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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिन्दी-कविता

चलो दिवाली मनाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Poem on Diwali | चलो दिवाली मनाएं।

The divine light of Diwali guide you on your path to success and happiness.

चलो घी के दीपक जलाएं,
जलाएं नए ऊर्जा उत्साह से,
चलो दिवाली मनाएं ऐसे,
मनाएं एक नए अंदाज़ में।

जगमग जगमग रौशन हो,
ऐसे दीपक जलाएं हम,
चलो दिवाली मनाएं ऐसे,
मनाएं एक नए अंदाज़ में।

क्यूं न अज्ञानता को मिटाएं,
ज्ञान के नए दीप जलाएं,
चलो दिवाली मनाएं ऐसे,
मनाएं एक नए अंदाज़ में।

पटाखे फुलझड़ियों का प्रदूषण रोकें,
तेल घी के दीपक जलाएं,
घरों को रंगो की रोशनी से सजाएं,
दीवाली मनाएं नए अंदाज में।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — दिवाली को एक नए अंदाज़ में मनाने का आह्वान किया गया है। इसमें घी के दीपक जलाकर सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार करने का संदेश दिया गया है। कवि यह कहता है कि ज्ञान का प्रकाश फैलाकर अज्ञानता को मिटाना चाहिए और पर्यावरण को बचाने के लिए पटाखों और फुलझड़ियों का त्याग कर दीप जलाने चाहिए। इसके साथ ही घरों को रंगों और रौशनी से सजाकर दिवाली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाना चाहिए।

—————

यह कविता (चलो दिवाली मनाएं।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मेरा चांद मुझे आया है नजर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mera Chand Mujhe Aaya Hai Nazar | मेरा चांद मुझे आया है नजर।

she starts her fast by staying without water, she pleads to Karva Mata, may my beloved live a thousand or two thousand years, don't make me wait anymore, just show me your face. I have seen my moon.

कब आओगे,
कर रही इंतजार,
नैना हो रही लाचार,
सज संवर कर बैठी तैयार,
सजाकर माथे पर बिंदिया,
साथ में गले का हार,
रचा रखी हाथों में मेहंदी,
बस कर रही एक पुकार,
कब आओगे?

जिसका है इंतजार,
हर सुहागिन जिसकी करती आस,
दिल में बसा राखी विश्वास,
निर्जला रह, करती व्रत की शुरुआत,
करवा माता से लगाती गुहार,
पिया की उम्र हो हजार दो हजार,
अब न तरसाओ,
जरा दर्श तो दिखलाओ।

तेरे दीदार में मन हो रहा अधीर,
अब तो आ जाओ,
नयनों की प्यास बुझाओ,
पूरी कर दो मेरी आस,
आ जाओ मेरे पास।

क्यों रूठकर बैठे हो,
कहां छुपकर बैठे हो,
आ जाओ भी एक बार,
पुकार सुन,
शायद चांद को आई रहम,
जिस चांद का कर रही थी इंतजार,
वो चांद मुझे आया है नजर।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता एक सुहागन के इंतजार और प्रेम की गहराई को दर्शाती है। कविता में वह अपने पति के आगमन की प्रतीक्षा कर रही है, सज-धजकर तैयार बैठी है, माथे पर बिंदी और हाथों में मेहंदी रचाई है। उसका मन व्याकुल है, और वह लगातार अपने पति के लौटने की पुकार कर रही है। करवा चौथ के व्रत में वह निर्जला रहकर, करवा माता से अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर रही है।वह पति से रूठने या छुपने का कारण पूछती है, और उसे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पुकारती है। अंत में, उसे प्रतीक्षा में राहत मिलती है जब वह चांद को देखती है, जिसका उसे लंबे समय से इंतजार था।

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यह कविता (मेरा चांद मुझे आया है नजर।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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करवा चौथ का चाँद।

Kmsraj51 की कलम से…..

Karva Chauth Ka Chand | The moon of Karva Chauth| करवा चौथ का चाँद।

Small fights and arguments keep happening between husband and wife throughout the year, but on this special day of Karva Chauth, a new feeling of love and bonding arises between the two.

भले सारी दुनिया के लिए आम हूँ मैं,
मगर कोई है जिसके लिए ख़ास हूँ मैं।
लगाई है मेंहदी उनके नाम की आज मैंने,
जिनकी धड़कनों में बसा अहसास हूँ मैं।

मेरा दिन भर भूखे रहना उनके लिए सजा है,
किन्तु मेरे लिए इस भूख का अपना मज़ा है।
ये मेरे निश्चल प्रेम की अभिव्यक्ति का है ढंग,
इसलिए मेरी रजा में ही शामिल उनकी रजा है।

मेरा दिन भर कुछ न खाना – पीना भाता नहीं उन्हें,
अपने तर्कों से बार – बार व्रत की समीक्षा वो करते हैं।
शाम ढलते ही टकटकी लगाकर देखते हैं आसमान को,
मुझसे ज़्यादा आतुरता से चाँद की प्रतीक्षा वो करते हैं।

सुहागिनों के गजरे को छूकर बयार महक जाती है,
देख सँवरी सजनी सजना की तबियत बहक जाती है।
चूड़ी खनके, पायल छनके, माथे पर दमके बिंदिया,
पंछी सम कलरव कर सनम की चाहत चहक जाती है।

♦ वेदस्मृति ‘कृती‘ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस मुक्तक में समझाने की कोशिश की है — यह मुक्तक प्रेम और समर्पण की भावना को व्यक्त करती है। कवयित्री कहती है कि भले ही वह पूरी दुनिया के लिए साधारण हो, लेकिन किसी विशेष व्यक्ति के लिए उसका अस्तित्व बहुत खास है। उसने अपने प्रिय के नाम की मेहंदी लगाई है और उनके प्रेम का अहसास उसकी धड़कनों में बसा हुआ है।मुक्तक में करवा चौथ व्रत का संदर्भ दिया गया है, जहां भूखे रहना कवि के लिए एक सुखद अनुभव है, क्योंकि यह उसके प्रेम की अभिव्यक्ति है। वहीं, उसके प्रिय को यह भूखा रहना पसंद नहीं है और वे बार-बार इस व्रत पर तर्क करते हैं।शाम होते ही प्रियजन आकाश में चाँद के दर्शन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, और उनकी यह आतुरता व प्रेम अधिक प्रतीत होती है।अंत में, मुक्तक सजने-संवरने और सुहाग की प्रतीकों (जैसे गजरा, चूड़ी, पायल, बिंदिया) की महत्ता को रेखांकित करती है। ये सभी चीजें प्रेमी के मन को प्रसन्न कर देती हैं और उनके बीच की चाहत को और भी प्रबल बना देती हैं। मुक्तक प्रेम, उत्सव, और समर्पण की सुंदर भावनाओं का जीवंत चित्रण करती है।

—————

यह मुक्तक (करवा चौथ का चाँद।) ” वेदस्मृति ‘कृती‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई• आई• टी• शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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करवा चौथ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Karwa Chauth | Karva Chauth| करवा चौथ।

Karva Chauth - wife fasts for the long life and happiness of her husband.

करवाचौथ की पावन बेला में, भव्य भारत देश की शोभा है।
सजना की दीर्घायु का, व्रत रखती सजनी का जो योद्धा है।

निर्जल दिनभर रहती नारी, चन्द्र दर्शन पर ही जल पीती है।
सचमुच इस पर्व से लगता है, वह पति के खातिर जीती है।

वह साल भर का लगाई – झगड़ा, बदलता आज की पूजा में।
मेरी जिन्दगी में बस तुम ही हो सजना, और कोई न दूजा है।

वह छलनी से चांद को देखना, पति प्रेम का घूंट भर पानी है।
चेहरे से पत्नी के झलकता कि, वह तो पति की दीवानी है।

अरे जन्मना – मरना लड़ना – झगड़ना, जीवन की कहानी है।
करवाचौथ की रसम से आती, पति-पत्नी में फिर जवानी है।

हार – शृंगार से सजती सजनी, सजना भी भेंट कुछ लाता है।
विदेशी सभ्यताएं क्या जाने, भारत दाम्पत्य कैसे निभाता है?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता करवाचौथ के पर्व की पवित्रता और उसकी सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाती है। यह त्योहार भारत की दाम्पत्य परंपरा का प्रतीक है, जहाँ पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए उपवास रखती है। दिनभर बिना जल ग्रहण किए वह चंद्र दर्शन के बाद ही जल और भोजन करती है, जिससे उसकी पति के प्रति प्रेम और समर्पण झलकता है।कविता यह भी बताती है कि पति-पत्नी के बीच छोटे-छोटे झगड़े और खटपट साल भर चलते रहते हैं, लेकिन करवाचौथ के इस विशेष दिन पर दोनों के बीच प्रेम और जुड़ाव का नया एहसास जागता है। छलनी से चाँद को देखने और पति से पहला घूंट पानी पीने की रस्म में नारी का प्रेम झलकता है।इसके अलावा, कविता में यह संदेश भी दिया गया है कि भारतीय दाम्पत्य जीवन की गहराई को पश्चिमी सभ्यताएं नहीं समझ सकतीं। इस पर्व के माध्यम से जीवन में फिर से प्रेम की ताजगी आ जाती है और पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम को नये सिरे से अभिव्यक्त करते हैं।

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यह कविता (करवा चौथ।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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ये है धर्मशाला।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yeh Hai Dharamshala | ये है धर्मशाला।

The natural beauty, especially the rains, the Buddhist Guru's abode in McLeod Ganj, and the Bhagsu Falls, are all captivating.

धौलाधार है जहाँ की पहचान।
इन्द्रुनाग देव है वहाँ की शान॥

वर्षा हर किसी पल हो जाती है शुरू वहाँ।
इससे सुंदर शहर हो सकता है और कहाँ॥

मैकलोड़गंज में बौध गुरु का है वास।
भागसू जलप्रपात है वहाँ से थोड़ा ही पास॥

करेरी झील की सुंदरता मनमोहक है बड़ी।
पर सड़कों की चढा़ई है भी थोड़ी खड़ी॥

शहीद स्मारक शहीदों की याद है दिलाता।
दुश्मनों को कैसे खदेड़ा होगा ये अहसास है कराता॥

विश्व में बन रही है जिसकी पहचान।
वो क्रिकेट मैदान है यहाँ की जान॥

शिक्षक महाविद्यालय ने अपनी अलग सी पहचान है बनाई।
वहीं केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने भी शिक्षा की अलख है जगाई॥

सैलानी उत्सुक है आने को यहाँ।
उनके लिए शायद यह है अलग सा जहाँ॥

जिसको भी मौका मिलता है यहाँ आने का।
वो नाम ही नहीं लेता यहाँ से वापिस जाने का॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि एक ऐसे स्थान की सुंदरता और विशेषताओं का वर्णन कर रहे हैं, जिसकी पहचान धौलाधार पर्वतमाला और इन्द्रुनाग देव से है। वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, विशेषकर बारिश, मैकलोडगंज में बौद्ध गुरु का वास, और भागसू जलप्रपात, सभी मनमोहक हैं। करेरी झील की सुंदरता भी उल्लेखनीय है, हालांकि उसकी चढ़ाई थोड़ी कठिन है। शहीद स्मारक वीरों की शहादत की याद दिलाता है और दुश्मनों के खिलाफ उनकी बहादुरी का अहसास कराता है। विश्व प्रसिद्ध क्रिकेट मैदान भी यहाँ की पहचान है। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक महाविद्यालय और केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। सैलानियों के लिए यह जगह एक अद्वितीय अनुभव है, और जो भी यहाँ आता है, वह इस जगह को छोड़कर जाना नहीं चाहता।

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यह कविता (ये है धर्मशाला।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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राष्ट्र अखण्ड बनाना है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Rashtra Akhand Banana Hai | राष्ट्र अखण्ड बनाना है।

Do not hand over the ladder of power to those whose aim is to usurp power. The nation should be made united.

हमे न बदलना वक्फ बोर्ड को,
न ही सनातन में कुछ करना है।
हमें तो कानून तीस – तीस ए को,
भारत के खातिर एक करना है।

तीन सौ सत्तर हटी और पैंतीस ए भी हटी,
कानून तीस और तीस ए को एक बनाना है।
भारत के संविधान में नया संशोधन कर के,
भारत में यूनिफार्म सिविल कोड को लाना है।

हुई चूक हो किसी भी स्तर पर तब,
अब उलझी सूत को ही सुलझाना है।
जाति – धर्म के धागों से ही मिलाकर,
भारत के भविष्य का स्वेटर बनाना है।

जो भारत का था वह भारत में ही रहेगा,
हमें तो अवैध घुसपैठ को ही भगाना है।
भगाओ उन्हे मिलकर सब भारत वासी,
जिन्होंने रिहोंगियाओं को पहचाना है।

चिटा जैसा विनाशक जहर जो फैलाए,
उसको भला क्यों कर तुम्हे बचाना है?
वह बड़ा है या फिर छोटा है कोई यारो,
उसे हर हाल में बेनकाब ही करवाना है।

इससे पहले कि देश में धर्म युद्ध हो,
हमें राष्ट्र धर्म को ही शुद्ध करवाना है।
युवा पीढ़ी को बहकाने वालों को हमें,
युवा को समझाकर सबक सिखाना है।

हम दे देंगे सब कुछ दान भी अपना,
हर हाल में राष्ट्र अखण्ड बनाना है।
देश विभंजन गद्दारों को तो भाइयों,
शमशीर उठा कर ही बोध कराना है।

सत्ता सिंहासन उसे ही दिया जाए,
जिसका मकसद देश बचाना है।
मत सौंप सत्ता की सीढ़ी उसको,
जिसका मकसद सत्ता हथियाना है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि कवि भारत में एकता, अखंडता और समरसता को बढ़ावा देने की बात करता है। वह यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) लागू करने की वकालत करते हैं, ताकि देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून हो। उन्होंने अनुच्छेद 370 और 35A के हटने का उल्लेख किया है और चाहते हैं कि संविधान में एक और संशोधन किया जाए। कवि ने अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर करने की बात की है, विशेष रूप से रोहिंग्याओं को, और देश में फैल रहे विनाशकारी तत्वों जैसे नशे (चिटा) का विरोध किया है। वह समाज को चेताने का आह्वान करते हैं कि राष्ट्र के लिए खतरनाक तत्वों को बेनकाब किया जाए।कवि ने देश में धर्म के नाम पर विभाजन या युद्ध की संभावना से बचने के लिए राष्ट्र धर्म को शुद्ध करने की बात की है। युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन देने का भी आह्वान किया गया है ताकि उन्हें बहकाया न जा सके। अंत में, उन्होंने देश की अखंडता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सत्ता ऐसे व्यक्ति को सौंपने की बात की है, जिसका मकसद सिर्फ सत्ता हथियाना न हो, बल्कि देश को बचाना हो।

—————

यह कविता (राष्ट्र अखण्ड बनाना है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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गांधीगिरी अपनाओ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gandhigiri Apanao | गांधीगिरी अपनाओ।

A graphic representation featuring the word "Gandhi" repeated multiple times, highlighting its cultural and historical importance.

अहिंसा
की हो बात,
स्वतंत्रता
की मिले सौगात,
सादगी
जिसकी पहचान,
सत्य
जिसका कमान,
बापू
तुम हो महान।

सत्याग्रह
जिसकी शक्ति,
गांधी
थे वो व्यक्ति,
निडरता
जिससे मिला न्याय,
ब्रह्मचर्य
तालु पर नियंत्रण पाए,
बापू
इसीलिए महान कहलाए।

धोती
जिसकी पहचान,
लाठी
शास्त्र समान,
कर्मठता
ब्रह्म का वरदान,
सरलता
जीवन को बनाए आसान,
बापू
तुम्हीं हो राष्ट्र का सम्मान।

आज का दौड़
भ्रष्टाचार,
मन का गौर
गलत विचार,
सत्य का नाश
बना लाश,
माहौल का विनाश
बन गया दास,
फिर कैसे होगा विकास?

आ जाओ
फिर एक बार,
बदलेगी
दिशाएं चार,
सत्य
पसारेगा पैर,
हिंसा
की अब तो खैर,
बापू
आ जाओ करने सैर।

सोच
मन की बदलो,
बोल
मीठे ही बोलो,
सद्भावना
दिल से जोड़ो,
अहिंसा
का दामन न छोड़ो,
गांधीगिरी
से अब नाता जोड़ो।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि महात्मा गांधी (बापू) को महानता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अहिंसा, सत्य, और सादगी उनके जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत थे। सत्याग्रह और ब्रह्मचर्य से उन्होंने निडरता और आत्म-नियंत्रण का प्रदर्शन किया, और इसी कारण उन्हें महान माना गया। उनकी पहचान धोती, लाठी और सरल जीवन शैली से होती थी, जो उन्हें राष्ट्र का सम्मानित व्यक्ति बनाती है। कवि आज के भ्रष्ट और हिंसक माहौल की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि गांधी जी के विचार और सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। वे आह्वान करते हैं कि हम गांधीगिरी (गांधी के विचारों) से जुड़ें, मन को शुद्ध करें, और अहिंसा, सत्य, और सद्भावना का पालन करें ताकि समाज में बदलाव आ सके।

—————

यह कविता (गांधीगिरी अपनाओ।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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हिन्दी किस्मत की मारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Kismat Ki Mari | हिन्दी किस्मत की मारी।

The foreign pomp and show is becoming too much, that is why Hindi could not become our national language. Speak foreign language but give priority to Hindi, Hindi is our mother, do not forget this.

मैं हूँ हिन्दी किस्मत की मारी,
मुझ पर विदेशी भाषा पड़ रही है भारी।
हर कोई विदेशी भाषा बोलना समझता है शान,
न जाने क्यों खो रहे हैं हम अपनी पहचान।

वर्ष में एक दिन है आता,
जब हर कोई हिन्दी दिवस है मनाता।
बड़ी बड़ी बातें हिन्दी पर है बोली जाती,
अगले ही दिन हर किसी के मुंह में विदेशी भाषा है आती।

जो भी हिन्दी में है बात करता,
वो विदेशी भाषा न बोलने का खामियाजा है भरता।
रोजगार नहीं मिलता, बात करने को कोई तैयार नहीं होता,
हिन्दी बोलने वाला शायद यूँ ही नहीं रोता।

विदेशी तड़क भड़क हो रही है भारी,
तभी तो हिन्दी नहीं बन पाई राष्ट्र भाषा हमारी।
विदेशी बोलो पर हिन्दी को प्राथमिकता दो,
हिन्दी हमारी जननी इस बात को मत भूलो।

नई पीढ़ी हिन्दी से अनभिज्ञ सी हो रही,
उन्हें तो विदेशी भाषा ही लगती है सही।
हिन्दी है हमारी जान इससे है हमारी पहचान,
कहीं यूँ ही न धूल जाए राष्ट्र भाषा बनाने के अरमान।

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति और उससे जुड़ी चिंताओं को व्यक्त किया है। हिंदी कहती है कि वह किस्मत की मारी है, क्योंकि विदेशी भाषाओं का प्रभाव उस पर भारी पड़ रहा है। लोग विदेशी भाषा बोलने को शान समझते हैं, जिससे अपनी पहचान खोती जा रही है। हिंदी दिवस पर लोग हिंदी की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन अगले ही दिन वे फिर से विदेशी भाषा बोलने लगते हैं। हिंदी में बात करने वालों को सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें रोजगार और सम्मान नहीं मिलता। विदेशी संस्कृति और भाषा का प्रभाव बढ़ने से हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है। नई पीढ़ी हिंदी से दूर हो रही है और विदेशी भाषाओं को ही सही मान रही है। कवि इस बात पर जोर देता है कि हमें विदेशी भाषा का सम्मान करते हुए भी हिंदी को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि हिंदी हमारी पहचान और आत्मा है।

—————

यह कविता (हिन्दी किस्मत की मारी।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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मैं हूं हिंदी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Main Hoon Hindi | मैं हूं हिंदी।

I am the sharp edge of words, maybe I am the base? I am the source of soul and unity, I am the propagator of the country's culture, I teach the lessons of Tatsam Tadbhav, I decorate the alphabet. I am Hindi.

मैं हूं हिंदी,
कहने के लिए,
आपकी बिंदी,
सर का ताज हूं,
राज-काज का साधन,
भाषा की अभिव्यक्ति हूं।

पतंगों की डोर संग,
भावनाओं की उड़ान हूं,
देश की आन, बान-शान,
एकता की बुनियाद हूं,
अक्षर का कराती हूं ज्ञान,
ईश्वर ने जो दिया है वरदान।

शब्दों की तीखी धार हूं,
शायद मैं ही आधार हूं?
आत्मा एवं एकता का सूत्रधार,
देश की संस्कृति का प्रचारक हूं,
तत्सम तद्भव का पाठ पढ़ाती,
वर्णमाला का साज सजाती।

बापू ने जिसे किया वरण,
महादेवी वर्मा ने दिया शरण,
जो सबके दिलों को जोड़ती,
सबके अरमानों को घोलती,
फिर भी एक बात,
जो मेरे मन को है कचोटती।

जिससे है देश का मान,
जो है राष्ट्र की पहचान,
फिर क्यूं हो रहा उसका अपमान,
मिट रही मेरी मिली पहचान,
मेरे अस्तित्व पर ही लग रहा ग्रहण।

जिसे संविधान ने है अपनाया,
फिर दूसरी भाषा ने,
लोगों के दिलों में जगह कैसे बनाया?

अब क्या होगा मेरे भाई?
क्या फिर मिल सकेगी?
मेरी पुरानी खोई पहचान,
क्या मिल पाएंगे?
खोए सभी ओहदे तमाम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने हिंदी भाषा को एक जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें हिंदी स्वयं अपनी कहानी बता रही है। हिंदी कहती है कि वह न केवल अभिव्यक्ति का साधन है, बल्कि राष्ट्र की आन, बान, और शान का प्रतीक है। यह भाषा भावनाओं को उड़ान देती है, एकता की नींव रखती है, और देश की संस्कृति का प्रचार करती है। हिंदी को बापू और महादेवी वर्मा ने अपनाया, और यह भाषा सभी को जोड़ती है। लेकिन हिंदी यह भी कहती है कि वर्तमान में उसका अपमान हो रहा है और उसकी पहचान धुंधली पड़ रही है। वह प्रश्न करती है कि जब उसे संविधान ने अपनाया है, तो दूसरी भाषाओं ने लोगों के दिलों में जगह कैसे बना ली। कविता के अंत में हिंदी अपनी पुरानी खोई हुई पहचान और सम्मान को वापस पाने की उम्मीद करती है, और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए चिंतित है।

—————

यह कविता (मैं हूं हिंदी।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hindi Ka Maan Badhayenge | हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

The poet tells that Hindi is the language that is learned from the mother and gets respect all over the world.

जो भाषा मां से सीखी जाती,
जग में सबका मान बढ़ाती,
एकता का प्रतीक बन जाती,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी की बिंदी जिसके भाल,
प्रकृति भी बिन पूछें न चलती चाल,
संस्कृति की जिससे होती पहचान,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी ही है सुर संगीत और तान,
इसीलिए मेरा देश कहलाता महान,
सरल सौम्य स्वभाव है जिनका,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

जो है देश की आन बान और शान,
जिससे बढ़ता है देश का मान,
जिस भाषा पर हमसभी को है नाज,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

अक्षर से अक्षर का ज्ञान कराती,
उच्चारण में जिसके स्पष्टता है होती,
जो प्रभावमयी और गतिशील है होती,
उसकी गाथा जन-जन को बतलाएंगे,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

हिंदी हिंदुस्तान की पहचान है,
इस हिंदी के बिना जीवन वीरान है,
जिससे ही मिला जग में सम्मान है,
वो कोई और नहीं हिंदी हिंदुस्तान हैं,
उस हिंदी का मान बढ़ाएंगे।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता हिंदी भाषा के महत्व और गौरव को दर्शाती है। कवि बताता है कि हिंदी वह भाषा है जो मां से सीखी जाती है और पूरे संसार में सम्मान दिलाती है। यह एकता का प्रतीक बनती है और लोगों को जोड़ने का काम करती है। हिंदी हमारी संस्कृति और पहचान का स्रोत है, और इसके बिना जीवन अधूरा है। यह सरल, सौम्य, और स्पष्ट भाषा है जो हमारे देश की आन, बान और शान है। इस कविता के माध्यम से कवि यह प्रतिज्ञा करता है कि वह जन-जन तक हिंदी की महानता को पहुंचाएगा और हिंदी का मान बढ़ाएगा।

—————

यह कविता (हिंदी का मान बढ़ाएंगे।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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