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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2023-KMSRAJ51 की कलम से

आज आजादी है हमको मिली तो।

Kmsraj51 की कलम से…..

Aaj Azadi Hai Hamko Mili Tho | आज आजादी है हमको मिली तो।

आज आजादी है हमको मिली तो,
दिलाई शहीदों और वीर जवानों ने।
सीमा के प्रहरी जवानों की वजह से
सुरक्षित हैं हम अपने मकानों में।

है उदगार हमारे क्या उनके खातिर?
क्या भाव और कितनी कैसी यादें हैं?
एक रस्म जान मजबूरन हर साल हम,
15 अगस्त व 26 जनवरी को मनाते हैं।

इन खेतों पर है आज हक हमारा तो,
उन शहीदों का बलिदान ये हम खाते हैं।
ये खेत, खलियान थे सब जमीदारों के,
न जाने ये बातें कैसे हम भूल जाते हैं?

था फिरंगियों का कब्जा जमीं पर हमारी,
हम तो उनकी शतरंज के मोहरे प्यादे थे।
जमीन हमारी थी और था देश भी हमारा,
पर फिर भी बने वे आकर यहां शहजादे थे।

हम काश्तकार थे महज जमीनों के,
मालिक तो वे ही असल कहलाते थे।
फसल उगाते वे हमसे थे यहां खेतों में,
फिर कच्चा माल अपने देश ले जाते थे।

भला तो हो उन बहादुर शहिद वीरों का,
जो देश के लिए बलिदान अपना चढ़ाते थे।
एक धेला न लिया था पगार का उन्होंने,
खुद कमाते थे और मेहनत का ही खाते थे।

आज हमको मिली आजादी विरासत में,
हम पगार लेकर भी काम कहां करते हैं?
लाखों के वेतन भत्ते हैं हमारे फिर भी तो,
सब्सिडी और मुफ़्त का इंतजार करते हैं।

मुफ़्तखोरी की आदत से भारत को जल्दी,
हम सबको मिलकर निजात दिलाना होगा।
आर्थिक संकट में फंसते आजाद भारत को,
हमको ही तो बरबाद होने से बचाना होगा।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जरा सोचिये जमीं भी अपनी थी देश भी अपना था फिर भी था फिरंगियों का कब्जा जमीं पर हमारी, हम तो उनकी शतरंज के मोहरे व प्यादे थे। जमीन हमारी थी और था देश भी हमारा, पर फिर भी बने वे आकर यहां शहजादे थे क्यों ? हम तो नाम मात्र के काश्तकार थे जमीनों के, मालिक तो वे ही असल कहलाते थे। फसल उगवाते वे हमसे थे यहां खेतों में और फिर कच्चा माल अपने देश ले जाते थे। गर्व करों उन बहादुर शहिद वीरों का, जो देश के लिए बलिदान अपना चढ़ाते थे। कभी भी एक धेला न लिया था पगार का उन्होंने, सदैव ही खुद कमाते थे और मेहनत का ही खाते थे। जो आज़ादी हमे विरासत में मिली है उसका सम्मान क्यों नहीं करते आज? पगार लेते है लाखों में काम ना करने के। करों संकल्प की आज से ही मुफ़्तखोरी की आदत से भारत को जल्दी, हम सबको मिलकर निजात दिलाना होगा। आर्थिक संकट में फंसते आजाद भारत को, हमको ही तो बरबाद होने से बचाना होगा।

—————

यह कविता (आज आजादी है हमको मिली तो।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Desh Bhakti Kavita in Hindi, hemraj thakur, hemraj thakur poems, Patriotic Poems in Hindi, आज आजादी है हमको मिली तो, आज आजादी है हमको मिली तो - हेमराज ठाकुर, उत्साह बढ़ाने वाली कविता, जोश भर देने वाली देशभक्ति कविता, देशभक्ति कविता, देशभक्ति पर सर्वश्रेष्ठ कविताएँ, बहादुरी पर कविता, सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर जी की कविताएं

हो जाओ तैयार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ho Jao Taiyaar – हो जाओ तैयार।

दे रहा आवाज समय हमको, हो जाओ तैयार,
जीवन का राज यही है, हो जाओ तैयार।
चलो रे साथी चलो रे मेरे यार…….

मिटा दो दिल की रंजिशें,
छुआ-छूत को दूर करो।
देश से प्रेम अगर है तो जाओ तैयार,
कदम-कदम से-ऽऽ दिल को मिला लो।
लड़ने को हो तैयार, हो जाओ तैयार,
चलो रे साथी, चलो रे मेरे यार…….

जैसे मिले-ऽऽ सुर से ताल,
तालों से मिले सुर और राग।
घुल-मिल जाओ राग बनाओ,
सरगम के शोलों से आग बनाओ।
आगों से चराग जलाओ-ऽऽ
त्यागो-ऽऽ दिल के भेद, हो जाओ तैयार।
चलो रे साथी चलो रे मेरे यार…….

ये भूख हमें क्या जलायेगी,
जल – जल कर खुद मर जायेगी।
दीवाने हैं हम वतन के,
बाँधे हैं हम कफन सर पे।
हँसकर शूली चढ़ जायेगे,
झूलकर डोरी पर कह जायेगें।
आजाद वतन के हम परिंदें,
परवाज हम कर जायेंगे।
हँस – हँसकर खेल जायेगें,
कहते-कहते हम जायेगें, हो जाओ तैयार।
चलो रे साथी, चलो रे मेरे यार…….

ये युद्ध की अब बारी है,
सरहद पर मिटने की यारी है।
अपने लहू से लिख जायेगें,
जान निछावर कर जायेगें।
शोर – शराबे से हम नहीं डरते,
किसी की धमकी से नहीं झुकते।
तिरंगे की शान बढ़ायेगें,
वतन की आन बनायेगें।
कहते कहते कह जायेगें,
चलो रे साथी, चलो रे मेरे यार…….

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला – सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (हो जाओ तैयार।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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पहले और अब – गणतंत्र दिवस।

Kmsraj51 की कलम से…..

Earlier and Now – Republic Day – पहले और अब – गणतंत्र दिवस।

वो जमीन न रही, वो आसमां न रहा,
गणतंत्र दिवस मना रहें हैं हम।
वो गण न रहे वो तंत्र न रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

संविधान हम सब पूजते हैं,
हर जन के मन में विधान न रहा।
न्याय है किताबों में हकीकत में न रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

बात जब आती है अधिकारों पर,
तरिका-ए-कार न रहा।
वो मानव अधिकार न रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

प्रस्तावना को उद्देशिका कहा जाता रहा,
संविधान निर्माता राष्ट्र निर्माण सजाता रहा।
संपूर्ण प्रभुता के साथ संपन्नता दिखाता रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

समाजवाद, पंथनिरपेक्षता को 42वें,
संशोधन से जोड़ा गया।
लोकतंत्रात्मक जनता का शासन बताते रहे,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को हम मनाते रहे,
सामाजिक, आर्थिक न्याय की गुहार लगाते रहे।
न्यूनतम और अधिकतम आयु हमें दर्शात रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

राजनीति, विचार अभिव्यक्ति बताते रहे,
अध्याय 19(1) जनमत निर्माण हमें बताते रहे।
विश्वास, धर्म उपासना का अधिकार भी बताता रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

प्रतिष्ठा और अवसर की समानता भी बताता रहा,
व्यक्ति की गरिमा न रही फिर भी गिनवाता रहा।
राष्ट्र की एकता अखंडता सलामत रही,
भाई से भाई को मरवाता रहा,
वो जमीन न रही वो आसमां न रहा।

आओ हम सब सच्चाई का रूख अपनाएं,
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाए।
हर जन में मानव व मानवीयता बनी रहे,
वो जमीन भी उजागर हो आसमां भी उजागर रहे।
जय हिन्द – जय भारत॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — आज प्रश्न है तो वह यह है कि आखिर भारत में कब पूर्ण गणतंत्र मनाया जाएगा? जब हर आदमी को उसका पूरा अधिकार मात्र कागजों में ही नहीं बल्कि असल में मिलेगा। जिन पूर्वजों ने अपना बलिदान देकर भारत को यह सपना देख कर आजाद करवाया था, कि भारत की जनता को पूर्ण गणतंत्रता प्राप्त हो। उनके दिलों पर आज क्या बीतती होगी, यदि वे किसी लोक या दुनियां से आज भारत का दृश्य देखते होंगे। वे तो अंग्रेज थे, जो भारतीयों का काम कभी भी समय पर नहीं करते थे। फिर करते भी थे तो पूरी खुशामद करवा कर ही करवाते थे। पर आज तो काम करवाने वाला भी भारतीय है और काम करने वाला भी भारतीय ही है। आज हालत उससे भी बदतर है। बिना रिश्वत या चाटुकारिता के कोई काम करने को राजी नहीं है। शायद ऐसे भारत की कल्पना तो कभी हमारे पुरखों ने न की हो।

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यह कविता (पहले और अब – गणतंत्र दिवस।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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बदलता भारत।

Kmsraj51 की कलम से…..

Badalta Bharat – बदलता भारत।

बदल गया भारत, देश बदल गया,
नया दौर आने से भारत बदल गया।
इंसान ही इंसान का दुश्मन बन गया,
जो विश्वास अपनों पर था वो मिट गया।

ऐसा मंजर आया, सब कुछ बदल गया,
झूठ का बोलवाला, सत्य का पतन हो गया।
बन गए अलग-अलग दल, अपनी राजनीति चला रहे है,
सत्ता की खातिर, एक दूसरे को नीचा दिखा रहे है।

देश प्रेम और सद्भावना तो कहाँ लुप्त हो रही है,
गुनाहों और अपराधों को सरेआम बढ़ावा दिया जा रही है।
दिन दहाड़े अपहरण, धोखाधड़ी,
बेटियों की इज्जत सरे आम लूटी जा रही है,
देखकर भी सभी मौन धारण किये हुए है।

तिरंगा की शान की खातिर कितने वीरों ने बलिदान दिया,
आज वही तिरंगा शर्म से सर को झुकाए हुए है।
आजादी की खातिर हमारे वीरों ने अपने प्राण गवाएं,
आज देख भारत की दुर्दशा देख कर आँखों में आँसू भर आएं।
इंसान अपने में इतना व्यस्त हो गया,
दूसरे को अनदेखा कर अपने में ही खो गया।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — चारो तरफ आज झूठ का बोलवाला है सत्य का पतन हो गया। सभी राजनीति दल, अपनी-अपनी राजनीति चला रहे है, गरीबो व निर्दोषों की ना सुने कोई, जनता मारी-मारी फिर चहु ओर। जिस देश प्रेम और सद्भावना के लिए वीरो ने अपना बलिदान दिया वो तो कहाँ लुप्त हो गया है, गुनाहों और अपराधों को सरेआम बढ़ावा दिया जा रही है अब। दिन दहाड़े अपहरण, धोखाधड़ी, बेटियों की इज्जत सरे आम लूटी जा रही है, देखकर भी सभी मौन धारण किये हुए है क्यों? इंसान ही इंसान का दुश्मन बन बैठा है आज, जो विश्वास था अपनों पर वो मिट गया है आज।

—————

यह कविता (बदलता भारत।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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माँ की शिकायत।

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Maa ki Shikayat – माँ की शिकायत।

साँपों का अब देश नहीं सारी दुनियां स्वीकार करे,
इधर ना अब ताके-झाँकें ना खरी कोई दीवार करे।
महारूद्र सा सीमा प्रहरी सरहद पर हुंकार रहा,
जिसकी माँ ने दूध पिलाया हो वो सीमा पार करे।

काटके गर्दन रख दूँगा सीमा-स्तंभ के ऊपर ही,
हर वार सामने से होगा मस्तक, छाती औ धर पर ही।
सन सैंतालीस, बासठ का ना भारत हमें समझना तुम,
आँख हमारी दुश्मन पर और रहते कर खंजर पर ही।
कदम बढ़ाने से पहले अंजाम का सोच विचार करे,
जिसकी माँ ने दूध…….

कायर श्रृगालों चोरी छुप के सोये शेरों को मत छेड़ो,
अपने नापाक हाथ हमारे शीश, भाल पर मत फेरो।
थप्पड़ पड़ते ही दुम दबाकर राष्ट्रसंघ भाग जाते हो,
चूहे-बिल्ली की फौज बनाकर ऐरावत को मत घेरो।
या फिर बीवी-बहनों को बेवा बनने को तैयार करे,
जिसकी माँ ने दूध…….

एक से बढ़के एक हुतात्मा खड़े हैं दिल दहलाने को,
रणचंडी बन शत्रु के घर में त्राहिमाम मचाने को।
दो हाथ दिये, दो पाँव दिये, दो आँखे भी दी लड़ने को,
सिर्फ एक ही जिंदगी क्यूँ दी भारत माँ पे लुटाने को।
यही शिकायत माँ को भी है सुत दो से प्रभु चार करे,
जिसकी माँ ने दूध पिलाया हो वो सीमा पार करे।

जय हिन्द – जय भारत।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है – मेरे देश के वीर सैनिक, महारूद्र सा सीमा प्रहरी सरहद पर हुंकार रहा, जिसकी माँ ने दूध पिलाया हो वो सीमा पार करे। वीर सैनिको की गर्जना है – काटके गर्दन रख दूँगा सीमा-स्तंभ के ऊपर ही, हर वार सामने से होगा मस्तक, छाती औ धर पर ही। सन सैंतालीस या बासठ का ना भारत हमें समझना तुम, आँख हमारी दुश्मन पर और रहते कर खंजर पर ही। कदम बढ़ाने से पहले अंजाम का सोच विचार करलो। कायर श्रृगालों चोरी छुप के जो वार करने की आदत है तुम्हारी, ये मत भूलो व सोये शेरों को मत छेड़ो, अपने नापाक हाथ हमारे शीश, भाल पर मत फेरो। जरा सा थप्पड़ पड़ते ही दुम दबाकर राष्ट्रसंघ भाग जाते हो तुम। एक से बढ़के एक वीर हुतात्मा खड़े हैं तुम्हारे दिल दहलाने को, रणचंडी बन शत्रु के घर में त्राहिमाम मचाने को। “हे प्रभु दो हाथ दिये, दो पाँव दिये, दो आँखे भी दी लड़ने को, सिर्फ एक ही जिंदगी क्यूँ दी भारत माँ पे लुटाने को।” यही शिकायत माँ को भी है सुत दो से प्रभु चार करे, जिसकी माँ ने दूध पिलाया हो वो सीमा जरा पार करे। जय हिन्द – जय भारत।

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sk-mishra-kmsraj51.png

यह कविता (माँ की शिकायत।) “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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गणतंत्र का महत्व।

Kmsraj51 की कलम से…..

Importance of republic – गणतंत्र का महत्व।

26 जनवरी भारत का गणतंत्र दिवस है। जब भी 26 जनवरी आती है हर सच्चे भारतीय का ह्रदय गर्व से भर जाता है। यह ऐसा विशिष्ट दिवस है जो हम सभी देशवासियों को एक मूल्यों पर आधारित लोकतांत्रिक देश के नागरिक होने का भान करवाता है। हम सभी जानते हैं कि भारत विश्व का सबसे अधिक समृद्धशाली, श्रेष्ठ परंपराओं, नैतिक मूल्यों और वसुधैवकुटुंबकम की परिकल्पना पर आधारित नीतियों का देश रहा है। किन्तु दुर्भाग्यवश नैतिकता से गिरे हुए अनेक आततायी विदेशियों द्वारा समय समय पर इसकी अखंडता को खंडित और धूमिल किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त चन्द देशद्रोहियों के विश्वासघात के कारण भारत जैसे शक्तिशाली देश को वर्षों तक दासता की ज़ंजीरों में रहना पड़ा।

जिसके कारण हमें अपनी अनेक बहुमूल्य धरोहरों (नालंदा विश्वविद्यालय, अनेक ऐतिहासिक इमारतें, अद्भुत शिल्पकलाओं के निर्माण इत्यादि) से विमुख होना पड़ा। दीर्घकालिक संघर्ष और भारतीय शूरवीरों के बलिदान की बदौलत हमें 15 अगस्त 1947 को परतन्त्रता से मुक्ति मिली। कितना अद्भुत अनुपम दिन रहा होगा उन्नीस सौ सैंतालिस का पन्द्रह अगस्त का दिन ‘जब एक लंबी प्रतीक्षा के पश्चात अपने देश का तिरंगा अपनी पूरी आन बान और शान से लहराया होगा’ ये कल्पना ही रोमांचित कर देती है। किन्तु देश का संघर्ष मात्र स्वतन्त्रता मिल जाने से समाप्त नहीं हो जाता केवल संघर्ष की दिशा और प्राथमिकताएँ बदल जाती हैं।

अब सबसे अधिक विचारणीय पक्ष ये होता है कि विदेशियों द्वारा पहुँचाई गई क्षति को ठीक करना और एक ऐसा संविधान बनाना जो सरकार और नागरिकों के लिए नीतियों, कर्तव्यों तथा अधिकारों से संबंधित दिशा निर्देशन करे। ये दिशा निर्देशन ब्रिटिश राज से पूर्ण रूपेण स्वतन्त्रता का बोध कराने के लिए भी अति आवश्यक था। 31 दिसम्बर 1929 को श्री जवाहरलाल नेहरू जी की अध्यक्षता में लाहौर में मध्य रात्रि को एक सत्र का आयोजन किया गया था और उस बैठक में जितने भी लोग उपस्थित थे सबने 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज दिवस मनाने की शपथ भी ली थी। इस निर्णय का सभी क्रांतिकारियों और राजनैतिक दलों ने एक मत से समर्थन किया था।

  • भारतीय संविधान की संरचना की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई थी जिसका उद्देश्य भारत की शासन व्यवस्था कैसी होगी इसका एक दीर्घकालिक प्रारूप तैयार करना था। हमारे देश का संविधान बहुत सोच समझ कर, गहरे चिन्तन-मनन और अनेक बैठकों के बाद बनाया गया है। इसलिए इसकी रूपरेखा अपने आप में अनुपम है।
  • हमें स्वतन्त्रता 15 अगस्त 1947 को मिल गई थी। परंतु ग़ुलामी की ज़ंजीरों से आज़ाद होने का सच्चा आभास तब हुआ जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान अपनी उत्कृष्ट रूपरेखा के साथ संपूर्ण देश में लागू हुआ।
  • तब से हम हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते है क्योंकि इसके बाद भारत के नागरिकों को अपनी सरकार स्वयं चुनने का अधिकार मिला।

हमारे देश में संविधान लागू होने के बाद :-

  • डॉ राजेंद्र प्रसाद ने प्रथम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
  • राष्ट्रपति का क़ाफ़िला पाँच मील की दूरी पर स्थित इर्विन स्टेडियम पहुँचा जहाँ गर्व और सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।

भारतीय संविधान कई कारणों से विशेष है। सबसे विशेष बात ये है कि – उदारता और मानवीय मूल्यों पर आधारित संविधान है। 395 अनुच्छेदों और 8 अनुसूचियों के साथ भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है।

  • प्रथम गणतंत्र के अवसर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने समस्त देशवासियों से देश को वर्गहीन, सहकारी, मुक्त और प्रसन्नचित समाज की स्थापना करने की अपील की।

आज हम सभी गर्व और हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मनाते हैं। एक मुक्तक गणतंत्र दिवस के लिए समर्पित:-

रंग लाया अमर शहीदों का बलिदान जब,
मिला देश को स्वाधीनता का वरदान तब।
देश में संविधान अपना जब पारित हुआ,
भरा देश के हर नागरिक में अभिमान तब।

♦ वेदस्मृति ‘कृती‘ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस आलेख में समझाने की कोशिश की है — भारत विश्व का सबसे अधिक समृद्धशाली, श्रेष्ठ परंपराओं, नैतिक मूल्यों और वसुधैवकुटुंबकम की परिकल्पना पर आधारित नीतियों का देश रहा है। किन्तु दुर्भाग्यवश नैतिकता से गिरे हुए अनेक आततायी विदेशियों द्वारा समय समय पर इसकी अखंडता को खंडित और धूमिल किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त चन्द देशद्रोहियों के विश्वासघात के कारण भारत जैसे शक्तिशाली देश को वर्षों तक दासता की ज़ंजीरों में रहना पड़ा। जिसके कारण हमें अपनी अनेक बहुमूल्य धरोहरों (नालंदा विश्वविद्यालय, अनेक ऐतिहासिक इमारतें, अद्भुत शिल्पकलाओं के निर्माण इत्यादि) से विमुख होना पड़ा। दीर्घकालिक संघर्ष और भारतीय शूरवीरों के बलिदान की बदौलत हमें 15 अगस्त 1947 को परतन्त्रता से मुक्ति मिली। आज़ाद होने का सच्चा आभास तब हुआ जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान अपनी उत्कृष्ट रूपरेखा के साथ संपूर्ण देश में लागू हुआ।

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यह आलेख (गणतंत्र का महत्व।) ” वेदस्मृति ‘कृती‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई• आई• टी• शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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गणतंत्र दिवस समारोह।

Kmsraj51 की कलम से…..

Republic Day Celebrations – गणतंत्र दिवस समारोह।

आओ झूमे, नाचे, जश्न मनाएं,
गणतंत्र दिवस आया है।
जिरादेई की धरती पर लिया जनम,
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को कोटी कोटी नमन।
कलम के पुजारी ने संभाली कमान,
संविधान समिती के स्थाई अध्यक्ष बने।
देश को दिया नया संविधान।

भारत मां के सपूत प्रेम बिहारी रायजादा,
संविधान लिखने का लिया प्रण।
हर पन्ने पर नाम है अंकित,
समर्पण किया हर क्षण।
अधर में लटका हुआ था,
भारत की जनता का ख्वाब।
कई सपूत आगे आए,
ऐसे उभरे मानो खिलता हुआ गुलाब।

स्वतंत्र भारत की सांसों में,
नए जीवन का संचार किया।
ओजपूर्ण विचार धारा से,
जनता को जागृत किया।
अनेकता में एकता की भारत भूमी पर,
संविधान लाकर एकता का शंखनाद किया।

राष्ट्रभक्ति की ज्योति जलाकर,
जन – जन में प्रकाश भरे।
भारत तुम्हारा ऋणी रहेगा,
चारो ओर गुणगान करेगा।
नभ में चांद, सूरज जैसा,
हर रोज तुम्हारी यशगान करेगा।

२६ जनवरी १९५० का दिन था महान,
अंबेडकर जी ने,
राजेंद्र बाबू से हस्ताक्षर करवाई।
हर चेहरे पर आई रौनक,
नए संविधान ने समानता लाई।
बहुत नाम गुमनाम है,
सबको “भोला” का सत सत नमन।

अमर हैं आप सभी,
रचकर भारतीय संविधान।
नया संविधान लागू कर,
भारत में नया इतिहास रच दिया।
खून बहाकर आजादी पाने वाले,
हर सपूत के सपनों को सच कर दिया।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — 26 जनवरी 1950 ईस्वी को भारत का संविधान भारतीय संविधान की प्रस्तावना के तहत भारत में विधिवत लागू किया गया। इस दिन से भारत एक पूर्ण गणतंत्र राष्ट्र बन गया। इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा था। भारतीय संविधान को अपने हाथों से लिखने वाले श्री प्रेम बिहारी नारायण रायजादा जी थे। गणतंत्र दिवस समारोह महान राष्ट्रीय नेता, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी को शुरू होकर 30 जनवरी को शहीद दिवस पर समाप्‍त होने के साथ सप्ताह भर चलेगा। यह समारोह आईएनए के दिग्गजों, स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले लोगों और आदिवासी समुदायों को श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था।

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यह कविता (गणतंत्र दिवस समारोह।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान।

Kmsraj51 की कलम से…..

Republic Day and Indian Constitution – गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान।

भारत एक गणतांत्रिक देश है। यह सत्य किसी से छुपा नहीं है। परंतु भारत के गणतंत्र दिवस तक की कहानी कैसे-कैसे कदम दर कदम आगे बढ़ती है, यह बात नई पीढ़ी तक ले जाना पुरानी पीढ़ी का जिम्मा है। इसके विषय में जब चर्चा की जाती है तो नई पीढ़ी के लिए एक क्रमिक ज्ञान समायोजित करना पुरानी पीढ़ी का दायित्व बन जाता है। इस कड़ी में यदि हम भारतीय संविधान के निर्माण की गाथा को शुरू से खंगालने की कोशिश करेंगे तो 9 नवंबर 1946 ईस्वी का वह दिन हमें जरूर याद आता है, जिस दिन संविधान सभा के अस्थाई सदस्य डॉ सच्चिदानंद सिन्हा की अध्यक्षता में संविधान सभा की बैठक पहली बार हुई थी। 1946 में ही डॉ राजेंद्र प्रसाद जी को संविधान सभा का अध्यक्ष चुना गया था। हालांकि यह सभा बाद में 1947 में भारत के आजाद होने के पश्चात दो भागों में बंट गई थी। भारत की संविधान सभा अलग और पाकिस्तान की संविधान सभा अलग हो गई थी। भारतीय संविधान सभा की घोषणा 15 अगस्त 1947 ईस्वी को भारत की आजादी के उपलक्ष पर डॉ राजेंद्र प्रसाद जी की अध्यक्षता में ही की गई थी। इस सभा में कुल 284 सदस्य चुने गए थे तथा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी को संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्यक्ष चुना गया था। डॉक्टर भीमराव जी को भारतीय संविधान के जनक की उपाधि भी दी गई है। अंबेडकर जी भारत के प्रथम कानून और न्याय मंत्री थे।

भारतीय संविधान की मूल प्रति…

भारतीय संविधान सभा ने भारतीय संविधान को लिखना शुरू किया। भारत के संविधान को बनाने के लिए विश्व के लगभग 60 गणतांत्रिक देशों के संविधानों का अध्ययन किया गया था। भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित गणतांत्रिक संविधान है। इस संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा था। भारतीय संविधान को अपने हाथों से लिखने वाले श्री प्रेम बिहारी नारायण रायजादा जी थे। नारायण जी एक कैलीग्राफी आर्टिस्ट थे। इनका जन्म 1901 में दिल्ली में हुआ था। इन्होंने संविधान को लिखने के बदले में किसी भी प्रकार का वेतन या भत्ता नहीं लिया था। इस संविधान की हस्तलिखित एक मूल प्रकृति(मूल प्रति) महाराज बाड़ा स्थित ग्वालियर की सेंट्रल लाइब्रेरी में रखी गई है। इस मूल प्रति में डॉ राजेंद्र प्रसाद तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ-साथ संविधान सभा के 284 सभी सदस्यों के हस्ताक्षर मूल रूप से चिन्हित है।

भारतीय संविधान में बनाती बार कुल 395 अनुच्छेद थे। ये अनुच्छेद 22 भागों में विभाजित थे तथा इसमें 8 अनुसूचियां थी। परंतु आजकल भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियां है जो 25 भागों में विभाजित की गई है। भारत का संविधान 251 पन्नों में लिखा गया है। यह संविधान 26 नवंबर 1949 ईस्वी को पारित किया गया था। इसलिए 26 नवंबर को संविधान दिवस के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2015 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की 125वी जयंती मनाई गई। उसी दिन से पूरे भारतवर्ष में 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जा रहा है।

भारत एक पूर्ण गणतंत्र राष्ट्र…

26 जनवरी 1950 ईस्वी को भारत का संविधान भारतीय संविधान की प्रस्तावना के तहत भारत में विधिवत लागू किया गया। इस दिन से भारत एक पूर्ण गणतंत्र राष्ट्र बन गया। इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में लिखा है “संविधान जनता के लिए हैं और जनता ही इसकी अंतिम संप्रभु है। प्रस्तावना लोगों के लक्ष्य, आकांक्षाओं को प्रकट करती है।” प्रस्तावना के इस कथन पर आज भारत की जनता को कितनी संप्रभुता मिली है? यह समझाना आज किसी अजूबे से कम नहीं है। संविधान की माने तो भारत की जनता को राष्ट्र की मूल व्यवस्थाओं के सन्दर्भ में निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार प्राप्त होना चाहिए। परन्तु भारत में आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी जनता को वे अधिकार प्राप्त नहीं है, जो संविधान ने उसे मौलिक अधिकारों के तहत प्रदान किए हैं। सबसे बड़ी अवहेलना समानता के अधिकार के तहत हो रही है। एक देश एक विधा की दृष्टि से यदि देखे तो समानता के अधिकार की नागरिकता के आधार पर धजियाँ उड़ाई जा रही है।

  • जातिवाद और धर्मवाद के आधार पर मानव – मानव में बहुत भेद किया जा रहा है।व्यक्ति – व्यक्ति और समुदाय विशेष के कुछ विशेषाधिकार निहित है, जो समानता के अधिकार की तौहीन है। कुछ वर्गों और समुदायों को संविधान में निर्धारित समय सीमाओं से परे हो कर अधिकार दिए जा रहे हैं और कुछ को कुछ नहीं। यह एक देश एक विधान के तहत अन्याय है।
  • यही हाल विवाह पद्धति के सन्दर्भ में भी है। ये बातें कैसे और किससे कहें? 1950 से 2021 तक संविधान के 105 संशोधन किए जा चुके हैं, पर कहीं भी जन लोकपाल बिल और समान नागरिक संहिता की बात को महत्व नहीं मिल पाया है।

यह सच है कि समय – समय पर ऐसी मांगे उठती रही है। परन्तु उन्हें राजनैतिक षड्यंत्रों की चक्की में पीस दिया जाता है। यदि ठीक से गौर करे तो पूर्ण गणतंत्र राज्य के लिए इन नियमों का कड़ाई से लागू होना अति आवश्यक है। वरना सत्ता और प्रशासनिक वर्ग का प्रभुत्व जनता पर स्थापित हो जाता है। जो वर्तमान समय में दिख भी रहा है। नेतागिरी और आधिकारिक धौंस अभी भी अंग्रेजी हकूमत के जैसी भारत में निरन्तर बनी हुई है। मनाने को तो हम हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता हैं, पर क्या वह सही मायने में गणतंत्र दिवस है?

शायद नहीं। क्योंकि आज भी भारत की एक बहुत बड़ी आबादी गरीबी और भूखमरी से जूझ रही है। आज भी आम जनमानस पूर्ण रूप से आजाद नहीं है। क्योंकि उस पर हुकामों और लाल फित्ता धारियों का दबाव है। सम्पति का समान वितरण आज भी कहां हो रहा है। संपति का तीन चौथाई हिस्सा आज भी उच्च और धनाढ्य लोगों के पास है। आम जनमानस को मिलता है तो मात्र एक तिहाही हिस्सा। आज भी भारत की जनता का एक बहुत बड़ा हिस्सा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

आज प्रश्न है तो वह यह है कि आखिर भारत में कब पूर्ण गणतंत्र मनाया जाएगा? जब हर आदमी को उसका पूरा अधिकार मात्र कागजों में ही नहीं बल्कि असल में मिलेगा।अन्ना हजारे ने एक प्रयास भी किया था। पर वह भी सिरे नहीं चढ़ पाया। जिन पूर्वजों ने अपना बलिदान देकर भारत को यह सपना देख कर आजाद करवाया था, कि भारत की जनता को पूर्ण गणतंत्रता प्राप्त हो। उनके दिलों पर आज क्या बीतती होगी, यदि वे किसी लोक या दुनियां से आज भारत का दृश्य देखते होंगे।

वे तो अंग्रेज थे, जो भारतीयों का काम कभी भी समय पर नहीं करते थे। फिर करते भी थे तो पूरी खुशामद करवा कर ही करवाते थे। पर आज तो काम करवाने वाला भी भारतीय है और काम करने वाला भी भारतीय ही है। आज हालत उससे भी बदतर है। बिना रिश्वत या चाटुकारिता के कोई काम करने को राजी नहीं है। शायद ऐसे भारत की कल्पना तो कभी हमारे पुरखों ने न की हो।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

Must Read : हिन्दू और हिंदुत्व – एक समीक्षा।

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज भी भारत की एक बहुत बड़ी आबादी गरीबी और भूखमरी से जूझ रही है। आज भी आम जनमानस पूर्ण रूप से आजाद नहीं है। क्योंकि उस पर हुकामों और लाल फित्ता धारियों का दबाव है। सम्पति का समान वितरण आज भी कहां हो रहा है। संपति का तीन चौथाई हिस्सा आज भी उच्च और धनाढ्य लोगों के पास है। आम जनमानस को मिलता है तो मात्र एक तिहाही हिस्सा। आज भी भारत की जनता का एक बहुत बड़ा हिस्सा मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। नेतागिरी और आधिकारिक धौंस अभी भी अंग्रेजी हकूमत के जैसी भारत में निरन्तर बनी हुई है। मनाने को तो हम हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता हैं, पर क्या वह सही मायने में गणतंत्र दिवस है?

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यह लेख (गणतंत्र दिवस और भारतीय संविधान।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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देश की मिट्टी।

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Desh ki Mitti – देश की मिट्टी।

मेरे देश मिट्टी में जन्में अनेक वीर जवान है।
कृष्ण, राम, तुलसी जैसे महापुरुषों की तपोभूमि है।

देश की मिट्टी में अनेक ऋषि, मुनियों ने जन्म लिया है।
सारी दुनियाँ में मेरा देश महान है।

सीता, सती, सावित्री ने इस धरा पर जन्म लिया।
देश की मिट्टी का तिलक लगाकर वीरों ने बलिदान दिया।

देश की मिट्टी की ख़ातिर सरहद पर बैठे सीना ताने है।
सीने पर गोली खाये दुश्मन के आगे सर न झुकाते है।

बैठे देश के रक्षक बनकर ऐसे वीरों को सलाम है।
देश की मिट्टी को महान वीर भगतसिंह।

सुभाष जैसे बलिदानियों ने अपने रक्त से सींचा है।
कल-कल करता नदियों का पानी इस मिट्टी की शान है।

वेद-पुराण, उपनिषद, गीता, रामायण,
और गुरुग्रथ साहिब मेरे देश का अभिमान है।

मेरे देश की मिट्टी पवित्र पावनी और महिमा अपरम्पार है।
देश की मिट्टी में मिला जन्म ये हमारा सौभाग्य है।

देश की मिट्टी गुण अनंत और अपार है।
देश की मिट्टी का हम करते वंदन बारम्बार है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मेरे देश मिट्टी में जन्में अनेक वीर जवान है। यह देवो की भूमि है, यह कृष्ण, राम, तुलसी जैसे महापुरुषों की तपोभूमि है। देश की मिट्टी में अनेक ऋषि, मुनियों ने जन्म लिया है, सारी दुनियाँ में मेरा देश महान है। माता सीता, सती, सावित्री ने इस धरा पर जन्म लिया। देश की मिट्टी का तिलक लगाकर सदैव वीरों ने बलिदान दिया है। वेद-पुराण, उपनिषद, गीता, रामायण, और गुरुग्रथ साहिब मेरे देश का अभिमान है। मेरे देश की मिट्टी पवित्र पावनी और इसकी महिमा अपरम्पार है, देश की मिट्टी में मिला जन्म ये हमारा सौभाग्य है। अपने देश की मिट्टी का हम तहे दिल से करते वंदन बारम्बार है।

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यह कविता (देश की मिट्टी।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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गाँव का जीवन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गाँव का जीवन। ♦

गाँव की गजब हरियाली के वाह! क्या कहने।
उसी हरियाली में दिल के भाव आज दे बहने।

कहीं पर गाय-भैंसों के छप्परे घास-फूस के।
कहीं पर ओस बन मोती चमके दूब के।

कहीं पर कपड़े की गुड़िया, मिट्टी के घर बनाते बच्चें।
जो दिल के जितने भोले उतने ही होते सच्चे।

कहीं पर चौपाल में, नुक्कड़ पर हुक्का गुड़गुड़ाए।
भाईचारे में बड़े-बूढ़े बातों ही बातों में खिलखिलाए।

पशु संग पक्षियों से भी अनोखा प्रेम नजर आता।
इनको अपने जैसा ही केवल उदार दिल भाता।

कभी कुत्ते की रोटी, तो पहली रोटी गाय को दी जाए।
चिड़िया, कबूतर को भी वो बाजरा बिखराए।

भोर होने पर हर राह चलते को राम-राम भूले न कहना।
सागर न बनने की चाह केवल शांत नदी जैसा बहना।

थोड़ी जरुरतें, न बड़ी दिल में कोई रखे चाह।
आवभगत इतनी कि मेहमान के मुख से निकले वाह।

हर आंगन में जो होती थोड़ी सी कच्ची जगह।
धनिया, पालक, मैथी बोने की मिल जाती वजह।

हर बेकार पड़ी चीज को, उपयोग करने का हुनर आए।
नई-पुरानी में अंतर न दिखे, इस कदर उसको सजाए।

सम्मान आज भी उन भोली आंखों में नजर आए।
आज भी नई नवेली दुल्हन घूंघट में शरमाए।

खेत-खलिहानों से लेकर दिलों में पनपती है हरियाली रिश्तों की।
आज भी संस्कृति, तहजीब को जिंदा रखे बात उन फरिश्तों की।

कुछ दौर जमाने का यहां आकर क्यूं न ठहर जाए।
जहां हर दौर जिंदगी का खिलखिलाता ही नज़र आए।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — गाँव का जीवन शांत और शुद्ध माना जाता है क्योंकि आज भी गाँवों में लोग प्रकृति के अधिक निकट होते है। हालांकि, इनके जीवन में चुनौतियां भी अधिक होती है। गाँव के लोग ह्रदय से सीधे सच्चे और पवित्र होते हैं। गाँव के लोग ईमानदार और अतिथि सत्कार करने वाले होते है। गाँव का जीवन बाह्य आडम्बर और छल-कपट से दूर होता हैं। सादा जीवन और उच्च विचार की झलक गाँवों में ही देखने को मिलती है वे कृत्रिम साधनों से ज्यादातर दूर ही रहते हैं। गाँव का जीवन शांतिदायक होता है । यहाँ के लोग शहरी लोगों की तरह निरंतर भाग-दौड़ में नहीं लगे रहते हैं । यहाँ के लोग सुबह जल्दी जगते हैं तथा रात में जल्दी सो जाते हैं । यहाँ की वायु महानगरों की वायु की तरह अत्यधिक प्रदूषित नहीं होती। गांव में ना सिर्फ खुली और स्वच्छ हवा है, अपितु मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों के कम होने के कारण भी प्रदूषण कम है। हमारे गांवों में बड़े-बड़े खेत खलिहान होने की वजह से वहां का वातावरण खुला व प्रदूषण मुक्त रहता है। आज भी घर में जब रोटी बनती है तो पहली रोटी गाय को और लास्ट रोटी पालतू कुत्ते को दी जाती है। आज भी गाँवो में आपस में मिलने पर राम-राम और राधे-राधे बोला जाता है।

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यह कविता (गाँव का जीवन।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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