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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2023-KMSRAJ51 की कलम से

आया तूफान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aaya Toofan | आया तूफान।

सावधान खबरदार,
देखो आया ये तूफान।
दूर नहीं है किनारा,
सब हैं मुसाफिर।
हम हैं सहारा,
नैया है सबका किनारा।

सावधान खबरदार,
देखो आया ये तूफान।
हिम्मत न हारोऽऽ
मौंजों से खेलो।
तुम हो सिपाही,
धीर – वीर मतवाले।
देश भक्त तुम हिम्मतवाले,
छोड़ो न अपने सियाले।

सावधान खबरदार,
देखो आया ये तूफान।
चीर चपल जलधारा को,
खेवो नाव मंझधारा को।
पार लगा दोऽऽ
हिम्मत न हारो।
साथ अगर देगी,
विपुला महरानी।
अम्बर भी तो अश्क बहायेगा,
सागर भी थर-थर थर्यायेगा।
कोई भय नहीं, कोई डर नहीं,
दूर नहीं है किनारा।

सावधान खबरदार,
देखो आया ये तूफान।
ये शत्रु भी अजगर बन गरजता है,
ये सागर भी अवरोधों का,
बिजली बन चमकता है।
मन तारा आशाओं का,
लड़-लड़कर आगे-आगे बढ़ता है।
धीर तुम बलबीर तुम,
डरो नहीं झुको नहीं,
वीर तुम बढ़े चलो।

सावधान खबरदार,
देखो आया ये तूफान।
छली खड़े सरहद पर,
ताने अपनी बात।
बात-बात पर गुर्राते,
धौंस दिखाकर बतलाते।
हम शत्रु हैं बलवान,
डर न तू…
हट न तू…
तू है वीर जवान।
सावधान खबरदार,
देखो आया ये तूफान।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (आया तूफान।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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Note:-

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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सफर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Journey | सफर।

अजीब नजारा लिए चलते हैं,
जब मुसाफिर राहों पर चलते हैं।

डगर नई मंजिल नई लिए चलते हैं,
पथ पर बेगानों को लिए चलते हैं।

मंजिल तलक मुस्कुराहट लिए चलते हैं,
छोड़ पीछे गम, हंसी लिए चलते हैं।

नित दोस्त नए-नए लिए चलते हैं,
दुश्मन को अपना बना लिए चलते हैं।

कुछ पलों को अपना बना लिए चलते हैं,
बदलती शख्सियत को साथ लिए चलते हैं।

माना मंजिल पानी सबको साथ लिए चलते हैं,
कौन जाने ? कौन रहबर बना लिए चलते हैं।

टेढ़े-मेढें रास्तों पर सीधा साथी लिए चलते हैं,
प्रतिदिन बदलते रास्ते लिए चलते हैं।

मेरी छोड़ो अपनी सुना सबको बता लिए चलते हैं,
कुछ पल ही सही सबका दुख लिए चलते हैं।

कब किसका बांट देंगे गम, दुखड़ा लिए चलते हैं,
कौन बनेगा? कब किसका सहारा लिए चलते हैं।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अजीब नजारा लिए चलते हैं, जब भी मुसाफिर राहों पर चलते हैं। डगर नई होती, मंजिल भी नई लिए चलते हैं, पथ पर बेगानों को लिए चलते हैं। मन में व दिल में मंजिल तलक मुस्कुराहट लिए चलते हैं, छोड़ के पीछे सभी गम, हंसी लिए चलते हैं। रोज दोस्त नए-नए लिए राह में चलते हैं, राह में दुश्मन को भी अपना बनाये लिए चलते हैं। कुछ पलों के लिए ही सही अपना बनाये लिए चलते हैं। माना की सबको मंजिल पानी है पर सबको साथ लिए चलते हैं। प्रतिदिन बदलते टेढ़े-मेढें रास्तों पर सीधा व अच्छा साथी लिए चलते हैं। कुछ पल के लिए ही सही सबका दुख बाटते चलते हैं। कौन बनेगा? कब किसका सहारा इसलिए साथ लिए चलते हैं।

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यह कविता (सफर।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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बेजार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bejaar | बेजार।

मेरे लिए बेजार ना हुआ करो,
बेताबी अपनी बढ़ाया ना करो।

तलब लगी थी उल्फत की जो,
बाजारों में यूं रूसवा ना करो।

हमारी खातिर सबको यू दलील ना दो,
कमसिन को सरताज बनाया ना करो।

दे हीरे जवाहरात कीमत ना बढ़ाओ,
दे दिल बना रहीस कीमत लगाया ना करो।

अदब से होके रूबरू हमारे,
बैठा दिल बना रानी कुर्सी लगाया ना करो।

प्रिय तुम्हारी है बड़ी ताकतवर,
बना फुल नाजुक बनाया ना करो।

जान तेरी देख ना पाती परेशान रसिक तुझे,
अपना बना यूं बैगाना बनाया ना करो।

दिल में बैठा खंजर रख साथ,
बचा सबकी नजरों से बंद रखा ना करो।

तकलीफों में रख खुद को हरदम,
हमें हर सुख देने की चाहत रखा ना करो।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मेरे प्रिय मेरे लिए इस तरह परेशान हुआ ना करो, हमारी खातिर सदैव ही सबको यू दलील ना दो। दे हीरे जवाहरात कीमत ना बढ़ाओ मेरा, देकर दिल बना रहीस फिर कीमत लगाया ना करो। यूँ अदब से होके रूबरू हमारे, बैठा दिल बना रानी कुर्सी मेरे लिए लगाया ना करो। ये ना भूलो प्रिय तुम्हारी है बड़ी ताकतवर, ऐसे बना फुल नाजुक बनाया ना करो। जान तेरी देख ना पाती परेशान जरा सा भी तुझे, यूँ अपना बना यूं बैगाना बनाया ना करो। तकलीफों में रख खुद को हरदम, यूँ ही हमें हर सुख देने की चाहत रखा ना करो।

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यह कविता (बेजार।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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ओ माझी रे।

Kmsraj51 की कलम से…..

O Majhi Re | ओ माझी रे।

हइया हो हइया हइया हो हइया,
ओ हो हो…3 हइया हो हइया।
चल रे माझी चलता चल,
खेव रे नईया बढ़ते चल।
घुमड़-घुमड़ आये रे बदरा,
देर न कर तू चलता चल।
हइया हो हइया हइया हो हइया,
ओ हो हो…3 हइया हो हइया।

उमड़े तो सागर सूरज ढलता जाये,
सांझ की बेला दौड़ी – दौड़ी आये।
चंदा भी जाल बिछाये,
अँधियारी की बदरी छाये।
हइया हो हइया हइया हो हइया,
ओ हो हो…3 हइया हो हइया।

छोड़ न देनाऽऽ धीरज साथी,
तोड़ न लेना मन की बाती।
ये तो बात है पल दो पल की,
आस का दामन,
चहुँ ओर निराशा।
घुमड़-घुमड़ आये बदरा,
हइया हो हइया हइया हो हइया,
ओ हो हो…3 हइया हो हइया।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (ओ माझी रे।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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इक प्रयास।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ek Prayaas | इक प्रयास

इक प्रयास। / पार्ट – 5

इक प्रयास (एक प्रयास)।

संघर्षों में हमने जाना, आजादी क्या चीज है,
घुट-घुट कर जीना, और खामोशी से मर जाना है।

मुगलों तुर्कों से लड़े-भिड़े, अँग्रेजों से लिये लोहा,
मर – मर के जी लिये, जिस्म हुआ स्वाहा।

न जाने कितनी जिंदगी जिये, न जाने कितनी मरे,
तिरंगे की खातिर साँसों को, साँसों से जोड़ करे।

कंदराओं को आगार किये, रौशन घर के दरबार किये,
मिली मिल्कियत आजादी की, प्राणों को उत्सर्ग किये।

घुटन भरी हवाओं में, स्वतंत्रता की चाह लिये,
झूले फंदों पर, प्राणों का न मोह लिये।

हसरत बस इतनी रखे, ‘परिमल’ चाहों को बरकरार रखें,
खुली हवाओं में, बहार गलियों को स्वतंत्र रखें।

हर दिल खुशियों से भरा रहे, यूँ ही बरसों बरस रहे,
खुशियाँ दो चार रहे, सबके दिलों में बेसुमार प्यार रहे।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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इक प्रयास।

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Ek Prayaas | इक प्रयास

इक प्रयास। / पार्ट – 4

इक प्रयास (एक प्रयास)।

बड़े – बूढ़े कह गये, रख लो इसका ध्यान,
सूरज में दम नहीं, अँधियारा है अति बलवान।

खून – पसीना इक करता, फिर भी रहा गरीब,
दो वक्त की रोटी मिले, जगे घर का नसीब।

आकर हमसे पूंछ लो, कैसा है ये संसार,
ग्राहक जैसे दीखते, वैसा ही है बाज़ार।

घर पर वो बोले नहीं, बाहर हैं मौन,
‘परिमल’ बंद किताब है, बाँचे उसको कौन।

मन को उसके मोह लो, बोलो मधुर बोल,
दोगे तो छोड़ पछताओगे, मुक्तक हैं अनमोल।

सुर से सच्ची प्रीति है, वेदना में डूबे बोल,
बसा लो अपनी आवाज में, बैजू के रस घोल।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Ek Prayaas, Hindi Poems, kavi satish shekhar srivastava parimal, poem on struggle of life in hindi, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', इक प्रयास, इक प्रयास पार्ट – 4 – सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, संघर्ष हौसला पर कविता, संघर्षमय जीवन पर कविता, संघर्षमय जीवन पर दो पंक्तियाँ, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

स्त्री।

Kmsraj51 की कलम से…..

Nari | स्त्री।

मैं स्त्री हूं, प्रायः घर की देवी भी कहलाती हूं,
कहीं प्रताड़ित, तो कहीं पूजी जाती हूं।

कहीं मेरा मान सम्मान किया जाता है,
कहीं मुझे कोख में ही मार दिया जाता है।

कभी बड़े चाव से सोलह शृंगार करते है,
कभी भरी सभा में, वस्त्र भी तो हरते है।

कभी वंश वृद्धि के लिए सर माथे बिठाते हैं,
कभी रहन सहन पर, बेबात ही उंगली उठाते है।

देख चोंचले समाज के, आ जाता है रोष मुझे,
पूछती हूं दर्पण से, क्यों जड़ा यह दोष मुझे?

क्यों मर्यादा की बेड़ी ने, स्त्रियों को ही जकड़ा है,
मान की जंजीरों ने, पुरुषों को कब पकड़ा है?

जिद्दी, अड़ियल, ढीठ, चाहे जो कह लो मुझे,
देवी की संज्ञा न दो, बस स्त्री ही रहने दो मुझे।

♦ नंदिता माजी शर्मा – मुंबई, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “नंदिता माजी शर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — मैं स्त्री हूं, जीवन हूं,आकांक्षा हूं ,सपना हूं स्वयं के निर्माण का, परिवार के और मानव समाज के! मैं सौंदर्य नहीं स्वरूप हूं ,सृष्टि का! पर आजकल के मानव को क्या हो गया है कहीं मेरा बहुत मान सम्मान किया जाता है, तो कहीं मुझे कोख में ही क्यों मार दिया जाता है? वैसे तो प्रायः घर की देवी भी कहलाती हूं, लेकिन फिर भी कहीं प्रताड़ित, तो कहीं पूजी जाती हूं। कभी बड़े चाव व प्रेम से सोलह शृंगार करते है, तो कभी भरी सभा में, वस्त्र भी तो हरते है। कभी वंश वृद्धि के लिए सर माथे बिठाते हैं, तो फिर क्यों कभी रहन सहन पर, बेबात ही उंगली उठाते रहते है? इस तरह का देख चोंचले समाज के, आ जाता है कभी-कभी बहुत रोष मुझे, अक्सर पूछती हूं दर्पण से, क्यों जड़ा यह दोष मुझे? जरा सोचे क्यों मर्यादा की बेड़ी ने, स्त्रियों को ही जकड़ा है? मान की जंजीरों ने, पुरुषों को कब पकड़ा है? बस यही कहना है हमारा – जिद्दी, अड़ियल, ढीठ, चाहे जो कह लो मुझे, भले ही देवी की संज्ञा न दो, बस स्त्री ही रहने दो मुझे।

—————

यह कविता (स्त्री।) “नंदिता माजी शर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

नाम – नंदिता माजी शर्मा

साहित्यिक नाम : नंदिता “आनंदिता”
लेखिका/डिजीटल अलंकरणकर्ता/कवियत्री/समाज सेविका 
संस्थापक/अध्यक्ष — कर्मा फाऊंडेशन
राष्ट्रीय सह-अध्यक्ष — साहित्य संगम संस्थान (पंजीकृत साहित्यिक संस्था)
अलंकरण प्रमुख — साहित्योदय(पंजीकृत साहित्यिक संस्था)
अलंकरण अधिकारी — अंतरराष्ट्रीय शब्द सृजन
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष — साहित्य संगम संस्थान, (महाराष्ट्र इकाई)
जिला प्रभारी — एन.जी.टी.ओ
मीडिया प्रभारी — महाराष्ट्र शब्दाक्षर
मुख्य संपादक — दोहा संगम ( मासिक ई पत्रिका )
प्रधान संपादक — वंदिता ( मासिक ई पत्रिका )
मुख्य संपादक — महाराष्ट्र मल्हार ( मासिक ई पत्रिका )
प्रधान संपादक — आह्लाद मासिक ई-पत्रिका
प्रधान संपादक — अविचल प्रभा मासिक ई-पत्रिका

कई विधाओं में लेखन।

अनेक ई-पत्रिकाओं का सफल संपादन।
विभिन्न साहित्यिक मंचो और गोष्ठियों से ‘श्रेष्ठ रचनाकार’ ‘सर्वश्रेष्ठ रचनाकार’ इत्यादि अनेक सम्मान प्राप्त।
हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में स्वतंत्र लेखन।
०६ साझा – संग्रह ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज।
अनावृत संचालन हेतु लन्दन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
०१ साझा – संग्रह इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज।
०१ दिव्याक्षर ब्रेल साझा – संग्रह वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज।
हिंदी अकादमी, मुंबई द्वारा साहित्य भूषण सम्मान २०२३ से सम्मानित।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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जागो अब तो जागो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Jago Ab To Jago – जागो अब तो जागो।

ले रही अँगड़ाई, पूरब से है आई
रक्तिम कर लाई है।
प्रथम संदेशा आई है,
सूरज की अँगड़ाई है।
धरती की अरुणाई है,
जागोऽऽ अब तो जागो।

इठलाती वसुंधरा चली,
हरियाली की छाया तले।
सदियों से दु:ख झेले,
ममता के सजे मेले।
अब तो टूटे भव के बंधन,
जुड़े प्रेम के बंधन।
ली रेणुका ने अँगड़ाई है,
जागोऽऽ अब तो जागो।

आया जमाना नया-नया,
नई-नई इसकी सुबह।
उम्मीदों के दामन में,
घायल हुआ यकीन।
वैदिकता से भरा रहा,
भरतवंश का देश।
शौर्य सुहृद हरियाली, शांति का,
ऐसा ही है इसका परिवेश।
देख इसे रत्नगर्भा हर्षाई,
कहती जागोऽऽ अब तो जागो।

आये तुम गोदी में,
निर्वस्त्र न कर डालो।
माँ हूँ तुम सबकी,
कुछ शर्म तो दिखाओ।
सनातन धर्म को सुदृढ़ बनाओ,
रहो भूखे मगर
इक-दूसरे को खुशियों से भर जाओ।
प्रेम प्रीति त्याग की मूरत बन,
जग में ब्रह्मदेश का नाम कर जाओ,
जागोऽऽ अब तो जागो।

सदा पाठ पढ़ाया है,
अपना स्वार्थ भुलाया है।
दूसरे की खातिर,
प्राणों का जौहर कराया है।
भगवा लाल पीले से,
पन्थ शहीदों का कहलाया है।
विश्वास श्रद्धा कर्म-धर्म देकर,
तुम्हें सनातन मैनें बनाया है।
लाज मेरी तुम सब रख लेना,
तिरंगे की शान न घटने देना।
प्राणों को प्राणों मे भर लेना,
हँसकर तुम उसे दे देना,
जागोऽऽ अब तो जागो।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला – सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (जागो अब तो जागो।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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यही हमारा नारा है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yahi Hamara Nara Hai | यही हमारा नारा है।

लड़ी लड़ाइयां कई है अब तक,
थी इतिहास में तीर – तलवारों से।
सियासी लड़ाइयां लड़ी जाती है,
आज जाति – धर्म की तकरारों से।

अरे जागो भारतवासी आज तो,
समझो कि भारत देश हमारा है।
हिन्दू, मुस्लिम और सिख, ईसाई,
हैं सब भाई, यही हमारा नारा है।

कद्र करो अब इक दूजे की यारो,
किसी को जाति धर्म में मत बांटो।
जो बांट रहे हैं सिहासत के माहिर,
आओ मिलकर उनको सब डांटो।

आजादी से लेकर अब तक इन्होंने,
बारी-बारी से खेल बस यही खेला।
ये करते रहे फैला कर नफरत राज है,
जाति धर्म के कहर को जनता ने झेला।

अखण्ड भारत की तस्वीर को यारो,
सिहासी बहकावों पर यूं मत तोड़ो।
देश बड़ा है जाति, धर्म और सत्ता से,
नफरत का ठीकरा देश पर मत फोड़ों।

टूटे भारत कई टुकड़ों में है साजिश,
संस्कृति पर भी तो हुआ है हमला।
हम फूल बने इस भारत फूलदान के,
हो हिंदुस्तान ही हम सबका गमला।

बिखरने न देना भारत देश को,
इनकी साजिश को नाकाम करो।
आओ तोड़ें ये नफरत की दीवारें,
मिल के एक दूजे में प्यार भरो।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इतिहास गवाह है जब भी किसी देश की जनता आपस में जाति, धर्म, मजहब व पंत के नाम पर लड़ती रहती है तो उसका अपना खुद का कोई अस्तित्व नहीं होता है, उसका कभी भी अच्छे से विकास नहीं हो पाता, उसे लम्बे समय के लिए बार-बार गुलामी का दंश झेलना ही पड़ता है और उनका पतन हो जाता है। उनके साथ साथ देश का भी पतन हो जाता है, इसलिए खुद के निजी स्वार्थ से बाहर निकल कर पहले आपसी नफरत को त्याग कर सभी मिल जुलकर नए अखंड भारत के पुनः उत्थान में भी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करते चले। यह याद रखें – जब तक आपका देश हर तरह से सुरक्षित है तभी तक आप व आपका परिवार सुरक्षित है। जय हिन्द – जय भारत।

—————

यह कविता (यही हमारा नारा है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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सैनिक का सैनिक।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sainik Ka Sainik | सैनिक का सैनिक।

उसके हिस्से चारदीवारी, शहर कहाँ आता है,
शब्दकोश में छुट्टी, आराम अक्षर कहाँ आता है।
दुनियाँ को सैनिक का शौर्य, त्याग तो दिखता है,
उस सैनिक के पीछे का सैनिक नजर कहाँ आता है।

जिसे जवानी कहते हैं वो उमर कहाँ आता है,
वो चार कदम वाला रोमांटिक सफर कहाँ आता है।
किस्मत में उसके मायके और ससुराल आया करती है,
उस सैनिक के हिस्से अपना घर कहाँ आता है।

उनके ख्वाबों के परिंदों को पर कहाँ आता है,
सरहद से उसकी जमीं उसका अंबर कहाँ आता है।
लोगों के दिन, दुनियाँ, तकदीर बदलते रहते हैं,
उस सैनिक के हिस्से नया कैलेंडर कहाँ आता है।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – बॉर्डर ही उसका बिस्तर है, आकाश ही उसका चादर है, उसके हिस्से में चारदीवारी या शहर का आराम कहाँ आता है। एक सैनिक के शब्दकोश में छुट्टी व आराम अक्षर कहाँ आता है भला। दुनियाँ को एक सैनिक का शौर्य, त्याग तो दिखता है, पर उस सैनिक के पीछे का सैनिक नजर कहाँ आता है। एक सैनिक के लिए जवानी का उमर व चार कदम वाला रोमांटिक सफर कहाँ आता है। किस्मत में उसके मायके और ससुराल आया करती है, उस सैनिक के हिस्से अपना घर कहाँ आता है, उसका घर तो पूरा देश ही है। आम लोगों के दिन, दुनियाँ, तकदीर बदलते रहते हैं, पर उस सैनिक के हिस्से नया कैलेंडर कहाँ आता है। गर्व करो अपने वीर सैनिकों पर जो बॉर्डर पर सीना ताने खड़े है हमारे सुख चैन के लिए। जय हिन्द – जय भारत।

—•—•—•—

sk-mishra-kmsraj51.png

यह कविता (सैनिक का सैनिक।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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