• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for Satish Shekhar Srivastava ‘Parimal’

Satish Shekhar Srivastava 'Parimal'

ये शिरोमणि सिंहासन है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ye Shiromani Singhasan Hai | ये शिरोमणि सिंहासन है।

ये शिरोमणि सिंहासन है।

यह वीरों का आसन है,
न किसी का इस पर स्वशासन है।
रहा बहुबल नित पद्मासन है,
यह शिरोमणि सिंहासन है।

यह विशिष्ट महाराजों से,
संग्रहित हैं राज दरबारों से।
इनके चरण-रज पोंछे जाते,
नृपों के शीश मुकुटों से।

जिसकी रक्षा के लिये हुई,
समर्पित कई बलिदानी है।
राणा तू कर रक्षा इसकी,
यह शिरोमणि सिंहासन है।

खनकती उन तलवारों की,
कौतुक होती थी कटारों से।
सारंगों की धारों से देखते ही,
छिन्न-भिन्न हो जाते अंगों से।

हल्दीघाटी के अरावली पथ पर,
सनी माटी वीर मेवाड़ी सानों से।
जननी जन्मभूमि का अर्चन करते,
जीवन के उत्थान फुलझड़ियों से।

न जाने कितनी बार चढ़ी घाटी में,
भीषण भैरवी जवानी पर।
कण-कण के उर में बसा राणा तू ,
कर रक्षा यह शिरोमणि सिंहासन है।

भीलों ने अभी रण-हुंकार भरी है,
हाथों में कटे खड्ग औ शीश लिए।
उर-झंझाओं में ललकार भरी है,
भोले-भाले भील लड़ने की तैयारी में।

गिरिराज के ऊँचे शिखरों पर,
विटपों के फूल-पत्ते अन्न बने।
रक्षक शिखर-शैल बने थे,
राणा के तुंग आस्थान-मंडल बने।

तुलजा भवानी की सौगंध ले,
शीश पग कफ़न बाँध चले।
रण-बाँकुरे मैदान चले,
करने को बलिदान चले।

खमनोर के दर्रों में,
रक्ततलाई में बहते रक्तों ने…
पुकार लगाई धरती ने रक्षा कर राणा तू ,
ये शिरोमणि सिंहासन है।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (ये शिरोमणि सिंहासन है।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: kavi satish shekhar srivastava parimal, kavi satish shekhar srivastava parimal poems, Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', ये शिरोमणि सिंहासन है, ये शिरोमणि सिंहासन है - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

यौवन किसको कहते हैं?

Kmsraj51 की कलम से…..

Yauvan Kisko Kahte Hain? | यौवन किसको कहते हैं?

यौवन किसको कहते हैं…?
सुरम्य पूरन की रात में,
उडुओं की बारात में,
हमने पूँछा चंदा की चाँदनी से,
यौवन किसको कहते हैं…?

हँस के बोली वह,
उर में पीड़ा के भाव हो।
जिंदगी जीने की हँसकर चाह हो,
मस्तानी चाल हो।

अभिमान का मान हो,
दु:ख-सुख दोनों से प्यार हो।
संघर्ष जीवन का हार हो,
दे जो जग उसे लेने को तैयार हो,
यौवन उसको कहते हैं जो संघर्षों में रहते हैं।

सुरम्य पर्वतों की वादी मे,
कलकल कर जो बहता है।
हमने पूँछा उन सरिता स्रोतों से,
यौवन किसको कहते हैं…?

हँसकर बोली झरने ने,
कोलाहल हो मन में भरा आह्लाद हो।
उमंग-तरंग से भरी जवानी हो,
चाहे जीवन पानी हो।

चाहे कितने पथ पर आये,
अचल अटल इरादे का फानी हो।
अड़चनों को पल में हटा दे,
तूफानों से जो लड़कर जाये,
यौवन उसको कहते हैं जो संघर्षों में रहते हैं।

मृदुल चलती बयारों को,
बसंत के श्रृंगारों से।
हमने पूँछा मलय समीरों से,
यौवन किसको कहते हैं…?

हँसकर बोली हवाओं ने,
जिस पर कहीं न प्रतिबंध हो।
आती जाती घटाओं में,
बादलों की अठखेली में।

जीवन की कामनाओं में,
प्यासी-प्यासी क्षुधाऐं हो।
विटपों की मस्ती में,
कलरव करते विहंगों की।

पर्वतों की ऊँचाईयों में,
चीड़ों देवदारों की हस्ती में।
मलय समीरों के गीतों में,
सरगम खिल-खिल जायें,
यौवन उसको कहते हैं प्रीति में मिल-जुलकर रहते हैं।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (यौवन किसको कहते हैं?) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi Kavita, kavi satish sekhar Srivastava, kavita in hindi, Poems by Satish Shekhar Srivastava Parimal, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', Satish Shekhar Srivastava 'Parimal' poems, किशोरावस्था और यौवन, यौवन - Yovan, यौवन किसको कहते हैं?, यौवन किसको कहते हैं? - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, यौवन किसे कहते हैं?, यौवन के विषय पर बेहतरीन कविता | kmsraj51, यौवन क्या है ?, यौवन तेरा अमृत है, यौवन पर कविता हिंदी में, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

वैरागी जीवन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vairagi Jeevan | वैरागी जीवन।

बोये थे मैनें संदल के बन,
काँटे बिखरे राहों में बने बबूल।
घायल करते पग-पग पर,
बिखरे हुए बिसैले शूल।

दूर-दूर तक फैले स्याह मनोहर,
घन मिले मेघ शीतल साये से।
ऐसी बद्दुआ लगी थी कोई,
हर इक ने प्राण जलाये से।
मेरे जीवन को श्राप दे गई,
भोले बैरागी मन की चंचल भूल।

शिशिर पहने आये पतझड़,
हरे-भरे मेरे आँगन में।
वीरानों सी ख़ामोशी रहती,
अंत:पुर के शून्य गगन में।
छिद्रित हुए हृदय में शूल,
मेरे अँजुल में स्वप्नों की धूल।

नहीं पता मुझको कब किसके,
हृदय पंख नोचे मैनें।
उड़ान से पहले ही मर जाते,
संकल्प सलोने जो भी मैं बुनता।
अपने आँगना बोये थे हमने,
खिले मिले किसी और के घर फूल।

इस बैरागी के जीवन में,
होती सुबह-शाम कहाँ?
जन्मों का अभिशाप लिये चला,
इस युग का संताप कहाँ?
पग-पग पर थी ठोकर हरदम,
इक पल भी आराम कहाँ?
ये जीवन तो बना बस धूल का फूल,
खंडित हृदय तन रुधित मन रहा कूल।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (वैरागी जीवन।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: kavi satish sekhar Srivastava, Poems by Satish Shekhar Srivastava Parimal, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', छोटी सी कविता हिंदी में, मैं तो वैरागी हूँ, वैरागी जीवन, वैरागी जीवन - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, वैरागी जीवन पर कविता, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, हिंदी कविता, हिंदी पोयम

मेरी कविता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Meri Kavita | मेरी कविता।

हर अक्षरों में रचा-बसा लेखन का धाता,
हर शब्दों की परिभाषा सृजन का दाता।
मैं कवि हूँ और तुम मेरी कविता,
वीरान मरुस्थल-सा जीवन मेरा,
उसमें तुम कल-निनाद करती सरिता।

हिय में कारुण्य अनुराग भरा,
अधरों में मधुर पराग झरा।
स्वर्णिम सौंदर्य निखरा-निखरा,
आलिंगन करती कृष्णा चोले से,
जैसे रुखड़े से लिपटी कोमल लता।

प्राणो की रम्य ‘परिमल’-सुंदरता,
साक्षात् सुघर प्रसंग की अनुपमता।
हृदय में खिलती कारुण्य मृदुता,
शर्वरी के आर्द्र बेला में,
अंतस् में भर देती मादकता।

राह दिखाती नैनों की ज्योति,
उर में बसते चाहत के मोती।
आँचल में तृप्त थकन सोती,
रैना में तनु सित ज्योत्स्ना-सी,
तनुरूहों में भरती शीतलता।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (मेरी कविता।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi Poems, kavi satish shekhar srivastava parimal, meri kavita, poem on river in hindi, satish sekhar poems, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', कृष्णा नदी पर कविता हिंदी में, नदी पर कविता हिंदी में, नदी पर गीत, मेरी कविता, मेरी कविता - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

प्रकृति और होरी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Prakriti and Hori (Holi) | प्रकृति और होरी।

आकंठ अखंड उद्गार में,
बहता कण-कण विराग।
तिनका-तिनका तृण पल्लवी
कुसुमित हो मुस्कुराय।
दृग दिवस काल में,
देखे मन हर्षाये।
गोकर केश लोहिता,
पल-पल रूप दिखाय।

फैला इस संसार में,
विपुल गंध हर जोर।
डाली-डाली लद गई,
फूलों से चहुँ ओर।
वन कानन की शोभा बढ़ी,
बढ़ी सृष्टि आगार।
कनक पूत की आभा चढ़ी,
फागुन की है बड़जोर।

ताल तम्य तरकश में,
गाये गीत मधुमाधवी।
हर ताल-ताल के छंद में,
मधुर मिलन उत्साही रंग।
आम्र पल्लवी मधुप महुए की,
नवरंग रसरंग की बटायें।
बढ़ी चली हर छोर-छोर,
होरी है बरजोर-जोर।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (प्रकृति और होरी।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: poet satish sekhar, Prakriti Ki Holi, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', Satish Shekhar Srivastava 'Parimal' poems, प्रकृति और होरी, प्रकृति और होरी - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, प्रकृति और होली कविता इन हिंदी, प्रकृति की होली, प्रकृति पर कविता, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, होली के रंग प्रकृति के संग, होली पर कविता

रस आनन्द इस होली में।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ras Anand is Holi Mein | रस आनन्द इस होली में।

आके हुई प्रकट वह रात होली में,
मिली फागुन की सौगात होली में।
बजी जलतरंग से मिलकर सितारों से,
हुआ तरानों का नृत्य अगाध होली में।
हर्ष-आनन्द का बढ़ा व्यापार होली में,
जिह्वा पर नाम आया बार-बार होली में।

घर-घर रंग सजे उल्लासों की चहल-पहल में,
भर-भर के थाल सजे रंग अबीर गुलालों से।
नश-नश में उमंग आवेग भरे गीत गोविंदों से,
बन-बन दमकती आभा रचते स्वाँगों में,
उमड़ा हुजूम गज़ब हर गली किनारों होली में।

गली चौबारों में शोर मचा इस अवसर में,
बिखरने लगी रंग की धार गली चौराहों में।
भीगे बदन मले गुलाल चेहरों में,
खुशियों की गवाही दे रहा घर-आँगन चौराहों में,
मेला देखने निकले प्रियतम् होली में।

रंग दी चुनरिया फागुन बहार से,
दिल की कामना उभर आई होंठों के द्वार से।
नैना लड़ा के पूँछे हर इक शैदाई से,
रंग – बिरंगी पोशाकों की पैमाईश से,
हसीन चेहरे-मोहरे हर्षोल्लास से भरे होली में।

देख मुखड़े पर मले गुलाल की लाली,
दिलों में भर आई हमारे खुशहाली।
नजर ने दी हमें रमणी रंग से भरी प्याली,
जो हमें दे हँस – हँसकर गाली,
तब हम समझे की ऐसी है प्यार भरी होली में।

हमनें तुमने की इक तरफा तैयारी होली की,
जिसने जिस तरह देखा इस तरफ होली की।
हमारी आन लगती हमको तो प्यारी,
लगा दो हाथ से न मारो पिचकारी होली की,
रंग – बिरंगी सतरंगी रंगों के सिंगार की होली में।

उड़ाओ तुम उधर से हम भी इधर तैयार खड़े,
मलो अबीर गुलाल हँस – हँसकर मुखड़े पर।
खुशी आनन्द का इजहार करो होली पर,
है कसम तुमको इस होली पर।
मिटा दो बैर अपने सारे गिले – शिकवे भी,
इसी उम्मीद में था वतन इंतजार होली में।

मूर्तिमान हो दे गाली हमें हँस – हँसकर,
रंग पड़ता है कपड़ों पर उड़ता गुलाल तन पर।
लगा के घात कोई मुखड़े पर लगाता है,
‘परिमल’ प्यार से कोई कहता है,
हमें भी दिखा तू रस आनन्द इस होली में।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (रस आनन्द इस होली में।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: holi poems, kavi satish shekhar srivastava parimal, Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', फागुन की झूमती बहारों पर बेहतरीन कविताएं, रंगों का पर्व होली और हिंदी कविता, रस आनन्द इस होली में, रस आनन्द इस होली में - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, होली पर कविता, होली पर कविता इन हिंदी, होली पर कविताएं, होली पर गीत और कवितायें, होली पर प्रेरणादायक कविता

कुछ पता नहीं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kuch Pata Nahin | कुछ पता नहीं।

कुछ पता नहीं,
आई कब-कब तेरी याद।
दिन बहुत बीत गये,
पर आई न तेरे चेहरे की सौगात,
कुछ पता नहीं…?

क्षीण होती यादों में,
उभरती कई रेखाएं।
माथे पर पड़ती,
सिकन की लकीरें।
सुधों वाली वह काली रात,
इतनी शान्त थी।
की पत्ता भी हिले,
तो शोर मचाती वह काली रात।
अचानक तंद्रा को भेदकर,
अंतस् तक को झकझोरती सी,
कुछ पता नहीं…?

ऐसा लगा मानों कानों में,
कोई सरगोशी कर रहा।
छाती के द्वार पर चोट कर रहा,
दबे पाँव चुपके-चुपके।
दिल में उतर रहा,
अपनी यादों को।
मेरे जेहन में नाखूनों से,
कुरेद कुरेद कर उभार रहा,
कुछ पता नहीं…?

अँधेरें में उठ-उठकर,
उसके आने की आहट,
सुनता रहा।
न आने की चुभन हिय में लिये,
सूनी अँखियों से,
झरोखे से निहारता रहा।
कहीं से; यादों से उतर कर,
सामने आ जाये।
जिसकी यादों को,
आँखों में बसाये हुए।
चलते आ रहे हैं,
हम वीराने भरे जीवन में,
कुछ पता नहीं…?

ये इंतजार कब खतम होगा,
कभी लगता है मुझे,
वो यादों में रहकर,
करता होगा इंतजार।
मेरे मरने का,
कफ़न तो पहना है हमने।
बस उनकी यादों का,
सूनी अँखियों के पैमानों का,
कुछ पता नहीं…?

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (कुछ पता नहीं।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi Poems, kavi satish shekhar srivastava parimal, kavita in hindi, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', कुछ पता नहीं, कुछ पता नहीं - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, प्यार पर कविता इन हिंदी, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, सुंदर कविता हिंदी में

अंदाजे बयां — पार्ट – 4

Kmsraj51 की कलम से…..

Andaze Bayan Part-4 | अंदाजे बयां — पार्ट – 4

खुद के ही भाव हैं, है अपनी ही अनुभूति,
निज अभिव्यक्ति में कहीं, अपने मन की बात।

भूल – चूक से हो गई, छोड़ो वो बात,
लिखा-पढ़ी रात्रि की, बीत गई उसके साथ।

छोटी – छोटी बात पर, भिड़ने को हो तैयार,
जैसा अधम आदमी, वैसी दुराशय वार।

जो उपजा रोड पर, वही उसका अधिवास,
आश्रय की आध्या वो करे, हो आलय जिसके पास।

‘परिमल’ की ऐसी परम्परा, मिलने को कतराय,
अपनों से बोले नहीं, दूसरे से बतियाय।

यथार्थ सिद्ध हो, दु:ख में भी सुख पाय,
पवित्र निर्मल बात पर, सबका मन मैला हो जाय।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह दोहे (अंदाजे बयां — पार्ट – 4) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, दोहे - अंदाजे बयां, हिन्दी साहित्य Tagged With: kavi satish shekhar srivastava parimal, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', अंदाजे बयां, अंदाजे बयां — पार्ट - 4, अंदाजे बयां पार्ट - 4 - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, दोहे हिंदी में, प्रसिद्द दोहे और उनके अर्थ, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

दोहे – अंदाजे बयां — पार्ट-2

Kmsraj51 की कलम से…..

Dohe – Andaze Bayan Part-2 | दोहे – अंदाजे बयां — पार्ट-2

बेटियाँ सुखी ससुराल में, होंगे दु:ख भी चंद,
बिकी नहीं पर हो गयी, चूड़ी कंगन बाजूबंद।

आगर बैठे बेचते, शिखी सारंग और दीप,
अपना रोजगार खोज ले, हर मोती और सीप।

भारी बोझ चट्टान सा, तनिक हल्का हो जाय,
मेरी चिंता जब बढ़े, सपने में जब माँ आय।

‘परिमल’ किस्मत बात की, उसका कौन उपाय,
सपने में सोना मिले, तड़ से नयन खुल जाय।

गज भर के कान है, विस्वा भर के हाथ,
हर दिन उसकी नवरात्रि है, दीपशिखा हर रात।

बसंतजा में क्यों नहीं, और ऋतुओं की बात,
सावन मन-भावन नहीं, बिन जल की बरसात।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह दोहे (दोहे – अंदाजे बयां — पार्ट – 2) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: dohe – andaze bayan part - 2, kavi satish shekhar srivastava parimal, satish sekhar poems, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', दोहे - अंदाजे बयां, दोहे - अंदाजे बयां — पार्ट-2, सतीश शेखर श्रीवास्तव – परिमल

दोहे – अंदाजे बयां।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dohe – Andaze Bayan | दोहे – अंदाजे बयां।

नादानी की बात है, समझे न समझाये,
घर के अंदर की बात को, जन तक पहुँचाये।

ज्ञान उसे पिला तू, सच तो कड़वा घूँट,
सत्य बोलें सूली चढ़े, आंत पात सब झूठ।

तोड़ सके तो तोड़ दे, बंधन के हर तार,
कहते – कहते कह गये, जीवन है कारागार।

लूला – लंगड़ा हो गया, ‘परिमल’ इक मकान,
अँगना की भी आँख थी, किंवाड़ो के भी कान।

हुक्का भी आध पिये, चौथा रखें बुझाय,
जलते क्रोध को बेचकर, दाना-पानी खाय।

तेरा हूँ मैं खैर-ख्वाह, तू मेरा हमराज़,
बंधन का परिंदा सिखा दिया, जीने का अंदाज।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह दोहे (दोहे – अंदाजे बयां।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, दोहे - अंदाजे बयां, हिन्दी साहित्य Tagged With: dohe - andaze bayan, kavi satish shekhar srivastava parimal, satish sekhar poems, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', दोहे - अंदाजे बयां, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

« Previous Page
Next Page »

Primary Sidebar

Recent Posts

  • शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है।
  • दो वक्त की रोटी।
  • उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार।
  • योग दिवस – 2026
  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

शिक्षा में क्रांति अभी बाकी है।

दो वक्त की रोटी।

उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार।

योग दिवस – 2026

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.