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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2021-KMSRAJ51 की कलम से

बंजर जमीं पे भी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बंजर जमीं पे भी। ♦

अदाओं में उसके सवालात होगी।
निगाहों में उसकी करामात होगी।
बच के कहाँ जायेगा तेरा आशिक।
मुझको यकीं है मेरी मात होगी।

सोचा ना था ये भी हालात होगी।
सरेआम रूसवा यूँ जज्बात होगी।
किसी और के पहलू में सिमटकर।
मेरी जां यूँ तुमसे मुलाकात होगी।

निशाने पे हाँ अब मेरी जात होगी।
खतरे में धर्म भी और औकात होगी।
वर्षों से सोया समाज भी जागेगा।
बहुत जल्द ये भी तिलस्मात होगी।

तोहमत की बौछार, आघात होगी।
बाकी सभी मसलों पे बात होगी।
है कौन बेवफा किसने वादा निभाया।
ये सवाल टालकर जश्न की रात होगी।

करूँ चिर प्रतीक्षा मैं दरख्वास्त होगी।
वो एक बार कह दे कि फिर प्रात होगी।
बदलेगा पहलू, पहेली और मौसम।
सुध! बंजर जमीं पे भी बरसात होगी।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – जीवन में कितना भी उतार चढ़ाव आए, कितनी भी विपरीत परिस्थिति आए यूँ ही घबराकर रुकना नहीं, एक न एक दिन फिर जीवन में बरसात होगी।

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यह कविता (बंजर जमीं पे भी।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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गांव।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गांव। ♦

जन्म भर की घटनाएं एक – एक कर याद आती है।
सामने आकर घटनाएं अपना रूप दिखाती है।
कभी – कभी कश्मीर की बादी की भी याद आती है।
सद्भावना यात्रा की वह याद दिलवाते हुए आगे बढ़ जाती है।

घूम घुमाकर इधर – उधर मन हमको ले जाता है।
वापस आकर खेलन अहिरौली रानी मऊ आता है।
गांव की दक्षिण में सताई भैया की द्वार पर दिह बाबा स्थान है।
तीन तरफ से उसके जौ – गेहूं का हरा – भरा सिवान है।

गांव की पश्चिम तरफ समय माता का एक स्थान है।
नवरात्र में गांव की औरतें वहां करती धार और जलदान हैं।
माता दरबार की राशि में अगल बगल पिक्चर बंजर वान है।
का बीज हो गई उस पर गांव के ही तथाकथित महान है।

उत्तर दिशा में गांव के कालिका का दिव्य स्थान है।
आसपास उनके पेड़ – पौधों से भरा हुआ बागवान है।
उसके उत्तर में हायर सेकंडरी स्कूल महान है।
जहां से पढ़कर निकले थे, बड़े – बड़े विद्वान है।

हायर सेकेंडरी स्कूल के पास प्राइमरी पाठशाला विद्यमान है।
कक्षा तीन से पांच की पढ़ाई का मेरा यह राजस्थान है।
बाग बगीचे में मिलता है अच्छा खासा महुआ आम है।
सतवा सक्रांति पर वह आता, चटनी बनाने को काम है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – गांव की सादगी सुंदरता व प्रेम को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया है। प्रकृति की सुंदरता हो, मंदिरों की खूबसूरती हो, या पेड़ पौधों का जिक्र हो, स्कूल हो, बाग बगीचे से मिलने वाला अच्छा खासा महुआ आम हो जिससे चटनी मस्त बनती है। वाह कितनी खूबसूरती से एक-एक कर वर्णन किया है। जैसे अभी-अभी की बात हो, जिवंत यूँ ही सबकुछ सामने चित्र रूप में घूमने लगता है।

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यह कविता (गांव।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

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हंसिया।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ हंसिया। ♦

हंसिया हल्के हाथ की,
मालिक से लड़ जाए।
खटर पटर करके चली।
गटर – गटर घर खाए।

हरीयर चारा चटक – चटक,
लपक – लपक नर लाए।
झटक – झटक उस चेहरे को,
मालिक द्वार पर लाए।

पटर पटर चारा मशीन से,
हरीअर चारा बाला जाए।
खेती गहबार अरहर की,
हच हच हंसिया काट गिराए।

धार प्रक्षालन रेती पर कर।
अरहर मालिक घर लाए।
धीराता वीरता के गुण सदा,
मनुष्य में मालिक बताए।

हसिया हाथ हिलाते जाती।
योग साधना बताने आती।
मन मौसम बनाने आती।
नारायण कोठीला भर आती।

अपनों को अपनापन सिखाती।
वह बार-बार लड़ने को जाती।
भूखे भक्तों की भूख मिटाती।
विश्व क भाव का पाठ पढ़ाती।

हंसकर हंसिया हाथ आती।
फंसरी काट मुक्ति दिलाती।
हंसिया हाथ हिलाते जाती।
विविध तरह का रूप दिखाती।

मदुआ सांवा खूब काटती।
उड़द टामुन से घर भारती।
चना चबैना गंगाजल अमृत।
हंसिया के मुठिया में रहता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बहुत सारे उदाहरण देकर हंसिया के महत्व और हंसिया के कार्य व गुणों को कवि ने बखूबी अक्षरस वर्णित किया हैं। हंसिया किस तरह से एक किसान का महत्वपूर्ण औजार हैं, मुख्य रूप से चारा काटना हो, गेहूँ, जौ, धान, बाजरा या कोई अन्य फसल काटना हो हंसिया का ही मुख्य रोल होता हैं।

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यह कविता (हंसिया।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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कटु सत्य।

Kmsraj51 की कलम से…..

Katu Satya | कटु सत्य।

नारी उत्थान पर निबंध।

आत्म शलाघाओं के नशे में चूर भारतीय समाज नारी के विषय में प्राय एक वेदोक्त मंत्र बड़े चाव से जपता नज़र आता है। वह मंत्र है, “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता।” मैं नारी शक्ति की पूजा करने के खिलाफ नहीं हूँ। परंतु सवाल खड़ा होता है कि क्या हम इस पंक्ति के सही मायने को समझ पाए? यदि हाँ तो मेरा सवाल यह है कि इस पंक्ति में कौन से रमण करने वाले देवताओं की बात की गई है?

सृष्टि की सृजन शक्ति की महानायिका

क्या उन्ही इंद्र सरीखे देवताओं का ज़िक्र किया गया है जिन्होंने त्रेता काल की अहल्या माता का चालाकी से उपभोग करके उसे सदा-सदा के लिए सजा भोगने के लिए छोड़ दिया? क्या यही उनके दैवत्व का लक्षण है? चापलूसी, छल, प्रपंच धोखा, आदि उपहार ही तो नारी के खाते में अनादिकाल से पड़ते आए हैं। यह कितनी भयंकर विडंबना है कि वह संसार का महा सौंदर्य और सृष्टि की सृजन शक्ति की महानायिका हमेशा से ठगी-सी गई है और आज भी समाज उसे निरन्तर ठगता ही चला जा रहा है।

इसने छोटे-बड़े सभी घरों में सिवाए ज़लालत के कुछ नहीं पाया है। पर फिर भी यह बेचारी अपनी तनिक प्रशंसा सुन कर फुली न समाती है। उस चापलूसी भरी प्रशंसा के उन्माद में यह अपने साथ हुए तमाम जुल्मों को भूल कर यूं महसूस करती है मानो इसने संसार का सब सुख पा लिया हो। यही इसकी उस कमजोरी का वह पहलू है जिसके बूते यह ऊपर कही पंक्ति इजाद की गई हो शायद। अर्थात नारी सदा से सौंदर्य की प्रतिमूर्ति समझी जाती आई है और समझी जा रही है।

विलासी समाज

यह सब मैं अपनी मर्जी से नहीं कह रहा हूँ। यह स्वयं नारी की अपनी मनःस्थिति और व्यवहार सिद्ध करता है। हम प्राय स्त्री के हार शृंगार के प्रति रुचि और दूसरों की देखा – देखी में सौंदर्य प्रसाधनों का ज़रूरत से ज़्यादा प्रयोग करने की प्रवृति को सदियों से देखते आए हैं।

उसका यह सज धज कर रहना, यह सिद्ध करता है कि वह सौंदर्य की प्रतिमूर्ति है। उसकी यही वृती कई बार उस बेचारी के गले की फांस भी बन चुकी है। यदि इंद्र जैसे देवताओं के रमण की बात की जा रही है तो वह देवताओं के विलासी समाज की ओर ही इशारा करती है।

तो यह सिद्ध हुआ कि नारी की पूजा का समर्थन, इसलिए भारतीय समाज में किया जाता है ताकि वह अपनी खुशामद से रीझ कर हमारी उपभोग की वस्तु बनना स्वीकार करती रहे बस। देवताओं की बात करें तो स्वयं ब्रह्मा तक ही नारी सौंदर्य से अभिभूत हो कर अपनी ही बेटी संध्या के रूप पर लट्टू हो बैठे। क्या यही नारी की पूजा है? क्या यही देवताओं का रमण है? फिर चाहे सीता, अहिल्या, द्रोपदी, पद्मावती जैसी उच्च गृहस्थ नारियों के साथ हुए शोषण की बात हो या फिर आम घरों की बहन-बेटियों की ज़लालत का मामला हो।

पौराणिक आख्यानों पर चर्चा

खैर मैं यहाँ पौराणिक आख्यानों पर चर्चा करने नहीं आया हूँ पर वेदोक्त उक्त पंक्ति का सहारा ले कर नारी का चापलूसी से शोषण करने और उसे बहकाने वाले समाज की पोल खोलने ज़रूर आया हूँ। पीछे जो हुआ सो हुआ। उसे हमने भी किताबों में ही पढ़ा है। वह अपनी आंखों से घटते नहीं देखा, इसलिए वह कितना सत्य है और कितना असत्य, इसका ठीक समझ पाना मुश्किल है। अतः उसे छोड़ देना ही उचित समझा जाना चाहिए।

वर्तमान समाज में ही नारी जीवन

आइये वर्तमान समाज में ही नारी जीवन पर एक नज़र पक्षपात रहित हो कर डालते हैं। आज हम देखें तो आज भी नारी के साथ वही कुछ हो रहा है। वही बलातकार, वही चापलूसी और वही शोषण।

छोटे घरों से ले कर बड़े घरों तक। अब आप कहेंगे कि कैसे? तो सिद्ध करते हैं। छोटे घरों में तो हम आए दिन पत्नियों, बेटियों के कत्लों और तलाकों की खबरें सुनते ही रहते हैं पर यह बीमारी बड़े घरों में भी कम नहीं है।

यहाँ मीडिया, फ़िल्म जगत और प्रतिष्ठित समझा जाने वाला उच्च वर्गीय समाज नारी की चापलूसी से बाज नहीं आते। वे उसे उत्तरोत्तर गर्त में धकेल रहे हैं। वह बेचारी अपनी उसी वाहवाही की कमजोरी के कारण इस भंवर में डूबती जा रही है।

ये सभी उसे अपनी-अपनी ज़रूरतों के मुताबिक चंद पैसों के लालच में यूं प्रयोग करते हैं कि जैसे वह कोई एक वस्तु है मानव नहीं। यह सब अनादि काल से हो रहा है।

विरोध क्यों नहीं ?

हैरानी तो इस बात की है कि इस नारी ने कभी विरोध क्यों नहीं किया कि क्यों मैं ही सदा से हर महफ़िल में नचाई जाती आ रही हूँ? क्यों मुझे ही फ़िल्मों, समाचार पत्रों के विज्ञापनों में या फिर सामाजिक सूचना प्रसारण में अर्धनग्न हो कर परोसा जा रहा है?

मैं भी तो किसी की मां, बहन, बेटी या पत्नी हूँ। जब वे सब मेरी ये तस्वीरे देखते होंगे तो वे क्या सोचते होंगे? क्यों न मेरे काम को अब स्वयं मर्द करें? ये सवाल खड़ा करना आज नारी समाज की ज़रूरत बन गया है वरना ये समाज के धुरंधर नारी के जिस्म से सब कुछ उतार कर एक दिन इतना शर्मिंदा करेंगे कि वह बेचारी ख़ुद की दुर्दशा पर रो भी नहीं पाएगी। तब भी ये मीडिया वाले यही पंक्ति हमेशा की तरह कहेंगे कि हमें नज़रिया बदलना चाहिए जी।

समाज के आयने

बदलाव तो समाज का नियम है और फिर नारी की यह हालत मैंने थोड़े ही न की है। यह तो ख़ुद ही यह सब करने को राजी हुई थी। कृपया ध्यान दें कि चंद पैसों की लालच में हमें अपना ज़मीर नहीं बेचना चाहिए।

जो चंद मातृ शक्ति इन व्यवसायों में काम करती भी है, उन्हें भी इस वस्त्र अल्पिकरण का सामूहिक विरोध करना चाहिए। क्योंकि सिनेमा, मीडिया और उसके कर्णधार आप समाज के आयने तथा आदर्श होते हैं।

नज़रिया बदलने की नसीहत

समाज में बहू-बेटियाँ आदि आपकी नक़ल करती है और वस्त्र अल्पता के नशे में मदहोश अनजाने में अपना ही अहित कर बैठती है। मीडिया के लोग किसी की घटना पर जब बात करते हैं तो बस बार-बार नज़रिया बदलने की ही नसीहत देते हैं।

अरे भाई नज़रिया जब विश्वामित्र जैसे राजर्षी नहीं बदल पाए तो आम लोग कैसे बदलेंगे। वहाँ अगर कोई यह कह दें कि यदि पुरुष समाज अपने बदन को ढक कर रहता है तो क्या नारी समाज नहीं रह सकता।

वे भी तो उसी वातावरण में रहते हैं। तो पुरुष को दबाने में सब लग जाते हैं। अरे बहादुरों सत्य को तुम्हारे प्रमाण पत्र की ज़रूरत नहीं है। यदि तुम्हें सच में नारी की इतनी ही चिंता है तो उसे सही दिशा की ओर ले चलो और शोषण से बचाओ। तो जानूं कि आपने कुछ अच्छा किया है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – अनादि काल से चले आ रहे, नारी के ऊपर होने वाले अत्याचार व शोषण को इस लेख के माध्यम से। अब नारी समाज नहीं जागी तो कब जागेगी। कही ऐसा न हो जाये की बहुत देर हो जाये – वर्ना बेचारी ख़ुद की दुर्दशा पर रो भी नहीं पाएगी।

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यह लेख (कटु सत्य।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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एक महत्वपूर्ण सूचना।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ एक महत्वपूर्ण सूचना। ♦

मेरे प्रिय पाठकों आप सभी को बताना चाहूंगा की अभी, सभी पेज पर अपडेट का कार्य चल रहा है। सभी पेज का पूर्ण अपडेट होने में लगभग 30 दिन से 50 दिन लगेंगे।

लेकिन आपको फिक्र करने की जरूरत नहीं है, आप सारे आर्टिकल किसी भी वक्त पढ़ सकते हैं। आर्टिकल खुलने में किसी भी तरह का कोई परेशानी नहीं होगा।

आप सभी को समय-समय पर अच्छे से अच्छा मूल्यवान आर्टिकल दे सकू, जिसका आप अच्छे से लाभ ले सके, इसलिए ये अपडेट जरूरी।

इस अपडेट के बाद आप सभी को कोई भी आर्टिकल ढूंढना नहीं पड़ेगा। लगभग सभी तरह के आर्टिकल आपको आपके सामने ही मिल जायेंगे।

आप सभी के धैर्य और प्रेम के लिए, प्रेम पूर्वक तहेदिल से धन्यवाद। मुझे पूर्ण विश्वास हैं आगे भी आप सभी का यूँ ही प्यार मिलता रहेगा। आप सभी के प्यार और सहयोग से हमारा उमंग उत्साह बना रहता हैं।

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एक दिन फोन आया।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ एक दिन फोन आया। ♦

विश्व गाथा प्रकाशन से,
मुझे फोन आया।

अ हिंदी क्षेत्र गुजरात,
से भी विश्व गाथा का,
प्रकाशन होता बताया।

लखनऊ में आफिस को,
एक है गाथा का बताया।

हमने उनसे जब नाम,
श्रीमान का जानना चाहा।
उन्होंने प्यार से नाम अपना,
पंकज त्रिवेदी हमें बताया।

हमने कहा श्रीमान आपकी,
पारदर्शिता ही विश्व गाथा,
को ऊंचाई प्रदान किया है।

आगे बढ़कर हिम्मत जुटाया।
अवध निवासी सुख मंगल सिंह।
अपना नाम उन्हें दर्ज कराया।

सोमवंशी क्षत्री कुल मेरा फरमाया।
काशी में प्रवासी हुकुम मैं बताया।
मां भगवती और गंगा को मनाया।
बाबा विश्वनाथ में दिल लगाया।

त्रिवेदी जी के दीर्घायु की कामना।
हमने फोन पर ही उन्हें सुनाया।
नमस्कार बंदगी के दरमियान।
काशी से अपना नाता है सन पाया।

हां जहां तक मुझे याद आता है।
सितंबर 2017 की यह बात है।
बड़े लोगों से बात कभी होती है।
हृदय में उमंग विशेष होती है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – विश्व गाथा प्रकाशन से, फ़ोन कॉल आया, कवि ने कविता के माध्यम से प्रशंसा करना बताया। कैसे किसी की प्रशंसा करें, और शॉर्ट में अपना परिचय दिया। फोन कॉल के दौरान आपको कैसा व्यवहार करना चाहिए ये समझाया।

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यह कविता (एक दिन फोन आया।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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पुकार।

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♦ पुकार। ♦

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढो।

समर सुनसान पड़ा है।
लूटते देख मां की लाज।
निज जंगी बेड़ा पास पड़ा।
बलिदान, बलिदान खड़ा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

कुर्बानी की जंग है लड़नी।
दुश्मन त ललकार रहा है।
फौलादी जंगी बेटा को,
तुम भी तो तैयार करो।

दुश्मन सीमा पर तैनात खड़ा है।
सीमा पर तैनात वह अड़ा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

खड़ा शहीदी जत्था भी,
तुझको आज पुकार रहा है।
सुनसान समर निहार रहा।
बलवीर पुंज बनकर उभरों री।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

त्याग तपस्या बलिदान का,
यही रहा है केंद्र बिंदु।
मंगल आज पुकार रहा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

चारों तरफ बिछी देख,
लाशों की जब ढेर।
झुकने देना कभी नहीं,
भारत मां का शीश।

होगा तो ढूंढो, पढ़ो बहादुर बढ़ो।
चढ़ो बहादुर बढ़ो, चलो वीर बढ़ो।

तपोभूमि हर ग्राम हमारे,
कवि की वाणी गाती है।
लोरी गाती शाम को,
माता गाय हमारी प्यारी है।

कहां सिंह बन गए खिलौने,
वाली रानी बलिदान खड़ा है।
पढ़ो बहादुर पढ़ो,
लड़ो बहादुर लड़ो।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – सैनिकों का उमंग – उत्साह बढ़ाते हुए कवि कहते है, चाहे कुछ भी हो जाये कभी भी झुकने ना देना भारत माँ का शीश। त्याग तपस्या बलिदान का, यही रहा है केंद्र बिंदु। उठो बहादुर उठो। बढ़ो बहादुर बढ़ो।

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ऐसे दोस्त।

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♦ ऐसे दोस्त। ♦

Poem on True Friendship in Hindi

मौसम की तरह बदलते दोस्त को,
दोस्त बनाना नहीं चाहिए।
जीवन में आने वाली तकलीफ से,
कभी घबराना नहीं चाहिए।

सत्य से रूठने वाले लोगों को,
कभी मनाना नहीं चाहिए।
जो नजरों से गिर जाए तो उसे,
कहीं उठाना नहीं चाहिए।

पचे जो ना पेट मे खाद्य पदार्थ,
उसे खाना नहीं चाहिए।
बाते जो मानता न हो उसको,
समझाना नहीं चाहिए।

जहां क्रंदन होता हो सदा ही,
वहाँ जाना नहीं चाहिए।
कपट करने वालों से कभी भी,
नहीं मित्रता करनी चाहिए।

अपने सच्चे मित्र से मित्रवत,
व्यवहार करने चाहिए।
द्वेष करने वाले से प्रतीकार व,
मित्रों का हित करना चाहिए।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – कई सारे उदहारण देकर बताया है, किससे दोस्ती करना चाहिए, और कैसे दोस्त रखने चाहिए। जीवन में आने वाले समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए। सच्चे मित्र का सदैव ही साथ निभाना चाहिए।

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उठे ज्वार, भटका पनिहार।

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♦ उठे ज्वार, भटका पनिहार। ♦

हृदय में ताला कहां लटकता।
मन में केवल भ्रम पलता है।
मंजिल पर नजर टिकी हुई हों।
संवाद हकीकत होता ही है।

सूख गई स्याही हो तो भी।
दिल तो एक समंदर सा है।
आश्वासन में दुनिया चलती।
आमंत्रण में केवल बेचैनी है।

शब्द बाण से आंगन मेरा,
बुरी तरह पीट रहा।
बीच गगन टिमटिमाता दीपक।
जाने कब से दिख रहा।

असह्य वेदना परिपूर्ण भावना।
जब – जब निकले।
सुहाग छोटा ज्वार बृहद दिखता।
भाव – भक्ति में खोलें।

चरण जमी मन मंगल गगन उड़े।
तो वह जीवन बोले।
मानव मन की बस यही कहानी।
लड़ कर जो ले ले।

आंगन में आने वाले अंधियारे।
दिव्य प्रकाश ले रहा किनारे।
मंगलमय मंगल मनोहर गीत।
सुमधुर सुंदर प्रकृति सहारे।

आजकल लोगों को क्या हो गया है।
आख्यान से आंसू का मर गया है।
आकांक्षा इच्छाएं अनवरत बढ़ती गई।
आबरू उतार तार साहित्य में उतर गई।

दिल में जब जब चिराग जलता है।
देवासी समाज तब बनता है।
हाउस अली उमंग नेक काम करते हैं।
अपने और पराए का ख्याल रखते हैं।

मेरे गांव आते ही वह पाषाण हो गया।
मुखड़े बारिश के ठहराव आ गया।
मकान मन मंगल ऐसा बनाए जनाब।
छप्पर में पहले से ही रिसावर आ गया।

हंस कर अपना दिन काटिए जनाब।
सुख मंगल की तरह।
मिल गया हो दिल का कोई साथी।
गर समंदर की तरह।

जब – जब देखा एक गगन नारंग का।
जाने जीवन क्यों मगन था।
यूं तो कुछ कलियां निकली अधखुली।
मुरझाई पर अद्भुत सघन थीं।

अपने मीत गीत हम गुनगुनाते रहे।
सदा आपको हम याद आते रहें।
लोग इतनी करें काम मिलकर सभी।
गीत सुंदर सदा मिलकर गाते रहें।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बहुत सारे उदाहरणों के माध्यम से कवि कहते है की कैसी भी विपरीत परिस्थिति क्यों न हो जीवन में कभी भी दुखी होकर बैठ न जाना। कोई भी दुःख लंबे वक्त के लिए नहीं ठहर सकता आपके जीवन में, इसलिए सदैव ही मुस्कुराते रहे। धैर्य से कार्य करते हुए आगे बढ़ते रहे जीवन में।

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यह कविता (उठे ज्वार, भटका पनिहार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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कागद पे आखर आओ अंकित करें।

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♦ कागद पे आखर आओ अंकित करें। ♦

दुस्साहस करने वालों की खोज खबर लें।
कोरे कागद पे आखर आओ अंकित करें।

•••

स्कन्द पुराण में उल्लिखित है श्री राम जन्म स्थान।
कितनी दूरी है और कहाँ अमुक स्थान।

जिला जज ने दिया फैसला वर्ष था अट्ठारह सौ छियासी।
हिंदुओं को पूजा करने की मिली इजाजत विधि सम्मत अविनाशी।

जन्म स्थान राम चबूतरा मुस्लिम पक्ष ने किया स्वीकार।
जब उन्होने कर लिया खूब गहन विचार।

जिलानी ने कहा उन्नीस सौ उनचास से पहले पूजा का नहीं है सबूत।
जस्टिस बोबरे ने पूछा वहाँ नमाज का कब रहा वजूद।

बाबर विध्वंसक था उसे न्याय संगत कैसे मानें।
मस्जिद खाली स्थान पर बनी, इसे कैसे जानें।

सिया वक्फ बोर्ड ने, नहीं दी कोई चुनौती।
सुन्नी वक्फ बोर्ड से विवाद हो गई एकलौती।

ब्रिटिस काल में था मिला पूजा करने का अधिकार।
सन उन्नीस सौ उनचास में, जैन के अनुसार।

जैन ने कहा हवाई अड्डे पर नमाज हो तो वहाँ कब्जा होगा।
विवादित स्थल पर नमाज के लिए जाना कब अच्छा होगा।

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष का आया यही बयान।
उसने मान लिया ‘राम चबूतरा ही है राम जन्म स्थान’।

सबकी दलील सुनकर सर्वोच्च न्यायालय ने दिया अपना निर्णय।
कि ‘राम जन्म भूमि वही है यह बात है तय’।

पाँच एकड़ अलग जमीन मुस्लिमों को सरकार दे।
और सरकार से वह जमीन मुस्लिम पक्ष पा ले।

इस तरह हुआ पाँच सौ साल के विवाद का समापन।
क्योंकि एक मत से पांचों जजों ने बनाया अपना मन।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – “श्री राम जन्म भूमि” विवाद में समय – समय पर होने वाले विवाद और उतार चढ़ाव, उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सुप्रीम फैसले को क्रमबद्ध तरीके से कम शब्दों में कविता के रूप में पिरोकर सब कुछ समझाया है। इस कविता के माध्यम से आने वाली पीढ़िया “श्री राम जन्म भूमि” विवाद और सुप्रीम कोर्ट के सुप्रीम फैसले को समझ पाएंगे।

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यह कविता (कागद पे आखर आओ अंकित करें।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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