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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

भाई का पैगाम।

Kmsraj51 की कलम से…..

Brother’s message | भाई का पैगाम।

The brother explains to his sister that she should not depend on anyone for her protection, but should make herself strong and self-reliant.

रक्षाबंधन पर,
भाई का पैगाम,
सभी बहनों के नाम।

ओ मेरी बहना,
राखी तू जरूर बांधना,
रक्षा का मैं वचन भी दूंगा।

मगर,
इस कलयुगी युग में,
राक्षसी प्रवृत मानवों में।

आस पास के,
गैर तो गैर अपने लोगों में,
कौन कैसा है पहचानने में।

खा जायेगी तू धोखा,
गिरगिट जैसी रंग बदलती दुनिया में,
गुम हो जाएगी तुम्हारी पहचान।

सुन री बहना,
साये की तरह मेरा साथ नहीं,
इस बात का तूझे ख्याल है रखना।

मुझ पर निर्भर,
मत रह ये बहना,
तुम ही हो घर का गहना।

सुन तू,
नाजों से पली,
तू कोमल सी कली।

हैवानों की नजर,
इसीलिए तुझ पर गरी,
तू लगती हो सुंदर परी।

रुक,
इस मिथ्या को तोड़,
रिश्तों के बंधन छोड़।

नियत अब,
तू पहचाना सीख,
न मांग तू किसी से भीख।

समाज में छवि,
दया कोमलता की प्रतिमूर्ति,
ममता की जो करती है पूर्ति।

समय आने पर,
तू ही चंडी तू काली है,
जग की करती रखवाली है।

निर्भया बनो,
उठो जागो और याद कर,
अपनी शक्ति का संचार कर।

सृष्टि की,
जननी तू पालक तू,
जीवन का आधार हो तू।

फिर,
चंद वहशी से मत डर,
उठ, कर उनका प्रतिकार।

वचन,
आज रक्षाबंधन पर दो,
अन्मविश्वास खुद में ला दो।

तू,
अबला नहीं,तू सबला है,
कोमल नहीं तू कठोर है।

अब,
ना डर प्रतिकार कर,
खुद की रक्षा स्वयं कर।

लोगों की सोंच,
बदलेगी आएगी वो सुबह,
हाथ लगाते होंगे वो तबाह।

सनक ऐसी पाल,
अच्छे के लिए अच्छा,
बुरे के लिए काल बन।

फिर कोई तुझे,
छूने से भी घबड़ाएगा,
सपना मेरा साकार हो जायेगा।

अब,
भाई की न करना फरियाद,
तू ही है मेरी बहना फौलाद।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में एक भाई अपनी बहन को रक्षाबंधन के अवसर पर संदेश भेजता है, जिसमें वह उसे अपनी सुरक्षा के लिए जागरूक और आत्मनिर्भर बनने की सलाह देता है। भाई बहन से कहता है कि वह राखी जरूर बांधे, और वह उसकी रक्षा का वचन भी देता है। लेकिन साथ ही वह इस कलयुगी युग में चारों ओर फैले खतरों और मानवों की राक्षसी प्रवृत्तियों से सतर्क रहने के लिए भी कहता है। भाई अपनी बहन को यह समझाता है कि उसे खुद की रक्षा के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना चाहिए। वह उसे याद दिलाता है कि समाज में उसे कोमल और दयालु समझा जाता है, लेकिन समय आने पर उसे अपनी शक्ति को पहचानना होगा और चंडी व काली जैसी शक्तिशाली रूप धारण कर समाज की रक्षा करनी होगी। भाई यह भी कहता है कि उसे किसी भी बुराई का डटकर मुकाबला करना चाहिए और खुद की सुरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। अंत में, वह बहन से वादा लेता है कि वह शक्ति रूप बनेगी, अपनी शक्ति को पहचानेगी और खुद को सबला मानेगी। भाई बहन से कहता है कि अब वह किसी पर निर्भर न रहे और खुद ही अपनी रक्षा करे, जिससे समाज में बदलाव आए और बुरे लोग उससे डरने लगें।

—————

यह कविता (भाई का पैगाम।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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राखी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rakhi | राखी।

The love between brother and sister is amazing. Perhaps there is no relationship like this in the world.

रक्षाबंधन का त्यौहार जब है आता।
भाई बहन का प्यार और खिल जाता॥

बहन भाई को राखी है पहनाती।
उससे रक्षा की इच्छा है जताती॥

कभी नहीं मांगती पैसा, दौलत व उपहार।
हमेशा मांगती है अपने भाई का प्यार॥

जब भी बहन को कोई मुसीबत है आती।
भाई से सहायता भी जरुर है मांगती॥

भाई भी कभी बहन को नजर अंदाज नहीं करता।
जब जब बहन याद करती हाजरी जरूर है भरता॥

भाई बहन का प्यार भी गज़ब का है होता।
शायद इस रिश्ते जैसा कोई रिश्ता दुनिया में नहीं होता॥

आज भाई की कलाई सुनी सी नजर है आती।
क्योंकि बहन जन्म ही नहीं ले पाती॥

गर भाई की कलाई को चाहते हो हरा भरा।
तो बहन से भी सजनी चाहिए यह धरा॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता रक्षाबंधन के त्यौहार और भाई-बहन के अटूट प्रेम को दर्शाती है। इसमें बहन के स्नेह और सुरक्षा की भावना को रेखांकित किया गया है, जो वह अपने भाई से अपेक्षित करती है। बहन अपने भाई से दौलत या उपहार नहीं मांगती, बल्कि उसके प्यार की ही इच्छा रखती है। जब भी बहन को किसी परेशानी का सामना करना पड़ता है, वह अपने भाई की सहायता लेती है, और भाई भी हमेशा उसकी मदद के लिए तैयार रहता है। भाई-बहन का रिश्ता अत्यंत अनमोल और दुनिया में सबसे खास होता है। कविता के अंत में यह भी बताया गया है कि अगर भाई की कलाई को राखी से सजाना चाहते हैं, तो समाज में बेटियों का जन्म होना आवश्यक है।

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यह कविता (राखी।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आजादी का मर्म।

Kmsraj51 की कलम से…..

Marm of Freedom | आजादी का मर्म।

Wake up, rise up, don't stay silent now, fight back against the atrocities, do it yourself and tell others, sing the praises of freedom. The essence of freedom.

आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं,
वीरों की उन शहादतों की
याद दिलाने आया हूं।
गुलामी की दासताओं का
दर्द सुनाने आया हूं,
आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं।

बातें उन दिनों की है जब बेड़ियों में
जकड़ा देश हमारा था,
त्राहि-त्राहि लोग कर रहे
जुल्मों सितम करारा था।
फिरंगियों की दास्तानों से
थर्राया देश हमारा था,
खिलाफ बोलने वालों की
सरेआम चमड़ी उधेड़ी थी।

अंग्रेजों के जुल्मों ने मन में
उबाल मचाया था,
विरुद्ध बोलने की हिमाकत
नहीं किसी ने उठाई थी।
यातनाओं से तंग आ चुका
एक वीर मर्द पुराना था,
सपूत वो कोई और नहीं
मंगल पांडे का जमाना था।

धीरे-धीरे आग की लौ
पूरे देश में थी फैल गई,
गुलामी के दंश के बीच
आजादी की हवा फैल गई।
कुंवर सिंह और झांसी ने
मोर्चा खूब संभाला था,
उनकी शहादत को देश ने
सीने में बड़े संभाला था।

परतंत्रता के घाव पर
बापू ने मरहम लगाई थी,
लाल बाल पाल की तिकड़ी ने
आजादी की झलक दिखाई थी।
खूनी खेल, खेल रहे फिरंगी को
सबक सबने सिखाई थी,
सभी के प्रयासों से अंत में
आजादी हमने पाई थी।

सोने की चिड़ियां को आज
आजादी के मर्म का भान है,
फिर हम क्यूं भूल गए उन वीरों को
जिसका सभी को ज्ञान है।
एक बार पुनः उन यादों को
ताजा करने आया हूं,
आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं।

जिस आजादी के लिए
कुर्बानी दी जहान रे,
यूं ही हम भूल रहे
खो रहा हमारा मान रे।
जागो उठो अब चुप न रहो
जुल्मों का तुम प्रतिकार करो,
खुद करो औरों को बोलो
आजादी का गुणगान करो।

भूल रहे उन मर्मों की
याद कराने आया हूं,
वीरों की उन शहादतों की
याद दिलाने आया हूं।
गुलामी की दसताओं का
दर्द सुनाने आया हूं,
आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं।

बीती यादों को ताजा कर
सबक सिखाने आया हूं,
हुंकार भरने आया हूं,
संकल्पित करने आया हूं।
देश भक्ति का भाव जगा
सपना साकार करने आया हूं।

अमन चैन संग मिट्टी की
सौंधी खुशबू बिखेरने आया हूं,
वंदे मातरम् के गान का
अर्थ बताने आया हूं।
आजादी का राग सुना
जज्बात जगाने आया हूं,
वीरों की कहानी याद दिला,
आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि युवाओं को आजादी के महत्व और वीर शहीदों की कुर्बानियों को याद दिलाने आये है। वह उन दिनों का वर्णन करते है जब भारत अंग्रेजों की गुलामी में जकड़ा हुआ था, और लोग त्राहि-त्राहि कर रहे थे। अंग्रेजों के अत्याचारों ने देशवासियों को विद्रोह करने पर मजबूर कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप मंगल पांडे और अन्य वीरों ने आजादी की लड़ाई की शुरुआत की। धीरे-धीरे यह विद्रोह पूरे देश में फैल गया, और वीरों ने मोर्चा संभाल लिया। कवि महात्मा गांधी, लाल-बाल-पाल की तिकड़ी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद दिलाते हुए बताते है कि कैसे उनके प्रयासों से अंततः भारत ने आजादी पाई। वह इस बात पर भी जोर देते है कि आज के युवाओं को उन वीरों और उनकी कुर्बानियों को नहीं भूलना चाहिए, बल्कि उनके बलिदानों का सम्मान करना चाहिए।कवि युवाओं को जागरूक करने और उन्हें देशभक्ति के लिए प्रेरित करने आये है। वह उन्हें याद दिलाते है कि हमें अपनी आजादी का सम्मान करना चाहिए और उसके महत्व को समझना चाहिए। अंत में, वह देशभक्ति की भावना जागृत करने और आजादी के महत्व को समझाने का आह्वान करते है।

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यह कविता (आजादी का मर्म।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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Filed Under: 2024-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: 15 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस’ पर पढ़ें ये कविताएं, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर सरल व छोटी कविताएं, Best Poem on Independence Day in Hindi, Hindi Poems, Independence Day Poem, marm of freedom hindi poems, poem on independence day in hindi, poem on independence day in hindi for kids, poet vivek kumar poems, short poem on independence day in hindi, The first morning of freedom poems in hindi, vivek kumar, vivek kumar poems, आजादी का मर्म, आजादी का मर्म - विवेक कुमार, विवेक कुमार

आज़ादी की पहली सुबह।

Kmsraj51 की कलम से…..

The First Morning of Freedom | आज़ादी की पहली सुबह।

We are free but let us be free from mental slavery too, let us leave aside the discrimination of caste and religion and become human beings.

बहुत याद आती है वो आज़ादी की पहली सुबह,
15अगस्त 1947 को था जब भारत में तिरंगा फहराया l
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सब बने थे भाई भाई,
अपनापन था झलक रहा सब में कोई नहीं था पराया॥

अपनों से बिछड़ जाने के थे दर्द बड़े-बड़े,
ना चाह कर भी देश के दो टुकड़े थे करने पड़े।
दो कौमों को आपस में लड़ा कर फिरंगी थे खुश बड़े,
ऐसी लूट मची थी उस वक्त कुछ थे हिंदुस्तान तो कुछ थे पाकिस्तान में पड़े॥

15 अगस्त 1947 से पहले की सुबह थी बहुत काली,
डर से थे कुछ कांप रहे तो कुछ मांग रहे थे पानी।
किसी ने बहुत चालाकी और चतुराई से,
थी दो कौमों को जुदा करने की साजिश रच डाली॥

दो टुकड़े करके हिंदुस्तान के,
लोगों के बीच थी लड़ाई करवा डाली।
किसी के उजड़ गए आशियाने तो किसी ने दी अपनी कुर्बानी,
फिर वो आजादी की पहली सुबह बनी थी सुहानी॥

कहे “जय” अपनी सोच को ऐसा बनाएं,
खुशहाल हो भारत अपना ऐसा अपना देश बनाएं।
आजाद तो हैं हम पर मानसिक गुलामी से भी आजाद हो जाए,
जात पात धर्म का भेदभाव छोड़कर आओ इंसान हो जाएं॥

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि 15 अगस्त 1947 को मिली आज़ादी की पहली सुबह को याद कर रहे है। इस दिन भारत में तिरंगा फहराया गया था, और सभी धर्मों के लोग आपस में भाईचारे के साथ रह रहे थे। हालांकि, देश के विभाजन ने लोगों को गहरे दर्द में डाल दिया था। अंग्रेजों की चालाकी से हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच विभाजन हुआ, जिससे लोग आपस में लड़ने लगे। इस विभाजन से कई परिवार उजड़ गए, और कई लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी दी। फिर भी, आज़ादी की वह सुबह लोगों के लिए बहुत खास और सुखद थी। अंत में, कवि यह संदेश देते है कि हमें मानसिक गुलामी से भी मुक्त होना चाहिए और जात-पात, धर्म का भेदभाव छोड़कर इंसानियत को अपनाना चाहिए, ताकि हमारा देश खुशहाल बन सके।

—————

यह कविता (आज़ादी की पहली सुबह।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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विजय दिवस।

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Vijay Diwas | विजय दिवस।

He did not care if his life would be lost, his only dream was to win the nation. His aim was to save the honour of Mother India, then why would anyone get tired?

भरी दोपहरी चढ़ पहाड़ी पर,
दुश्मनों को वहां से खदेड़ा था।
पाकिस्तान के नथुने फूला कर,
रणबांकुरों ने किया बखेड़ा था॥

सरहदों की सुरक्षा खातिर उन्होंने,
अपने सीने में खाई जब गोली थी।
लगा था कारगिल की पहाड़ियों पर,
तब खेली किसी ने खून की होली थी॥

वे और नहीं थे, वीर सैनिक थे हमारे,
जिनके कारण हम घरों में सुरक्षित थे।
जीएं या मरे पर तिरंगा न झुकने पाए,
उनके बुलन्द इरादे कितने लक्षित थे?

जान जाएगी यह परवाह न थी उनको,
बस राष्ट्र विजय ही उनका सपना था।
भारत मां की लाज बचाना था धेय तो,
फिर कहां किसी को भला थकना था?

विजय दिवस की इस अनूठी गाथा को,
हम नई पीढ़ी को जब – जब सुनाएंगे।
रोम हर्षक नव क्रान्ति का संचार कर ,
तब उनमें राष्ट्र भक्ति का भाव जगाएंगे॥

हटा कर विदेशी फोज को पहाड़ी से,
घाटी में था जब वह विजयघोष हुआ।
भारत मां के उन लालों ने था मानो तब,
अपने बलिदानों से उन्नत अम्बर छुआ॥

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों के बलिदान और वीरता को समर्पित है। कवि ने वर्णन किया है कि कैसे हमारे सैनिकों ने दुश्मनों को पहाड़ियों से खदेड़कर उन्हें पराजित किया और देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हर प्रकार का बलिदान दिया और दुश्मन को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कारगिल की पहाड़ियों पर खून की होली खेली गई थी, जिसमें हमारे वीर सैनिकों ने अपने अदम्य साहस और बुलंद इरादों का परिचय दिया।कविता में इस अद्वितीय विजय गाथा को नई पीढ़ी को सुनाने और उनमें राष्ट्रभक्ति का भाव जगाने की बात कही गई है। कवि ने विजय दिवस की इस गाथा को हर बार सुनाने की प्रतिज्ञा की है ताकि भविष्य की पीढ़ियां भी अपने वीर सैनिकों के बलिदान को याद रखें और उनसे प्रेरणा प्राप्त करें।

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यह कविता (विजय दिवस।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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योग करें निरोग रहें।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Karen Nirog Rahen | योग करें निरोग रहें।

Life Yoga for some time, keep everyone completely healthy, some important yoga postures, Surya Namaskar or Tadasana, Dhruvasana or Chakrasana, Sarvangasana or Halasana, Dhanurasana.

जीवन हमारा है अनमोल,
इसका नहीं है कोई तोल।
शिक्षित सुयोग्य होकर भी,
लापरवाही क्यूं करते सभी।

व्यस्त चर्या में सब है मगन,
रोग का सब दे रहे समन।

यदि काया निरोग रखना है,
तो डेली वेज योग करना है।
अपने लिए वक्त निकालिए,
जीवन स्वास्थ्यकर बनाइए।

कुछ समय का जीवन योग,
रखें सबको बिल्कुल निरोग।
योग के कुछ प्रमुख आसन,
सूर्य नमस्कार या ताड़ासन।

ध्रुवासन हो या हो चक्रासन,
सर्वांगासन हो या हलासन।

धनुरासन हो या भुजंगासन,
पद्मासन के संग वज्रासन।
हर आसन का अपना मोल,
धरा का बच्चा बच्चा बोल,
योग हमसब को करना है।

इसके छात्रछाया में रहना है,
अनुलोम विलोम प्राणायाम,
सबके लिए संजीवनी आम।

खुद जुड़े औरों को जोड़े,
योग से कभी मुंह न मोड़ें।
सब मिलकर आज ये कहे,
डेली योग करें निरोग रहें।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने जीवन को अनमोल बताते हुए इसकी कीमत को समझाया है। शिक्षित और सुयोग्य होने के बावजूद लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहते हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद, स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कवि ने सुझाव दिया है कि यदि हम अपनी काया को निरोग रखना चाहते हैं, तो हमें रोजाना योग का अभ्यास करना चाहिए। योग के लिए समय निकालना और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि जीवन स्वस्थ और निरोगी बना रहे। कवि ने कुछ प्रमुख योग आसनों का उल्लेख किया है जैसे सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, ध्रुवासन, चक्रासन, सर्वांगासन, हलासन, धनुरासन, भुजंगासन, पद्मासन और वज्रासन। हर आसन का अपना महत्व है और वे शरीर को निरोगी बनाए रखने में सहायक होते हैं। इसके अलावा, अनुलोम विलोम प्राणायाम को भी सभी के लिए संजीवनी के रूप में वर्णित किया गया है। कवि ने यह संदेश दिया है कि हमें न केवल खुद योग से जुड़ना चाहिए, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। अंत में, कवि सबको मिलकर यह संकल्प लेने के लिए प्रेरित करता है कि “हम नियमित रूप से योग करें और निरोग रहें।”

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यह कविता (योग करें निरोग रहें।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मेरे राम आए हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mere Ram Aae Hain | मेरे राम आए हैं।

He is the seventh and one of the most popular avatars of Vishnu. In Rama-centric traditions of Hinduism, he is considered the Supreme Being. Rama.

कण –कण में देखो,
भगवान श्री राम समाए हैं।
सबके मन देखो,
दर्शन के लिए ललचाए हैं।
बहुत वर्षों बाद देखो ,
आई है आज शुभ घड़ी,
देखो देखो अयोध्या में ,
आज फिर मेरे राम आए हैं।

गली गली सजी है,
आज फूलों से,
महक उठा है,
चमन – चमन,
दूर-दूर से दर्शन करने,
श्री राम लला के,
देखो आज ,
हम भी अयोध्या आए हैं।

जन-जन के मन में ,
राम बसते आए हैं।
सबके बिगड़े कामों को,
श्री राम बनाते आए हैं।
धन्य हो गया आज हर,
एक जनमानस,
देखो-देखो अयोध्या में,
आज फिर मेरे राम आए हैं।

दुल्हन जैसे सज गई है,
आज अयोध्या नगरी।
खुशियों से भरी हुई जैसे,
छलक गई है गगरी।
रोम रोम पुलकित ,
हो उठा है आज,
देखो – देखो अयोध्या में,
आज फिर मेरे राम आए हैं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि भगवान श्री राम के आगमन का जो दृश्य चित्रित कर रहे हैं, उसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से भरा हुआ है। वे कह रहे हैं कि भगवान श्री राम सभी के हृदय में हैं और उनके दर्शन के लिए सभी लोग बेहद उत्कृष्ट भावनाओं से प्रेरित हैं। कवि आगे बढ़ते हैं और बताते हैं कि बहुत वर्षों के बाद फिर से एक शुभ घड़ी आई है, और आज अयोध्या में भगवान राम फिर से अपने भक्तों के बीच आए हैं। उनके आगमन से पूरा नगर सज गया है, हर गली-मोहल्ले में फूलों से भरा हुआ है। लोग दूर-दूर से आकर श्री राम लला के दर्शन करने के लिए उत्कृष्ट भावनाओं में लिपटे हैं और खुशी से भरे हुए हैं। कवि ने इस कविता के माध्यम से भक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि, और समर्पण की भावनाएं सुंदरता से चित्रित की हैं, और व्यक्ति को अपने आत्मा की शुद्धि और धार्मिक अनुष्ठान की दिशा में प्रेरित करती हैं।

—————

यह कविता (मेरे राम आए हैं।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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आओ राम अब।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aao Ram Ab | आओ राम अब।

He is the seventh and one of the most popular avatars of Vishnu. In Rama-centric traditions of Hinduism, he is considered the Supreme Being. LORD Rama.

आओ राम अब लौट चले, फिर से अयोध्या धाम।
बहुतेरा हुआ अब छानी में, धारण करो निज स्थान॥

भविष्य भारत का तुम हो प्रभु , तुम ही हो वर्तमान।
अटकल यदा कदा आती रहेगी, संभालो अपना काम॥

भार धारा का हरो प्रभु तुम, बढ़ाओ भारत का मान।
अन्याय अनीति और अधर्म का, रहे न नामो निशान॥

भूली रीतियां और स्मृतियां, फिर से हो जाए उदयमान।
विश्व धारा पर परचम लहराए, कि हां लौट आए भगवा॥

धर्म ध्वजा धरती पर लहराए, धवल में हो प्रभु गुणगान।
स्वर्ग – पाताल में भेरी बजे, दसों दिशाओं में हो सम्मान॥

साकार हो वाल्मीकि – तुलसी का, राम राज्य भगवान।
संभालो सत्ता अब स्वयं प्रभु तुम, मिटा दो सब त्राहिमाम॥

आसुरी वृतियों के बाणासुर का, शत्रुघन से कराओ निदान।
अब बेवड़े के कहने पर मत लगना, रखना सीता का ध्यान॥

कहने वाले तो कहते हैं कई कुछ, तुम तो हो करुणा निधान।
मां के तप पर है हमे भरोसा, बेवड़ी बातों से न होना परेशान॥

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि इस कविता में भगवान राम के प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हैं और उनसे अब फिर से अयोध्या के धाम की ओर लौटने की प्रार्थना करते हैं। उन्हें पुनः से अपने आक्रमणकारियों और अन्य अधर्मी प्रवृत्तियों का सामना करना होगा और वे इस युग में भगवान के रूप में आगे बढ़कर भारत का मान बढ़ाने का कार्य सम्पन्न करें। कवि ने भविष्य में होने वाली चुनौतियों की चेतावनी भी दी है और भगवान राम को सम्भालने, धरती पर धरती का मान बढ़ाने, अन्याय और अनीति का खत्म करने के लिए प्रेरित किया है। कवि कहते हैं कि भूली रीतियों और स्मृतियों को फिर से जीवंत करना है और भगवा ध्वज को फिर से ऊँचा करना है। इसके साथ ही, भारत को उच्चतम मानवीय मूल्यों की प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनर्निर्मित करना है। कवि ने भगवान राम की कृपा और शक्ति की प्रार्थना की है ताकि वे स्वयं ही अपने भक्तों की सभी कठिनाइयों को दूर कर सकें और भारत को सुख, शांति और समृद्धि में ले जाएं।

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यह कविता (आओ राम अब।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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आए है श्री राम।

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Aaye hai Shree Ram | आए है श्री राम।

आए है श्री राम।

He is the seventh and one of the most popular avatars of Vishnu. In Rama-centric traditions of Hinduism, he is considered the Supreme Being. Rama.

हे राम! आखिरकार,
तुम आ ही गए,
कितने युगों के बाद।

सफर त्रेतायुग से ,
कलयुग तक तुमने किया,
फिर भी हमने आस नही छोड़ी।

तुमने भी आने की,
अतृप्त नैनों की,
प्यास हमारी बुझाई।

हर युग में,
हर वर्ष की दिवाली पर,
बाट को संजोए रखा।

मन के हर दुख को,
श्री राम बन कर आओगे,
अपने आदर्शों से मिटाओगे।

आखिर हमे हमारे इंतजार का,
सुंदर फल सब्र का मिला,
जो कलयुग में फिर से,
अयोध्या तुम पधारे।

स्वागत में तेरे पलके बिछाए,
अयोध्या संग भारत भी,
दिवाली सा जगमगाए,
दीप रोशन हो गए।

हमारे श्री राम आए,
संग आदर्श भी लाए ,
ढोल, नगाड़े बजाओ।
श्री राम आए…
श्री राम आए…
श्री राम आए…।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवयित्री कहती हैं कि भगवान राम मन के हर दुःख को हर समय अपने साथी बनकर आते हैं और भक्तों को आदर्शों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। अंत में, वे कहते हैं कि इंतजार का फल सब्र का होता है और कलयुग में फिर से भगवान राम अयोध्या में प्रकट होते हैं। उनके आगमन पर भक्तों ने आनंद में दीपों को जलाया, अयोध्या सजीवन हो गई और श्री राम के साथ भारत भी आनंदित हुआ। इसके साथ हे राम का स्वागत हुआ और सभी ने धूमधाम से उनका स्वागत किया।

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यह कविता (आए है श्री राम।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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कन्या पूजन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kanya Poojan | कन्या पूजन।

Kanyā Pūjā or Kumārī Pūjā, is a Hindu holy ritual, carried out especially on the Ashtami (eighth day) and Navami (ninth day) of the Navaratri festival.

अधर्मी से भरा हुआ संसार,
दिखावा क्यूँ करता जालिम इंसान?
चाहे हो दुर्गा पूजा या हो कन्या पूजन,
नहीं मिले किसी अधर्मी को यह अधिकार।

होती है बलात्कार, अपहरण, हत्या,
बता दे कोई, क्या है बच्चियों का कसूर?
खिलती कलियों को मसल देना,
हैवानों, ये तेरा कैसा दस्तूर?

ग़र बेटा कुल दीपक,
तो बेटी बाप का गुरूर है।
आज न तो कल नाम रौशन कर,
इतिहास रचती जरूर है।
जो मन के रावण को मार सके,
राम वही बन पाएगा।

सीता को रावण के चंगुल से दूजा कौन बचाएगा?
नर में रावण बसता, शूर्पणखा नारी में,
आओ मन के रावण को, खुद ही मार भगाएं।
शूर्पणखा न बने कोई,
ऐसी अमृत वाणी बोलें और सिखाएं।

आ न, बान, शान की खातिर,
बच्चियों को मौत के घाट उतारते हैं।
इज्जत, ऊंच- नीच, धर्म के नाम पर,
ऑनर किलिंग करते हैं।
समाज भूखा है अधिकार का,
क्यूँ करते हैं लोग दिखावे का?
कन्या पूजन तो ढोंग और बहाना है।

रावण दहन तो हो गया,
दुर्योधन जांघों को ठोक रहा।
जब बेटियों को दहेज के खातिर जलाना है,
क्यूं करते कन्या पूजन, जिसे कल जलाना है?
दहेज के लोभी से पूछो,
यह हकीकत या अफ़साना है?

कन्या पूजन गर करते हो?
नारी का करो दिल से सम्मान।
वचन दो कन्याओं को,
कभी न होगा उनका अपमान।
राम, कृष्ण बनकर, पापियों से,
इस धरती को मुक्त कराना है।
सभी बेटियाँ रहे सुरक्षित,
सोचो, कन्याओं को कैसे बचाना है?

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कन्या पूजन एक हिन्दू धार्मिक परंपरागत आचार है जो भारतीय समाज में प्रचलित है। इसे नवरात्रि के दौरान, विशेषकर नवमी तिथि को, कन्या-कुमारिकाओं की पूजा के रूप में किया जाता है। इस पर्व में कन्या-कुमारिकाओं की पूजा करने का उद्देश्य देवी दुर्गा की शक्ति को महसूस करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना होता है। कविता में बेटियों के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने का आग्रह किया गया है और यह बताया गया है कि शक्तिशाली स्त्री समाज में सुरक्षित रह सकती है और बदलाव की ओर कदम बढ़ा सकती है। इसके अलावा, इसके माध्यम से समाज को अधर्म और अनैतिकता के खिलाफ उत्तरदाता बनाने की अपील की गई है।

—————

यह कविता (कन्या पूजन।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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