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भोला शरण प्रसाद

दर्द – ए – कश्मीर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dard-E-Kashmir | दर्द – ए – कश्मीर।

क्यूँ मारा बेगुनाहों को,
वो तो तेरे मेहमान थे,
जिनकी मदद से घर चलता था,
किसी को गाड़ी पे घुमाया,
किसी को खाना खिलाया।

कुछ तो तेरे होटल में ठहरे थे,
कुछ को तुमने घोड़े पे घुमाया,
जिसके घर के दिये से रौशन था तेरा घर,
उस दिये को तुमने किस बेरहमी से बुझाया,
हर कोई कुछ तुम्हें देने आया।

कुछ नहीं तुमसे लेना था,
मांगी थी मोहब्बत,
तुमने बदले में गोलियाँ बरसाया,
छुट्टी मनाने वालों को,
इस जहां से विदा कर दिया।

किसी का पिता छीना, किसी का पुत्र,
किसी का सुहाग मिटाया,
किसी अजनबी का घर उजाड़ने में मजा आया,
तेरा फैसला होगा खुदा के सामने।

तुमने कलमा पढ़वा या, बंदूक दिखाया,
सबने सिर झुका दिया,
तुझे हैवान कहूँ या कहूँ शैतान,
तुम खुद सजा पाओगे,
ये देश है वीर-जवानों का,
जिसे कहते हैं हिंदुस्तान।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता निर्दोष लोगों पर हुए क्रूर आतंकी हमलों की मार्मिक कहानी बयान करती है। कवि आतंकियों से सवाल करता है कि उन्होंने उन मासूम लोगों को क्यों मारा, जो उनके मेहमान थे, जिनकी मदद से उनका व्यापार चलता था। कुछ पर्यटक उनके होटल में रुके थे, कुछ ने उनके घोड़ों की सवारी की, और कुछ ने उनकी सेवाओं का लाभ उठाया, लेकिन बदले में उन्हें मौत मिली। कवि इस अमानवीय कृत्य की निंदा करते हुए बताता है कि आतंकवादियों ने उन मासूम लोगों को निशाना बनाया, जो केवल प्यार और शांति की तलाश में आए थे। उन्होंने किसी का पिता, किसी का पुत्र, किसी का सुहाग छीन लिया और निर्दोषों के घर उजाड़ दिए। आखिर में, कवि यह चेतावनी देता है कि इन पापों का न्याय अवश्य होगा, और आतंकवादी खुदा के सामने सजा पाएंगे। भारत जैसे वीर और साहसी देश में ऐसी बर्बरता के लिए कोई जगह नहीं है, और अंततः सत्य की विजय होगी।

—————

यह कविता (दर्द – ए – कश्मीर।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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संस्कार और विनम्रता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sanskaar Aur Vinamrata | संस्कार और विनम्रता।

Humility is the quality of being humble. Manners are the proper or polite way to behave in public. kmsraj51संस्कार और विनम्रता का अटूट संबंध है, संस्कार ही विनम्रता की जननी है। संस्कार के बिना जीवन मरूस्थल की तरह है, जहाँ संस्कार नहीं वहाँ अहंकार ही उत्पन्न होता है। संस्कार के भूलते ही अहंकार की उत्पत्ति हो जाती है, नदी कभी सूख जाती है, कभी विकराल रूप धारण कर लेती है, गाँव के गाँव नदी में समा जाती है। नदी को अपने प्रचंड प्रवाह पर घमंड हो जाना स्वाभाविक है, नदी मर्यादा भूल जाती है, यह भी भूल जाती है कि कभी उसकी सुखी रेत पर बच्चे गेंद खेलते हैं। नदी को अपने ताकत का अहंकार हो गया, वह सोचने लगा मैं पहाड़, मकान, पेड़, पशु और मानव को बहा कर कहीं भी ले जा सकता हूँ। बर्बाद करने की ताकत है मुझमे, एक दिन समुद से उसकी बहस हो गई क्योंकि अहंकार के कारण विनम्रता जा चुकी थी। गर्वीले अंदाज में मुस्कराते हुए समुद से कहा, बताओ, मैं तुम्हारे लिए क्या-क्या लाऊँ, मैं सर्व शक्तिमान हूं, मैं मकान, पेड़, पशु. मानव – जो तुम्हारी इच्छा हो, उसे लाकर तुम्हें समर्पित कर दूंगी।

संस्कार और विनम्रता समुद्र में कूट-कूट कर भरा था….. वह समझ गया, अहंकार के नशे में चूर है नदी, समुद ने बड़ी विनम्रता से बोला- अगर कुछ लाना ही चाहते हो तो थोड़ी सी घास उखाड़ कर ले आओ… मैं भी तो देखूँ – नदी ने हाँ कह दी। नदी पूरा जोर (शक्ति) लगाया पर छोटे-छोटे घास को उखाड़ न पाया, उसकी सारी जल शक्ति विफल हो गई। अंत में नदी मायूस होकर समुद्र के पास गया और बोला – मैं सब कुछ ला सकता, लेकिन घास नहीं क्योंकि घास झुक जाती है और मैं ऊपर से गुजर जाती हूँ। समुद्र ने मुस्कुराते हुए कहा- पहाड़, पेड़, कठोर होते हैं, आसानी से उखड़ जाते हैं लेकिन घास विनम्र होता है, वह झुकना जानता है, उसे प्रचंड आँधी, तूफान या जल का प्रचंड वेग कुछ नहीं बिगाड़ सकते। जिह्वा अंत तक साथ रहती है लेकिन दांत टूट जाते हैं, अभिमान फरिश्तों को भी शैतान बना देती है और विनम्रता इंसान को फरिश्ता बना देती है।

बीज़ की यात्रा पेड़ तक है, नदी की यात्रा सागर तक और मनुष्य की यात्रा परमात्मा तक, अहंकार एवं अभिमान विनाश की जननी है। प्रभु भक्ति से संस्कार जागृत होती है, जो लोग धर्म को मज़ाक समझते हैं उन्हें क्या मालूम प्रभु भक्ति कितना कठिन है। प्रभु चित्रगुप्त की नज़र से न कोई बचा है न कोई बच सकता है। उचित फल उचित समय पर अवश्य मिलता है, सदा वासना में लीन रहने वाले, दूसरों का अहित करने वाले और भगवान को न मानने वाले, दुष्कर्म में लिप्त रहने वाले, भले कुछ समय के लिए (पिछले जन्म के) कर्म के कारण सुखमय जीवन व्यतित कर लें, लेकिन उनके पापों का परिणाम अवश्य भोगना पड़ेगा।

सच्चे मन से भगवान का नाम लेने का कोई मुल्य नहीं होता, कलयुग में नाम ही जप लेना मोक्ष का द्वार खोल देता है। इंसान को विनम्र एवं संस्कारी बना देता है। एक बालक बड़ा ही जिद्दी स्वभाव का था, भगवान का नाम लेने में कोई दिलचस्पी नहीं। एक बार उसके पिताजी ने यज्ञ किया, वह बालक अपने को एक कमरे में बंद कर लिया, सभी पुजारी एवं अन्य विद्वान जन प्रयास करके थक गए, सभी असफल रहे। जब बालक स्वयं घर के बाहर निकला तो पुजारी जी ने कस कर उसकी कलाई पकड़ ली, असहनीय दर्द के कारण अनायास ही बालक के मुख से निकला- हे राम मुझे बचाओ, ये कैसी जबरदस्ती…….

……. पुजारी जी ने मुस्कुराते हुए कहा आज जो नाम लिए हो, इसकी कभी कीमत मत लगाना। कुछ समय बाद बालक की मृत्यु हो गई, यमराज ने भगवान चित्रगुप्त से पूछा… इसका पाप – पुण्य क्या है? प्रभु चित्रगुप्त ने कहा, यह कभी प्रभु का नाम नहीं लिया, किन्तु विपत्ति में एक बार राम का नाम लिया है। इसे क्या फल दिया जाए? बालक से ही पूछा गया,..वह मौन रहा। अब यमराज और प्रभु चित्रगुप्त व्याकुल हो कर उस बालक को ब्रह्मा जी के पास ले गए, ब्रह्मा जी भी कुछ नहीं बोले, फिर यमराज और भगवान चित्रगुप्त उस बालक को भगवान शिव के पास ले गए, वह भी कुछ नहीं बोले, फिर सभी विष्णु जी के पास गए… विष्णुजी मुस्करा दिए। एक बार नाम लेने का फल इस बालक को मिल गया, ब्रह्मा, विष्णु, महेश- तीनों का दर्शन हो गया।

झूठे आडंबर में न फंसकर केवल अपने इष्टदेव का नाम लेना ही सच्ची भक्ति है। पापकर्म से दूर रहना, किसी का अहित न करना, सदा दूसरों की मदद करना, नारी सम्मान करना, झूठ न बोलना, सत्कर्म करना ही सच्ची भक्ति है। ईर्ष्या, जलन, द्वेष से मुक्त रखना, विनम्र होना, संस्कार नहीं भूलना, पाखंड से दूर रहना ही मोक्ष का द्वार खोलता है। हर आदमी विद्वान नहीं हो सकता लेकिन विद्वान की संगत में रहकर, सत्य की राह पर चल कर, प्रभु को प्राप्त कर सकता है “मैं” से मुक्त होना ही मोक्ष है।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस Article के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह लेख संस्कार और विनम्रता के महत्व पर ध्यान केंद्रित करता है। संस्कार को विनम्रता की जननी माना गया है। बिना संस्कार के जीवन की तुलना मरुस्थल की होती है, जहां अहंकार ही उभरता है। अहंकार संस्कार भूलने के परिणाम से उत्पन्न होता है। यह लेख एक कहानी के माध्यम से इस विषय को प्रकट करता है, जिसमें नदी और समुद्र के बीच की बहस दर्शाई गई है। समुद्र ने विनम्रता की महत्वता को समझाया और अहंकार का त्याग किया। इससे पाठक को समझाया गया है कि विनम्रता और संस्कार की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेखक ने भगवान के नाम लेने के महत्व को भी उजागर किया है, जो अहंकार को दूर करके विनम्रता को विकसित करता है। लेखक द्वारा बताए गए सिद्धांतों के माध्यम से पाठक को सच्ची भक्ति और मोक्ष की ओर प्रेरित किया जाता है।

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यह Article (संस्कार और विनम्रता।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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कन्या पूजन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kanya Poojan | कन्या पूजन।

Kanyā Pūjā or Kumārī Pūjā, is a Hindu holy ritual, carried out especially on the Ashtami (eighth day) and Navami (ninth day) of the Navaratri festival.

अधर्मी से भरा हुआ संसार,
दिखावा क्यूँ करता जालिम इंसान?
चाहे हो दुर्गा पूजा या हो कन्या पूजन,
नहीं मिले किसी अधर्मी को यह अधिकार।

होती है बलात्कार, अपहरण, हत्या,
बता दे कोई, क्या है बच्चियों का कसूर?
खिलती कलियों को मसल देना,
हैवानों, ये तेरा कैसा दस्तूर?

ग़र बेटा कुल दीपक,
तो बेटी बाप का गुरूर है।
आज न तो कल नाम रौशन कर,
इतिहास रचती जरूर है।
जो मन के रावण को मार सके,
राम वही बन पाएगा।

सीता को रावण के चंगुल से दूजा कौन बचाएगा?
नर में रावण बसता, शूर्पणखा नारी में,
आओ मन के रावण को, खुद ही मार भगाएं।
शूर्पणखा न बने कोई,
ऐसी अमृत वाणी बोलें और सिखाएं।

आ न, बान, शान की खातिर,
बच्चियों को मौत के घाट उतारते हैं।
इज्जत, ऊंच- नीच, धर्म के नाम पर,
ऑनर किलिंग करते हैं।
समाज भूखा है अधिकार का,
क्यूँ करते हैं लोग दिखावे का?
कन्या पूजन तो ढोंग और बहाना है।

रावण दहन तो हो गया,
दुर्योधन जांघों को ठोक रहा।
जब बेटियों को दहेज के खातिर जलाना है,
क्यूं करते कन्या पूजन, जिसे कल जलाना है?
दहेज के लोभी से पूछो,
यह हकीकत या अफ़साना है?

कन्या पूजन गर करते हो?
नारी का करो दिल से सम्मान।
वचन दो कन्याओं को,
कभी न होगा उनका अपमान।
राम, कृष्ण बनकर, पापियों से,
इस धरती को मुक्त कराना है।
सभी बेटियाँ रहे सुरक्षित,
सोचो, कन्याओं को कैसे बचाना है?

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कन्या पूजन एक हिन्दू धार्मिक परंपरागत आचार है जो भारतीय समाज में प्रचलित है। इसे नवरात्रि के दौरान, विशेषकर नवमी तिथि को, कन्या-कुमारिकाओं की पूजा के रूप में किया जाता है। इस पर्व में कन्या-कुमारिकाओं की पूजा करने का उद्देश्य देवी दुर्गा की शक्ति को महसूस करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना होता है। कविता में बेटियों के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने का आग्रह किया गया है और यह बताया गया है कि शक्तिशाली स्त्री समाज में सुरक्षित रह सकती है और बदलाव की ओर कदम बढ़ा सकती है। इसके अलावा, इसके माध्यम से समाज को अधर्म और अनैतिकता के खिलाफ उत्तरदाता बनाने की अपील की गई है।

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यह कविता (कन्या पूजन।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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शिक्षक दिवस एवं गुरु वंदना।

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Teacher’s Day and Guru Vandana | शिक्षक दिवस एवं गुरु वंदना।

गुरुवर जैसा नहीं कोई पुज्य,
नहीं है कोई दूजा महान।
गोविंद से पहले करता हूं,
शिक्षक का गुणगान।
गुरु की नजरों में होता है,
कृष्ण – सुदामा एक समान।

आप सा ना कोई इस धरती पर,
आपके पास है ज्ञान का खान।
देकर गुरुवर प्रकाश आपने,
अंधकार से बचा लिया।
धन्य हो गया जीवन,
स्वागत करने का जो मौका दे दिया।

शिक्षक दिवस का दिन है बड़ा महान,
आपके आशीष से, उज्जवल हुआ सारा जहान।
गुरु की चरणों में है चारो धाम,
आपकी चरणों में ” भोला ” का कोटि कोटि प्रणाम।
गुरु-शिष्य का नाता देखो, पिता-पुत्र से कहीं महान,
गुरु ही देते सबको अनुपम वो सकल ज्ञान।

गुरु ही पथ प्रदर्शक,
गुरु से है सबका स्वाभिमान।
अभियंता, नायक, अधिकारी,
डाक्टर हो या हो फिर कर्मचारी।
शिक्षक हैं सबका निर्माता,
ये कैसी बिडम्बना है,
सबके आगे शिक्षक अपना सिर झुकाता।

गुरु कृपा से विकसित हुआ संसार,
राम- कृष्ण भी गए शरण में,
वो भी समझे, गुरु बिना जीवन न संसार।
माँ सरस्वती, भगवान चित्रगुप्त से पहले,
नमन करता हूँ गुरु चरणों में।
मैं अज्ञानी कुछ न मांगू, कुछ न जानूँ,
हाथ रख दो गुरुवर अपना,
जब शीश झुकाएं तेरी चरणों में।

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में गुरु के महत्व को महत्वपूर्ण रूप से प्रकट किया गया है। गुरु को ज्ञान का स्रोत और जीवन का मार्गदर्शक माना गया है। यह कविता गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरुजी के प्रति श्रद्धाभाव और आभार व्यक्त करने का प्रयास है। गुरु-शिष्य के रिश्ते को पिता-पुत्र के समान महत्वपूर्ण माना गया है और शिक्षक को समाज के निर्माता के रूप में दर्शाया गया है। कविता के अंत में कवि अपने गुरु के चरणों में अपना सिर झुकाते हुए गुरुजी के प्रति अपनी आभार व्यक्त करते हैं।

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यह कविता (शिक्षक दिवस एवं गुरु वंदना।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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रक्षाबंधन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Raksha Bandhan | रक्षाबंधन।

भाई-बहन का प्यार,
लेकर आया राखी का त्योहार।
राजा बलि ने रखी, रक्षा सूत्र की मान,
लक्ष्मी जी के खातिर,
विष्णु जी को विदा किया स सम्मान।

भाई के सुख के लिए,
बहन कष्ठ से लड़ जाती है।
कच्चे होते रेशम धागे,
मजबूत डोर बन जाती है।

बहन-भाई के रिश्ते जैसा,
कोई न दूजा रिश्ता होता।
कष्ठ में गर बहन हो,
सिसक-सिसक कर दुख में भाई रोता।

बहन प्यारी तू सबसे न्यारी,
कभी न आए आंसू तेरी आँखों में।
मांगू मैं यह वरदान,
मेरी बहन छुए आसमाँ।
यही है मेरे दिल का अरमान,
बाँधा है धागा, बहन ने तुझको,
वचन दो रक्षा करने का।

मुँह कराया मीठा तेरा,
रिश्तों में मिठास रखने का।
“भोला” भैया का है कहना,
राखी बांधो मेरी प्यारी बहना,
हमेशा खुश रहना मेरी बहना।

इस भाई को राखी बाँधना भूल न जाना,
भगवान सबको बहन दे।
राखी का त्योहार मनाने को,
हर बहन को भाई मिले,
रक्षा का वचन निभाने को।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में राखी के त्योहार के माध्यम से भाई-बहन के प्यार और आपसी संबंधों का महत्व दर्शाया गया है। कविता में बताया गया है कि राजा बलि ने राखी बांधकर अपने सम्मान का प्रकटीकरण किया था और विष्णु जी को स सम्मान विदा किया। कविता दर्शाती है कि भाई के सुख के लिए बहन कठिनाइयों का सामना करती है और उसका साथ देती है। राखी के माध्यम से भाई-बहन के प्यार का अद्भुत महत्व और अनमोलता प्रकट होती है और इस रिश्ते की मित्रता और समर्पण की महत्वपूर्णता पर भी ध्यान दिलाती है। कविता के अंत में यह कहा गया है कि भाई को राखी बांधने की परंपरा को भूलने नहीं चाहिए और भगवान से सभी को बहन की प्राप्ति हो।

—————

यह कविता (रक्षाबंधन।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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अहंकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ego | अहंकार।

मतभेद तो होगा मेरे भाई,
पर संवाद होना चाहिए।
न तेरी जुबान बंद रहे न मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।

त्याग कर अहंकार, खटखटाते रहो,
खोल दो बंद दिल के दरवाजे।
कुछ हो या ना हो, सोचों मत,
आत्मीयता का एहसास होना चाहिए।

न तेरी जुबान बंद हो, ना मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।
चुप रहने की आदत छोड़ दो,
मन की बात कहना अनिवार्य होना चाहिए।

न तेरी जुबान बंद रहे, ना मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।
अहम है जहर, दिलों के बीच में न आ जाए,
रिश्ते बड़े नाजुक हैं।

बचाने का प्रयास होना चाहिए,
न तेरी जुबान बंद रहे, ना मेरी।
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए,
आ रही दिवाली एवं चित्रगुप्त पूजा।

गले मिलकर, त्यौहार मनाने का,
दिल से विचार होना चाहिए।
न तेरी जुबान बंद रहे, ना मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।

मुझसे कोई भाई रूठ ना जाए,
अपनों का साथ छुट ना जाए।
मनाने का रिवाज होना चाहिए,
न तेरी जुबान बंद रहे, ना मेरी,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।

दिल की तमन्ना तुम क्या जानो,
हर भाई के चेहरे पर मुस्कान होना चाहिए,
हर हाल में वार्तालाप होना चाहिए।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अहंकार को त्यागकर आपसी प्रेम सद्भाव बना रहे, सभी मिलजुलकर एक दूसरे की मदद करें। याद रखें — अहंकार की वजह से जीवन की ऊर्जा एक निश्चित स्तर पर ठहर जाती है। अहंकार न उर्जा को घटने देता है न बढ़ने देता है। क्योंकि, ऊर्जा के घटने या बढ़ने में उसे अपना नाश नजर आता है। अहंकार तन, मन, बुद्धि और भावना, सब जगह जकड़न पैदा करता है।

—————

यह कविता (अहंकार।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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मेरा गाँव।

Kmsraj51 की कलम से…..

My Village | मेरा गाँव।

रहता हूं बहुत दूर नोएडा में,
पर मेरा गाँव याद आता है।
लहलहाते खेत की पगडण्डियाँ,
उस पर फिसलता पाँव बहुत याद आता है,
मेरा गाँव मुझे बहुत याद आता है।

भूलना मुश्किल है, एक दूसरे से सबका मिलना,
दोपहर तक दोस्तों के साथ खेलना।
माँ का ढूंढते आना, हाथ में छड़ी, आंखें लाल,
पर उसके आँचल का छांव याद आता है,
मुझे मेरा गाँव बहुत याद आता है।

तपती दोपहर के बाद,
सुहानी शाम का आना याद आता है।
ज़ुदा हो के जो न ज़ुदा हो सका,
उसका मुस्कुराना याद आता है,
मुझे मेरा गाँव बहुत याद आता है।

सुबह शाम मिलती थी खुली हवाएँ,
शुद्ध पानी, भोजन और दुआएँ।
वक़्त बहुत बदल गया,
शहरी जिन्दगी में खाता हूं ढेर सारी अँग्रेजी दवाएं।
गाँव की खुली हवा के सामने,
फेल थे सारे हकीम और उनकी दवाएं।

घर के सामने वाली पीपल की छाँव याद आता है,
मुझे और कुछ नहीं, अपना गाँव याद आता है।
मंदिर की घंटी, शंख की आवाज,
दरिया का किनारा बहुत याद आता है।
मुझे मेरा गाँव “जहांगीर पूर शाम “याद आता है।

हूं तो बहुत दूर, पर सबके दिल के करीब हैं,
सबका बुलाना, सिर झुकाना, दुआ देना।
जीते जी न भूल पाउंगा, सबका मुस्कराता चेहरा,
यहाँ बेफिक्र हैं सब देखकर, हालात मेरे दिल की।
“भोला” सब की दिलों का धड़कन था,
दिल को सब याद आता है,
मुझे मेरा गाँव बहुत याद आता है।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — गांव में बिताया हुआ बचपन की यादें कभी भूलती नहीं है। गाँव महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे देश के लिए कृषि उत्पादन का प्राथमिक क्षेत्र है । गाँव भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह पर्यावरण के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में भी प्रमुख भूमिका निभाता है। गाँव अधिकतर पेड़-पौधों से आच्छादित होते हैं। मेरे गांव का मुख्य कार्य कृषि है यहां के अधिकतर लोग खेती का काम करते हैं और खेती में तेजी से हमारा गांव विकास कर रहा है और इसका मुख्य वजह यहां के मेहनती किसान है। गाँव का जीवन शांत और शुद्ध माना जाता है क्योंकि गाँवों में लोग प्रकृति के अधिक निकट होते हैं। हालांकि, इसकी चुनौतियां भी हैं। गाँव के इलाकों में रहने वाले लोग शांतिपूर्ण जीवन जीते हैं लेकिन वे कई आधुनिक सुविधाओं से रहित होते हैं जो जीवन को आरामदायक बनाते हैं। शहर में लोग आधुनिक सुविधाओं के बीच तो रहते है लेकिन अत्यधिक प्रदुषण के कारण, ज्यादा बीमार भी होते है, और दवाइयाँ खा-खाकर जीवन बिताने को मज़बूर होते है।

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यह कविता (मेरा गाँव।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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वेदना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Pain | वेदना।

एक दिन ऐसा आएगा, हम तो चले जायेंगे।
कुछ को छोड़, सभी को याद बहुत आयेंगे।

ढूढ़ने वाले ढूंढते रहेंगे, पर हमें कहीं न ढूंढ पायेंगे।
ये मुराद कभी पूरी न होगी, कहीं भी न मिल पायेंगे।

मेरे सभी अजीज, अपनी दुनिया में मस्त रहेंगे।
हम किसी दूसरी दुनिया में खो जायेंगे।

कोई न रोक पायेगा, आने वाले आते रहेंगे।
जो आया इस जहां में, मुक़र्रर वक़्त पर जाते रहेंगे।

“भोला” का पथ सत्कर्म है, जीवन का यही मर्म है।
आना – जाना लगा रहेगा, यही कुदरत का क्रम है।

इससे मुक्ति मिल जायेगा, फिजूल वो भ्रम है।
भगवान के घर में, गुनाहगारों की शिनाख्त बाकी है।

थोड़ी इबादत राम, कृष्ण, चित्रगुप्त की कर लूं।
तू भी जा अब मस्जिद में, अज़ान तेरी बाकी है।

जाना हैं दोनों को भगवान के पास, तुझे भी मुझे भी।
गुज़ारिश है बन्दगी कर, जो साँसे बाकी है।

मिलना है ग़र प्रभु से, तो चलना है नेकी की राह पर।
आहत न हो कोई दिल, इसे अख़लाक़ कहते हैं।

मग फिरत के बाद, जन्नत मिल जाये।
इसे खुशकिस्मती, वो इत्तफाक कहते हैं।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अन्‍य जीवों की तरह मनुष्य के प्राण संकट में नहीं होते तभी यह जीवन प्रभु स्मरण और भजन के लिए अनुकूल है। पर जीवों की वेदना से भी बड़ी वेदना मानव जन्म में तब होती है जब हम प्रभु के बनने का सुअवसर भी गवां देते है फालतू के कार्यों की वजह से। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते है, कभी भी एक जैसा समय लम्बे समय तक नहीं रहता हैं।

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यह कविता (वेदना।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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क्रोध।

Kmsraj51 की कलम से…..

Anger | क्रोध।

क्रोध को दिल में,
थोड़ी जगह क्या दे दी,
उसने पूरा हक जमा लिया।
पहले बहुत खुश था,
अपनी छोटी कुटिया में।
उसने धक्का मार कर,
बाहर निकाल दिया।

आज पता चला उसने,
मेरा ज्ञान मुझसे छीना है।
जल रहा है दिल मेरा,
क्यूँ दर्द कर रहा सीना है।

जब से क्रोध ने पनाह ली,
बहुत दुखी – दुखी सा रहता हूं।
अब मैं सब का बुरा चाहता,
सबको अपशब्द कहता रहता हूं।

ईर्ष्या की अग्नि में,
खुद जलने वाला हूं।
मानसिक संतुलन खो बैठा,
मानों मैं बिना चाबी का ताला हूँ।
मुझे चांद का पता नहीं,
पर जुगनुओं की तलाश है।

समंदर घर के सामने,
प्यास बुझती नहीं।
दिल मेरा उदास है,
समंदर से मुझे क्या?
अधर सूखे हैं,
दिल में प्यास ही प्यास है।

अज्ञान भरा था,
मुझमें कूट कूट के।
क्रोध के कारण,
छलक रहा अभिमान था।
विवेकहीन बना दिया मुझे,
बस अपनी मूर्खता का ज्ञान था।

क्रोध, ईर्ष्या बर्बादी का,
मार्ग दिखाती हैं।
ए वो टुकड़ा है शीशे का,
जिसमें सारी दुनिया दिख जाती है।

तौबा कर ले दोनों से,
गर बनना है तुझे महान,
एक दिन शीश झुकाये गा,
तुझपे सारा हिन्दुस्तान।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जब हम गुस्से में होते हैं, तो हम होश खो देते हैं। पहला स्तर यह महसूस करना है कि क्रोध कभी भी कमियों को दूर नहीं कर सकता है। क्रोध की उग्र चेष्टाओं का लक्ष्य हानि या पीड़ा पहुँचाने के पहले आलंबन में भय का संचार करना होता है। जिस पर क्रोध प्रकट किया जाता है वह यदि डर जाता है और नम्र होकर पश्चात्ताप करता है तो उसे माफ़ कर देना चाहिए। क्रोध मानव के लिए हानिकारक है। क्रोध कायरता का चिह्न है। सनकी आदमी को अधिक क्रोध आता है। हम जब गुस्सा करते है, इससे हमारी ही सेहत खराब होती है। हमारे दिमाग की सोचने-समझने की शक्ति ख़त्म हो जाती है और शरीर में रक्त का बहाव भी तीव्र हो जाता है, इसलिए जब भी गुस्सा आये तो बिलकुल शांत हो जाये 5 मिनट्स तक, जिससे आपको और सामने वाले को कोई नुकसान नही होगा। कहते हैं कि क्रोध में आया व्यक्ति दूसरे का बाद में पहले खुद का नुकसान करता है। अल्बर्ट आइंस्टीन के अनुसार क्रोध या फिर कहें गुस्सा केवल मूर्खों के ब्रह्मांड में रहता है।क्रोध वह आंधी है, जिसके आने पर बुद्धि का दीपक बुझ जाता है। यदि क्रोध पर नियंत्रण न किया जाए तो वह जिस कारण उत्पन्न होता है, व्यक्ति को उससे कहीं ज्यादा हानि पहुंचा सकता है। किसी व्यक्ति को क्रोध आने पर चिल्लाने के लिए भले ही ताकत की जरूरत न पड़े लेकिन क्रोध आने पर चुप रहने के लिए बहुत ताकत की आवश्यकता होती है। किसी भी व्यक्ति का क्रोध तभी सही है, जब वह स्वयं पर कर रहा हो क्योंकि ऐसे क्रोध से स्वयं को बदलने की भावना पैदा होती है, परन्तु ऐसा क्रोध लोगों को कम ही आता है। जीवन में क्रोध से व्यक्ति के भीतर भ्रम पैदा होता है और भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है तब व्यक्ति का तर्क शक्ति नष्ट हो जाता है और जब तर्क शक्ति के नष्ट होते ही व्यक्ति का पतन होता है। कभी किसी व्यक्ति को क्रोध में उत्तर नहीं देना चाहिए, क्योंकि क्रोध व्यक्ति के विवेक को पूर्ण रूप से खा जाता है, जिसके बाद उसके भीतर अच्छे-बुरे को सोचने समझने की शक्ति समाप्त हो जाती है। प्यारे दोस्तों – क्रोध को त्याग कर सभी के साथ स्नेह भरा व्यवहार करें।

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यह कविता (क्रोध।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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वैशाख की गर्मी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hot Summer of  Vaishakh | वैशाख की गर्मी।

उफ ये गर्मी है बैसाख की,
धरती जलती आग सी।
उफनती नदियाँ सूख गई,
कंठ की हाल ना पूछो।

धूप लगे शूल सी,
बच्चे हुए मजबूर।
घर लगता है सबको जेल,
खेल खेलते हैं अनेक।

पल में हंसते, पल में झगड़ा,
पल में करते मेल।
बहे पसीना, बिखर गए बाल,
हर रोज कटता तरबूज लाल।

ठंढ़ा पानी कौन पिलाए,
धूप की जलन में।
नींबु-पानी खातिर हुआ बेहाल,
नदियाँ सूखी, खेत भी सूखे।

सूख गए सब ताल – तलैया,
लस्सी, मट्ठा, गन्ने का रस।
सत्तू से मिलेगी तरावट,
बैसाख में पीयो भैया।

पंखे, कूलर ना दे राहत,
धरती फट गई,
हो गई बंजर जैसी।
दिल करता है खूब नहाएं,
बैसाख के महीने में,
जीवन हो गईं पतझड़ जैसी।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्रचण्ड ताप देने वाली ग्रीष्म ऋतु वैशाख, ज्येष्ठ मास में आती है। इस ऋतु में सूर्य की गति उत्तरायण की ओर होती है, जो गरम लू देता है जिससे असहनीय गर्मी पड़ती हैं। ग्रीष्म ऋतु में दिन लम्बे और रातें छोटी हो जाती हैं। सूर्य अपनी किरणों से जगत के द्रवांश पदार्थ को खींच लेता है। इस समय सूख गए सब ताल – तलैया, खूब लस्सी, मट्ठा, गन्ने का रस, सत्तू से मिलेगी तरावट, बैसाख में पीयो जमकर भैया, तभी मिलेगी वैशाख की गर्मी से राहत।

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यह कविता (वैशाख की गर्मी।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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