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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

आप्तकाम मन नववर्ष 2022

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आप्तकाम मन नववर्ष 2022 ♦

वर्ष का यह नवीन विचार प्रमेय,
नवल रूप हों सविता का उदय।
सुविचार सरिता हो प्रवाह मय,
कण-कण में बन रहा प्रेम वलय।
मन सिंधु, हर विंदु का नेह हृदय।

विग्रह – द्वंद्व दूर, निर्बल सबल भव्य,
प्रातः रुपल हो, बाल – रवि का उदय।
अहं विकार का हो वयं में मनोलय,
हित अलग-विलग, पर हो समन्वय।
हर दृष्टि सद्भाव की, घर संत – निलय।

अम्बर का विस्तार, अवनि का धैर्य,
पुष्प-हास मधुर, जन-मन का श्रेय।
लोक सेवा में हो मन शक्ति अक्षय,
अर्पित करें, परम के चरण आश्रय।
जनवाणी स्वर हो सहज स्वीकार्य।

गणतंत्र सुफल, यह साहित्य ध्येय,
जन गुण जलधारा का ऊर्ध्व लक्ष्य।
भोजन, वस्त्र, जन- शिक्षा अभियान,
समत्व भाव पले, जो समूह सौभाग्य।
अन्याय रूप, विषमता हो मृतप्राय,
आप्तकाम हो, मनु पुत्र का हृदय।

काव्य मन में गंगा, हो पावन विधेय,
सुतीक्ष्ण में राम, लेखक में जन हृदय।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — ये नया वर्ष खुशियां लेकर आया, मानवता और करुणा से संवेदना फैलाएगा। आइए हम सब मिलकर स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाएं। पर्यावरण की रक्षा में आइए हम सब मिलकर ये संकल्प ले, प्रत्येक व्यक्ति एक – एक पेड़ जरूर लगाएंगे, और जब तक पेड़ अपना स्व खुराक न लेने लगे तब तक उसका देख रेख पूर्ण मन से करेंगे। राम जन्मभूमि से शांति सद्भाव फैलाएगा ये नया साल। आइए हम सब मिलकर भारत भूमि के पूर्ण विकास में अपना अमूल्य योगदान दे, सच्चे तन मन से। न्याय पूर्ण उत्तम समाज बनाने में सभी सहयोग करें। नव वर्ष का यह नवीन विचार प्रमेय, नवल रूप में हों सविता का उदय। सुविचार सरिता का हो सर्वत्र प्रवाह कण-कण में बन रहा प्रेम वलय। मन सिंधु, हर विंदु का नेह हृदय।

—————

यह कविता (आप्तकाम मन नववर्ष 2022) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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संक्रांति का पैगाम।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ संक्रांति का पैगाम। ♦

होशियार खबरदार…….
आ गया मकर संक्रांति का त्योहार।
सभी पर्वों से अलग, अनूठा, अनोखा,
दिलाता एक सुंदर एहसास।

तिल संक्रांति, खिचड़ी पर्व नाम से,
यह है जाना जाता।
प्रत्येक 14 या 15 जनवरी को,
सुनाता एक पैगाम।

गम के अधियारों की छंटा हटाकर,
करो एक नई शुरुआत।
मकर संक्रांति अर्थ बताता,
देता एक संकेत।

सूर्य का एक राशि से,
दूसरी राशि में गोचर का,
कराता है भान,
इस वैदिक उत्सव में, करते सब दान।

खिचड़ी भोग का,
इस दिन होता है मान।
भिन्न भिन्न जगहों पर, भिन्न भिन्न नामों से,
जाना जाता, बड़े ही शान।

दही, चुरा, तिल, गुड़ का पान,
होता बड़ा अभिमान।
नए साल में संग लाती,
सुख शांति और समृद्धि की आस।

पतंग उड़ाने की प्रथा बनाती,
इसे और भी खास।
शुभ संदेश का होता वाहक,
लाता सबको पास।
करता एक नई ऊर्जा का संचार।

आओ मिलकर संग मनाएं,
खुशियों का त्योहार।
करें एक नई शुरुआत,
लाए जीवन में खुशियां अपार।

आप सभी पाठकों को सपरिवार तहे दिल से मकर संक्रांति पर्व की शुभकामनाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — मकर संक्रांति या उत्तरायण या माघी या बस संक्रांति, जिसे बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है, और नेपाल में माघ संक्रांति के रूप में, यहाँ संक्रांति का अर्थ है ‘स्थानांतरण’, इस दिन को सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का दिन माना जाता है। मकर संक्रांति, या बस संक्रांति, भगवान सूर्य (सूर्य भगवान) को समर्पित है। आज के दिन तिल के दान को बेहद शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति को तिल संक्रांति भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन काले तिल के दान से जीवन की सभी तरह की परेशानियां दूर होती है। मकर संक्रांति के त्योहार को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रूप में मनाया जाता है। पंजाब में यह लोहड़ी (Lohri), उत्तराखंड में उत्तरायणी, गुजरात में उत्तरायण, केरल (Kerala) में पोंगल (Pongal) और असम में बिहू (Bihu) के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। आज यानी 14 जनवरी 2022 को शुक्ल पक्ष की द्वादशी की तिथि को यह त्योहार मनाया जा रहा है।

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यह कविता (संक्रांति का पैगाम।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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वर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं। ♦

गुलाब खिलते रहे सदा आपकी जिंदगी की राहों में,
हंसी चमकती रहे हमेशा आपकी निगाहों में!
खुशियों की लहर मिलती रहे हर कदम पर आपको,
देता है हमारा यह दिल दुआ बार – बार आपको।

गुलों की शाख से हमने खुशबू चुरा के लाया है,
और गगन के पांव से घुंघरू चुरा के लाया है।
थिरकते कदमों से आया है सुनहरा नया साल,
आपके लिए यह वर्ष खुशियां चुरा के लाया है।

नया साल आता रहे जीवन में बनके नवीन उजाला,
खुल जाए आपका जिससे किस्मत का बंद ताला।
हमेशा आप पर रहें मेहरबान कल्याण करने वाला,
ईश्वर से यही दुआ करता है आपका यह चाहने वाला।

कैलेंडर बदल जाएंगे आने वाले नए साल में,
कपड़े भी बदल लिए होंगे आप नए साल में!
संस्कार को बदलने की यदि कोशिश करेंगे आप,
संस्कृति बदल जाएगी इतना तो लो मान आप।

आया है नया साल मन के मैल को भी निकालने,
बाबा विश्वनाथ के दरबार में शंखनाद को बजाने।
विश्व प्रसिद्ध माँ गंगा आरती दुनिया को उजाला करने,
मानवता और करुणा से संवेदना को जन्म देने।

स्वच्छता की ओर और बढ़ाएगा कदम नया साल,
गरीबों का हक दिलाने वाला हो यह नया साल।
अब तक जिसने मारा है गरीबों का अपने देश में,
गरीबों का हक मारने वालों को देगा जेल नया साल।

चावल का उत्पादन देश में बढ़ाएगा नया साल,
बेरोजगारों को रोजगार दिलाएगा यह नया साल।
पर्यावरण की रक्षा में कदम बढ़ाएगा नया साल,
विकास की यात्रा में खुशियां लाएगा नया साल।

राम जन्मभूमि से शांति सद्भाव फैलाएगा नया साल,
दशरथ जी का महल सुख की सिहरन है नया साल।
न्याय पूर्ण उत्तम समाज बनाएगा यह नया साल,
आतंकवादियों पर कहर बनकर आया है नया साल।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — ये नया वर्ष खुशियां लेकर आया, मानवता और करुणा से संवेदना फैलाएगा। आइए हम सब मिलकर स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाएं। पर्यावरण की रक्षा में आइए हम सब मिलकर ये संकल्प ले, प्रत्येक व्यक्ति एक – एक पेड़ जरूर लगाएंगे, और जब तक पेड़ अपना स्व खुराक न लेने लगे तब तक उसका देख रेख पूर्ण मन से करेंगे। राम जन्मभूमि से शांति सद्भाव फैलाएगा ये नया साल। आइए हम सब मिलकर भारत भूमि के पूर्ण विकास में अपना अमूल्य योगदान दे, सच्चे तन मन से। न्याय पूर्ण उत्तम समाज बनाने में सभी सहयोग करें। गरीबों का हक दिलाने वाला हो यह नया साल। अब तक जिसने भी मारा है गरीबों का हक़ अपने देश में, गरीबों का हक मारने वालों को देगा जेल ये नया साल। मन के मैल को भी निकाल कर, बाबा विश्वनाथ के दरबार में शंखनाद को बजाने आया है ये नया साल। विश्व प्रसिद्ध माँ गंगा आरती दुनिया को उजाला करने, मानवता और करुणा से संवेदना को जन्म देने।

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यह कविता (वर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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नारी है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नारी है। ♦

पुरुष की बराबरी में सीमा पर जाती,
फिर भी दहेज की बलि चढ़ जाती।
कड़वा सत्य है समाज में नहीं आती,
नारी पुरुष से कम क्यों दिखाई जाती?

भिन्न – भिन्न रंगों के गाने गाते जाती,
बुरी नजर वालों को राख में मिलाती।
वक्त पर फूल और कांटा बन जाती है,
लक्ष्मी दुर्गा और काली कहलाती है।

बहन स्वरुप में स्नेह प्यार लुटाती है,
माता के रूप में ममता दिखाती है।
शोभित आभूषण युक्त होकर शिवाली,
युद्ध क्षेत्र में महाकाल पीर घरवाली।

प्रीति करने में सक्षम वहराधा रानी,
गृहस्थ करने में भी एक खानदानी है।
सम्मान की रक्षा के लिए वह काली,
दुश्मनों के लिए विकराल रूप वाली।

औरत है समस्याएं आती – जाती हैं,
सहती है, भावनाओं में नहीं बहती!
टूटती और बिखरती सहती जाती है,
कड़वी सच्ची, सच्चाई स्वीकारती है।

देवी का दर्जा मिला, उसने मांगा नहीं,
कितनी सशक्त है वह, यह जाना नहीं।
हर जीत में उसका जलवा, माना नहीं,
महान बल पर खास जिद, ठाना नहीं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कड़वा है मगर सत्य है ये नारी तू नारायणी, जननी तू, माँ के रूप में प्यार ममता, स्नेह, लालन-पालन, जीवन के अंतिम पल तक दिखाती है। बहन स्वरुप में स्नेह प्यार सदैव लुटाती है। बुरी नजर वालों को राख में मिलाती तू, वक्त पर फूल और कांटा बन जाती है, लक्ष्मी, दुर्गा और काली कहलाती है। सदैव ही पुरुष की बराबरी में सीमा पर जाती, फिर भी दहेज की बलि क्यों चढ़ जाती। ये नारी है समस्याएं आती – जाती हैं, सहती है, भावनाओं में नहीं बहती! टूटती और बिखरती सहती जाती है, कड़वी सच्ची, सच्चाई स्वीकारती है। देवी का दर्जा मिला उसे, उसने कभी मांगा नहीं, कितनी सशक्त है वह, यह जाना नहीं। हर जीत में उसका जलवा, माना नहीं, महान बल पर खास जिद, ठाना नहीं कभी। नारी तू नारायणी।

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यह कविता (नारी है।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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शुक्रिया 2021

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शुक्रिया 2021 ♦

शुक्रिया 2021 दुनियां की आँखें खोलने के लिए।
दुश्वारियों की कसौटी पर दम-खम तौलने के लिए।
अपनों को और स्वप्नों को खोने के बाद भी जिंदा हैं।
डंके की चोट पर सीना ठोककर ये सच बोलने के लिए।
शुक्रिया …….

हम अपनी संस्कृतियों का सम्मान भूल गए थे।
अपनी धरती की सरहद, आसमान भूल गए थे।
बेलगाम उड़ने लगे थे पतंग सा पछिया हवा में।
प्रकृति का भी है घर-आंगन, दालान भूल गए थे।
अपनी हद में ज़द में मिलकर लड़ने भिड़ने की।
और अपना घर, अपना अंतर टटोलने के लिए।
शुक्रिया …….

आगे की क्या दशा-दिशा हो, नीयति, नीति हो।
किसका कितना प्रतिकार हो किससे प्रीति हो।
मानवता शर्मशार हुई पर इंसानियत ने माना।
वही विकास है जिसमें प्रकृति की स्वीकृति हो।
“आपदा में मत अवसर ढ़ूंढ़ो, जियो और जीने दो”।
जहर घोलकर जाते जाते शहद घोलने के लिए।
शुक्रिया …….

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – भावनाओं के समय मन के यूँ उमड़ने – घुमड़ने की प्रक्रिया बीते वर्ष ने बहुत कुछ सीखा दिया, शुक्रिया 2021 दुनियां की आँखें खोलने के लिए। दुश्वारियों की कसौटी पर दम-खम तौलने के लिए। अपनों को और स्वप्नों को खोने के बाद भी जिंदा हैं। डंके की चोट पर सीना ठोककर ये सच बोलने के लिए। शुक्रिया ……. सारे गीले शिकवे भूलकर गले से गले मिलकर नया साल मनाया जाये। बिते वर्ष कई सारे सीख देकर गया। जितने दिन की ज़िन्दगी है, ज्ञान, ध्यान, योग के साथ-साथ सभी से प्रेम पूर्वक मिलजुल कर बिताया जाए। ना किसी को हम सताए, ना कोई दुःख दे। सभी मिलजुल कर सबके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें।

—•—•—•—

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यह कविता (शुक्रिया 2021) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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नववर्ष वंदन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नववर्ष वंदन। ♦

“ब्रम्हध्वज नमस्तेऽस्तु सर्वाभीष्ट फलप्रद।
प्राप्तेऽस्मिन वत्सरे नित्यं मग्द्ऋहे मंगलं कुरु॥”

वसुधा सिहरती है शीतों से, नभ में धुंध गहरी है।
निकुंज उद्यानों की सीमाओं पर, शीतल पवनों का पहरा है।
सूना निसर्ग का प्रांगण, न रंग न ही उल्लासों का मेला है।

धरती से गगन तक छाई, लालिमा विहान लिये आई।
उड़ते झोंकों में पतंग सतरंगी, ले आई प्राचीर से उजोरा आई।
उत्सु ने राग भैरवी गाई, लालिमा विहान लिये आई।
मधुर मयूखें पूरब से आई, इंदुजा के अमृत में घोल लाई।

चैन भरी रात मंगल प्रभात लाई, लालिमा विहान लिये आई।
स्कन्धों पर सारंग नये सुनहरी पातें।
वितरित करती स्नेहिल आदित्य किरणों की सौगातें।
थकित धूप खिली मनभायी, लालिमा विहान लिये आई।

यह नीहार-कुहासे को छंटने दो, यामिनी का प्रांत संकुचित होने दो।
निसर्ग का मुखड़ा निखरने दो, हृषिकेश का ज़रा रंग चढ़ने दो।
महामाया को दुल्हन का सौन्दर्य लेने दो, ये नेह – पीयूष बरसायेगी।
शस्य – श्यामल धरती माता, केतन-निकेतन सबमें उल्लास लाने दो।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — मन में किस तरह के विचारों व भावनाओ के तरंग उड़ते है ये बताने की कोशिश की है। प्रकृति के मनोरम सौंदर्य का वर्णन करते हुए नव वर्ष का आगमन किया है। इस समय वसुधा सिहरती है शीतों से व नभ में धुंध गहरी है। निकुंज उद्यानों की सीमाओं पर, शीतल पवनों का पहरा है। सूना निसर्ग का प्रांगण, न रंग न ही उल्लासों का मेला है। धरती से गगन तक छाई, लालिमा विहान लिये आई। उड़ते झोंकों में पतंग सतरंगी, ले आई प्राचीर से उजोरा आई। उत्सु ने राग भैरवी गाई, लालिमा विहान लिये आई। मधुर मयूखें पूरब से आई, इंदुजा के अमृत में घोल लाई।

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यह कविता (नववर्ष वंदन।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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बलगम से निजात पाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बलगम से निजात पाएं। ♦

जाड़े का मौसम आया,
छाती पर बलगम छाया।
बूढ़ा जवान लड़का आया,
दादी मां ने काढ़ा पिलाया।

काढ़ा कैसे उसने बनाया,
उसमें उसने क्या मिलाया।
एक इंच का अदरक लाया,
तेजपात दो पत्ते पकाया।

पत्ते के दो टुकड़ा कर डाला,
साफ पानी में उसे धो डाला।
एक गिलास पानी में उबाला,
आधा पानी बचा, पी डालें।

काढे में कुछ शहद मिलाया,
गुनगुने काढ़े में उसे हिलाया।
धीरे-धीरे उसे उसने हलराया,
शिप शिप – पीने को बताया।

तेजपात बलगम निकालता,
छाती को वह निरोगी बनाता।
कोलेस्टॉल बनने नहीं देता,
यूरिक एसिड को कम करता।

अदरक से इंफेक्शन दूर होता,
मुख के छाले ठीक हो जाता।
शरीर में ताकत व बल लाता,
यह क्रीम नाशक है कहलाता।

शहद बल बुद्धि को तेज करता,
नस के ब्लॉकेज को दूर करता।
काया में अतुलित स्फूर्ति आती,
कामकाज में मन नहीं घबराता।

प्रतिदिन सर्दी में काला बनाएं,
तेजपात – अदरक को पकाएं।
एक गिलास पानी उसमें मिलाएं,
आधा बचे उसे पीने को बचाएं।

सर्दी और बरसात में प्रयोग करें,
अपनी काया इससे निरोध करें।
अपने घर में सबको इसे पिलाएं,
पास पड़ोस में लोगों को बताएं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कड़वा है मगर सत्य है ये जो मौसम चल रहा है कभी ज्यादा सर्दी कभी हल्का गर्म, ऐसे मौसम में अचानक से होने वाले सर्दी, जुकाम और खांसी व बलगम से राहत पाने के लिए काढ़ा बहुत ही लाभकारी है सभी के लिए। इस मौसम में काढ़ा कैसे बनाए कवि ने ये समझने की कोशिश की है, और काढ़ा से होने वाले फायदे को भी बताने की कोशिश की है। काढ़ा वायरल इन्फेक्शन से भी बचता है। इम्यून सिस्टम सही रहता है काढ़ा पिने से।

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यह कविता (बलगम से निजात पाएं।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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नए वर्ष का संदेशा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नए वर्ष का संदेशा। ♦

हाथों से हाथ नहीं……
दिल से दिल मिलाया जाय।
नए वर्ष के आँगन में,
सबको गले लगाया जाय।

नव वर्ष का करें स्वागत,
झिलमिल ज्योत जलाया जाय।
भूल पुराने दु:खों को,
फिर से जश्न मनाया जाय।

भाई है भाई का दुश्मन,
ऐसी बात न सोंचा जाय।
सोंच-सोंच पर निर्भर है कि,
किसको कैसा समझा जाय।

बड़ी आस से लिखा यारों,
मानवता दिखाया जाय।
कवि अमित का संदेशा ये,
जन-जन तक पहुंचाया जाय।

♦ अमित प्रेमशंकर जी — एदला-सिमरिया, जिला–चतरा, झारखण्ड ♦

—————

Conclusion

  • “अमित प्रेमशंकर“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — सारे गीले शिकवे भूलकर गले से गले मिलकर नया साल मनाया जाये। बिते वर्ष कई सारे सीख देकर गया। जितने दिन की ज़िन्दगी है, ज्ञान, ध्यान, योग के साथ-साथ सभी से प्रेम पूर्वक मिलजुल कर बिताया जाए। ना किसी को हम सताए, ना कोई दुःख दे। सभी मिलजुल कर सबके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें।

—————

यह कविता (नए वर्ष का संदेशा।) “अमित प्रेमशंकर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। आपकी ज्यादातर कविताएं युवा पीढ़ी को जागृत करने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

नाम: अमित प्रेमशंकर
पता: एदला – सिमरिया
जिला: चतरा (झारखण्ड)
सम्प्रति: कवि, गीतकार व ढोलक वादक।

प्रकाशित पुस्तकें: आत्म सृजन, काव्य श्री, एक नई मधुशाला १, एक नई मधुशाला २, भावों के मोती, व अक्षर पुरूष।
प्रकाशित रचनाएं: देश के अलग-अलग पत्र पत्रिकाओं मे लगभग दो सौ रचनाएं प्रकाशित व समय समय पर सामाचार पत्रों के माध्यम से पत्राचार।
विशेष: “सीता माता सी कोई नहीं” तथा “आज राम जी आएंगे” महाराष्ट्र के वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओ. सी. पटले द्वारा पोवारी भाषा में अनुवाद।

प्राप्त सम्मान: काव्य श्री साहित्य सम्मान, आत्म सृजन साहित्य सम्मान, सरदार भगतसिंह साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत कृति सम्मान, साहित्य कर्नल सम्मान, रैदास साहित्य सम्मान, द फेस ऑफ इंडिया सम्मान, दिल्ली युथ डेवलपमेंट से सम्मानित।
प्रकाशनार्थ: मन की धारा

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ऊन का चोला।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ऊन का चोला। ♦

बुन देती मेरा भी कोई,
एक ऊन का चोला।
लिख देती सीने पे उसके,
लव यू का एक गोला।

होती उसपे रंग बिरंगी,
धारीदार डिजाइन।
कोई लगाता नज़र ना मुझको,
ना ओझा ना डायन।

उसे पहनकर खूब उछलता,
बन जाता मन मौला।
बुन देती मेरा भी कोई,
एक ऊन का चोला।

ठिठुर गया है तन मन मेरा,
ठिठुर गया है जीवन।
पूछती कैसा लगा स्वेटर,
भेजा जो ये सीजन।

तब उसके एहसासों से,
बातें करता मन भोला।
बुन देती मेरा भी कोई,
एक ऊन का चोला।

♦ अमित प्रेमशंकर जी — एदला-सिमरिया, जिला–चतरा, झारखण्ड ♦

—————

Conclusion

  • “अमित प्रेमशंकर“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — एक प्यार करने वाला सदैव ही अपनी प्रेमिका से केवल सच्चा प्रेम ही चाहता है। शीतकालीन सत्र के दौरान एक प्रेमी के मन में चलने वाले विचारों को दर्शाया है। काश कोई बुन देती मेरा भी एक ऊन का चोला। लिख देती सीने पे उसके, लव यू का एक गोला। होती उसपे रंग बिरंगी, धारीदार डिजाइन। कोई लगाता नज़र ना मुझको, ना ओझा ना डायन।

—————

यह कविता (ऊन का चोला।) “अमित प्रेमशंकर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। आपकी ज्यादातर कविताएं युवा पीढ़ी को जागृत करने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

नाम: अमित प्रेमशंकर
पता: एदला – सिमरिया
जिला: चतरा (झारखण्ड)
सम्प्रति: कवि, गीतकार व ढोलक वादक।

प्रकाशित पुस्तकें: आत्म सृजन, काव्य श्री, एक नई मधुशाला १, एक नई मधुशाला २, भावों के मोती, व अक्षर पुरूष।
प्रकाशित रचनाएं: देश के अलग-अलग पत्र पत्रिकाओं मे लगभग दो सौ रचनाएं प्रकाशित व समय समय पर सामाचार पत्रों के माध्यम से पत्राचार।
विशेष: “सीता माता सी कोई नहीं” तथा “आज राम जी आएंगे” महाराष्ट्र के वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओ. सी. पटले द्वारा पोवारी भाषा में अनुवाद।

प्राप्त सम्मान: काव्य श्री साहित्य सम्मान, आत्म सृजन साहित्य सम्मान, सरदार भगतसिंह साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत कृति सम्मान, साहित्य कर्नल सम्मान, रैदास साहित्य सम्मान, द फेस ऑफ इंडिया सम्मान, दिल्ली युथ डेवलपमेंट से सम्मानित।
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मत बहाओ आँसू।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मत बहाओ आँसू। ♦

मत बहाओ आँसुओं को बेवजह तुम,
मैं तुम्हारे पीर को नव रूप दूँगा।
देश की मिट्टी को है इसकी जरूरत,
रात का जुगनू, सुबह की धूप दूँगा।

दुनियां को अक्षय धन-दौलत दूँगा मैं,
कमजोर कलम को ऐसे ताकत दूँगा मैं।
वेदना को व्यथा को साँसों में भरकर,
खारेपन को ममतामयी सूरत दूँगा मैं।
दुनियां जलेगी जलती रहे अपनी बला से,
हर हाल में हारेंगे तेरी करूणा, कला से।
सियासतदानों, ठेकेदारों, चौधरियों को,
टूटा हुआ आईना संग चेहरा विद्रूप दूंगा।
मत बहाओ…..

दूब को छाले से तेरे इश्क हो जाये,
ओस की बूँदें तुम्हारे चरण धो जाये।
फटी बिवाई की सिसकती राग सुन,
पंखुड़ियां गुलाब की भी रो-रो जाये।
हथेलियों की घिस चुकी हिना को मैं,
रेखाओं को मिटाती नर्म पसीना को मैं।
शब्दों की सम्मान की मय चाशनी में,
डुबोकर जहान को नया स्वरूप दूँगा।
मत बहाओ…..

आँसू वही जो क्रांति की शुरूआत दे,
कलम को शमशीर कर रक्तिम दवात दे।
मौन को मुखरित करे विस्तार दे अनंत,
शोषितों को वंचितों को कर्जमुक्त प्रभात दे।
सड़ी-गली कुरीतियों को परंपराओं को,
नया लिवास दूँगा कर्तव्य, मान्यताओं को।
अर्द्धांगिनी को सर्वांगिनी का हक दिलाकर,
सामाजिकता को सुखद प्रारूप दूँगा।
मत बहाओ…..

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – भावनाओं के समय मन के यूँ उमड़ने – घुमड़ने की प्रक्रिया को समझाने की कोशिश की है। मन से संवाद किया है, आँसू की शक्ति अनंत है इसलिए आँसू की शक्ति को पहचानो और सही समय पर सही तरीके से उपयोग करो। कवि का कहना है आँसू वही जो क्रांति की शुरूआत दे, कलम को शमशीर कर रक्तिम दवात दे। मौन को मुखरित करे विस्तार दे अनंत, शोषितों को वंचितों को कर्जमुक्त प्रभात दे। सड़ी-गली कुरीतियों को परंपराओं को, नया लिवास दूँगा कर्तव्य, मान्यताओं को। अर्द्धांगिनी को सर्वांगिनी का हक दिलाकर, सामाजिकता को सुखद प्रारूप दूँगा।

—•—•—•—

sk-mishra-kmsraj51.png

यह कविता (मत बहाओ आँसू।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

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