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Baal Vivaah Ek Abhishaap | बाल विवाह – एक अभिशाप।

बेटी ने पूछा बापू से —
“इतनी ब्याह की क्या जल्दी?”
थोड़ी तो बढ़ जाने दो,
अभी तो मैं नादान हूँ,
थोड़ी तो ढल जाने दो।
अनजान डगर पर चलने से पहले,
जीवन को तो समझ लेने दो।
अभी तो बचपन भी न जिया,
थोड़ा तो जी जाने दो।
खेलों की किलकारी बाकी है,
किताबों से दोस्ती बाकी है,
सपनों की उड़ान अधूरी है,
आँखों में आस अभी बाकी है।
माँग में सिंदूर भरने से पहले,
हाथों में कलम थमा लेने दो,
घर की ज़िम्मेदारी से पहले,
मुझे खुद को पहचान लेने दो।
मैं बोझ नहीं, उम्मीद हूँ पापा,
कल का उजाला हूँ पापा,
आज अगर मुरझा दी गई,
तो कैसे खिल पाऊँ पापा?
कुड़वी रस्मों की बेड़ियाँ,
मेरे पाँव से हटा लेने दो,
बेटी हूँ, इंसान हूँ मैं,
मुझे भी जीने का हक़ दो पापा।
जो आज पढ़ेगी, वही कल
घर को रोशन करेगी,
अधपकी उम्र में ब्याही गई
किस्मत से ही हारेगी।
इस अभिशाप से समाज को
आज ही बचा लेने दो,
बेटी को बेटी रहने दो,
उसे जबरन बहू मत बन जाने दो।
बापू, मेरी एक बात सुन लो —
ये परंपरा नहीं, अपराध है,
जो कलियों को रौंद दे,
वो संस्कृति नहीं, अभिशाप है।
♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦
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• Conclusion •
- “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बेटी की पीड़ा, चेतना और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। बेटी अपने पिता से कम उम्र में विवाह न करने की विनती करती है और कहती है कि वह अभी जीवन, शिक्षा और अपने सपनों को समझना चाहती है। वह बताती है कि बचपन, खेल, पढ़ाई और आत्म-परिचय अभी अधूरे हैं, जिन्हें पूरा करने का उसे अवसर मिलना चाहिए।
कविता में बेटी स्वयं को बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद और उजाले के रूप में प्रस्तुत करती है। वह समाज की कड़वी परंपराओं और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को अपराध और अभिशाप बताती है। कवि का संदेश स्पष्ट है कि बेटी को पढ़ने, जीने और स्वयं निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए, क्योंकि शिक्षित बेटी ही परिवार और समाज को उज्ज्वल बना सकती है।
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यह कविता (बाल विवाह – एक अभिशाप।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।
आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—
मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।
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