Kmsraj51 की कलम से…..

Dard-E-Kashmir | दर्द – ए – कश्मीर।

क्यूँ मारा बेगुनाहों को,
वो तो तेरे मेहमान थे,
जिनकी मदद से घर चलता था,
किसी को गाड़ी पे घुमाया,
किसी को खाना खिलाया।
कुछ तो तेरे होटल में ठहरे थे,
कुछ को तुमने घोड़े पे घुमाया,
जिसके घर के दिये से रौशन था तेरा घर,
उस दिये को तुमने किस बेरहमी से बुझाया,
हर कोई कुछ तुम्हें देने आया।
कुछ नहीं तुमसे लेना था,
मांगी थी मोहब्बत,
तुमने बदले में गोलियाँ बरसाया,
छुट्टी मनाने वालों को,
इस जहां से विदा कर दिया।
किसी का पिता छीना, किसी का पुत्र,
किसी का सुहाग मिटाया,
किसी अजनबी का घर उजाड़ने में मजा आया,
तेरा फैसला होगा खुदा के सामने।
तुमने कलमा पढ़वा या, बंदूक दिखाया,
सबने सिर झुका दिया,
तुझे हैवान कहूँ या कहूँ शैतान,
तुम खुद सजा पाओगे,
ये देश है वीर-जवानों का,
जिसे कहते हैं हिंदुस्तान।
♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦
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- “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता निर्दोष लोगों पर हुए क्रूर आतंकी हमलों की मार्मिक कहानी बयान करती है। कवि आतंकियों से सवाल करता है कि उन्होंने उन मासूम लोगों को क्यों मारा, जो उनके मेहमान थे, जिनकी मदद से उनका व्यापार चलता था। कुछ पर्यटक उनके होटल में रुके थे, कुछ ने उनके घोड़ों की सवारी की, और कुछ ने उनकी सेवाओं का लाभ उठाया, लेकिन बदले में उन्हें मौत मिली। कवि इस अमानवीय कृत्य की निंदा करते हुए बताता है कि आतंकवादियों ने उन मासूम लोगों को निशाना बनाया, जो केवल प्यार और शांति की तलाश में आए थे। उन्होंने किसी का पिता, किसी का पुत्र, किसी का सुहाग छीन लिया और निर्दोषों के घर उजाड़ दिए। आखिर में, कवि यह चेतावनी देता है कि इन पापों का न्याय अवश्य होगा, और आतंकवादी खुदा के सामने सजा पाएंगे। भारत जैसे वीर और साहसी देश में ऐसी बर्बरता के लिए कोई जगह नहीं है, और अंततः सत्य की विजय होगी।
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यह कविता (दर्द – ए – कश्मीर।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।
आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—
मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।
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संस्कार और विनम्रता का अटूट संबंध है, संस्कार ही विनम्रता की जननी है। संस्कार के बिना जीवन मरूस्थल की तरह है, जहाँ संस्कार नहीं वहाँ अहंकार ही उत्पन्न होता है। संस्कार के भूलते ही अहंकार की उत्पत्ति हो जाती है, नदी कभी सूख जाती है, कभी विकराल रूप धारण कर लेती है, गाँव के गाँव नदी में समा जाती है। नदी को अपने प्रचंड प्रवाह पर घमंड हो जाना स्वाभाविक है, नदी मर्यादा भूल जाती है, यह भी भूल जाती है कि कभी उसकी सुखी रेत पर बच्चे गेंद खेलते हैं। नदी को अपने ताकत का अहंकार हो गया, वह सोचने लगा मैं पहाड़, मकान, पेड़, पशु और मानव को बहा कर कहीं भी ले जा सकता हूँ। बर्बाद करने की ताकत है मुझमे, एक दिन समुद से उसकी बहस हो गई क्योंकि अहंकार के कारण विनम्रता जा चुकी थी। गर्वीले अंदाज में मुस्कराते हुए समुद से कहा, बताओ, मैं तुम्हारे लिए क्या-क्या लाऊँ, मैं सर्व शक्तिमान हूं, मैं मकान, पेड़, पशु. मानव – जो तुम्हारी इच्छा हो, उसे लाकर तुम्हें समर्पित कर दूंगी।












