• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for हेमराज ठाकुर

हेमराज ठाकुर

खो जाने दो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kho Jaane Do | खो जाने दो।

खो जाने दो हमें गुमराहियों के अंधेरे में,
वाहवाहियों की हमें कोई दरकार नहीं।
नहीं चाहिए हमें ऐसी ख्याति विख्याती,
लोक मंगल का हो जिसमें विचार नहीं।

कहां खोए रहे हर क्षण छिछले से शब्द न्यास में,
बेकार वह बात जिसमें गरिमा का अधिभार नहीं।
नफरत भली है उस दिखावटी प्रेम से भी कहीं,
जिसमें हकीकत का हो लेश मात्र भी दीदार नहीं।

सजानी नहीं है जिन्दगी की महफिलें हमें,
खुशामदी के रंग बिरंगे बनावटी फूलों से।
फिल्मी किरदारी प्रेम की है चाह ही कहां?
जिन्दगी जीना चाहते हैं प्यार के उसूलों से।

कमबख्त यह जीवन भी बदलता है रंग,
हर रोज बस मौसम के मिजाज की भांति।
सुकून से जीने ही नहीं देता है किसी को भी,
जिन्दगी की उहापोह में है ही कहां शान्ति।

रंगीनियों की तलबगार रही है हमेशा से,
छिछोले से पन की वह मदहोश वासना।
प्रेम पूजा है, जरूरत है, रहम है, इबादत है,
प्रेम तो खुद ही है उस खुदा की उपासना।

सब जानते हैं लोग, लेकिन फिर भी न जाने क्यों?
जहां में नफरतों और वासनाओं का जहर घोलते हैं।
जिधर भी देखो उधर ही एक अजीब सी मदहोशी है,
अब तो लोग प्रेम को भी रूप और दौलत से तोलते हैं।

बस एक अजीब सी घुटन है हर किसी के भीतर,
बिरले ही है कोई जो दिल का हर राज खोलते हैं।
है अधूरे प्रेम की आज भी लाखों कहानियां यहां,
पर मजाल है कि कोई किसी से कुछ बोलते हैं।

गुजर जाती हैं जिन्दगियां सच्चे प्रेम की तलाश में,
नसीब कहां? मिल जाए तो खुद को खो जाने दो।
मन मसोसकर घुट – घुट के जीने से बेहतर तो यह है,
कि खुद को खुदा की इबादत से प्रेम में रो जाने दो।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — दिखावटी वाहवाहियों की हमें कोई दरकार नहीं है, नहीं चाहिए हमें ऐसी ख्याति विख्याती, लोक मंगल का हो जिसमें विचार नहीं। ये सच है की नफरत भली है उस दिखावटी प्रेम से भी कहीं, जिसमें हकीकत का हो लेश मात्र भी दीदार नहीं। सजानी नहीं है जिन्दगी की महफिलें हमें, खुशामदी के रंग बिरंगे बनावटी फूलों से। हमें फिल्मी किरदारी प्रेम की है चाह ही कहां? हम जिन्दगी जीना चाहते हैं प्यार के उसूलों से। आज का मानव दहोश वासना में है, जबकि उसे जरुरत है प्रेम, स्नेह व भक्ति-भजन की, हम सब जानते है की प्रेम ईश्वर का ही रूप है। सब जानते हैं लोग, लेकिन फिर भी न जाने क्यों? जहां में नफरतों और वासनाओं का जहर घोलते हैं। जिधर भी देखो उधर ही एक अजीब सी मदहोशी है, अब तो लोग प्रेम को भी रूप और दौलत से तोलते हैं। बस एक अजीब सी घुटन है हर किसी के भीतर, बिरले ही है कोई जो दिल का हर राज खोलते हैं। गुजर जाती हैं जिन्दगियां सच्चे प्रेम की तलाश में, नसीब कहां? मिल जाए तो खुद को खो जाने दो।

—————

यह कविता (खो जाने दो।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur poems, motivational poem in hindi, खो जाने दो, खो जाने दो - हेमराज ठाकुर, जीवन की सीख कविता, जीवन जीने की प्रेरणा देने वाली कविता, प्रेरणादायक हिंदी कविता संग्रह, बेहतरीन मोटिवेशनल कविताएँ, युवाओं के लिए प्रेरणादायक कविता, सीख देने वाली कविता, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं

वासनाओं की आजादी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Freedom Of Lust | वासनाओं की आजादी।

आशाओं के सब भंवर टूट गए,
तट विहीन हो रही मोह नदियां।
तृष्णाओं के जाले फैंक फैंक कर,
पकड़ रहे हैं विकारों की मछियां।

झुरमुट बन मद झाड़ है उपज रहे,
दब रही है जिनमें ज्ञान की फसलें।
प्रेम की खाद अब मिलती कहां है?
वासना रसायन में उलझे सब मसले।

फरिश्ते तो हो गए हैं दूर की कौड़ी,
रिश्ते ही नित निरन्तर जर्जरा रहे हैं।
प्रेमी प्रेमिका के तो भला क्या कहने?
भाई – बहन मदहोशी में सठिया रहे हैं।

छल छदम तो होते सदियों से आए हैं,
बेशर्मी तो इस युग में देखो आई नई है।
न बच्चों में तहजीब पहनावे बरतावे की,
न अभिभावकों में आज वह शेष रही है।

फिर कहते हैं क्यों टिकते नहीं रिश्ते?
यह प्रश्न तो शायद आज बेईमानी है।
शादी से पहले ही संबंधों को बनाना,
वासनाओं को प्रेम समझना नादानी है।

हम मानव हैं, समझते क्यों नहीं?
क्यों पशु की नकल सब करते हैं?
वासनाओं की आजादी, अमर्यादी,
निज पद में कुठाराघात क्यों करते हैं।

विकारों को समझना स्वर्ग से बढ़ कर,
वासनाएं ही क्यों पीयूष सी लगती है?
इनकी प्यास कहां बुझती है किसी की?
ये तो युगों युगों से यूं ही बस भभकी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आजकल समाज में आधुनिकता के नाम पर इंसान कितना गिर गया है वासनाओं के गर्त में? जिस्म की भूख में सब मर्यादाओं को भूल गया है आज का दानवी मानव क्यों? शादी से पहले ही संबंधों को बनाना और वासनाओं को ही प्रेम समझना नादानी है। हम मानव हैं, समझते क्यों नहीं? क्यों पशु की नकल सब करते हैं? वासनाओं की आजादी, अमर्यादी, निज पद में कुठाराघात क्यों करते हैं सभी? प्रेमी प्रेमिका के तो भला क्या कहने? भाई – बहन मदहोशी में सठिया रहे हैं आजकल। बेशर्मी तो इस युग में देखो आई नई है, न बच्चों में तहजीब पहनावे बरतावे की और न अभिभावकों में आज वह शेष रही है लाज – शर्म। वासनाओं के कारण मनुष्य का व्यक्तित्व सडऩे लगता है और काम वासना में बुरे से बुरा कर्म कर रहा है आज का जानवर से भी गया गुजरा मानव। विषयासक्ति की दुर्गंध हमारे व्यक्तित्व को इस तरह ढांप लेती है कि हम दानव बन जाते है। वासना पूरी तरह से यौन आकर्षण पर आधारित है, जबकि प्रेम भावनात्मक इच्छा पर।

—————

यह कविता (वासनाओं की आजादी।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Freedom Of Lust, hemraj thakur, hemraj thakur poems, Hindi Poems, जिस्म की भूख - आजकल का प्यार, जिस्म की भूख क्यों?, वासना और सच्चे प्रेम में अंतर, वासनाओं की आजादी, वासनाओं की आजादी - हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं

बचपन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Childhood | बचपन।

काश! लौट आते वे बचपन के दिन आज,
जिसमें, दादी चूमती भालों को।
माता, लोरी गा कर सहज सुलाती,
बहना, चटकारी देती गालों को।

वह बाबुल की बाहों का झूला होता,
सागर समझता नदी और नालों को।
कोरे कागज की वह कश्ती होती,
खेलता, काठ के कृपाण और भालों को।

माँ डांटती, मैं रुस कर छुप जाता,
आँगन में बाबुल की पीठ के पीछे।
माँ खंगालती, घर का कोना – कोना,
दादी देखती, हर पलंग के नीचे।

बाबा, मौन रह देते, साथ मेरा तब,
गमछे से ढांपते, ताकि तनिक न दिखे।
बहना खोलती, भ्रातृ भेद सारा तब,
माँ झुंझलाती, अच्छा! तो ये तुम्हारी सीखें?

काश! मिट्टी के वे घरौंदे होते,
बनाता, मिटाता, फिर से बनाता।
किशोर पड़ोसिन कमला की चुगली,
तोतली आवाज में दादा से लगाता।

डांट पड़ती देख दादा से उसको,
मेरा रूआंसा सा चेहरा, फिर से खिलखिलाता।
काश! लौट आते वे बचपन के दिन आज,
जिंदगी जीने का बड़ा मजा आता।

आज न जाने क्या हो गया ये?
आलीशान बंगलों का सुख भी न भाता।
आंगन में लगे हुए झूले पर झूल कर भी,
वह बाबुल की बाहों सा चैन न आता।

काश! हुआ न होता बड़ा अगर मैं,
तो आज ये बचपन का भाव न सताता।
आज है भार सब अपने ही कंधों पर,
जो उठाया करते थे, तब मेरे पिता और माता।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — बचपन जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। बचपन में इतनी चंचलता और मिठास भरी होती है कि हर कोई फिर से बचपन को जीना चाहता है। बचपन में वह धीरे-धीरे चलना, गिर पड़ना और फिर से उठना। मेरे बचपन में पिता के द्वारा डांटने पर हम अपनी मां के आंचल में जाकर छुप जाया करते थे। मां की लोरियां सुनकर मुझे अच्छी नींद आती थी। दादा – दादी का वह प्यार व अपनापन भुलाया नहीं जाता। वह समय बहुत ही खुशी देने वाला होता था। बचपन मानो स्वर्ग का एक नगरी है जहाँ से हमे निकलने का मन ही नहीं करता। बचपन ही वो समय होता है जहाँ हमे कोई रोक-टोक नहीं करता। पूरी दुनिया एक तरफ और हम एक तरफ होने लगते है। जब हम एक बच्चे होते है, तब हमें अपने बचपन का कोई महत्व नहीं समझ आता। लेकिन जब हम लोग बड़े होते जाते है, तब हमें अपने बचपन का महत्व समझ आता है। बचपन हर व्यक्ति के जीवन का मौज मस्ती से भरपूर एक अहम हिस्सा होता है। मेरा बचपन बहुत ही सुहावना रहा और मेरा बचपन गाँव में ही बीता है। बचपन में बच्चे अनुकरण प्रिय होते हैं. वे जैसा देखते हैं, सुनते हैं, वैसा ही करने के लिये प्रयासरत हो जाते हैं। बचपन में बच्चे के व्यक्तित्व का विकास अत्यन्त तीव्र गति से होता है। अर्थात जीवन के परे विकास का तिहाई विकास बचपन में ही पूर्ण हो जाता है।

—————

यह कविता (बचपन।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Bachpan Par Kavita, Best Poem On Childhood in Hindi, hemraj thakur, hemraj thakur poems, Hindi Poems on Bachpan, बचपन, बचपन - हेमराज ठाकुर, बचपन पर कविता | Childhood Bachpan Poem In Hindi, बचपन पर कविता हिंदी में, बचपन पर लाज़वाब कविताएं, भोला मासूम बचपन, हेमराज ठाकुर

सनातन, मीडिया और धीरेंद्र शास्त्री पर बवाल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ruckus on Sanatan media and Dhirendra Shastri | सनातन, मीडिया और धीरेंद्र शास्त्री पर बवाल।

यह कितनी विडम्बना है कि आज हर क्षेत्र में घपलाबाजी हो रही है। हद हो गई। नेता और अधिकारी मिलकर देश लूट रहे हैं। छोटे सरकारी कर्मचारी काम न कर के मात्र बैठ कर तनख्वाह ले कर देश लूट रहे हैं। या फिर घूंस ले कर लूट रहे हैं। देश के न्यायालयों में न्याय बिक रहा है। पत्रकार पैसों की लालच में सच को झूठ और झूठ को सच कहने पर तुले हैं। बड़ी विडम्बना है कि एक मात्र धर्म परेशान लोगों का सहारा बन कर रह गया था। वहां भी अब ढोंग पाखंड और नाटक होना शुरू हो चुका है। यही धर्म नेता यदि चमत्कार करता है तो सन्देह के घेरे में और यदि वह कुछ नहीं करता तो फिर वह निक्कमा है।

जनता को यदि सभी मामलों में परेशान कोई करता है तो वह है देश का जागरूक पत्रकार और प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया। बेचारी जनता जाए तो जाए पर कहां जाए।

  • दिक्कत हमे हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि धर्मों और इन धर्मों के लोगों से नहीं है। यदि इन धर्मों के लोग सच में अपने धर्म को ईमानदारी से मानते हैं और उसका दिल से पालन करते हैं तो वे किसी दूसरे धर्म को भी परेशान नहीं करते हैं।
  • पर यह जो धर्म के नाम पर धर्म परिवर्तन, लव जेहाद या अन्य कई प्रकार की घटनाएं घट रही है। बहु – बेटियों को अर्धनग्न फिल्मे दिखा कर अंग प्रदर्शन की सीख दी जा रही है। बच्चों को, युवा पीढ़ी को नशे की लत लगाई जा रही है। क्या ये सारी बातें ठीक है?
  • यूं हम कहने को तो सब खुद को सनातनी कहते हैं पर हम अपनी सनातनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति कितने समर्पित है? क्या कदम उठाते हैं उनके संरक्षण के लिए हम?
  • कुछ नहीं न। बस अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं हम। ये जो लीव इन रिलेशनशिप की बीमारी हमारे देश में आ रही है, क्या यह सनातन धर्म के अनुसार सही है?
  • क्या समलैंगिक विवाह ठीक है? पशु बनाने पर तुले है मानव को आज। क्यों और किस लिए और कौन?

यह चर्चा भी की किसी पत्रकार ने ईमानदारी से? बस लोक आस्थाओं और विश्वासों पर विज्ञान का सहारा लेकर तर्क देना ही मीडिया का काम रह गया है। हम आज समाज को मानव समाज नहीं बल्कि पढ़ा लिखा आदि मानव समाज बनाने पर तुले हैं।

फर्क ये हैं कि आदिमानव कच्चा मांस खाता था और हम पक्का। वे पेड़ – पौधे की छाल से निज गुप्तांगों को ढकते थे और हम बिकनी और ब्रा से ढक रहे हैं। वे अपने लिए जंगलों में पूर्ण स्वतंत्र हो कर मनमाफिक तरीके से अपनी – अपनी शक्ति के बल पर जीते थे और हम आज मानव समाज में कुछ इन्ही गुणों के सहारे जीना चाह रहे हैं। रोक – टोक, नियम – धर्म कुछ चाहते ही नहीं है बस। पूर्ण स्वतंत्रता चाहते हैं।

  • क्या ऐसे मुद्दों पर और शालीनता, सदाचार, मानवता तथा सभ्य व्यवहार पर भी किसी पत्रकार ने बनाया कभी वीडियो? नहीं न? फिर काहे कि सच्ची पत्रकारिता?
  • सब अपने – अपने नम्बर बनाने वाली बात है। राजनैतिक पार्टियां तो वोट के लिए नौटंकी करती ही थी पर अब देश के नामी गिरामी पत्रकार भी यूं ही खेमों में बांट कर रह गए हैं।
  • एक खेमा भाजपा का गुण गाता है तो दूसरा भाजपा विरोधी दलों का। मैं यह नहीं कहूंगा कि मीडिया के संचालक या पत्रकार इनके हाथों बिक गए हैं। बल्कि मैं यह कहूंगा कि यह बदलते दौर की विडम्बना है जो हर इन्सान खुद को और अपनी बात को ही ठीक समझने लगे हैं।

समाज के पुराने नीति – नियमों को कोरा पाखण्ड और कोरी कल्पना सिद्ध करने पर उतारू है। मैं धीरेंद्र शास्त्री का न पक्षधर हूं और न ही किसी और धर्म नेता के पक्ष में और खिलाफ में हूं।

  • आज हिन्दी की क्या दुर्दशा है आजाद भारत में? क्या हिन्दी भारत की राष्ट्र भाषा नहीं होनी चाहिए? कौन पत्रकार इस मुद्दे को उठाता है? कौन इस बात पर वीडियो बनाता है?
  • समाचार की भारत में अधिकतर भाषा हिन्दी। नेताओं की वोट मांगने की भारत में सर्वाधिक नहीं बल्कि 100 प्रतिशत भाषा हिन्दी या उसकी उप भाषाएं (जब चुनाव जीत लिए तो फिर तो लग गए अंग्रेजी बोलने)।
  • फिल्मों की अधिकतर भाषा हिन्दी या हिन्दी की उप भाषाएं। फिर हिन्दी हिंदुस्तान की राष्ट्र भाषा क्यों नहीं?
  • क्यों अंग्रेजी को सर्वाधिक महत्व हर कार्यालय, न्यायालय या सरकारी संप्रेषण और उच्च शिक्षा भाषा माध्यम में दिया जा रहा है? क्यों हम अंग्रेजी को भारत की अघोषित राष्ट्र भाषा बनाने पर तुले हैं?
  • हमारी मत मारी गई है शायद। अंग्रेज भारत से कब के चले गए हैं पर हम आज भी बोलचाल, खान पान और रहन सहन की दृष्टि से उनकी गुलामी मानसिक रूप से कर रहे हैं।
  • मानना पड़ेगा कि मैकाले की बुद्धि सच में ही चालाक और तेज थी। यूं तो सभी राजनैतिक दल कहते हैं कि हमने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। पर किस लिए?
  • उन्ही के पदचिन्हों पर तो तुम सभी दल दशकों से राज कर रहे हैं। कौन सा परिवर्तन लाया है तुमने? वही जाति धर्म के नाम पर फूट डालो और शासन करो की भ्रष्ट राजनीति।
  • असली पत्रकार वही है जो अपने राष्ट्र, संस्कृति और सभ्यता को सुरक्षित रखने के लिए समाज को और युवा पीढ़ी को सचेत करेगा।

जनता के सामने सरकारों, अधिकारियों, व्यापारियों, भ्रष्टाचारियों और धर्म नेताओं तथा संस्कृति और सभ्यता के साथ छेड़खानी करने वालों का सच लाने का काम करने वाला पत्रकार सही मायने में सच्चा पत्रकार है। खैर छोड़िए। शायद मैं गलत हूं। क्योंकि मैंने कहा कि आज सभी को यह लगता है कि मैं जो कह रहा हूं या जो सोच रहा हूं, वही ठीक है। यह सिद्धांत मुझ पर भी तो लागू होता है।

पर यह सार्भौमिक सत्य है कि किसी भी राष्ट्र की सभ्यता और संस्कृति की सुरक्षा करना उस राष्ट्र के शासकों – प्रशासकों से कहीं ज्यादा उस राष्ट्र के बुद्धिजीवियों का काम होता है। क्योंकि बड़े यानी बुद्धिजीवी और जन आदर्श लोग जो व्यवहार करते हैं राष्ट्र के सामान्य जन उसी का आचरण करते हैं। इस बात की पुष्टि श्री कृष्ण जी भी गीता में कर चुके है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हम आज समाज को मानव समाज नहीं बल्कि पढ़ा लिखा आदि मानव समाज बनाने पर तुले हैं। फर्क ये हैं कि आदिमानव कच्चा मांस खाता था और हम पक्का। वे पेड़ – पौधे की छाल से निज गुप्तांगों को ढकते थे और हम बिकनी और ब्रा से ढक रहे हैं। वे अपने लिए जंगलों में पूर्ण स्वतंत्र हो कर मनमाफिक तरीके से अपनी – अपनी शक्ति के बल पर जीते थे और हम आज मानव समाज में कुछ इन्ही गुणों के सहारे जीना चाह रहे हैं। रोक – टोक, नियम – धर्म कुछ चाहते ही नहीं है बस। पूर्ण स्वतंत्रता चाहते हैं।

—————

यह लेख (सनातन, मीडिया और धीरेंद्र शास्त्री पर बवाल।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: Hindi Essay on Moral, Ruckus on Sanatan media and Dhirendra Shastri, Sanatan media and Dhirendra Shastri, आज का समाज और नैतिक मूल्य पर निबंध, आज हिन्दी की क्या दुर्दशा है आजाद भारत में?, मानव और समाज पर निबंध - निबंध लेखन | Essay in Hindi | Nibandh, सनातन मीडिया और धीरेंद्र शास्त्री पर बवाल - हेमराज ठाकुर, समाज के ऊपर निबंध | Essay On Society In Hindi, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की रचनाएँ

मेरे वतन की।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mere Vatan Ki | मेरे वतन की।

मेरे वतन की माटी की खुशबू, सुबह – शाम जिसे जब आती है।
मन हो उठता है बाग – बाग सा, रूह होती तब मदमाती है।

यह भक्ति – मुक्ति की पावन धरा है, राम – कृष्ण को जनाती है।
गंगा – यमुनी तहजीबों को, यह भूमि खुद पर ही तो बहाती है।

धर्म अनेक यहां नाना भाषाएं, कई कुल कुनबे, कई जाति है।
सीधा सादा मानुष यहां का, विश्व पटल पर जिसकी ख्याति है।

दादुर, म्यूर, पपिहरा के शोर और कोयल काली मीठा जब गाती है।
भारत देश की धरती सचमुच, हर्षित हो फूली न तब समाती है।

शीतल पवन जब हवा के झोंको से, धूल धारा से अम्बर में उड़ाती है।
यूं लगता है मानो भारत की भूमि, मस्ती में होली का पर्व मनाती है।

रिमझिम बारिश की शीतल बूंदें, सिंचित करती यहां की जब माटी है।
उग आती है तब नाना फसलें, भारत की जनता उन्हे तब खाती है।

छा जाए कभी संकट के बादल तो, वीर बिरादरी सर अपना जब चढ़ाती है।
बुंदेले हर बोलों की भांति फिर गौरव गाथा, जनता उनकी तब गाती है।

प्रेम करुणा की प्रवाहक यह भूमि, हमेशा विश्व में शान्ति ही चाहती है।
नाहक इसको छेड़े जो कोई, फिर तो दुश्मन की ईंट से ईंट बजाती है।

जय बोलो भाई जय बोलो सब, मां भारती के पावन आंचल की।
जय बोलो भाई जय बोलो सब, उतर, दक्षिण, पश्चिम और पूर्वांचल की।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — धर धरा,धरती, वसुंधरा, भारत भूमि। ऐसी सबकी प्यारी, भारत भूमि। ॠषी मुनियों, संतो तपस्वीयों की तपोभूमि। ऐसी सबकी, प्यारी भारत भूमि। भारत की धरती, खेत, पहाड़, जंगल, झरने आदि तो उसके अंग हैं। हालांकि, वास्तव में भारतमाता तो भारत की सम्पूर्ण जनता ही हैं, जो पूरे देश में बसी हुई हैं। यह मातृभूमि हमारी जन्मभूमि है, अगर यह नहीं तो मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं होता। भारतभूमि की अनोखी सुंदरता को निहारने के लिए पर्यटक दूर देशो से आते है। मातृभूमि के साहित्य और संस्कृति पर ही हमारे संस्कार निर्भर करते हैं। मातृभूमि स्वर्ग के समान है और इसकी तुलना किसी अन्य स्थान से नहीं की जा सकती है। भारत को ‘माता’ कहकर संबोधित करने का श्रेय बंगला लेखक किरण चंद्र बनर्जी को भी जाता है। 1873 में इनके नाटक ‘भारत-माता’ में भारत के लिए ‘माता’ शब्द का प्रयोग किया गया था। आज़ादी से पहले बंगाल में दुर्गा पूजा लोगों को एकजुट करने और स्वराज (आजादी) पर चर्चा करने का एक माध्यम बनी हुई थी। भारत को मातृदेवी के रूप में चित्रित करके भारत माता या ‘भारतम्बा’ कहा जाता है। भारतमाता को प्राय नारंगी रंग की साड़ी पहने, हाथ में तिरंगा ध्वज लिये हुए चित्रित किया जाता है तथा साथ में सिंह होता है। जिन्होंने भी भारत माता के लिए अपनी जान न्योक्षावर की वो मर कर भी अमर हो गए। आजादी के समय भारत माता के लिए अपनी जान कुर्बान करने की लिए वीरों ने एक पल भी नहीं सोचा।

—————

यह कविता (मेरे वतन की।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur poems, kavi hemraj thakur poems, भारत देश पर कविता, भारत पर देश भक्ति की कविता, भारत पुण्यभूमि यह - कविता, भारत भूमि, भारत भूमि पर कविता, भारत माता पर कविता, मेरे वतन की, मेरे वतन की - हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं

सैन्य कार्रवाई।

Kmsraj51 की कलम से…..

Military Action | सैन्य कार्रवाई।

उत्तुंग शिखर नीरव हिमालय की वादियां,
भय खाकर कोलाहल से घबराती है।
ये टोली दर टोली भीड़ उमड़ती,
हिमालय में क्या करने आती है?

सरहदी सीमाओं को आज सजाने,
सैन्य टुकड़ियां धड़ाधड़ जाती है।
रोम – रोम में उनके रंगत निखरी,
स्वधर्म – हर्ष गर्व से चौड़ी छाती है।

सैनिक कहता दूसरे से प्रियवर,
चल, मां भारती हमें बुलाती है।
शौर्य सिमटता कदमों में उनके,
चंचल चालें तो है ही मदमती है।

मदहोश है ऐसे देश प्रेम से,
मानों, मित्र विवाह के बराती है।
गूंज उठती है घाटियां तब जब,
आवाजें उनकी झुंझलाती है।

थरराती है रूहें अरी की,
बुद्धि भी विक्षिप्त सी हो जाती है।
सीना ठोक जब वीर जवानों की ,
गर्जना रौरव – रौद्र मचाती है।

लहलाती श्यामल फैसले जैसे ,
मौसम के साथ, खेतों में उग आती है।
है वही नजारा सीमा पे आज तो,
यह भव्य भारत देश की माटी है।

लहू से सींचते वीर शहीद जब,
यह नए वीर तब उगाती है।
हिम्मत की ऊंचाई के आगे उनकी,
आज, बौनी हिमालय की घाटी है।

चट्टानी वक्ष, भुजदण्ड फौलादी,
हर इरादे पक्के और दिमागी है।
एक इंच न देंगे लूटने उनको,
सागर की तलहटी, चाहे गलवान की वादी है।

वे अपने देश में आजाद रहे,
हमें अपने देश की आजादी है।
आंख उठाने की जरूरत मत करना,
फिर तो हृदय विदारक बर्बादी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हमारी सेना विशाल और सशक्त है। जब भारतीय सेना वर्दी में हथियारों को लिए कदम से कदम मिलाकर एक साथ सीमा की ओर चलती है तो यह हमारे भारत की ताकत को दर्शाती हैं। भारतीय सेना देश की सीमाओं को सुरक्षित करके देश के भीतर शांति और सुरक्षा बनाये रखती है। भारत सरकार और उसके प्रत्येक भाग की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सेना सदैव तत्पर रहती है। भारत सरकार को ताकत हमारी सेना के कारण ही मिलती है। भारतीय सेना कर्मी सभी प्रकार की साहसिक गतिविधियों में हमेशा आगे रहे हैं। साहसिक कार्य मुख्य रूप से सैन्य प्रशिक्षण का एक अनिवार्य हिस्सा है। यह इच्छाशक्ति, दृढ़ संकल्प, साहस और देश प्रेम भारत माता के सेवा का जूनून व ज़ज्बा है हर सैनिक के रगो में, जो उन्हें सदैव ही ऊर्जावान बनाये रखता है, चाहे गर्मी हो, बारिश हो या फिर सर्दी हो। भारतीय थल सेना का कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की एकता सुनिश्चित करना, राष्ट्र को बाहरी आक्रमण और आंतरिक खतरों से बचाना और अपनी सीमाओं पर शांति और सुरक्षा बनाए रखना है।

—————

यह कविता (सैन्य कार्रवाई।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur poems, पराक्रम पर कविता, भारतीय सेना के कार्य, वीर जवानों पर कविता, सेना के शौर्य पर कविता, सैन्य कार्रवाई, सैन्य कार्रवाई - हेमराज ठाकुर, सैन्य कार्रवाई पर कविता, हमारे सैनिक पर कविता, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं

बादल।

Kmsraj51 की कलम से…..

Clouds | बादल।

हृदय क्षितिज में घर्राते बादल,
गर्जना छोड़, बरसात बरसा।
तृषित धारा के रोम-रोम की,
आज प्रिये तू , प्यास बुझा।

सुकून मिले अब विरहिणी को,
और न इसको यूं ही तड़पा।
सोया सपना अलसाई आंखें,
निज नेह से प्रिय तू , अब तो जगा।

है यौवन की पीड़ा, सावन- भादो की क्रीड़ा,
दादुर, मोर और पपीहरा के शोर।
मानस पटल पर आग लगी है,
दिल को लूट ले गया कोई, श्यामरा चोर।

कटे न कटती है रातें काली,
दिन, न सांझ, न कटती है भोर।
प्रेम की लगी है प्यास प्रिये अब,
रूप से रूह का रुख, करो इस और।

चंद लम्हों के मिलन से क्या होगा?
नीर नीरद का बह जाने दे।
मन की बातें मन मांझ रहे न,
रोक न मुझे, सब कह जाने दे।

दिन चार की है ये जिंदगानी सबकी,
कहने को हैं प्रिये, बहुतेरी बातें।
इक बार गुजरे दिन, जिंदगी के तो,
फिर बहुर न लौट के आते।

है जीवन वही जो दिल से जिया,
फिर न पछताना कि, अभी कुछ न किया।
आज माहौल प्रलय की मानिंद बना है,
कुछ हमने करा है, कुछ कुदरत ने किया है।

रह न जाए कुछ अधूरी बातें,
जीवन प्रिये अब थोड़ा है।
घनघोर घटा कुछ यूं न बरसाना,
जिन्होंने, सब्र – बांध ही तोड़ा है।

हो जाने दे रिमझिम बारिश,
बरसात तो प्रिय अब आनी है।
बिरह बदरी बन घुमड़ रहा है,
आत्म निवेदन – नेह का पानी है।

घनश्याम पिया के संदेशे ले – ले,
आती नीरद की जलधारा है।
कब तक, विरहिणी वेदना झेले?
यह जीवन कितना प्यारा है?

भीग जाने दे दिल के दरी खाने,
कलेजा भी ठंडा हो जाए।
मिल जाने दे नदी समंद में,
एक दूजे में प्रिये बस खो जाने दे।

सिर्फ गरजते मत रहना रे ओ बादल,
बरसात तो अब तू आने दे।
सदियों पुराना बिछड़ा यार,
रूह को अब तो तू पाने दे।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्यार एक खूबसूरत एहसास है। एक व्यक्ति जिसके पास प्यार भरा दिल है, वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता है। वह हर किसी से प्यार करता है जैसे हम जो देते हैं वह हमें मिलता है। इसलिए, अगर हम प्यार देते हैं तो हमें बदले में प्यार मिलता है और यह हमारे जीवन को सुंदर बनाने की शक्ति रखता है। सच्चा प्यार रूह का रूह से होता है, और सच्चे प्यार में समय का बंधन नहीं होता है। सच्चे प्यार में दो जिस्म एक जान की कहानी होती है।

—————

यह कविता (बादल।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Clouds, hemraj thakur, hemraj thakur poems, kavi hemraj thakur poems, Poem on Varsha Ritu in Hindi, Poems on Rain in Hindi, काले बादल पर कविता, बादल, बादल - हेमराज ठाकुर, बादल और बारिश पर कविता, बारिश पर कविता हिंदी में, वर्षा ऋतु पर कविता, सच्चे प्यार पर कविता, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं

योग।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog | योग।

अण्ड – ब्रह्माण्ड की महा विद्या है, योग जिसका नाम है।
यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान है॥
समाधि जिसकी चर्म अवस्था, जिसमें तत्व का ज्ञान है।
योग सिखाए जीव को भक्ति – मुक्ति और ब्रह्म ज्ञान है॥

मिथ्या जगत और ब्रह्म सत्य है, यही तो योग का सार है।
परम ब्रह्म ही शाश्वत है इस जग में, नश्वर यह संसार है॥
पीढ़ी दर पीढ़ी ले आना, इसे, यह गुरुओं का उपकार है।
निरोगी काया प्रभु की छाया सत है, बाकी सब विकार है॥

स्थूल जगत में रमता है भोगी, सूक्ष्म से योगी को प्यार है।
मैं और मेरा प्रभुत्व लालसा, यह तो नीरा ही अहंकार है॥
योगी को प्यार अंतर्जागत है, भोगी को तो बाह्य संसार है।
योग जगत की परा विद्या, इस पर ज्ञानी का अधिकार है॥

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आओ हम सब मिलकर, योग दिवस मनायें। पद्मासन हो वज्रासन हो, या हो चकरा आसन, ध्यानमग्न हो बैठ जायें, बिना करे प्राशन। आओ हम सब मिलकर योग दिवस मनायें। हर रोज़ सुबह के समय योग करने के फायदे अनमोल है – यह हमारी पहली सांस को पुन: चक्रित करता है। योग का अभ्यास करने से शरीर किक-स्टार्ट होता है। ह्रदय रोग से बचाव करता है योग। दिमाग सदैव ही रहता है एक्टिव। बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता। योग के द्वारा सांसों को साध कर परमानन्द की अनुभूति किया जा सकता है। तन और मन को निरोग रखने के लिए प्रतिदिन योग करे।

—————

यह कविता (योग।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur poems, kavi hemraj thakur poems, Yoga Par Best Kavita, योग, योग - हेमराज ठाकुर, योग के विषय पर बेहतरीन दोहा, योग दिवस पर कविता, योग दिवस पर सुंदर कविता, योग पर कविता, योग पर कुछ दोहे, योग पर दोहे व स्लोगन | Yog Par Dohe Aur Slogan, विश्व योग दिवस पर ये हैं चुनिंदा शेर और कविताएं, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर की कविताएं, हेमराज ठाकुर जी की कविताएं

प्रेम अधूरा ही है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Prem Adhoora Hee Hai | प्रेम अधूरा ही है।

प्रेम अन्त अभिलाषा है जीवन की,
पर मिला वह सबको अधूरा ही है।
राम – कृष्ण की कहानी को सुन लो,
उनमें भी कौन सा वह पूरा ही है?

यह रही दास्तां यूं ही है जीवन की,
हर युग में और हर जिंदगानी में।
राधा – कृष्ण का मेल हुआ कहां?
राम – सिया भी बिछुड़े नादानी में।

हुआ मुक्कमल न स्वपन किसी का,
प्रेम की चाहें ही सबकी अधूरी रही।
भले ही प्रेयसी राधा थी या सीता थी,
अधूरेपन की पीड़ा तो है सबने सही।

मूर्तिमान हुआ प्रेम किसका कहां है?
जिसकी अभिलाषा हम सब करते हैं।
अधूरा सा मिला है जो भी हम सबको,
उसे खोने से भी सब कितना डरते हैं?

जी लेते हैं जिंदगी हम पूरी हर रिश्तों में,
पर हर रिश्ते में देखे तो प्रेम अधूरा ही है।
कई – कई विवाहों से भी कहां प्यास बुझी?
अवतारों के जीवन में भी प्रेम कहां पूरा है?

जिन्दगी जद्दोजहद है प्रेम और वासनाओं की,
लोग सकून कहां किसी को यहां लेने देते हैं?
यह संसार तो है बीहड़ घाटी नित कर्मों की,
यहां अवतारों की भी परीक्षा लोग ले लेते हैं।

यह सच है कि प्रेम जरूरत है हर जीवन की,
भाषा प्रेम की पशु – पक्षी को भी समझ आती है।
जिन्दगी के तमाम उम्र के सिलसिले में हर सम्भव,
प्रेम के अधूरेपन का दर्द हमेशा सबको सताता है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सच्चा प्रेम एक गहरा और निःस्वार्थिक भावना है जो दो व्यक्तियों के बीच संबंध को बांधती है। यह एक आत्मिक और उदार बन्धन है जो अपने आप को समर्पित करता है और एक-दूसरे के हित में संयम बनाए रखता है। सच्चा प्रेम अपने आप को व्यक्त करने और स्वयं को स्वीकार करने की क्षमता वाला होता है। सच्चा प्रेम कठिनाइयों, आपत्तियों और चुनौतियों के बावजूद टिकता है। यह दूसरे व्यक्ति को निर्मल रूप से स्वीकार करता है, उनकी गलतियों और कमियों के बावजूद उन्हें सच्चा प्यार करता है। सच्चा प्रेम समर्पित, आदर्शवादी, और सहानुभूतिपूर्ण होता है। सच्चा प्रेम आपके साथी की सफलता, खुशी और प्रगति के लिए चिंतित रहता है और उनके सपनों और उच्चतम OUTPUT की प्रोत्साहना करता है। यह समर्पण, विश्वास, सम्मान, संयम और सम्पूर्ण समर्पण का एक गहरा बंधन होता है। सच्चा प्रेम आपके और आपके साथी के बीच एक संतुलित और आनंदमय संबंध स्थापित करता है। यह सच है कि प्रेम जरूरत है हर जीवन की, भाषा प्रेम की पशु – पक्षी को भी समझ आती है। जिन्दगी के तमाम उम्र के सिलसिले में हर सम्भव, प्रेम के अधूरेपन का दर्द हमेशा सबको सताता है। जब भी करो प्रेम तो सच्चा प्रेम ही करो, वरना दिखावे के प्रेम करने का कोई फायदा नहीं है।

—————

यह कविता (प्रेम अधूरा ही है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur ki kavitaye, hemraj thakur poems, Love Poem in Hindi, Love Poem In Hindi Language, प्यार पर हिंदी कविता, प्रेम अधूरा ही है, प्रेम अधूरा ही है - हेमराज ठाकुर, प्रेम ही जीवन की पूर्णता है, प्रेम ही जीवन है, शुद्ध प्रेम क्या है?, सच्चा प्रेम कैसे होता है?, सच्चे प्यार पर कविता - Poetry In Hindi On Love, सच्चे प्रेम पर कविता, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर जी की कविताएं

कैसे संभव है देश का विकास?

Kmsraj51 की कलम से…..

Kaise Sambhav Hai Desh Ka Vikas | कैसे संभव है देश का विकास?

⇒ चिन्तित और उद्विग्न मानस ने…

सामाजिक विषमताओं और विकृतियों को लेकर चिन्तित और उद्विग्न मानस ने जब मुझे रात्रि के तीसरे पहर कचोटा तो मुझसे रहा नहीं गया। एकाएक आंखें खुली और मैं जाग उठा। बुद्धि के दर्पण में मानस की विकल शक्ल को झांका तो एक अजीब सी छटपटाहट और बेचैनी सी देखी। अंतःकरण में अनायास ही कई सारे प्रश्न एक साथ आसमानी बिजली की तरह कौंधे, जिन्हे व्यवस्थित करना मेरे लिए किसी जंग जीतने से कम नहीं था। फिर भी बिस्तर पर लेटे – लेटे हर एक उमड़ते हुए विचार से मानसिक युद्ध करता रहा और जैसा भी हुआ वैसा व्यवस्थापन अपने विचारों का करता रहा। अब इस मानसिक युद्ध में कौन जीता? मैं या मेरे अन्दर उमड़ी बदलते समाज की मान्यताएं? मेरे लिए कहना बहुत ही मुश्किल है पर जैसा भी हुआ, वह तुरन्त एक लेख लिख कर अपने आंतरिक द्वंद्व से मुक्ति पाने के लिए प्रयास करना ही मेरे पास एकमात्र उपाय था।

⇒ शिक्षा बौद्धिक विकास के लिए … ‘या’ … आज की शिक्षा बौद्धिक विलास का साधन…

प्रश्न समाज के बदलते विचारों और नवीन भावबोधों को लेकर खड़े हुए थे और खत्म एक लेख का रूप ले कर हुए। अचानक रात्रि के तृतीय पहर में निद्रा में विचार कौंधा कि आज समाज क्यों इतना खुदगर्ज और असंस्कृत होता जा रहा है? एक शिक्षक हूं तो जाहिर सी बात है कि पहले पहल तो सोच शिक्षा और शिक्षक के इर्द गिर्द ही इस मामले को ले कर दौड़ेगी। इसी दिशा में पहला विचार आया कि हमारे यहां तो शिक्षा बौद्धिक विकास के लिए दी जाती थी और आज शिक्षा बौद्धिक विलास का साधन बनती जा रही है। कहीं यह तो सामाजिक मान्यताओं के विकृतिकरण का कारण नहीं है?

⇒ आज स्कूलों – कालेजों में छात्र नशे की जद में और इंटरनेट की गिरफत में…

आज स्कूलों कालेजों में छात्र नशे की जद में और इंटरनेट की गिरफत में आ गए हैं, जो पुस्तकों को पढ़ना ही नहीं चाहते हैं। जो थोड़े बहुत पढ़ते भी हैं, वे भी मात्र परीक्षा पास करने के लिए और अच्छे अंक लेने के लिए या फिर सरकारी नौकरी पाने के लिए पढ़ते हैं।

बाकी पुस्तकों को विद्या अध्ययन के लिए पढ़ने का चलन आज पूर्ण रूप से खत्म ही हो गया है। खैर विद्यार्थियों की छोड़िए। वे तो नादान होते हैं। उन्हें तो अभी शिक्षा, विद्या, अविद्या, पारा विद्या, महा विद्या और साक्षरता आदि शब्दों का शब्दार्थ भी ठीक से ज्ञात नहीं है शायद। पर बड़े – बड़े स्कूलों और कॉलेजों में तैनात अध्यापकों और प्रवक्ताओं तथा प्राध्यापकों का भी इस सन्दर्भ में मिजाज कुछ अच्छा नहीं है। इनमें से अधिकांश कभी कृपटो करेंसी तो कभी ऑन लाइन आई पी एल मैच में अपनी टीम लगा कर पैसों के पीछे स्कूलों – कालेजों के कर्तव्य काल में भी भागे हैं तो बाकी शेष बचे सुबह – शाम के समय में अपनी मस्ती में आमादा है।

अब बताइए कि वह भी पुस्तकालयों की बड़ी – बड़ी अलमारियों में पड़ी और धूल फांक रही अच्छे से अच्छी पुस्तकों को कब पढ़ेगा? जिनमें सामाजिक व्यवस्थापन के अनेकानेक मानवीय पहलू लिखे पड़े हैं। उनमें लिखा पड़ा है मानवीय मूल्यों का विवरण, जो मानव को पशु पक्षी – जगत से अलग प्राणी बने रहने की सीख देता है। उनमें लिखा पड़ा है हर विषय का बारीक से बारीक ज्ञान, जो हर अध्यापक को उसके अध्यापन के लिए और मजबूत और तर्कसंगत करता है। पर नहीं, आज के अध्यापकों और छात्रों ने कसम खा रखी है कि पुस्तकालय का दरवाजा तक नहीं देखेंगे। उन्होंने बुद्धि के विलास के लिए गूगल को गुरु जरूर बनाया है पर बुद्धि के विकास के सारे दरवाजे बन्द करने पर तुले हैं। हम सब जानते हैं कि इंटरनेट में आजकल क्या – क्या चलता है और उसके परिणाम क्या हो रहे हैं? बच्चे भी सच्चे हैं।

⇒ गुड में जहर से कम नहीं …

जब गुरु जी हर बात गूगल से देखते हैं तो बच्चे क्यों न देखें? बच्चे तो अध्यापकों को ही अपना आदर्श मानते हैं। और तो और परीक्षा तथा परिणाम के समय में देखे तो ये गुरु चेले अब्बल करते हुए पाए जाते हैं। सौ में से नब्बे किसी के छियानवे फ़ीसदी अंक आते हैं। पूछे तो ज्ञान धेला भी नहीं। गुरु जी को रिजल्ट देना होता है। वह ऑप्शनल प्रश्न गूगल से देख कर परीक्षा में बच्चों को करवा देता है और बच्चे बिन पढ़े ही गुरु जी की कृपा से अच्छे अंकों से पास हो जाते हैं। वे भी गुरु जी के कायल हो जाते हैं। वाह! क्या अच्छे गुरु जी या मैडम जी है हमारे?

बेचारे नादान ये नहीं समझते हैं कि यह सब गुड में जहर से कम नहीं है। गुरु जी काम चोरी के चलते या रिजल्ट देने के चलते और छात्र अच्छे अंक प्राप्त करने के चलते साल के अन्त में इन्ही हथकंडों को अपनाते हैं। अपनाए भी कैसे न? जब साल भर दोनों ने मस्ती ही मारी है और बौद्धिक विलास ही किया है तो फिर समाज में दोनों को अच्छा भी तो अपने को दिखाना है।

अच्छे अंक जब आते हैं तो मां – बाप भी बच्चे से खुश हो जाते हैं तथा गुरु जी के भी कायल हो जाते हैं। वाह! क्या कमाल का पढ़ाते हैं गुरु जी? मेरे बच्चे ने सौ में से छियानवे फ़ीसदी अंक प्राप्त किए हैं। बच्चे की प्रशंसा करते – करते भी नहीं थकते। हमारा बेटा – बेटी भी तो पढ़ाई में तेज है जी। आधी – आधी रात तक नेट में तैयारी कर रहा होता है। अब वह क्या दिखता है ? इसका किसी को कोई खबर नहीं। बस इसी बिगाड़ के चलते बच्चों को और प्रोत्साहन मिलता है। वह अपनी एक दो जिद्दें मां – बाप से और पूरी करवाता है।

फिर एक दिन जब वह बच्चा स्कूल – कालेजों से बाहर आता है तो वह संस्कार हीन और दिशाहीन हो कर समाज में आता है। यदि कहीं जुगाड़बाजी से वह सरकारी सेवा में फिट हो भी जाता है तो समझ लो कि वह किस स्तर की सरकारी सेवा देगा? अब जब प्राप्तांको के आधार पर ही सरकारी नौकरियां दी जाएगी तो नौकरी तो मिल ही जाएगी। फिर बोलो कि भ्रष्टाचार की जड़ कहां है? मैं इन्टरनेट का विरोधी नहीं हूं। विरोधी हूं उसके गलत इस्तेमाल का। यदि सच में शिक्षा के लिए अध्यापकों और बच्चों द्वारा उसका प्रयोग किया जाए तो वह शिक्षा की दशा और दिशा ही बदल देगा।

इधर सरकारें और सरकारों के नीतिकार हैं कि बच्चों को प्रताड़ित करने के अधिकार से अध्यापकों को वंचित करने पर तुले हैं। इससे जो थोड़े बहुत अध्यापक संस्कार और व्यवहार की शिक्षा के पक्षधर है भी, उनके हाथ – पांव भी बंधे पड़े हैं। वे भी देखा देखी में खुद को कुढ़ा हुआ महसूस करते हैं और व्यवस्था का हिस्सा बना लेते हैं। बस अब तो अध्यापक ने अपना मक़सद स्कूल जाना, हाजरी लगाना तथा अपने विषय का पीरियड लगाना ही तय किया है। खाली पीरियड में वह भी नेट में या तो गेम खेलता हुआ मिलेगा या फिर कुछ और देखता हुआ मस्त रहता है।

⇒ पुस्तकालयों का सदुपयोग नहीं हो रहा है…

पुस्तकालयों की स्थापना स्कूलों में यूं ही जाया जा रही है। न अध्यापक पढ़ता है और न छात्र। विषय विशेषज्ञ होने के बावजूद भी कई ऐसे मद होते हैं, जो पुस्तकों को पढ़ने और सामूहिक चर्चा – परिचर्चा से और स्पष्ट होते हैं। पर आज ऐसी बात करना ही मूर्खता की निशानी हो गई है। किताबे यदि पढ़ी जाती है तो मात्र नौकरी लगने के लिए।बस एक बार नौकरी मिल गई तो फिर तो हर व्यक्ति सर्वज्ञ हो जाता है। नौकरी सरकारी हो या निजी। हर व्यक्ति आज वेतन तो पूरा चाहता है पर काम करना ही नहीं चाहता है। इस नकारात्मकता का कारण आखिर क्या है?

तभी तो कहता हूं कि — “शिक्षा योग का विषय है भोग का नहीं।”
“शिक्षा बौद्धिक विकास का विषय है बौद्धिक विलास का नहीं।”
“शिक्षा आत्मरंजन का साधन है मनोरंजन का नहीं।”
“शिक्षा नैतिकता और चरित्र निर्माण का साधन है विकृतता का नहीं।”
“शिक्षा अनुशासन का विषय है शासन – प्रशासन का नहीं।”
यह बात समूचे विश्व को समझनी चाहिए।

मेरा मानना है कि स्कूल वह निर्माण संस्थान है, जहां भविष्य के समाज के निर्माण के लिए शिक्षार्थी रूपी सामग्री तैयार की जाती है। यदि उस सामग्री के निर्माण में ही गड़बड़ हो जाएगी, तो समाज रूपी इमारत की मजबूती का भी प्रश्न ही पैदा नहीं होता है। यानी सामग्री निर्माता गुरु का नैतिक और चारित्रिक रूप से उन्नत होना और अत्यधिक भौतिकता से दूर रहना जरूरी है।

⇒ शिक्षा व्यवस्था में संस्कार जरूरी है…

“शिक्षा व्यवस्था में संस्कार शिक्षा का जोड़ना जरूरी है। शिक्षकों को छात्रों को रोकने – टोकने के अधिकार देना जरूरी है। अभिभावकों को अंकों के आंकड़ों से बाहर ला कर विद्या और शिक्षा के साथ – साथ राष्ट्रीयता और सामाजिकता का बोध कराना जरूरी है।” “वरना भविष्य का समाज पशु समाज से भी भयानक होगा।” रिश्तों की अहमियत नहीं होगी। पिता – पुत्र में, मां – बेटी में, भाई – बहन में, पति -पत्नी में और पड़ोसी – पड़ोसी में आत्मीयता नहीं रहेगी। सभी अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए और अपनी भौतिक चाह को पूरा करने के लिए कभी भी कुछ भी करने को आमादा रहेगें। कोई मरने मारने से नहीं डरेगा।

इसलिए देश की शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की आवश्यकता वर्तमान में बहुत ज्यादा हो गई है। इसके चलते सरकारों को भी स्कूलों कालेजों में राजनीति से नहीं बल्कि समाज नीति से मनोयोग पूर्ण तरीके से काम करना चाहिए। शिक्षा के स्तर को शिक्षक ही उन्नत करेगा। बस सरकारों को यह तय करना है कि शिक्षकों को बिना डराए धमकाए एक उचित व्यवस्था दे कर सामाजिक और राजनीतिक मान – सम्मान दे कर कैसे शिक्षा का उत्थान करने के लिए स्वतन्त्र दायित्व देना है?

प्रश्न यह भी है कि यह दायित्व नकारात्मक, आलसी और लोलुप लोगों के हाथों में भी नहीं जाना चाहिए। “अर्थात — शिक्षा धनार्जन का विषय न बने बल्कि ज्ञानार्जन और संस्कृति तथा सभ्यता की सम्बाहक बनकर सामने आए।” जिस व्यवस्था में रोजगार प्राप्ति की राह के साथ – साथ व्यक्ति विद्या तथा परा ज्ञान की प्राप्ति भी करे। ताकि कल जब वह विद्यार्थी समाज में जाएगा तो एक नेक और संस्कारवान व्यक्ति की भूमिका में जाए।

खैर मैं जानता हूं इस बात को कोई नहीं मानेगा। सभी यही कहेंगे कि हम अपना शत प्रतिशत देते हैं। जो शिक्षा व्यवस्था बनी है वह बिलकुल ठीक है। मुझे ही फटकारेंगे। पर अंदर से सभी यह जानते हैं कि असलियत क्या है? सरकारी नौकरी का वर्तमान में यह हाल हो गया है कि एक बार मिलनी चाहिए बस। फिर तो वह व्यक्ति काम करने को राजी नहीं है। निजी क्षेत्रों में भी डर के चलते काम करते हैं वरना हाल वहां भी कुछ खास अच्छे नहीं है। नैतिकता से काम करने को कोई राजी नहीं है।

होना तो यह चाहिए कि नैतिकता के चलते व्यक्ति ईमानदारी से अपना कार्य करे, जिसकी उसे तनख्वाह मिलती है। तभी वह शिक्षित, सुसंस्कृत और सभ्य है। पर ऐसा कुछ भी नहीं होता है। आजकल सभ्यता और संस्कृति तथा शिक्षा की पहचान सुख-सुविधाएं, रसूख और पैसा हो गया है। शालीनता, विनम्रता, तथा नैतिकता नहीं। समाज की यह बदलती सोच बहुत बड़ी विडम्बना है। यहां पैसों के लिए अपना चरित्र तक बेचने को लोग तैयार है पर मेहनत करने को राजी नहीं है। ऐसे में कैसे संभव है देश का विकास? यह एक चिंतनीय प्रश्न है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हआज समाज क्यों इतना खुदगर्ज और असंस्कृत होता जा रहा है? एक शिक्षक हूं तो जाहिर सी बात है कि पहले पहल तो सोच शिक्षा और शिक्षक के इर्द गिर्द ही इस मामले को ले कर दौड़ेगी। इसी दिशा में पहला विचार आया कि हमारे यहां तो शिक्षा बौद्धिक विकास के लिए दी जाती थी और आज शिक्षा बौद्धिक विलास का साधन बनती जा रही है। कहीं यह तो सामाजिक मान्यताओं के विकृतिकरण का कारण नहीं है? आज स्कूलों कालेजों में छात्र नशे की जद में और इंटरनेट की गिरफत में आ गए हैं, जो पुस्तकों को पढ़ना ही नहीं चाहते हैं। जो थोड़े बहुत पढ़ते भी हैं, वे भी मात्र परीक्षा पास करने के लिए और अच्छे अंक लेने के लिए या फिर सरकारी नौकरी पाने के लिए पढ़ते हैं। बाकी पुस्तकों को विद्या अध्ययन के लिए पढ़ने का चलन आज पूर्ण रूप से खत्म ही हो गया है। नैतिकता के चलते व्यक्ति ईमानदारी से अपना कार्य करे, जिसकी उसे तनख्वाह मिलती है। तभी वह शिक्षित, सुसंस्कृत और सभ्य है। पर ऐसा कुछ भी नहीं होता है। आजकल सभ्यता और संस्कृति तथा शिक्षा की पहचान सुख-सुविधाएं, रसूख और पैसा हो गया है। शालीनता, विनम्रता, तथा नैतिकता नहीं। समाज की यह बदलती सोच बहुत बड़ी विडम्बना है। यहां पैसों के लिए अपना चरित्र तक बेचने को लोग तैयार है पर मेहनत करने को राजी नहीं है। ऐसे में कैसे संभव है देश का विकास? यह एक चिंतनीय प्रश्न है। “शिक्षा धनार्जन का विषय न बने बल्कि ज्ञानार्जन और संस्कृति तथा सभ्यता की सम्बाहक बनकर सामने आए।”

—————

यह लेख (कैसे संभव है देश का विकास?) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिन्दी साहित्य Tagged With: hemraj thakur, hemraj thakur articles, आज के शिक्षक और छात्र पर निबंध हिंदी में, कैसे संभव है देश का विकास?, कैसे संभव है देश का विकास? - हेमराज ठाकुर, बच्चों के विकास में शिक्षक की भूमिका, वर्तमान समाज में शिक्षक की भूमिका, विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में शिक्षक की भूमिका, विद्यार्थी जीवन में शिक्षक का महत्व पर निबंध, व्यक्ति के विकास में शिक्षा की भूमिका, व्यक्तित्व का विकास एवं शिक्षा, शिक्षा की उपयोगिता, शिक्षा में शिक्षक का महत्व, समाज में शिक्षक की भूमिका पर निबंध, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर जी की रचनाएँ

« Previous Page
Next Page »

Primary Sidebar

Recent Posts

  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.