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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

स्वतंत्रता दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

Independence Day | स्वतंत्रता दिवस।

आओ मिलकर आजादी का जश्न मनाएं,
स्वतन्त्रता दिवस को घर-घर में दीप जलाएं।
जिन्होंने जान गंवाए आजादी के खातिर,
उन वीरों की गाथा गाएं,
आओ मिलकर ये पर्व मनाएं।

हिंदुस्तान के घर-घर में तिरंगा फहराएं,
सभी भाई मिलकर, भारत माँ की लाज बचाएं।
आओ मिलकर आजादी का जश्न मनाएं,
सब मिलकर ऐसा माहौल बनाएं,
जालिमों को डर लगे, ऐसी हम सबक सिखाएं।

ऐसे भारत का निर्माण करें,
फिर से सोने की चिड़िया कहलाए,
आओ मिलकर आजादी का जश्न मनाएं।
देश के खातिर मर मिटने का,
अभिमान हो सब में, समता, समानता,
भाइचारे का स्वाभिमान हो सब में।

दिल में बसता नर-नारी का,
सम्मान हो सब में।
तेरे हाथ में हो तिरंगा,
बस केवल इंसान बनो।
भारत माँ की शान बनो,
आओ मिलकर गाथा गाएं,
आजादी का जश्न मनाएं।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भारतीय स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हमें अपने पूर्वजों के बलिदान को सलामी देनी चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण दिन है जब हम उन महान योद्धाओं का सम्मान करते हैं, जिन्होंने अपने जीवन की आहुति देकर हमारे देश को स्वतंत्रता दिलाई। इस दिन हमें याद दिलाना चाहिए कि हमारी स्वतंत्रता को हासिल करने के लिए लाखों लोगों ने अपने प्राणों की बलिदानी की थी। वीर शहीदों की शौर्य और बलिदान ने हमें यह सिखाया है कि देश के लिए आत्मसमर्पण और समर्पण की आवश्यकता होती है। भारतीय स्वतंत्रता दिवस हमें एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। हमें अपने कर्तव्यों के प्रति पक्षपात और साहस से पूरी तरह समर्पित रहना चाहिए, ताकि हमारे देश की प्रगति में हमारा योगदान हो सके। इस दिन को याद करके हमें अपने देश के प्रति अपने आदर्शों के प्रति पुनः समर्पित होने का संकेत मिलता है। हमें अपने देश के विकास और समृद्धि में यथाशक्ति सहयोग करने का आदर्श मिलता है, ताकि हमारे महान पूर्वजों का बलिदान सच्चे आदर्शों का पालन करते हुए उनका सम्मान कर सकें।

—————

यह कविता (स्वतंत्रता दिवस।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मेरा देश महान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mera Desh Mahan | मेरा देश महान।

स्वतंत्रता दिवस की बेला आयी जश्न मनाते है,
दिल हर्षित हुआ सब मिलकर खुशी मनाते है।
तीन रंगों से बना हमारा प्यारा झंडा तिरंगा है,
इन रंगों में रंगकर भारत देश को अखंड बनाना है,
तिरंगे की शान की खातिर दुनियां से लड़ जाना है।

केसरिया शौर्य, हरा सम्रद्धि, शवेत शान्ति प्रतीक है,
अशोक चक्र देता सबको एकता का संदेश है।
वीरों की शहादत को कोई न भूल पाया है,
उन वीरों को हम आज शत-शत नमन करते है,
तिरंगे की शान की खातिर सरहद पर बैठे है।

दुश्मन भाग जाते वीर अपना शौर्य दिखाते है,
भारत हमारा देश तिरंगा हमारी शान है।
विश्व में तिरंगा ऊंचा रहें, हिंदुस्तानी की शान है,
सारे विश्व में मेरा भारत महान और विशाल है,
सत्य, अहिंसा, प्रेम का यह विश्व शांति का दूत है।

गुरुग्रंथ साहिब, रामायण, गीता और कुरान है,
विभिन्न संस्कृतियों का यह देश हमारा हिंदुस्तान है।
देवी, देवताओं को होता पूजन गंगा का संगम है,
परिधान भिन्न हो एकता का परिचायक है,
यह मेरा हिंदुस्तान है, यह मेरा हिंदुस्तान है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मेरा देश, भारत, विविधता, समृद्धि और एकता का प्रतीक है। यह एक समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर धारण करता है जिसमें अनेक जातियाँ, भाषाएँ और धर्म आपसी सामंजस्य के साथ रहते हैं। यहाँ की विविधता एक मजबूत एकता का प्रमुख कारण है। भारत की धरती पर प्राचीन सभ्यताओं का अद्वितीय इतिहास है, जो उसकी महानता का प्रमाण है। यहाँ के महान वैज्ञानिक, विचारक और कलाकार ने विश्व को प्रेरित किया है। भारतीय संस्कृति ने सदियों तक ज्ञान और धार्मिकता का संवर्धन किया है। मेरा देश अपने सुंदर प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक स्थलों, धार्मिक स्थलों और विविध फेस्टिवलों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की मिलनसार जीवनशैली और परंपराएँ इसे विशेष बनाती हैं। समाज में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, हमारा देश अब आर्थिक और सामाजिक माध्यमों में सुधार की ओर अग्रसर है। समर्पण, साहस और महान आत्मा ने इसे महान बनाया है। मेरा देश, भारत, विश्व में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आगे भी उन्नति की राह में अग्रसर रहेगा।

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यह कविता (मेरा देश महान।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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क्यों कन्हैया?

Kmsraj51 की कलम से…..

Kyon Kanhaiya? | क्यों कन्हैया?

त्रिलोकी नाथ तुम, सकल अधिष्ठाता,
चराचर जगत के बस तुम ही रचयिया।
जन्म से निर्वाण पर्यन्त कष्ट ही कष्ट,
अपने भाग्य में क्यों लिखे कन्हैया?

जन्म कारा में, यमुना की जलधारा में
आकंठ पिता को क्यों था डुबाया?
कागासुर कभी शकटासुर गोकुल में,
पूतना जैसा हर संकट क्यों आया?

महिमा मंडन या दुख संसार की परिणति,
उद्देश्य जनार्दन था तुमने क्या ठाना?
या कुछ न था तुम्हारे भी हाथों में,
पर लोगों ने तो आपको ही प्रभु है माना।

वे रास लीला फिर विरह की पीड़ा,
राज पाया पर सुख कहां भोगा?
कंस, जरासंध फिर काल्यावन चढ़ाई,
कदम-कदम का कौतुक, अब क्या होगा?

महाभारत फिर निज कुल का खात्मा,
अंत समाधि में बहेलिए के हाथों हुआ निर्वाण।
कुल की स्त्रियां जब भिलों ने सताई,
तब क्यों बचाने न आए तुम ओ भगवान?

क्यों न जीता अर्जुन तब भीलों से,
महाभारत विजयी धनुर्धर सखा महान?
अर्जुन वहीं था, वही गांडीव था,
फिर क्यों न चले, तब वे धनुष – बाण?

सवाल कई हैं जहन में आज भी,
होनी बड़ी है कि आप प्रभु, या फिर इंसान?
विधि का लेखा ही सबसे बड़ा है क्या?
या तुम सबसे बड़ा भी, है कोई और ही भगवान?

यह निश्चित है कि सृष्टि संचालक,
नियंता रचैया है कोई न कोई जरूर।
जो हम ही होते स्वयंभू स्वयं तो,
क्यों होते फिर प्रकृति के हाथों यूं मजबूर?

याद करो प्रभु सहस्र विवाह अपने,
फिर भी प्रेम को तुमने क्यों न पाया?
राधा चाह कर भी क्यों एक न हो सकी?
यह सारा खेल तो हमारी समझ में न आया।

रामावतार में आकाश – पाताल खंगाले,
रावण से भिड़ कर भी सीता को पाया।
यहां तो हजारों विवाह कारा कर भी अपने,
आखिर, राधा रानी को क्यों था सताया?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — क्यों कन्हैया? तुमने अपने भाग्य में जन्म से लेकर निर्वाण तक कष्ट ही कष्ट लिखें, आखिर मानवता को कौन सी सीख देने के लिए ये सब लीलाएं की? सभी का दुःख हरने वाले कान्हा खुद अपने जीवन में इतने कष्ट क्यों झेलते रहे प्रभु? क्या आपसे भी ऊपर कोई और शक्ति है, या ये सब आपकी ही रची अलौकिक लीला थी? जीवन पर्यन्त राधा रानी के प्रेम से भी वंचित रहे प्रभु तुम क्यों? आखिर ये कैसी अलौकिक लीला थी?

—————

यह कविता (क्यों कन्हैया?) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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अयोध्या।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ayodhya | अयोध्या।

कण-कण वासी, अवध निवासी,
मानवता के त्राता, जगत के सुखदाता।
दानव – दुष्ट – दलन अवतारी,
श्रृष्टि सृजन सद्धर्म प्रभारी।
सहज शेष शारदा संग में,
भव – भय भन्जन जग हितकारी।

सरयू अमिय प्रदाता, श्रृष्टि जगत विख्याता,
मानवता के त्राता, जगत के सुख दाता।

बंदर संग मदारी भेषा,
दरस-परस शिव अति लवलेशा।
बाल सुलभ श्री राम दरस पा,
अति सुख पावे नर हरि भेषा।

समता मूलक ध्ताया त्रिपुर विनाशक ज्ञाता,
मानवता की त्राता, जगत के सुख दाता।

जल निधि वक्षस्थल पर धाये,
राम सेतु निर्माण कराये।
मर्कट बंदर भालू के संग,
लांघि समंदर लंका आये।

‘मंगल’ भाष्य विधाता, जीवन ज्योति प्रदाता,
मानवता के त्राता, जगती के सुख दाता।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जिस भूमि पर प्राचीन समय से ही महापुरुष तपस्या करते आये है, निष्काम उपासकों की पुण्य गाथा से कण – कण सुशोभित है प्राचीन पुरी अयोध्या धाम। महाबली हनुमान जी के आराध्य की नगरी अयोध्या धाम। सरयू नदी के तट पर प्राचीन पुरी अयोध्या धाम जहां जगत पिता श्री हरि खुद आये श्री राम रूप में, पूरी मानव जाती को मर्यादा व धर्म का सीख देने। दुष्टों का संहार कर, जगत में शांति की पुनः स्थापना कर, प्रेम, पवित्रता व त्याग के साक्षात रूप श्री राम। अयोध्या धाम पुनः विश्व में “वसुधैव कुटुम्बकम्” सनातन धर्म के मूल संस्कार को मानवों में भरने का कार्य करेगा।

—————

यह कविता (अयोध्या।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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डिजिटल जमाना।

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Digital Era | डिजिटल जमाना।

अब डिजिटल जमाना हो गया,
सब कुछ फोन में ही खो गया।

सुबह से शाम तक, दिन से रात तक,
चाय की चुस्की से लेकर,
रात के खाने की बात तक।

अब फोन साथी हमारा प्यारा हो गया,
इसने न जाने कितनों का चैन खोया,
इसे देखते रहने की चाह में दिन-रैन रोया।

क्या करे, हम सब की एक मजबूरी,
फोन से ही सारे काम आसान हो गये,
माना कि फोन बहुत ही जरूरी है।

इसके बिना जिन्दगी अधूरी है,
पर इसको अपनी उँगलियों पर नचाना है।

बनानी इक दूरी है, क्योंकि…
अधिकता हर चीज की बुरी है।

समय की जरूरत है,
चलना है समय के साथ,
पर इसके इशारों पर चले,
ना बाँधों इतने, अपने हाथ।

सोचो इसके साथ रहते हमने,
कितना खोया, कितना पाया है।

फोन की तलब लगी इतनी,
फोन हमें किस मोड़ पर ले आया है।

अब डिजिटल जमाना हो गया,
सब कुछ फोन में ही खो गया।

फन्नी वीडियो देखकर,
अब हँसी नहीं, चिंता होती है।

फोन के साथ रहते,
दूसरे कामों की क्या दुर्दशा होती है।

माँ फोन करती-2 जब,
अपने बच्चे को ही उल्टा
लटका कर पकड़ती है।

अब सोचो! मंथन करो,
उस मासूम बच्चे की
जुबां से क्या दुआ निकलती है।

न खाने-पीने की,
ना जागने सोने की खबर।

जहाँ देखों वही पर,
इसके ज्यादा दुष्प्रभावों की नजर।

हाय रे !
डिजीटल होने की दौड़ ने,
हमें कहाँ लाकर छोड़ा है।

नांदान बच्चे सीखें ना जाने क्या क्या,
इसके अच्छे गुणों से मुँह मोड़ा हैं।

अंत में रखना ध्यान इक छोटी सी बात,
चाहें फोन का दिन-रात रखो साथ।

इसमें कभी इतना ना होना व्यस्त,
कि छूट जाएँ अनमोल रिश्तों का हाथ।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आधुनिकता और डिजिटल उपकरण, स्मार्टफोन इत्यादि का उपयोग अच्छे कार्यों के लिए ही करें, याद रखें — डिजिटल उपकरण के कही आप या आपके बच्चें गुलाम ना बन जाए। माना की डिजिटल उपकरण, स्मार्टफोन इत्यादि जरुरी है लेकिन इनका दुरुपयोग करना ठीक नहीं है। सोचने और जानने की शक्ति प्रभावित करता है स्मार्टफोन, बच्चों में किसी चीज़ को सीखने की ललक बहुत ज्यादा होती है, तो अधिक जिज्ञासा के कारण वह गलत चीज़ें भी सीख सकते हैं। इसके अलावा मेंटल हेल्थ पर भी नकारात्मक प्रभाव होता है अवसाद, नींद पूरी न होना जैसी समस्या होती है। बच्चें मोबाइल का प्रयोग जितना कम समय के लिए करेंगे उतना बेहतर है। स्मार्टफोन के प्रयोग से आजकल के बच्चें ज्यादा गुस्से वाले व चिड़चिड़े हो गए है।

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यह कविता (डिजिटल जमाना।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मृत्युलोक के नाते।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mrityulok Ke Naate | मृत्युलोक के नाते।

सदा प्यार अनुराग लुटाने वाले,
आज हमसे क्यों रूठे हैं।
यह दौर हमसे कहता है,
मृत्युलोक के सारे नाते झूठे हैं।

नेत्र की गहराई में झांका तो,
दृष्टिगत हुआ पानी गहरा।
उतार – चढ़ाव से जीवन चलता,
बतलाता हर इक की गाथा हहरा।
वेदना छुपी है मुस्कानों में,
सबके सपने टूटे हैं,
मृत्युलोक के सारे नाते झूठे हैं।

कदमों-कदमों पर खिंचीं रेखायें,
अश्रु – अश्रु पर बंधन है।
बेजुबान बेबसी के होंठों पर,
विहँसता रहता क्रंदन है।
हास्य-व्यंग्य आस मुक्त मधुर क्षण,
जाने किसने लूटे हैं,
मृत्युलोक के सारे नाते झूठे हैं।

मंजुल मनोरम गीत भ्रमर ने गाये,
मुकुलों ने अपने पराग लुटाये हैं।
देकर इक-दूसरे के प्राणों को,
भावात्मक तृप्ति दे संतुष्ट बनाये हैं।
वो सुधा बरसाने वाले,
ये रिश्ते-नाते अनूठे हैं,
मृत्युलोक के सारे नाते झूठे हैं।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (मृत्युलोक के नाते।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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थाती की बाती।

Kmsraj51 की कलम से…..

Thati Ki Bathi | थाती की बाती।

दु:ख लहरों में चिघाड़ती है,
नित इक नई विपदा सहती है।
चिंताओं में रहती हमेशा है,
ऐसे ही कथा कहती अपने उर की।

सदा छटपटा कर रोती है,
आँसुओं से आँचल धोती है।
सुख की नींद वह कहाँ होती है,
विकल उद्विग्न वह होती है।

दु:ख-दर्द संकट है,
रंज है आँखों में आकर ठहरा है।
हर इक श्वांसों पर मातम है,
क्षोभ अगाध का गहरा है।

दिवा-रात्रि मचलती रहती है,
करवंट वह बदलती रहती है।
रह-रहकर संभलती रहती है,
न जाने किस अग्नि में जलती है।

विश्व ने इसे क्या समझा है,
बस चंद लोगों का खेल समझा है।
जो समझा है अच्छा समझा है,
इस संस्कृति को कचरा समझा है।

जग जलेगा जब आहों में,
बदला लेगी उन नमकहरामों से।
गुजरेगी जब बर्बादी के राहों से,
कर लेना तब ताजपोशी गुनाहों से।

विश्व को हिला देगी उठकर,
विश्व को दिखा देगी जमकर।
विश्व को जता देगी,
विश्व को बता देगी।

बस इक सहारा हम ही हैं,
समस्त सृष्टि की सनातन हम ही हैं।
सनातन का डंका बजेगा,
सुर-धुन पर ही चलेगा।

हम वो पुरातन है समझायेगी,
कण-कण में सनातन बसायेगी।
जग और जग वालों के होंठों पर,
बस इक नाम ये ही आयेगी।

संस्कृति और संस्कारों की भूमि है,
पावन जिसका हर कण-कण है।
हृदय अंत: में इसको बस जाने दो,
हम भी इसके अंश पुराने हैं।

वक्त बावक्त हम कहां गिरे,
अब लौट चलें अपने साये में।
पहचान हमारी भारत भूमि है,
बसे जिसमें राम – कृष्ण है।

देवी दुर्गा के प्रचंडों में,
पूजी जाती जहाँ अबला नारी।
जह सर्वस्त्र के हम भटके पाही हैं,
कंठ-कंठ में बसी वेद वाणी है।

चलो रज चूम ले उस थाती का,
अंग गात मचल रहा।
उसकी छत्रछाया में जाने को,
भूमंडल का बस इक वही सहारा।

भारत भूमि ही है हमको प्यारा,
चलो समा जायें उस पावन में।
पवित्र कर लें अपने जीवन को,
पुण्य जहां बसता है।
पाप त्याग हमें वहीं जाना है,
सनातन ही पुरातन है।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (थाती की बाती।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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दौर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Daur | दौर।

वो छब्बीस थी,
और अब इंतजार सताईस का था।
वो दौर मौज मस्ती का था,
और अब ये दौर ज़ोर अजमाइश का था।

कहतें है इंतजार का फल मीठा होता है,
जो होता है वो ठीक ही होता है।
दिल यहां से जाने को भी नही कर रहा है,
पर एक वो भी है जो हमें बुला रहा है।

वो दौर अपनी मन मर्जी का था,
जब दो को वहां जाना हुआ था।
ये दौर उत्सुकता वाला है,
जब एक को यहां आना हुआ है।

ये दौर – दौर की बात है,
हर दौर का अपना मज़ा है।
हम हर दौर को गौर से जीते हैं,
बस यूं समझिए हम वो है जो,
पानी को भी अमृत समझ के पीते हैं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जीवन के हर दौर में उतार-चढ़ाव आते रहते है, जब शरीर ऊर्जावान हो, तब सिर्फ सोचते ही न रहे, अच्छे कार्य करते रहे। उतावलेपन में कभी भी गलत कार्य ना करे। “कहतें है इंतजार का फल मीठा होता है” अगर आपके कर्म अच्छे है तो देर से ही सही आपको शांतिमय ख़ुशी मिलेगी। एक बात याद रखें की कोई भी दौर सदैव नही रहेगा, दौर बदलते रहेंगे, इसलिए कभी भी चिंतित व निराश होकर बैठ ना जाना, रुक ना जाना। जय माता दी!

—————

यह कविता (दौर।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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पहाड़ी कबता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Pahadi Kabata | पहाड़ी कबता।

हिमाचल मेरा देवताओं की धरती,
इंसानियत यहां के लोगों की कभी नहीं मरती।

जब लोगों ने की प्रकृति से ऐसी छेड़छाड़,
देखो आ गई हिमाचल में भी बाढ़।

उज्जड़ गए लोगों के ऐसे घर द्वार,
पड़ी प्रकृति की देखो ये कैसी मार।

अमीर गरीब का भेद हुआ खत्म,
सैलाब ने सब कुछ कर दिया भस्म।

लगे करने अब बाढ़ प्रभावितों की सेवा,
जय भी कहता है जरूर मिलेगा उनको जीवन में मेवा।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हिमाचल आदिकाल से ही देवताओं की धरती है, इंसानियत यहां के लोगों की कभी भी नहीं मरती है। जब-जब इंसान ने की प्रकृति से ऐसी छेड़छाड़ की है तब-तब देखो आ गई हिमाचल में भी भयानक बाढ़। उज्जड़ गए लोगों के ऐसे घर द्वार सब बेचारे बेघर हुए, पड़ी प्रकृति की देखो ये कैसी मार। इस प्राकृतिक आपदा के बाद अमीर गरीब का भेद हुआ खत्म, सैलाब ने सब कुछ कर दिया भस्म। जो भी बाढ़ प्रभावितों की सेवा करता, जय भी कहता है जरूर मिलेगा उनको जीवन में उनके कर्म का अच्छा मेवा। जय माता दी!

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यह कविता (पहाड़ी कबता।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
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  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
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  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
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बारिश।

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Rain | बारिश।

बारिश की बौछार जब धरा पर पड़ती है,
गर्मी की तपन से सबको राहत मिलती है।

सूखी हुई फसल को अमृत सा मिल जाता है,
यह देखकर कृषक गदगद हो जाता है।

मुरझायी हरियाली को जैसे सिंगार मिल जाता है,
बारिश की बौछार से मन प्रसन्न हो जाता है।

खिले-खिले वन उपवन महकने लगते है,
छोटी-छोटी कपोलों से फूल खिलने लगते है।

बादल गरजते मोर भी नृत्य करने लगता है,
झम-झम नाचते सभी जंगल में रौनक लगती है।

गर्मी से सुकून भरा राहत मिलती है सभी को,
मिट्टी से आती सोधी खुशुबू से मन खिल जाता है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भारत में वर्षा ऋतु जुलाई महीने में शुरु हो जाती है और सितंबर के आखिर तक रहता है। ये असहनीय गर्मी के बाद सभी के जीवन में उम्मीद और राहत की फुहार लेकर आता है। हमारे देश में वर्षा ऋतु बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है इसका महत्व इसलिए अधिक बढ़ जाता है क्योंकि हमारे देश में अधिकतर किसान निवास करते हैं जिनका जीवन खेत और खेती पर निर्भर करती है। किसी को बरसात के मौसम में घूमना पसंद होता है, तो किसी को बरसात में भीगना अच्छा लगता है। वर्षा ऋतु के मौसम में पेड़-पौधों पर हरियाली की सुंदरता भी और बढ़ जाती है। बादल गरजते और मोर भी नृत्य करने लगता है, झम-झम नाचते सभी जंगल में रौनक लगती है।

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यह कविता (बारिश।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

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