• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for 2021-KMSRAJ51 की कलम से

2021-KMSRAJ51 की कलम से

इतिहास को जीना होगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ इतिहास को जीना होगा। ♦

हमें इतिहास को फिर-फिर से जीना होगा।
तस्वीर बजरंग लॉकअप में ही सीना होगा।
आदिकालीन इतिहास पर फोकस करना होगा।
उन घटनाओं के विषय में धारणा पहचानना होगा।

यूं तो इतिहास को दो अर्थों में जाना जाता है।
कुछ लोगों द्वारा इसे कथानक रूप में माना जाता है।
एक को आदिकालीन इतिहास के रूप में पहचाना जाता है।
दूसरा उन घटनाओं के विषय में धारणाएं जानी जाती है।

ज्यादातर लोग इसे श्रुति स्मृति से आना – माना है।
जिस राजा – राज्य में कवि निर्धन है राजा अयोग्य कहाता है।
विद्वान और कवि निर्धनता के बावजूद समाज में पूजा जाता है।
ऐसी विद्वानों के अपमान की बात सोचना निरर्थक कहलाता है।

सच्चे सेनानियों को दुनिया से श्रद्धांजलि दिया जाता है।
काल काेठरी में भ्रष्टाचारियों को सर्वत्र धकेला जाता है।
समसामयिकी इतिहास रचने के लिए मेहनत करनी होती है।
आदिकालीन इतिहास का संरक्षण और संवर्धन करना होता है।

बेसिक शिक्षा का स्तर ऊंचा करने के लिए आगे चलना होता है।
जूता मोजा बस्ता पोशाक बच्चों को पहन चलना पड़ता है।
सभी बच्चे स्कूल जाएं सरकार को योजना करनी पड़ती है।
अभिभावक के खाते में आवश्यकता पूर्ति में रुपया देना होता है।

घूम रहे उठा जासूस एप, पर शक्ति करनी होती है।
बच्चों पर पड़े ना बुरा प्रभाव, ऐप बंद करना होता है।
पुलिस के चाल चेहरा और चरित्र को भी समझना होता है।
अनुभवहीन अधिकारियों को बदल ना होता है।

देश की योजना को कड़ाई से पालन करवाना पड़ता है।
जन औषधि केंद्र पर, केंद्रों पर भी निगरानी रखनी होती है।
हमें प्राचीन इतिहास को अपने फिर-फिर जीना होता है।
समय के साथ भारतीयता का इतिहास लिखना होता है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – हम सभी को अपने इतिहास को फिर से जीना होगा, अपने वीरों को याद कर अपने उमंग उत्साह को कायम रखना होगा। आजकल के बच्चे जो अपने इतिहास से दूर होते जा रहे है उन्हें भी अपने इतिहास से सभी माता-पिता को अवगत कराना चाहिए। आदिकालीन इतिहास का संरक्षण और संवर्धन करना होगा, तभी आने वाली पीढ़ी को प्राचीन इतिहास से प्रैक्टिकली जोड़ पाएंगे।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (इतिहास को जीना होगा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: best short kavita in hindi, hindi poems on life inspiration, Indian History in Hindi, poetry by sukhmangal singh, poetry in hindi, poetry in hindi on history, poetry on indian history in hindi, short poem on sainik in hindi, short poems in hindi, short poetry in hindi, sukhmangal singh poetry, प्राचीन भारतीय इतिहास का घटनाक्रम, भारतीय इतिहास का कालक्रम, भारतीय सेना पर कविता, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।

कोरोना जाई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कोरोना जाई। ♦

बरसों से दुनिया में कोरोना है आइल।
जीवन में लोगों के साथ आग लगाइस।
करोड़ों दुनिया में हो गई धराशाई।
दूर देश से जाने कब कोरोना आइस।

रोटी और रोजगार को आफत लाई।
शहर से भाग रहे नगर को लोग भाई।
भूखे प्यासे दौड़ रहे हैं भाई और माई।
गांव शहर दे रहा है इसकी ही गवाही।

गांव-गांव में कलह मचल शासन काटे मलाई।
चुनाव प्रचार के चक्कर में निरीह मर रहा भाई।
घर भूजल भांग नहीं है, दारू की मची लड़ाई।
कैसा जहर कोरोना है, दुनियां में आइल।

श्री राम के प्रकट होने तक कोरोना न जाई ?
धनुष बाण के अनुसंधान पर त्राहिमाम उहै चिल्लाई।
बरसो समय मिला फिर भी कोरोना वापस गइल।
कोविसील के लगते ही वायरस होगा धराशाई?

प्रभु राम के अनुसंधान से दुष्ट बेदर होगा आसाई।
शास्त्री यही कहते हैं मानव सत्य धर्म करे भाई।
यज्ञ हवन पूजा पाठ कृमि नाशक है व करिश्माई।
कोरोना वायरस जाने क्यों भारत में है आइल।

यहां तुलसी नीम और पीपल जैसे वृक्ष हैं सुखदाई।
शिव – शंकर की जटा में उतरी मां गंगा है माई।
अमृत तत्व लेकर सूखेन वैद्य आएंगे धरा पर भाई ?
अनुसंधान से निकली कोविसील से ही होगी भलाई।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – कैसे कोरोना आया और एक ही झटके में रोटी और रोजगार को ख़त्म कर दिया। क्या गांव, क्या शहर कोरोना ने हर जगह कोहराम मचा रखा है। कोरोना से सभी वर्ग को नुकसान ही हुआ है। देखो अब वैक्सीन से राहत मिलता है या प्रभु श्री राम के आने (मंदिर निर्माण) पर राहत मिलेगा।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (कोरोना जाई।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: best short kavita in hindi, best short kavita on coronavirus in hindi, corona effect, corona go, Corona kavita in Hindi, corona vaccine, corona virus, poem on quarantine life, poetry by sukhmangal singh, poetry on corona in hindi, poetry on corona in urdu, poetry on corona warriors in hindi, quarantine days poem, short poems in hindi, short poetry about corona, Sukhmangal Singh, symptoms of corona, कोरोना जाई।, कोरोना वायरस पर निबंध 10 लाइन, कोरोना वायरस पर निबंध in Hindi, कोविड-19 पर कविताएं, छोटी सी कविता हिंदी में, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, सुखमंगल सिंह जी की रचनाएँ, हिंदी कविता

शक्ति विहीन पंख।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ शक्ति विहीन पंख। ♦

शक्तिहीन पंख लगा न बढ़ाइए।
उड़ने की कोशिश न बनाइए।
विपरीत पवन के न जाइए।
ध्यान – ज्ञान अपना बढ़ाइए।

बेवजह बात कही में नहीं आइए।
घमंड की दुनिया कॉल लगाइए।
स्वार्थ से सनी सबंध पहचानिए।
अपने मान और सम्मान बढ़ाइए।

कौन क्या कर रहा इस पर न जाइए।
विज्ञापन की दुनिया मन निकालिए।
भविष्य के चिंतन में खुद को लगाइए।
सत्य की खोज में अपने को लगाइए।

समदर्शी बनने की सोच बढ़ाइए।
संतोष करके नित मंगल पाइए।
क्षमा जाप समाज पूजा बढ़ाइए।
परोपकार उपकार ध्यान लगाइए।

राष्ट्र भक्ति में डूब कर दिखाइए।
भक्ति रस में खुद को भी डुबाइए।
दरिद्र कलह लोभ मोह दूर भगाए।
बेवजह पंख शक्ति हीन न खिलाइए।

शुभ धरातल का रौनक बढ़ाइए।
प्रकृति के करीब धीरे-धीरे आइए।
देश भक्ति का मधुर गीत सुनाइए।
खुशहाल चिंतन में रमते जाइए।

आंगन में अपने ही रौनक लाइए।
हंसी ठिठोली से दिल न भार्माइए।
सीख एक धरा से अपनी बढ़ाइए।
जीवन में सहनशील बन जाइए।

गरीबी का दुखड़ा दूसरे से न सुनाइए।
हृदय को आकाश अंबर सा बढ़ाइए।
बादल की छांव में बैठकर न बताइए।
मंगल मनोहर एक कहानी सुनाइए।

काव्य साहित्य संकलन में लग जाइए।
दुनिया में हिंदुस्तान का नाम बढ़ाइए।
संयम साहस शील हृदय में लाइए।
बेवजह में पंख को ना फडफड़ाइए।

ईमानदारी से काम करते जाइए।
विरोधी बातों में अपनी न लाइए।
राष्ट्र की रक्षा में खुद भी लग जाइए।
सत्य अहिंसा के बूते आशा जगाइए।

यश कीर्ति जगत में अपनी फैलाइए।
मोहब्बत की दुनिया में नाम कमाइए।
हिंदी हिन्दू हिंदुस्तान करते जाइए।
सुर सुंदर अपना जीवन में लगाइए।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बेवजह यूँ ही किसी बात में ना आइए, समय बर्बाद ना करें। स्वार्थ से सनी सबंध को पहचान कर घमंड को त्यागकर सत्य की खोज में अपने को लगाइए। बेवजह में पंख को ना फडफड़ाइए। भविष्य के चिंतन में खुद को लगाइए, भक्ति रस में खुद को डुबोकर काव्य साहित्य संकलन में लग जाइए, संयम, साहस व शील हृदय में लाइए, और दुनिया में हिंदुस्तान का नाम बढ़ाइए।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (शक्ति विहीन पंख।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: best poetry in hindi, best short kavita in hindi, desh bhakti poem in hindi, hindi poem on veerta, hindi poems on life inspiration, hindi poems on life values, love poetry in hindi, poem by sukhmangal singh, poem on courage in hindi, poetry in hindi, poetry in hindi on life, poetry on life in hindi, Powerless wings poetry in hindi, shakti viheen pankh poetry, short poem on bravery in hindi, sukhmangal singh poetry, वीरता का संदेश देने वाली कविता, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता

भाव पुराना नहीं होता।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ भाव पुराना नहीं होता। ♦

कवि का निरव होना स्वाभाविक नहीं।
वह अपने लिए लिखे यह भाता नहीं।
नए आविष्कार पुराने को दबाते हैं सही।
हृदय शब्द भाव पुरानी कभी होते नहीं।

ज्ञान से उपजे भाव का प्रचार करना पड़ता है।
ज्ञान में सदा परिवर्तन आता जाता रहता है।
साहित्य सामाजिक आवश्यकता की पूर्ति करता है।
सर्व कालीन साहित्य सदा अक्षुण्ण रहता है।

जो उच्च प्रकाश दे साहित्य कहलाता है।
अपने लिए लिखें भाव निरर्थक कहा जाता है।
हृदय की भाषा अपनी रचना कहलाती है।
विस्तृत सीमा तक वह फाइल दी जाती है।

दुनिया को अधिक अनुभव कविता कराती है।
भाओं के भीतर वह छुपी प्रेरणा जगाती है।
अनंत काल तक अनंत हृदय को छू जाती है।
विविध चित्रण के लिए कविता कलम चलाती है।

शब्द जो भी आते हैं असंख्य साथ आते हैं।
पर समय के साथ वे भी शब्द मिट जाते हैं।
शब्द संधान के लिए आते – जाते रहते हैं।
भाव दुनिया में अपना बिखेरते जाते रहते हैं।

बुद्धि और भावना इस संसार में रह जाते हैं।
अनंत काल तक वह अपना प्रभाव दिखाते हैं।
ह्रदय भाव कभी दुनिया में पुराना नहीं होता है।
समकालीन साहित्य सभा अक्षुण रहता है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – कवी व लेखक के गुणों को बताया है, इस संसार में सबकुछ पुराना होता है लेकिन “हृदय शब्द व भाव पुरानी कभी होते नहीं।” जो उच्च प्रकाश दे साहित्य कहलाता है, साहित्य सामाजिक आवश्यकता की पूर्ति करता हैं। इंसान के किये गए कर्म लोगों के मन में भावनाओं के रूप में सदैव ही जीवित
    रहते हैं।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (भाव पुराना नहीं होता।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: beautiful poems about life, best poems about life, best short kavita in hindi, inspirational poems about life, Inspirational Poems in Hindi, poem on literature, poetry in hindi, poetry on poet, self motivation poem hindi, short famous poems, short famous poems by famous poets, short motivational poems in hindi, short poem on literature, short poems about literature, short poetry in hindi, sukhmangal singh poetry, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।

अप्रैल फूल दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ अप्रैल फूल दिवस। ♦

भारत का माह अप्रैल चैत्र में जो प्रायःआता है।
चैत्र मास दुनिया में पवित्र महीना कहलाता है।
इसे बदनाम करने के लिए अप्रैल फूल आता है।
पहली-पहली पश्चिमी देश में यह मनाया जाता था।

आजकल भारत में भी कुछ लोगों द्वारा मनाया जाता है।
इसे समझने के लिए यह कहानी सामने आती है।
इंग्लैंड की महारानी की सगाई कम उम्र में हो जाती है।
जिसके विरोध में वहां हो हल्ला काटा जाता है।

कुछ पक्ष में तो कुछ विपक्ष में उठ खड़ा हो जाते हैं।
एक दूसरे को वे सब लोग मूर्ख बतलाते हैं।
अफ्रीकी कैलेंडर भी इस में रोड़ा अटका ता है।
भारतीय कैलेंडर को नीचा दिखाने के लिए आगे आता है।

फिर भारतीय कैलेंडर का कई देशों में विरोध हो जाता है।
भारत के कैलेंडर को मिशनरी मूर्ख कह जाता है।
विक्रम संवत पर हिजरी सन चढ़ जाता है।
हिंदुस्तान की सभ्यता को पिछड़ा हुआ बताता है।

जनवरी से दिसंबर तक का कैलेंडर चलाता है।
चैत्र से फागुन भूल जाने का प्रयास करता है।
भारतीयों को भी अप्रैल फूल बनाने को उकसाता है।
हमारे देश में भी इसी कारण अप्रैल फूल बनाया जाता है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – अप्रैल फूल दिवस हमारे भारत देश का मूर्ख दिवस नहीं है। ये हमारी संस्कृति और सभ्यता को भुलवाना चाहते है। हमें अप्रैल फूल दिवस नहीं मनाना चाहिए। किसी को भी इस दिन मूर्ख नहीं बनाना चाहिए।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (अप्रैल फूल दिवस।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: april fool day, april fool day history, april fool day history in hindi, april fool day photos, april fool day reason, april fool day shayari in hindi, april fool day sms, april fool day whatsapp messages, April's Fool Day, history of april fool day, reason behind april fool day, why 1st april is april fool day, why we celebrate april fool day, अप्रैल फूल दिवस, मूर्ख दिवस, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।

भाऊजी खड़ा हो जा परधानी।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ भाऊजी खड़ा हो जा परधानी। ♦

अबकी सीट भईल महिला बा खड़ा हो जा परधानी।
नारी देश की आजादी दिलाने में बनी थीं दीवानी।

भारी भरकम रकम मिली पगार भी होगा शानी।
सौचालय का जलवा दिखाते करिहा ना मनमानी।

आगे पीछे कुछ लोग बुढ़ापे में भी होंगे दानी।
प्रदूषण नियंत्रण खातिर पेड़-पौधों मिलेंगे दानी।

अपने घर के आस पास उसको लगाया मनमानी।
चौंका विछावे के मिली रुपया बाट खाया रानी।

अबकी सीट भईल महिला की भौजी उठा पराधानी।
गांव में दारू पीने वाले मिल जैहै जानी पहचानी।

गली मोहल्ला दारू बेचवाकर उगाही होगी मनमानी।
सुपर मिली एक गांव में उस पर रखिहा निगरानी।

अपने घर को सजा के राखिहा भाड़ जाय परेशानी।
आधा पैसा कमा लिहा छोड़ दिहा ओका मनमानी।

राशन बांटे के जब आई हो जैहा तब सयानी।
कोटे दारों पर अंकुश लगाया उसमें भी मनमानी।

स्कूल में मिड डे मील खाने से निकली खर्चा खुरानी।
जितनी सुविधा मुहैया होगी उतनी करबू मनमानी।

पहले ही तू सोचत रहलू चुनाव कब परधानी?
पेपर पढ़ कर लिया खबर आई गइल बा सनसनी।

भौजी अबकी सीट भईल महिला की, का बा परेशानी।
उठा खड़ा हो जा, हाली होली में रंग चढ़ी जवानी।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – “महिला सीट परधानी हो गयल बा” भौजी खड़ा हो जा परधानी। क्या-क्या करना चाहिए और क्या-क्या नहीं, लेकिन न करिया तू मनमानी, परधानी पर अच्छी सीख़ देने वाली कविता लिखी हैं। प्रधानी के समय होने वाले उथल पुथल को भी समझाया है।

—•—•—•—

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (भाऊजी खड़ा हो जा परधानी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: poem on pradhani, poetry by sukhmangal singh, poetry in hindi, short poetry in hindi, ग्राम पंचायत पर कविता, ग्राम प्रधान के कार्य लिस्ट, ग्राम सभा के कार्य, पंचायत चुनाव पर कविता, प्रधान पद के लिए शायरी, प्रधानी चुनाव पर कविता, प्रधानी पर कविता, प्रधानी पर व्यंग कविता, प्रधानी पर हास्य कविता, सरपंच के लिए शायरी, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।

हिंदी राष्ट्रभाषा के पथ पर अग्रसर।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ हिंदी राष्ट्रभाषा के पथ पर अग्रसर। ♦

हिंदी ने भारतीय भाषाओं की दीवार को तोड़ने का काम किया है। जबकि शिक्षा के प्रारंभिक चरण से ही हिंदी के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता रहा है। हिंदी के नाम पर प्रतियोगिताएं होती हैं। हिंदी के प्रयोग का मूल्यांकन होता है। पुरस्कार दिए जाते हैं, परंतु हिंदी को कोई अपना बनाता नहीं। यही कारण है कि बच्चों की सोच की क्षमता लगभग-लगभग समाप्त होती जा रही है, बच्चे केवल रटते रहते हुए अंग्रेजी ज्ञान को पढ़ते आ रहे हैं।

हिंदी अपनों के बीच ही बेगाने होती जा रही

हिंदी अपनों के बीच ही बेगाने होती जा रही है। स्कूली शिक्षा में राज-भाषा और व्यावहारिक हिंदी की स्तरीय अनिवार्यता की कमी, हिंदी में आत्मविश्वास की कमी का कारण बनता जा रहा है। जिस हिंदी ने हमें आजादी दिलाई। एक दूसरे को जोड़े रखा। उस हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा – दिलाने में हम सभी सफलता नहीं प्राप्त कर सके। यह बहुत विचारणीय विषय है।

आज हिंदी सूर्य की किरणों की भांति सारे संसार को प्रकाशित कर रही है। हिंदी सर्वगुण संपन्न आनंददायक – सुखदायक भाषा है।

हम सूरज तू चंदा,
मेरा कार्य प्रकाश फैलाना।
अंधेरा से कहते जाओ,
हो रहा कहां है नंगा।
मैं सूरज तू चंदा॥

गंगा नहावन से सुख,
मुझ में डूबे हो जा चंगा।
रोम – रोम आनंदित हो,
बहोरी विश्व साहित्य गंगा।
मैं सूरज तू चंदा॥

हिंदी भाषा स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख हथियार

हिंदी भाषा स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख हथियार थी, इसके माध्यम से अंग्रेजो के खिलाफ योजनाएं बनाई गई, समाचार पत्रों के माध्यम से जन-जन तक सूचनाएँ/पहुँचाई गई। हिंदी को गौरव दिलाने में हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अहम भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, सुभाष चंद्र बोस आदि प्रमुख महापुरुषों ने भाग लिया। उन्होंने हिंदी का गौरव बनाए रखने के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दिया।

हिंदी एक प्रतिष्ठित भाषा

हिंदी जनता के हृदय संयोग की भाषा थी। सम्मान पूर्वक बोली जाने वाली हिंदी एक प्रतिष्ठित भाषा है। आज हिंदी, हिंदी के प्रति बच्चों में सोच की क्षमता लगभग समाप्त हो रही है। केवल रतटे हुए ज्ञान के माध्यम से घर के आस-पास देश काल को भीं नहीं जान पाते, न हिंदी तिथियां हमारी हैं, न दिन हमारा है, न महीना हमारा है, न ऋतुएँ हैं, न गांव है, ना गांव के आस – पास के बिरवे रहते हैं, ना उन बिराओं पर अलग-अलग मौसम में तरह- तरह की बोली बोलने वाले पक्षी रहते हैं। आज अगर कुछ है तो केवल मम्मी-पापा और मेज-कुर्सी है।

हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है।

हिंदी के बारे में अगर सारे आंकडे पर नजर रखी जाए तो आंकड़े यह बताते हैं कि हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है। यह विश्व के सैकड़ों विश्व विद्यालयों में पढ़ाई जा रही है। हिंदी भाषा के श्रेष्ठ हो जाने से अन्य भारतीय भाषाओं पर उसके प्राण तत्व पर कोई बोझ पड़ने वाला नहीं है। तमिल जैसी प्राचीन और समृद्ध भाषा को अपनी तुलना करवानी हो तो वह संस्कृत के साथ तुलना करवा सकती है।

अपनी एक राष्ट्र-भाषा

किसी भी देश की अपनी एक राष्ट्र-भाषा होनी चाहिए। राष्ट्र-भाषा के अभाव में किसी भी देश को हानि होती है। सन 1853 फरवरी – 2, को ब्रिटिश संसद के एक व्याख्यान में जिसमें कहा गया कि ‘मैंने भारत की ओर छोर का भ्रमण किया है और मैंने एक भी आदमी नहीं पाया जो चोर हो। इस देश में मैंने ऐसी समृद्धि ऐसे सक्षम व्यक्ति तथा ऐसी प्रतिभा देखी है कि मैं नहीं समझता कि इस देश को विजित (जीत) लेंगे।

सांस्कृतिक एवं नैतिक मेरु दंड को तोड़ नहीं देते’

  • जब तक की हम इसके सांस्कृतिक एवं नैतिक मेरु दंड को तोड़ नहीं देते’ इसलिए मैं यह प्रस्ताव करता हूं कि हम भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति एवं संस्कृत को बदल दें, क्योंकि यदि भारतीय यह सोच लेंगे कि जो विदेशी और अंग्रेजी में है वह उनके आचार- विचार से अच्छा एवं बेहतर हैं तो वे अपना आत्मसम्मान एवं संस्कृत को छोड़ देंगे तथा वे एक पराधीन कौम बन जाएंगे। जो हमारी चाहत है।

मैकाले की शिक्षा नीति

  • मैकाले की शिक्षा नीति भारतीयों को उनकी भाषा से पृथक कर वैचारी बनाने की है जिसे हम नहीं समझ सके। मैकाले ने खुद अपने होम सेक्रेटरी को पत्र लिखा कि ‘मैं नहीं कह सकता कि भारत राजनीतिक रूप से आपके अधीन रह पाएगा, लेकिन इतना मैं अवश्य करके जा रहा हूं कि यह देश राजनीतिक स्वतंत्रता पा लेने के बाद भी अंग्रेजी मानसिकता अंग्रेजी सभ्यता और अंग्रेजी भाषा के प्रभाव से मुक्त नहीं हो सकेगा। उसका यह कथन अक्षरसः से सिद्ध हो रहा है। आज भी हम अंग्रेजी मानसिकता से मुक्त नहीं हो सके।

अपने साथ डूभाष्ये

  • कोई भी देश जैसे जर्मन, जापान, रूस, इजराइल, फ्रांस या अन्य कई विकसित देशों के प्रतिनिधि मंडल जब किसी दुसरे देश के राज्य की यात्रा पर जाते हैं तो वे अपने साथ डूभाष्ये को लेकर जाते हैं क्यों कि उनकी अपनी राष्ट्र भाषा होती है, परंतु भारत की अपनी राष्ट्र भाषा नहीं है। ऐसी स्थिति में जब हमारे कोई मंत्री दूसरे देश में जाता है तो उन्हें English में बात करने के लिए बाध्य होना पड़ता है।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

  • जबकि भाषा के प्रश्न को गंभीरता से लेते हुए उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एम एन वेंकटचलैया और न्यायमूर्ति एस मोहन की तत्कालीन खण्ड पीठ ने कहा था, कि प्रारंभिक स्तर पर बच्चों को शिक्षा केवल मातृ-भाषा में ही दी जानी चाहिए। मातृ-भाषा में दी गई शिक्षा संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करना सिखाती है। कर्नाटक सरकार ने उच्चतम न्यायालय के आदेश को स्वीकार कर, एक ऐतिहासिक और साहसिक कार्य किया। जिसका अंग्रेजी मानसिकता के अभिभावकों ने ज़ोरदार विरोध किया था। परंतु दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण विरोधी मानसिकता वालों की एक न चली।

नई शिक्षा नीति

भारत की वर्तमान सरकार नई शिक्षा नीति में बदलाव के साथ मातृ-भाषा पढ़ाए जाने पर जोर दिया है।
भारत सरकार से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ कुछ हद तक नागरिकों की हिंदी के प्रति नीरस मानसिकता भी उत्तर दाई है। हमारे देश में नागरिकों और कर्मचारियों की एक बड़ी तादाद है जो स्वदेश की भावना को व राज भाषा के महत्व को समझ नहीं पाता, भाषण व संस्कृत के ज्ञान व समझ में कमी के चलते बे-वजह के मोह ने हिंदी के प्रति हम समर्पित नहीं हो पाते।

अपनी भाषा में अपने – अपने निवासियों का लगाव

भाषा की बात करें तो अपनी भाषा में अपने – अपने निवासियों का लगाव होना चाहिए। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जिस समय जर्मनी के अधीन फ्रांस था, उसी समय जर्मनी की महारानी एक स्कूल में गई, वहां जाकर जर्मनी के राष्ट्रगान सुनाने के लिए बच्चों से कहा।

उस स्कूल की एकमात्र एक ही बच्ची जर्मन भाषा में राष्ट्र गान किया। राष्ट्रगान को सुनकर महारानी ने उस बच्ची से कहा, कुछ मांगो! वह बच्ची महारानी की बात सुनकर खुश होकर तत्काल कहा कि – हमारी शिक्षा का माध्यम फ्रेंच बना दीजिए। इसे कहते हैं अपनी भाषा के प्रति लगाव, अनुराग और भाषा के प्रति प्रेम।

एक घटना सोवियत रूस की

एक घटना सोवियत रूस की है, हमें उससे सीख लेनी चाहिए। जिस समय भारत देश गणतंत्र हुआ उस समय अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कारण एक भारतीय राजनयिक बनाकर सोवियत रूस भेजा गया। उसने वहां जाकर कार्यभार ग्रहण करते समय अंग्रेजी भाषा में अपना लिखा पत्र प्रस्तुत किया।

सोवियत रूस सरकार में भारत के राजनयिक के पत्र को अस्वीकार करते हुए कहा, याद दिलाया कि अंग्रेजी में पत्र उसी गुलामी का प्रतीक है। फिर किसी गुलाम देश से अंतरराष्ट्रीय संबंध स्थापित करने का कोई प्रश्न नहीं बनता। भाषा के प्रश्न पर सोवियत रूस की फटकार भारतवर्ष के 70 वर्षों के अंतराल में भी परिवर्तन में सोच का नया पन ना आना, हमारी हिंदी के प्रति उदासीनता पर करारा प्रहार है।

हमें मात्र कौरवी ना समझें,
दिल्ली हरियाणा क्षेत्रीय बोली।
आठवीं सदी से मैं आई,
सरहपा के मुख पर छाई।
संस्कृत में ही मैं समाई,
बहिना संस्कृत की भाई।
बाबर नामा भी करे बड़ाई।
कौरवी हिन्दुस्तानी कहाई।
खालिकबारी खुसरो लिखे,
कौरवी को वह हिंदवी कहे।

वह भी एक समय था जब हिंदी अर्थात कड़ी बोली हरियाणा और दिल्ली की क्षेत्रीय बोली तक ही सीमित थी। उसी बोली को कौरवी कहा गया। भाषा का अपना महत्त्व होता है। सभी देश की एक अपनी राष्ट्र भाषा का होना अनिवार्य है।

ऑक्सफोर्ड में शब्दकोश में हिंदी।

जबकि भाषा के महत्व को समझते हुए ऑक्सफोर्ड में शब्दकोश में हिंदी के शब्द लिए जा रहे हैं। हिंदी का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाएं हो रही हैं। हिंदी का विस्तार पूरे विश्व में हो रहा है।

जबकि आज तक के इतिहास में भारत के मात्र 2 प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी बाजपेई और नरेंद्र मोदी ही ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने विशेष अवसरों पर संयुक्त राष्ट्र संघ को हिंदी में संबोधित किया और भारत की हिंदी का मान बढ़ाया। वर्तमान समय में यू-ट्यूब, व्हाट्स एप, मैसेज, लिंकडन और फेसबुक आदि पर हिंदी का प्रयोग आश्चर्यजनक रूप से बढ़ रहा है।

विश्वास दिल में रखना कोशिशें ही काम आएंगी।
टूटे हुए हर दिल को हिंदी ही फिर जोड़ पाएगी॥

महात्मा गांधी जी ने सन 1910 में कहा था कि ‘हिंदुस्तान को अगर सचमुच राष्ट्र बनाना है तो राष्ट्रभाषा हिंदी ही हो सकती है’। स्वतंत्रता दिलाने में हिंदी ने पूरे देश को एक कड़ी में पिरोया और लोगों को इकट्ठा करने का कार्य किया। हिंदी में ही सूचनाएं भेजी गई सूचनाओं का आदान-प्रदान हिंदी में ही होता रहा।

बारूद थी, आरी थी, कुल्हाड़ी लिए लोग मगर।
जंगलों से चलकर शिकार करते हुए आ रही॥

राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जी राष्ट्रभाषा को राष्ट्रीयता का स्रोत मानते थे। उन्होंने कहा कि ‘कोई विदेशी भाषा हमारे देश की रक्षा नहीं कर सकती राष्ट्र के विकास के लिए अपनी भाषा अनिवार्य है’। भाषाओं का आश, उनके शब्दों में हिंदी था। वे हिंदी के साथ अन्य सभी भाषाओं के व्यवहारिक बनाए जाने के पक्षधर थे।

भारत के दक्षिणी राज्यों में हिंदी प्रवेश कर गई है।

भारत के दक्षिण के राज्य जहां हिंदी का विरोध होता था आज उन राज्यों में हिंदी प्रवेश कर गई है। हिंदी अपनी आंतरिक ऊर्जा से सरलता, सहायता बोधगम्यता और समन्वय की भावना के कारण अनेकानेक विरोध सहते हुए भी आगे बढ़ रही है। हिंदी की अनिवार्यता पर गौर करें तो जिन देशों के लोग भारत से व्यापार संबंध रखना चाहते हैं उनको हिंदी जानना आवश्यक है। हिंदी उनके लिए अनिवार्य हो गई है।

देवनागरी लिपि के समान सरल जल्दी सीखने योग्य और तैयार लिपि दूसरी कोई है ही नहीं। जो संपूर्णता और ध्वनात्मकता हिंदी में है। देवनागरी लिपि में है। वैसी क्षमता उर्दू और रोमन में भी नहीं है।

भाषा का कोई धर्म – पंथ नहीं होता। भाषा किसी की प्रतिलिपि नहीं होती। भाषा संवाद और संचार का माध्यम है। जहां तक स्वयं भाषा के स्थापत्य की बात है अपनी जन भाषा के सम्मान का प्रश्न है तो अपने देश की एक राष्ट्रीय भाषा होनी ही चाहिए।

जीने की ना दी राह तो जीवन ही क्यों दिया।
जीने के नाम पर शर्मिंदा क्यों फिर किया।
सागर में जलती पर आश अभी बाकी मुझमे।
इतनी सुख सम्पदा डगर पर भटकने दिया।

हिंदी की सहज भाषा ही अपने लचीलेपन के कारण अपने आयाम का विस्तार कर दी जा रही है। हिंदी की अनिवार्यता से राष्ट्र की अखंडता परिभाषित हो सकती है। यदि हमें हिंदी के गौरव की पुनर्स्थापना करना है तो देश को भाषाई आधार पर एकरूपता मैं रंगना होगा, हमें सोच बदलनी होगी। तभी प्रगट का पथ प्रदर्शित होगा।

हिंदी को हिंदू और उर्दू को मुसलमान के चश्मे से दूर रखना होगा। इन्हीं खोखले आधारों से भाषा का युद्ध और विरोध का जन्म होता है। हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि संवाद का सर्वोच्च शिखर भी आज हिंदुस्तान में हिंदी ही है। भारत को उच्च शिखर पर स्थापित करने के लिए भारत की मेधा के बच्चों को हिंदी या मातृभाषा में दक्ष रखना ही होगा।

हिंदी के संवर्धन और विकास के लिए –

प्रथम ऐतिहासिक संस्था 18 सौ ई. में फोर्ट विलियम कॉलेज नाम से कोलकाता में स्थापित हुआ। स्थापना भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड वेलेजली द्वारा की गई थी। इसका प्राचार्य सबसे पहले जॉन गिलक्रिस्ट को बनाया गया। उन्होंने देवनागरी में ‘हिंदी’ और फारसी लिपि में ‘उर्दू’ या ‘हिन्दुस्तानी’ का अध्ययन शुरू करवाया।

उस समय हिंदी की पाठ्य पूर्ती के लिए प्राचार्य ने कई लेखकों से पुस्तकें लिखवाई। उन लेखकों में लल्लू लाल, सदल मिश्र, इंशाअल्लाह खान, मुंशी सदा सुखलाल’ नियाज’ का नाम आता है। लल्लूलाल और सदल मिश्र को हिंदी पढ़ाने के लिए फोर्ट विलियम कालेज में शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया।

इनके अलावा अध्यापकों में से ईश्वरचंद विद्यासागर, राम राय बासु, तरनतारन मिश्र , मृतुन्जय विद्यालंकार भी थे, जो अन्य भाषाओं की शिक्षा देते थे। कुछ और लेखकों ने मिलकर अनुवाद और लेखन का कार्य किया जिससे पुस्तकों की कमी को दूर किया गया।

हिंदी के विकास और संवर्धन के लिए दूसरी संस्था

हिंदी के विकास और संवर्धन के लिए दूसरी संस्था 16 जुलाई 1883 को नागरी प्रचारिणी सभा के नाम से वाराणसी में स्थापित हुई। जिसकी स्थापना क्वींस कालेज के नवीं के तीन छात्र – श्यामसुंदर दास, शिवकुमार सिंह और राम नारायण मिश्र ने की। इसके संस्थापक अध्यक्ष राम कृष्ण दास बनाये गए और सात सदस्य हुये। आगे चलकर सम्पूर्ण भारत के अलग अलग क्षेत्रों में जैसे प्रयाग, चेन्नई, गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद, हिंदी विद्यापीठ देवधर झारखंड की स्थापना 1929 में हुई।

उड़ीसा राष्ट्र भाषा परिषद पूरी, केरल हिंदी प्रचार सभा तिरुवनंतपुरम सं 1934 में , राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा 1936 में गांधी और राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की प्रेरणा से, महाराष्ट्र सभा पुणे की स्थापना 1937 में काका कालेकर की अध्यक्षता में, चौदहवीं सौराष्ट्र हिंदी प्रचार समिति राजकोट, प्रारम्भ में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा की एक समिति के रूप में 1937 में उन दिनों उसे काठियावाड़ राष्ट्र-भाषा प्रचार नामक संस्था द्वारा चलाया जा रहा था।

बम्बई हिंदी विद्यापीठ की स्थापना 1936 में, हिदुस्तान प्रचार सभा मुंबई 1938 में गांधी की प्रेरणा से, असम राष्ट्र-भाषा प्रचार समिति की स्थापना 1938 में, कर्नाटक हिंदी प्रचार समिति बेंगलूर की स्थापना सं 1939 में, मैसूर हिंदी प्रचार परिषद की स्थापना बेंगलुरु में 1943 में, कर्नाटक महिला हिंदी सेवा समिति बेंगलूरी में 1953 में, मणिपुर हिंदी परिषद इम्फाल की स्थापना नवयुवकों द्वारा 1953 में।

साहित्य अकादमी दिल्ली की स्थापना 12 मार्च 1954 को की गई, केंद्रीय हिंदी संसथान आगरा की स्थापना 1961 में, अखिल भारतीय हिंदी संस्था संघ दिल्ली की स्थापना 1964 में, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ की स्थापना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1976 में और हिंदी अकादमी दिल्ली की स्थापना 1981 में दिल्ली सरकार द्वारा स्वायत्त शासी संस्था के रूप में हुई।

देखे सबके बम और तोपें।
फिर भी लड़ते रहती हूँ।
गाँव के युवकों ने सोचा था।
मुझसे उनकी भलाई है।
बारूदों पर घर है जिनका।
वही मसलते मिलते हैं।
शहर का मौसम बदलेगा।
मन की मंगल कहता है।

भारतीयों के ह्रदय में रचने बसने निवास करने वाली भाषा हिंदी महापुरुषों का याद कराते रहती है और राष्ट्र-भाषा बनने के लिए किसी महापुरुष की खोज में आशान्वित है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – विश्व पटल पर हिंदी भाषा का महत्व। हिंदी भाषा के विकास और संवर्धन की जरूरत क्यों है। क्यों सभी को हिंदी सीखना जरूरी है। आधुनिक युग में राष्ट्र भाषा हिंदी के साथ क्या – क्या हुआ, और आधुनिक युग में राष्ट्र भाषा हिंदी के विकास और संवर्धन के काल खंड का बहुत ही सटीक विस्तार से वर्णन किया हैं।

—•—•—•—

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह लेख “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपके लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपके लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपके इस लेख से आने वाली पीढ़ियां (Future generations) हिंदी के महत्व को समझ पायेगी और हिंदी को अपने जीवन में उचित स्थान देगी।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, सुखमंगल सिंह जी की रचनाएँ, हिंदी राष्ट्रभाषा के पथ पर अग्रसर। Tagged With: article by sukhmangal singh, Development and promotion of Hindi, hindi national language, hindi national language essay in hindi, hindi national language of india, is hindi national language of india as per constitution, National language Hindi in modern era, new education policy, new education policy 2019, new education policy 2020, new education policy 2020 highlights, new education policy 2020 when will be implemented, when new education policy will be implemented, why hindi is national language of india, why hindi is our national language, आधुनिक युग में राष्ट्र भाषा हिंदी, नई शिक्षा नीति, मैकाले की शिक्षा नीति, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, सुखमंगल सिंह जी की रचनाएँ, हिंदी एक प्रतिष्ठित भाषा

होली की तहे दिल से शुभकामनाएं!

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

होली की तहे दिल से शुभकामनाएं!

आप सभी को होली की तहे दिल से शुभकामनाएं!

अहंकार और विकारों को जलाकर, नफरत को त्यागकर, प्यार, भाईचारा व ख़ुशी से आओ मनाये सच्ची होली।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से Tagged With: happy holika dahan wishes, holi by kmsraj51, holi wishes in hindi, holi wishes quotes in hindi, holika dahan wishes in hindi, simple holi wishes in hindi

सूरत दिल में जगह बनाई।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ सूरत दिल में जगह बनाई। ♦

तेरी सूरत मेरे दिल में आई।
दिल कहता तू दिल में समाई।
झलक से मेरा दिल बहला ई।
काया उमंगी तो होती दिखाई।

अफसोस उफ करने की तनिक न दी दिखाई।
प्यारी चितवन और नशीली आंखें लेकर आई।
आंखों – आंखों से जब उसने अपने मिलाई।
जीवन जीने का अंदाज, साथ लेकर आई।

बेचैनी में दिन – रात हमने जब तलक बिताई।
खूबसूरत ख्वाब देखने झील में लेकर आई।
तेरी सूरत दिल के मेरे जब से दरवाजा खट-खटाई।
जीवन जीने का मजा होलिया तब से मेरे भाई।

मेरी आंख से आंख तूने अपनी है लड़ाई।
लगी दाग दिल में कभी भी मिट नहीं पाई।
आंखों में आंखें डाल कर जानम क्यों नहीं आई।
उम्मीदों की फायदे जाने क्यों दुख में गंवाईं।

प्यारी चितवन नशीली आंखों में समुद्र दिखाईं।
वादों की सुखद समुंदर में जाकर गोते लगाई।
मेरा दिल कहता है तू दिल में उतर है आई।
तेरी सूरत खूबसूरत मेरे दिल में आकर समाई।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – प्यार के दौरान मन के अंदर चलने वाले उथल – पुथल को “सूरत, चीत्त, दिल, व आँख से आँख मिलाना” का उदाहरण देकर बहुत ही सटीक वर्णन किया हैं।

—•—•—•—

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: heart touching love poem in hindi for girlfriend, love poem in hindi for girlfriend, poetry by sukhmangal singh, poetry on love in hindi, romantic love poems in hindi, short love poems for her in hindi, short poem for girlfriend in hindi, Sukhmangal Singh, प्रेमिका की याद में कविता, प्रेमिका के लिए शायरी, प्रेमिका के लिये कविता, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।

पायल।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ पायल। ♦

paayal-kmsraj51-001.png

मैं पायल मेरा बजना काम।
कभी इस पग कभी उस पग।
राम राम धाम बैजनाथ धाम।
चाहे 11 मंजिला हो मकान।
जहां हम मिलें बजना है काम।

चाहे मंदिर हो गुरुद्वारा गुरुद्वारा।
धर्म क्षेत्र वा अधर्म कर्म का झाम।
नन्द बाबा दरबार वा अन्य मुकाम।
सभी सुधी सुनते लगाकर कान।
जहां रहूं मेरा पैर में ही है मुकाम।

श्याम संग राधा बनी रहती।
सीता स्वयंवर में भी संग देती।
मीरा – गीत मीरा का स्वागत।
वीणा वाणी नित नूतन करती।
यात्रा जहां पैरों में ही बजती।

छम छम लहरें उठने वाली।
रुन झुन मधुर मुखर मतवाली।
धुन गुनगुनाएंगे बप्पी लहरी।
मंगल ले आया सुबह भोरहरी।
मै अपनी धुनि सुर में रहती।

इंद्र परी की रचना बन जाती।
उत्पत्ति समय में साथ निभाती।
हरी घर गीत बन सामने आती।
जहां जाते रुन झुन गीत गाते।
समर्पण भाव नारी प्रति लाती।

देवलोक में जब – जब जाती,
परियों की पायल बन जाती।
सभा मध्य में संगीत सुनाती।
देवताओं को खूब रिझाती।
पैरों की पायल बन कर आती।

श्याम सुंदर की मंजूरी पाती।
मंदिर – मंदिर धूम मचा दी।
राधा बनकर, वह रास रचाती।
ऋषियों के मन में बस जाती।
पैरों की पायल बन कर आती।

पायल की धुनि घायल कर देती।
विद्वानों को भी बस में कर लेती।
लोग धर्म में रहती पालन सहती।
लोक लोक सुमधुर भजन सुनाती।
पर पैरों से पायल बन कर गाती।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – पायल व पायल की धुनि के गुणों और खूबियों को बहुत सारे उदहारण देकर समझाया हैं। एक ही कविता में बहुत कुछ समझाया हैं।

—•—•—•—

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

cymt-kmsraj51

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

homepage-kmsraj51.png

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: 2 lines payal shayari, a Shayari written on Payal, beautiful payal shayari, hindi shayari on payal, payal love shayari, Payal Shayari 2 Line, Payal Shayari In hindi, poetry by sukhmangal singh, poetry in hindi, poetry in hindi on payal, poetry on word payal, romantic shayari on payal in hindi, Shayari On Payal, shayari payal in hindi, sweet voice shayari of payal, पायल, पायल कंगन, पायल कंगन से मंगवा, पायल की झंकार शायरी, पायल पर गजल, पायल पर रोमांटिक शायरी, सुखमंगल सिंह जी की कविताये।

« Previous Page
Next Page »

Primary Sidebar

Recent Posts

  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.