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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Kmsraj51

स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली।

Kmsraj51 की कलम से…..

Healthy Lifestyle | स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली।

स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का महत्व

स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली एक सुखद और उत्तम जीवन जीने का माध्यम है। यह हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने में मदद करता है। सही आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सकारात्मक सोच इसे प्राप्त करने के महत्वपूर्ण घटक हैं।

सही आहार

स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का पहला कदम सही आहार है। हमें प्रतिदिन विभिन्न प्रकार के पोषण से भरपूर आहार लेना चाहिए। फल, सब्जियां, पूरे अनाज, प्रोटीन और पर्याप्त मात्रा में पानी शरीर के लिए आवश्यक हैं। बेहतर है कि अच्छे से पका हुआ और फाइबर-युक्त आहार लें और तला-भुना खाना कम से कम लें या बिलकुल भी ना ले तो बहुत अच्छा।

नियमित व्यायाम

नियमित व्यायाम करना भी स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, मानसिक तनाव को कम करता है और बीमारियों से बचाव में मदद करता है। योग, ध्यान, चलना, दौड़ना या व्यायामशाला में कसरत करना विभिन्न विकल्प हो सकते हैं।

धूप में समय बिताना

धूप में समय बिताना विटामिन डी की आपूर्ति को बढ़ावा देता है और मनोबल को बढ़ावा देता है। सुरज की किरणों का संतुलित रूप से समय पर प्राप्त करने का प्रयास करें।

पर्याप्त नींद

नींद की पर्याप्त मात्रा मिलना भी आवश्यक है क्योंकि यह हमारे शरीर की पुनर्निर्माण क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है। 7-8 घंटे की नींद लेने से हमारी मानसिक तथा शारीरिक स्थिति अच्छी बनी रहती है।

मानसिक शांति

मानसिक तनाव को दूर करने के लिए मानसिक शांति का भी महत्व है। योग, मेडिटेशन, प्रार्थना और सकारात्मक सोच इसमें मदद कर सकते हैं। समय-समय पर अपने मन की बातें एक दोस्त या परिवार के साथ साझा करना भी आरामदायक होता है।

सकारात्मक सोच

सकारात्मक सोच स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमें सकारात्मक दृष्टिकोण रखकर जीवन के हर क्षेत्र में काम करना चाहिए। आत्म-संवाद और आत्म-मोटिवेशन की शक्ति स्वास्थ्य और खुशी को बढ़ावा देती है।

संक्षिप्त रूप में, स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली का पालन करने से हम अपने शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ और खुश रख सकते हैं। सही आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मानसिक शांति और सकारात्मक सोच के साथ, हम जीवन का हर क्षण उत्साहित और सकारात्मक ढंग से आनंदित कर सकते हैं।


अच्छे स्वास्थ्य के लिए क्या खाये व क्या न खाएं?

अच्छे स्वास्थ्य के लिए सही आहार का महत्वपूर्ण योगदान होता है। आपका आहार आपके शरीर के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव डालता है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप सही खाद्य सामग्री का सेवन करें और खराब आदतों से बचें। आपको अच्छे स्वास्थ्य के लिए सही आहार चुनने में मदद करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव—

सही आहार 

फल और सब्जियां: फल और सब्जियां पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों का सेवन करें ताकि आपको विभिन्न पोषण घटक मिल सके। पोषण युक्त फल और सब्जियां — पोषण से भरपूर फल और सब्जियां आपके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। यहाँ कुछ पोषण युक्त फल और सब्जियों की सूची दी गई है:

फल: 

  • सेब: सेब में फाइबर, विटामिन सी, पोटैशियम और एंटिऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • केला: केले में पोटैशियम, विटामिन C, फाइबर और विटामिन B6 पाए जाते हैं, जो सही हृदय स्वास्थ्य और पाचन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
  • अंगूर: अंगूर में एंटिऑक्सिडेंट्स, विटामिन C, विटामिन K और फाइबर होता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • नारंगी: नारंगी विटामिन C का एक अच्छा स्रोत है और इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है।
  • पपीता: पपीता विटामिन C, विटामिन A, पोटैशियम और पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम पेपेन का एक अच्छा स्रोत होता है।

सब्जियां:

  • पालक: पालक में आयरन, कैल्शियम, विटामिन K, विटामिन C और फाइबर होता है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
  • गाजर: गाजर विटामिन A का एक अच्छा स्रोत होता है, जो दृष्टि को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • ब्रोकली: ब्रोकली में फाइबर, विटामिन C, विटामिन K, फोलेट और एंटिऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
  • शिमला मिर्च: शिमला मिर्च में विटामिन C, विटामिन A और पोटैशियम होता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • गोभी: गोभी में विटामिन C, विटामिन K, फाइबर और अन्य पोषण स्रोत होते हैं, जो वजन प्रबंधन और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

याद रखें, कि यह तो सिर्फ कुछ ही फल और सब्जियों की सूची हैं, और अन्य फल और सब्जियां भी आपके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। अपने आहार में विविधता और संतुलन बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • पूरे अनाज: गेहूँ, चावल, जौ, बाजरा, आदि जैसे पूरे अनाज का सेवन करें।
  • प्रोटीन स्रोत: दूध, दही, पनीर, दालें और सोया प्रोटीन सेवन करने से मांसपेशियों का निर्माण होता है।
  • हेल्दी फैट्स: अखरोट, बादाम, मूंगफली, तिल, अवोकाडो और जैतून तेल जैसे हेल्दी फैट्स सेवन करें।
  • पर्याप्त पानी: दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने का प्रयास करें।
  • फाइबर युक्त आहार: फाइबर से भरपूर आहार का सेवन करें, जैसे कि खाद्य समृद्धि, दलिया, ब्राउन चावल आदि।
  • अधिकतम अंतराष्ट्रीय खाद्य सामग्री से बचें: जंक फूड, सोडा, प्रोसेस्ड मीट, बिस्किट, चिप्स आदि को शामिल न करें अपने आहार में।

सावधानी से सेवन करें:

  1. आलस्यकारी आहार: ज्यादा मिठाई, बकरे का मांस, परांठे आदि का सेवन करने से बचें।
  2. अत्यधिक तले हुए खाने: तले हुए खानों का सेवन बढ़े हुए कैलोरी का कारण बन सकता है।
  3. अत्यधिक शक्कर और मिठाई: शक्करीय और मिठाई का अत्यधिक सेवन करने से डायबिटीज़, बेहद उच्च रक्तचाप आदि की समस्याएं हो सकती हैं।
  4. अधिक नमकीन और प्रोसेस्ड खाद्य: नमकीन और प्रोसेस्ड खाद्य सामग्री का सेवन कम करें, क्योंकि यह उच्च रक्तचाप के कारण बन सकते हैं।
  5. शराब और धूम्रपान: शराब और धूम्रपान के सेवन से बचें, क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  6. अत्यधिक कैफीन: अत्यधिक कैफीन के सेवन से बचें, क्योंकि यह नींद को प्रभावित कर सकता है।

सही आहार चुनने में सतर्क रहें और विभिन्न पोषण स्रोतों से पर्याप्त मात्रा में पोषण प्राप्त करने का प्रयास करें। यदि आपको कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या हो, तो आपको एक पेशेवर चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।

♦ KMSRAJ51 – संपादकीय ♦

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— Conclusion —

  • “KMSRAJ51“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। इसमें नियमित शारीरिक गतिविधियाँ जैसे कि योग, व्यायाम, ध्यान, और सही आहार लेना शामिल हैं। व्यायाम और योग से शरीर का विषाक्त बाहर निकलता है, मानसिक तनाव कम होता है और ऊर्जा स्तर बढ़ता है। सही आहार खाना भी महत्वपूर्ण है। फल, सब्जियाँ, पूरे अनाज, प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, और पर्याप्त पानी पीना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। नियमित खानपान से असमय में वजन बढ़ने का खतरा कम होता है और महत्वपूर्ण पोषण प्राप्त होता है। स्वस्थ मानसिकता भी जरूरी है। योग और ध्यान से मानसिक शांति बनी रहती है, तनाव कम होता है और मानसिक स्थिरता मिलती है। सही नींद, विश्राम, और मनोरंजन भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। तंबाकू और अधिक मात्रा में शराब की तरह की खराब आदतों से बचना भी जरूरी है। यह सभी उपाय स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली की नींव होते हैं और व्यक्ति को दीर्घायु और उत्तम जीवन की दिशा में मदद करते हैं।

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आयुर्वेद का उपयोग करने के 10 कारण।

Kmsraj51 की कलम से…..

10 Reasons To Use Ayurveda | आयुर्वेद का उपयोग करने के 10 कारण।

आयुर्वेद क्या है?

आयुर्वेद एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जो शरीर, मन, और आत्मा के संतुलन को सुधारने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्राकृतिक तरीके से उपचार करती है। यह भारतीय संस्कृति और वैदिक शास्त्रों में प्रत्येक पहलू, विशेषतः आयुर्वेदीय ग्रंथ ‘चरक संहिता’, ‘सुश्रुत संहिता’, ‘अष्टांग हृदय’, और ‘अष्टांग संग्रह’ में विवरणित है।

आयुर्वेद विश्वास के अनुसार, हर व्यक्ति में तीन दोष या शारीरिक भावों का संतुलन होता है – वात, पित्त, और कफ। अगर ये तीनों दोष संतुलित रहते हैं, तो व्यक्ति स्वस्थ रहता है। लेकिन इनमें से किसी एक या अधिक दोषों का असंतुलन होने पर विविध रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

आयुर्वेद में विभिन्न उपचार प्रणालियों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि:

  1. आहार और पौष्टिक तत्वों का उपयोग करके रोगों का उपचार।
  2. जड़ी-बूटियों, पौधों, और वनस्पतियों से बने औषधियों का उपयोग।
  3. रसायन, धार्मिक विधियों, और योग आसनों का उपयोग शरीर के और मन के संतुलन को सुधारने के लिए।
  4. पंचकर्म चिकित्सा विधि, जो शरीर की शुद्धि के लिए उपयुक्त है।
  5. स्वदेशी और प्राकृतिक उपचारों का प्रचलन करना।

आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को संतुलित और स्वस्थ जीवन जीने के लिए संदेहात्मक और पूर्वजन्म के अनुभवों पर आधारित सामग्री का उपयोग कर उपचार करना है। यह चिकित्सा पद्धति शरीर, मन, और आत्मा के बीच संतुलन को स्थायी रूप से सुधारने का प्रयास करती है और व्यक्ति को स्वस्थ और समृद्ध जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।

औषधीय पौधे और जड़ी बूटियां

आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियों का उपयोग रोगों के उपचार में किया जाता है। नीचे कुछ जड़ी-बूटियों के नाम दिए गए हैं:

  1. अश्वगंधा (Ashwagandha)
  2. ब्राह्मी (Brahmi)
  3. गुडूची (Guduchi)
  4. शतावरी (Shatavari)
  5. अर्जुन (Arjuna)
  6. तुलसी (Tulsi)
  7. नीम (Neem)
  8. बिल्व (Bilva)
  9. खीरा (Kheera)
  10. कूटकी (Kutki)
  11. विदारिकंद (Vidarikand)
  12. मुलेठी (Mulethi)
  13. हरीतकी (Haritaki)
  14. बहेरा (Bahera)
  15. अमला(आंवला) (Amla)
  16. धतकी (Dhataki)
  17. गोखरू (Gokhru)
  18. गुग्गुल (Guggul)
  19. जीरक (Jeerak)
  20. जलपूरी (Jalapuri)
  21. कुलत्थ (Kulath)
  22. मांजिष्ठा (Manjishtha)
  23. पिप्पली (Pippali)
  24. पुनर्नवा (Punarnava)
  25. दारुहल्दा (Daruharidra)
  26. पशनभेद (Pashanbhed)
  27. वासा (Vasa)
  28. विदंग (Vidang)
  29. अरण्डी (Arandi)
  30. सोमवल (Somavalli)
  31. नागरमोथा (Nagarmotha)
  32. सर्पगंधा (Sarpagandha)
  33. गुडूची (Guduchi)
  34. सफेद मूसली (Safed Musli)
  35. चिरायता (Chirayata)
  36. काली मिर्च (Kali Mirch)
  37. निम्बू (Nimbu)
  38. पुदीना (Pudina)
  39. विदारी (Vidari)
  40. कुटज (Kutaj)
  41. लोध्र (Lodhra)
  42. स्थाली (Stahli)
  43. सोनाखड़ी (Sonakhadi)
  44. सारिवा (Sariva)
  45. द्राक्षा (Draksha)
  46. कृष्ण तुलसी (Krishna Tulsi)
  47. तेज पत्ता (Tej Patta)
  48. अमृता (Amrita)
  49. रामा तुलसी (Rama Tulsi)
  50. मोचरस (Mochras)
  51. जलनीम (Jalneem)

कृपया ध्यान दें कि जड़ी-बूटियों के उपयोग से पहले विशेषज्ञ वैद्य या चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है। वे आपके रोग के लिए उचित उपचार का सुझाव देंगे।

आयुर्वेदा अमृत की तरह क्यों है?

प्राचीनता: आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा पद्धति में सबसे प्राचीन और विश्वसनीय चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। इसका इतिहास हजारों वर्षों से भी पुराना है और वेदों और पुराणों में भी उल्लेख किया गया है। आयुर्वेद प्राकृतिक उपचारों का प्रचलन करता है जो जड़ी-बूटियों, पौधों, मिश्रण, और आयुर्वेदीय औषधियों से बने होते हैं। इन्हें बनाने के लिए केवल प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग होता है, जो साधारणतः दुष्प्रभाव नहीं देती।

आयुर्वेद, भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति है जिसे हजारों वर्षों से प्रयोग किया जा रहा है। यह चिकित्सा पद्धति शरीर, मन, और आत्मा के संतुलन को सुधारने और रोगों को रोकने और उन्हें ठीक करने के लिए प्राकृतिक तरीके से उपचार करती है। आयुर्वेद को अपनाने के कुछ मुख्य कारण हैं:

  1. पूर्ण चिकित्सा पद्धति: आयुर्वेद शारीरिक, भावनात्मक, और आध्यात्मिक स्तर पर रोगों के कारणों को समझती है और इन्हें पूर्णता से ठीक करने का प्रयास करती है।
  2. प्राकृतिक चिकित्सा: आयुर्वेद नेचुरल और प्राकृतिक उपायों का प्रयोग करती है, जो साधारणतः दुष्प्रभाव नहीं देते हैं।
  3. व्यक्ति-विशेष चिकित्सा: आयुर्वेद व्यक्ति के प्रकृति और प्रकृति के अनुसार चिकित्सा विधि का चयन करती है, जिससे उपचार की प्रभावीता बढ़ती है।
  4. संतुलन को सुधारना: आयुर्वेद शरीर, मन, और आत्मा के बीच संतुलन को सुधारती है, जिससे रोगों के उत्थान को रोका जा सकता है।
  5. रोगों के प्राकृतिक उपचार: आयुर्वेद बीमारियों के उपचार के लिए जड़ी-बूटियों, औषधि पौधों, मिश्रण, रसायन, धार्मिक विधियों, और योग आसनों का उपयोग करती है।
  6. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: आयुर्वेद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को समान महत्व देती है, जिससे संपूर्ण चिकित्सा के लाभ मिल सकें।
  7. निरोगी जीवनशैली: आयुर्वेद नियमित और स्वाभाविक जीवनशैली के पालन को प्रोत्साहित करती है, जिससे बीमारियों का सामान्य जन्मना और उनका बढ़ना कम होता है।
  8. विश्वास की गहराई: आयुर्वेद को भारतीय संस्कृति में विश्वास की गहराई से जोड़ा गया है, और इसे लोग एक सतत और सुरक्षित उपचार विकल्प के रूप में देखते हैं।
  9. दुर्वास्तुप्रतिवाद: आयुर्वेद को दुर्वास्तुप्रतिवाद यानी नैदानिक चिकित्सा के अनुसार काम करने की दृष्टि से भी मान्यता मिलती है।
  10. ब्रह्मांड के साथ समन्वय: आयुर्वेद में ब्रह्मांड और मानव शरीर के बीच सम्बंध को ध्यान में रखते हुए उपचार किया जाता है।

यह कुछ कारण हैं, जिनके कारण लोग आयुर्वेद को अपना रहे हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि — आयुर्वेद के उपयोग से पहले एक विशेषज्ञ वैद्य या चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।

♦ KMSRAJ51 – संपादकीय ♦

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— Conclusion —

  • “KMSRAJ51“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस Article में समझाने की कोशिश की है — आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा पद्धति में सबसे प्राचीन और विश्वसनीय चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। इसका इतिहास हजारों वर्षों से भी पुराना है और वेदों और पुराणों में भी उल्लेख किया गया है। आयुर्वेद प्राकृतिक उपचारों का प्रचलन करता है जो जड़ी-बूटियों, पौधों, मिश्रण, और आयुर्वेदीय औषधियों से बने होते हैं। इन्हें बनाने के लिए केवल प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग होता है, जो साधारणतः दुष्प्रभाव नहीं देती। आयुर्वेद, भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति है जिसे हजारों वर्षों से प्रयोग किया जा रहा है। यह चिकित्सा पद्धति शरीर, मन, और आत्मा के संतुलन को सुधारने और रोगों को रोकने और उन्हें ठीक करने के लिए प्राकृतिक तरीके से उपचार करती है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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10th Foundation Day of KMSRAJ51

Kmsraj51 की कलम से…..

10th Foundation Day of KMSRAJ51 | KMSRAJ51 का 10वां स्थापना दिवस

10th Anniversary of KMSRAJ51

दिल से निकलती एक चिंगारी देखते ही देखते कब वट वृक्ष का रूप ले लिया, उस अनंत सत्ता (GOD) की कृपा से पता ही नहीं चला की एक दशक (10 Years) कब बीत गया, भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता के लिए सेवा करते हुए। यह KMSRAJ51.COM मात्र एक वेबसाइट नही है, यह तो एक महायज्ञ है।

जब कोई कार्य आपकी अंतरात्मा व दिल से जुड़ जाता हैं तो – कितना भी बड़ा विघ्न क्यों ना आये उस कार्य में, आप पूरी ऊर्जा के साथ उस कार्य को आगे बढ़ाते रहते हैं। इस महायज्ञ के कार्य की जो आग लगी है दिल में वही आग इस कार्य को करने की शक्ति दे रही है।—KMSRAJ51

जब हमने यह वेबसाइट (KMSRAJ51.COM) शुरू किया था तो केवल मैं ही उस अनंत सत्ता (GOD) की कृपा से लिखा करता था, फिर विमल गाँधी जी (महाराष्ट्र से) का सहयोग, प्यार व आशीर्वाद मिला, जिन्हे मैं दिल से दीदी जी बोलता हूँ, फिर जैसे – जैसे ये कार्य आगे बढ़ता रहा और भी सहयोगी कवि व लेखकों का सहयोग, प्यार, व आशीर्वाद मिलता रहा।

हमारी सदैव से ही यही कोशिश रही है की हिंदी साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता को नई पीढ़ी तक पहुँचाऊ, इस महायज्ञ के माध्यम से। पूरी दुनिया के वर्तमान व आने वाली पीढ़ी के दिलों दिमाग में हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता का ज्ञान पहुंचे इस वेबसाइट के माध्यम से इसी सेवा के लिए अनवरत कार्यरत हूँ।

वर्तमान व आने वाली पीढ़ी के दिलों दिमाग में अपने देश व भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम बना रहे व उन्हें हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता का ज्ञान रहे इसी को ध्यान में रख कर ये सेवा शुरू किया जो अनवरत चल रहा है।

मेरा स्लोगन ही है – “तू ना हो निराश कभी मन से” – मेरा लक्ष्य है सभी मनुष्यों को मानसिक रूप से पूर्ण Strong बनाना।

हर इंसान के अंदर असीमित शक्तियां निहित है, बस जरूरत है इन शक्तियों को सही तरीके से Use करना।—KMSRAJ51

“जीवन में गलतियों से इंसान बहुत ज्यादा सीखता है – बस इतना याद रखे की एक ही गलती बार-बार दोहराये नहीं॥”— KMSRAJ51

हमारे सहयोगी कवि/कवयित्री व लेखकगण जिनके सहयोग, प्यार व आशीर्वाद से ये महायज्ञ अनवरत चल रहा है:—

  • विमल गाँधी — (दीदी जी) – महाराष्ट्र
  • सुखमंगल सिंह — काशी वासी – (मूल निवासी – अयोध्या क्षेत्र)
  • डॉ कृष्ण भूषण सिंह चंदेल — मध्य प्रदेश
  • हेमराज ठाकुर — ज़िला – मंडी – हिमाचल प्रदेश
  • अशोक सिंह — आजमगढ़ – उत्तर प्रदेश
  • ‘अजीब’ आदित्य कुमार जी — केशव नगर, कानपुर – उत्तर प्रदेश
  • डॉ विदुषी शर्मा — (डबल वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर) दिल्ली
  • वेदस्मृति ‘कृती’ — पुणे – महाराष्ट्र
  • रवि रंजन पाण्डेय — औरंगाबाद – बिहार
  • नंदिता शर्मा — (नंदिता दीदी जी) नोएडा – उत्तर प्रदेश
  • कुलदीप ठाकुर — रोहरू, हिमाचल प्रदेश
  • सारांश सागर — नोएडा – उत्तर प्रदेश (मूल निवासी – बिहार)
  • शैलेश कुमार मिश्र (शैल) — जिला – मधुबनी बिहार (केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी)
  • सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ — विन्ध्यनगर, सिंगरौली (मध्यप्रदेश)
  • डॉ मुकेश कुमार — दिल्ली
  • पीयूष गोयल — गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
  • सुशीला देवी — करनाल – हरियाणा
  • विजयलक्ष्मी जी — झज्जर – हरियाणा
  • अमित प्रेमशंकर — जिला – चतरा – झारखण्ड
  • मीरा भारती — पुणे – महाराष्ट्र
  • विवेक कुमार — जिला – मुजफ्फरपुर – बिहार
  • सीमा रंगा इन्द्रा — हरियाणा
  • भोला शरण प्रसाद — सेक्टर – 150, नोएडा, जिला – गौतमबुद्ध नगर, (यू. पी)
  • पूनम गुप्ता — भोपाल
  • कविता पाल — दिल्ली
  • नंदिता माजी शर्मा — मुंबई – महाराष्ट्र
  • अजय नायर — कोच्चि – केरला
  • दौलत राम गर्ग जी — जींद – हरियाणा
  • अमित पाठक ‘शाकद्वीपी’ — बोकारो – झारखण्ड
  • लाल सिंह वर्मा — जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश

आप सभी कवि/कवयित्री व लेखकगण का तहे दिल से साधुवाद व धन्यवाद जी, इस महायज्ञ को अनवरत आगे बढ़ाने में सहयोग, प्यार व आशीर्वाद के लिए। 45+ और भी कवि/कवयित्री व लेखकगण है जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं है, उनका भी तहे दिल से धन्यवाद है, इस महायज्ञ में सहयोग के लिए।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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जीवन में सफल कैसे हो?

Kmsraj51 की कलम से…..

How to be successful in life? | जीवन में सफल कैसे हो?

आप अपना कार्य बिना रुके व् बिना थके Continue जारी रखें। किसी भी कार्य को सफलता तक पहुचाने के लिए दृढ़ता से Continue कार्य जारी रखने से ही होता है। याद रखे…..

“आपको ना रूकना है, ना भागना है – बस चलते रहता है।”

मतलब अपने कार्य को बीच में छोड़ना नही है। अपने कार्य को बहुत ही धीमी गति से भी नहीं करना है और बहुत ज्यादा तेज गति से भी नहीं करना है। अपने कार्य को मध्यम गति से लगातार बिना रुके सच्चे मन से प्रतिदिन करना है। तब जाकर सफलता प्राप्त होगा।

हम अपने पैशन को प्रोफेशन तो बना लेते है लेकिन सफल क्यों नहीं हो पाते??

एक बात सदैव याद रखें – जब तक आप अपना कार्य शुरू नहीं करेंगे तब तक सफलता कैसे प्राप्त करेंगे? मतलब आपको सफलता प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम अपना कार्य शुरू करना होगा और पुरे तन – मन, धन व् संकल्प, शक्ति, समय के साथ करना होगा वो भी बिना रुके तब जाकर आप सफल होंगे।

  • सफलता उन्हें मिलती है – जो पुरे होशो-हवाश में लोगो का सहयोग लेते हुए आगे बढ़ते है। बिना रुके व बिना थके।

अगर आप वाकई में जीवन में सफल होना चाहते है तो नीचे दिए गए — लिंक पर क्लिक कर सभी आर्टिकल जरूर पढ़े और सफलता की तरफ अपना कदम बढ़ाये…….

  • अपने पैशन को प्रोफेशन में कैसे बदलें…?

  • अपनी पैशन की आग को जलाये रखें।

  • अपनी पैशन की अग्नि को जलाये रखें, पार्ट – 2

  • दृढ़ता से अपने पैशन को पूरा करें।

  • बेरोज़गारी की समस्या और समाधान।

♦ KMSRAJ51 ♦

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  • मुझे पूर्ण विश्वास है आपको सफलता तक पहुंचाने में ये आर्टिकल जरूर कारगर सिद्ध होंगी। “बेरोज़गारी की समस्या और समाधान।” वाले आर्टिकल में नीचे जिन आर्टिकल का लिंक दिया गया है उन आर्टिकल को भी जरूर पढ़े आपकी सफलता में सहयोगी बनेगी ये आर्टिकल …….

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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रिश्तों के महत्व को समझें।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rishton Ke Mahatva Ko Samjhe | रिश्तों के महत्व को समझें।

घर की नई नवेली इकलौती बहू एक प्राइवेट बैंक में बड़े ओहदे पर थी। उसकी सास तकरीबन एक साल पहले ही गुज़र चुकी थी। घर में बुज़ुर्ग ससुर औऱ उसके पति के अलावे कोई न था। पति का अपना कारोबार था।

पिछले कुछ दिनों से बहू के साथ एक विचित्र बात होती। बहू जब जल्दी-जल्दी घर का काम निपटा कर ऑफिस के लिए निकलती ठीक उसी वक़्त ससुर उसे आवाज़ देते औऱ कहते बहू, मेरा चश्मा साफ कर मुझें देती जा। लगातार ऑफिस के लिए निकलते समय बहू के साथ यही होता। काम के दबाव औऱ देर होने के कारण क़भी कभी बहू मन ही मन झल्ला जाती लेकिन फ़िर भी अपने ससुर को कुछ बोल नहीं पाती।

जब बहू अपने ससुर के इस आदत से पूरी तरह ऊब गई तो उसने पूरे माजरे को अपने पति के साथ साझा किया। पति को भी अपने पिता के इस व्यवहार पर बड़ा ताज्जुब हुआ लेकिन उसने अपने पिता से कुछ नहीं कहा। पति ने अपनी पत्नी को सलाह दी कि तुम सुबह उठते के साथ ही पिताजी का चश्मा साफ करके उनके कमरे में रख दिया करो, फिर ये झमेला समाप्त हो जाएगा।

अगले दिन बहू ने ऐसा ही किया औऱ अपने ससुर के चश्मे को सुबह ही अच्छी तरह साफ करके उनके कमरे में रख आई। लेकिन फ़िर भी उस दिन वही घटना पुनः हुई औऱ ऑफिस के लिए निकलने से ठीक पहले ससुर ने अपनी बहू को बुलाकर उसे चश्मा साफ़ करने के लिए कहा। बहू गुस्से में लाल हो गई लेकिन उसके पास कोई चारा नहीं था। बहू के लाख उपायों के बावजूद ससुर ने उसे सुबह ऑफिस जाते समय आवाज़ देना नहीं छोड़ा।

धीरे-धीरे समय बीतता गया औऱ ऐसे ही कुछ वर्ष निकल गए। अब बहू पहले से कुछ बदल चुकी थी। धीरे धीरे उसने अपने ससुर की बातों को नजर अंदाज करना शुरू कर दिया और फ़िर ऐसा भी वक़्त चला आया जब बहू अपने ससुर को बिलकुल अनसुना करने लगी। ससुर के कुछ बोलने पर वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देती औऱ बिलकुल ख़ामोशी से अपने काम में मस्त रहती। गुज़रते वक़्त के साथ ही एक दिन बेचारे बुज़ुर्ग ससुर भी गुज़र गए।

समय का पहिया कहाँ रुकने वाला था, वो घूमता रहा घूमता रहा। छुट्टी का एक दिन था। अचानक बहू के मन में घर की साफ़ सफाई का ख़याल आया। वो अपने घर की सफ़ाई में जुट गई। तभी सफाई के दौरान मृत ससुर की डायरी उसके हाथ लग गई। बहू ने जब अपने ससुर की डायरी को पलटना शुरू किया तो उसके एक पन्ने पर लिखा था -“दिनांक 26.10.2019…. आज के इस भागदौड़ औऱ बेहद तनाव व संघर्ष भरी ज़िंदगी में, घर से निकलते समय, बच्चे अक्सर बड़ों का आशीर्वाद लेना भूल जाते हैं जबकि बुजुर्गों का यही आशीर्वाद मुश्किल समय में उनके लिए ढाल का काम करता है। बस इसीलिए, जब तुम चश्मा साफ कर मुझे देने के लिए झुकती थी तो मैं मन ही मन, अपना हाथ तुम्हारे सिर पर रख देता था क्योंकि मरने से पहले तुम्हारी सास ने मुझें कहा था कि बहू को अपनी बेटी की तरह प्यार से रखना औऱ उसे ये कभी भी मत महसूस होने देना कि वो अपने ससुराल में है औऱ हम उसके माँ बाप नहीं हैं। उसकी छोटी मोटी गलतियों को उसकी नादानी समझकर माफ़ कर देना। वैसे मेरा आशीष सदा तुम्हारे साथ है बेटा। डायरी पढ़कर बहू फूटफूटकर रोने लगी। आज उसके ससुर को गुजरे ठीक 2 साल से ज़्यादा समय बीत चुके हैं लेकिन फ़िर भी वो रोज़ घर से बाहर निकलते समय अपने ससुर का चश्मा साफ़ कर, उनके टेबल पर रख दिया करती है, उनके अनदेखे हाथ से मिले आशीष की लालसा में।

जीवन में हम रिश्तों का महत्व महसूस नहीं करते हैं, चाहे वो किसी से भी हो, कैसे भी हो और जब तक महसूस करते हैं तब तक वह हमसे बहुत दूर जा चुके होते हैं।

रिश्तों के महत्व को समझें और उनको सहेज कर रखें।

♦ संपादकीय ♦

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  • Conclusion — आज के इस भागदौड़ औऱ बेहद तनाव व संघर्ष भरी ज़िंदगी में, घर से निकलते समय, बच्चे अक्सर बड़ों का आशीर्वाद लेना भूल जाते हैं जबकि बुजुर्गों का यही आशीर्वाद मुश्किल समय में उनके लिए ढाल का काम करता है। जीवन में हम रिश्तों का महत्व महसूस नहीं करते हैं, चाहे वो किसी से भी हो, कैसे भी हो और जब तक महसूस करते हैं तब तक वह हमसे बहुत दूर जा चुके होते हैं। रिश्तों के महत्व को समझें और उनको सहेज कर रखें।

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अमरूद खाने के फायदे।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अमरूद खाने के फायदे। ♦

अमरूद का औषधीय गुण प्यास को शांत करता है, हृदय को बल देता है, कृमियों का नाश करता। अमरूद, या भारतीय करौदा, भारत में एक आम फल है और इसे इसके बहुत सारे स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। आइये हम यहां अमरूद के कुछ लाभों के बारे में जानते हैं:

अमरूद में मौजूद पोटैशियम और मैग्‍नीशियम दिल की सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। इससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। हेल्थ के लिए ही नहीं बल्कि अमरूद स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद है। अमरूद एंटी-ऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज होती है, जिससे वह फ्री-रेडिकल्स से लड़ता है।

  1. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है: अमरुद में विटामिन सी की उच्च मात्रा होती है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने और बीमारी से बचाने में तेज गति से मदद करता है।
  2. पाचन के लिए अच्छा: अमरूद एक प्राकृतिक पाचन सहायता कारक है और कब्ज व अन्य पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।
  3. सूजन कम करता है: अमरुद में उच्च स्तर के एंटीऑक्सिडेंट होते है जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो गठिया जैसी स्थिति वाले लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
  4. वजन घटाने में मदद करता है: अमरूद में कैलोरी बहुत कम होती है और वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ये काफी मददगार हो सकता है।
  5. त्वचा के लिए अच्छा: अमरुद में कसैले गुण होते हैं जो त्वचा को कसने और टोन करने में मदद करते हैं, जिससे यह मुँहासे और अन्य त्वचा की स्थिति के लिए एक उत्कृष्ट प्राकृतिक उपचार बन जाता है।
  6. कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है: कुछ अध्ययनों से पता चला है कि अमरुद कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम हो सकता है।
  7. बालों के स्वास्थ्य में सुधार करता है: अमरूद बालों को जड़ो से मजबूत करके और बालों को स्वस्थ कर बालों के विकास को बढ़ावा देकर बालों के स्वास्थ्य में काफी अच्छा सुधार करने में मदद करता है।
  8. कैंसर रोधी गुण हो सकते हैं: कुछ अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि अमरूद में कैंसर रोधी गुण हो सकते हैं और कुछ प्रकार के कैंसर के विकास को रोकने में मदद कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, अमरूद एक स्वस्थ और पौष्टिक फल है जो शरीर को कई लाभ प्रदान करता है।

•♦•— KMSRAJ51—•♦•

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  • “KMSRAJ51“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कुल मिलाकर, अमरूद एक स्वस्थ और पौष्टिक फल है जो शरीर को कई लाभ प्रदान करता है। ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करता है। हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। पीरियड्स के दौरान होने वाले क्रैम्प, पेट दर्द आदि से राहत दिलाता है। पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा होता है। वजन घटाने में कारगर साबित हो सकता है। एंटी कैंसर तत्व होते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

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9th Anniversary of KMSRAJ51.COM

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ 9th Anniversary of KMSRAJ51.COM ♦

KMSRAJ51.COM की 9वीं वर्षगांठ

09-03-2013 – 09-03-2022

आज इस महायज्ञ (वेबसाइट) को 9 वर्ष पूर्ण हुए। इन 9 वर्षों में बहुत उतार चढ़ाव देखे हमने। यह महायज्ञ (वेबसाइट) हमने 09 मार्च 2013 को पूर्ण निश्वार्थ भाव से शुरू किया था जो अनवरत चल रहा है। इस महायज्ञ (वेबसाइट) का कार्य मेरे लिए सदैव ही प्रथम स्थान पर रहा है, चाहे कोई भी मौसम हो, या कोई भी परिस्थिति हमने इस कार्य को कभी भी रोका नहीं, इन 9 वर्षों में हमारे जीवन में भी बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव आया। इन 9 वर्षों में हमने बहुत कुछ सीखा।

09 मार्च 2013 को इस महायज्ञ (वेबसाइट) की शुरुआत की थी, जिससे सम्पूर्ण विश्व में जन जन तक भारतीय साहित्य, संस्कृति, संस्कार व सभ्यता की जानकारी पहुंचे। वर्तमान और आने वाली पीढ़ी के दिलों दिमाग तक अपने महान भारतीय साहित्य, संस्कृति, संस्कार व सभ्यता को पहुंचाने के लिए। आज यह महायज्ञ (वेबसाइट) वट वृक्ष की तरह महान भारतीय साहित्य, संस्कृति, संस्कार व सभ्यता को सम्पूर्ण विश्व में जन जन तक पहुंचा रहा है। सम्पूर्ण विश्व में सभी उम्र के पाठकों द्वारा प्रेम से पढ़ा जा रहा है, इस महायज्ञ (वेबसाइट) से सभी लाभान्वित हो रहे हैं।

  • इस वेबसाइट पर आप सभी को पढ़ने को मिलेगा आधुनिक व प्राचीन भारतीय हिंदी साहित्य और ज्ञान, ध्यान, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेदिक चिकित्सा, सकारात्मक विचार, कैरियर मार्गदर्शन इत्यादि से संबंधित लेख, आर्टिकल, कविताएँ, निबंध व विचार, कोट्स मिलेंगे।
  • एक शांत दिमाग बेहतर साेच सकता है, एक थके हुए दिमाग की तुलना में।
  • मेरा स्लोगन ही है – “तू ना हो निराश कभी मन से” – मेरा लक्ष्य है सभी मनुष्यों को मानसिक रूप से पूर्ण Strong बनाना।
  • हर इंसान के अंदर असीमित शक्तियां निहित है, बस जरूरत है इन शक्तियों को सही तरीके से Use करना। मैं अपनी शक्तियों को Right Way में Use कर रहा हूँ, मुझे लिखना बहुत अच्छा लगता है मैं इस काम से कभी बोर नहीं होता।
  • आज के समय में लोगों की मदद करने के लिए – Internet किसी के लिए कितना उपयोगी हो सकता है इस बात को समझना कठिन नहीं है, पर दुःख की बात है कि हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी में Internet पर ना के बराबर Content उपलब्ध हैं। मैं इसी कमी को अपने स्तर से कम करने में प्रयासरत हूँ।

यह महायज्ञ (वेबसाइट) बहुत सारे पवित्र व महान आत्माओं के सहयोग से निरंतर आगे बढ़ रहा है। हमारे सहयोगी (पवित्र और महान आत्माएं) लेखक / लेखिका व कवि / कवयित्री निम्नवत है •……

  • विमल गांधी जी।
  • नंदिता शर्मा जी।
  • डॉ विदुषी शर्मा जी।
  • सुखमंगल सिंह जी।
  • अशोक सिंह जी।
  • शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी।
  • हेमराज ठाकुर जी।
  • वेदस्मृति ‘कृती’ जी।
  • कृष्ण कुमार सैनी जी।
  • रवि रंजन पाण्डेय जी।
  • ‘अजीब’ आदित्य कुमार जी।
  • आलम आजाद जी।
  • सारांश सागर जी।
  • डॉ कौशल किशोर श्रीवास्तव जी।
  • डॉ मुकेश कुमार जी।
  • डॉ रूपेश जैन जी।
  • सुशीला देवी जी।
  • विजयलक्ष्मी जी।
  • विवेक कुमार जी।
  • कविता पाल जी।
  • प्रो. मीरा भारती जी।
  • सतीश शेखर श्रीवास्तव – परिमल जी।
  • अमित प्रेमशंकर जी।
  • पूनम गुप्ता जी।
  • दौलत राम गर्ग जी।

20+ हमारे और भी सहयोगी (पवित्र और महान आत्माएं) लेखक / लेखिका व कवि / कवयित्री हैं। सभी के सहयोग से यह महायज्ञ (वेबसाइट) अनवरत चल रहा है, और चलता रहेगा। हमारा मानना है की मेरा जन्म ही हुआ है मानव जाति के कल्याण के लिए। अपने अंतिम स्वास तक इतना करके जाना है की आने वाली पीढ़ियां अनंत काल तक हमारे द्वारा किये गए कार्यों से लाभान्वित होती रहे। कहने को तो बहुत कुछ है मन में, समय के अभाव के कारण अभी नहीं लिख रहा हूँ, लेकिन आने वाले समय में सम्पूर्ण विस्तार से लिखकर बताऊंगा।

अरे तेरे “मैं मैं – तू तू भ्रामक विचार, तेरा मन ! तू !! तेरी काया !!
क्या शाश्वती का स्वप्न देख रहे हैं ? “प्यारे” गुमराह न हो !
उठो होष में आवो और अपने को पहिचानों ! अमरत्व तेरे पॉव तले की धूल है !!–KMSRAJ51

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सच्चा गुरु कौन ?

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♦ सच्चा गुरु कौन ? ♦

गुरु पूर्णिमा व सच्चे गुरु पर KMSRAJ51 के विचार।

वास्तविक गुरु वह हाेता है जाे अपने अनुयाइयाें काे परमात्म मिलन का सच्चा मार्ग दिखाये, ना की केवल स्वयं की पूजा-अर्चना करवायें। जाे गुरु केवल स्वयं की पूजा-अर्चना करवाता हैं वह गुरु नहीं राक्षस(दैत्य) है, वह आपकाे परमात्मा से विमुख(दुर) कर रहा हैं। जबकी एक सच्चा गुरु ऐसा कभी नहीं करता।

मनुष्य कभी किसी मनुष्य का उद्धार(निर्वाण या मोक्ष) नहीं कर सकता, यहा तक कि साधु-संताे का भी उद्धार करने के लिए स्वयं परमात्मा काे आना पड़ता हैं। अर्थात: मनुष्य कभी किसी मनुष्य का उद्धार नहीं कर सकता।

सभी मनुष्याें का सच्चा गुरु परमात्मा (GOD) ही हैं।

यह बात “श्रीमद् भागवत गीता” के चौथे अध्याय के श्लोक संख्या “८” से:

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे॥

अर्थात: साधु पुरुषोंका उद्धार करने के लिये, पापकर्म करने वालाें का विनाश करने के लिये और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करने के लिये मैं युग-युग में (संगमयुग में) प्रकट (किसी सतपुरुष शरीर का माध्यम लेकर) हुआ करता हूँ॥८॥

ध्यान दें,

संगमयुग : वह समय जब कलियुग (कलयुग) का आखिरी कुछ वर्ष शेष रह जाये, जिसके बाद सतयुग आने वाला हाे। यहीं समय संगमयुग कहलाता हैं। – KMSRAJ51

⋅—⋅♦⋅—⋅♦⋅—⋅♦⋅—⋅

कहने का तात्पर्य यह है की – सच्चा गुरु कभी भी खुद की पूजा अर्चना नहीं करवाता। एक सच्चा गुरु सदैव ही आपको परमात्म मिलन का सच्चा मार्ग दिखाता है, जिस पर चलकर आप पूर्ण समर्पित मन से, पूर्ण श्रद्धा से साधना करते है तो अपनी सुषुप्त शक्तियों को जागृत करते है।

जब आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जागृत होने लगती है, आपको सत्य का बोध होने लगता है। आपको सर्वोच्च आनंद की अनुभूति होने लगती है, इस आनंद के सामने अन्य आनंद फीकी लगने लगती है।

जो सत्य है, सास्वत है उसका बोध होने लगता है, संसार में रहते हुए भी आप संसार के बंधनो से मुक्त होने की अनुभूति करने लगते है।

सच्चे गुरु का सदैव ही आदर, सत्कार और सम्मान करें, पूर्ण समर्पित मन से! याद रहे मैं यहां बात कर रहा हूं सच्चे गुरु की।

गुरु पूर्णिमा: सच्चे अर्थो में गुरु पूर्णिमा का मतलब है गुरु के द्वारा बताये हुए मार्ग पर पूर्ण समर्पित मन से चलकर साधना करना। जिससे आपको उस सत्य का बोध हो, जिसकी आपको तलाश है।

एक सच्चा गुरु आपसे यही चाहता है की आप उसके बताये हुए मार्ग पर चलते हुए पूर्ण समर्पित मन से साधना करें। जिससे आपको पूर्ण सत्य की पहचान हो, और आप बुरे कर्मो से मुक्त होकर अच्छे कर्मो की तरफ अपना कदम बढ़ाये। आपके अच्छे कर्म से मानवता का कल्याण हो।

इस संसार में आने पर किसी भी इंसान की प्रथम गुरु माँ है।

अपने सच्चे गुरु का पूर्ण समर्पित मन से आदर, सेवा, सत्कार व सम्मान करें। पूर्ण विश्वास और समर्पित मन से सच्चे गुरु के द्वारा बताए हुए मार्ग पर चलकर सच्चे मन से साधना करें। जिससे आपका कल्याण हो। आपका यह मनुष्य जीवन सार्थक हो। सच्चे गुरु के द्वारा बताए हुए मार्ग पर चलकर सच्चे मन से साधना करते है तो आपको सत्य का बोध जरूर होता है।

प्यारे दोस्तों – यहाँ आपको सच्चे आध्यात्मिक गुरु के बारे में बताया है।

यह लेख KMSRAJ51 की स्वयं रचित रचना है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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KMSRAJ51 – Motivational Speaker

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ KMSRAJ51 – Motivational Speaker ϒ

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न रख इतना नाजुक दिल।

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ϒ न रख इतना नाजुक दिल। ϒ

🙂 दिल की गहराइयों तक जो उतर जाये – वही शब्द असल में नज़्म कहलायें – न रख इतना नाजुक दिल।

इश्क़ किया तो फिर न रख इतना नाज़ुक दिल
माशूक़ से मिलना नहीं आसां ये राहे मुस्तक़िल
तैयार मुसीबत को न कर सकूंगा दिल मुंतकिल
क़ुर्बान इस ग़म को तिरि ख़्वाहिश मिरि मंज़िल

मुक़द्दर यूँ सही महबूब तिरि उल्फ़त में बिस्मिल
तसव्वुर में तिरा छूना हक़ीक़त में हुआ दाख़िल
कोई हद नहीं बेसब्र दिल जो कभी था मुतहम्मिल
गले जो लगे अब हिजाब कैसा हो रहा मैं ग़ाफ़िल

तिरे आने से हैं अरमान जवाँ हसरतें हुई कामिल
हो रहा बेहाल सँभालो मुझे मिरे हमदम फ़ाज़िल
नाशाद न देखूं तुझे कभी तिरे होने से है महफ़िल
कैसे जा सकोगे दूर रखता हूँ यादों को मुत्तसिल

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ – हैदराबाद, तेलंगाना ®

हम दिलसे आभारी है – डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी के, हिंदी में नज़्म शेयर करने के लिए। KMSRAJ51.COM के Author Team पैनल में तहेदिल से स्वागत है – आपका।

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी के लिए मेरे विचार:

♣ “डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जी” ने “न रख इतना नाजुक दिल।…“ काे नज़्म के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इक – इक शब्द दिल की गहराइयों तक उतरते है। आपके लेखन की खासियत है की बिलकुल खुले मन से लिखते है, आपके लेख के हर एक शब्द दिल को छूने वाले होते है। हर एक शब्द अपने आप में एक पूर्ण सुझाव देता है, फिर चाहे वो नज़्म, गज़ल हो या कवितायें हो या अन्य लेख। जो भी इंसान इनके लेख को दिल से समझकर आत्मसात करेगा उसका जीवन धन्य हो जायेगा।

♥••—••♥

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought to life by. By doing this you Recognize hidden within the buraiya ensolar radiation, and encourage good solar radiation to become themselves.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAJ51

 

 

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