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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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self motivation poem hindi

उठे ज्वार, भटका पनिहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ उठे ज्वार, भटका पनिहार। ♦

हृदय में ताला कहां लटकता।
मन में केवल भ्रम पलता है।
मंजिल पर नजर टिकी हुई हों।
संवाद हकीकत होता ही है।

सूख गई स्याही हो तो भी।
दिल तो एक समंदर सा है।
आश्वासन में दुनिया चलती।
आमंत्रण में केवल बेचैनी है।

शब्द बाण से आंगन मेरा,
बुरी तरह पीट रहा।
बीच गगन टिमटिमाता दीपक।
जाने कब से दिख रहा।

असह्य वेदना परिपूर्ण भावना।
जब – जब निकले।
सुहाग छोटा ज्वार बृहद दिखता।
भाव – भक्ति में खोलें।

चरण जमी मन मंगल गगन उड़े।
तो वह जीवन बोले।
मानव मन की बस यही कहानी।
लड़ कर जो ले ले।

आंगन में आने वाले अंधियारे।
दिव्य प्रकाश ले रहा किनारे।
मंगलमय मंगल मनोहर गीत।
सुमधुर सुंदर प्रकृति सहारे।

आजकल लोगों को क्या हो गया है।
आख्यान से आंसू का मर गया है।
आकांक्षा इच्छाएं अनवरत बढ़ती गई।
आबरू उतार तार साहित्य में उतर गई।

दिल में जब जब चिराग जलता है।
देवासी समाज तब बनता है।
हाउस अली उमंग नेक काम करते हैं।
अपने और पराए का ख्याल रखते हैं।

मेरे गांव आते ही वह पाषाण हो गया।
मुखड़े बारिश के ठहराव आ गया।
मकान मन मंगल ऐसा बनाए जनाब।
छप्पर में पहले से ही रिसावर आ गया।

हंस कर अपना दिन काटिए जनाब।
सुख मंगल की तरह।
मिल गया हो दिल का कोई साथी।
गर समंदर की तरह।

जब – जब देखा एक गगन नारंग का।
जाने जीवन क्यों मगन था।
यूं तो कुछ कलियां निकली अधखुली।
मुरझाई पर अद्भुत सघन थीं।

अपने मीत गीत हम गुनगुनाते रहे।
सदा आपको हम याद आते रहें।
लोग इतनी करें काम मिलकर सभी।
गीत सुंदर सदा मिलकर गाते रहें।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बहुत सारे उदाहरणों के माध्यम से कवि कहते है की कैसी भी विपरीत परिस्थिति क्यों न हो जीवन में कभी भी दुखी होकर बैठ न जाना। कोई भी दुःख लंबे वक्त के लिए नहीं ठहर सकता आपके जीवन में, इसलिए सदैव ही मुस्कुराते रहे। धैर्य से कार्य करते हुए आगे बढ़ते रहे जीवन में।

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यह कविता (उठे ज्वार, भटका पनिहार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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भाव पुराना नहीं होता।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ भाव पुराना नहीं होता। ♦

कवि का निरव होना स्वाभाविक नहीं।
वह अपने लिए लिखे यह भाता नहीं।
नए आविष्कार पुराने को दबाते हैं सही।
हृदय शब्द भाव पुरानी कभी होते नहीं।

ज्ञान से उपजे भाव का प्रचार करना पड़ता है।
ज्ञान में सदा परिवर्तन आता जाता रहता है।
साहित्य सामाजिक आवश्यकता की पूर्ति करता है।
सर्व कालीन साहित्य सदा अक्षुण्ण रहता है।

जो उच्च प्रकाश दे साहित्य कहलाता है।
अपने लिए लिखें भाव निरर्थक कहा जाता है।
हृदय की भाषा अपनी रचना कहलाती है।
विस्तृत सीमा तक वह फाइल दी जाती है।

दुनिया को अधिक अनुभव कविता कराती है।
भाओं के भीतर वह छुपी प्रेरणा जगाती है।
अनंत काल तक अनंत हृदय को छू जाती है।
विविध चित्रण के लिए कविता कलम चलाती है।

शब्द जो भी आते हैं असंख्य साथ आते हैं।
पर समय के साथ वे भी शब्द मिट जाते हैं।
शब्द संधान के लिए आते – जाते रहते हैं।
भाव दुनिया में अपना बिखेरते जाते रहते हैं।

बुद्धि और भावना इस संसार में रह जाते हैं।
अनंत काल तक वह अपना प्रभाव दिखाते हैं।
ह्रदय भाव कभी दुनिया में पुराना नहीं होता है।
समकालीन साहित्य सभा अक्षुण रहता है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – कवी व लेखक के गुणों को बताया है, इस संसार में सबकुछ पुराना होता है लेकिन “हृदय शब्द व भाव पुरानी कभी होते नहीं।” जो उच्च प्रकाश दे साहित्य कहलाता है, साहित्य सामाजिक आवश्यकता की पूर्ति करता हैं। इंसान के किये गए कर्म लोगों के मन में भावनाओं के रूप में सदैव ही जीवित
    रहते हैं।

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यह कविता (भाव पुराना नहीं होता।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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रचनाएं भर रात जगाती।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ रचनाएं भर रात जगाती। ♦

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भर रात जगाती रचनाएं,
नींद ना आती।
रात गुनगुना कर कह जाती,
कही कहानी अपनी।

चार दिसंबर दो हजार सत्तरह,
लहुरावीर की बात बताती।
लोगों में भरा कितना कलियुगी,
जीवन इतिहास दोहराती।

इठलाते-बलखाती व्यंग बराबर,
कसते उपहास उड़ाती।
इसे विडम्बना ही मानो ,
सच्चाई सपने में कह जाती।

वह दिन भी सूना ही होगा।
वस्तु लोग खोई लौटाते…
पर देशों की परम्परा को,
राष्ट्र हम नहीं ला पाते।

दक्षिण भारत की सभ्यता को,
भी हम नहीं अपनाते।
भूलें अपनी या प्रवंचना,
औरों को भी बतलाऊं।

उस गाथा को कैसे गाऊं,
अंधियारी की रात सुनाऊं।
नहीं-नहीं खिलखिली धुप में घुप,
हंसता हुआ मित्र एक आता।

अपनी वह पाथेय एक सौ छत्तीस,
साथ लेकर रचना जाता।
सुनकर क्या कर सकते हो ?
मेरी अमृत बीती गाथा।

अभी समय है सोई नहीं मेरे,
परीश्रम की मौन व्यथा।
साइट पर मेरे विद्यमान है,
लेकर एक सुनहरी आभा।

उसने व्यसन में अपने साथियों के,
साथ छका – गांठा।
कुतूहल थी जिन आँखों में,
उस दिन पानी भर आया।

स्वच्छंद सुमन जो खिले थे कल तक,
प्रतिभा छाया गुनगुना उठी।
कहती ! ठहरो कुछ सोचो -विचार करो,
अपने भी घातक होते लहरी।

हो चकित निकल आई सहसा।
कोमल पंखुड़ियां आँखों में गहरी।
‘मंगल’ सौन्दर्य जिसे कहते हैं।
अनंत अभिलाषा के सपने तुझमें।

सुन्दरता मेरी आँखों को रह-रहकर,
समझा जाती है, और बताती।
हलकी सुशान की भाषा में,
मित्रों की दुर्बलता को भी गाती है।

तुम्हें स्मित रेखा खींच कर एक अभी,
संधिपत्र लिखना ही होगा।
उस अंचल मन पर उन्हीं मित्रों से,
कुछ – कुछ सीखना होगा।

नित्य विरुद्ध संघर्ष सदा,
विश्वास, संकल्प अश्रु जल से।
आसमान में पक्षी उड़ती,
समंदर में तुझे उतरना होगा।

‘मंगल’ कह दो अपनी यादों को,
मुझे जलाना छोड़ दे।
उस पर आंसूं बहाना व्यर्थ है।
रक्त बहाना छोड़ दें।

बहुत पहेलियाँ सुलझाया होगा,
अपने इस जीवन पल में।
सद्भाव – प्रेम की पोथी पढाओ।
अपने विछुरे साथियों में।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – रियलिटी को समझो, अपने आप में सुधार करो, मायाजाल में न फसो।

—•—•—•—

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यह कविता “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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राष्ट्र खड़ा रहेगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ राष्ट्र खड़ा रहेगा। ♦

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बेशक कुछ दिन मूर्छित सा अधमरा रहेगा।
अर्धनिद्रा में रोगी सा लेटा पड़ा रहेगा।
हमें डराओ नहीं दिखा के सूरत और भयावह।
जनमानस रोजी – रोटी, मंदी से मरा रहेगा॥

जिसको तुम बोझ समझते हो वही पेड़ है ताकत, स्फूर्ति।
तुम खाना छोड़ो बस पानी दो हरा रहा है हरा रहेगा।
सारी दुश्वारियाँ भी मिलके, ना रोक पाई गति कदमों की।
ये मिसाल-ए-मुल्क-ए-जज्बा है अड़ा रहा है अड़ा रहेगा॥

माँ के दामन का दाग नहीं धुलते घड़ियाली आँसू से।
माँ ने कहाँ शिकायत की दिल बड़ा रहा है बड़ा रहेगा।
यह राष्ट्र नहीं जमीन का टुकड़ा, जीता जागता चिंतन है।
भूमि है अर्पण – तर्पण की सदा खड़ा है खड़ा रहेगा॥

मानवता के लिए लेखकों का सच बोलना धर्म रहा है।
कवियों ने चिंगारी कलम में सदा भरा है भरा रहेगा॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, कविता के माध्यम से बहुत ही सुंदर वर्णन किया है कि – मानवता के लिए लेखकों के जुनून को, कैसी भी परिस्थिति हो, कितना भी उतार-चढ़ाव आये, संयम बना रहेगा मानव, प्रकृति और माँ भारती का। राष्ट्र खड़ा रहेगा।

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यह कविता “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

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आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: स्वाद बदलना होगा।
  • जरूर पढ़े: क्या-क्या देखें।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, शैलेश कुमार मिश्र-शैल जी की कवितायें, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: desh bhakti kavita bacchon ke liye, heart touching desh bhakti poem in hindi, modern hindi poets, motivational poem in hindi, poem on author in hindi, poetry on nation in hindi, self motivation poem hindi, self written poem in hindi, short poem on desh bhakti in hindi, short poetry in hindi, क्या-क्या देखें।, शैलेश कुमार मिश्र-शैल जी की कवितायें, स्वाद बदलना होगा।

क्या-क्या देखें।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ क्या-क्या देखें। ♦

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आपकी सूरत के बाद और क्या देखें।
नजर हटे तब तो कुछ और नया देखें।
खुदा की ऐसी भी जब खुदाई है यहाँ।
फिर क्यूँ कुछ ऐसा वैसा खामख्वाह देखें॥

तसव्वुर का भी मिजाज़ आज बदला है।
लबों की शर्मो-हया, पलकों की अदा देखें।
जफ़ा, वफ़ा, कसमें, वादे, सब बकवास।
आज तो बस लरजे हुस्न का जलवा देखें॥

मन को कुछ भी समझ नहीं आ रहा।
दफ्तर देखें, घर देखें, कि रास्ता देखें।
चाँद आंगन में ना आज उतर ही आये।
छत, सीढ़ी, आइना देखें कि चेहरा देखें॥

काजल, सुरमा, मेंहदी, महावर को।
कब तक खफ़ा, बिखरा, तन्हा देखें।
कुछ ख्वाहिशें, कुछ गिले भी हैं इनके।
मेरी किस्मत से जुड़ा है ये मामला देखें॥

हर बार दुवा पढ़ते आसमां की तरफ।
क्यूँ बार – बार हाथ की मोटी रेखा देखें।
आके सारी उलझन ही खत्म कर दो ना।
जँचता नहीं है, रेखाओं को जुदा देखें॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने इस कविता के माध्यम से नारी के सच्चे सौंदर्य का बहुत ही मनोरम, सौम्य व मृदुल वर्णन किया है।

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यह कविता “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

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आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: स्वाद बदलना होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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स्वाद बदलना होगा।

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♦ स्वाद बदलना होगा। ♦

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माहौल बदलने के लिए मिजाज बदलना होगा।
मुकद्दर के लिये नजरिया, अंदाज बदलना होगा।
आसमां की दूरी अगर वाकई कम करनी है।
घायल परिंदों को भी परवाज़ बदलना होगा॥

रोने धोने से रात के घंटे कब कम होते हैं।
कल बदलने के लिए आज बदलना होगा।
मर्ज पता है सबको लेकिन दर्द कौन सहे।
मीठी गोली, वैद्य, दाई, इलाज बदलना होगा॥

सिर्फ बातें और चिंता से समाज नहीं बदलता।
घर की संस्कृति, रीति – रिवाज बदलना होगा।
मंदिर मस्जिद राम रहीम बहुत बदल के देखे।
समरसता के लिए भजन, नमाज़ बदलना होगा॥

एक-एक कदम बढ़ाने से ही फराज़ कम होगा।
बेटे – बेटी का फर्क, जमीं, सिराज बदलना होगा।
अपने खून पसीने का नमक चख के तो देखो।
मुस्तकबिल बदलेगा, स्वाद, अनाज बदलना होगा॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

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यह कविता “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

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आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: क्या-क्या देखें।
  • जरूर पढ़े: लेखक का ख्वाब।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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कभी खुद से मिलकर तो देखो।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ कभी खुद से मिलकर तो देखो। ♦

कभी खुद से मिलकर तो देखो।
अचरज न हो तो कहना।
खुद से प्रश्न पूछकर तो देखो।
सब राज खुल न जाएं तो कहना॥

हर अच्छाई को निखारने और बुराई को,
सुधारने का प्रण न हो जाए तो कहना।
अपने गुणों, अवगुणों का विश्लेषण करके,
तो देखो – जीवन लक्ष्य न मिल जाए तो कहना॥

कभी खुद से मिलकर तो देखो।
अति व्यस्त न हो जाओ तो कहना।
मायावी दुनिया में रहकर।
अंत:करण में झांक कर तो देखो,
हरिदर्शन कर स्वयं से प्रेम न हो जाए तो कहना॥

अपनी प्रतिभा को पहचान कर तो देखो।
खुद से मित्रता न हो जाए तो कहना।
आत्म-विश्लेषण करके तो देखो।
हीरे की तरह तराशे न जाओ तो कहना॥
कभी खुद से मिलकर तो देखो॥
कभी खुद से मिलकर तो देखो॥

♦– डॉ• संगीता पाहुजा – दिल्ली –♦

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यह कविता “डॉ• संगीता पाहुजा” जी की रचना है। आपके द्वारा लिखी कविता ह्रदय को छूने वाली होती है। हर उम्र के लोग आपकी कविताओं को पसंद करते है। आपकी कविताओं से हर उम्र के लोगो को फायदा मिलता है। आपकी लेखनी यु ही चलती रहे। आपके उज्जवल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूँ। “डॉ• संगीता पाहुजा” जी KMSRAJ51.COM के ऑथर टीम पैनल में आपका तहे दिल से स्वागत है।

जरूर पढ़े: एक खत तुम्हारे राजा को।

जरूर पढ़े: दिल से कागज में उतर ही जाती है।

जरूर पढ़े: हम दोनों की दो-दो आंखें।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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