूती से बैठ गई है की ये तो होना ही है तो क्यों मैं सुबह जल्दी उठूं ,व्यायाम करूँ, सही आहार लूँ, मेहनत करूँ! ये विचार आपके मनोमस्तिक्ष पर इतनी बुरी तरह हावी हो जाते हैं की सोते, जागते खाते-पीते आप बस ये ही सोचते रहते हैं की अब तो मुझे diabetes और heart problem होने वाली है आखिर अब तो doctor ने भी ये कह दिया है!

आप निरुत्साहित से अपने काम करते हैं! चिंता में TV के सामने बैठ कुछ ना कुछ खाते रहते हैं! आप अपनी चिंता को खाने की आड़ में दबाने की कोशिश करते हैं! फिर ऐसे ही हताशा, निराशा और आलस से भरी आपकी दिनचर्या हो जाती है!!

फिर एक दिन अचानक आपकी तबियत ज्यादा खराब हो जाती है! आप डॉक्टर के यहाँ जाते हैं! आपका सारा checkup करने के बाद doctor बड़े ही निराशा भरे स्वर में कहता है,– ‘मुझे अफ़सोस है! लेकिन मैं आपको ये बताना चाहता हूँ की आपको high BP, diabetes और heart problem हो चुका है! अगर अब भी आप अपना अच्छे से ख्याल नहीं रखेंगे तो गाडी ज्यादा देर और दूर तक नहीं चल पाएगी! आप shocked से सामने दिवार पर लगा कैलेंडर देखते हैं! अरे अभी तो केवल 5 महीने ही गुजरे हैं, डॉक्टर ने तो 1 साल की कहा था! आपकी सोच और मन की हार ने उस भविष्यवाणी को समय से पहले ही सच साबित कर दिया! आप फिर पहले से भी ज्यादा हताश, निराश और झुके हुए कन्धों के साथ clinic से बाहर निकलते हैं! और ये कहानी दोस्तों फिर ज्यादा लम्बी नहीं चलती है ……..!!

वहीं दूसरी तरफ doctor के ये कहते ही, की अगले एक साल में आपको diabetes और heart problem होने वाली है, आपको आपकी अंतरात्मा को एक झटका सा लगता है! आप इस बात को एक चुनोती की तरह लेते हैं! तुरंत आपका मन और आत्मबल एक निर्णय लेते हैं, की अरे ये सिर्फ एक prediction ही तो है, हकीकत नहीं है, और मैं इसे हकीकत बनने भी नहीं दूंगा! आप मन ही मन संकल्पित होते हैं, अपनी पिछली जिंदगी की कमियों, लापरवाहियों और आलस पर एक नजर डालते हैं और तुरंत निर्णय लेते हैं, बस अब और नहीं! अब मेरी जिंदगी, मेरी सेहत मेरे हाथ में है! आपकी सोच पूरा u-turn ले लेती है! आप ये ठान लेते हैं की आज से बल्कि अभी से मैं अपने आप को, अपनी आदतों को बदल दूंगा! इस prediction को मैं झूठा साबित कर के रहूँगा! आप एक संकल्प और मन के विश्वास के साथ कुर्सी से उठते हैं और clinic से बाहर निकलते हैं!!

आप अपनी दिनचर्या को पूरी तरह से बदल देते हैं! जल्दी उठना, ध्यान, व्यायाम, सही आहार, सकारात्मक सोच, श्रद्धा, आशावादिता, उमंग ,उत्साह और पर्याप्त मेहनत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेते हैं! कुछ दिनों के बाद जब मन में निराशा के भाव आने लगते हैं, आलस पुनः आप पर हावी होना चाहता है! तो डॉक्टर की भविष्यवाणी को याद कर आप अपनी हताशा को पीछे धकेल देते हैं!

आपका ये संकल्प की इस prediction को मैं सही साबित नहीं होने दूंगा, आप को वापस अपने सेहत के रास्ते पर अग्रसर कर देता है!!

फिर आप कई साल बाद ऐसे ही अपने routine checkup के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं! डॉक्टर बड़ी गर्मजोशी और उमंग से कहता है, -क्या बात है! आपने तो अपना कायाकल्प ही कर लिया है! आप तो पहले से भी ज्यादा सेहतमंद और जवान हो गए हैं! आप मुस्कुरा कर डॉक्टर से हाथ मिलाते हैं और सीटी बजाते हुए क्लिनिक से बाहर आ जाते हैं! और ये कहानी बहुत अच्छे तरीके से बहुत लम्बी चलती है!!

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तो दोस्तों ,
कहानी कैसी लगी? वैसे ये कहानी है ही नहीं! हकीकत है! हम लोगों में से 90 से 95 % लोग पहले वाली सोच के होते हैं, है ना? केवल 5 या 10 % लोग ही दूसरे नजरिये वाले होते हैं! जो अपने पुरुषार्थ, मनोबल और मेहनत से भविष्यवाणी को भी बदल देते हैं! आपके मन की नकारात्मक सोच आपको समय से पहले डूबा भी सकती हैं और सकारात्मक सोच अनेकों ऊँचाइयों तक उठा भी सकती है! इसलिए जिंदगी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और तदुपरांत सार्थक प्रयत्न आपकी सफल, सेहत भरी जिंदगी और उज्जवल भविष्य के लिए अति आवश्यक है! है ना?

तो मन का कैसा नजरिया रखना चाहेंगे आप? आखिर ………..

जैसा नजरिया है आपका, वैसी जिंदगी है आपकी ……………

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20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य

kmsraj51 की कलम से …..
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purpose-of-life-kmsraj51


दोस्तों आज http://kmsraj51.wordpress.com/ पर मैं आपके साथ कुछ special share करने जा रहा हूँ . Special इसलिए क्योंकि आज मैंने जो article Hindi में translate किया है वो एक ऐसे व्यक्ति द्वारा लिखा गया है जिन्हें मैं अपना on-line गुरु मानता हूँ . उनका नाम है Steve Pavlina. उन्होंने अपने articles से करोड़ों लोगों के जीवन में एक positive बदलाव लाया है . और आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ वो उनके द्वारा लिखे गए सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले articles में से एक है . इसे बड़े धयन से पढ़िए क्योंकि यहाँ से आप जान सकते हैं अपने जीवन का उद्देश्य .

How to Discover Your Life Purpose in About 20 Minutes

लगभग 20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य

आप अपने जीवन का असली उद्देश्य कैसे पता करेंगे ? मैं आपकी job के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ , या फिर आपकी रोज़मर्रा की जिम्मेदारियों या आपके long term goals के बारे में भी बात नहीं कर रहा हूँ . मेरा मतलब उस असली वजह से है जिसके लिए आप यहाँ हैं —वो वजह जिसके
लिए आप exist करते हैं .

या शायद आप एक नास्तिक व्यक्ति हैं जो ये सोचता है कि उसके जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है , और ज़िन्दगी का कोई मतलब नहीं है . इससे कोई फरक नहीं पड़ता . इस बात में यकीं रखना की life का कोई purpose नहीं है आपको इसे discover करने से नहीं रोकता , ठीक वैसे ही जैसे गुरुत्वाकर्षण में यकीं नहीं होना आपको घूमने-घामने से नहीं रोक सकता . यकीं ना होने से बस समय थोडा ज्यादा लगेअगा , तो अगर आप इस तरह के व्यक्ति हैं तो इस पोस्ट के Title में जो नंबर है उसे 20 से बढ़ा कर 40 कर दें (या 60 अगर आप सच -मुच जिद्दी हैं ). ज्यादा chance है कि अगर आप ये believe करते हैं कि आपकी life का कोई purpose नहीं है तो मैं जो कुछ कह रहा हूँ आप उसमे भी believe नहीं करेंगे , पर फिर भी , एक घंटा देने में क्या जाता है , क्या पता कुछ पता ही चल जाये ?

Bruce Lee के बारे में एक छोटी सी कहानी बात कर मैं इस छोटी सी exercise का stage सेट करता हूँ . एक martial artist ने Bruce से कहा कि तुम martial arts के बारे में जो कुछ भी जानते हो मुझे सिखा दो .Bruce ने पानी से भरे दो कप लिए और कहा “ पहला कप martial arts के बारे में जो भी तुम्हारा ज्ञान है उसे दर्शाता है , दूसरा कप martial srts के बारे में मेरे ज्ञान को दर्शाता है . अगर तुम अपना कप मेरे ज्ञान से भरना चाहते हो तो पहले तुम्हे अपने कप का ज्ञान कहली करना होगा .”

यदि आप अपनी ज़िन्दगी का असली मकसद जानना चाहते हैं तो पहले आपको सिखाये गए सभी व्यर्थ के मकसदों (including कि आपकी ज़िन्दगी का कोई मकसद ही नहीं है ) को अपने दिमाग से निकलना होगा .

तो आप अपने जीवन का उद्देश्य कैसे पता करेंगे ? वैसे तो यह पता करने के कई तरीके हैं , पर यहाँ मैं आपको एक बहुत ही simple तरीका बताऊंगा जो कोई भी अपना सकता है . आप इस तरीके को जितना ज्यादा accept करंगे , जितना ज्यादा इसके काम करने की अपेक्षा करेंगे यह उतनी ही तेजी से आपके लिए काम करेगा .पर यदि आप इससे ज्यादा उम्मीद ना भी करें , या इसपे कुछ doubt करें , यह सोचें कि ये तो बेवकूफी है , समय की बर्वादी है तो भी यह अप्पके लिए काम करेगा , बस ज़रुरत है कि आप इसके साथ लगे रहिये .—पर हाँ , समय कुछ अधिक लगेगा .

आपको ये करना है :

1) एक blank page ले लीजिये या फिर एक word file खोल लीजिये .

2) Top पर लिखिए , “ मेरी जीवन का असली उद्देश्य क्या है ?”

3) कोई उत्तर लिखिए (कुछ भी ) जो आपके दिमाग में आ रहा हो . पूरा sentence लिखने की ज़रुरत नहीं है . एक छोटा सा phrase काफी है .

4) Step 3 को तब तक repeat कीजिये जब तक की आप कोई ऐसा उत्तर ना लिख लें जिससे आपको रोना आ जाये . यही आपके जीवन का उद्देश्य है .

बस इतना ही . इससे कोई मतलब नहीं है की आप counselor हैं engineer हैं या कोई bodybuilder हैं .कुछ लोगों को ये exercise बिलकुल उपयुक्त लगेगी , कुछ लोगो को कोरी बकवास . Life का purpose क्या है इसको लेकर हमारे मन में जो भी हलचल है और अपनी Social conditioning की वजह से हम जो कुछ भी इस विषय में सोचते हैं उसे clear करने में आम तौर पे 15-20 मिनट लगेंगे.गलत उत्तर आपकी memory और mind से आयेंगे . लेकिन जब आपको सही उत्तर मिल जायेगा , आपको अहसास होगा कि यह उत्तर किसी बिलकुल ही अलग जगह से आ रहा है .

वो लोग जो अपनी जड़े जागरूकता के बिलकुल निचले स्तर पर जमा चुके हैं , उन्हें सभी गलत उत्तर निकालने में काफी वक़्त लगेगा , शायद एक घंटे से भी ज्यादा . लेकिन यदि आप , 100, 200 या 500 उत्तर के बाद भी लगे रहेंगे तो आपको वो उत्तर मिल जायेगा जो आपकी भावनाओं को बढ़ा देगा , जो आपको रुला देगा .यदि आपने पहले कभी ये नहीं किया है तो शायद ये आपको बहुत मूर्खतापूर्ण लगे . लगने दीजिये पर इसे करिए ज़रूर .

आप जैसे -जैसे इस प्रोसेस से गुजरेंगे , आपके कुछ उत्तर बहुत एक जैसे लगेंगे , आप चाहें तो पुराने उत्तर दुबारा भी लिख सकते हैं . आप अचानक एक नयी दिशा में सोच सकते हैं और 10-20 नए उत्तर भी लिख सकते हैं . That’s OK. आपके दिमाग में जो उत्तर आये आप वो लिख सकते हैं बशर्ते आप लिखना चालू रखिये .

इस दौरान एक समय ऐसा भी आएगा ( लगभग 50-100 answers के बाद ) जब आप quit करना चाहें , और आप खुद को उस उत्तर तक पहुचते ना देख प् रहे हों . आप को ऐसा लग सकता है कि आप किसी बहाने से उठ कर कुछ और करने लगें . ये normal है . इस अवरोध को पार कीजिये , और बस लिखते रहिये . अवरोध का अहसास कुछ देर में ख़तम हो जायेगा .

शायद आपको बीच में कुछ ऐसे उत्तर मिलें जो आपको थोडा emotional कर दें , पर वो आपको रुला ना पाएं — ऐसे answers को highlight करते हुए आगे बढिए , ताकि बाद में आप इनपर वापस आकर नए संयोग बना सकें . हर एक उत्तर आपके purpose के एक हिस्से को दर्शाता है , पर खुद में वो पूर्ण नहीं है . जब आपको ऐसे उत्तर मिलना शुरू हो जायें तो इसका मतलब है कि आप warm-up हो रहे हैं . बस आगे बढ़ते रहिये .

यह ज़रूरी है कि आप इसे अकेले बिना किसी रूकावट के करिएँ .यदि आप नास्तिक हैं तो आप इस उत्तर से शुरआत कर सकते है कि , “ मेरे जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है ,” या “ जीवन निरर्थक है ,’ और वहां से आगे बढिए , यदि आप लगे रहेंगे तो आपको उत्तर ज़रूर मिलेगा .

जब मैंने यह exercise की तो मुझे लगभग 25 मिनट लगे , और मैं अपने final answer तक 106 वें step में पहुंचा . उत्तर के कुछ parts ( जब मैं थोडा emotional हो गया ) मुझे step no. 17,39 और 53 में मिले .और सबसे ज्यादा step 100-106 में मुझे अपना answer मिला और refine होता गया .. मुझे step 55-60 के आस – पास बहुत अवरोध मह्शूश हुआ , लगा कि मैं ये छोड़ के कुछ और करूँ , लगा कि ये process fail हो जायेगा , मैंने काफी impatient और irritating feel किया . Step no. 80 के बाद मैंने 2 मिनट का break ले लिया , आँखे बंद कर के थोडा relax किया ,अपने mind को clear किया और इस बात पर focus किया कि मेरी intention जवाब पाने की है . –ये मददगार साबित हुआ क्योंकि break के बाद मुझे और भी clear answers मिलने लगे .

Here was my final answer: to live consciously and courageously, to resonate with love and compassion, to awaken the great spirits within others, and to leave this world in peace.

मेरा final answer था : जागरूकता और साहस के साथ जीवन जीना ,प्रेम और दया को अपनाना , दूसरों के अन्दर की महान आत्माओं को जगाना , और इस दुनिया को शांतिमय बनाकर छोड़ना.

जब आपको अपना उत्तर मिल जायेगा कि आप यहाँ क्यों हैं , तब आप feel करेंगे की वो आपके अंत -मन को छू रहा है . वो शब्द आपको energetic लगेंगे , और आप जब भी उन्हें पढेंगे तो आप उस energy को feel करेंगे .

उद्देश्य को जान लेना आसान है . कठिन तो यह है कि उसे हर रोज़ अपने साथ रखना और खुद पर काम करना कि एक दिन आप खुद वो उद्देश्य बन जायें .

अगर आप यह पूछना चाहते हैं कि यह process काम क्यों करता है तो आप पहले इस question को तब तक side में रख दीजिये जब तक आप इस excercise को सफलतापूर्वक complete नहीं कर लेते . और जब आप ये करलेंगे तो शायद आपके पास अपना खुद का एक जवाब होगा कि ये काम क्यों करता है . यदि आप 10 ऐसे लोगों से ( जिन्होंने इस process को successfully complete कर लिया है ) येही प्रश्न करें तो ज्यादा chance है कि आपको दस अलग -अलग उत्तर मिलेंगे , जो उनके अपने belief system के हिसाब से होगा , और हर एक में सच्चाई कि अपनी ही छवि होगी .

जाहिर है कि अगर आप final answer आने से पहले ही quit कर गए तो ये process आपके लिए काम नहीं करेगा . मेरा अनुमान है कि 80-90% लोगों को उत्तर 1 घंटे के अन्दर मिल जायेगा . अगर आप अपनी धारणाओं में बहुत ही ज्यादा उलझे हुए हैं तो शायद आपको 5 sessions लगें और कुल 3 घंटे का वक़्त लगे , पर मुझे संदेह है कि ऐसे व्यक्ति पहले ही quit कर जायेंगे ( शायद पहले 15 मिनट में ) या फिर वो इस attempt ही ना करें . लेकिन आप इस blog को पढने के प्रति आकर्षित हुए हैं ( और अभी तक इस अपने life से बन करने के बारे में नहीं सोचा है ), तो शायद ही आप इस group को belong करें .

निवेदन : यदि यह लेख आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया कृपया comment के माध्यम से मुझे ज़रूर बताएं.

Post inspired by : http://www.achhikhabar.com/ (Lots of thanks to AKC & Mr. Gopal Mishra)
Post main source :: http://www.stevepavlina.com/blog/2011/06/living-your-life-purpose/ (Also Lots of thanks to Mr.Pavlina)

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जज्बे को सलामः 21 साल की उम्र में जीत लिए 186 मेडल ~ Slamः determination to win 186 medals at the age of 21 !!

kmsraj51 की कलम से …..
PEN KMSRAJ51-PEN

==> 21 साल की उम्र में जीत लिए 186 मेडल

pooja-chaurasiPooja-Chaurasi

परिवार में बहनें बेहतर दोस्त होती हैं, लेकिन मेरी बहन तो फरिश्ता है। इसलिए इस वुमन डे पर मैं अपनी बहन पूजा चौरसिया का नाम नॉमिनेट करना चाहता हूं। जो इंटरनेशनल टाइटल जीतने वाली पहली भारतीय महिला ट्रायएथलीट है। पूजा के खेल सफर की शुरुआत सन 2002 में स्वीमिंग से हुई। उस समय उसकी उम्र मात्र 9 साल थी। बचपन से ही पूजा का सपना गोल्ड मेडल जीतने का था। उसके जुनून और प्रयासों को देखते हुए इंडियन ट्रायथलान फेडरेशन (आईटीएफ) ने उसे ट्रायथलान जूनियर स्क्वैड कैंप 2004 के लिए सेलेक्ट किया।

ट्रायथलान एक ऐसी दौड़ स्पर्धा है, जिसमें प्रतियोगी को एक के बाद एक होने वाली तीनों प्रतियोगिताओं – तैराकी, साइकिलिंग और दौड़ में हिस्सा लेना होता है। पूजा हमेशा से ही ट्रायथलान में हिस्सा लेने की इच्छुक थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। दरसअल खेल के ये तीनों प्रारूपों की तैयारियों में काफी खर्च आता है।

सन 2006 में जब उसने नेशनल एक्वाथलन चैंपियनशिप में बड़ी लीड के साथ गोल्ड मेडल जीता तो आईटीएफ ने उसे ट्रायथलान में हिस्सा लेने का मौका दिया। पूजा की किस्मत ने इस अवसर पर उसका साथ दिया। हालांकि, ट्रॉयथलान प्रतियोगिता के लिए उसकी प्रैक्टिस ठीक नहीं थी। साइक्लिंग के लिए उसके पास बाइक भी नहीं थी। लेकिन उसने एक किराए की साधारण सी साइकिल से ट्रायथलान में पहला गोल्ड मेडल जीतते हुए सबको चौंकाकर रख दिया।

पूजा के इस हैरतअंगेज परफॉरमेंस को देखते हुए दो महीने बाद ही गुजरात स्टेट ट्रॉयथलान एसोसिएशन से उसे सन 2007 में असम में आयोजित होने वाले 33वें नेशनल गेम्स में भाग लेने का मौका दिया।

नेशनल गेम्स की तैयारी के लिए हमने उसे 10 हजार रुपए एक साइकिल खरीद कर दी। असम में अन्य प्रतियोगी उसकी साधारण सी साइकिल को देखकर उसका खूब मजाक उड़ाया करते थे। क्योंकि उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक से बढ़कर एक महंगी साइकिल थीं, जिनकी कीमत 1.5 लाख रुपए से भी ऊपर की थी। यह सब देखकर पूजा शुरुआत में अपसेट भी होने लगी थी। अंतत: उसने सारी बातों को दरकिनार करते हुए अपना मन प्रैक्टिस में लगाया। वह जानती थी कि ईश्वर कोशिश करने वालों को ही सफलता प्रदान करता है। पूजा ने यहां भी इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल जीतकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया।

यह गौरव न सिर्फ पूजा को प्राप्त हुआ, बल्कि गुजरात राज्य के इतिहास में भी पहला मौका था, जब वहां के किसी प्रतियोगी ने ट्रॉयथलान में पहला गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

इन सफलताओं के बाद आईटीएफ ने चीन में आयोजित होने वाले एशियन चैंपियनशिप के लिए पूजा का सेलेक्शन किया। इसके बाद पूजा ने कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और देश के लिए अनेकों मेडल्स भी जीते।

हालांकि, उसके पास अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड की साइकिल नहीं थी, जिसके चलते उसे अनेकों जगह परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। इसी बीच गुजरात के एक स्थानीय बिजनेसमैन राजन शाह ने पूजा के लिए स्पेशल बाइक खरीदने में मदद की। पूजा की उपलब्धियों को देखते हुए सन् 2009 में राजन शाह व गुजरात सरकार की मदद से पूजा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड की साइकिल खरीदी गई।

मैं जब भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से ऊब जाता था या कभी निराश होता तो पूजा ही मुझे प्रोत्साहित करती। ट्रॉयथलान स्पर्धा के लिए रोजाना की 6 घंटों की प्रैक्टिस के बाद भी वह मेरे और अपनी एमएससी की पढ़ाई के लिए समय निकाल लिया करती है।

अब तक पूजा 4 अंतरराष्ट्रीय, 28 राष्ट्रीय स्तर के मेडल्स के साथ 186 मेडल्स जीत चुकी है। इस दौरान उसने जीवन में कई बार जानलेवा खतरों का भी सामना किया और कई बार घायल भी हुई, लेकिन उसने कभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी। उसके जीवन में अनेकों बाधाएं आईं, लेकिन वे उसे कमजोर नहीं कर सकीं। इसलिए इस वुमन डे पर मैं अपनी बहन को दिल से बधाई देता हूं। मुझे उसका भाई होने का गर्व है।

note::- This post source by : http://www.bhaskar.com/article-hf/WD-pooja-chaurasi-story-for-woman-pride-award-4539919-NOR.html


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काश माँ आज जिंदा होती !!

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ काश माँ आज जिंदा होती। ϒ

कुछ बरस पहले हमारी माँ आज ही के दिन साथ छोड़ चली गयी थी। आज उनकी बहुत याद आती है और जीवन की ये कमी कभी पूरी ना होगी।

अपनी पूजनीय माँ को समर्पित,

काश माँ आज जिंदा होती।
काश मेरी माँ जिंदा होती।

सुख-दुख में साथ होती।
कुछ कहता उससे,
कुछ उसकी सुनता।

कोई अरमान अधूरा ना रहता।
दुनिया में मेरी भी बात होती।

काश माँ आज जिंदा होती।
माँ तू क्या गयी…
मेरी जान ही गयी।

अब फ़र्ज़ निभाने को जीता हूँ।
कब दिन निकले कब रात होती।

काश माँ आज जिंदा होती।
माँ से अच्छा कोई नहीं।

मतलब के बाकी यार।
जरूरत पड़े आये सब पास।

रिश्तों में कोई मिठास ना होती।
काश माँ आज जिंदा होती।

मालिक नहीं देखा हमने।
माँ में रब ही देखा है।

जीना-चलना माँ सिखाती।
माँ ईश्वर जैसी ही है होती।
काश माँ आज जिंदा होती।

♦ Ravinder Ravi ‘Sagar’ ♦
I am grateful to Ravinder Ravi ‘Sagar’ for sharing this inspirational poetry.

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत ?

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत ? ϒ
morning yoga

Early to bed and early to rise makes a man healthy wealthy and wise

Hi friends,

हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी ना कभी ये कोशिश ज़रूर की होगी कि रोज़ सुबह जल्दी उठा जाये. हो सकता है कि आपमें से कुछ लोग कामयाब भी हुए हों, पर अगर majority की बात की जाये तो वो ऐसी आदत डालने में सफल नहीं हो पाते. लेकिन आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ इस पढने के बाद आपकी सफलता की probability निश्चित रूप से बढ़ जाएगी. यह article इस विषय पर दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़े गए लेखों में से एक का Hindi Translation है. इसे Mr. Steve Pavlina ने लिखा है . इसका title है “How to become an early riser.“. ये बताना चाहूँगा कि इन्ही के द्वारा लिखे गए लेख ”20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य ” का Hindi version इस ब्लॉग पर सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखों में से एक है.

तो आइये जानें कि हम कैसे डाल सकते हैं सुबह जल्दी उठने की आदत.

कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत?

It is well to be up before daybreak, for such habits contribute to health, wealth, and wisdom.
-Aristotle

सूर्योदय होने से पहले उठाना अच्छा होता है , ऐसी आदत आपको स्वस्थ , समृद्ध और बुद्धिमान बनती है .

-अरस्तु

सुबह उठने वाले लोग पैदाईशी ऐसे होते हैं या ऐसा बना जा सकता है ? मेरे case में तो निश्चित रूप से मैं ऐसा बना हूँ . जब मैं बीस एक साल का था तब शायद ही कभी midnight से पहले बिस्तर पे जाता था . और मैं लगभग हमेशा ही देर से सोता था. और अक्सर मेरी गतिविधियाँ दोपहर से शुरू होती थीं .

पर कुछ समय बाद मैं सुबह उठने और successful होने के बीच के गहरे सम्बन्ध को ignore नहीं कर पाया , अपनी life में भी . उन गिने – चुने अवसरों पर जब भी मैं जल्दी उठा हूँ तो मैंने पाया है कि मेरी productivity लगभग हमेशा ही ज्यादा रही है , सिर्फ सुबह के वक़्त ही नहीं बल्कि पूरे दिन . और मुझे खुद अच्छा होने का एहसास भी हुआ है . तो एक proactive goal-achiever होने के नाते मैंने सुबह उठने की आदत डालने का फैसला किया . मैंने अपनी alarm clock 5 am पर सेट कर दी …

— और अगली सुबह मैं दोपहर से just पहले उठा .

ह्म्म्म…………

मैंने फिर कई बार कोशिश की , पर कुछ फायदा नहीं हुआ .मुझे लगा कि शायद मैं सुबह उठने वाली gene के बिना ही पैदा हुआ हूँ . जब भी मेरा alarm बजता तो मेरे मन में पहला ख्याल यह आता कि मैं उस शोर को बंद करूँ और सोने चला जून . कई सालों तक मैं ऐसा ही करता रहा , पर एक दिन मेरे हाथ एक sleep research लगी जिससे मैंने जाना कि मैं इस problem को गलत तरीके से solve कर रहा था . और जब मैंने ये ideas apply कीं तो मैं निरंतर सुबह उठने में कामयाब होने लगा .

गलत strategy के साथ सुबह उठने की आदत डालना मुश्किल है पर सही strategy के साथ ऐसा करना अपेक्षाकृत आसान है .

सबसे common गलत strategy है कि आप यह सोचते हैं कि यदि सुबह जल्दी उठाना है तो बिस्तर पर जल्दी जाना सही रहेगा . तो आप देखते हैं कि आप कितने घंटे की नीद लेते हैं , और फिर सभी चीजों को कुछ गहनते पहले खिसका देते हैं . यदि आप अभी midnight से सुबह 8 बजे तक सोते हैं तो अब आप decide करते हैं कि 10pm पर सोने जायेंगे और 6am पर उठेंगे . सुनने में तर्कसंगत लगता है पर ज्यदातर ये तरीका काम नहीं करता .

ऐसा लगता है कि sleep patterns को ले के दो विचारधाराएं हैं . एक है कि आप हर रोज़ एक ही वक़्त पर सोइए और उठिए . ये ऐसा है जैसे कि दोनों तरफ alarm clock लगी हो —आप हर रात उतने ही घंटे सोने का प्रयास करते हैं . आधुनिक समाज में जीने के लिए यह व्यवहारिक लगता है . हमें अपनी योजना का सही अनुमान होना चाहिए . और हमें पर्याप्त आराम भी चाहिए .

दूसरी विचारधारा कहती है कि आप अपने शरीर की ज़रुरत को सुनिए और जब आप थक जायें तो सोने चले जाइये और तब उठिए जब naturally आपकी नीद टूटे . इस approach की जड़ biology में है . हमारे शरीर को पता होना चाहिए कि हमें कितना rest चाहिए , इसलिए हमें उसे सुनना चाहिए .

Trial and error से मुझे पता चला कि दोनों ही तरीके पूरी तरह से उचित sleep patterns नहीं देते . अगर आप productivity की चिंता करते हैं तो दोनों ही तरीके गलत हैं . ये हैं उसके कारण :

यदि आप निश्चित समय पे सोते हैं तो कभी -कभी आप तब सोने चले जायेंगे जब आपको बहुत नीद ना आ रही हो . यदि आपको सोने में 5 मिनट से ज्यादा लग रहे हों तो इसका मतलब है कि आपको अभी ठीक से नीद नहीं आ रही है . आप बिस्तर पर लेटे -लेटे अपना समय बर्वाद कर रहे हैं ; सो नहीं रहे हैं . एक और problem ये है कि आप सोचते हैं कि आपको हर रोज़ उठने ही घंटे की नीद चाहिए , जो कि गलत है . आपको हर दिन एक बराबर नीद की ज़रुरत नहीं होती .

यदि आप उतना सोते हैं जितना की आपकी body आपसे कहती है तो शायद आपको जितना सोना चाहिए उससे ज्यादा सोएंगे —कई cases में कहीं ज्यादा , हर हफ्ते 10-15 घंटे ज्यदा ( एक पूरे waking-day के बराबर ) ज्यादातर लोग जो ऐसे सोते हैं वो हर दिन 8+ hrs सोते हैं , जो आमतौर पर बहुत ज्यादा है . और यदि आप रोज़ अलग -अलग समय पर उठ रहे हैं तो आप सुबह की planning सही से नहीं कर पाएंगे . और चूँकि कभी -कभार हमारी natural rhythm घडी से मैच नहीं करती तो आप पायंगे कि आपका सोने का समय आगे बढ़ता जा रहा है .

मेरे लिए दोनों approaches को combine करना कारगर साबित हुआ . ये बहुत आसान है , और बहुत से लोग जो सुबह जल्दी उठते हैं , वो बिना जाने ही ऐसा करते हैं , पर मेरे लिए तो यह एक mental-breakthrough था . Solution ये था की बिस्तर पर तब जाओ जब नीद आ रही हो ( तभी जब नीद आ रही हो ) और एक निश्चित समय पर उठो ( हफ्ते के सातों दिन ). इसलिए मैं हर रोज़ एक ही समय पर उठता हूँ ( in my case 5 am) पर मैं हर रोज़ अलग -अलग समय पर सोने जाता हूँ .

मैं बिस्तर पर तब जाता हूँ जब मुझे बहुत तेज नीद आ रही हो . मेरा sleepiness test ये है कि यदि मैं कोई किताब बिना ऊँघे एक -दो पन्ने नहीं पढ़ पाता हूँ तो इसका मतलब है कि मै बिस्तर पर जाने के लिए तैयार हूँ .ज्यादातर मैं बिस्तर पे जाने के 3 मिनट के अन्दर सो जाता हूँ . मैं आराम से लेटता हूँ और मुझे तुरंत ही नीद आ जाति है . कभी कभार मैं 9:30 पे सोने चला जाता हूँ और कई बार midnight तक जगा रहता हूँ . अधिकतर मैं 10 – 11 pm के बीच सोने चला जाता हूँ .अगर मुझे नीद नहीं आ रही होती तो मैं तब तक जगा रहता हूँ जब तक मेरी आँखें बंद ना होने लगे . इस वक़्त पढना एक बहुत ही अच्छी activity है , क्योंकि यह जानना आसान होता है कि अभी और पढना चाहिए या अब सो जाना चाहिए .

जब हर दिन मेरा alarm बजता है तो पहले मैं उसे बंद करता हूँ , कुछ सेकंड्स तक stretch करता हूँ , और उठ कर बैठ जाता हूँ . मैं इसके बारे में सोचता नहीं . मैंने ये सीखा है कि मैं उठने में जितनी देर लगाऊंगा ,उतना अधिक chance है कि मैं फिर से सोने की कोशिश करूँगा .इसलिए एक बार alarm बंद हो जाने के बाद मैं अपने दिमाग में ये वार्तालाप नहीं होने देता कि और देर तक सोने के क्या फायदे हैं . यदि मैं सोना भी चाहता हूँ , तो भी मैं तुरंत उठ जाता हूँ .

इस approach को कुछ दिन तक use करने के बाद मैंने पाया कि मेरे sleep patterns एक natural rhythm में सेट हो गए हैं . अगर किसी रात मुझे बहुत कम नीद मिलती तो अगली रात अपने आप ही मुझे जल्दी नीद आ जाती और मैं ज्यदा सोता . और जब मुझमे खूब energy होती और मैं थका नहीं होता तो कम सोता . मेरी बॉडी ने ये समझ लिया कि कब मुझे सोने के लिए भेजना है क्योंकि उसे पता है कि मैं हमेशा उसी वक़्त पे उठूँगा और उसमे कोई समझौता नहीं किया जा सकता .

इसका एक असर ये हुआ कि मैं अब हर रात लगभग 90 मिनट कम सोता ,पर मुझे feel होता कि मैंने पहले से ज्यादा रेस्ट लिया है . मैं अब जितनी देर तक बिस्तर पर होता करीब उतने देर तक सो रहा होता .

मैंने पढ़ा है कि ज्यादातर अनिद्रा रोगी वो लोग होते हैं जो नीद आने से पहले ही बिस्तर पर चले जाते हैं . यदि आपको नीद ना आ रही हो और ऐसा लगता हो कि आपको जल्द ही नीद नहीं आ जाएगी , तो उठ जाइये और कुछ देर तक जगे रहिये . नीद को तब तक रोकिये जब तक आपकी body ऐसे hormones ना छोड़ने लगे जिससे आपको नीद ना आ जाये.अगर आप तभी bed पे जाएँ जब आपको नीद आ रही हो और एक निश्चित समय उठें तो आप insomnia का इलाज कर पाएंगे .पहली रात आप देर तक जागेंगे , पर बिस्तर पर जाते ही आपको नीद आ जाएगी . .पहले दिन आप थके हुए हो सकते हैं क्योंकि आप देर से सोये और बहुत जल्दी उठ गए , पर आप पूरे दिन काम करते रहेंगे और दूसरी रात जल्दी सोने चले जायेंगे .कुछ दिनों बाद आप एक ऐसे pattern में settle हो जायेंगे जिसमे आप लगभग एक ही समय बिस्तर पर जायंगे और तुरंत सो जायंगे .

इसलिए यदि आप जल्दी उठाना चाहते हों तो ( या अपने sleep pattern को control करना चाहते हों ), तो इस try करिए : सोने तभी जाइये जब आपको सच -मुच बहुत नीद आ रही हो और हर दिन एक निश्चित समय पर उठिए .

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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कब तक करते रहेंगे हेल्थ को अनदेखा ?


kmsraj51 की कलम से …..
PEN KMSRAJ51-PEN


Helalth-is-Wealth-150x150Do you really believe health is wealth?


Friends कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिसे हम जानते हैं कि हमें करना चाहिए पर फिर भी हम नहीं करते . उन्ही में से एक है . “अपनी सेहत पर ध्यान देना .”

हम कहते हैं “Health comes first” , पर हकीकत में हम इसे last preference देते हैं .
हम कहते हैं “Health is wealth”, पर जीते ऐसे हैं मानो “Wealth is health”

हममें से 95% लोग ऐसा ही करते हैं ; और मैं भी उन्ही 95% लोगों में हूँ या कह सकते हैं कि तीन दिन पहले तक था ..जो अपनी health पर ध्यान नहीं देते …. पर अब मैं 5% ध्यान देने वालों के group में jump करना चाहता हूँ . शुरुआत तीन दिन पहले की है , पिछले तीन दिनों से मैं सुबह उठ कर exercise कर रहा हूँ … इसे जारी रख पाऊँ ऐसी उम्मीद करता हूँ , और आज publicly इस बारे में बता कर शायद मैं इस दिशा में और भी मजबूती से बढ़ पाउँगा … let’s see!!!

और ऐसा नहीं है कि ये पहली बार शुरू किया है … पहले भी कई शुरुआत कर चुके हैं पर कुछ दिनों बाद आप जानते ही हैं क्या होता है …. और कैसे नहीं जानेंगे आपके साथ भी तो यही होता आया है … 🙂

पर मैं इस बार पीछे नहीं हटने वाला , अपनी daily routine में मैं exercise को ज़रूर include करूँगा और तब तक करूँगा जब तक ये brush करने या रोज नहाने जितना आम ना हो जाये …मेरी habit में ना आ जाये …

तो इसके लिए मैं क्या करने वाला हूँ ; इस बारे में बताता हूँ पर उससे पहले आइये समझने की कोशिश करते हैं कि हम अपनी health को ignore क्यों करते रहते हैं :

क्योंकि हमें प्यास लगने पे कुआँ खोदने की आदत है :

अधिकतर लोग बिजली बिल / टेलीफोन बिल कब जमा करते हैं ….last day पर … जब तक काम सर पर नही आ जाता हम उसे टालते रहते हैं … और यही health के साथ भी होता है ….. चूँकि अभी हमारी health normal है , इसलिए हमे इस और ध्यान देने की कोई urgency नहीं लगती , लगता है सब ठीक ही तो है , फिर अभी walk पे जाने की , jogging करने की क्या जल्दी है कुछ दिन बाद शुरू कर सकते हैं … but as we all know ऐसा हम कई सालों से सोचते आ रहे हैं, पर करते कभी नहीं .

हम सोचते हैं बुरी चीजें दूसरों के साथ ही हो सकती हैं :

Health के case में हम अपना बुरा कभी नहीं सोचते …. हाँ और चीजों में खूब बुरा सोच लेते हैं पर सेहत के मामले में हम अलग हैं …य़े जानते हुए भी की करोड़ों Indian diabetic हैं हम कभी नहीं सोचते की हमारी lazy lifestyle की वजह से हमें भी diabetes हो सकता है … हम इस ओर गलती से भी ध्यान नहीं देते कि अगर लाखों लोगों को young age में ही दिल की बीमारी हो रही है तो कल को हमें भी हो सकती है …मानो हम man नहीं superman हों !!!

हम सोचते हैं कि बाद में भी ध्यान दे दिया तो काम चल जायेगा :

पर ऐसा नहीं है , पहले तो ये “बाद ” जल्दी आता नहीं है , और दूसरा जिस वक़्त हम health को postpone करते जाते हैं उसी वक़्त हम bad health या बीमारी को advance करते जाते हैं . यानि हम खुद को समझा तो लेते हैं कि बाद में cover कर लेंगे पर जिस तरह school में शुरू से पढाई से जी चुराने वाला student कभी अंत में पढ़ कर 100% score नहीं कर पाटा , उसी तरह कोई इंसान सालों तक ignore करने के बाद अंत में ध्यान देने पर 100% health नहीं पा सकता , इसलिए हमे आज से ही इस direction में ध्यान देना चाहिए .

क्योंकि हमारा environment ऐसा है :

अगर आप सुबह walk पर जाएं तो आपको ज्यादातर old age people, या मोटापे से परेशान लोग ही दिखेंगे …ये वो हैं जिन्हे प्यास लग चुकी है , उनकी life में health issues आ चुके हैं …पर जो young हैं …अभी healthy हैं वो नदारद हैं … हमारा कोई दोस्त jogging पे नहीं जाता , gym के दर्शन नहीं करता इसलिए अगर हम नहीं करते तो क्या बुरा करते हैं ….friends, health पर ध्यान न देना दरअसल एक बीमारी है पर चूँकि 95% लोग बीमार हैं इसलिए इसे ही normal life मान लिया गया है …. पर as you know सच्चाई कुछ और ही है !

Well, अब मैं अपना plan बताता हूँ :

बड़ा simple है ; मैंने decide किया है कि मैं सुबह fresh होने के बाद का 30 minute exercise को दूंगा .

फिर चाहे मैं 6 बजे उठूँ या 9 बजे …ज़ब भी उठूंगा 30 minute health को दूंगा …. हम ब्रश के साथ भी तो यही करते हैं , isn’t it? क्या कोई ऐसा भी है जो देर से उठने पर brush नहीं करता …. सभी करते हैं … जब उठते हैं तब करते हैं … और वही मैं exercise के साथ करूँगा ….

इसमें क्या challenges आ सकते हैं ?

इससे मैं office के लिए late हो सकता हूँ …. मेरी आज plan की गयी blog post कल के लिए postpone हो सकती है …अखबार पढ़ने में gap हो सकता है …but let it be… हम हमेशा कहते हैं सेहत से बढ़कर कुछ नहीं , सेहत है तो दौलत है , and all that gyan … पर दिक्कत ये है कि सिर्फ कहते हैं practically कभी apply नहीं करते , इस बार मैं करने जा रहा हूँ …. मैं अपने आसपास मौजूद बीमार लोगों को देख रहा हूँ और मैंने इस बार अंदर से महसूस किया है कि “healthy” रहने से बड़ा और कोई asset हो ही नहीं सकता …

एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ …

एक सेठ था ,वो दिन- रात business बढ़ाने में लगा रहता था , उसका goal था कि उसे शहर का सबसे अमीर आदमी बनना है . धीरे -धीरे उसने ये goal पूरा भी कर लिया , इस कामयाबी की ख़ुशी में उसने एक शानदार घर बनवाया। गृह प्रवेश के दिन उसने एक बहुत बड़ी पार्टी दी और जब सारे मेहमान चले गए तो वो अपने कमरे में सोने के लिए गया .

वो जैसे ही बिस्तर पर लेटा एक आवाज़ उसके कानो में पड़ी ,

” मैं तुम्हारी आत्मा हूँ … और अब मैं तुम्हारा शरीर छोड़ कर जा रही हूँ !!”

सेठ सकते में आ गया और बोला , ” अरे तुम ऐस नहीं कर सकती, तुम चली जाओगी तो मैं तो मर जाऊँगा …देखो मैंने कितनी बड़ी कामयाबी हांसिल की है… तुम्हारे लिए करोड़ों रूपये का घर भी बनवाया है … इतनी सुख -सुविधाएं तुम्हे कहीं नहीं मिलेंगी … यहाँ से मत जाओ …”

आत्मा बोली , ” मेरा घर तो तुम्हारा शरीर था …. पर करोड़ों का घर बनवाने के चक्कर में तुमने इस अमूल्य शरीर का ही नाश कर डाला ,…तुम ठीक से चल नहीं पाते …ऱात को तुम्हे नींद नहीं आती … तुम्हारा दिल भी कमजोर हो चुका है …. तनाव की वजह से ना जाने और कितनी बीमारियों का घर बन चुका है तुम्हारा शरीर …… तुम ही बताओ क्या तुम ऐसे किसी घर में रहना चाहोगे जहाँ चारो तरफ गंदगी हो … जिसकी छत टपक रही हो …. जिसके खिड़की -दरवाजे टूटे हों …., नहीं चाहोगे ना !!! …. इसलिए मैं भी ऐसी जगह नहीं रह सकती ….”

और ऐसा कहते हुए आत्मा सेठ के शरीर से निकल गयी …और सेठ की मृत्यु हो गयी .

Friends, ये कहानी बहुत से लोगों की हकीकत है … मैं ये नहीं कहता की आप अपने goals pursue मत करिये , पर मैं ये ज़रूर कहूंगा कि जो भी करिये Health को सबसे ऊपर रखिये …. नहीं तो सेठ की तरह goal achieve कर लेने के बाद भी अपनी success को enjoy नहीं कर पाएंगे .

अंत में Swami Vivekananda के एक quote से अपनी बात ख़तम करना चाहूंगा …

“You will be nearer to heaven through football than through the study of the Gita.
तुम गीता का अध्ययन करने के बजाये फ़ुटबाल के जरिये स्वर्ग के ज्यादा निकट होगे .”

… गीता पढ़िए …. पर फ़ुटबाल खेलना मत भूलिए …. अपने goal के पीछे दौड़िये पर अपनी health को पीछे मत छोड़िये ….

All the best! 🙂

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7 Habits जो बना सकती हैं आपको Super Successful !!


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7-Habits-of-Highly-Effective-People-Hindi7 Habits of Highly Effective People

7 Habits जो बना सकतीं हैं आपको Super Successful

आपकी ज़िन्दगी बस यूँ ही नहीं घट जाती. चाहे आप जानते हों या नहीं , ये आपही के द्वारा डिजाईन की जाती है. आखिरकार आप ही अपने विकल्प चुनते हैं. आप खुशियाँ चुनते हैं . आप दुःख चुनते हैं.आप निश्चितता चुनते हैं. आप अपनी अनिश्चितता चुनते हैं.आप अपनी सफलता चुनते हैं. आप अपनी असफलता चुनते हैं.आप साहस चुनते हैं.आप डर चुनते हैं.इतना याद रखिये कि हर एक क्षण, हर एक परिस्थिति आपको एक नया विकल्प देती है.और ऐसे में आपके पास हमेशा ये opportunity होती है कि आप चीजों को अलग तेरीके से करें और अपने लिए और positive result produce करें.

Habit 1 : Be Proactive / प्रोएक्टिव बनिए

Proactive होने का मतलब है कि अपनी life के लिए खुद ज़िम्मेदार बनना. आप हर चीज केलिए अपने parents या grandparents को नही blame कर सकते . Proactive लोग इस बात को समझते हैं कि वो “response-able” हैं . वो अपने आचरण के लिए जेनेटिक्स , परिस्थितियों, या परिवेष को दोष नहीं देते हैं.उन्हें पता होताहै कि वो अपना व्यवहार खुद चुनते हैं. वहीँ दूसरी तरफ जो लोग reactive होते हैं वो ज्यादातर अपने भौतिक वातावरण से प्रभावितहोते हैं. वो अपने behaviour के लिए बाहरी चीजों को दोष देते हैं. अगर मौसम अच्छा है, तोउन्हें अच्छा लगता है.और अगर नहीं है तो यह उनके attitude और performance को प्रभावित करता है, और वो मौसम को दोष देते हैं. सभी बाहरी ताकतें एक उत्तेजना की तरह काम करती हैं , जिन पर हम react करते हैं. इसी उत्तेजना और आप उसपर जो प्रतिक्रिया करते हैं के बीच में आपकी सबसे बड़ी ताकत छिपी होती है- और वो होती है इस बात कि स्वतंत्रता कि आप अपनी प्रतिक्रिया का चयन स्वयम कर सकते हैं. एक बेहद महत्त्वपूर्ण चीज होती है कि आप इस बात का चुनाव कर सकते हैं कि आप क्या बोलते हैं.आप जो भाषा प्रयोग करते हैं वो इस बात को indicate करती है कि आप खुद को कैसे देखते हैं.एक proactive व्यक्ति proactive भाषा का प्रयोग करता है.–मैं कर सकता हूँ, मैं करूँगा, etc. एक reactive व्यक्ति reactive भाषा का प्रयोग करता है- मैं नहीं कर सकता, काश अगर ऐसा होता , etc. Reactive लोग सोचते हैं कि वो जो कहते और करते हैं उसके लिए वो खुद जिम्मेदार नहीं हैं-उनके पास कोई विकल्प नहीं है.
ऐसी परिस्थितियां जिन पर बिलकुल भी नहीं या थोड़ा-बहुत control किया जा सकता है , उसपर react या चिंता करने के बजाये proactive लोग अपना time और energy ऐसी चीजों में लगाते हैं जिनको वो control कर सकें. हमारे सामने जो भी समस्याएं ,चुनतिया या अवसर होते हैं उन्हें हम दो क्षेत्रों में बाँट सकते हैं:


Circles

1)Circle of Concern ( चिंता का क्षेत्र )

2)Circle of Influence. (प्रभाव का क्षेत्र )

Proactive लोग अपना प्रयत्न Circle of Influence पर केन्द्रित करते हैं.वो ऐसी चीजों पर काम करते हैं जिनके बारे में वो कुछ कर सकते हैं: स्वास्थ्य , बच्चे , कार्य क्षेत्र कि समस्याएं. Reactive लोग अपना प्रयत्न Circle of Concern पर केन्द्रित करते हैं: देश पर ऋण , आतंकवाद, मौसम. इसबात कि जानकारी होना कि हम अपनी energy किन चीजों में खर्च करते हैं, Proactive बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

Habit 2: Begin with the End in Mind अंत को ध्यान में रख कर शुरुआत करें.

तो , आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? शायद यह सवाल थोड़ा अटपटा लगे,लेकिन आप इसके बारे में एक क्षण के लिए सोचिये. क्या आप अभी वो हैं जो आप बनना चाहते थे, जिसका सपना आपने देखा था, क्या आप वो कर रहे हैं जो आप हमेशा से करना चाहते थे. इमानदारी से सोचिये. कई बार ऐसा होता है कि लोग खुद को ऐसी जीत हांसिल करते हुए देखते हैं जो दरअसल खोखली होती हैं–ऐसी सफलता, जिसके बदले में उससे कहीं बड़ी चीजों को गवाना पड़ा. यदि आपकी सीढ़ी सही दीवार पर नहीं लगी है तो आप जो भी कदम उठाते हैं वो आपको गलत जगह पर लेकर जाता है.

Habit 2 आपके imagination या कल्पना पर आधारित है– imagination , यानि आपकी वो क्षमता जो आपको अपने दिमाग में उन चीजों को दिखा सके जो आप अभी अपनी आँखों से नहीं देख सकते. यह इस सिधांत पर आधारित है कि हर एक चीज का निर्माण दो बार होता है. पहला mental creation, और दूसरा physical creation. जिस तरह blue-print तैयार होने केबाद मकान बनता है , उसी प्रकार mental creation होने के बाद ही physical creation होती है.अगर आप खुद visualize नहीं करते हैं कि आप क्या हैं और क्या बनना चाहते हैं तो आप, आपकी life कैसी होगी इस बात का फैसला औरों पर और परिस्थितियों पर छोड़ देते हैं. Habit 2 इस बारे में है कि आप किस तरह से अपनी विशेषता को पहचानते हैं,और फिर अपनी personal, moral और ethical guidelines के अन्दर खुद को खुश रख सकते और पूर्ण कर सकते हैं.अंत को ध्यान में रख कर आरम्भ करने का अर्थ है, हर दिन ,काम या project की शुरआत एक clear vision के साथ करना कि हमारी क्या दिशा और क्या मंजिल होनी चाहिए, और फिर proactively उस काम को पूर्ण करने में लग जाना.
Habit 2 को practice मेंलाने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपना खुद का एक Personal Mission Statement बनाना. इसका फोकस इस बात पर होगा कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं.ये success के लिए की गयी आपकी planning है.ये इस बात की पुष्टिकरता है कि आप कौन हैं,आपके goals को focus में रखता है, और आपके ideas को इस दुनिया में लाता है. आपका Mission Statement आपको अपनी ज़िन्दगी का leader बनाता है. आप अपना भाग्य खुद बनाते हैं, और जो सपने आपने देखे हैं उन्हें साकार करते हैं.


Habit 3 : Put First Things First प्राथमिक चीजों को वरीयता दें

एक balanced life जीने के लिए, आपको इस बात को समझना होगा कि आप इस ज़िन्दगीमें हर एक चीज नहीं कर सकते. खुद को अपनी क्षमता से अधिक कामो में व्यस्त करने की ज़रुरत नहीं है. जब ज़रूरी हो तो “ना” कहने में मत हिचकिये, और फिर अपनी important priorities पर focus कीजिये.
Habit 1 कहतीहै कि , ” आप in charge हैं .आप creator हैं”. Proactive होना आपकी अपनी choice है. Habit 2 पहले दिमाग में चीजों को visualize करने के बारे में है. अंत को ध्यान में रख कर शुरआत करना vision से सम्बंधित है. Habit 3 दूसरी creation , यानि physical creation के बारे में है. इस habit में Habit 1 और Habit 2 का समागम होता है. और यह हर समय हर क्षण होता है. यह Time Management से related कई प्रश्नों को deal करता है.

लेकिन यह सिर्फ इतना ही नहीं है. Habit 3 life management के बारे में भी है—आपका purpose, values, roles ,और priorities. “प्राथमिक चीजें” क्या हैं? प्राथमिक चीजें वह हैं , जिसको आप व्यक्तिगत रूप से सबसे मूल्यवान मानते हों. यदि आप प्राथमिक कार्यों को तरजीह देने का मतलब है कि , आप अपना समय , अपनी उर्जा Habit 2 में अपने द्वारा set की गयीं priorities पर लगा रहे हैं.

Habit 4: Think Win-Win हमेशा जीत के बारे में सोचें

Think Win-Win अच्छा होने के बारे में नहीं है, ना ही यह कोईshort-cut है. यहcharacter पर आधारित एक कोड है जो आपको बाकी लोगों सेinteract और सहयोग करने के लिए है.
हममे से ज्यादातर लोग अपना मुल्यांकन दूसरों सेcomparison और competition के आधार पर करते हैं. हम अपनी सफलता दूसरों की असफलता में देखते हैं—यानि अगर मैं जीता, तो तुम हारे, तुम जीते तो मैं हारा. इस तरह life एकzero-sum game बन जाती है. मानो एक ही रोटी हो, और अगर दूसरा बड़ा हिस्सा ले लेता है तो मुझे कम मिलेगा, और मेरी कोशिश होगी कि दूसरा अधिक ना पाए. हम सभी येgame खेलते हैं, लेकिन आप ही सोचिये कि इसमें कितना मज़ा है?
Win -Win ज़िन्दगी कोco-operation की तरह देखती है, competition कीतरह नहीं.Win-Win दिल और दिमाग की ऐसी स्थिति है जो हमेंलगातार सभी काहित सोचने के लिए प्रेरित करती है.Win-Win का अर्थ है ऐसे समझौते और समाधान जो सभी के लिए लाभप्रद और संतोषजनक हैं. इसमें सभी खाने को मिलती है, और वो काफी अच्छाtaste करती है.
एक व्यक्ति या संगठन जोWin-Win attitude के साथ समस्याओं को हल करने की कोशिश करता है उसके अन्दर तीन मुख्य बातें होती हैं:
Integrity / वफादारी :अपनेvalues, commitments औरfeelings के साथ समझौता ना करना.
Maturity / परिपक्वता : अपनेideas औरfeelings को साहस के साथ दूसरों के सामने रखना और दूसरों के विचारों और भावनाओं की भी कद्र करना.
Abundance Mentality / प्रचुरता की मानसिकता :इस बात में यकीन रखना की सभी के लिए बहुत कुछ है.
बहुत लोग either/or केterms में सोचते हैं: या तो आप अच्छे हैं या आप सख्त हैं. Win-Win में दोनों की आवश्यकता होती है. यह साहस और सूझबूझ के बीचbalance करने जैसा है.Win-Win को अपनाने के लिए आपको सिर्फ सहानभूतिपूर्ण ही नहीं बल्कि आत्मविश्वाश से लबरेज़ भी होना होगा.आपको सिर्फ विचारशील और संवेदनशील ही नहीं बल्कि बहादुर भी होना होगा.ऐसा करनाकि -courage और consideration मेंbalance स्थापित हो, यहीreal maturity है, और Win-Win के लिए बेहद ज़रूरी है.

Habit 5: Seek First to Understand, Then to Be Understood / पहले दूसरों को समझो फिर अपनी बात समझाओ.

Communication लाइफ की सबसे ज़रूरी skill है. आप अपने कई साल पढना-लिखना और बोलना सीखने में लगा देते हैं. लेकिन सुनने का क्या है? आपको ऐसी कौनसी training मिली है, जो आपको दूसरों को सुनना सीखाती है,ताकि आप सामने वाले को सच-मुच अच्छे से समझ सकें? शायद कोई नहीं? क्यों?
अगर आप ज्यादातर लोगों की तरह हैं तो शायद आप भी पहले खुद आपनी बात समझाना चाहते होंगे. और ऐसा करने में आप दुसरे व्यक्तिको पूरी तरह ignore कर देते होंगे , ऐसा दिखाते होंगे कि आप सुन रहे हैं,पर दरअसल आप बस शब्दों को सुनते हैं परउनके असली मतलब को पूरी तरह से miss कर जाते हैं.

सोचिये ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ज्यादातर लोग इस intention के साथ सुनते हैं कि उन्हें reply करना है, समझना नहीं है.आप अन्दर ही अन्दर खुद को सुनते हैं और तैयारी करते हैं कि आपको आगे क्या कहना है,क्या सवाल पूछने हैं, etc. आप जो कुछ भी सुनते हैं वो आपके life-experiences से छनकर आप तक पहुचता है.
आप जो सुनते हैं उसे अपनी आत्मकथा से तुलना कर देखते हैं कि ये सही है या गलत. और इस वजह से आप दुसरे की बात ख़तम होने से पहले ही अपने मन में एक धारणा बना लेते हैं कि अगला क्या कहना चाहता है. क्या ये वाक्य कुछ सुने-सुने से लगते है?
“अरे, मुझे पता है कि तुम कैसा feel कर रहे हो.मुझे भी ऐसा ही लगा था.” “मेरे साथ भी भी ऐसा ही हुआ था.” ” मैं तुम्हे बताता हूँ कि ऐसे वक़्तमें मैंने क्या किया था.”
चूँकि आप अपने जीवन के अनुभवों के हिसाब से ही दूसरों को सुनते हैं. आप इन चारों में से किसी एक तरीके से ज़वाब देते हैं:
Evaluating/ मूल्यांकन:पहले आप judge करते हैं उसके बाद सहमत या असहमत होते हैं.
Probing / जाँच :आप अपने हिसाब से सवाल-जवाब करते हैं.
Advising/ सलाह :आप सलाह देते हैं और उपाय सुझाते हैं.
Interpreting/ व्याख्या :आप दूसरों के मकसद और व्यवहार को अपने experience के हिसाब से analyze करते हैं.
शायदआप सोच रहे हों कि, अपनेexperience के हिसाब से किसी सेrelate करने में बुराई क्याहै?कुछsituations में ऐसा करना उचित हो सकत है, जैसे कि जब कोई आपसे आपके अनुभवों के आधार पर कुछ बतानेके लिए कहे, जब आप दोनों के बीच एकtrust कीrelationship हो. पर हमेशा ऐसा करना उचित नहीं है.

Habit 6: Synergize / ताल-मेल बैठाना

सरल शब्दों में समझें तो , “दो दिमाग एक से बेहतर हैं ” Synergize करने का अर्थ है रचनात्मक सहयोग देना. यह team-work है. यह खुले दिमाग से पुरानी समस्याओं के नए निदान ढूँढना है.

पर ये युहीं बस अपने आप ही नहीं हो जाता. यह एक process है , और उसी process से, लोग अपनेexperience और expertise को उपयोग में ला पाते हैं .अकेले की अपेक्षा वो एक साथ कहीं अच्छाresult दे पाते हैं. Synergy से हम एक साथ ऐसा बहुत कुछ खोज पाते हैं जो हमारे अकेले खोजने पर शायद ही कभी मिलता. ये वो idea है जिसमे the whole is greater than the sum of the parts. One plus one equals three, or six, or sixty–या उससे भी ज्यादा.

जब लोग आपस में इमानदारी से interact करने लगते हैं, और एक दुसरे से प्रभावित होने के लिए खुले होते हैं , तब उन्हें नयी जानकारीयाँ मिलना प्रारम्भ हो जाता है. आपस में मतभेद नए तरीकों के आविष्कार की क्षमता कई गुना बढ़ा देते हैं.

मतभेदों को महत्त्व देना synergy का मूल है. क्या आप सच-मुच लोगों के बीच जो mental, emotional, और psychological differences होते हैं, उन्हें महत्त्व देते हैं? या फिर आप ये चाहते हैं कि सभी लोग आपकी बात मान जायें ताकि आप आसानी से आगे बढ़ सकें? कई लोग एकरूपता को एकता समझ लेते हैं. आपसी मतभेदों को weakness नहीं strength के रूप में देखना चाहिए. वो हमारे जीवन में उत्साह भरते हैं.

Habit 7: Sharpen the Saw कुल्हाड़ी को तेज करें

Sharpen the Saw का मतलब है अपने सबसे बड़ी सम्पत्ति यानि खुद को सुरक्षित रखना. इसका अर्थ है अपने लिए एक प्रोग्राम डिजाईन करना जो आपके जीवन के चार क्षेत्रों physical, social/emotional, mental, and spiritual में आपका नवीनीकरण करे. नीचे ऐसी कुछ activities केexample दिए गए हैं:

 Physical / शारीरिक :अच्छा खाना, व्यायाम करना, आराम करना
 Social/Emotional /:सामजिक/भावनात्मक :औरों के ससाथ सामाजिक और अर्थपूर्ण सम्बन्ध बनाना.
 Mental / मानसिक :पढना-लिखना, सीखना , सीखना.
 Spiritual / आध्यात्मिक :प्रकृति के साथ समय बीताना , ध्यान करना, सेवा करना.

आप जैसे -जैसे हर एक क्षेत्र में खुद को सुधारेंगे, आप अपने जीवन में प्रगति और बदलाव लायेंगे.Sharpen the Saw आपको fresh रखता है ताकि आप बाकी की six habits अच्छे से practice कर सकें. ऐसा करने से आप challenges face करने की अपनी क्षमता को बढ़ा लेते हैं. बिना ऐसा किये आपका शरीर कमजोर पड़ जाता है , मस्तिष्क बुद्धिरहित हो जाता है, भावनाए ठंडी पड़ जाती हैं,स्वाभाव असंवेदनशील हो जाता है,और इंसान स्वार्थी हो जाता है. और यह एक अच्छी तस्वीर नहीं है, क्यों?

आप अच्छा feel करें , ऐसा अपने आप नहीं होता. एक balanced life जीने काअर्थ है खुद कोrenew करने के लिए ज़रूरी वक़्त निकालना.ये सब आपके ऊपरहै .आप खुद को आराम करकेrenew कर सकते हैं. या हर काम अत्यधिक करके खुद को जला सकते हैं . आप खुद को mentallyऔर spiritually प्यार कर सकते हैं , या फिर अपने well-being से बेखबर यूँ ही अपनी ज़िन्दगी बिता सकते हैं.आप अपने अन्दर जीवंत उर्जा का अनुभव कर सकते हैं या फिर टाल-मटोल कर अच्छे स्वास्थ्य और व्यायाम के फायदों को खो सकते हैं.

आप खुद को पुनर्जीवित कर सकते हैं और एक नए दिन का स्वागत शांति और सद्भावके साथ कर सकते हैं.या फिर आप उदासी के साथ उठकर दिन को गुजरते देख सकतेहैं. बस इतना याद रखिये कि हर दिन आपको खुद को renew करने का एक नया अवसरदेता है, अवसर देता है खुद को recharge करने का. बस ज़रुरत है Desire (इच्छा),Knowledge( ज्ञान)और Skills(कौशल) की.

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Post inspired by AKC. I am grateful to Mr. Gopal Mishra & AKC (http://www.achhikhabar.com/) Thanks a lot !!


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