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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

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You are here: Home / Archives for पूनम गुप्ता

पूनम गुप्ता

बाल दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बाल दिवस। ♦

आज बाल दिवस का दिन आया,
खुशियों और उमंग की सौगात लाया।
चाचा नेहरू का आज जन्मदिन है,
प्यार से बच्चे नेहरू चाचा बुलाते है,
उनका जन्मदिन धूमधाम से मनाते है।

दिल के सच्चे मन के भोले थे,
बच्चों के साथ बच्चे बन जाते थे।
संकट से कैसे निपटें उनसे ही सीखा है,
हम सब मिलजुलकर रहें ऐसा हमें सिखाया है।

सब आपस में भाई – भाई की तरह रहें,
न हो कोई भेदभाव न कोई उदास रहे।
किसी की आँखों में न हो आँसू होठों हो हसीं,
दिखता बच्चों में देश का उज्जवल भविष्य बतलाते है।

प्यारी होती दुनियाँ इनकी सबसे मधुर इनकी मुस्कान है,
बच्चों में दे हम अच्छे संस्कार देश में प्रगति होती है।
आजादी की रक्षा को बलिदान हो जाएं,
जरूरत पड़ने पर देश पर प्राण न्यौछावर कर जाएं,
आज बाल दिवस का दिन आया है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद से, उनकी जयंती पर 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। चाचा नेहरू के तौर पर लोकप्रिय जवाहरलाल नेहरू का मानना था कि बच्चे देश का भविष्य और समाज की नींव होते हैं। बाल दिवस नेहरू की जयंती के अलावा, बच्चों की शिक्षा और अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी मनाया जाता है।

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यह कविता (बाल दिवस।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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श्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ श्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती। ♦

श्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय उत्तर प्रदेश में मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव के यहां हुआ था उनकी माता का नाम राज दुलारी था। शास्त्री जी के पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। पिता के निधन के बाद उनकी परवरिश उनके नाना जी के यहां हुई, प्राथमिक शिक्षा उनकी वहीं हुई इसके बाद हरिश्चंद्र चंद्र हाई स्कूल की शिक्षा काशी विद्यापीठ में हुई।

काशी विद्यापीठ से शात्री की उपाधि मिलते ही अपने नाम से जाति सूचक शब्द श्रीवास्तव हमेशा के लिए हटा दिया और अपने नाम के आगे शास्त्री लगा लिया।

श्री लाल बहादुर शास्त्री ने नारा “करो या मरो” का नारा दिया इस नारे ने देश में प्रचंड क्रांति को जन्म दिया। उनका एक और नारा “जय जवान जय किसान” आज भी लोगों को याद है।

अंग्रेजो के खिलाफ महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन में श्री लाल बहादुर शास्त्री थोड़े समय के लिए (1921) में जेल गए रिहा होने पर राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय काशी विद्यापीठ वर्तमान में (महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ) में अध्ययन किया संस्कृत भाषा में स्नातक की शिक्षा के बाद भारतीय सेवा संघ से जुड़ गए। स्वतंत्रता संग्राम के सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों व आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका निभाई। कई बार जेल भी गए। उसमें 1921 का असहयोग आंदोलन 1930 का दांडी मार्च और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उल्लेखनीय है।

1929 में इलाहाबाद आने के बाद टंडन जी के साथ भारत सेवक संघ की इलाहाबाद इकाई के सचिव के रूप में काम करना शुरू किया नेहरू जी के साथ उनकी निकटता बढ़ी।

1961 में मंत्रिमंडल में गृहमंत्री का पद मिला, नेहरू जी के मरने के बाद शास्त्री जी 1964 में वह भारत के प्रधानमंत्री बने। पड़ोसी पाकिस्तान से युद्ध के दौरान दिखाई गई साहस के लिए बहुत प्रशंसा हुई।

श्री शास्त्री जी की मृत्यु 1966 में हुई उनके मरणोपरांत “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया। शास्त्री जी को उनकी सादगी और देशभक्ति के लिए आज भी पूरा देश श्रद्धा से नमन करता है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — श्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सात मील दूर एक छोटे से रेलवे टाउन, मुगलसराय में हुआ था। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे। जब लाल बहादुर शास्त्री केवल डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। उनकी माँ अपने तीनों बच्चों के साथ अपने पिता के घर जाकर बस गईं। शास्त्री जी को उनकी सादगी और देशभक्ति के लिए आज भी पूरा देश श्रद्धा से नमन करता है।

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यह लेख (श्री लाल बहादुर शास्त्री जयंती।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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नवरात्रि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नवरात्रि। ♦

आया नवरात्रि का त्यौहार,
घर-घर में घट स्थापना हो रही है।
सजा माता का दरबार,
माता की पूजा अर्चना हो रही है।

सिंह पर सवार माता आयी,
भक्तों की सुनने पुकार।
छायी चारों तरफ खुशियां,
आयी मंदिरों में हो रही जय जयकार।

जो भी आता माँ के द्वार,
भक्ति श्रद्धा से शीश नवाता।
खाली झोली भरती माता,
मन चाहें मुरादें पाता।

माँ की महिमा को सबने गाया,
दुर्गा माँ ने पार लगाया।
माँ के चरणों में सुख,
समृद्धि, प्रेम का वरदान पाया।

कर लो माँ की नवरुपों में पूजा,
अर्चन भक्ति का उत्सव आया।
संसार मे माँ से बढ़कर,
कोई नहीं और पाया।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (नवरात्रि।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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विश्व साक्षरता दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विश्व साक्षरता दिवस। ♦

आठ सितंबर को सब मिलकर,
विश्व साक्षरता दिवस मनाएं,
हम सब मिलकर ऐसा अभियान चलाएं।
जीवन में पढ़ना, लिखना जरूरी है,
यह बात सबको बताएं,
इस अभियान में सबको शिक्षा का महत्व बताएं।

देश में कोई अनपढ़ न रहें,
यही बात बार-बार दोहराएं।
देश में सब शिक्षित हो,
भारत की शान बढ़ाएं।
जन जन को साक्षर बनाना है,
ऐसी अलख जगाएं,
देश में साक्षरता का ऐसा इंकलाब लाएं।

जब हम साक्षर होंगे,
देश हमारा आगे बढ़ेगा।
शिक्षित होगा समाज,
देश भी खुशहाल बनेगा।
देश के प्रति हम भी,
कुछ कर्तव्य निभाएं।
पढ़ लिख कर हम प्रगति,
करें देश का गौरव बढ़ाएं।
आओ सब मिलकर,
विश्व साक्षरता दिवस मनाएं।

हमको कितना कुछ देती है शिक्षा, शिक्षा हर इंसान को महान बनाता है॥
पहले तुम खुद को शिक्षित बनाओ, अपने बच्चों को तुम ख़ूब पढ़ाओ॥

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आठ सितंबर को सब मिलकर, विश्व साक्षरता दिवस मनाएं, हम सब मिलकर ऐसा अभियान चलाएं। जीवन में पढ़ना, लिखना जरूरी है, यह बात सबको बताएं। विश्व साक्षरता दिवस। इस दिन को शिक्षा के प्रचार के उद्देश्य से दुनिया भर में मनाया जाता है। किसी भी देश के विकास के लिए साक्षरता बहुत ही महत्वपूर्ण है। यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) के अनुसार, यह दिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को व्यक्तियों, समुदायों और समाजों के लिए साक्षरता के महत्व और अधिक साक्षर समाजों के लिए गहन प्रयासों की आवश्यकता की याद दिलाने के लिए मनाया जाता है।

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यह कविता (विश्व साक्षरता दिवस।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हिंदी भाषा और लिपि।

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♦ हिंदी भाषा और लिपि। ♦

विधा — आलेख।

विश्व की प्राचीन समृद्ध, सरल भाषा होने के साथ-साथ हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा भी है। वह दुनिया में हमें सम्मान भी दिलाती है, हिंदी ने हमें विश्व में एक नई पहचान दिलाई है। हिंदी दिवस भारत में हर वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एकमत से यह निर्णय लिया – कि हिंदी की खड़ी बोली ही भारत की राजभाषा होगी इस निर्णय को प्रतिपादित महत्व देते हुए हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर सन 1953 से संपूर्ण भारत में हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

हिंदी भाषा विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली दूसरी भाषा है। हिंदी राजभाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पसंद किया जाने लगा है। इसका एक कारण यह भी है भारतवर्ष की संस्कृति और संस्कारों का प्रतिबिंबित देश है।

आज विश्व के कोने-कोने से विद्यार्थी भारतीय संस्कृति और भाषा को सीखने के लिए आते हैं। भारत जब अंग्रेजों के अधीन था तब भी देश के महामानव और महान नेताओं ने एक राज्य भाषा की आवश्यकता को समझा। उन्होंने आजादी के साथ-साथ हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण कार्य किये। राष्ट्रभाषा हिंदी को राज भाषा की उपाधि दी है, उन्होंने कहा “राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा होता है” प्रत्येक राष्ट्र की अपनी राष्ट्रभाषा होती है।

राष्ट्रभाषा के जरिए ही हम राष्ट्र की एकता भाईचारे, सौहार्द, सद्भावना जैसे गुण, नागरिक में कर्तव्य का विकास करने में सहायक होता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान सभा ने हिंदी भाषा को देश की राजभाषा के रूप में सावधानिक मर्यादा प्रदान की है।

हिंदी दिवस को बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हिंदी दिवस, हिंदी सप्ताह, हिंदी पखवाड़ा आज कई रूपों में इस कार्यक्रम को मनाने का सिलसिला जारी है। खासकर सरकार के सभी कार्यालय उपक्रमों, निगमों, संस्थानों में यह दिवस बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

बैंक, रेलवे, तेल कंपनी सरकारी दफ्तर आदि संस्थानों में हिंदी दिवस पर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित होती है। भाषण में बड़े-बड़े महानुभावों को आमंत्रित किया जाता है, हिंदी में काम करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कार भी दिया जाता है। सरकारी क्षेत्रों में हिंदी को बढ़ावा देने हेतु पूरे सितंबर महीने तक अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदी भाषा के विकास में प्राप्त उपलब्धि को स्मरण किया जाता है।

पूरे भारतवर्ष में हिंदी सर्वाधिक बोली जाती है देश की 80% जनता हिंदी भाषा समझ सकती है। तथा अपने विचार को प्रकट कर सकती है, हिंदी भाषा सहज और सरल है इसे संस्कृत की भगनी भी कहा जाता है। हिंदी भाषा में प्रादेशिक भाषाओं का भी उपयोग किया जाता है। हिंदी भाषा देवनागरी लिपि है, पंजाबी, उड़िया, गुजराती, राजस्थानी आज कई भाषाओं के शब्द देखने को मिलते हैं। सभी भारतवासी को हिंदी भाषा पर गर्व है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हिंदी ने हमें एक नई पहचान दिलाई है, यह संपूर्ण विश्व में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में से एक है। हिंदी विश्व की सबसे प्राचीन, सरल और समृद्ध भाषाओं में से एक है। हिंदी संवैधानिक तौर पर राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई, लेकिन हम भारतीय हिंदी को ही अपनी राष्ट्रभाषा मानते हैं। पूरे भारतवर्ष में हिंदी सर्वाधिक बोली जाती है देश की 80% जनता हिंदी भाषा समझ सकती है। तथा अपने विचार को प्रकट कर सकती है, हिंदी भाषा सहज और सरल है इसे संस्कृत की भगनी भी कहा जाता है। हिंदी भाषा में प्रादेशिक भाषाओं का भी उपयोग किया जाता है। हिंदी भाषा देवनागरी लिपि है, पंजाबी, उड़िया, गुजराती, राजस्थानी आज कई भाषाओं के शब्द देखने को मिलते हैं। सभी भारतवासी को हिंदी भाषा पर गर्व है।

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यह लेख (हिंदी भाषा और लिपि।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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शिक्षक दिवस।

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♦ शिक्षक दिवस। ♦

प्रथम माँ होती शिक्षक जो हमें सिखाती संस्कार है,
पिता और गुरु से मिलता बालक को विद्या अपार है।

शिक्षक जीवन का आधार अंधकार में दीपक का प्रकाश है,
मावन जीवन का मानसिक विकास का होता गुरु आधार है।

ऋषि, मुनि ने भी शिक्षक की महिमा का गुणगान किया है,
उच्च शिक्षक का जीवन में होना, ईश्वर का वरदान है।

गुरु विद्या और गुणों का सागर, करते जीवन प्रकाशवान है,
व्यक्तित्व को निखारें संस्कारित जीवन का शिक्षक आधार है।

आचरण, सही, गलत, नैतिकता का पाठ पढ़ाते है,
कर्तव्य, संयम और धैर्य से सही पथ पर चलना सिखाते है।

अंतर्मन का तम हरने को ज्ञान का दीप जलाते है,
भले बुरे का भेद बताकर सबका मार्ग प्रशस्त करते है।

संस्कृति, इतिहास विग्रह साहित्य का देते सबको ज्ञान है,
सत्य, धर्म, सदाचार का पाठ पढ़ाते सच्चाई की राह पर चलना सिखाते है।

जीवन में सफलता हासिल होती देते ऐसे मूल मंत्र है,
देशभक्ति की भावना का करते विकास, जिससे बनता राष्ट्र खुशहाल है।

शिक्षक का जीवन में विशेष महत्व देते वो सभी को ज्ञान है,
शिक्षक की महिमा का हम गुणगान करते है।

शिक्षक ही मजबूत नींव की आधारशिला है,
शिक्षक के चरणों में करते नमन बारम्बार है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक शिक्षक ही होते है जो हमे अच्छी और बुरी आदतों का पहचान करवाते है और वो हमारी बुरी आदतों को छोड़वाने का दिल से पूर्ण प्रयास भी करते हैं। हमें अच्छी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करते है, सदैव ही आगे बढ़ने का सही ज्ञान देते है। वो शिक्षक ही होते है जो हमें ईर्ष्या, हिंसा, अधर्म, चोरी जैसी बुरी आदतों से दूर रखते है। शिक्षक ही, सही आचरण, नैतिकता का पाठ पढ़ाते है, कर्तव्य, संयम और धैर्य से सही पथ पर चलना सिखाते है। भारत में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्म दिवस अर्थात 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। उन्होंने अपने छात्रों से अपने जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस मनाने की इच्छा जताई थी। पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ राधाकृष्‍णन का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

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यह कविता (शिक्षक दिवस।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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गुरु पूर्णिमा।

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♦ गुरु पूर्णिमा। ♦

हिंदू मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा का त्यौहार आषाढ़ माह में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी बढ़कर माना जाता है। संस्कृति में “गु” का अर्थ होता है अंधकार (अज्ञान) एवं “रु” का अर्थ होता है प्रकाश, ज्ञान गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से (ज्ञान) रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं।

गुरु को महत्व देने के लिए महान गुरु वेदव्यास जी की जयंती पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इसी दिन भगवान शिव द्वारा अपने शिष्यों को ज्ञान दिया गया।

इस दिन कई महान गुरुओं का जन्म भी हुआ था, लोगों को ज्ञान की प्राप्ति हुई। इसी दिन गौतम बुद्ध ने धर्म चक्र का परिवर्तन किया था। इस दिन गुरु पूजन का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म के अनुसार यह तिथि वेदव्यास की जयंती भी मनाई जाती है और विधिवत पूजन भी किया जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार महर्षि वेद व्यास जी का भी जन्म हुआ था और इन्हें प्रथम गुरु का स्थान भी मिला है।

सारनाथ में गौतम बुद्ध अपने पहले 5 शिष्यो को पहला उपदेश देने के लिए गुरु पूर्णिमा मनाई जाती रही है। हिंदू और जैन धर्म में भी अपने शिक्षकों का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। हिंदू धर्म का प्रमुख त्यौहार है गुरु ही शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और वही जीवन को पूर्ण बनाते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका मानी गई है। जीवन के विकास के लिए गुरु की अत्यधिक की आवश्यकता होती है।

गुरु के साथ रहकर प्रवचन आशीर्वाद अनुग्रह जैसे; गुरु जो मिल जाए तो उसका कृतार्थ जीवन भर रहता है। क्योंकि बिना गुरु के न आत्म दर्शन होता है न ही परमात्मा दर्शन इस दिन गुरु दीक्षा भी लेने का अवसर होता है।

गुरु हमें जिंदगी में एक जिम्मेदार और अच्छा इंसान बनाने में हमारी सहायता करते हैं। वही हमें जीवन जीने का असली तरीका सिखाते हैं; और वही हमें जीवन के राह पर ता-उम्र सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। जिस तरह से शिक्षक हमें शिक्षा और ज्ञान के जरिए बेहतर इंसान बनाने के लिए जो मेहनत करता है। वही स्थान गुरु का होता है।

गुरु हमें अंधकार भरे जीवन से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु एक दीपक की भांति होता है जो अपने शिष्यों के जीवन को प्रकार से भर देते हैं। विद्यार्थी जीवन में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गुरु विद्यार्थी को हर प्रकार के विषय से संबंधित ज्ञान देते हैं; और जीवन के अलग-अलग पड़ाव पर मुसीबतों से लड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। गुरु के बिना किसी का कोई जीवन नहीं होता है गुरु ही शिष्य के व्यक्तित्व का विकास करने में अत्यधिक सहायक होते हैं।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — गुरु हमें जिंदगी में एक जिम्मेदार और अच्छा इंसान बनाने में हमारी सहायता करते हैं। वही हमें जीवन जीने का असली तरीका सिखाते हैं; और वही हमें जीवन के राह पर ता-उम्र सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। गुरु हमें अंधकार भरे जीवन से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु एक दीपक की भांति होता है जो अपने शिष्यों के जीवन को प्रकार से भर देते हैं। विद्यार्थी जीवन में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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डॉक्टर दिवस।

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♦ डॉक्टर दिवस। ♦

भारत में हर साल 1 जुलाई को डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ बिधान चंद्र राय द्वारा दिए गए योगदान के लिए हम इस दिन को उनके जन्म दिवस और पुण्यतिथि के रूप में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सम्मान पूर्वक मनाते हैं। वह एक स्वतंत्रता सेनानी और चिकित्सक थे, उन्हें सन 1961 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्होंने भारत में शिक्षा के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी इनका जन्मदिन और पुण्यतिथि दोनों 1 जुलाई को थे।

इस महत्वपूर्ण तिथि को मनाने के बहुत सारे कारण भी हैं, सभी डॉक्टर मानवता की सेवा करने और उन लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने महान आदर्श के साथ अपने पेशे से जीवन शुरू करते हैं। कुछ डॉक्टर इन विचारों की दृष्टि से खरे नहीं उतरते हैं और भ्रष्ट और नैतिकता का रास्ता अपना लेते हैं।

लेकिन कोरोना महामारी के समय डॉक्टरों ने जो अपना समय मानवता की सेवा के लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए जो जनता सेवा की है। वह एक प्रशंसनीय कार्य है अपनी जान जोखिम में डालकर डॉक्टरों ने लाखों लोगों को इस बीमारी से मुक्त कराया। हम इस बात को नहीं नकार सकते कि डॉक्टर भी भगवान के रूप में कार्य करते हैं।

डॉक्टर का जीवन निस्वार्थ सेवा से भरा हुआ होता है। बहुत ही कुछ ऐसे डॉक्टर होते हैं; जो अनैतिकता के कार्य करते हैं, जिन्हें पैसे का लालच होता है। डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है जो डॉक्टर मानव की सेवा करने के लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए सेवा करते हैं। वह भगवान के समान होते हैं। इस दिन को हम शांत और गंभीर तरीके से मनाते हैं। आमतौर पर देश के अनेक हिस्सों में डॉक्टरों के योगदान के लिए उन्हें फूलों के गुलदस्ते या ग्रीटिंग कार्ड्स भी दिए जाते हैं।

इसके अलावा जहां अच्छे डॉक्टरों को उनके अनुभवों को साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। अनेक सेमिनार आयोजित किए जाते हैं और कुशल डॉक्टरों को सम्मानित किया जाता है।

डॉक्टर दिवस का लाल रंग जो साहस का प्रतीक है, फूलों के रंग से जो प्रेम धर्मार्थ बलिदान, बहादुरी, मानवता की सेवा और साहस को दर्शाते है। यह मेडिकल प्रोफेशनल और उनके द्वारा किए गए योगदान के लिए सम्मान है। डॉक्टर अपनी हर सम्भव किसी भी मनुष्य को ठीक करने लिए प्रयासरत रहते है उनका कर्म ही उनकी पूजा है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक अच्छे डॉक्टर का जीवन निस्वार्थ सेवा से भरा हुआ होता है। डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है जो डॉक्टर मानव की सेवा करने के लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए सेवा करते हैं। भारत में हर साल 1 जुलाई को डॉक्टर दिवस मनाया जाता है डॉ बिधान चंद्र रॉय द्वारा दिए गए योगदान के लिए हम इस दिन उनके सम्मान के रूप में उन्हें श्रद्धांजलि देते है। वह चिकित्सक तथा स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्हे वर्ष 1961 में भारत रत्न से सम्मनित किया गया।

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यह लेख (डॉक्टर दिवस।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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जीवन भी एक उड़ती पतंग।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीवन भी एक उड़ती पतंग। ♦

जीवन भी एक उड़ती पतंग तरह है,
कभी इधर लहराती कभी उधर लहराती है।
कभी नीचे जाती कभी ऊपर आती है,
हवा के रुकने से वो उड़ नहीं पाती है।

जब ऐसे में दो पतंग आपस में उलझे,
एक पतंग का कटना और गिरना निश्चित समझे।
जिस उमंग से पतंग उड़ती वही हवा का झुकाव रखती है,
पेंच का ही खेल सही रहता जो सब विधा में माहिर है।

पतंग का धागा अगर मजबूत हो तो गिरना नामुकिन है,
कोई गाँठ कमजोर न हो ये देखना होता है।
वैसे ही जीवन में अगर रिश्ते मजबूत है,
खुशहाल जीवन भी उसी का होता है।

पतंग भी एक अजीब खेल खेलती है,
कभी अपने ही धागे में उलझ कर कट जाती है।
वैसे ही रिश्ते भी कभी कभी इतने उलझ जाते है,
लाख कोशिश करने बाद सुलझ नहीं पाते है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इंसान का जीवन भी एक उड़ती पतंग की तरह है, कभी इधर लहराती है तो कभी उधर लहराती है, कभी नीचे जाती तो कभी ऊपर आती है। हवा के रुकने से वो उड़ नहीं पाती है। हम सभी जानते है की पतंग का धागा अगर मजबूत हो तो गिरना नामुकिन होता है, कोई गाँठ कमजोर न हो ये देखना होता है। वैसे ही जीवन में भी अगर रिश्ते मजबूत हो तो, खुशहाल जीवन होता है। जैसे पतंग कभी-कभी अपने ही धागे में उलझ कर कट जाती है, वैसे ही रिश्ते भी कभी-कभी इतने उलझ जाते है, लाख कोशिश करने के बाद भी सुलझ नहीं पाते है।

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यह कविता (जीवन भी एक उड़ती पतंग।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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योग दिवस।

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♦ योग दिवस। ♦

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। पहला अंतराष्ट्रीय योग दिवस 2015 में मनाया गया था तबसे ही इसकी शुरूआत हुई। इस दिन विश्व में करोड़ो लोगों ने योग किया। योग व्यायाम एक प्रभावशाली प्रकार है जिसके माध्यम से शरीर के अन्य अंगों को मजबूत बनाया जा सकता है।

मन, मस्तिष्क और आत्मा में संतुलन बनाया जाता है योग से अनेक प्रकार के लाभ होते है जब हम ज्यादा थकान महसूस करते है तो योगा करने से हमें थोड़ी शांति मिलती है ये अनेक प्रकार से लाभकारी है यही कारण है योग से शारीरिक और मानसिक बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है।

योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द के युज शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है आत्मा का सार्वभोमिक मिलन चेतना से होता है।

योग दस हजार वर्ष से अपनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में योग साधु, संतों के द्वारा प्राचीन काल से अपनाया गया है। योग की महिमा को आधुनिक युग में एक विधा के रूप अपनाया गया है।

आज की जीवन शैली को देखते हुए यह बहुत जरूरी हो गया है कि हम अपनी व्यस्त जिंदगी में से थोड़ा समय निकाल कर योग करें और अपने स्वास्थ्य को ठीक रखें। जब शरीर स्वस्थ होगा तो मन भी स्वस्थ होगा। जब ही देश का हर एक नागरिक स्वस्थ होगा तब ही वो देश की सेवा में अपना सहयोग दे पाएंगे।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ही इस दिन को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया था। योग का अभ्यास एक बेहतर इंसान बनने के साथ एक तेज दिमाग, स्वस्थ दिल और एक सुकून भरे शरीर को पाने के तरीकों में से एक है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — योग आकाश के नीचे लगभग किसी भी बीमारी को ठीक कर सकता है। वास्तव में यह कहना उचित होगा कि यदि आप प्रतिदिन योग का अभ्यास करते हैं तो आप सभी रोगों से मुक्त रह सकते हैं। योग एक कला है जो हमारे शरीर, मन और आत्मा को एक साथ जोड़ता है और हमें मजबूत और शांतिपूर्ण बनाता है। योग आवश्यक है क्योंकि यह हमें फिट रखता है, तनाव को कम करने में मदद करता है और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखता है और एक स्वस्थ मन ही अच्छी तरह से ध्यान केंद्रित करने में सहायता कर सकता है। योग के अभ्यास की कला व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। यह भौतिक और मानसिक संतुलन कर के शान्त शरीर और मन प्राप्त करवाता हैं। तनाव और चिंता का प्रबंधन करके आपको राहत देता हैं। यह शरीर में लचीलापन, मांसपेशियों को मजबूत करने और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ाने में भी मदद करता हैं।

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