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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2024-KMSRAJ51 की कलम से

राष्ट्र अखण्ड बनाना है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rashtra Akhand Banana Hai | राष्ट्र अखण्ड बनाना है।

Do not hand over the ladder of power to those whose aim is to usurp power. The nation should be made united.

हमे न बदलना वक्फ बोर्ड को,
न ही सनातन में कुछ करना है।
हमें तो कानून तीस – तीस ए को,
भारत के खातिर एक करना है।

तीन सौ सत्तर हटी और पैंतीस ए भी हटी,
कानून तीस और तीस ए को एक बनाना है।
भारत के संविधान में नया संशोधन कर के,
भारत में यूनिफार्म सिविल कोड को लाना है।

हुई चूक हो किसी भी स्तर पर तब,
अब उलझी सूत को ही सुलझाना है।
जाति – धर्म के धागों से ही मिलाकर,
भारत के भविष्य का स्वेटर बनाना है।

जो भारत का था वह भारत में ही रहेगा,
हमें तो अवैध घुसपैठ को ही भगाना है।
भगाओ उन्हे मिलकर सब भारत वासी,
जिन्होंने रिहोंगियाओं को पहचाना है।

चिटा जैसा विनाशक जहर जो फैलाए,
उसको भला क्यों कर तुम्हे बचाना है?
वह बड़ा है या फिर छोटा है कोई यारो,
उसे हर हाल में बेनकाब ही करवाना है।

इससे पहले कि देश में धर्म युद्ध हो,
हमें राष्ट्र धर्म को ही शुद्ध करवाना है।
युवा पीढ़ी को बहकाने वालों को हमें,
युवा को समझाकर सबक सिखाना है।

हम दे देंगे सब कुछ दान भी अपना,
हर हाल में राष्ट्र अखण्ड बनाना है।
देश विभंजन गद्दारों को तो भाइयों,
शमशीर उठा कर ही बोध कराना है।

सत्ता सिंहासन उसे ही दिया जाए,
जिसका मकसद देश बचाना है।
मत सौंप सत्ता की सीढ़ी उसको,
जिसका मकसद सत्ता हथियाना है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि कवि भारत में एकता, अखंडता और समरसता को बढ़ावा देने की बात करता है। वह यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) लागू करने की वकालत करते हैं, ताकि देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून हो। उन्होंने अनुच्छेद 370 और 35A के हटने का उल्लेख किया है और चाहते हैं कि संविधान में एक और संशोधन किया जाए। कवि ने अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर करने की बात की है, विशेष रूप से रोहिंग्याओं को, और देश में फैल रहे विनाशकारी तत्वों जैसे नशे (चिटा) का विरोध किया है। वह समाज को चेताने का आह्वान करते हैं कि राष्ट्र के लिए खतरनाक तत्वों को बेनकाब किया जाए।कवि ने देश में धर्म के नाम पर विभाजन या युद्ध की संभावना से बचने के लिए राष्ट्र धर्म को शुद्ध करने की बात की है। युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन देने का भी आह्वान किया गया है ताकि उन्हें बहकाया न जा सके। अंत में, उन्होंने देश की अखंडता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सत्ता ऐसे व्यक्ति को सौंपने की बात की है, जिसका मकसद सिर्फ सत्ता हथियाना न हो, बल्कि देश को बचाना हो।

—————

यह कविता (राष्ट्र अखण्ड बनाना है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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गांधीगिरी अपनाओ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gandhigiri Apanao | गांधीगिरी अपनाओ।

A graphic representation featuring the word "Gandhi" repeated multiple times, highlighting its cultural and historical importance.

अहिंसा
की हो बात,
स्वतंत्रता
की मिले सौगात,
सादगी
जिसकी पहचान,
सत्य
जिसका कमान,
बापू
तुम हो महान।

सत्याग्रह
जिसकी शक्ति,
गांधी
थे वो व्यक्ति,
निडरता
जिससे मिला न्याय,
ब्रह्मचर्य
तालु पर नियंत्रण पाए,
बापू
इसीलिए महान कहलाए।

धोती
जिसकी पहचान,
लाठी
शास्त्र समान,
कर्मठता
ब्रह्म का वरदान,
सरलता
जीवन को बनाए आसान,
बापू
तुम्हीं हो राष्ट्र का सम्मान।

आज का दौड़
भ्रष्टाचार,
मन का गौर
गलत विचार,
सत्य का नाश
बना लाश,
माहौल का विनाश
बन गया दास,
फिर कैसे होगा विकास?

आ जाओ
फिर एक बार,
बदलेगी
दिशाएं चार,
सत्य
पसारेगा पैर,
हिंसा
की अब तो खैर,
बापू
आ जाओ करने सैर।

सोच
मन की बदलो,
बोल
मीठे ही बोलो,
सद्भावना
दिल से जोड़ो,
अहिंसा
का दामन न छोड़ो,
गांधीगिरी
से अब नाता जोड़ो।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि महात्मा गांधी (बापू) को महानता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अहिंसा, सत्य, और सादगी उनके जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत थे। सत्याग्रह और ब्रह्मचर्य से उन्होंने निडरता और आत्म-नियंत्रण का प्रदर्शन किया, और इसी कारण उन्हें महान माना गया। उनकी पहचान धोती, लाठी और सरल जीवन शैली से होती थी, जो उन्हें राष्ट्र का सम्मानित व्यक्ति बनाती है। कवि आज के भ्रष्ट और हिंसक माहौल की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि गांधी जी के विचार और सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। वे आह्वान करते हैं कि हम गांधीगिरी (गांधी के विचारों) से जुड़ें, मन को शुद्ध करें, और अहिंसा, सत्य, और सद्भावना का पालन करें ताकि समाज में बदलाव आ सके।

—————

यह कविता (गांधीगिरी अपनाओ।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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अमित प्रेमशंकर का जीवन परिचय।

Kmsraj51 की कलम से…..

Biography of Amit Premshankar | अमित प्रेमशंकर का जीवन परिचय।

Amit Premshankar's full name is Amit Premshankar Prajapati. His father's name is Shri Dwarika Prajapati and mother's name is Mrs. Rekha Devi. He was born on 10 March 1993 in Edla village of Simaria block of Chatra district of Jharkhand state.अमित प्रेमशंकर का पूरा नाम अमित प्रेमशंकर प्रजापति है। इनके पिता का नाम श्री द्वारिका प्रजापति व माता का नाम श्रीमती रेखा देवी है। इनका जन्म 10 मार्च 1993 को झारखण्ड राज्य के चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड के एदला नामक गांव में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही विद्यालय से हुई। अमित प्रेमशंकर बचपन से ही पढ़ने लिखने में बहुत तेज थे। जब ये कक्षा एक में थे तब से ही इन्हें हिन्दी में बड़ी रुचि थी। जब कक्षा दो या तीन के छात्र पुस्तक नहीं पढ़ पाते तो हेडमास्टर साहब इन्हें बुलाकर उनकी कक्षा में ले जाते और उन लोगों के सामने इनसे पुस्तक पढ़वाते थे। अमित प्रेमशंकर शांत स्वभाव के साथ-साथ बहुत ही अनुशासित बच्चों में से एक थे। सभी शिक्षक इनसे बहुत प्रसन्न रहते थे।

ये अपना सारा होमवर्क अच्छे से कर के जाते थे जिसके फलस्वरूप इन्होंने कभी किसी मास्टर से मार नहीं खाया। इन्होंने किसान उच्च विद्यालय डाडी से 2010 में दसवीं पास कर उच्च शिक्षा के लिए प्रखण्ड के “सिमरिया इंटर कॉलेज सिमरिया” में दाखिला लिया। 12वीं करने के बाद विनोबा भावे विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक किया। अमित प्रेमशंकर को बचपन से ही कविताएं व गीत लिखने के साथ साथ संगीत में भी अत्यधिक रुचि थी। जब रेडियो पर कोई गीत प्रसारित होती थी तब ढोलक लेकर तैयार रहते थे। और गाने के साथ साथ धून मिलाकर ढोलक बजाने का प्रयास करते थे। अमित प्रेमशंकर अपने पिताजी के साथ खेती बाड़ी में भी बड़े लगन और होशियारी पूर्वक कार्य करते थे जिससे गांव वाले प्रसंशा करते थकते नहीं थे। हल चलाना, कुदाल चलाना, खेतों की साज सज्जा, से लेकर फसलों की बुआई व कटाई बड़ी कुशलता से करते थे।

एक दौर था जब सोशल मीडिया इतनी एक्टिव नहीं थी तब अखबारों में कविता लिखने के लिए आने वाले काॅलम के लिए डाक द्वारा अपनी कविता भेजते थे। और हर दिन अखबार में अपना नाम ढूंढते। इनकी रचना कभी छपती तो कभी नहीं भी छपती थी। पर कभी निराश नहीं हुए और निरंतर लेखन का कार्य जारी रखा।

वैसे इनके संघर्ष की कहानी बहुत लम्बी है और आज भी संघर्षरत हैं। इनका मानना है कि किसी एक सीढ़ी पर पहुंचकर ये नहीं मान लेना चाहिए कि हम सफल हो गए। अगर आज हम सिर्फ साहित्य की बात करें तो अमित प्रेमशंकर किसी परिचय के मोहताज नहीं है। इनके दर्जनों हिन्दी साझा काव्य संकलन के साथ साथ “मन की धारा” नामक एकल काव्य संग्रह भी दिल्ली से प्रकाशित हुई है। जो सभी प्रमुख आनलाईन बाजारों में भी उपलब्ध है।

अमित प्रेमशंकर की दो कविताएं “आज राम जी आएंगे” व “सीता माता सी कोई नहीं ” को महाराष्ट्र आमगांव महाविद्यालय के प्राचार्य व वरिष्ठ साहित्यकार ओ. सी. पटले जी ने पोवारी और मराठी भाषा में अनुवाद किया है। साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट लेखन के लिए अमित प्रेमशंकर कई सम्मानों से भी नवाजे जा चुके हैं जिसमें, आत्म सृजन साहित्य सम्मान, काव्य श्री साहित्य सम्मान, भावोन्नती साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान, रैदास साहित्य सम्मान, सरदार भगत सिंह काव्य लेखन सम्मान, साहित्य कर्नल सम्मान, द फेस ऑफ इंडिया साहित्य सम्मान समेत व दिल्ली साहित्य रत्न सम्मान आदि प्रमुख हैं। मुंबई आने के बाद इन्होंने भोजपुरी व हिन्दी एल्बम के लिए लगभग दो दर्जन से अधिक गीत लिखें, जिसमें राम भजन, सरस्वती भजन, शिव भजन, छठ गीत और होली के जोगिरा से लेकर रोमांटिक गीत भी शामिल हैं। हाल ही इनके लिखे गीत “तुम कहो अयोध्या वासी” काफी लोकप्रिय हुई, लाखों लोगों ने शेयर किया, कुछ रैप बनाए गए, कुछ संगीतबद्ध कर एल्बम बनाए गए। इसके पहले कोरोना काल में “काली भद्रकाली मांँ” ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में”हे शूलपाणि हे शंकरा” राम मंदिर उद्घाटन में”आज आए मेरे राम अवध ” समेत जादू तेरे चरण में रघुवर, लौटा दे मेरी सीता को, जैसे गीत लोगों के मन में एक अमिट छाप छोड़ गई है।

अमित प्रेमशंकर आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। लोग कहते है कि इनकी वीर रस की कविताओं में महाकवि रामधारी सिंह दिनकर जी परछाई की झलक दिखाई देती है। लोगों को धर्म,कर्म के प्रति उत्साहित करना, मार्गदर्शन करना इनके रचनाओं की प्राथमिकता है। श्री अमित प्रेमशंकर श्रृंगार रस, वीर रस व भक्ति रस समेत करुण रस की कविताएं लिखते हैं । जिसे पढ़कर एक अलौकिक आनन्द की अनुभूति होती है॥

♦ अमित प्रेमशंकर जी — एदला-सिमरिया, जिला–चतरा, झारखण्ड ♦

—————

Conclusion

  • “अमित प्रेमशंकर“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से अपना जीवन परिचय बताने की कोशिश की है — अमित प्रेमशंकर प्रजापति एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार, कवि और गीतकार हैं, जिनका जन्म 10 मार्च 1993 को झारखंड के चतरा जिले के एदला गांव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से प्राप्त की और बचपन से ही हिंदी भाषा और साहित्य में गहरी रुचि दिखाई। स्कूल के समय से ही वे कविताएं और गीत लिखने लगे थे और अनुशासनप्रिय व बुद्धिमान छात्र के रूप में पहचाने जाते थे।अमित ने दसवीं के बाद “सिमरिया इंटर कॉलेज” से 12वीं की पढ़ाई की और फिर विनोबा भावे विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक किया। वे न सिर्फ एक साहित्यकार हैं बल्कि खेती-बाड़ी में भी निपुण हैं, जहां वे अपने पिता के साथ मिलकर खेती करते थे। उनके गीत और कविताएं अखबारों में प्रकाशित होती थीं, और उन्होंने कभी हार नहीं मानी, चाहे उनकी रचनाएं प्रकाशित हों या नहीं।अमित प्रेमशंकर का साहित्यिक योगदान कई साझा काव्य संग्रहों में शामिल है, और उनका एकल काव्य संग्रह “मन की धारा” भी प्रकाशित हुआ है। उनके कई गीत और कविताएं लोकप्रिय हुई हैं, जैसे “तुम कहो अयोध्या वासी”, “काली भद्रकाली मां”, “हे शूलपाणि हे शंकरा”, और “आज आए मेरे राम अवध”। उनके गीतों और कविताओं का अनुवाद मराठी और पोवारी भाषाओं में भी किया गया है।अमित प्रेमशंकर को कई साहित्यिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है, जैसे आत्म सृजन साहित्य सम्मान, काव्य श्री साहित्य सम्मान, दिल्ली साहित्य रत्न सम्मान आदि। उनकी वीर रस की कविताओं में महाकवि रामधारी सिंह दिनकर की झलक दिखाई देती है। वे आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनके लेखन का उद्देश्य लोगों को धर्म और कर्तव्य के प्रति जागरूक करना है।

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यह जीवन परिचय (अमित प्रेमशंकर का जीवन परिचय।) “अमित प्रेमशंकर जी“ जीवन पर आधारित है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। आपकी ज्यादातर कविताएं युवा पीढ़ी को जागृत करने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

नाम: अमित प्रेमशंकर
पिता: श्री द्वारिका प्रजापति

माता: श्रीमती रेखा देवी
पत्नी: श्रीमती संजू प्रेमशंकर

जन्मतिथि: १० मार्च १९९३
पता: ग्राम+पोस्ट – एदला
प्रखण्ड: सिमरिया
जिला: चतरा (झारखण्ड)
पिन: ८२५१०३

शिक्षा: स्नातक (हिंदी) विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग
सम्प्रति: कवि, गीतकार व ढोलक वादक।

प्रकाशित पुस्तकें: मन की धारा(एकल),आत्म सृजन, काव्य श्री, एक नई मधुशाला १, एक नई मधुशाला २, भावों के मोती, हमारी शान तिरंगा है व अक्षर पुरूष
प्रकाशित रचनाएं: देश के अलग-अलग पत्र पत्रिकाओं में लगभग दो सौ रचनाएं प्रकाशित व समय समय पर सामाचार पत्रों के माध्यम से पत्राचार।
विशेष: कविता “सीता माता सी कोई नहीं” तथा “आज राम जी आएंगे” महाराष्ट्र के वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओ. सी. पटले द्वारा पोवारी भाषा में अनुवाद व दर्जनों हिन्दी, भोजपुरी गीत यूट्यूब पर मौजूद हैं जिसे अलग अलग गायक और गायिकाओं ने अपने स्वर से सजाया है।

प्राप्त सम्मान: काव्य श्री साहित्य सम्मान, आत्म सृजन साहित्य सम्मान, भावोन्नती साहित्य सम्मान, सरदार भगतसिंह काव्य लेखन सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान, साहित्य कर्नल सम्मान दो बार, रैदास साहित्य सम्मान,द फेस ऑफ इंडिया साहित्य सम्मान, राष्ट्र प्रेमी साहित्य सम्मान तथा दिल्ली साहित्य रत्न सहित अनेकों आनलाईन काव्य पाठ द्वारा ई-सम्मान पत्र शामिल है।

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हिन्दी किस्मत की मारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Kismat Ki Mari | हिन्दी किस्मत की मारी।

The foreign pomp and show is becoming too much, that is why Hindi could not become our national language. Speak foreign language but give priority to Hindi, Hindi is our mother, do not forget this.

मैं हूँ हिन्दी किस्मत की मारी,
मुझ पर विदेशी भाषा पड़ रही है भारी।
हर कोई विदेशी भाषा बोलना समझता है शान,
न जाने क्यों खो रहे हैं हम अपनी पहचान।

वर्ष में एक दिन है आता,
जब हर कोई हिन्दी दिवस है मनाता।
बड़ी बड़ी बातें हिन्दी पर है बोली जाती,
अगले ही दिन हर किसी के मुंह में विदेशी भाषा है आती।

जो भी हिन्दी में है बात करता,
वो विदेशी भाषा न बोलने का खामियाजा है भरता।
रोजगार नहीं मिलता, बात करने को कोई तैयार नहीं होता,
हिन्दी बोलने वाला शायद यूँ ही नहीं रोता।

विदेशी तड़क भड़क हो रही है भारी,
तभी तो हिन्दी नहीं बन पाई राष्ट्र भाषा हमारी।
विदेशी बोलो पर हिन्दी को प्राथमिकता दो,
हिन्दी हमारी जननी इस बात को मत भूलो।

नई पीढ़ी हिन्दी से अनभिज्ञ सी हो रही,
उन्हें तो विदेशी भाषा ही लगती है सही।
हिन्दी है हमारी जान इससे है हमारी पहचान,
कहीं यूँ ही न धूल जाए राष्ट्र भाषा बनाने के अरमान।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति और उससे जुड़ी चिंताओं को व्यक्त किया है। हिंदी कहती है कि वह किस्मत की मारी है, क्योंकि विदेशी भाषाओं का प्रभाव उस पर भारी पड़ रहा है। लोग विदेशी भाषा बोलने को शान समझते हैं, जिससे अपनी पहचान खोती जा रही है। हिंदी दिवस पर लोग हिंदी की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन अगले ही दिन वे फिर से विदेशी भाषा बोलने लगते हैं। हिंदी में बात करने वालों को सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें रोजगार और सम्मान नहीं मिलता। विदेशी संस्कृति और भाषा का प्रभाव बढ़ने से हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है। नई पीढ़ी हिंदी से दूर हो रही है और विदेशी भाषाओं को ही सही मान रही है। कवि इस बात पर जोर देता है कि हमें विदेशी भाषा का सम्मान करते हुए भी हिंदी को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि हिंदी हमारी पहचान और आत्मा है।

—————

यह कविता (हिन्दी किस्मत की मारी।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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मैं हूं हिंदी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Main Hoon Hindi | मैं हूं हिंदी।

I am the sharp edge of words, maybe I am the base? I am the source of soul and unity, I am the propagator of the country's culture, I teach the lessons of Tatsam Tadbhav, I decorate the alphabet. I am Hindi.

मैं हूं हिंदी,
कहने के लिए,
आपकी बिंदी,
सर का ताज हूं,
राज-काज का साधन,
भाषा की अभिव्यक्ति हूं।

पतंगों की डोर संग,
भावनाओं की उड़ान हूं,
देश की आन, बान-शान,
एकता की बुनियाद हूं,
अक्षर का कराती हूं ज्ञान,
ईश्वर ने जो दिया है वरदान।

शब्दों की तीखी धार हूं,
शायद मैं ही आधार हूं?
आत्मा एवं एकता का सूत्रधार,
देश की संस्कृति का प्रचारक हूं,
तत्सम तद्भव का पाठ पढ़ाती,
वर्णमाला का साज सजाती।

बापू ने जिसे किया वरण,
महादेवी वर्मा ने दिया शरण,
जो सबके दिलों को जोड़ती,
सबके अरमानों को घोलती,
फिर भी एक बात,
जो मेरे मन को है कचोटती।

जिससे है देश का मान,
जो है राष्ट्र की पहचान,
फिर क्यूं हो रहा उसका अपमान,
मिट रही मेरी मिली पहचान,
मेरे अस्तित्व पर ही लग रहा ग्रहण।

जिसे संविधान ने है अपनाया,
फिर दूसरी भाषा ने,
लोगों के दिलों में जगह कैसे बनाया?

अब क्या होगा मेरे भाई?
क्या फिर मिल सकेगी?
मेरी पुरानी खोई पहचान,
क्या मिल पाएंगे?
खोए सभी ओहदे तमाम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने हिंदी भाषा को एक जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें हिंदी स्वयं अपनी कहानी बता रही है। हिंदी कहती है कि वह न केवल अभिव्यक्ति का साधन है, बल्कि राष्ट्र की आन, बान, और शान का प्रतीक है। यह भाषा भावनाओं को उड़ान देती है, एकता की नींव रखती है, और देश की संस्कृति का प्रचार करती है। हिंदी को बापू और महादेवी वर्मा ने अपनाया, और यह भाषा सभी को जोड़ती है। लेकिन हिंदी यह भी कहती है कि वर्तमान में उसका अपमान हो रहा है और उसकी पहचान धुंधली पड़ रही है। वह प्रश्न करती है कि जब उसे संविधान ने अपनाया है, तो दूसरी भाषाओं ने लोगों के दिलों में जगह कैसे बना ली। कविता के अंत में हिंदी अपनी पुरानी खोई हुई पहचान और सम्मान को वापस पाने की उम्मीद करती है, और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए चिंतित है।

—————

यह कविता (मैं हूं हिंदी।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

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Hindi Ka Maan Badhayenge | हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

The poet tells that Hindi is the language that is learned from the mother and gets respect all over the world.

जो भाषा मां से सीखी जाती,
जग में सबका मान बढ़ाती,
एकता का प्रतीक बन जाती,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी की बिंदी जिसके भाल,
प्रकृति भी बिन पूछें न चलती चाल,
संस्कृति की जिससे होती पहचान,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी ही है सुर संगीत और तान,
इसीलिए मेरा देश कहलाता महान,
सरल सौम्य स्वभाव है जिनका,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

जो है देश की आन बान और शान,
जिससे बढ़ता है देश का मान,
जिस भाषा पर हमसभी को है नाज,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

अक्षर से अक्षर का ज्ञान कराती,
उच्चारण में जिसके स्पष्टता है होती,
जो प्रभावमयी और गतिशील है होती,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी हिंदुस्तान की पहचान है,
इस हिंदी के बिना जीवन वीरान है,
जिससे ही मिला जग में सम्मान है,
वो कोई और नहीं हिंदी हिंदुस्तान हैं,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता हिंदी भाषा के महत्व और गौरव को दर्शाती है। कवि बताता है कि हिंदी वह भाषा है जो मां से सीखी जाती है और पूरे संसार में सम्मान दिलाती है। यह एकता का प्रतीक बनती है और लोगों को जोड़ने का काम करती है। हिंदी हमारी संस्कृति और पहचान का स्रोत है, और इसके बिना जीवन अधूरा है। यह सरल, सौम्य, और स्पष्ट भाषा है जो हमारे देश की आन, बान और शान है। इस कविता के माध्यम से कवि यह प्रतिज्ञा करता है कि वह जन-जन तक हिंदी की महानता को पहुंचाएगा और हिंदी का मान बढ़ाएगा।

—————

यह कविता (हिंदी का मान बढ़ाएंगे।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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हमारे शिक्षक महान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hamare Shikshak Mahan | हमारे शिक्षक महान।

The one who sacrificed his body and soul, O great teacher, none other than he, makes the path of students easy, perhaps he got divine blessings.

तन मन जिसने लिए कुर्बान,
ओ कोई और नहीं शिक्षक महान,
छात्रों की राह करते आसान,
शायद मिला उन्हें ईश्वरीय वरदान।

सुबह की पहली किरणों के साथ,
छात्रों का टेंशन लेते अपने माथ,
नित्य नए-नए ज्ञान का करते संचार,
छात्रों को सिखलाते सुंदर विचार।

कक्षा से पहले तैयार करते लेशन प्लान,
ताकि बच्चों को दे सटीक ज्ञान,
हर छात्र पर रहता उनका ध्यान,
जब दे रहे हो शिक्षा और ज्ञान।

छात्रों के लिए उनका ये समर्पण,
अरमान भी जिनका हो अर्पण,
छात्रों की सफलता से जो हो उत्साहित,
हमेशा जिन्हें करते रहते प्रोत्साहित।

जिनका सर्वस्व जीवन छात्रों पर हो समर्पित,
उन शिक्षकों को मेरा चन्द शब्द अर्पित,
जिन्हें न रहता अपनी निजी जीवन का भान,
जो अरमानों को छात्रों के लिए करते कुर्बान।

अपनी खुशी का भी न रखते ध्यान,
हर पल छात्रों का जो करते गुणगान,
वो कोई और नहीं हमारे शिक्षक महान,
सच्चाई की जो पाठ पठाते।

धैर्य, क्षमा, करुणा का भाव जागते,
हम नौसिखों को बाज बनाते,
नभ में उड़ना वही सिखाते,
शिष्टाचार की राह दिखाते।

मर्यादा का पाठ पढ़ाते,
सामाजिकता का दर्श दिखाते,
परिस्थितियों से लड़ना सिखलाते,
दूसरे की सफलता पर जो खुश हो जाते।

सच्चे शिक्षक की भूमिका बखूबी निभाते,
जिनका सर्वस्व जीवन छात्रों के लिए अर्पण,
उनके लिए मेरा कोटि कोटि वंदन,
जिनके कार्यों से जग में मिलता मान और सम्मान।

ओ कोई और नहीं हमारे शिक्षक महान,
शिक्षक दिवस पर ही नहीं हर पल करें वंदन,
चलो करें मिलकर उनका वंदन अभिनंदन।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि शिक्षक के महान व्यक्तित्व और उनके समर्पण की सराहना कर रहे हैं। शिक्षक अपने तन-मन से छात्रों के लिए समर्पित रहते हैं और उनके जीवन को आसान बनाते हैं। वे न केवल ज्ञान का संचार करते हैं बल्कि छात्रों को सही विचार और मार्गदर्शन देते हैं। शिक्षक प्रत्येक छात्र पर विशेष ध्यान देते हैं और उनकी सफलता के लिए लगातार प्रोत्साहित करते हैं।शिक्षक अपने निजी जीवन की परवाह किए बिना, छात्रों के भविष्य को संवारने में लगे रहते हैं। वे धैर्य, क्षमा, और करुणा जैसे गुणों का विकास करते हैं और छात्रों को जीवन की चुनौतियों से निपटना सिखाते हैं। शिक्षक न केवल शैक्षणिक ज्ञान देते हैं, बल्कि शिष्टाचार, मर्यादा और सामाजिकता का भी पाठ पढ़ाते हैं।कवि इस कविता के माध्यम से शिक्षकों के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए उन्हें वंदन और अभिनंदन करते हैं, क्योंकि उनके योगदान से समाज में मान-सम्मान और सही मार्गदर्शन मिलता है।

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यह कविता (हमारे शिक्षक महान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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गुरु।

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Guru | गुरु।

They teach us to set goals. They also tell us the mantra to achieve our goals. Whenever happiness and sorrow come, they also ignite the flame to face them.

गुरु शब्द है छोटा पर महत्व है बड़ा।
गर न हो गुरु तो समझो जीवन अधूरा पड़ा॥

सबसे पहले गुरु माँ बाप है होते।
जो अपनी संतान को संस्कारों की शिक्षा है देते॥

द्वितीय गुरु पाठशाला में शिक्षक है होते।
शाब्दिक और व्यावहारिक ज्ञान जो है देते॥

हमें लक्ष्य निर्धारित करना है सिखाते।
लक्ष्य भेदने का मंत्र भी जरूर है बताते॥

सुख – दुःख जब भी आए।
उनका सामना करने की लौ भी जगाए॥

आत्मसम्मान और आत्मबल का भी बोध हैं करवाते।
अभिमान न कभी आए इसका भी एहसास जरूर दिलाते॥

बड़ों का आदर सम्मान करना है सिखाते।
छोटों से प्यार करना भी जरूर बताते॥

गुरु का सम्मान जहाँ भी है होता।
जीवन उनका सफल हो जाता॥

आज गुरु को उतना सम्मान नहीं मिल पाता।
गुरु अपने आप को कोसता हुआ नजर है आता॥

गुरु का आदर सम्मान है जरूरी।
इनके अभाव में समझो सृष्टि है अधूरी॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि गुरु के महत्व को बताते हुए कहते हैं कि गुरु का स्थान जीवन में बेहद महत्वपूर्ण होता है। सबसे पहले माता-पिता को गुरु माना जाता है, जो बच्चों को संस्कारों की शिक्षा देते हैं। फिर शिक्षक विद्यालय में ज्ञान प्रदान करते हैं, जो शाब्दिक और व्यावहारिक होता है। गुरु हमें जीवन में लक्ष्य तय करना और उसे प्राप्त करने के तरीके सिखाते हैं। वे हमें आत्मसम्मान, आत्मबल, और विनम्रता का पाठ पढ़ाते हैं, साथ ही यह भी सिखाते हैं कि बड़ों का सम्मान और छोटों से प्यार कैसे करना चाहिए। कवि इस बात पर भी ध्यान दिलाते हैं कि आज के समय में गुरु को उतना सम्मान नहीं मिल रहा, जितना मिलना चाहिए। गुरु का आदर करना आवश्यक है, क्योंकि उनके बिना जीवन और सृष्टि अधूरी है।

—————

यह कविता (गुरु।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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मेरे गुरु जी।

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Mere Guruji | मेरे गुरु जी।

My Guru Ji was so lovely, He was a very beautiful sight in the classroom, He used to teach very lovingly, We also never got scolded by him.

मेरे गुरु जी कितने प्यारे थे,
बहुत ही सुंदर होते वो कक्षा के नज़ारे थे,
वो बहुत प्यार – प्यार से सिखाते थे,
हम भी कभी उनसे डांट नहीं खाते थे।

कक्षा में वो कभी देरी से नहीं आते थे,
खूब मन लगाकर सारे बच्चों को पढ़ाते थे,
पहले अच्छी शिक्षा हमको देते थे,
फिर बाद में हमारी परीक्षा लेते थे।

अगर कोई गलती हम कर देते थे,
उसका एहसास कराकर खूब हमको हंसाते थे,
ऐसे ज्ञान की अलख जगाते थे,
साथ में अच्छे संस्कार भी हमको सिखाते थे।

पढ़ाई में जो पीछे रह जाते थे,
उनको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे,
सच में ही मेरे गुरु जी कितने प्यारे थे,
सारे जग में वो सबसे न्यारे थे।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि अपने गुरु जी की प्रशंसा करते हुए बताते हैं कि वे कितने प्यारे और आदर्श शिक्षक थे। वे कक्षा में समय पर आते थे और पूरी मेहनत और मन से सभी छात्रों को पढ़ाते थे। वे न केवल शिक्षा देते थे, बल्कि छात्रों को अच्छे संस्कार भी सिखाते थे। अगर कोई गलती होती, तो वे उसे हंसी-मजाक के साथ सुधारते थे और छात्रों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे। कुल मिलाकर, कवि का मानना है कि उनके गुरु जी सबसे प्यारे और अनोखे थे।

—————

यह कविता (मेरे गुरु जी।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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वो है मुरली वाला।

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Vo Hai Murli Wala | वो है मुरली वाला।

The one who wears the peacock crown .He charmed the milkmaids with the sweet tune of his flute. He is the flute player.

देवकी के गर्भ से जन्म लेने वाला,
यशोदा ने है जिसे पाला
वो है मुरली वाला।

माखन को है चुराने वाला,
ग्वालों का ही नाम ले डाला,
वो है मुरली वाला।

गोपियों संग रास है रचाने वाला
रूप है जिसका सांवला सांवला
वो है मुरली वाला।

गोवर्धन पर्वत को एक ऊंगली पर उठाने वाला
लीला यह देख दंग रह गया हर एक गवाला
वो है मुरली वाला।

मोर मुकुट है पहनने वाला,
बांसुरी की मधुर धुन से गोपियों को मोह डाला,
वो है मुरली वाला।

गेंद के बहाने यमुना में छलांग लगाने वाला,
कालिया नाग के फनों पर नाच कर डाला,
वो है मुरली वाला।

कंश मामा को संदेश दे डाला,
जन्म ले चुका है तेरा वध करने वाला,
वो है मुरली वाला।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप और उनकी अद्भुत लीलाओं का वर्णन करते है। कविता में श्रीकृष्ण को “मुरली वाला” कहा गया है, जो देवकी के गर्भ से जन्म लेने के बाद यशोदा द्वारा पाले गए। वह माखन चुराने वाले, गोपियों के संग रास रचाने वाले, और गोवर्धन पर्वत को एक ऊंगली पर उठाने वाले के रूप में वर्णित हैं। श्रीकृष्ण की लीलाओं में यमुना नदी में कालिया नाग के फनों पर नाचने और कंस का वध करने के संकेत भी शामिल हैं। कविता भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके चमत्कारों को समर्पित है।

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यह कविता (वो है मुरली वाला।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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