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सोशल मीडिया का बच्चों पर प्रभाव

सोशल मीडिया और बच्चे।

Kmsraj51 की कलम से…..

Social Media and Kids | सोशल मीडिया और बच्चे।

आजकल के समय में सोशल मीडिया का विस्तार बड़ी तेजी से हो रहा है। इससे बच्चों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है यदि बच्चों की उम्र छोटी होती है। तो स्मार्ट फोन के आदि होते जा रहे हैं और अपना अधिक समय इनके साथ ही बिताना पसंद करते हैं। वही बच्चों पर सोशल मीडिया के अच्छे और बुरे दोनों तरह के प्रभाव पड़ते हैं।

अगर बच्चा किसी कारण से स्कूल नहीं जा पाता है तो उसकी अगर क्लास छूट जाती है, तो वह सोशल मीडिया की मदद से उसे पूरा कर सकता है। बच्चों की क्लास के ग्रुप बना दिए जाते हैं। जिससे शिक्षकों से संपर्क कर सकें और छुटी हुए क्लास के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। इसके अलावा शिक्षकों से अपने डाउट्स आदि भी क्लियर कर सकते हैं।

कोरोना काल के समय यह अच्छा उदाहरण साबित हुआ है अगर किसी सवाल का जवाब नहीं मिलता है, तो वह यूट्यूब की मदद से उस सवाल के जवाब को समझ सकता है। जिससे लिखने में काफी हद तक मदद मिल जाती है। इसके अलावा फेसबुक के जरिए दोस्त रिश्तेदारों से जुड़कर अपनी पढ़ाई में मदद ली जा सकती है। टीवी के अलावा सोशल मीडिया को भी मनोरंजन का एक साधन माना गया है। जिसके जरिए बच्चे सकारात्मक चीजों को देखकर अपना मनोरंजन कर सकते हैं, और अच्छी आदतों को भी अपना सकते हैं।

  • इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से रचनात्मक, और अपनी रुचि के अनुसार बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है। जिससे वह अपनी अलग पहचान बना सकता है। हर सिक्के के दो पहलू होते है सोशल मीडिया से बच्चों पर सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है।
  • जैसे बच्चे स्मार्ट फ़ोन पर गेम खेलते है उनका उनके दिमाग पर असर देखा जा सकता है। सोशल मीडिया का एक और फायदा यह भी है कि यह बच्चों को खुलकर बोलने का मौका देता है। जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और बच्चे आज के समय के अनुसार चलते हैं।
  • लेकिन सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव भी हैं जिसे हम नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं। अगर बच्चा आपके सामने स्मार्ट फोन का प्रयोग करता है। तो आपको उसकी रुचि और अरुचि को समझने में काफी हद तक सुविधा मिल जाती है, और आप उस पर नजर भी रख सकते हैं और क्या देख रहा है और किन चीजों में उसकी रुचि है।
  • इससे उसमें आत्मविश्वास की भावना की जाग्रति होती है वह सबके सामने खुलकर बोल सकता है। सोशल मीडिया के जरिये अपनी प्रतिभा का भी प्रदर्शन कर सकता है।
  • सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों की मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। इस पर हुए एक शोध से जानकारी मिलती है कि स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से बच्चों में मानसिक परेशानी की भी बढ़ोतरी हो सकती है। उनके संज्ञानात्मक नियंत्रण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • सोशल मीडिया जोखिम भी पैदा कर सकता है। आपके बच्चे के लिए, इन जोखिमों में शामिल हैं: अनुचित या परेशान करने वाली सामग्री, जैसे आक्रामक, हिंसक या यौन टिप्पणियों या छवियों के संपर्क में आना। अनुचित सामग्री अपलोड करना, जैसे शर्मनाक या उत्तेजक तस्वीरें या स्वयं या दूसरों के वीडियो।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कुल मिलकर यदि सोशल मीडिया का उपयोग बच्चे सही तरीके से अच्छे कार्यों के लिए करे वह भी केवल जरूरत के हिसाब से निश्चित समय के लिए तो ठीक है व फायदेमंद है। एक संरक्षक होने के नाते यह भी याद रखे की – इसकी लत छात्रों में ज्यादा लगती है यह छात्रों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। छात्रों की पढ़ाई, उनका जीवन सब दांव पर लग जाता है। वह पढ़ाई से मन चुराने लगते हैं। व्हाटस्एप्प, फेसबुक और इंस्टाग्राम छात्रों को सबसे ज्यादा भटकाता है। सोशल मीडिया जोखिम भी पैदा कर सकता है। आपके बच्चे के लिए, इन जोखिमों में शामिल हैं: अनुचित या परेशान करने वाली सामग्री, जैसे आक्रामक, हिंसक या यौन टिप्पणियों या छवियों के संपर्क में आना। अनुचित सामग्री अपलोड करना, जैसे शर्मनाक या उत्तेजक तस्वीरें या स्वयं या दूसरों के वीडियो।

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यह लेख (सोशल मीडिया और बच्चे।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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सोशल मीडिया – भारत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सोशल मीडिया – भारत। ♦

भारत पहले सबको मिलकर समझाता है।
सभ्यता और संस्कृत का उसको ज्ञान कराता है।
भारत की संस्कृति में यही कहा जाता है,
सबको यह पहले बहुत खूब समझाता है।

मनमानी करने वालों को ज्ञान पहले बताता है।
नियम और कानून का ध्यान उसको कराता है।
त्याग और तपस्या का भी पाठ उसे पढ़ाता है।
अहिंसा और शांति का संदेश उसको सिखाता है।

पुरुषोत्तम का देश है भारत उनका मान दिखाता है।
सूर्पनखा रावण की बहना उसको भी समझाता है।
श्रीराम द्वारा लक्ष्मण की तरफ ध्यान दिया जाता है।
इधर उधर जाकर भी जब नहीं मानती शूर्पणखा है।

अंत कोप भाजन से नाक अपनी कटवा दी है।
जबकि श्रीराम द्वारा उसको समझाया जाता है।
एक कथा और सुनाने का मन कर जाता है।
बालकृष्ण के पास कंस की बहन को भेजा जाता है।

उसका भी अंत श्री कृष्ण द्वारा किया जाता है।
कहने का तात्पर्य ही है जो भारत में आया है,
भारत के बने कानून का पालन उसको करना है।
मनमानी इस देश में कहीं नहीं चलने वाला है।
एक समय तक ही उसको छूट दिया जाता है।

इसलिए नियम कानून के अंदर काम करने हैं।
शांति और विश्व बंधुत्व से यहां पर आने हैं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – यह आर्यावर्त – हमारा भारत देश है, हम सभी का दिल से सम्मान करते है यहाँ। लेकिन यहाँ पर रहना है तो – भारत के बने कानून का पालन उसको करना है। मनमानी इस देश में कहीं नहीं चलने वाला है, एक समय तक ही उसको छूट दिया जाता है। इसलिए नियम कानून के अंदर काम करने हैं। शांति और विश्व बंधुत्व से यहां पर आने हैं।

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यह कविता (सोशल मीडिया – भारत।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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