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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Hindi Poems

सूर्य देता संदेश।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sun Gives Message | सूर्य देता संदेश।

Sun is a ball of fire, Everyone said so. Today Sun Dada showed his glory. How he made us burn in the Nautapa, He made us sweat profusely.

सूर्य आग का एक गोला,
सभी ने यही बोला।
आज दिखा ही दिया अपना,
खूब जलवा सूरज दादा ने।

नौतपा में क्या खूब तपाया,
पसीने से खूब नहलाया।
भास्कर ने अपना रंग दिखाया,
वाह! सूरज दादा तेरे रंग निराले।

हम भी इंसान अजीब ही रहें,
चाँद की तारीफ में ही उलझे रहें।
सूरज की कोई तारीफ ही नही की,
लो जी और करो इश्क चंदा मामा से।

सूरज दादा को हम भूल गए थे,
अब याद दिला दिया इसी ने।
बड़ों की इज्जत नहीं की तो,
ऐसी ही आग में तपना पड़ता है।

लगे ऐसे सूर्य देवता आए हो,
अपने पूरे क्रोध संग जोश में।
चेता रहे हो इंसानों को,
जागो और अब आओ होश में।

सिर्फ पेड़ ही कम कर सके ,
मेरे इस बढ़ते आक्रोश को।
संदेश दे रहे हम सभी को,
ए इंसानों!
बचाओ अब इस धरती माता को।

खूब पेड़ लगाइए,
मेरे ताप को मिटाइए।
वृक्षों को बचाइए,
धरती मां के बच्चों,
अपना फर्ज निभाकर धरा को बचाओ।

मुझे शौक नहीं धरा को जलाने का,
सुरक्षा चक्र को तुमने ही तोड़ा।
भौतिक सुख की चाह में ,
हरियाली से मुख जो मोड़ा।

उसका परिणाम आज भोग रहे,
मेरे ताप का प्रकोप रोज सहे।
मेरी अग्नि से बचने का केवल एक उपाय,
खूब पेड़ लगाओ और खुशहाल हो जाओ।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवयित्री ने सूर्य को एक आग के गोले के रूप में प्रस्तुत किया है, जो नौतपा (गर्मी के नौ दिन) में अपनी तीव्र गर्मी से सभी को तपाता है और पसीने में नहला देता है। कवयित्री इस बात पर जोर देती है कि इंसान अक्सर चंद्रमा की तारीफ करते हैं, लेकिन सूरज की महिमा को भूल जाते हैं। इस कविता के माध्यम से कवयित्री हमें याद दिलाता है कि सूरज की गर्मी का सामना करने के लिए हमें पेड़ों की संख्या बढ़ानी चाहिए। वृक्ष ही सूरज के आक्रोश को कम कर सकते हैं। कवयित्री चेतावनी देती है कि धरती के प्रति हमारी लापरवाही के कारण ही हमें यह अत्यधिक गर्मी सहनी पड़ रही है।इसलिए, कवयित्री आग्रह करती है कि “हम अधिक पेड़ लगाकर धरती को बचाएं और सूरज की गर्मी से राहत पाएं। पेड़ों की सुरक्षा और वृद्धि ही हमें इस समस्या से निजात दिला सकती है और धरती को हरा-भरा बना सकती है।”

—————

यह कविता (सूर्य देता संदेश।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बेबस शिक्षक।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bebas Shikshak | बेबस शिक्षक।

studied with great care, Without sleep, without yawning.

बड़े जतन से की पढ़ाई,
बिना नींद बिन जम्हाई।
बड़े शौक थे देंगे ज्ञान,
बढ़ेगा मान और सम्मान।

यही सोच ले भरी उड़ान,
मिली शिक्षा की कमान।
बन गया शिक्षक महान,
न रहा खुशी का ठिकान।

मिली जिम्मेदारी से हुआ रत,
बच्चों की पढ़ाई में हुआ मस्त।
सोचा था शिक्षा का करूंगा दान,
परिवार पर भी रखूंगा ध्यान।

बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा बनाया लक्ष्य,
ईमानदारी से किए काम का मिला साक्ष्य।
काम से खुश एवम् संतुष्ट था,
काफी समय गुजर गया था।

अचानक शिक्षा विभाग में,
हुआ आमूलचूल परिवर्तन।
छात्र हित के नाम पर,
शिक्षक के काम पर।

शुरू हुई धमाचौकरी,
कठिन हुई अब नौकरी।
न होली, छठ न ही दिवाली,
सभी त्योहार अब खाली-खाली।

घर छूटा अपने छूटे, छूट गया समाज,
जीना दुर्लभ हो गया आज।
छात्र सह शिक्षक हो रहे बेरंग,
पढ़ाई तभी होगी जब होंगे संग।

आदेशालोक में पर्व त्योहार की छुट्टी हुई रद्द,
छुट्टी में भी शिक्षक स्कूल पहुंचे पढ़ाने गद्द।
जब बच्चे नहीं आयेंगे स्कूल,
शिक्षक क्या करेंगे जाकर स्कूल।

पढ़ाई लगातार हो अच्छी बात है,
रुचिकर हो ये गुणवत्तापूर्ण बात है।
कम समय में बेहतर ज्ञान,
होना चाहिए इसका भान।

पर्व त्योहार भी पढ़ाई का ही है पार्ट,
खुशनुमा माहौल में पढ़ाना भी है आर्ट।

जबर्दस्ती जब मुंह में न जाता खाना,
कैसे मिलेगा ज्ञान का खजाना।
नौकरी में ना कभी करना नहीं,
बेबस शिक्षक हूं कुछ कहना नहीं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता शिक्षक के जीवन की एक दृष्टि प्रस्तुत करती है। शिक्षक ने अपने काम में समर्पित बलिदान दिया, लेकिन अचानक शिक्षा विभाग में परिवर्तन हो गया और उन्हें धमाचौकी झेलनी पड़ी। इसके बाद, उनकी जिंदगी में कई बदलाव आए, जैसे कि त्योहारों की छुट्टियों का रद्द होना और नौकरी की प्रतिस्पर्धा। फिर भी, उन्होंने पढ़ाई को महत्व दिया और अपने छात्रों की शिक्षा में समर्पित रहा। वे यह सिखाते हैं कि पढ़ाई केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि प्रसन्नता और रुचि के साथ भी होती है। शिक्षक की भूमिका इस कविता में उजागर की गई है, जो समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण होती है।

—————

यह कविता (बेबस शिक्षक।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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घोर कलियुग आता है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ghor Kaliyug Aata Hai | घोर कलियुग आता है।

Where is the respect for small and big now? They molest small lives.

आज न रावण सीता हरण को,
छल – प्रपंच कोई अपनाता है।
आज न दुर्योधन भरी सभा में,
दुशासन से द्रौपदी का चीर हरवाता है।

आज न सीता को है कोई लक्ष्मण रेखा,
न पांडवों की होती है द्युत में कोई हार।
आज का रावण है विद्रूप और हत्यारा,
मासूम सीताओं का करता है बलात्कार।

छोटे – बड़े की रही कद्र कहां अब?
नन्ही सी जानों से करते हैं छेड़छाड़।
रावण – दुर्योधन भी होते जिंदा आज,
वे भी देते शायद इन लोगों को लताड़।

घटनाएं घटी है जो रामायण – महाभारत में,
उनसे भी बड़ी है आज की हर एक वारदात।
फिर भी न होता रामायण – महाभारत क्यों?
क्यों सरकारें कहती हैं काबू में सब हालात?

निर्दोष बेटी की निर्मम हत्या पर,
निर्दोष असहाय बाप पछताता है।
भागो भाई भागो हरि शरण में,
अब तो घोर कलियुग आता है।

राजा भूले राजधर्म सब के सब,
प्रजा अपना वोट बिकवाती है।
कर्म फल फिर भुगतते – भुगतते ,
जनता निगोडी बेबस पछताती है।

सुप्त जनमानस और लालची प्रवृत्ति,
जनता को ये दुर्दिन कष्ट दिखाते हैं।
धनवान बटोरते हैं सरमाया – वैभव,
सर्वहारा – गरीब ही पछताते हैं।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता व्यक्त कर रही है कि आजकल के समय में भी बुराई और अन्याय के उदाहरण मौजूद हैं। कविता में यह भी कहा गया है कि आज के समय में लोग नैतिकता और धर्म के प्रति उल्लंघन करते हैं, जैसे कि आपसी विश्वास और न्याय के मामले में। कविता का संदेश है कि हमें दुष्टाचार और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की आवश्यकता है और समाज में न्याय और नैतिकता की रक्षा करने का दायित्व है। कविता में यह भी कहा गया है कि समाज में जनता को जागरूक होना चाहिए और बुराई और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के लिए तैयार रहना चाहिए। छोटे – बड़े की रही कद्र कहां अब? नन्ही सी जानों से करते हैं छेड़छाड़। रावण – दुर्योधन भी होते जिंदा आज, वे भी देते शायद इन लोगों को लताड़।

—————

यह कविता (घोर कलियुग आता है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जमाने का दस्तूर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Zamane Ka Dastoor | जमाने का दस्तूर।

Holding the helm of courage, you walk alone. Don't hold on to the hope that someone will sail your boat.

स्वार्थ से भरी दुनिया में, लगा इंसानों का मेला।
क्यूं किसी से निस्वार्थ की करें दिल कामना।

हौसलों की थामकर पतवार, तू तो चल अकेला।
कोई तेरी नाव पार लगाए, इस उम्मीद का हाथ न थामना।

तुझे कुछ कर गुजरना है तो सब छोड़ झमेला।
आंख खोल दुनिया देख, सब छंट जायेगा अंधेरा घना।

बुलंद कर रुतबा इतना, शरमाये वो जिसने शातिराना खेल खेला।
जीवन में फर्श से अर्श तक जाना है तो दिल पत्थर का बना।

खुद पर यकीन रख, आस्था रख रब में।
जिंदगी से दोस्ती निभाने का हुनर सब में।

कहां आता है……. रे मना!

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में स्वार्थ और निस्वार्थ के मध्य की तुलना की गई है। यह कविता एक व्यक्ति को सोचने पर प्रोत्साहित करती है कि वह निस्वार्थता, साहस, और आस्था के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़े, चाहे वो किसी भी कठिनाइयों का सामना करें। इसके अलावा, कविता मनुष्य को अपने मार्ग पर दृढ़ रहने की सलाह देती है और उसे खुद पर और भगवान पर यकीन रखने का सुझाव देती है।

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यह कविता (जमाने का दस्तूर।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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बचपन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bachpan / Childhood | बचपन।

Childhood provides the foundation for all future learning, behavior and health.

न कोई अपना न कोई पराया,
हर किसी को लगे जो प्यारा,
यही बचपन है, यही बचपन है।
तोतली तोतली आवाज सबको है सुहाती,
जिसने भी दुलारा उसी की ओर नजर है जाती,
यही बचपन है, यही बचपन है।

न कोई खुशी न कोई गम,
जब भी देखो अपने आप में है मग्न,
यही बचपन है, यही बचपन है।
न कोई हार न कोई जीत,
सब लगते हैं अपने मीत,
यही बचपन है, यही बचपन है।

न वर्तमान की चिंता न भविष्य का डर,
हर वक़्त रहते हैं मस्त व निडर,
यही बचपन है, यही बचपन है।
माँ की ममता बाप का प्यार,
मिला है मानो उपहार,
यही बचपन है, यही बचपन है।

जिसको देखो वही दुलारता,
हर कोई अपनी ओर पुकारता,
यही बचपन है, यही बचपन है।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में बचपन की खुशियों और सरलता का सुंदर चित्रण किया गया है। कविता में यह बताया गया है कि बचपन में हर कोई सादगी और मासूमियत के साथ जीता है। बचपन का सुंदर माहौल और सबको प्यार देने की भावना को व्यक्त किया गया है। कविता में बचपन के अनमोल लम्हों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो हर किसी के जीवन में अद्वितीय होती है।

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यह कविता (बचपन।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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वीर भगत सिंह।

Kmsraj51 की कलम से…..

Veer Bhagat Singh | वीर भगत सिंह।

Bhagat Singh, an Indian revolutionary socialist, who played a significant role in the Indian independence movement.

हे! भारत मां के वीर सपूत शहीद भगत सिंह,
तेरे जैसा, इस धरा पर कोई ना लाल हुआ।

थर्राई थी जमीं भी उन फिरंगियों की,
जब दिल में उनके तेरे ख्याल हुआ।

आज मेरा शत-शत नमन तुझको,
इस दुनिया में लाने वाले पिता-मात को।

तेरे साथ नमन उन साथियों को भी,
जिन्होंने सुबह में बदला गुलामी की रात को।

जिस भारत मां की आत्मा को आजाद किया,
अपनी पूजनीय मां की कोख से जन्म लेकर।

अपनी जिंदगी का फर्ज बखूबी निभाया,
हमें आजादी का उपहार देकर।

भगत सिंह जिस मिट्टी की खुशबू ,
बचपन में ही, तूने अपनी रूह में बस आई।

तेरी उस जन्मस्थली को भी,
तेरी जयंती की लख-लख बधाई।

तेरी जयंती की बधाई,
इस सारे भारत देश को।

शत-शत नमन आज तेरे,
बसंती चोले के वेश को।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में भगत सिंह को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूत के रूप में सलाम दिया गया है। कविता में भगत सिंह के वीरता, स्वतंत्रता के लिए उनके प्रबल संकल्प, और उनके साथियों के संघर्ष का स्तवन किया गया है। कविता के आखिरी भाग में भगत सिंह की जयंती की बधाई दी गई है और उनके योगदान को सलाम किया गया है। इसके साथ ही, कविता में भगत सिंह के जन्मस्थल को भी याद किया गया है।

—————

यह कविता (वीर भगत सिंह।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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विपदा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vipada | विपदा।

Do every task in life in a balanced manner, and save money for sudden bad times, otherwise you will get anxious.

रही पति की अच्छी पगार,
थी होटल में खाती।
व्यंजन कैसे खाने में,
आसपास बताती थी।

कह देता यदि कोई भी
पास कुछ रखा करो!
लेती सिकोड़ मुंह अपना,
भौहें तन जाती जी।

मंगल बने दीवार बच्चे,
वरना होटल में ठहरती।
बिताती रात भर वहीं,
सुबह – सुबह घर आती।

शौहर जब भी बोलता,
उसके सर चढ़ जाती।
दिये दहेज पापा की,
बार बार वह चिल्लाती।

विधान विधाता का क्या,
जानता कौन भला है।
विपत्ति विक्रमादित्य पर,
भूनी मछली जल में पड़ी।

है रोटी कपड़ा और मकान,
सीना तान बैठा सब कोई।
मैं विष्णु का आहार जो,
शास्त्रीय ही बतलाता है।

फिर भी घमंड में मानव,
अपना अपना सुनाता है।
दुनिया से कैसा एम प्रेम,
सोर हर ओर रहा कैसा?
झगड़े झंझट से मुक्ति ले,
दुपट्टे में छुप जाती थी।

जलना जीवन का ध्येय है,
जलना बना ली है सीमा।
कूंजती कोयल काली,
डोलती मद मतवाली।

शौहर पगार पतली पड़ी,
बजा हृदय में विकल राग।
घिर गयी घटा सी उलझन,
दाने दाने को तरस रही।

दशा देख नभ हुआ अधीर,
झर झर नयनों बह रहे नीर।
कोलाहल पथ चल के आयी,
अंतस में नव हर्ष – विषाद।

कास संभल के जीवन जीती,
लहरों का नहीं होता उन्माद।
संस्कृति – सभ्यता में चलती,
जो जीवन का रहस्य खास।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कविता में एक पत्नी की कहानी है, जो अपने पति की जब ज्यादा पगार होती है तब खूब होटल में ही खाना खाती है और जब पति कुछ बोलता तो उसे कैसे खाना खाने का तरीका सिखाती है। वह अपने पति से कहती है कि वह कभी भी अपने पास कुछ न रखें, लेकिन जब पति कुछ बोलता तो उसे पापा के द्वारा दिए दहेज का जिक्र कर जाती हैं, और वह चिल्लाती है। समय एक जैसा नहीं रहता हैं, मानव अपने घमंड में क्यों सबकुछ भूल कर अपना ही अहित करता जाता है, जैसे इस पत्नी ने किया अपने पति की बात ना मानकर अपने पुरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया। अब तो बजा हृदय में विकल राग, घिर गयी घटा सी उलझन, दाने दाने को तरस रही। इसलिए जीवन में हर कार्य एक संतुलन में रहकर करें, और अचानक से आने वाले ख़राब समय(बुरा समय) के लिए बैकअप योजना (पैसा बचाकर रखे) नहीं तो फिर बहुत ज्यादा परेशान हो जायेंगे।

—————

यह कविता (विपदा।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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शब्द-माला।

Kmsraj51 की कलम से…..

String of Words | शब्द-माला।

अभिनव रस परिरंभ से,
थरथराते बाला के वेश।
कंपकंपाते अधर पुट,
उड़ते मदहोश से केश।

चूमकर अचानक अभ्र को,
भाग जाना अति दूर।
अनुपम है अणुभा का रूप,
मंजुलता मोहकता से चूर।

अविनीश के हाथों का परस,
पाकर व्याकुल कुछ-कुछ ऊब।
मृणालिनी का जल में जाना,
आकंठ तक डूब।

पुष्करिणी के तन किन्तु,
मन रात-भर शशि में लीन।
शशिकांत की आँखों में,
अलस-हीन निद्रा-विहीन।

स्वप्न का योग सारा,
प्राणों से सबको प्यार।
धन-दौलत है पास मगर,
निछावर कर दूँगा साकार।

विवस्त्र कर कुण्डल से,
देखे विस्मित चरणों का देश।
रहता जहाँ है बसा,
अगुण मानक उज्जवल वेश।

इस पावन पवित्र नीलिमा के,
धरा पर करुँगा तुझको मैं आसीन।
उपवन में भी तुम रहोगी,
अलि कटंक कुसुम विहीन।

अपने लहू के चंड से,
सुलगने न दूँगा अंग।
साथ रहोगी तुम पर,
आँच न आने दूँगा नि:संग।

शब्दों की माला में पिरोकर,
लिखता रहुँगा भाग्य अपना मान।
तुम रहोगी इस अधिलोक में,
बन सरगम की सुरीली तान।

मधुर मुरली की तान वह,
जिसके प्राणवंत विभोर।
डोलती काया तुम्हारी,
मोहक मोहनी होगी तस्वीर।

लोहित की दुर्जय क्षुधा,
दुःसह चाम की प्यास।
छा रही होगी सुर-सरगम,
घर-घर अवनी आकाश।

सुर तुम्हारे जब बजेगें,
ताल-तरंग चूमने की चाह।
आह निकलेगी फिज़ाओं से,
झूमने लगेंगे सब बाग।

करतल जब बजेगी,
चलने लगेंगे आँसुओं के तार।
बज उठेगी विश्व में जब,
निश दिन बोलों की झंकार।

जग तुम्हें घेरकर,
करेगा कलरव चहुँ ओर।
फूलों का उपहार होगा,
मनके-मनके में भरा प्यार।

कुछ दीवानगी में भर कर,
भित्ति हृदय पर उकेर लेंगे।
गीतों के भीतर घुसकर,
तुम्हारी छवि आँखों में उतार लेंगे।

कंठों में जाकर बसोगी,
बिन सरगम गुनगुना लेंगे।
प्राणों में आकर हँसोगी,
हँसकर होंठों पर छा लेंगे।

मैं मुदित हूँगा देखकर,
इन गीतों को वाक्य दूँगा।
रचित शब्द-माला में पिरोये,
अपने सृजन को आकार दूँगा।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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मोहिनी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mohini | मोहिनी।

क्षम्य हो मेरा अपराध,
देख तुम्हारी अँखियों का सार।
मन को मोहने वाली हिरणी,
मोहित तो है तुमसे सारा संसार।

हार गया मैं तुमसे,
सुनकर बातें बेगानी थारी।
शब्दों के बाण चला-चला कर तुमने,
घायल कर दिया इस मन हारी।

दूर तक जहाँ नहीं कोई,
जीवन के इस निर्जन पानी।
कहां से आकर तुमने,
छेड़ी ये राग अनजानी।

शान्त शिखण्डी का मैं मारा,
ये नयन रण मेरे लिये असमान।
अकेला लड़ा इस आशय से,
जीत सकूँ मैं सारा जीवन विहान।

अगर पराजित हुआ तुमसे मैं,
तो जीत लूँगा सारा आसमान।
मैं तुमसे जो कर रहा तर्क-वितर्क,
इसमें है मेरी वाणी का समाधान।

तुम ही थी हृदय की पीड़ा,
अंतस् की गुंजन थी तुम बाला।
पढ़ा होगा मेरी आँखों में तुम,
एकाकी जीवन की मेरी हाला।

अपनी कृति देकर इन अँखियों को,
खो न जाना इस निदारुण वन में।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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सारंग – सुमन।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sarang – Suman | सारंग – सुमन।

हे अचले! तेरे तारक सारंग,
ये सृष्टि के धवल मुक्ताहार।
दीप बागों के उज्जवल धवल,
जिससे है वन जुगनू सुकुमार।

मेरी कोमल कल्पना के तार,
तरंगित उत्साहित उद्भ्रांत।
हृदय में हिल्लोर करते रहते,
भावों के कोमल-कोमल कान्त।

नालों-नालों की ज्योति,
जगमग उर्मि पसार।
ज्योतित कर रहे आज,
किसलिए कालिमा का संसार।

ये परियों का सुंदर-सा देश,
मृदुहासों का मृदुलमय स्थान।
दिव्य ज्योत्स्ना में घुल-घुलकर,
दिखता जैसे हो अम्लान।

मोहक तरंगिणी ने धो-धो कर,
हिम उज्जवल कर लिया परिधान।
आओ चलें प्रकाशित वन में,
खोजे ज्योतिरिंगण वो अनजान।

मलय समीरों के मृदुल झोंकों में,
कतिपय कंपित डोल-डोल।
अंतर्मन में क्या सोच रहा,
अनबोले रह जाते मेरे बोल।

स्वयं के ‘परिमल’ से सुशोभित,
निज की अपनी ज्योति द्युतिमान।
मुग्धा-से अपनी ही छवि पर,
निहार पड़े स्रष्टा छविमान।

खुद की मंजुलता पर अचम्भित,
देखे विस्मित आँखें फाड़।
खिलखिलाते फूल-पल्लवों को देख,
आत्मीयता से नयनों को काढ़।

सृजित हो रहे स्वर्ग भूतल पर,
लुटा रहे उन्मुक्त विलास।
अग्नि की सुंदरता का सौरभ,
सुमन-सारंग का उल्लास।

कवि का स्वप्न सुनहला,
देखे नयन ये बार-बार।
हर पंक्ति-पंक्ति में रच डाली,
नयनों की देखी साभार।

अनन्त के क्षुद्र तारे तो दूर,
उपलब्धि के गहरे-गहरे पात।
देव नहीं हम मनुजों की,
प्रियतम है अवनी का प्रान्त।

बीते जीवन की वेदनाएं,
अम्बा की चिन्ता क्लेश।
वादी में सृजित किया तूने,
मंजुल मनोहर आकर्षक देश।

स्वागत करो अरुणोदय का,
स्वर्णिम शीशों पर पुष्कर विहार।
विश्राम करे धवल तमस्विनी,
आँचल में सोते हैं सुकुमार।

कितनी मादकता है बसी यहां,
कुंडा-कुंडा है छन्दों का आधार।
पुष्पों के पल्लव-पल्लव में बसा,
सुरभि सौरभ सुगंध का भार।

विश्व के अकथ आघातों से,
जीर्ण-शीर्ण हुआ मेरा आकार।
अश्रु दर्द व्यथा वेदना से,
परिपूरित है मेरा जीवन आधार।

सूख चुका है कब से,
मेरे कलियों का जीवात्म।
हृदय की वेदना कहती है,
बचा विश्व में बस पयाम।

इक-इक पंक्ति से बन गई,
मेरी कविता का संसार।
लेखनी को घिस-घिस कर,
उद्धृत किया अपना संस्कार।

आशा के संकेतों पर घूमा,
सृष्टि के कोने-कोने हाथ पसार।
पर अंजलि में दी ‘दुर्गा’ ने,
आत्म तृप्ति का उपहार।

छोटे से जीवन के इस क्षण में,
भरा अंतस् कण-कण में हाहाकार।
भरत-भूमि तेरी सुंदरता पे,
खड़ा सारंग-सुमन तेरे द्वार।

इक पल के मधुमय उत्सव में,
भूल सकूँ अपनी वेदना हार।
ऐसी हँसी दे दो दाता मुझको,
नित दे सकूँ सबको हँसी बेसुमार।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (सारंग – सुमन।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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