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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Hindi Poems

हिमाचल की राजधानी “शिमला”।

Kmsraj51 की कलम से…..

Himachal Ki Rajdhani Shimla | हिमाचल की राजधानी “शिमला“।

There is a dense shade of green deodar trees here. There are towns all around and many villages located far away. The capital of Himachal is "Shimla".

कोठियों पर कोठियां, बनकर हुई यहां सवार है।
हिमाचल की राजधानी, शिमला का यह बाजार है।

पहाड़ी की टेकरी पर बसा, हुआ यह निर्माण है।
इन्हीं में प्रबन्धित शहर की, आबादी तमाम है।

देवदार के हरे पेड़ों की, बड़ी घनी यहां छांव है।
चारों ओर को कस्बे हैं, दूर दूर बसे कई गांव हैं।

कह रहा है यह पहाड़ अब, कमजोर मेरे पांव है।
रोक दो निर्माण अब मुझ पर, नहीं तो व्यवधान है।

पर शहरीकरण की होड़ में, सुनता इसकी कौन है?
लोग किए जा रहे हैं निर्माण, बेचारा रहता मौन है।

बरसात में चेताता है कभी, “भाई दरकते पहाड़ है।”
अभी भी वक्त है “समझो”, वरना, आगे बड़ा बिगाड़ है।

विकास की अंधेरी दौड़ें में, शहरों की होड़ में इंसान है।
उसे कोई लाख समझाए, भले मकान पर बना मकान है।

कुदरत की पीड़ा न समझेगा, फिर तो उठाना तूफान है।
इंसान को भी समझना चाहिए, कि वह नहीं भगवान है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता प्राकृतिक सुंदरता और अंधाधुंध शहरीकरण के बीच के संघर्ष को दर्शाती है। इसमें शिमला शहर के विस्तार और निर्माण कार्यों के कारण प्राकृतिक संतुलन के बिगड़ने की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। कवि बताते हैं कि शिमला की पहाड़ियों पर लगातार कोठियों और इमारतों का निर्माण हो रहा है, जिससे यह क्षेत्र भौतिक रूप से तो विकसित हो रहा है, लेकिन इसका प्राकृतिक सौंदर्य और संतुलन प्रभावित हो रहा है। देवदार के घने पेड़, कस्बे और दूर-दराज के गांव इस क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाते हैं, लेकिन पहाड़ अब खुद को कमजोर महसूस करने लगे हैं। वे संकेत दे रहे हैं कि अगर यह निर्माण कार्य नहीं रुका, तो भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ जाएगा। बारिश के मौसम में पहाड़ दरकने लगते हैं, यह चेतावनी देता है कि यदि समय रहते समझदारी नहीं दिखाई गई, तो भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। कवि यह संदेश देते हैं कि विकास की अंधी दौड़ में लोग प्रकृति की चेतावनियों को अनदेखा कर रहे हैं। अगर इंसान ने कुदरत की शक्ति को नहीं समझा, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इंसान भगवान नहीं है, इसलिए उसे प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना चाहिए।

—————

यह कविता (हिमाचल की राजधानी “शिमला”।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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खुशी नहीं मिलती।

Kmsraj51 की कलम से…..

Khushi Nahin Milati | खुशी नहीं मिलती।

He who has learnt to be happy, spends his time in joy. Some think of making one into hundred, hundred into thousand. While some yearn for every penny.

खुश रहना जिसने है सीखा।
समय उसका आंनद में है बीता॥

एक से सौ, सौ से हज़ार बनाने की है कोई सोचता।
तो कोई पाई-पाई के लिए है तरसता॥

सुंदर व सबसे न्यारा महल है कोई बनाता।
तो किसी को छत भी नसीब नहीं होता॥

नाना प्रकार के व्यंजन है कोई खाता।
कोई भूखे पेट ही सो जाता॥

शौक से कोई अर्धनग्न है घूमता।
तो कोई बदन ढकने को है तरसता॥

रोटी पचाने को किसी को घूमना है पड़ता।
तो कोई रोटी के लिए दर दर है भटकता॥

कोई माँ बाप का श्रवण कुमार है बनता।
तो कोई इन्हें घर से बाहर है निकालता॥

किसी के पास हजारों का पलंग पर नींद कहाँ।
जिसको नींद वो सो जाता है चाहे हो फुटपाथ या हो खुला आसमां॥

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि इस कविता के माध्यम से जीवन में खुश रहने के महत्व को बताते हैं। वे कहते हैं कि जिसने खुश रहना सीख लिया, उसका जीवन आनंद से भर जाता है।दुनिया में लोगों की आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तिगत परिस्थितियाँ अलग-अलग होती हैं—
    • कोई व्यक्ति धन कमाने और संपत्ति बढ़ाने में लगा रहता है, जबकि कोई बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता है।
    • कोई आलीशान महल बनाता है, जबकि किसी को छत तक नसीब नहीं होती।
    • कोई तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन खाता है, जबकि कोई भूखा सोने को मजबूर होता है।
  • इसी तरह, कोई शौक से आधुनिक वस्त्र पहनता है, जबकि किसी के पास तन ढकने के लिए कपड़े तक नहीं होते। कोई भोजन पचाने के लिए घूमता है, जबकि कोई रोटी के लिए दर-दर भटकता है।परिवार में भी भिन्न परिस्थितियाँ देखने को मिलती हैं—
    • कोई संतान अपने माता-पिता की सेवा करता है, तो कोई उन्हें घर से निकाल देता है।
    • किसी के पास महंगे बिस्तर होते हुए भी नींद नहीं आती, जबकि जिसे सुकून प्राप्त होता है, वह कहीं भी चैन की नींद सो सकता है।

    अंततः, कवि हमें संतोष और खुशी का महत्व समझाने की कोशिश करते हैं, यह दर्शाते हुए कि संपत्ति या संसाधन ही सुख का कारण नहीं होते, बल्कि मन की शांति और संतोष ही सच्चा आनंद देते हैं।

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यह कविता (खुशी नहीं मिलती।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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मैं हूँ जीभ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Main Hoon Jeebh | मैं हूँ जीभ।

I am very soft, I always stay in the mouth, I come out sometimes. I am expert in tasting the taste, I make it clear in a moment.

हूँ बड़ी कोमल मुंह में रहती सदा,
बाहर भी निकलती हूँ यदा कदा।
स्वाद चखने में हूँ माहिर,
पल में कर देती हूँ जाहिर।

शब्दों को हूँ मैं सजाती,
दूसरों तक हूँ पहुंचाती।
कभी जोर से हूँ बोलती,
तो कभी मुंह में ही शब्द हूँ घोलती।

बचपन हो या हो बुढ़ापा,
मुझमें जोर होता है ज्यादा।
शरीर के रोगों को भी हूँ जताती,
दवा भी मुझे छू कर ही जाती।

कष्ट बहुत हूँ देती,
उलजलूल शब्द जब हूँ कहती।
बड़ाई भी होती है तब,
अच्छी बात करती हूँ जब।
नहीं है सम्भालना मुझे आसान,
जिसने सम्भाला बन गया वो महान।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता “जीभ” के गुणों और प्रभावों को दर्शाती है। जीभ एक कोमल अंग है, जो स्वाद चखने में माहिर होती है और शब्दों को सजाकर दूसरों तक पहुंचाती है। यह कभी जोर से बोलती है, तो कभी चुप भी रह जाती है। जीभ का प्रभाव बचपन से बुढ़ापे तक बना रहता है। यह न केवल भोजन का स्वाद पहचानती है, बल्कि शरीर में किसी रोग के संकेत भी देती है। दवाएं भी जीभ के संपर्क में आने के बाद ही शरीर में असर करती हैं। यहअच्छे और बुरे दोनों तरह के शब्दों का माध्यम बन सकती है। जब यह गलत शब्द कहती है, तो कष्ट देती है, लेकिन जब यह अच्छी बातें बोलती है, तो प्रशंसा भी पाती है। कवि अंत में कहते हैं कि जीभ को नियंत्रित रखना आसान नहीं होता, और जो व्यक्ति इसे संभालना सीख लेता है, वही सच्चे अर्थों में महान बनता है।

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यह कविता (मैं हूँ जीभ।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gyan Ki Jyot Jaga De Maa | ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

Mother Hansvahini is requested to fill his empty dictionary and remove the darkness of ignorance.

हे मां शारदे,
वीणावादिनी मां,
ज्ञान की देवी,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां,
मैं हूं तुच्छ अज्ञानी,
मुझे ज्ञान का मार्ग दिखा दे मां।

हे मां हंसवाहिनी,
अंधकार निवारणी,
मेरा शब्दकोश है खाली,
भर दे तू इसे बजाकर ताली,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां बागेश्वरी,
तू बजाती सुरों की बांसुरी,
मेरे कलम की लेखनी को दे धार,
लेखनी आपसे, आप सबके द्वार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां भारती,
ज्ञान सबमें तू ही भरती,
तमस दूर हो हृदय हमारे,
आशा और विश्वास तुम्हारे,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां ज्ञानदा,
आंखों पर पड़े न मेरे परदा,
मां मेरी कविता में तू,
भर दे वीणा की झंकार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां वाग्देवी,
मुझे दे सद्बुद्धि,
भेंट करूं तुझे कलम पुष्प से,
गूंथे हुए सब हार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
मां ज्ञान की ज्योत जगा देना।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता मां सरस्वती की वंदना करते हुए ज्ञान और बुद्धि की प्रार्थना करती है। कवि मां शारदा से निवेदन करता है कि वह अपनी वीणा के मधुर स्वर से उसे ज्ञान का प्रकाश प्रदान करें, क्योंकि वह अज्ञानी और तुच्छ है। मां हंसवाहिनी से आग्रह किया गया है कि वह उसके खाली शब्दकोश को भर दें और अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करें। मां बागेश्वरी से कवि अपनी लेखनी को धार देने की प्रार्थना करता है ताकि वह सभी तक ज्ञान का प्रकाश पहुंचा सके। मां भारती से अनुरोध किया गया है कि वह सभी के हृदय से अज्ञान का तमस (अंधकार) दूर करें और आशा तथा विश्वास का संचार करें। मां ज्ञानदा से कवि यह विनती करता है कि उसकी आंखों पर अज्ञान का कोई पर्दा न पड़े और उसकी कविता में वीणा की झंकार भर जाए। अंत में, मां वाग्देवी से वह सद्बुद्धि की कामना करता है और अपनी कविता को एक पुष्पहार के रूप में अर्पित करने की इच्छा व्यक्त करता है। संपूर्ण कविता ज्ञान प्राप्ति की प्रार्थना और मां सरस्वती की स्तुति में समर्पित है।

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यह कविता (ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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मधुमास सा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Madhumas Sa | मधुमास सा।

Having created Radha in the heart, Krishna yearns in the firm universe. The burning night and the longing for the day, speaking while uttering Radhey-Radhey. kmsraj51

प्रेम अमृत रस पान करके,
इश्क चले अब धारण करने।
शीर्षक याद लिख कर गीत,
व्रत एकाकी का पारण करने।

अलंकार से सुसज्जित कर,
स्वयं को स्वयं में लज्जित कर।
इच्छाओं की गांठ बाँधकर चले,
भाव करुण का कारण धरने।

सुनकर धड़कनों की आवाज,
तुम्हारे प्रेम का सुनाती आगाज।
तुम कहीं वही तो नहीं हो प्रेमी,
जो आये हो मुझे तारण करने।

राधा बनाकर ह्दय-पटल में,
कृष्ण तड़पे ब्रह्मांड अटल में।
निशा की दहक दिवस की तरस,
बोलते राधे-राधे उच्चारण करने।

मन करता है श्वास को लिख दूँ,
उभरते हर भाव-प्यास लिख दूँ।
आह निकली नयनों से जब-तब,
आते गम, तन्हाई, मारण करने।

प्रार्थना करती प्राणेश्वर हरीश,
जन्मों का साथी मिला मरीच।
मधुमास सा सौन्दर्य खिला ये,
प्रतिभा का दुख जारण करने।

♦ प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति‘ जी – चेन्नई ♦

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  • “प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश: कविता प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण के भावों से ओत-प्रोत है। इसमें प्रेम को अमृत के समान दिव्य और शुद्ध बताया गया है, जो आत्मा को जागृत करता है। कवयित्री ने प्रेम को राधा-कृष्ण के अद्वितीय प्रेम से जोड़ा है, जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। कविता में इच्छाओं पर नियंत्रण और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश है। यह दर्शाती है कि प्रेम में समर्पण और त्याग से आध्यात्मिक शांति मिलती है। कवयित्री अपने प्रेम की गहराई और उसके प्रभाव को व्यक्त करते हुए यह कहती है कि प्रेमी की उपस्थिति उसकी पीड़ा और तन्हाई को हर लेगी। अंततः कविता में ईश्वर से प्रार्थना की गई है कि जीवन में सच्चे साथी का साथ मिले, जो सुख-दुख में साथ खड़ा रहे और हर कठिनाई को पार करने में सहायक हो।

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Pratibha Pandey - A Author of kmsraj51.comयह कविता (मधुमास सा।) ” प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/घनाक्षरी /कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हां मैं शिक्षक हूं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Haan Main Shikshak Hoon | हां मैं शिक्षक हूं।

A teacher is a guiding force who inspires curiosity, ignites minds, and shapes the future of their students by facilitating learning and discovery.

बुझ चुके चिरागों को फिर से,
जलाने की मुझमें ही तो क्षमता है।
मैं एक शिक्षक हूं, मुझमें पिता का प्यार,
और ममत्व भरी मां की ममता है।

इन्हें कहने दो मुझे जो कहना है,
शिक्षा का सूरज मुझसे ही चमका है।
वह झुग्गियों का चिराग भी आज,
मेरी निरन्तर सिखों से ही तो दमका है।

मैने ही तो पढ़ाया है दुनियां में,
प्यून से पी एम तक के लोगों को।
वे सब भोगते हैं अपनी क्षमतानुसार,
इस संसार के सभी भौतिक भोगों को।

मुझे मेरे ही पढ़ाए लोग ही न जाने,
कब – कब क्या – क्या कह देते हैं?
कुछ लोग तो मुझसे ही सीख कर,
मुझको ही वापिस सीख देते हैं।

मैने कक्षा, कक्ष में ही तो किया है,
संसार के सारे के सारे निर्माणों को।
विश्वाश नहीं होता है अगर किसी को,
तो पढ़ लो ऐतिहासिक के प्रमाणों को।

तकलीफ नही होती है मुझे तब भी,
जब मुझे कोई चेला ही टोकता है।
मैं इस तरह तर्क पैदा करता हूं चेले में,
जिसे आगे बढ़ने से जमाना रोकता है।

चेला मुझसे शिकायत करता है,
मैं ही तो उसको अच्छे से सुनता हूं।
मेरे ही मार्गदर्शन से ही वह आगे चल कर,
अपने भविष्य का जीवन पथ चुनता है।

मैं उसे कभी स्वाभाविक डांटता हूं,
शायद वह मुझसे तब कुछ रूठता है।
पर यह मेरे व्यक्तित्व की कला है शायद,
कि वह दूसरे दिन फिर से मुझे ही पूछता है।

हां मैं शिक्षक था, हूं और रहूंगा,
मुझे खुद के होने पर गर्व होता है।
जब चेला सफल होता है जीवन पथ पर,
तब मेरे लिए वह एक विशेष पर्व होता है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में शिक्षक की महिमा और उसकी भूमिका को दर्शाया गया है। एक शिक्षक वह है जो बुझ चुके चिरागों को फिर से जलाने की क्षमता रखता है और अपने छात्रों को सही मार्ग दिखाकर उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। शिक्षक के अंदर पिता का स्नेह और मां की ममता का संगम होता है। शिक्षक समाज के हर तबके, चाहे वह झुग्गियों का बच्चा हो या कोई उच्च पद पर आसीन व्यक्ति, को ज्ञान प्रदान करता है। उसका योगदान इतना महान है कि उसने दुनियाभर के बड़े निर्माण और सफल व्यक्तित्वों को गढ़ा है।शिक्षक अपने छात्रों को स्वाभाविक रूप से डांटता भी है और उनके सवालों का समाधान भी करता है। वह उनके भीतर तर्क और आत्मविश्वास पैदा करता है, ताकि वे अपने भविष्य की राह चुन सकें। शिक्षक की सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब उसका छात्र जीवन में सफल होता है। कवि ने गर्वपूर्वक यह कहा है कि शिक्षक होना एक गौरव का विषय है और यह एक विशेष उत्सव की तरह है जब उसके द्वारा सिखाया गया छात्र अपने जीवन में सफल होता है।

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यह कविता (हां मैं शिक्षक हूं।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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ये है धर्मशाला।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yeh Hai Dharamshala | ये है धर्मशाला।

The natural beauty, especially the rains, the Buddhist Guru's abode in McLeod Ganj, and the Bhagsu Falls, are all captivating.

धौलाधार है जहाँ की पहचान।
इन्द्रुनाग देव है वहाँ की शान॥

वर्षा हर किसी पल हो जाती है शुरू वहाँ।
इससे सुंदर शहर हो सकता है और कहाँ॥

मैकलोड़गंज में बौध गुरु का है वास।
भागसू जलप्रपात है वहाँ से थोड़ा ही पास॥

करेरी झील की सुंदरता मनमोहक है बड़ी।
पर सड़कों की चढा़ई है भी थोड़ी खड़ी॥

शहीद स्मारक शहीदों की याद है दिलाता।
दुश्मनों को कैसे खदेड़ा होगा ये अहसास है कराता॥

विश्व में बन रही है जिसकी पहचान।
वो क्रिकेट मैदान है यहाँ की जान॥

शिक्षक महाविद्यालय ने अपनी अलग सी पहचान है बनाई।
वहीं केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने भी शिक्षा की अलख है जगाई॥

सैलानी उत्सुक है आने को यहाँ।
उनके लिए शायद यह है अलग सा जहाँ॥

जिसको भी मौका मिलता है यहाँ आने का।
वो नाम ही नहीं लेता यहाँ से वापिस जाने का॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि एक ऐसे स्थान की सुंदरता और विशेषताओं का वर्णन कर रहे हैं, जिसकी पहचान धौलाधार पर्वतमाला और इन्द्रुनाग देव से है। वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, विशेषकर बारिश, मैकलोडगंज में बौद्ध गुरु का वास, और भागसू जलप्रपात, सभी मनमोहक हैं। करेरी झील की सुंदरता भी उल्लेखनीय है, हालांकि उसकी चढ़ाई थोड़ी कठिन है। शहीद स्मारक वीरों की शहादत की याद दिलाता है और दुश्मनों के खिलाफ उनकी बहादुरी का अहसास कराता है। विश्व प्रसिद्ध क्रिकेट मैदान भी यहाँ की पहचान है। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक महाविद्यालय और केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। सैलानियों के लिए यह जगह एक अद्वितीय अनुभव है, और जो भी यहाँ आता है, वह इस जगह को छोड़कर जाना नहीं चाहता।

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यह कविता (ये है धर्मशाला।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आजादी का मर्म।

Kmsraj51 की कलम से…..

Marm of Freedom | आजादी का मर्म।

Wake up, rise up, don't stay silent now, fight back against the atrocities, do it yourself and tell others, sing the praises of freedom. The essence of freedom.

आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं,
वीरों की उन शहादतों की
याद दिलाने आया हूं।
गुलामी की दासताओं का
दर्द सुनाने आया हूं,
आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं।

बातें उन दिनों की है जब बेड़ियों में
जकड़ा देश हमारा था,
त्राहि-त्राहि लोग कर रहे
जुल्मों सितम करारा था।
फिरंगियों की दास्तानों से
थर्राया देश हमारा था,
खिलाफ बोलने वालों की
सरेआम चमड़ी उधेड़ी थी।

अंग्रेजों के जुल्मों ने मन में
उबाल मचाया था,
विरुद्ध बोलने की हिमाकत
नहीं किसी ने उठाई थी।
यातनाओं से तंग आ चुका
एक वीर मर्द पुराना था,
सपूत वो कोई और नहीं
मंगल पांडे का जमाना था।

धीरे-धीरे आग की लौ
पूरे देश में थी फैल गई,
गुलामी के दंश के बीच
आजादी की हवा फैल गई।
कुंवर सिंह और झांसी ने
मोर्चा खूब संभाला था,
उनकी शहादत को देश ने
सीने में बड़े संभाला था।

परतंत्रता के घाव पर
बापू ने मरहम लगाई थी,
लाल बाल पाल की तिकड़ी ने
आजादी की झलक दिखाई थी।
खूनी खेल, खेल रहे फिरंगी को
सबक सबने सिखाई थी,
सभी के प्रयासों से अंत में
आजादी हमने पाई थी।

सोने की चिड़ियां को आज
आजादी के मर्म का भान है,
फिर हम क्यूं भूल गए उन वीरों को
जिसका सभी को ज्ञान है।
एक बार पुनः उन यादों को
ताजा करने आया हूं,
आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं।

जिस आजादी के लिए
कुर्बानी दी जहान रे,
यूं ही हम भूल रहे
खो रहा हमारा मान रे।
जागो उठो अब चुप न रहो
जुल्मों का तुम प्रतिकार करो,
खुद करो औरों को बोलो
आजादी का गुणगान करो।

भूल रहे उन मर्मों की
याद कराने आया हूं,
वीरों की उन शहादतों की
याद दिलाने आया हूं।
गुलामी की दसताओं का
दर्द सुनाने आया हूं,
आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं।

बीती यादों को ताजा कर
सबक सिखाने आया हूं,
हुंकार भरने आया हूं,
संकल्पित करने आया हूं।
देश भक्ति का भाव जगा
सपना साकार करने आया हूं।

अमन चैन संग मिट्टी की
सौंधी खुशबू बिखेरने आया हूं,
वंदे मातरम् के गान का
अर्थ बताने आया हूं।
आजादी का राग सुना
जज्बात जगाने आया हूं,
वीरों की कहानी याद दिला,
आजादी का मर्म बताने
युवाओं को आया हूं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि युवाओं को आजादी के महत्व और वीर शहीदों की कुर्बानियों को याद दिलाने आये है। वह उन दिनों का वर्णन करते है जब भारत अंग्रेजों की गुलामी में जकड़ा हुआ था, और लोग त्राहि-त्राहि कर रहे थे। अंग्रेजों के अत्याचारों ने देशवासियों को विद्रोह करने पर मजबूर कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप मंगल पांडे और अन्य वीरों ने आजादी की लड़ाई की शुरुआत की। धीरे-धीरे यह विद्रोह पूरे देश में फैल गया, और वीरों ने मोर्चा संभाल लिया। कवि महात्मा गांधी, लाल-बाल-पाल की तिकड़ी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद दिलाते हुए बताते है कि कैसे उनके प्रयासों से अंततः भारत ने आजादी पाई। वह इस बात पर भी जोर देते है कि आज के युवाओं को उन वीरों और उनकी कुर्बानियों को नहीं भूलना चाहिए, बल्कि उनके बलिदानों का सम्मान करना चाहिए।कवि युवाओं को जागरूक करने और उन्हें देशभक्ति के लिए प्रेरित करने आये है। वह उन्हें याद दिलाते है कि हमें अपनी आजादी का सम्मान करना चाहिए और उसके महत्व को समझना चाहिए। अंत में, वह देशभक्ति की भावना जागृत करने और आजादी के महत्व को समझाने का आह्वान करते है।

—————

यह कविता (आजादी का मर्म।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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आज़ादी की पहली सुबह।

Kmsraj51 की कलम से…..

The First Morning of Freedom | आज़ादी की पहली सुबह।

We are free but let us be free from mental slavery too, let us leave aside the discrimination of caste and religion and become human beings.

बहुत याद आती है वो आज़ादी की पहली सुबह,
15अगस्त 1947 को था जब भारत में तिरंगा फहराया l
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सब बने थे भाई भाई,
अपनापन था झलक रहा सब में कोई नहीं था पराया॥

अपनों से बिछड़ जाने के थे दर्द बड़े-बड़े,
ना चाह कर भी देश के दो टुकड़े थे करने पड़े।
दो कौमों को आपस में लड़ा कर फिरंगी थे खुश बड़े,
ऐसी लूट मची थी उस वक्त कुछ थे हिंदुस्तान तो कुछ थे पाकिस्तान में पड़े॥

15 अगस्त 1947 से पहले की सुबह थी बहुत काली,
डर से थे कुछ कांप रहे तो कुछ मांग रहे थे पानी।
किसी ने बहुत चालाकी और चतुराई से,
थी दो कौमों को जुदा करने की साजिश रच डाली॥

दो टुकड़े करके हिंदुस्तान के,
लोगों के बीच थी लड़ाई करवा डाली।
किसी के उजड़ गए आशियाने तो किसी ने दी अपनी कुर्बानी,
फिर वो आजादी की पहली सुबह बनी थी सुहानी॥

कहे “जय” अपनी सोच को ऐसा बनाएं,
खुशहाल हो भारत अपना ऐसा अपना देश बनाएं।
आजाद तो हैं हम पर मानसिक गुलामी से भी आजाद हो जाए,
जात पात धर्म का भेदभाव छोड़कर आओ इंसान हो जाएं॥

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि 15 अगस्त 1947 को मिली आज़ादी की पहली सुबह को याद कर रहे है। इस दिन भारत में तिरंगा फहराया गया था, और सभी धर्मों के लोग आपस में भाईचारे के साथ रह रहे थे। हालांकि, देश के विभाजन ने लोगों को गहरे दर्द में डाल दिया था। अंग्रेजों की चालाकी से हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच विभाजन हुआ, जिससे लोग आपस में लड़ने लगे। इस विभाजन से कई परिवार उजड़ गए, और कई लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी दी। फिर भी, आज़ादी की वह सुबह लोगों के लिए बहुत खास और सुखद थी। अंत में, कवि यह संदेश देते है कि हमें मानसिक गुलामी से भी मुक्त होना चाहिए और जात-पात, धर्म का भेदभाव छोड़कर इंसानियत को अपनाना चाहिए, ताकि हमारा देश खुशहाल बन सके।

—————

यह कविता (आज़ादी की पहली सुबह।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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आदि से अनंत तक ले जाए गुरु।

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Aadi Se Anant Tak Le Jaye Guru | आदि से अनंत तक ले जाए गुरु।

Every year Guru Purnima is celebrated on the full moon day of the month of Ashadha.

कैसे करूं मैं गुरु की महिमा का गुणगान,
कहां से लाऊं मैं वो अनमोल शब्द,
गुरु होता है हमेशा सबसे बड़ा,
हमेशा गुरु के आगे मैं निशब्द।

रिश्ता गुरु का शिष्य से होता सबसे सुंदर,
सबसे निर्मल सबसे अनमोल,
करें गुरु की महिमा का गुणगान,
गुरु बसता हमेशा दिल के अंदर।

अंधकार में रोशनी दिखाए गुरु,
आदि से अनंत तक ले जाए गुरु,
जगमग जगमग राह दिखाए गुरु,
जीवन की सच्ची राह दिखाए गुरु।

हर वर्ष आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाते हैं,
शिष्य गुरुओं के आगे शीश नवाते हैं,
जीवन सफल हो जाता उनका,
जो गुरुओं का मान सम्मान करते और कराते हैं।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में गुरु की महिमा का गुणगान किया गया है। कवि कहते हैं कि गुरु सबसे महान होते हैं और उनके सामने शब्द भी कम पड़ जाते हैं। गुरु और शिष्य का रिश्ता सबसे सुंदर, निर्मल और अनमोल होता है। गुरु अंधकार में रोशनी दिखाते हैं और जीवन की सच्ची राह दिखाते हैं। हर वर्ष आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है, जब शिष्य अपने गुरुओं का सम्मान करते हैं और उनका जीवन सफल होता है।

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यह कविता (आदि से अनंत तक ले जाए गुरु।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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