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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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सुखमंगल सिंह जी की रचनाएँ

प्रातः उठ हरि हर को भज।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ प्रातः उठ हरि हर को भज। ♦

प्रातः उठ हरि हर को भज लो,
धरती का अभिनंदन कर लो।
उल्लसत मनसे बंदन कर लो,
मुक्त कंठ में चंदन धर लो॥

निर्मल पानी गुनगुन पी लो,
चाय की चुस्की रुक कर ले लो।
लिखनी ले साहित्य लिख लो,
प्रातः उठ हरि हर भज लो॥

नित्य – क्रिया में निवृत्ति हो,
गंगा जल ले काया धो लो।
धूप – दीप ले प्रभु से बोलो,
प्रातः उठकर आंखें खोलो॥

पेपर आया उसको पढ़ लो,
देश दुनिया की खबर ले लो।
दूरदर्शन से – मेल कर लो,
प्रातः उठ हरि विनती कर लो॥

भूखा – नंगा जो भी भेजा,
झोली सबकी भर के दे दो।
कोई खाली हाथ न जाये,
प्रातः उठकर प्रभु से बोलो॥

कभी न गलती हरि करने दो,
स्वच्छ हृदय मन भरने को।
अपना हमको प्रभु बना लो,
प्रातः उठ हरिहर को जप लो॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में बताया है, सुबह उठकर आपका नित्य क्रिया कर्म, का क्या क्रम होना चाहिए। जिससे आपका हर एक कार्य शांति पूर्वक, सही समय पर पूर्ण हो जाये।

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यह कविता (प्रातः उठ हरि हर को भज।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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भारत में भूतहा जगह कहां और कौन?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भारत में भूतहा जगह कहां और कौन? ♦

भारत में भूत-ही जगह देखने जब जाइए,
नियम और कानून का पालन करते हुए जाइए।
आप जब स्थानीय आदेश पर चलोगे अगर,
तो पर्यटन का आनंद मिलता रहेगा मंगल॥

पुणे का शनिवार बाड़ा किला है पुराना महान,
बाजीराव पेशवा से जुड़ा हुआ है यह स्थान।
हॉन्टेड माना जाने वाला इस किले के अंदर,
मना किया जाता है सूरज डूबने के बाद जाना॥

राजस्थान के अलवर में स्थित भानगढ़ का किला,
बहुत ही सुंदर सुहाना लेकिन किला है डरावना।
कहते 17 वीं सदी में इसका निर्माण हुआ था,
भूतिया गतविधियों से विद्यमान यह किला है।
सूरज डूबने के बाद शाम से यहां इंट्री बंद रहती,
यहां चाहे कोई राजनीतिक जाए या आए विद्वान॥

मुंबई के कोलाबा में स्थित है मुकेश मिल्स,
देश की 10 हॉन्टेड जगहों में यह शामिल हिल।
फिल्मों की शूटिंग के लिए मशहूर है मिल,
भूतों की कहानियां से भरपूर है सबका दिल॥

राजस्थान से 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित गांव,
कुलधरा गांव में कभी 600 परिवार रहते थे।
सुना था रसोई के बाद यहां भी कोई नहीं रहता,
रातों रात गांव छोड़ कर लोग कहीं चले गये॥

हैदराबाद का गोलकुंडा फोर्ट का 13 वीं सदी में निर्माण हुआ,
इस फोर्ट में रानी तारामती की आत्मा रात में चलती है।
जिसको पति के साथ यहां दफनाया गया था,
डांस करती और डांस करने की आवाज आती॥

बृज राजभवन पैलेस कोटा राजस्थान में स्थित,
लगभग 180 वर्ष पुराना बताया जाता रहा है।
पैलेस को 18 सौ अस्सी में हेरिटेज होटल बना दिया गया,
हेरिटेज होटल में एक ब्रिटिश मेजर बर्टन का भूत रहता है।
ब्रिटिश मेजर बर्टन को सन 1857 में ही मारा गया था,
मेजर को भारतीय सिपाहियों ने हीं मारा था॥

दार्जिलिंग का डाव हिल, कुर्सियांग इलाका,
प्राकृतिक खूबसूरती में बहुत ही मशहूर है।
स्थानीय लकड़ हारो का कहना है कि यहां,
बिना सिर वाला एक लड़का टहलता रहता है।
यह इलाका भुतहा अनुभव से भरा हुआ है,
जंगल में लकड़ी काटने वालों ने सिर विहीन लड़का देखा॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में भारत के सभी मुख्य भूतहा जगह के बारे में बताने की कोशिश की है जो काबिले तारीफ है। भारत में भूत-ही जगह देखने जब जाइए, नियम और कानून का पालन करते हुए जाइए। आप जब स्थानीय आदेश पर चलोगे अगर, तो पर्यटन का आनंद मिलता रहेगा मंगल॥

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यह कविता (भारत में भूतहा जगह कहां और कौन?) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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गुरु की महत्ता और गुरु पूर्णिमा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गुरु की महत्ता और गुरु पूर्णिमा। ♦

भारतीय समाज में मनाए जाने वाले पूज्यनीय पुण्य देने वाले भारत के सभी त्योहार होते हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में यह त्यौहार अलग-अलग रूप में भी मनाए जाते हैं।

जो किसी न किसी रूप में हमारे ईश्वर से साक्षात्कार कराने वाले होते हैं। जो हमारे आसपास की दुनिया में फैल ज्ञान की शक्ति को संतुलित रखने में मददगार होते हैं। विविध सभ्यताओं का ज्ञान कराते हैं। मानव जीवन को शुभम रूप से चलाने के लिए उमंग और उत्साह भरते हैं। सत्य की खोज, शोध – खोज का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्हें आने वाले त्यौहारों में से एक आषाढ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन जनमानस अलग-अलग समूहों में अपने – अपने लौकिक जगत में व्याप्त गुरुओं के शरण में जाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरांत वह अपने को धन्य मानते हैं। सच में अलौकिक जगत की उत्पत्ति करता संरक्षक रक्षक भगवान भोलेनाथ, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी हैं जो हमारे सच्चे सर्वसंपन्न परिपूर्ण गुरु हैं।

सब के मालिक हैं और जगत के, जगत को चलाने वाले हैं। फिर भी मानव लौकिक जगत में मनुष्य तात्कालिक लाभ की कामना से गुरु की खोज में लगा रहता है।

जिस ईश्वर ने ही जगत में भेजा है, जो हमारे आप जैसे हैं उन्होंने तब और तपस्या के बल पर अपने को सिद्ध करने का प्रयत्न किया है। उन्हें परम उत्तम मानकर गुरु मान लेता है। मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार सुख – दु :ख प्राप्त करता है।

गुरु माता है और गुरु पिता है।
गुरु आचार्य महान ज्ञान वान है।
अध्यापक ब हु तेरी जगत में,
सद्गुरु शकल जहां विद्वान है।

•» ब्रह्मा गुरु है! जो जगत वासियों का व्यक्तित्व निर्माण करने वाले हैं। संसार की स्थित उत्पत्ति और प्रलय के हेतु हैं।

•» विष्णु जी गुरु हैं! वह शिष्य की रक्षा करते हैं उसके अंदर की नकारात्मकता को दूर करते हैं और उसके अवगुणों को दूर करके भगाते हैं। भगवान विष्णु किसी कारण बस भूले भटके शिष्य को भी सत मार्ग पर लाकर सहज रूप से स्वीकार कर लेते हैं। भगवान विष्णु के प्रति प्रेम रखने वाला मनुष्य बैकुंठधाम को जाता है। वह जन्म – मृत्यु के भय से दूर रहता है क्योंकि भगवान जन्म मृत्यु के भय का नाश करने वाले हैं! भगवान विष्णु के भक्त का भक्ति प्रवाह बढ़ने लगता है।

•» शंकर जी यानी महादेव गुरु! महादेव जी चराचर के जगतगुरु है। वैर रहित, शांति मूर्ति, आत्माराम और जगत के परम आराध्य देव हैं। घमंडी धर्म की मर्यादा को तोड़ने वाले का विनाश करने वाले हैं। श्री शंकर जी की घटक जटाओं में गंगा जी सुशोभित होती हैं –

गंगा – यमुना के संगम में,
करता जो अज्ञात स्नान!
प्रसन्नता से परिपूर्ण होकर
पहुंचता अपनी-अपनी धाम।

गुरु पूर्णिमा के दिन से वर्षा ऋतु का काल प्रारंभ माना जाता है वर्षा काल में साधु संत 4 माह तक भ्रमण करके जगत उत्थान के लिए संस्कृति रक्षा और सभ्यता के लिए, धर्म, ज्ञान का प्रचार – प्रसार करते हैं। ज्ञानार्जन के लिए यह चातुर्मास उपयुक्त माना जाता है।

गर्मी और उमस से भरी जिंदगी को शीतलता प्रदान होती है। चारों तरफ हरियाली का वातावरण रहता है मानव मन जो, मानव मन को आह्लादित कर लेता है।

आषाढ़ की पूर्णिमा के ही दिन कृष्ण द्वैपायन व्यास जी का जन्म हुआ था। जिन्होंने महाभारत की रचना की थी। कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास जी महाभारत के साथ – साथ वेद – पुराण वेदांत – दर्शन ( ब्रह्म सूत्र) शारीरिक सूत्र, योग शास्त्र सहित अनेक उत्कृष्ट कृतियों की रचना की है।

आज ही के दिन भगवान बुद्ध ने काशी में आकर काशी के प्रमुख संस्थान सारनाथ में यहां सारंग नाथ जी, जो भगवान शंकर के साले कहे जाते हैं उनका मंदिर है उसी के पास में अपने पांच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया था।

शंकर जी ने आज ही के दिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा को सप्त ऋषियों को योग और तत्वज्ञान की दीक्षा दी थी। सप्त ऋषियों ने भारत सहित दुनिया में फैल कर विश्व कल्याण के लिए योग दर्शन का बयान संसार को दिया।

गुरु का अर्थ होता है कि वह अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाए, आत्म ज्योति जगाने का काम करें, भक्तों के अंदर आत्मज्योति का बोध कराए।

गुरु की महत्ता को सभी ने स्वीकारा है सभी शास्त्र गुरु तत्व की प्रशंसा करते हैं। गुरु प्रशंसा के योग्य होता है।

स्वामी विवेकानंद जी महाराज के गुरु रामकृष्ण परमहंस जी थे। जिन्होंने एक साधारण बालक को दुनिया का सबसे महान दार्शनिक ज्ञाता और बुद्धिमान बना दिया।

अयोध्या नरेश चक्रवर्ती महाराजा दशरथ के गुरु वशिष्ठ जी के जिनकी सलाह के बिना अयोध्या के दरबार का कोई भी कार्य नहीं होता था। कोई भी कार्य करने के पहले अयोध्या में गुरु वशिष्ठ से आज्ञा लेकर ही किया जाता था।

गुरु का योग्य होना बहुत आवश्यक है। गुरु अपने शिष्य को उपदेश आत्मक वाणी से लक्ष्य की लालसा को निर्मल करने का मार्गदर्शक होता है। गुरु का कर्तव्य है कि वह अपने शिष्य में सद्विद्या का संचार, संचारित करने का तन – मन से प्रयत्न करें।

महाराज मनु ने भी गुरु को महान कहा है उन्होंने गुरु की सेवा करने से ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है बताया। आचार्य को देवता मानने को उन्होंने कहा।

भक्ति काल में भक्त और संत एक स्वर से मुक्त कंठ से गुरु की महिमा और प्रशंसा के गीत गान करते रहते थे।

हिंदी साहित्य गौरव प्रदान करने वाले श्रृंगार रस के कवि सूरदास जी को उनके गुरु वल्लभाचार्य जी के द्वारा यह कहा जाना कि तुम जगत में, घिघियाते ही रहोगे? कवि सूरदास जी गुरु के आशीर्वाद को लेकर श्रृंगार रस के महान कवि हुए आज तक श्रृंगार रस का ऐसा कोई कवि शायद ही धरती पर आया हो।

गुरु की आवश्यकता अलौकिक जगत में हमेशा होती रहती है। अलग-अलग चीजों के ज्ञान के लिए अलग-अलग गुरु की आवश्यकता होती है, जो जीवन में उस वस्तु से संबंधित ज्ञान दे सके सारा जीवन सीखने के लिए ही होता है।

समस्त 12 बारीकियों के, उसको सीखने के लिए मनुष्य को अच्छे गुरु की आवश्यकता होती है। अच्छा गुरु वह होता है जो उस विषय में पारंगत होता है। गुरु शिष्य के बीच बहुत गहरा संबंध होता है। गुरु को कभी भी कच्चा नहीं होना चाहिए और यह गुरु कच्चा है तो उसे शिष्य को गुरु नहीं बनाना चाहिए, इसीलिए शास्त्र सद्गुरु बनाने का उपदेश देता है।

मनुष्य को हमेशा सच्चे गुरु की तलाश करते रहना चाहिए। आंख मूंद कर किसी को अपना गुरु नहीं बनाना चाहिए। मानव जीवन में पग – पग पर गुरु की आवश्यकता होती है। जिससे हम थोड़ा सा भी ज्ञान प्राप्त करते हैं, वह भी गुरु ही होता है। स्कूल कॉलेज में हमें पढ़ाने वाला अध्यापक ही गुरु होता है।

किसी वस्तु की विशेष जानकारी देने वाला व्यक्ति भी गुरु होता है। भारतीय हाउस गुरु की हो रही है जो जीवन के चौथे पल में आवश्यकता होती है। आध्यात्मिक ज्ञान और ईश्वर को प्राप्त कराने वाले गुरु की आवश्यकता पर यहां बल दिया जा रहा है। कहा गया है-

गुरु करिए जांच,
पानी पीजिए छान।

विशुद्ध परंपरा का पालन करते हुए सभ्यता – संस्कृति और समाज का ध्यान रखते हुए गुरु दीक्षा ग्रहण करनी चाहिए।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से लेख के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस लेख में बहुत सारे उदाहरण के माध्यम से लेखक ने विस्तार से बताया है की, समय – समय पर हर युग में गुरु के महत्व और भूमिका को उच्च स्थान प्राप्त है। जीवन में गुरु की आवश्यकता को सभी ने स्वीकार किया है। “गुरु का अर्थ होता है कि वह अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाए, आत्म ज्योति जगाने का काम करें, भक्तों के अंदर आत्मज्योति का बोध कराए।”

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यह लेख (गुरु की महत्ता और गुरु पूर्णिमा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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मनुस्मृति में कानून।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मनुस्मृति में कानून।  ♦

भारतवर्ष में राजा न्याय का मूल होता था।
राजा के साथ एक विद्वान और न्याय करता बैठता था।
सभा में राजा विद्वान ब्राह्मण और अनुभवी मंत्री को साथ रखता था।
राजा के साथ तीन ब्राह्मण और एक विद्वान न्याय करता बैठता था।

न्यायिक सभा में दीवानी और फौजदारी का केस चलता था।
सभा में सत्य बोलने के लिए सभी को आज्ञा दी जाती थी।

सत्य बोलने वाले को न्यायालय में जाना नहीं चाहिए।
अगर न्यायालय वह जाता है तो सत्य ही बोलना चाहिए।
झूठ बोलने वाला मनुष्य को पापी कहा जाता था।
न्यायालय में बादी और प्रतिवादी के सामने गवाही लिया जाता था।

दोनों पक्ष के गवाहों को न्याय करता एकत्रित करवाता था।
इस प्रकार वह न्यायालय में समझा-बुझाकर परीक्षा लेता था।

न्याय करता गवाहों से पूछता जो वृतांत तुम लोगों ने बातें किया,
उन बातों को तुम लोग सत्य सत्य कहो क्योंकि इस अभियोग में तुम साक्षी हो।
अपनी गवाही में जो सत्य बोलता है वह मृत्यु के बाद उत्तम स्वर्ग प्राप्त करता है।
इस लोक में अद्वितीय यस पाता और स्वयं ब्रह्मा उसका साक्षात्कार करता है।

जो मनुष्य झूठी गवाही देता है वह वरुण के बंधन में बनता है।
वह मनुष्य 100 जन्मों तक दुख पाता है।

इसलिए मनुष्य को सत्य साक्षी गवाही देनी चाहिए।
सत्यता से गवाही देने वाला पवित्र होता है।
सत्यता से उसका यश वृद्धि होती है।
सभा में उपस्थित गवाही देनी पढ़ती है।

साक्षी देने वाले को सत्य बोलना चाहिए।
जीव का साक्षी स्वयं जीव है, जीव के शरण में स्वयं जीव है।
जीव मनुष्य का परम साक्षी है, उसका निरादर नहीं करना चाहिए।

जबकि पापी अपने मन में विचार करता है कि हमें कोई नहीं देखता।
लेकिन देवता उसको और उसके ह्रदय के भाव को स्पष्ट देखते हैं।
देहधारी मनुष्यों के कर्मों को यह लोग स्वयं देखते हैं-
आकाश पृथ्वी जल हृदय चंद्रमा सूर्य अधिनियम बायो-
रात्रि और दोनों को धूल और न्याय।

न्याय किया जाए इसके लिए सभा में आगे और समझाया जाता था।
जो पापी मनुष्य न्याय करता के इस प्रश्न का भी झूठ उत्तर देता है,
वह सीधे नर्क के पूर्व अंधकार में ठोकर खाता है।

पहले गवाहों को सभा मध्य समझाया जाता था।
फिर भी गवाह झूठी गवाही देता तो उसे देश निकाला जाता था।
राजा वेद पढ़ने वाले विद्यार्थी व शिल्पकार और भांड साक्षी देने से बरी रहते थे।
राज नियम कठोर और स्पष्ट हुआ करते थे।

उपद्रव चोरी बेबी चार्ट बदनामी करने,
मारपीट और अव्यवस्था में फौजदारी के,
अभियोग में साक्षी की योग्यता के नियम कठोर होते थे।

सभा में नियम का पालन करने के लिए आदेश दिए जाते थे।
मनुस्मृति में कितनी है, कानूनों को 18 भागों में बांटा गया है।
सभी कानूनों का पालन कठोरता से कराया जाता था।

मारपीट, बदनामी करना, चोरी – डाका और उपद्रो अथवा हो व्यभिचार।
जुआ खेलना और बाजी लगाना, फौजदारी कानून में इसे लिया जाता।

ऋण, धरोहर, किसी की संपत्ति के स्वामी हुए बिना उसे बेचना,
दान का फेर लेना, वेतन ना देना, प्रतिज्ञा का पालन न करना,
बिक्री और खरीद की हुई वस्तु का लौटाना।
स्वामी और सेवक में झगड़ा होना।
सीमा के संबंध में झगड़ा होना।

पति और पत्नी के कर्तव्य, उत्तराधिकार पाना।
यार सब दीवाने के मुकदमे दर्ज होते थे।

प्राचीन काल में बनाए गए नियम और कानून आज के नियम और कानून में कुछ समानता के साथ आज का नियम बहुत व्यापक हो गया है फर्क केवल इतना है कि प्राचीन काल में जो नियम बनाए जाते थे, उनका कड़ाई से पालन किया जाता था।

आज जो नियम है उनमें पारदर्शिता तो है परंतु कुछ लोग न्याय पाने के लिए अपना पूरा जीवन खो देते हैं और उनकी अगली पीढ़ी भी न्याय के लिए न्यायालय के दरवाजे खटखटा रहता है।

न्यायपालिका पर जनता का पूरा विश्वास होता है। न्यायपालिका के आदेशों का पालन शासन और प्रशासन करता कराता है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, लेख के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – इस लेख में कवि ने मनुस्मृति में जो कानून था उसे विस्तार से बताया है। प्राचीन काल में बनाए गए नियम और कानून आज के नियम और कानून में कुछ समानता के साथ आज का नियम बहुत व्यापक हो गया है फर्क केवल इतना है कि प्राचीन काल में जो नियम बनाए जाते थे, उनका कड़ाई से पालन किया जाता था। ” आज जो नियम है उनमें पारदर्शिता तो है परंतु कुछ लोग न्याय पाने के लिए अपना पूरा जीवन खो देते हैं और उनकी अगली पीढ़ी भी न्याय के लिए न्यायालय के दरवाजे खटखटा रहता है। “

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यह लेख (मनुस्मृति में कानून।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी। ♦

काशी आदि कालीन साहित्य नगरी है। प्रधानमंत्री जी बाबतपुर हवाई अड्डे पर 11:05 पर पहुंचने पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सहित तमाम स्वागत कर रहे। उनसे मिलने के उपरांत काशी हिंदू विश्वविद्यालय सभा स्थल पर समय 11:15 बजे पहुंचे।
काशी सभा स्थल पहुंच गए।
भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी अपने काशी संसदीय क्षेत्र में।

कोरोना प्रो o काल का पालन किया। सभा स्थल पर लोग हैं।
प्रधानमंत्री का स्वागत मंच पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया। उन्हें राम नाम दुपट्टा दिया।
योगी बोल रहे थे प्रधानमंत्री का स्वागत किया।
योजनाएं चलेगी। पार्टी के सभी पदाधिकारी जिला तथा महानगर विश्व में भारत की संस्कृति सभ्यता और संस्कार को प्रधान मंत्री जी ने आगे बढ़ाया।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में काशी में जो नई पहचान दी है।

काशी में प्रधानमंत्री योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और कई योजनाओं का शिलान्यास करने का भी काम किया जाएगा।
काशी वास्तव में काफी उन्नति की है। इसका विकास बहुत हुआ है। पिछले 70 सालों में केवल कैंट स्टेशन बना जबकि यहां से पंडित कमला पति त्रिपाठी आदि कई केंद्रीय मंत्री दिया। राज्य के उप सभापति और कृषि मंत्री श्याम लाल यादव जी को काशी ने दिया था इसके अलावा डॉक्टर संपूर्णानंद जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं, काशी ने अपने क्षेत्र से दर्जनों राज्य और मंत्री भी रहे परंतु जो उन लोगों से वह नहीं कर सका जिसकी काशी की जनता चाहती थी। जो विकास नहीं किया जा सका उसे गुजरात से आए हुए काशी के लाल आदरणीय नरेंद्र दास नरेंद्र मोदी जी ने कर दिखाया।

नरेंद्र मोदी जी की माता काशी में प्राय: स्नान करने आती और काशी विश्वनाथ का दर्शन तथा अन्य देवी-देवताओं का लगातार दर्शन और पूजन किया करती थीं।
ऐसा लगता है कि उनकी छाप आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के ऊपर विशेष रूप से पड़ी थी।

आज काशी में क्या होगा देखे –

कुल 78 परियोजनाओं का उद्घाटन, परियोजनाओं का लोकार्पण आदरणीय नरेंद्र मोदी जी करेंगे।
लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन
उद्घाटन किया-
आदरणीय नरेंद्र मोदी जी ने एक सफेद तकनीकी से बटन दबाकर उद्घाटन किया।

उन परियोजनाओं में रुद्राक्ष का भी उद्घाटन है। रुद्राक्ष सिगरा क्षेत्र में नगर निगम के पास भारत जापान की मैत्री का प्रमुख परियोजना है जो प्रधानमंत्री और जापान के शिंजो आबे जी की विचार विमर्श के उपरांत बनाने का योजना बना था जब जापान के प्रधानमंत्री जी भारत आए थे और गंगा में नौका पर नौका विहार भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ उसी समय यह योजना बनाई गई थी और आज वह पूरी हो रही है रुद्राक्ष का छत शिवलिंग के तरह दिखाई देता है।

आज होने वाले शिलान्यास और प्रस्तावित योजनाएं इस प्रकार हैं।

  • केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान द्वारा सेंटर फॉर स्क्रीन एवं एक बनी कल सपोर्ट का निर्माण जिसकी लागत 40 दशमलव 10 करोड़ है।
  • आईटीआई मनगांव का निर्माण 14.16 करोड़ का है।
  • राजघाट प्राथमिक विद्यालय का पुनर्निर्माण दोष 2.77 करोड़ लागत का है।
  • वाराणसी में ट्रांस बरुआ क्षेत्र में वाटर सप्लाई परियोजनाओं का स्काडा ऑटोमेशन 19.50 करोड़ का है।
    Water treatment plant Valupur.
  • वाराणसी नगर के वरुणा क्षेत्र में पेयजल संचालन के लिए संबंधित आवश्यक योजना 7.41 करोड़ में।
  • वाराणसी नगर के मोहन कटरा कोनिया घाट क्षेत्र के अंतर्गत ट्रेंचलेस विधि से सीवर लाइन बिछाने एवं तक संबंधित कार्य में 15.3 करोड़ रुपए।
  • घाट पंपिंग स्टेशन सीवेज पंपिंग स्टेशन एसटीपी पर इस कांडा ऑटोमेशन एवं ऑनलाइन इन फॉरेन मॉनिटरिंग सिस्टम का निर्माण 9 दशमलव 64 करोड़ है।
  • कोनिया में बम मेन पंपिंग स्टेशन 0.8 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट एवं वृद्ध कन्वेंशन की स्थापना 5.89 करोड़ रुपए।
  • मुकीम गंज एवं चौधरी क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने से संबंधित कार्य 2.83 करोड़ रुपए।
  • लहरतारा चौकाघाट फ्लाईओवर के नीचे अर्बन प्लेसमेकिंग का कार्य 8.50 करोड़ रुपए।
  • कारखियाओं औद्योगिक क्षेत्र में आम व वेजिटेबल इंटीग्रेटेड पंप हाउस का निर्माण 15.78 करोड़ रुपए।
  • पुलिस लाइन वाराणसी में ट्रांजिट हास्टल दो ब्लॉक का निर्माण व आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन सेक्टर इकाई वाराणसी के कार्यालय भवन का निर्माण 26 दशमलव 70 करोड़ रुपए।
  • राइफल एवं पिस्टल शूटिंग रेंज का निर्माण 5.04 करोड़ रुपए।
  • 152.092 किलोमीटर के 47 ग्रामीण संपर्क मार्ग की मरम्मत और चौड़ीकरण 111.26 करोड़ रुपए लगभग।
  • जल जीवन मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 183 करोड़ हर घर नल से जल योजना का कार्यक्रम 428 दशमलव ₹540000000/ ।

इसके अतिरिक्त लोकार्पण के लिए प्रस्तावित परियोजनाएं

  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र रुद्राक्ष का निर्माण।
  • गोदौलिया पर मल्टी लेबल टू व्हीलर पार्किंग का निर्माण।
  • वाराणसी शहर में पुरानी सीवर लाइन का सीआईपीपी लाइनिंग द्वारा जीर्णोद्धार।
  • वाराणसी शहर में सीवर जीर्णोद्धार कार्यक्रम।
  • शहर के छह मुख्य स्थानों पर ऑडियो विजुअल बी एल ई डी स्कीम वाराणसी शहर के 4 पार्क का सौंदर्यीकरण।
  • वाराणसी में सौ बेड का निर्माण।
  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला चिकित्सालय पांडेपुर में 50 वार्ड एम सी एच का निर्माण।
  • बीएचयू में रीजनल इंस्टीट्यूट आफ पैथोलॉजी का निर्माण।
  • श्री लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय रामनगर में आवासीय भवन का निर्माण।
  • 14 विभिन्न स्थानों अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में सी एस ए ऑक्सीजन जनरेशन आदि।

प्रधानमंत्री जी का उद्बोधन काशी हिंदू विश्वविद्यालय से…

प्रधानमंत्री जी अपना उद्बोधन काशी हिंदू विश्वविद्यालय से कर रहे हैं, उन्होंने भारत माता की जय का नारा लगवाया, तदुपरांत हर हर महादेव के नारे से पूरा सभा, गूंज द्वारा किए जाने से पूरे बनारस में हर हर महादेव के नारे की आवाज सुनाई देने लगी।

उन्होंने भोलेनाथ और माता अन्नपूर्णा के चरणों में शीश झुका कर नमन किया। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सामने सभा के बैठे हुए लोगों को धन्यवाद दिया।

आपने कहा कि बनारस के विकास के लिए जो कुछ भी हो रहा है, वह सब कुछ महादेव के आशीर्वाद और बनारस की जनता के प्रयास से ही जारी है। मुश्किल समय में भी काशी ने दिखा दिया है जो झुकता नहीं है वह थकता नहीं है।

कोरोना काल हम सभी के लिए मानव जांच के लिए बहुत मुश्किल की घड़ी रही है। पूरी ताकत के साथ हम सभी के ऊपर हमला किया परंतु देश का सबसे बड़ा प्रदेश उत्तर प्रदेश की आबादी दर्जनों देशों से भी ज्यादा है, वहां भी यूपी ने महामारी को फैलने से रोकने में सक्षम है। यह 100 साल में दुनिया पर आई सबसे बड़ी महामारी है। उत्तर प्रदेश में जो कुछ किया हुआ है बहुत ही सराहनीय और उल्लेखनीय है।

मैं लंबे समय के बाद काशी में आया हूं। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि मैं काशी में कोरोना काल में जिसको भी आधी रात को भी फोन किया, उसे देखा कि वह मोर्चे पर तैनात मिलता था। यही कारण रहा है कि आज यूपी में हालत संभलने लगे। आज उत्तर प्रदेश कोरोना की टेस्टिंग करने वाला सबसे बड़ा प्रदेश और वैक्सीनेशन करने वाला भी यह सबसे बड़ा राज्य रहा है।

अब गरीबी अमीरी की लड़ाई खत्म हो रही है। जो इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है वह भविष्य में भी काफी कल्याणकारी होगा।

बनारस में 14 ऑक्सीजन प्लांट का लोकार्पण।

बहुत सारे मेडिकल कॉलेजों का निर्माण उत्तर प्रदेश में किया जा रहा है। आज बनारस में 14 ऑक्सीजन प्लांट का लोकार्पण किया गया।
बच्चों तथा माताओं को विशेष तरह से ऑक्सीजन देने तथा उनकी व्यवस्था स्वास्थ्य सुविधाओं का ध्यान रखा गया। स्वास्थ्य सुविधा के लिए 23000 करोड का विशेष पैकेज दिया गया है।

काशी नगरी पूर्वांचल का बहुत बड़ा मेडिकल हब बन रहा है। जिन लोगों को इलाज के लिए दिल्ली और मुंबई जाना पड़ता था वह व्यवस्था अब काशी में उपलब्ध है।

महिलाओं और बच्चों के लिए नए हॉस्पिटल काशी को मिल रहा है 100 बेड काशी हिंदू विश्वविद्यालय में और 50 जिला अस्पताल को दिया जा रहा है जिसका लोकार्पण आज किया जाएगा।

आपने बताया कि कुछ ही देर में मैं बीएचयू में बनने वाले 100 बेड के अस्पताल को देखने भी जाने वाला हूं। काशी अपने मौलिक स्थान को बनाए हुए विकास के पथ पर अग्रसर है।

यह जल विद्युत व्यवस्था रेलवे पर्यटन तथा सड़कों गलियों का निर्माण घाटों का निर्माण सहित तमाम कार्य वाराणसी में किए जा रहे हैं।

नए प्रोजेक्ट नए संस्थान काशी के विकास गाथा को और आगे बढ़ा रहे हैं। काशी में ही दिल्ली वाला इलाज उपलब्ध होगा। आंखों की भी इलाज वाराणसी में हो सकेगा जो आज तक नहीं होता था।

गोदौलिया में मल्टी लेवल पार्किंग।

गोदौलिया में मल्टी level पार्किंग बनने से काफी सुविधा लोगों को मिलेगी।

लहरतारा से चौकाघाट बहुत जल्द ही यह परियोजना पूरी हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में हर घर में जल की योजना सरकारी चल रहा है, जो बहुत तेजी से चलाया जा रहा है बहुत अच्छी व्यवस्थाएं देने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।

शहर के 700 से ज्यादा स्थानों पर एडवांस कैमरा लगाने का भी काम जारी है। घाटों पर उनका इंफॉर्मेशन ब्रांच लगाए जा रहे हैं। काशी की कलाओं की जानकारी बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से दिया जाएगा जो गंगा जी के घाट पर लगाया जाएगा।

जिससे सभी को सही तरह से जानकारी मिल सके। काशी विश्वनाथ में होने वाली आरती तथा गंगा घाट पर होने वाली आरती को पूरे विश्व तक उपलब्ध हो सके इसकी पूरी व्यवस्था की गई है।

मां गंगा मैं चलने वाली नाव को सीएनजी में बदला जा रहा है जिससे प्रदूषण भी कम हो, ना के बराबर हो और खर्च भी कम हो।

रुद्राक्ष सेंटर…

काशी से विश्वस्तरीय संगीतकार, कलाकार जो विश्व स्तर पर उत्कृष्ट स्थान प्राप्त कर रहे हैं परंतु आज तक लोगों ने काशी के कलाकारों को उस तरह का माहौल नहीं दिया गया, आज रुद्राक्ष सेंटर हो जाने से उनको विश्वस्तरीय वह सुविधा काशी में ही उपलब्ध कराए जाने की योजना का आज उद्घाटन होने वाला है।

योगी जी के आने के बाद, योगी जी की सरकार ने इन सभी दिशाओं में काफी कार्य किया है तमाम नई सुविधाएं काशी को मिली है।

कुछ ऐसे संस्थान बनाए गए जिससे औद्योगिक विकास में बहुत मदद मिलेगी। की-पैड साइंस सेंटर के लिए घा के छात्रों को, युवाओं को विशेष रूप से प्रधानमंत्री ने बधाई दी।

मेक इन इंडिया।

कुछ साल पहले तक जिस यूपी में व्यापार कारोबार करना मुश्किल माना जाता था आज मेक इन इंडिया के मामले में उत्तरप्रदेश सबसे ज्यादा पसंद किया जाने लगा है। इसका एकमात्र कारण है योगी जी की सरकार द्वारा शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में काफी काम किया गया है।

एक्सप्रेस जो चाहे पूर्वांचल एक्सप्रेस गंगा एक्सप्रेस बुंदेलखंडी उसके बगल में मल्टीनेशनल औद्योगिक इकाइयां भी लगाई जाएंगी। जिससे यूपी का विशेष रूप से विकास होगा और उत्तर प्रदेश सहित पूर्वांचल का काफी हित साधन उपलब्ध कराया गया।

धान और गेहूं की रिकार्ड सरकारी खरीद।

इस बार धान और गेहूं की रिकार्ड सरकारी खरीद की गई है।
यहां इंटरनेशनल राय सेंटर खोला गया जो देश से ही नहीं पूरे विश्व को काम आएगा। विशेष रूप से छोटे किसान फल सब्जी का कार्य करने वालों को कृषि संबंधित किए गए उपायों से विशेष लाभ होगा।

समय अभाव के कारण मुझे भी यह सोचना पड़ रहा है कि यूपी के विकास के किन कार्यों की सराहना करूं और किन्हे मैं छोड़ दूं यह सब करना पड़ता है यद्यपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी उत्तर प्रदेश के लिए समर्पित रूप से कार्य कर रहे हैं जो बहुत ही सराहनीय है।

योगी सरकार नहीं थी तब भी मुझे केंद्र से उतने ही प्रयास करने पड़ते थे जो आज मैं कर रहा हूं परंतु उत्तर प्रदेश में दूसरी सरकार होने की वजह से उत्तर प्रदेश में जो योजनाएं दी जाती थी उसमें रोड़ा लग जाता था।

यूपी में कानून का राज।

जितना प्रयास योगी जी बनारस के लिए कर रहे हैं उसी तरह से अलग-अलग जिलों में भी जा कर के वह विकास के लिए लगातार लगे रहते हैं। इसीलिए वह विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं आज यूपी में कानून का राज है। इसके पहले माफिया राज और आतंकवाद था परंतु आज कानून का शिकंजा है।

जिससे बहू बेटियों को जो आतंक और भय से भी जीते थे उस पर रोक लगी है। आज बहू बेटियों पर आंख उठाने वाले अपराधियों को पता है कि हम उत्तर प्रदेश में रहकर कानून से बच नहीं पाएंगे।

उत्तर प्रदेश की सरकार आज भाई भतीजावाद नहीं, बल्कि विकास मार्ग के नाम पर आगे बढ़ रही है। इसीलिए आज जो भी केंद्र द्वारा योजनाएं दी जाती हैं उसका लाभ सीधा जनता को मिला।

साथियों इस विकास की यात्रा में यूपी के हर एक नागरिकों का हाथ है आपका यह आशीर्वाद उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएगा। आपको सब आप की सबसे बड़ी इस समय आवश्यकता है कि आप कोरोना को आगे न बढ़ने दें और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करें।

हमें कोरोना के सारे नियम कायदे का सख्ती से पालन करते रहना है और सबको वैक्सीन लगवाने और जांच करवाने के अभियान में लगे रहना है वैक्सीन जरूर लगवाना है।

हर हर महादेव करके प्रधानमंत्री जी ने अपने भाषण को समाप्त किया।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के काशी आगमन, और काशी में होने वाले विकास कार्यों का उद्घाटन की प्रक्रिया को आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत किया हैं। हमें कोरोना के सारे नियम कायदे का सख्ती से पालन करते रहना है और सबको वैक्सीन लगवाने और जांच करवाने के अभियान में लगे रहना है वैक्सीन जरूर लगवाना है।

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यह लेख (काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें और लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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हिंदी राष्ट्रभाषा के पथ पर अग्रसर।

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CYMT-KMSRAJ51-4

♦ हिंदी राष्ट्रभाषा के पथ पर अग्रसर। ♦

हिंदी ने भारतीय भाषाओं की दीवार को तोड़ने का काम किया है। जबकि शिक्षा के प्रारंभिक चरण से ही हिंदी के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता रहा है। हिंदी के नाम पर प्रतियोगिताएं होती हैं। हिंदी के प्रयोग का मूल्यांकन होता है। पुरस्कार दिए जाते हैं, परंतु हिंदी को कोई अपना बनाता नहीं। यही कारण है कि बच्चों की सोच की क्षमता लगभग-लगभग समाप्त होती जा रही है, बच्चे केवल रटते रहते हुए अंग्रेजी ज्ञान को पढ़ते आ रहे हैं।

हिंदी अपनों के बीच ही बेगाने होती जा रही

हिंदी अपनों के बीच ही बेगाने होती जा रही है। स्कूली शिक्षा में राज-भाषा और व्यावहारिक हिंदी की स्तरीय अनिवार्यता की कमी, हिंदी में आत्मविश्वास की कमी का कारण बनता जा रहा है। जिस हिंदी ने हमें आजादी दिलाई। एक दूसरे को जोड़े रखा। उस हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा – दिलाने में हम सभी सफलता नहीं प्राप्त कर सके। यह बहुत विचारणीय विषय है।

आज हिंदी सूर्य की किरणों की भांति सारे संसार को प्रकाशित कर रही है। हिंदी सर्वगुण संपन्न आनंददायक – सुखदायक भाषा है।

हम सूरज तू चंदा,
मेरा कार्य प्रकाश फैलाना।
अंधेरा से कहते जाओ,
हो रहा कहां है नंगा।
मैं सूरज तू चंदा॥

गंगा नहावन से सुख,
मुझ में डूबे हो जा चंगा।
रोम – रोम आनंदित हो,
बहोरी विश्व साहित्य गंगा।
मैं सूरज तू चंदा॥

हिंदी भाषा स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख हथियार

हिंदी भाषा स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख हथियार थी, इसके माध्यम से अंग्रेजो के खिलाफ योजनाएं बनाई गई, समाचार पत्रों के माध्यम से जन-जन तक सूचनाएँ/पहुँचाई गई। हिंदी को गौरव दिलाने में हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अहम भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, सुभाष चंद्र बोस आदि प्रमुख महापुरुषों ने भाग लिया। उन्होंने हिंदी का गौरव बनाए रखने के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दिया।

हिंदी एक प्रतिष्ठित भाषा

हिंदी जनता के हृदय संयोग की भाषा थी। सम्मान पूर्वक बोली जाने वाली हिंदी एक प्रतिष्ठित भाषा है। आज हिंदी, हिंदी के प्रति बच्चों में सोच की क्षमता लगभग समाप्त हो रही है। केवल रतटे हुए ज्ञान के माध्यम से घर के आस-पास देश काल को भीं नहीं जान पाते, न हिंदी तिथियां हमारी हैं, न दिन हमारा है, न महीना हमारा है, न ऋतुएँ हैं, न गांव है, ना गांव के आस – पास के बिरवे रहते हैं, ना उन बिराओं पर अलग-अलग मौसम में तरह- तरह की बोली बोलने वाले पक्षी रहते हैं। आज अगर कुछ है तो केवल मम्मी-पापा और मेज-कुर्सी है।

हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है।

हिंदी के बारे में अगर सारे आंकडे पर नजर रखी जाए तो आंकड़े यह बताते हैं कि हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है। यह विश्व के सैकड़ों विश्व विद्यालयों में पढ़ाई जा रही है। हिंदी भाषा के श्रेष्ठ हो जाने से अन्य भारतीय भाषाओं पर उसके प्राण तत्व पर कोई बोझ पड़ने वाला नहीं है। तमिल जैसी प्राचीन और समृद्ध भाषा को अपनी तुलना करवानी हो तो वह संस्कृत के साथ तुलना करवा सकती है।

अपनी एक राष्ट्र-भाषा

किसी भी देश की अपनी एक राष्ट्र-भाषा होनी चाहिए। राष्ट्र-भाषा के अभाव में किसी भी देश को हानि होती है। सन 1853 फरवरी – 2, को ब्रिटिश संसद के एक व्याख्यान में जिसमें कहा गया कि ‘मैंने भारत की ओर छोर का भ्रमण किया है और मैंने एक भी आदमी नहीं पाया जो चोर हो। इस देश में मैंने ऐसी समृद्धि ऐसे सक्षम व्यक्ति तथा ऐसी प्रतिभा देखी है कि मैं नहीं समझता कि इस देश को विजित (जीत) लेंगे।

सांस्कृतिक एवं नैतिक मेरु दंड को तोड़ नहीं देते’

  • जब तक की हम इसके सांस्कृतिक एवं नैतिक मेरु दंड को तोड़ नहीं देते’ इसलिए मैं यह प्रस्ताव करता हूं कि हम भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति एवं संस्कृत को बदल दें, क्योंकि यदि भारतीय यह सोच लेंगे कि जो विदेशी और अंग्रेजी में है वह उनके आचार- विचार से अच्छा एवं बेहतर हैं तो वे अपना आत्मसम्मान एवं संस्कृत को छोड़ देंगे तथा वे एक पराधीन कौम बन जाएंगे। जो हमारी चाहत है।

मैकाले की शिक्षा नीति

  • मैकाले की शिक्षा नीति भारतीयों को उनकी भाषा से पृथक कर वैचारी बनाने की है जिसे हम नहीं समझ सके। मैकाले ने खुद अपने होम सेक्रेटरी को पत्र लिखा कि ‘मैं नहीं कह सकता कि भारत राजनीतिक रूप से आपके अधीन रह पाएगा, लेकिन इतना मैं अवश्य करके जा रहा हूं कि यह देश राजनीतिक स्वतंत्रता पा लेने के बाद भी अंग्रेजी मानसिकता अंग्रेजी सभ्यता और अंग्रेजी भाषा के प्रभाव से मुक्त नहीं हो सकेगा। उसका यह कथन अक्षरसः से सिद्ध हो रहा है। आज भी हम अंग्रेजी मानसिकता से मुक्त नहीं हो सके।

अपने साथ डूभाष्ये

  • कोई भी देश जैसे जर्मन, जापान, रूस, इजराइल, फ्रांस या अन्य कई विकसित देशों के प्रतिनिधि मंडल जब किसी दुसरे देश के राज्य की यात्रा पर जाते हैं तो वे अपने साथ डूभाष्ये को लेकर जाते हैं क्यों कि उनकी अपनी राष्ट्र भाषा होती है, परंतु भारत की अपनी राष्ट्र भाषा नहीं है। ऐसी स्थिति में जब हमारे कोई मंत्री दूसरे देश में जाता है तो उन्हें English में बात करने के लिए बाध्य होना पड़ता है।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

  • जबकि भाषा के प्रश्न को गंभीरता से लेते हुए उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम एन वेंकटचलैया और न्यायमूर्ति एस मोहन की तत्कालीन खण्ड पीठ ने कहा था, कि प्रारंभिक स्तर पर बच्चों को शिक्षा केवल मातृ-भाषा में ही दी जानी चाहिए। मातृ-भाषा में दी गई शिक्षा संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करना सिखाती है। कर्नाटक सरकार ने उच्चतम न्यायालय के आदेश को स्वीकार कर, एक ऐतिहासिक और साहसिक कार्य किया। जिसका अंग्रेजी मानसिकता के अभिभावकों ने ज़ोरदार विरोध किया था। परंतु दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण विरोधी मानसिकता वालों की एक न चली।

नई शिक्षा नीति

भारत की वर्तमान सरकार नई शिक्षा नीति में बदलाव के साथ मातृ-भाषा पढ़ाए जाने पर जोर दिया है।
भारत सरकार से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ कुछ हद तक नागरिकों की हिंदी के प्रति नीरस मानसिकता भी उत्तर दाई है। हमारे देश में नागरिकों और कर्मचारियों की एक बड़ी तादाद है जो स्वदेश की भावना को व राज भाषा के महत्व को समझ नहीं पाता, भाषण व संस्कृत के ज्ञान व समझ में कमी के चलते बे-वजह के मोह ने हिंदी के प्रति हम समर्पित नहीं हो पाते।

अपनी भाषा में अपने – अपने निवासियों का लगाव

भाषा की बात करें तो अपनी भाषा में अपने – अपने निवासियों का लगाव होना चाहिए। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जिस समय जर्मनी के अधीन फ्रांस था, उसी समय जर्मनी की महारानी एक स्कूल में गई, वहां जाकर जर्मनी के राष्ट्रगान सुनाने के लिए बच्चों से कहा।

उस स्कूल की एकमात्र एक ही बच्ची जर्मन भाषा में राष्ट्र गान किया। राष्ट्रगान को सुनकर महारानी ने उस बच्ची से कहा, कुछ मांगो! वह बच्ची महारानी की बात सुनकर खुश होकर तत्काल कहा कि – हमारी शिक्षा का माध्यम फ्रेंच बना दीजिए। इसे कहते हैं अपनी भाषा के प्रति लगाव, अनुराग और भाषा के प्रति प्रेम।

एक घटना सोवियत रूस की

एक घटना सोवियत रूस की है, हमें उससे सीख लेनी चाहिए। जिस समय भारत देश गणतंत्र हुआ उस समय अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कारण एक भारतीय राजनयिक बनाकर सोवियत रूस भेजा गया। उसने वहां जाकर कार्यभार ग्रहण करते समय अंग्रेजी भाषा में अपना लिखा पत्र प्रस्तुत किया।

सोवियत रूस सरकार में भारत के राजनयिक के पत्र को अस्वीकार करते हुए कहा, याद दिलाया कि अंग्रेजी में पत्र उसी गुलामी का प्रतीक है। फिर किसी गुलाम देश से अंतरराष्ट्रीय संबंध स्थापित करने का कोई प्रश्न नहीं बनता। भाषा के प्रश्न पर सोवियत रूस की फटकार भारतवर्ष के 70 वर्षों के अंतराल में भी परिवर्तन में सोच का नया पन ना आना, हमारी हिंदी के प्रति उदासीनता पर करारा प्रहार है।

हमें मात्र कौरवी ना समझें,
दिल्ली हरियाणा क्षेत्रीय बोली।
आठवीं सदी से मैं आई,
सरहपा के मुख पर छाई।
संस्कृत में ही मैं समाई,
बहिना संस्कृत की भाई।
बाबर नामा भी करे बड़ाई।
कौरवी हिन्दुस्तानी कहाई।
खालिकबारी खुसरो लिखे,
कौरवी को वह हिंदवी कहे।

वह भी एक समय था जब हिंदी अर्थात कड़ी बोली हरियाणा और दिल्ली की क्षेत्रीय बोली तक ही सीमित थी। उसी बोली को कौरवी कहा गया। भाषा का अपना महत्त्व होता है। सभी देश की एक अपनी राष्ट्र भाषा का होना अनिवार्य है।

ऑक्सफोर्ड में शब्दकोश में हिंदी।

जबकि भाषा के महत्व को समझते हुए ऑक्सफोर्ड में शब्दकोश में हिंदी के शब्द लिए जा रहे हैं। हिंदी का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाएं हो रही हैं। हिंदी का विस्तार पूरे विश्व में हो रहा है।

जबकि आज तक के इतिहास में भारत के मात्र 2 प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी बाजपेई और नरेंद्र मोदी ही ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने विशेष अवसरों पर संयुक्त राष्ट्र संघ को हिंदी में संबोधित किया और भारत की हिंदी का मान बढ़ाया। वर्तमान समय में यू-ट्यूब, व्हाट्स एप, मैसेज, लिंकडन और फेसबुक आदि पर हिंदी का प्रयोग आश्चर्यजनक रूप से बढ़ रहा है।

विश्वास दिल में रखना कोशिशें ही काम आएंगी।
टूटे हुए हर दिल को हिंदी ही फिर जोड़ पाएगी॥

महात्मा गांधी जी ने सन 1910 में कहा था कि ‘हिंदुस्तान को अगर सचमुच राष्ट्र बनाना है तो राष्ट्रभाषा हिंदी ही हो सकती है’। स्वतंत्रता दिलाने में हिंदी ने पूरे देश को एक कड़ी में पिरोया और लोगों को इकट्ठा करने का कार्य किया। हिंदी में ही सूचनाएं भेजी गई सूचनाओं का आदान-प्रदान हिंदी में ही होता रहा।

बारूद थी, आरी थी, कुल्हाड़ी लिए लोग मगर।
जंगलों से चलकर शिकार करते हुए आ रही॥

राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जी राष्ट्रभाषा को राष्ट्रीयता का स्रोत मानते थे। उन्होंने कहा कि ‘कोई विदेशी भाषा हमारे देश की रक्षा नहीं कर सकती राष्ट्र के विकास के लिए अपनी भाषा अनिवार्य है’। भाषाओं का आश, उनके शब्दों में हिंदी था। वे हिंदी के साथ अन्य सभी भाषाओं के व्यवहारिक बनाए जाने के पक्षधर थे।

भारत के दक्षिणी राज्यों में हिंदी प्रवेश कर गई है।

भारत के दक्षिण के राज्य जहां हिंदी का विरोध होता था आज उन राज्यों में हिंदी प्रवेश कर गई है। हिंदी अपनी आंतरिक ऊर्जा से सरलता, सहायता बोधगम्यता और समन्वय की भावना के कारण अनेकानेक विरोध सहते हुए भी आगे बढ़ रही है। हिंदी की अनिवार्यता पर गौर करें तो जिन देशों के लोग भारत से व्यापार संबंध रखना चाहते हैं उनको हिंदी जानना आवश्यक है। हिंदी उनके लिए अनिवार्य हो गई है।

देवनागरी लिपि के समान सरल जल्दी सीखने योग्य और तैयार लिपि दूसरी कोई है ही नहीं। जो संपूर्णता और ध्वनात्मकता हिंदी में है। देवनागरी लिपि में है। वैसी क्षमता उर्दू और रोमन में भी नहीं है।

भाषा का कोई धर्म – पंथ नहीं होता। भाषा किसी की प्रतिलिपि नहीं होती। भाषा संवाद और संचार का माध्यम है। जहां तक स्वयं भाषा के स्थापत्य की बात है अपनी जन भाषा के सम्मान का प्रश्न है तो अपने देश की एक राष्ट्रीय भाषा होनी ही चाहिए।

जीने की ना दी राह तो जीवन ही क्यों दिया।
जीने के नाम पर शर्मिंदा क्यों फिर किया।
सागर में जलती पर आश अभी बाकी मुझमे।
इतनी सुख सम्पदा डगर पर भटकने दिया।

हिंदी की सहज भाषा ही अपने लचीलेपन के कारण अपने आयाम का विस्तार कर दी जा रही है। हिंदी की अनिवार्यता से राष्ट्र की अखंडता परिभाषित हो सकती है। यदि हमें हिंदी के गौरव की पुनर्स्थापना करना है तो देश को भाषाई आधार पर एकरूपता मैं रंगना होगा, हमें सोच बदलनी होगी। तभी प्रगट का पथ प्रदर्शित होगा।

हिंदी को हिंदू और उर्दू को मुसलमान के चश्मे से दूर रखना होगा। इन्हीं खोखले आधारों से भाषा का युद्ध और विरोध का जन्म होता है। हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि संवाद का सर्वोच्च शिखर भी आज हिंदुस्तान में हिंदी ही है। भारत को उच्च शिखर पर स्थापित करने के लिए भारत की मेधा के बच्चों को हिंदी या मातृभाषा में दक्ष रखना ही होगा।

हिंदी के संवर्धन और विकास के लिए –

प्रथम ऐतिहासिक संस्था 18 सौ ई. में फोर्ट विलियम कॉलेज नाम से कोलकाता में स्थापित हुआ। स्थापना भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड वेलेजली द्वारा की गई थी। इसका प्राचार्य सबसे पहले जॉन गिलक्रिस्ट को बनाया गया। उन्होंने देवनागरी में ‘हिंदी’ और फारसी लिपि में ‘उर्दू’ या ‘हिन्दुस्तानी’ का अध्ययन शुरू करवाया।

उस समय हिंदी की पाठ्य पूर्ती के लिए प्राचार्य ने कई लेखकों से पुस्तकें लिखवाई। उन लेखकों में लल्लू लाल, सदल मिश्र, इंशाअल्लाह खान, मुंशी सदा सुखलाल’ नियाज’ का नाम आता है। लल्लूलाल और सदल मिश्र को हिंदी पढ़ाने के लिए फोर्ट विलियम कालेज में शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया।

इनके अलावा अध्यापकों में से ईश्वरचंद विद्यासागर, राम राय बासु, तरनतारन मिश्र , मृतुन्जय विद्यालंकार भी थे, जो अन्य भाषाओं की शिक्षा देते थे। कुछ और लेखकों ने मिलकर अनुवाद और लेखन का कार्य किया जिससे पुस्तकों की कमी को दूर किया गया।

हिंदी के विकास और संवर्धन के लिए दूसरी संस्था

हिंदी के विकास और संवर्धन के लिए दूसरी संस्था 16 जुलाई 1883 को नागरी प्रचारिणी सभा के नाम से वाराणसी में स्थापित हुई। जिसकी स्थापना क्वींस कालेज के नवीं के तीन छात्र – श्यामसुंदर दास, शिवकुमार सिंह और राम नारायण मिश्र ने की। इसके संस्थापक अध्यक्ष राम कृष्ण दास बनाये गए और सात सदस्य हुये। आगे चलकर सम्पूर्ण भारत के अलग अलग क्षेत्रों में जैसे प्रयाग, चेन्नई, गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद, हिंदी विद्यापीठ देवधर झारखंड की स्थापना 1929 में हुई।

उड़ीसा राष्ट्र भाषा परिषद पूरी, केरल हिंदी प्रचार सभा तिरुवनंतपुरम सं 1934 में , राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा 1936 में गांधी और राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की प्रेरणा से, महाराष्ट्र सभा पुणे की स्थापना 1937 में काका कालेकर की अध्यक्षता में, चौदहवीं सौराष्ट्र हिंदी प्रचार समिति राजकोट, प्रारम्भ में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा की एक समिति के रूप में 1937 में उन दिनों उसे काठियावाड़ राष्ट्र-भाषा प्रचार नामक संस्था द्वारा चलाया जा रहा था।

बम्बई हिंदी विद्यापीठ की स्थापना 1936 में, हिदुस्तान प्रचार सभा मुंबई 1938 में गांधी की प्रेरणा से, असम राष्ट्र-भाषा प्रचार समिति की स्थापना 1938 में, कर्नाटक हिंदी प्रचार समिति बेंगलूर की स्थापना सं 1939 में, मैसूर हिंदी प्रचार परिषद की स्थापना बेंगलुरु में 1943 में, कर्नाटक महिला हिंदी सेवा समिति बेंगलूरी में 1953 में, मणिपुर हिंदी परिषद इम्फाल की स्थापना नवयुवकों द्वारा 1953 में।

साहित्य अकादमी दिल्ली की स्थापना 12 मार्च 1954 को की गई, केंद्रीय हिंदी संसथान आगरा की स्थापना 1961 में, अखिल भारतीय हिंदी संस्था संघ दिल्ली की स्थापना 1964 में, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ की स्थापना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1976 में और हिंदी अकादमी दिल्ली की स्थापना 1981 में दिल्ली सरकार द्वारा स्वायत्त शासी संस्था के रूप में हुई।

देखे सबके बम और तोपें।
फिर भी लड़ते रहती हूँ।
गाँव के युवकों ने सोचा था।
मुझसे उनकी भलाई है।
बारूदों पर घर है जिनका।
वही मसलते मिलते हैं।
शहर का मौसम बदलेगा।
मन की मंगल कहता है।

भारतीयों के ह्रदय में रचने बसने निवास करने वाली भाषा हिंदी महापुरुषों का याद कराते रहती है और राष्ट्र-भाषा बनने के लिए किसी महापुरुष की खोज में आशान्वित है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – विश्व पटल पर हिंदी भाषा का महत्व। हिंदी भाषा के विकास और संवर्धन की जरूरत क्यों है। क्यों सभी को हिंदी सीखना जरूरी है। आधुनिक युग में राष्ट्र भाषा हिंदी के साथ क्या – क्या हुआ, और आधुनिक युग में राष्ट्र भाषा हिंदी के विकास और संवर्धन के काल खंड का बहुत ही सटीक विस्तार से वर्णन किया हैं।

—•—•—•—

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यह लेख “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपके लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपके लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपके इस लेख से आने वाली पीढ़ियां (Future generations) हिंदी के महत्व को समझ पायेगी और हिंदी को अपने जीवन में उचित स्थान देगी।

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