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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

हमारे संस्कार हमारी धरोहर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हमारे संस्कार हमारी धरोहर। ♦

हमारी संस्कार हमारी धरोहर ही हमारा गौरव है,
इससे ही हमारी पहचान और अस्तित्व है।

हमारे संस्कार ही हमारे आदर्श और गुणों की खान है,
रीत रिवाज और संस्कार ही परिवार की पहचान है।

नीति, धर्म, परोपकार ही हमारे झलकते संस्कार है,
बचपन से मृत्यु तक साथ संस्कार रहते है।

सभी पर्व, त्यौहारों पर पूवर्जों के बनायें नियम भी संस्कार है,
जिन्हें मिलते अच्छे संस्कार वो सबसे अच्छा इंसान है।

सोलह संस्कार, मानव के जीवन में होते है,
वैदिक हमारे संस्कार मृत्युपरान्त भी होते है।

संस्कार ही हमारी आन, बान और सम्मान है,
संस्कार ही सनातन धर्म का मूल आधार है।

ऋषि मुनियों के बनायें हुए हमारे संस्कार और नियम है,
जो हमको सिखाते सही राह पर चलना है।

संस्कार हमारे लिए शिरोधार्य और अमूल धरोहर है,
जो बने हमारे हित और भवसागर से तारने के लिए है।

ये पवित्र गंगाजल के समान और इनमें गुण बहुत सारे है,
हमारे संस्कार हमारी धरोहर विश्व की पहचान है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सनातन धर्म में संस्कारों का विशेष महत्व है। इनका उद्देश्य शरीर, मन और मस्तिष्क की शुद्धि और उनको बलवान करना है जिससे मनुष्य समाज में अपनी भूमिका आदर्श रूप मे निभा सके। संस्कार का अर्थ होता है-परिमार्जन-शुद्धीकरण। हमारे कार्य-व्यवहार, आचरण के पीछे हमारे संस्कार ही तो होते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक व्यक्ति के सोलह (16) संस्कारों में शामिल हैं: गर्भाधान संस्कार, पुंसवन, सीमांतोयंत्रन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, कर्णवेध, विद्यारम्भ, उपनयन, वेदारम्भ, केशान्त, समावर्तन विवाह सरकार, अंत्येष्टि।

—————

यह कविता (हमारे संस्कार हमारी धरोहर।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मन की कुंठा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मन की कुंठा। ♦

ज्यों राख के ढेर में,
ज्वाला छुपी शान्त पड़ी है।
त्यों राहो की उलझनें,
मोड़-मोड़ पर छुपी खड़ी है।

आने दो बाहर,
हृदय की कुठां को।
खुली हवा में मन को,
विचरण करने दो।

मंजर अगर अभी है,
रूकावटों का।
फिर भी आशा की ज्योति से,
जीवन की सुखमय घड़ी है।

मत देखो घनघोर,
हृदय के अन्धेरो को।
स्वार्थ, भौतिकता, निर्लज्जा,
व विनाश के सपेरों को।

छुपा नही है अभी उम्मीदों का सूरज,
बिना अस्तित्व के बादलो मे।
युद्ध, महंगाई, बेरोजगारी तथा,
डकैती के दलालों में।

जागो नवयुवकों,
अपनी ऊर्जा का संचार करो।
लेष मात्र है ये उलझनें,
भारत का पुनः उद्धार करो।

सुभाष, भगत तथा आजाद,
कभी न डग में विचलित हुए।
नहीं चुनी राहें आसान,
तभी तो दिलों में अमर हुए।

समय गवाही जरूर देगा,
ईमानदारी व सत्य के…
मार्ग पर चलने की।
बदलेगी जरूर ये तस्वीर,
तू तमन्ना तो रख बदलने की।

मिलकर काफिला आगे बढे़गा,
तभी इस युद्ध को जीत पाएंगे।
सर्वस्व न्योछावर करके देखो,
तभी सच्चे सिपाही कहलाएगें।

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आजकल के नवयुवकों को क्या हो गया है, किसी को भी भारतीय संस्कृति, संस्कार व सभ्यता का रक्षा करना अपना दायित्व नहीं लगता आखिर क्यों? अब भी समय है जागो नवयुवकों, अपनी ऊर्जा का संचार करो। लेष मात्र है ये उलझनें, भारत का पुनः उद्धार करो। नशे के चंगुल से बाहर निकल कर भारत के नवनिर्माण में भागीदार बनो। इतिहास गवाह है सुभाष, भगत तथा आजाद, कभी न डग में विचलित हुए। कभी नहीं चुनी राहें आसान, तभी तो दिलों में अमर हुए सदैव के लिए। याद रखना तू समय गवाही जरूर देगा, ईमानदारी व सत्य के… मार्ग पर चलने की। बहुत ही जल्द बदलेगी जरूर ये तस्वीर, तू तमन्ना तो रख बदलने की। जब मिलकर काफिला आगे बढे़गा, तभी इस युद्ध को जीत पाएंगे। सर्वस्व न्योछावर करके देखो माँ भर्ती पर तभी सच्चे सिपाही कहलाएगें।

—————

यह कविता (मन की कुंठा।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं लाल सिंह वर्मा सुपुत्र श्री भिन्दर सिंह, गांव – खाड़ी, पोस्ट ऑफिस – खड़काहँ, तहसील – शिलाई, जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक शिक्षक हूं, शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है, हिंदी भाषा से सम्बन्धित साहित्यिक विधाओं में रचनाएं लिखना तथा विशेष रूप से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व मानवीय मूल्यों से सम्बन्धित रचनाओं का अध्ययन करना पसंद है। इस Platform (KMSRAJ51.COM) के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

शैक्षिक योग्यता – J.B.T, BEd., MA in English and MA in Hindi, हिंदी विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। अध्यापक पात्रता परीक्षा L.T., J.B.T., TGT पास की है। केंद्र विश्वविद्यालय PHD• (पीएचड•) प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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माँ जब तू हो जाए मेहरबान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ जब तू हो जाए मेहरबान। ♦

माँं जिस पर तू मेहरबान हो जाए,
उसका हर काम आसान हो जाए।

पहुंचाया है तूने उसको फर्श से अर्श तक,
बस निगाह रहे तेरे चरण से दर्श तक।
माँ जिस पर तू मेहरबान हो जाए,
उसका हर काम आसान हो जाए।

उस राहगीर की मंजिल,
खुद उस तक चल कर आए।
जिसकी राहें तेरे रहमो,
करम से इख्तियार हो जाए।
माँ जिस पर तू मेहरबान हो जाए,
उसका हर काम आसान हो जाए।

जिसने भी किया खुद को तेरे हवाले,
उसकी किश्ती हर तूफान से तू निकाले।
माँ जिस पर तू मेहरबान हो जाए,
उसका हर काम आसान हो जाए।

तेरी रहमतों का बरसे सुरूर इस कदर,
कुछ न बिगाड़ पाए दुनिया की बुरी नजर।
माँ जिस पर तू मेहरबान हो जाए,
उसका हर काम आसान हो जाए।

दाती तेरा देने का,
हर अंदाज होता निराला।
पाए वही जो तेरी,
धुन में खोकर बना मतवाला।
माँ जिस पर तू मेहरबान हो जाए,
उसका हर काम आसान हो जाए।

कुछ कहना सुनना,
क्यूं इस बेदर्द जमाने से।
हर खुशी मिल जाती,
एक तुझे अपनाने से।
माँ जिस पर तू मेहरबान हो जाए,
उसका हर काम आसान हो जाए।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मातारानी के चरणों में जो अपने आपको सम्पूर्ण समर्पण कर दे, उसके जीवन की सभी बाधाएं स्वतः ही हट जाती है। मातारानी की कृपा से उसके सर्व कार्य सिद्ध होने लगते है। माँ बहुत ही कृपालु है, ममता की मूर्ति माँ सदैव ही अपने बच्चों का ख़्याल रखती है। मातारानी आपकी सर्व मनोकामना पूर्ण करे। प्रेम से बोलो – जय माता दी!

—————

यह कविता (माँ जब तू हो जाए मेहरबान।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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भूखा इंसान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भूखा इंसान। ♦

चाहे हो किसी की सरकार,
ना खुश हो ना तू नाज़ कर।
गर हो भारत मां के सच्चे सपूत,
तहे दिल से भूखों का इलाज कर।

वो होंगे कितने बेशर्म,
जो दबा कर रखे हैं संपत्ति करोड़ों की।
गर हो तुम सच्चे सपूत,
भ्रष्टचारियों के खिलाफ़ आवाज़ बुलन्द कर।

ऐसे कानून का ईजाद कर,
छीन न पाए कोई गरीबों की रोटियां।
फिर तू जो चाहे तेरी मर्जी,
जनता जनार्धन पर आजीवन राज कर।

गरीबों की कोइ सुनता नहीं,
उनके लिए लड़ते लड़ते खुद हो गए अमीर।
जनता है भोली भाली,
इनको बताओ और इंकलाब का आगाज़ कर।

कोइ नहीं बांटता मुफ्त में रेवड़ी,
आत्मसम्मान से कैसा सौदा,
झूठी रेवड़ी से इंकार कर।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नेता लोग झूठा वादा कर जीत जाते है और गरीबों की कोइ सुनता भी नहीं, उनके लिए लड़ते-लड़ते खुद हो गए अमीर सभी नेता लोग। क्यों नहीं किसी ऐसे कानून का ईजाद करें की कोई भी छीन न पाए कोई गरीबों की रोटियां। फिर तू जो चाहे तेरी मर्जी, जनता जनार्दन पर आजीवन राज कर। बेचारी जनता है भोली भाली, इनको बताओ और इंकलाब का आगाज़ कर, इन्हे अपनी वास्तविक शक्ति से अवगत कराएं। एक बात सदैव ही याद रखें – कोई भी आपको इस संसार में मुफ्त में कुछ भी नहीं देता, उसका कुछ न कुछ स्वार्थ छीपा ही रहता है। गर हो भारत मां के सच्चे सपूत, तहे दिल से भूखों का इलाज कर तू। जरा सोचो वो होंगे कितने बेशर्म, जो दबा कर रखे हैं संपत्ति करोड़ों की। गर हो तुम सच्चे सपूत, भ्रष्टचारियों के खिलाफ़ आवाज़ बुलन्द कर, और उन्हें उनके कर्मों की सजा दे जल्द से जल्द।

—————

यह कविता (भूखा इंसान।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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गाँव की व्यथा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गाँव की व्यथा। ♦

लोग थे मेरे भोले भाले,
लोग थे मेरे भोले भाले।
लाखो संकट सहन किए,
मानव को मानवता मे रहने दिए,
कभी ना हुए ओ मन के काले।

चका चौध की इस दुनिया को,
शांति उनकी रास न आई।
कई अंधेरों ने आगे आकर,
उलटी उनको राह दिखाई।

देश से विदेश गए कुछ,
गाँव से प्रदेश गए कुछ।
लगी भनक जब चका चौध की,
अपनों को ही मानने लगे तुच्छ।

पर औकात क्या थी,
उनकी ऐसा करने की।
अगर जागरूक सरकारी तंत्र होता,
उन भोले ग्रामीणों के लिए,
इनके पास उन्नति का मंत्र होता।

भेज दिया गाँव को ढूंढने,
एक पतली सी सड़क को।
हाफ़्ती हाफ़्ती गाँव पहुंची,
बची कसर पूरी करने को।

आना था उसे वर्षो पहले,
बड़ी उलझनों से आज आई।
ग्रामीण संस्कृति को आँख दिखाकर,
फिर वह सभ्य कहलाई।

उदय होता…
सम्पूर्ण सनातनता का।
यदि गाँव का पूर्ण उदय होता,
रखते लाज मेरे संरक्षण की।
हाल न आज ऐसा होता,
लोग थे मेरे भोले भाले,
लोग थे मेरे भोले भाले।

♥ गाँव को समर्पित कविता। ♥

♦ लाल सिंह वर्मा जी – जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ♦

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• Conclusion •

  • “लाल सिंह वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — देश से विदेश गए कुछ, गाँव से प्रदेश गए कुछ। आखिर क्यों आजकल के बच्चें गांव से शहर को जाकर वहां की लगी भनक जब चका चौध की अपना सुध-बुध खोकर गांव वालों को व अपनों को ही मानने लगे तुच्छ। पर औकात क्या थी, उनकी ऐसा करने की। अगर जागरूक सरकारी तंत्र होता तो उन भोले ग्रामीणों के लिए, इनके पास भी उन्नति का मंत्र होता। गांव भी उन्नति से सराबोर होता। अभी कुछ समय पहले जब कोरोना आया था तो सभी को अपना गांव ही याद आया सभी बचने के लिए गांव भागकर आये। उदय होता… सम्पूर्ण सनातनता का, यदि गाँव का पूर्ण उदय होता। रखते लाज मेरे संरक्षण की हाल न आज ऐसा होता। गांव के लोग थे मेरे भोले भाले। एक बात याद रखना – आज भी गांव में इंसानियत जीवित है, ताज़ी हवा व खानपान सात्विक है, सभी मिल जुलकर प्रेम से रहते है, मुसीबत में एक दूसरे के काम आते है। जब जब तुम तकलीफ में रहोगे तुम्हे अपना गांव ही याद आएगा।

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यह कविता (गाँव की व्यथा।) “लाल सिंह वर्मा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं लाल सिंह वर्मा सुपुत्र श्री भिन्दर सिंह, गांव – खाड़ी, पोस्ट ऑफिस – खड़काहँ, तहसील – शिलाई, जिला – सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक शिक्षक हूं, शिक्षा विभाग में भाषा अध्यापक के पद पर कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है, हिंदी भाषा से सम्बन्धित साहित्यिक विधाओं में रचनाएं लिखना तथा विशेष रूप से सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व मानवीय मूल्यों से सम्बन्धित रचनाओं का अध्ययन करना पसंद है। इस Platform (KMSRAJ51.COM) के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

शैक्षिक योग्यता – J.B.T, BEd., MA in English and MA in Hindi, हिंदी विषय में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है। अध्यापक पात्रता परीक्षा L.T., J.B.T., TGT पास की है। केंद्र विश्वविद्यालय PHD• (पीएचड•) प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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वीरों की सदा से जाया है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वीरों की सदा से जाया है। ♦

यह धरा नहीं है अधीरों की,
यह वीरों की सदा से जाया है।
टीका नहीं है कोई इस धरा पर सदा,
हमने संघर्षों से सबको हटाया है।

आए कई और गए कई है,
सदियों से यहां आतताई हैं।
हम लड़े – भिड़े छल छद्म हटाया,
आज भी पछुआ से हमारी लड़ाई है।

दया धर्म को हटाने चले जो,
हमने उनको सबक सिखाना है।
जो इठला रहे हैं फूहड़ कामयाबी पर अपनी,
उन्हे औंधे मुंह गिराना है।

आओ मिलकर प्रयत्न करे हम,
संस्कृति विभंजकों को सबक सिखाना है।
पछुआ जीत का परचम फहराने वालों को,
हर हाल में धूल चटाना है।

भारत के खोए गौरव को फिर से,
विश्व पटल पर स्थापित करवाना है।
अभिभूत होकर के सब कह उठे कि,
चलो, भारत दर्शन को हमने जाना है।

कोई खून खराबा नहीं चाहते हैं हम,
बस कागज पर कलम चलाना है।
पछुआ ज्ञान को हटा कर भारत का,
मूल ज्ञान सबके सामने लाना है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह भारतभूमि सदा से ही वीरों की भूमि रही है भारत मां के वीर सपूतों ने इतिहास में स्वर्णिम अध्याय रचा है ये सभी अपनी मातृभूमि को स्वर्ग से भी अधिक महान और पवित्र मानने वाले देश के ऐसे सपूत हैं जिन पर पूरा देश सदैव ही गर्व करता है। वर्तमान में भी वीरता की इस परंपरा को बरकरार रखते हुए हमारे बहादुर सैनिक बॉर्डर पर अपना फर्ज बखूबी निभाते हैं।

—————

यह कविता (वीरों की सदा से जाया है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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क्षुधा और असंतुष्ट हो गई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ क्षुधा और असंतुष्ट हो गई। ♦

उपवन-उपवन के कोंछे में,
तपते अधर पिपासु बन चूमें।
क्षुधा और असंतुष्ट हो गई,
रद् कलियों को जब-जब चूमे।

अधिवासित अलि मदिर अंक में,
बिखरा हुआ मधुर पुष्प-पराग।
जागृत हो उठता गातों में,
ले अँगड़ाई प्रीति अनुराग।
सुधबुध खोई रोम-रोम बहार,
मृदुल प्रमादमयी सुगंधों में।

बार-बार हुआ मन आहत,
लुके – छिपे अनछुये शूलों से।
चुलबुल हृदय हुआ है घायल,
उच्छवासित कलियों से।
तकते-तकते अवलुंचित तितलियाँ,
यह अभिवाँछित चाहें झूमें।

चिर-परिचित कामदूती ये राहें,
करने लगी मन को मोहित नवेली।
उनकी ओर बढ़े कदमों में मैनें,
जन्म-जन्मांतर की वेदनायें झेली।

बिखरे आभास ताकते रहते,
अविरल गिरते आँसू में।
क्षुधा और असंतुष्ट हो गई,
रद् कलियों को जब-जब चूमें।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (क्षुधा और असंतुष्ट हो गई।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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साथी चलता चल।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ साथी चलता चल। ♦

हृदय में ठंडी – ठंडी आहें,
सर पर खुली धूप सुलगती।
नुकीले शूलों से बिंधते पग और,
सीने में तीक्ष्ण कंटक चुभती।
भीग चुका उद्यम फुहारों से,
बिंध-बिंध शूलों के आँचल।

अनन्त अभिशापित पगडंडी है,
कहाँ होगा नया सवेरा।
अंतस् भयाकुल सन्नाटा चिघाड़े,
चेतना काट रही गहन अँधेरा।
कौन बँधाये धीरज उर को,
कौन देगा कदमों को संबल।

रूक्ष कंठों से तपे अधर तक,
श्वांस – श्वांस में जलती ज्वाला।
मिली नहीं मरु में स्रोतस्विनी,
जो कंठों को दे इक बूँद का प्याला।
दिखा नहीं कहीं आशाओं को,
मधुर तृप्ति की बूँद मधुल।

बस बची थोड़ी अँजुल भर राख,
जले सपनों की मेरे पास।
डसती है झूठी कसमें,
अंतस् को अपनों की पल-पल आस।
बह रहा खाली आँखों से,
कतरा-कतरा जल निश्चल।

दूर-दूर तक फैल दुर्गम राहों पर,
शूल – कंटक भरे जंगल।
हर पाँव यहाँ है घायल,
पथ कहे साथी चलता चल।
रुके नहीं बढ़ते चलता चल,
साथी गम की राहों पर अकेला चल।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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पुरुष बेचारा बिसारा गया।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पुरुष बेचारा बिसारा गया। ♦

औरत की पीड़ा तो सबने लिखी पर,
जाने क्यों, पुरुष बेचारा बिसारा गया?
औरत पर दया कर लेते हैं सब कोई,
गृहस्थी में पुरुष बेचारा मारा गया।

जोरू की सुने तो मां है कहती,
‘है बेटा ही हाथ से निकल गया।’
मां की सुने तो जोरू है रुसती,
करेगा, कौन बेचारे पर है जी दया?

घर वालों की सुने तो ससुराल है रुस्ता,
ससुराल की सुनने पर रूठतें हैं घर वाले।
शादी के बाद होती हैं ज्यों काली रातें,
मुश्किल ही होते हैं जीवन में उजाले।

बजुर्गों का दायित्व और बच्चों की चिन्ता,
किस बात को कैसे और कब तक निभाएं?
चेहरे पर मुस्कान और दिल में है हर पीड़ा ,
किसको बताएं और किस किससे छुपाएं?

चाहता है बताना कभी चाह कर किसी से,
उससे पहले ही, सुनने वाले अपनी सुनाएं।
इस नर पुराण में हैं नर की कई दुविधाएं,
नारी को यह सब कोई क्यों कर समझाएं?

पुरुष बेचारा हर गम को ले छाती में,
घुट-घुट है पिसता और मर है जाता।
कर दफ़न हर राज वह अपने ही साथ,
दिल की बात को न कभी सामने लाता।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

Must Read : क्या लिव इन रिलेशनशिप ठीक है?

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — पुरुष बेचारा अपने मन की पीड़ा किससे कहे, आखिर उसकी भी तो अपनी भावनायें व स्वप्न है, आखिर उसे क्यों नहीं समझते है लोग। इस संसार में पुरुष व स्त्री एक दूसरे के पूरक है। अब महिलाएँ घर की चहारदीवारी लाँघकर प्रत्येक क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। इस बदलाव का मुख्य कारण है पुरुषों की सोच में समय के साथ बदलाव, उनकी मानसिकता में भी बदलाव। पुरुष सही मायने में प्रेम की परिभाषा को समझा और महिला को जीवन पथ पर उन्नति की तरफ़ जाने की प्रेरणा दी। वो पिता, भाई, पति, दोस्त कोई भी रूप में साथ देते रहते है। पुरुषों को भी अपने हक़ का पूरा प्यार व सम्मान मिलना चाहिए। पुरुष किसी से कह नहीं पाता है, लेकिन इसका ये मतलब बिलकुल भी नहीं की उनकी भावनावों को सम्मान ना दिया जाये। उन्हें भी समझे और उनका ख्याल रखें।

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यह कविता (पुरुष बेचारा बिसारा गया।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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सौगंध तुम्हें मेरे आँसुओं की।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सौगंध तुम्हें मेरे आँसुओं की। ♦

सौगंध तुम्हें मेरे आँसुओं की,
अपने सारे आँसू मुझे दे देना।
सौंपना मुझे राहों के सारे काँटे,
सुवासित कुसुम तुम ले लेना।

अभी तक जगे रात अकेली,
रोये हम छुप-छुपकर सूनेपन में।
बीत गये समय साथ चलने के,
अश्रु भरी उदासी लिये अँखियों में।
मेरी गहन वेदना से कहीं,
कभी तुम्हारा अंतस् ना दु:खे।

सजे – धजे दरवाजों पर जब,
गूँजती कहीं शहनाई है।
टूट कर पलकों पर सावन,
हृदय के घावों पर छाती पुरवाई है।
जलती ज्वाला-सा जीवन मेरा,
तुम्हें ऐसा जीवन ना कभी मिले।

बेबस हंसा मिले अकेला तो,
थोड़ा घट से घूँट जल का पिला देना।
अपनी थोड़ी सी तृष्णा देकर,
शीतल हृदय को उसके कर देना।
मैं बहुत तड़पा हूँ जग में,
वो पंछी प्रीति-प्यास में ना तड़पे।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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