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poet sukhmangal singh

काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रथम चरण का लोकार्पण।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रथम चरण का लोकार्पण। ♦

दिनांक 13 दिसंबर 2021

तीर्थ यात्रा की परंपरा में काशी का विशेष महत्व है। काशी का पृथ्वी से संबंध नहीं है यह उचित उच्चतर लोक मंगल कारक है। काशी त्रिपुरारी की राज्य नगरी है। काशी क्षेत्र हर युग में रहता है। इसकी वाह्य स्वरुप में बदलाव होता रहता है परंतु इसका अस्तित्व हमेशा बना रहता है। इसका स्वरुप सतयुग में त्रिशूल आकार का, त्रेता युग में चंद्राकार का, द्वापर युग में रथ के आकार और कलयुग में शंख आकार रहता है। काशी गंगा के तट पर अवस्थित है। गंगा काशी विश्वनाथ धाम में उत्तर वाहिनी बहती चली आ रही है। गंगा प्राण वायु प्रदायनी हैं। भू-लोक पर जीव को जीवन दान देती हैं। गंगा प्राणियों का आश्रय दाता है। गंगा को धरती पर अपरा भी कहा जाता है। गंगा स्नान से स्वर्ग से धरा पर अवतरित माँ देवी गंगा मनुष्य जीव को पुण्य प्रदान करती हैं।

काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण दिनांक 13 दिसंबर को मान्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से होने वाला है। इस आयोजन को भव्य काशी और दिव्य काशी के आयोजन स्वरूप किया गया है। इस अवसर पर विद्यालय में रंगोली, पेंटिंग, और प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा।

इस मौके पर 1 दिसंबर से 10 दिसंबर तक जिले में अनेक क्षेत्रों में विविध रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा है।

काशी विश्वनाथ धाम की परियोजनाएं

  • काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र का विस्तारीकरण। 
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय में चिकित्सकों और नर्सों के लिए हॉस्टल तथा धर्मशाला।
  • रमना, वाराणसी में 50 एम एल डी छमता का एस टी पी।
  • शहर में विभिन्न स्थानों पर सी सी टी वी कैमरा स्टालेशन और बनिया बार-बार का जीर्णोद्धार व वाहन पार्किंग।
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय हॉस्पिटल में आई यू सी टी ई भव्य।
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ही जोधपुर कालोनी व 80 फ्लैट। खिडकिया घाट का जीर्णोद्धार।
  • इसी के साथ कई वार्ड उनका विकास कार्य भी शामिल है।

स्मार्ट सिटी में वार्डों का विकास

  • गढ़वाली टोला वार्ड का विकास।
  • काल भैरव वार्ड का विकास।
  • कामेश्वर महादेव वार्ड का विकास।
  • राज मंदिर वार्ड का विकास।
  • जगबाडी वार्ड का विकास।
  • दशाश्वमेध वार्ड का विकास।

काशी विश्वनाथ धाम के आसपास के वार्डों का सौंदर्यीकरण का काम किया गया।

लोकार्पण के पहले शहर रंग रोगन

काशी विश्वनाथ धाम के प्रथम चरण के लोकार्पण के पहले गोदौलिआ से मैदागिन तक बनी हुई सड़क किनारे के भवनों को एक रंग में रंगने का काम किया।

संस्कृति विभाग की तरफ से आयोजित कार्यक्रम

  • बड़ा गणेश, सुनारपूरा लोटिया, 1 दिसंबर।
  • विष्णु मंदिर ललिता घाट और बृहस्पति मंदिर दशाश्वमेध घाट, 2 दिसंबर।
  • शीतला मंदिर शीतला घाट, और शैलपुत्री देवी, सरैया, 3 दिसंबर।
  • राम मंदिर खोजवा और राम मंदिर चौक से 4 दिसंबर।
  • बटुक भैरव कमच्छा और काल भैरव 5 दिसंबर।
  • मृत्युंजय महादेव मंदिर धारा नगर वह केदारनाथ मंदिर केदार घाट 6 दिसंबर।
  • बनकटी हनुमान मंदिर आनंद पार्क कौड़िया माई मंदिर कबीर नगर, 7 दिसंबर।
  • गोपाल मंदिर चौक खंभा और संकटा मंदिर चौक, 8 दिसंबर।
  • कामेश्वर महादेव मंदिर, कंदवा, और गैबी ए एकदिवसीय श्वरमंदिर छोटी गैवी, 9 दिसंबर।
  • अन्नपूर्णा मंदिर विश्वनाथ धाम और आदि केश्वरमंदिर राजघाट, 10 दिसंबर।
  • 11 दिसंबर को दुर्गा कुंड स्थित दुर्गा मंदिर में और संकट मोचन में भव्य भजन कीर्तन का कार्यक्रम समय 5:00 बजे से 7:00 बजे सायंकाल (शाम) में तय किया गया है।

लोकार्पण समारोह में — अनेक विचारधाराओं का समावेश।

13 दिसंबर 2021 ई. श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण समारोह में देश की संपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा और अनेक विचारधाराओं का समावेश होगा। काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण समारोह इतिहास का पहला ओ अवसर कहा जाएगा। जिसमें सनातन परंपरा के सभी धारा के संतों की मौजूदगी होगी। काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के अवसर पर राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का संदेश पूरे विश्व को दिया जाएगा। यह भी एक कुंभ का आयोजन है यद्यपि हरिद्वार, प्रयाग, नाशिक में लगने वाले कुंभ में भी सनातन धर्म की सभी धारा के साधु संत और आम जनता इकट्ठा होती है। काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण में सनातन धर्म के सभी संप्रदाय और परंपरा के अनुयाई उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में दक्षिण की परंपरा के वीर शैव और लिंगायत भी अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे।

शिक्षा विभाग की तरफ से कार्यक्रम

दिसंबर मास में 1 दिसंबर से वाराणसी नगर के विद्यालय भी विविध कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। इन कार्यक्रमों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, पेंटिंग का कार्यक्रम, प्रतियोगिता, नुक्कड नाटक, रंगोली प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, चित्रकला, अंताक्षरी, चौपाई का श्लोक आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी।

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत शहर – नगर के विद्यालयों में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बाबा की धाम दिव्यांगों – बुजुर्गों के आने की व्यवस्था, श्री काशी विश्वनाथ धाम लोकार्पण के दौरान बुजुर्ग श्रद्धालुओं और विज्ञान कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के लिए विशेष प्रबंध किया गया। प्रवेश द्वार से लेकर निकास द्वार तक विशेष रैंप स्कलेटर बनाए गए। सुविधाओं को गंगा घाट, छत्ता द्वार, ढुंढ राज गणेश और नील कंठ द्वार से आने वाले सभी दिव्य गौर बुजुर्ग श्रद्धालुओं को बिना किसी प्रकार की परेशानी के बाबा विश्वनाथ जी का दर्शन करेंगे। जला सेन घाट से भी बाबा विश्वनाथ धाम में प्रवेश करने के लिए बुजुर्ग श्रद्धालु और दिव्यांग जनों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

व्हील चेयर व ई-रिक्शा की निशुल्क व्यवस्था

बाबा विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से निशुल्क ई-रिक्शा और व्हील चेयर का इंतजाम किया गया है। बाबा धाम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के अनुसार बाबा के दर्शन के लिए आने वाले दिव्यांग – बुजुर्ग श्रद्धालुओं को मंदिर में सभी सुविधाएं प्रदान की जाएगी।

श्री काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण रवि योग और महासिद्धि योग के संजोग में, गणेश अथर्व शीर्ष और श्लोक के पाठ के बीच काशी विश्वनाथ धाम में उपस्थित होकर भारती प्रधानमंत्री मोदी जी लोकार्पण करेंगे। इस लोकार्पण के बाद गंगा की धारा से 5, 27, 730 वर्ग फीट तक का क्षेत्रफल श्रद्धालु के लिए आम हो जाएगा।

श्री काशी विगत परिषद के निर्देशानुसार संपूर्ण अनुष्ठान श्री राम जन्म भूमि पूजन की तरह ही जिम्मेदारी के साथ की जाएगी। इस अनुष्ठान को काशी के विद्वान कर्मकांडी ब्राह्मण ही संपन्न कराएंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा जो समस्त सनातन धर्मावलंबियों, साधु – संतों तथा आम जनता के लिए सुलभ होगा। भारत की सांस्कृतिक राजधानी काशी बनारस में बाबा विश्वनाथ जी देवताओं के आगमन की प्रसन्न मुद्रा में होते हैं और लोग कल्याण के लिए दुनियां के भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। काशी विश्वनाथ धाम अपने आज कालीन इतिहास का गवाह बना।

सारे अतिक्रमण साफ हो जाने के बाद श्री बाबा विश्वनाथ धाम की मणिमालाएं लोग कल्याण के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले दर्शनार्थियों को सहज रुप से काशी विश्वनाथ धाम में काशी पुराधीपती के साथ शिव कचहरी, काशी खंडोक्त मंदिर के साथ 178 विग्रह के दर्शन का भी लाभ मिलेगा।

शिव भक्तों की सड़क किनारे नहीं लगेगी कतार –
काशी विश्वनाथ धाम ऐसा होगा प्रकार,
सड़क किनारे नहीं लगेगी अब कतार।
पौराणिक मान्यता युक्त पूर्ण रूप धाम,
शिवरात्रि और सावन भक्तों को महान॥

लाखों भक्त के एक साथ दर्शन विधान,
काशी में शिव लगाये जाम पर लगाम।
सुविधाओं का विशेष रखा गया ध्यान,
बाबा चौक का लोग करेंगे गुणगान।
शिव शोभा निरख निरख किया गान।
बाबा गणों संग करेंगे जगत कल्याण॥

चलो काशी चलें अभियान

बनारस की छवि बढ़ाएगा बाबा विश्वनाथ धाम, महीनों का होगा पूरे शहर में आयोजन। 13 दिसंबर को पहले चरण का होगा लोकार्पण, आगे की सभी कार्यक्रम में वर्चुअल शामिल होंगे पी एम। काशी पुराधिपति के दरबार का भव्य होगा लोकार्पण।

आओ चलें काशी विश्वनाथ धाम,
करें शिव शंकर जी का ध्यान।
सूने घर में जलने वाले दीपक की लौ सा ना जलो,
चलो काशी विश्वनाथ मंदिर धाम लोकार्पण करें।
जलो तो ऐसे जलो की दुनियां को खुशहाल करो,
सत्संग से मिले सुख के रम्य में रमण हों प्रकाशित करें॥

देव दीपावली की तर्ज पर दुनिया देखेगी लाइव लोकार्पण। काशी के सिवालय सजेंगे, विश्वनाथ दरबार में उस समय प्रधानमंत्री रहेंगे। सभी सरकारी भवनों को सजाया जाएगा, तैंतीस कोटि देवी देवताओं को मनाया जाएगा। देव लोक जैसे पुष्प वर्षाया जाएगा, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों को लाया जाएगा। काशी में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, काशी के पुनरोद्धार की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएगी।

सांस्कृतिक आयोजन 13 दिसंबर से 12 जनवरी तक चलेगा। सोलह दिसंबर को उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों को काशी में बुलाया जाएगा, प्रस्तावित कार्यक्रम पर मंत्रिमंडल विचार विमर्श करेगी। विश्वनाथ धाम के लोकार्पण को भव्य स्वरुप दिया जाएगा। काशी का भव्य, दिव्य, तेज, स्वरूप इतिहास बताने के लिए 100-100 पुरुष सौ – सौ महिलाओं को वालंटियर बनाया जाएगा। वालंटियर टीम को प्रशिक्षित किया जाएगा। काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण देश की प्रमुख संग क्योंकि उपस्थित में किया जाएगा। काशी विश्वनाथ कारीडोर में 19 भवन बनकर तैयार के संचालन की रुपरेखा तैयार की जाएगी। इस भवन में 14 जनवरी से सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित अन्य कार्यक्रमों की श्रृंखला का आयोजन किया जाएगा।

मनुष्य भोग विलास और कामनाओं में अपने जीवन की आहुति दे देता है। इस जन्म में जिन भोग को भोग रहे हैं पिछले जन्म में ही उसे भोगा था अगले जन्म में भी उन्हें ही भोगेंगे। क्या हमारा जन्म इसलिए हुआ है। हमें उन जो पुरुष पर्वत की गुफाओं में बैठकर परम ज्योति का ध्यान करते हैं उनके आनंदाश्रुओं को पखेरू उनकी गोद में बैठ कर निर्भयता के साथ पीते हैं। हमें भगवान शंकर जो 14 भुवनों के स्वामी ब्रहमांड को अपने उदर में धारण करने वाले विष्णु, उनके सरण में जाने की आवश्यकता है।

एक रचना प्रस्तुत

भौतिकता का सुख तो क्षणभंगुर है,
संसार में सुंदरता की कमी नहीं है।
गर तुझे भवसागर से पार उतरना है,
वेद – स्मृति और पुराण ही पढ़ना है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में लगे पत्थर

सात प्रकार की पत्थरों से पूरे मंदिर परिसर को संवारा सजाया गया है। जिसमें बालेश्वर स्टोन, मकराना मार्बल, कोटा ग्रे नाईट और मेडोना स्टोन का इस्तेमाल प्रमुख रुप से अधिक किया गया है।

कार्यक्रम के लिए योगी आदित्यनाथ के निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने तीन दिवस के कार्यक्रम पर मोहर लगा दिया। इस मौके पर 12, 13 व 14 दिसंबर 2021 को पूरा काशी शहर रंगीन रोशनी से नहाएगा। रोशनी की सजावट गली से लेकर घाटो तक दिखेगी। इस कार्यक्रम को भव्य और दिव्य काशी का आयोजन बनाने के लिए अधिकारियों ने डिजिटल मैप तैयार कर लिया।

श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर लोकार्पण के दौरान तक काशी में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होता रहेगा। इसलिए चित्त! अब तू मोह को छोड़ और शीश पर अर्ध चंद्र धारण करने वाले भगवान शिव का ध्यान कर और चलकर गंगा के तट पर वृक्षों की छाया में विश्राम कर। जो मनुष्य ईश्वर के ध्यान में हैं, जिसे खाने-पीने, सोने पहनने-ओढ़ने की कोई चिंता नहीं होती है। जिनके मन में परम शांति का निवास होता है ऐसे व्यक्ति के लिए त्रिलोकी का राज भी तुच्छ लगता है।

एक रचना प्रस्तुत

जो मनुष्य सदाशिव की भक्ति में लीन रहते हैं,
जन्म – मरण का भय उनके हृदय ना बसते हैं।
मनोरथ पूर्ण करने वाली लक्ष्मी मिलती हैं,
परमपिता परमात्मा की अनुकंपा होती है।

काशी विश्वनाथ मंदिर सहित क्षेत्र के सत्तरह मंदिर जिसमें शामिल हैं उनमें से, जिसके प्रथम चरण का लोकार्पण 13 दिसंबर 2021 को शुभ मुहूर्तं में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के करकमलों द्वारा रवि योग में संपन्न होगा।

दूसरे चरण में धाम के शेष आठ मंदिरों के संरक्षण का काम किया जाना है। इस लोकार्पण समारोह के अनुष्ठान के मुख्य यजमान होंगे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी। इससे पहले प्रधानमंत्री गंगाजल माँ गंगा जी से लाकर बाबा विश्वनाथ जी का अभिषेक करेंगे।

काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण को विश्वव्यापी बनाने की तैयारी चल रही है। इस समारोह में शैव संप्रदाय के पीठाधीश्वरों को भी आमंत्रित किया जाना है। जिसमें कर्नाटक के लिंगायत, वीरशैव और तमिलनाडु के अधिनाम सहित उत्तर के सभी क्षेत्रों के संतों को शामिल करने की तैयारी की गई।

संत समाज को बाबा धाम में आने का निमंत्रण

महत्वपूर्ण, प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना काशी विश्वनाथ धाम को साकार करने के लिए होने वाले लोकार्पण के अवसर पर देश के अनेक क्षेत्रों से संत समाज को बाबा धाम में आने के लिए प्रधानमंत्री जी ने बाबा विश्वनाथ की तरफ से आमंत्रित किया।

इस लोकार्पण के अवसर पर संतो की उपस्थिति के लिए 25,000 संतो को काशी विश्वनाथ की पाती दी जानी है, जो संतो की थाती होगी। इस पाती के माध्यम से 13 दिसंबर 21 ई. को होने वाले लोकार्पण की जानकारी संतो के माध्यम से भव्य बाबा धाम का प्रचार, अपने अनुयायियों के बीच काशी आने का निमंत्रण, अनुयायियों के लिए भी दिया जा रहा है।

बाबा आदि विश्वेश्वर की स्थापना

काशी बनारस की गलियों में विराजमान आज विशेश्वर के 50 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा में भव्य दरबार स्थापित किया जाना है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की पहल पर परिकल्पना की गई है।

संतो को भी जाने वाली पाती में लगभग 300 से ज्यादा भवनाें के अधिग्रहण और उसके लिए किए गए संघर्ष के साथ ही महादेव के दरबार का निर्माण पूरा करने तक की कहानी लिखी गई है। प्रधानमंत्री ने संत समाज को 13 दिसंबर से लेकर 12 जनवरी तक चलने वाले आयोजन की भी पूरी जानकारी होगी। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि यह पाती सभी मठ मंदिर और संन्यासी तक पहुंचने का प्रयास किया गया है।

बाबा विश्वनाथ मंदिर का प्राचीन वैभव लौटा

काशी के बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर की दीवारों पर सन 2008 में तत्कालीन एक वरिष्ठ अधिकारी की मनमानी की वजह से एनामेल पेंट से पेंट कर दिया गया था। जिसका उस समय संत व आम जनता द्वारा विरोध किया गया था। 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बाबा के मंदिर की दीवारों को संरक्षित करने की कवायद शुरू हो चुकी है। लोगों को उम्मीद है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रथम चरण के लोकार्पण के पूर्व ही पेंट को हटाकर दीवार को संरक्षित और सुशोभित कर दिया जाएगा।

इनामेल पेंट की पुताई की वजह से मंदिर के गर्भ गृह में लगे पत्थरों का क्षरण हो रहा था। दीवार में लगे चुनार के पत्थर खराब हो रहे थे। वाराणसी के मंडलायुक्त के अनुसार बाबा विश्वनाथ के मंदिर के जीर्णोद्धार और संरक्षण का काम किया जा रहा है। वाराणसी घर की सफाई का काम भी हो रहा है इस काम के लिए टाटा को लगाया गया है। उम्मीद है काशी विश्वनाथ मंदिर का प्राचीन वैभव लौटेगा। मंदिर के काम के लिए तत्परता, तनमयता त्याग, युद्ध स्तर पर काम करने की कोशिश की गई है।

बाबा विश्वनाथ मंदिर की दीवारों से एनामेल पेंट हटाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण अनुसंधान साला, तथा आई आई टी रुड़की की मदद ली गई, अनेक व्यवधानाें के उपरांत सन 2019 में iit रुड़की द्वारा मंदिर की दीवारों के संरक्षण के लिए काम शुरु किया लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से काम पूरा नहीं हो सका था। परंतु मंडलायुक्त वाराणसी के कथन अनुसार टाटा द्वारा कार्य पूरा किया जा सकेगा।

लोगों के दिलों में यह प्रश्न उठ रहे हैं कि आखिरकार माननीय प्रधानमंत्री जी मार्ग शीर्ष मास में और वह भी दिसंबर को काशी विश्वनाथ मंदिर धाम के प्रथम चरण का लोकार्पण का दिन क्यों चुना है। यह शुभ कार्य किसी और दिन भी किया जा सकता था। तो आपको बताना चाहेंगे जी कि मार्ग शीर्ष मास को अगहन मास के रूप में जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सभी हिंदू महीनों का अपना विशेष महत्व है, परंतु उनमें से मार्गशीर्ष मास धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। गीता में भगवान ने कहा है कि— मासानाम मार्ग शीर्यो यम॥

मार्गशीर्ष मास की प्रमुख विशेषताएं

  • सतयुग में देवो अगहन मास (मार्गशीर्ष मास) की प्रथम तिथि के दिन नया साल आरंभ किया।
  • कश्यप ऋषि द्वारा इसी दिन मन भावन, मनु हारी, सुंदर, सुखजीत, कश्मीर की रचना की थी।
  • मान्यता है जो के अनुसार सीमा स्नेह भगवान श्री राम और सीता जी का स्वयंवर रचा गया था।
  • मार्गशीर्ष मास में भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन हुआ था ऐसी मान्यता है।
  • अगहन मास में पूर्णिमा को दत्तात्रेय की जन्म जयंती मनाई जाती है।
  • इसी मास में पूर्णिमा को चंद्रमा की पूजा की जाती है जिसका विशेष फल मिलता है।
  • मार्ग शीर्ष मास में विष्णु सहस्त्रनाम, भागवत गीता और गजेंद्र मोक्ष का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है।
  • मार्गशीर्ष मास में ‘ओम दामोदराय नमः’ से गुरु और इस देव को प्रणाम करने से जीवन के अवरोध कष्ट दूर होते हैं।
  • मार्ग शीर्ष मास में भागवत ग्रंथ को देखने की विशेष महिमा है।अपने घर में भागवत को प्रणाम करना चाहिए।
  • मार्ग शीर्ष मास श्री कृष्ण का रूप माना गया है। भगवान श्री कृष्ण की पूजा कई रूपों में इस मास का पूजन करना फलदाई होता है।
  • मार्ग शीर्ष मास में शंख में तीर्थ स्थानों का जल भरकर पूजा स्थल पर मंत्र पढ़ते हुए देवताओं के ऊपर घुमाकर जल को दीवाल पर छिड़कने से घर की शुद्धि होती है, मन को शांति मिलती है और घर के लोगों को लाभ होता है। कष्ट निवारक है, कष्टाें से छुटकारा मिलता है।

रवि योग की महत्ता

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रवि योग शुद्ध शुभ कामना प्रदान करने वाला होता है। रवि योग योगिनी सूर्य की अभीष्ट सिद्धि, कृपा होने के कारण, समस्त कार्य पूर्ति करने वाला होता है। अनिष्ट को दूर करने वाला, निर्विघ्नं कार्य करने वाला, समस्त संकटों से सीधे तौर पर बचाने वाला, शुभ फल प्रदान करने वाला रवि योग है।

अगहन मास – मार्गशीर्ष मास क्यों कहलाता है?

इस मास में भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना अनेक रूपों में अनेक नाम से उसकी की जाती है इन्हीं रूपों में से एक रुप मार्ग शीर्ष श्री कृष्ण का ही रूप है।

प्राचीन मंदिर काशी विश्वनाथ धाम का शुभ लोकार्पण

13 दिसंबर को अद्वितीय अद्भुत भाग्यश्री काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण समारोह में शामिल होकर भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी अगहन मास की दशमी तिथि को रवि योग में दिवस सोमवार को महा शिव जी योग समूह दोषों को नष्ट करने वाले समय में विद्युत समाज और संतो के बीच, सारे दोष से निवारक योग में, सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले योग में, शिव का प्रिय काशी नगरी में, गंगा की धारा के किनारे स्थित, प्राचीन मंदिर काशी विश्वनाथ धाम का, शुभ लोकार्पण, समारोह में, प्रधानमंत्री जी करेंगे। जो देश हित में है। संसार का कल्याण करने वाला समय है।

शिव नगरी काशी में सिय – पिय मिलन उत्सव

प्राचीन नगरी काशी, अविनाशी नगरी काशी, मोक्ष प्राप्त करने वाली नगरी में श्री राम के आराध्य शिव की नगरी में, प्राचीन विद्यालय तत्कालीन संपूर्णानंद विश्वविद्यालय में, बाबा विश्वनाथ की ओर से आयोजित महोत्सव की शुरुवात 1 दिसंबर से 9 दिसंबर तक शंभू आनंद संस्कृत विश्वविद्यालय प्रांगण में सीताराम विवाह महोत्सव का आयोजन आयोजित किया गया है।

सूचनानुसार कार्यक्रम की रूपरेखा

  • श्री गौरी शंकर भगवान विवाह लीला, 1 दिसंबर 2021 की।
  • जय विजय लीला, 2 दिसंबर।
  • राम जन्म और बाल लीला, 3 दिसंबर।
  • सीता जी का जन्म, विश्वामित्र से अहिल्या उद्धार की लीला, 4 दिसंबर।
  • जनकपुर प्रवेश एवं नगर दर्शन की लीला, 5 दिसंबर।
  • सिय – पिय मिलन फुलवारी और धनुष यज्ञ, 6 दिसंबर।
  • हल्दी मटकोर व राम बारात शोभायात्रा, 7 दिसंबर।
  • सीताराम विवाह, 8 दिसंबर।
  • राम कलेवा का आयोजन।
  • भागवत कथा का अमृत पान।

अवि मुक्त काशी

भगवान शिव ही प्राणियों के सृष्टि कर्ता संचालक तथा संघार करता है। क्योंकि जिसकी दृष्टि मात्र से ही प्रकृति शैवीयाे गई तथा सृष्टि के समय तक व्यक्त सभा वाली यह प्रकृति गुणों से युक्त हो गई। विश्व उद्धार करने वाली यह शक्ति अतिथि अजा नाम से विख्यात है। शिव कल्याण रूप, आनंद मय अनंत अनादि और ज्ञान के ध्येय हैं । वह पार्वती जी से खुद कहते हैं कि … हम तुम दोनों का अभिन्न तेज जो है वही अवि मुक्त काशी है। ज्योतिर्लिंग तू हो और लिंगवान महेश्वर मै हूं। इसी को जागृत रूप काशी कहा गया है। अवि का अर्थ पाप है। और जो पाप मुक्त क्षेत्र है वह अविमुक्त नाम से प्रसिद्ध है। वही काशी है।

स्कन्द पुराण के अनुसार

काशी का पृथ्वी से संबंध नहीं है, यह स्वाइन उचित उच्चतर लोक है। यह क्षेत्र मोक्ष दायनी है। काशी त्रिपुरारि की कृपा की राज नगरी है। मोक्ष कामी सन्यासी भी अविमुक्त क्षेत्र का सेवन करते हैं। इस क्षेत्र में रहने वाला पापी भी नरक में नहीं जाता है। लेकिन जानबूझकर पाप करने वाले को शिव शंकर माफ नहीं करते हैं।

विश्वनाथ मंदिर में दर्शनार्थियों के लिए एक श्लोक

माता तु पार्वती देवी पिता देव महेश्वर:।
बांधवा: शिव भक्ताष्च स्वदेशो भुवन त्रयम॥

कहने का तात्पर्य है कि काशी होने की कश्ती कसौटी है। यदि काशी में हो तो अपने को सीमित दायरे से बाहर निकालो। केवल अपनी माता को ही माता ना मानो अपितु सारी स्त्रियों को माता मानो, धूप पार्वती स्वरुप करुणा की देवी हैं। सारे पुरुषों को पिता मानो, जो अपने आचरण से तुम्हें अनुशासित करते हैं, वह सब महेश्वर हैं। जो लोक को धारण करने वाले हैं। लोक मंगल में लगे हुए हैं। ये ही हमारे भाई बंधु हैं।

यदि ऐसा हुआ तो तुम्हारा व्यक्तित्व पृथ्वी और पाताल लोक पर ही नहीं परलोक तक चमकने वाला, छा जाने वाला होगा। तभी तो तुम असली काशी वासी बनोगे। मान्यता और पुराणों के अनुसार शिव जी ने कई युगों में अपने इस विस्तृत काशी के स्वरुप की प्रदक्षिणा की है। इसलिए कल्याण के निमित्त काशी की पवित्र भूमि की प्रदक्षिणा करने वाली है। भव्य दिव्य नगर काशी को बारंबार प्रणाम। भगवान श्री राम के इष्ट शिव शंकर को मेरा सादर प्रणाम। भगवान शंकर की प्रिय श्री राम, लखन भरत शत्रुघ्न सहित माता सीता जी को सादर प्रणाम करता हूं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — विश्व उद्धार करने वाली यह शक्ति अतिथि अजा नाम से विख्यात है। शिव कल्याण रूप, आनंद मय अनंत अनादि और ज्ञान के ध्येय हैं । वह पार्वती जी से खुद कहते हैं कि … हम तुम दोनों का अभिन्न तेज जो है वही अवि मुक्त काशी है। ज्योतिर्लिंग तू हो और लिंगवान महेश्वर मै हूं। इसी को जागृत रूप काशी कहा गया है। अवि का अर्थ पाप है। और जो पाप मुक्त क्षेत्र है वह अविमुक्त नाम से प्रसिद्ध है। वही काशी है।

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यह लेख (काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रथम चरण का लोकार्पण।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर। ♦

खार ही खार जिसके हो मन में भरा,
पलटकर पूर्वांचल एक्सप्रेस वे देखे जरा।
राह में अकबरपुर प्रतीक्षा में है खड़ा,
बोलता है वह मीठी बोली मैं ही सदा॥

नफरतों को जो मन में छुपाए हुए हो,
दिल्ली से बलिया सुंदर सजाए बड़ा।
मुस्करा रहा आजमगढ़, मऊ देखकर,
गांव के लिंक अंबेडकर नगर देखकर॥

खैर पूछेगा पर जब सामने आएगा,
बाराबंकी, सुल्तानपुर, गाजीपुर से जाएगा।
आवाजाही की सुविधा सुंदर सुलभ,
जाम से अकबरपुर निजात पाएगा॥

एक दिन काम आएगी करामात यह,
फोरलेन सड़क सब जब हो जाएगी।
छोड़कर आदतों को सब अपनी बुरी,
रास्ते पर चलने जनता आ जाएगी॥

मेरे दिल ने कभी तो यह भी है चाहा,
परंपराओं को अपने सिर पर बिठाया।
शब्दों को मैंने भाव ओढ़े गहना बनाया,
लहराती सरयू तट पर लहरें नेक नियत लाया॥

कवि वाल्मीकि श्रवण क्षेत्र रामायण रच डाला,
श्रृंगी ऋषि का सेवा गंज क्षेत्र मन को भाने वाला।
फलाहारी बाबा का बसखारी में एक आश्रम आला,
रामबाग के संत अवध दास का आश्रम बड़ा निराला॥

मेरा योगी बांध रहा है गांव – गांव में टीले – पीले,
खारेपन को रोक रहा है और परोसता मीठी झीलें।
साकेत को सजाने की कसमें उसने संकल्पित कर ली,
मान रखोगे क्या उन सारे संकल्पों वचनों की॥

गोपाल बाग राजेसुल्तानपुर का पहले ही नाम पड़ा,
मलेक्ष काल में इसका नाम बदलकर सुल्तानपुर जड़ा।
इसके उत्तर में श्री श्री लल्लन ब्रह्मचारी जी का धाम है,
आश्रम घिनहापुर का देश में अपना एक स्थान है॥

जलालपुर के संत पलटू साहब का एक इतिहास है,
डगमगाती नाव कि यह आश्रम बड़ी दृढ़ पतवार है।
घन निशा में नसीरपुर की भुजिया माता दृष्टि देती,
भयंकर भंवर से निकाल कर जिंदगी सवार देती॥

सरयू, मड़हा, विसुई नदी अंबेडकर नगर में बहती है,
थिरुई, मझुई, तमसा नदी भी सबकी दु:ख हरती है।
स्थापत्य कला में अंबेडकर नगर जिला महान है,
हंसवर, मकरही – देवरिया स्टेट का दर्जा ज्ञानवान है॥

लोरपुर – रियासत और चाहोड़ा घाट मंदिर विद्यमान है,
प्राचीन इतिहास में इसका सुंदर और खूबसूरत नाम है।
29 सितम्बर 1995 में अंबेडकर नगर जिला नाम मिला,
तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती का ह्रदय खिला,
1 जनवरी सन 1996 में आलापुर तहसील नाम दिया,
राज्यपाल मोतीलाल वोरा ने आकर शिलान्यास किया॥

भीटी, मसढ़ा, शुकुल बाजार, हंसवर के झील है,
चार झीलों से आक्षादित यह पसंद चारो धाम है।
डरबन, देव हट, गढवा और हंसवर जिसका नाम है,
चारों झीलों का पुनर निर्माण करना सरकार के काम है॥

डम डम डमरु बजा शिव बाबा सीमा सीहमई में,
शिव महिमा, शिव मंदिर, बारंबार पारा में गाते हैं।
संत गोविंद साहब जी का विश्व प्रसिद्ध मेला लगता,
अहिरौली गोविंद साहब मैं वर्ष में यह आता रहता॥

योगी सरकार ने अंबेडकर नगर पर ध्यान दिया,
राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन प्लांट मिला।
सी एच सी जलालपुर में ऑक्सीजन प्लांट लगेगा,
जनपद ऑक्सीजन संकट से हमेशा दूर रहेगा॥

योगी जनपद में ट्रामा सेंटर का निर्माण करेंगे,
पी जी आई लखनऊ जाने से मरीज बचेंगे।
मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले, जिले में सजने लगे,
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज होने लगे॥

आयुष्मान कार्ड अंबेडकर नगर जिले में मिलने लगे,
मुफ्त इलाज की सुविधा पांच लाख की मिलने लगा।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना चलने लगा,
साढ़े छ: लाख कार्ड धारकों को मुफ्त अनाज मिलने लगा॥

वृद्धजन को वृद्धा पेंशन का पूरा लाभ दिया,
किसान को किसान पेंशन का खाता में भुगतान किया।
मेधावी छात्र – छात्राओं को वाजिफे का लाभ दिया,
ग्रामीण ढेरों में भी गरीबों को पक्का छत मिला॥

इतिहासकार जिले के गुण का करते सदा से गुणगान,
यहां के साहित्यकार रहे हैं बड़े – बड़े गुणवान।
जिले के पत्रकारों ने पत्रिका से छेत्र को प्रकाशित किया,
देश दुनिया के लिए रचयिता वाल्मीकि रामायण रचे॥

यहां के योगाचार्य करते रहते हैं योग का प्रचार,
भारत की संस्कृति को देश विदेश में बताते हैं धर्माचार्य!
प्रवक्ताओं कि इस क्षेत्र में लगी हुई है कतार,
अपने प्रवचन से ही लोगों में भरते हैं संस्कार॥

इस क्षेत्र के लेखकों ने अपनी लेखनी से रचा इतिहास,
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री विचारों का देते रहते विचार!
सत्य मार्ग पर चलने का भाव भरते हैं लोगों में संस्कार,
अयोध्या नगरी का लेखक करता सदा – सदा सत्कार॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — क्षेत्र अंबेडकर नगर के साथ – साथ उसके आस पास के सभी जिलों का व वहां के वर्तमान और इतिहास पर नजर डाला है। बहुत ही सरल शब्दो का प्रयोग करते हुए, विधि पूर्वक सभी मुख्य महान संतो से लेकर अच्छे कार्यों का वर्णन किया है। लगभग पूर्वांचल पर नजर डाला है। वर्तमान सरकार के द्वारा किये जा रहे अच्छे कार्यों का वर्णन भी बखूबी किया है।

—————

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यह कविता (श्रवण क्षेत्र अंबेडकर नगर।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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देव दीपावली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ देव दीपावली। ♦

देव दीपावली महापर्व।

गंगा तट की लहरें डोलीं,
रोचक कथा कण – कण बोले।
देवता दीप प्रज्वलित करते,
देव दीपावली मनाते हैं।

योग साधना के द्वार खोलकर,
जंगल झाड़ पहाड़ खिलेंगे।
जितने सुखद विचार उठेंगे,
अनंत काल तक दीप जलेंगे।

तारकासुर राक्षस का वध किया,
कार्तिकेय देव के सेनापति।
बाप का बदला लेने के निमित्त,
घोर तपस्या की त्रिपुरा-सुर।

अमरता का वरदान दिया ब्रह्मा ने,
तीनों लोक में आतंक मचाया।
घोर विनाशक त्रिपुरासुर राक्षस,
देवताओं पर भी कहर बरपाया।

सभी देवता मिलकर शिवजी से,
अनुनय विनय निवारण खोजा।
देवताओं के आग्रह पर शिव जी ने,
त्रिपुरा सुर का वध का डाला।

राक्षस के वध की खुशी में ही,
देवों ने देव दीपावली सजाया।
देवता दीप प्रज्वलित करते हैं,
हम देव दीपावली मनाते हैं।

गुरु नानक की जन्म जयंती तिथि,
धर्म अनुयाई सिक्ख जगाते हैं।
इसीलिए वह भी देव दीपावली,
पुनीत त्यौहार खूब मनाते हैं।

चातुर्मास बिता कर विष्णु जी,
देव दीपावली पूर्व जग जाते हैं।
उन्हीं के प्रेम में पलते सनातनी,
देव दीपावली पर्व बनाते हैं।

काशी की संस्कृत परंपरा में ही,
गंगा जी का घाट सजाया जाता।
असंख्य दीपों की श्रृंखला के संग,
देव दीपावली मनाई जाती है।

कार्तिक अमावस्या को दीपावली,
पूर्णिमा को देव दीपावली आती है।
दीपावली के 15 दिन बाद पूर्णिमा
पर्व, देव दीपावली मनाई जाती है।

आप सभी को प्रेम पूर्वक तहे दिल से देव दीपावली महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — बुरी शक्तियों पर दैवी शक्तियों को जीत जब मिलता है, उस जीत की खुशी में सभी देवतागण द्वारा जो दीपक जलाकर अपनी खुशी जाहिर की जाती है वही देव दीपावली का महापर्व कहलाया। आओ हमसब मिलकर इस देव दीपावली महापर्व को सच्चे मन से मनाए। इस दिन ध्यान साधना करे, सच्चे मन से। अपने मन को शांत रखने के लिए इस देव दीपावली पर देशी घी से यज्ञ करे पूर्ण शांत मन से। देव दीपावली पर पुरे दिन अच्छे व सच्चे मन से ध्यान – साधना में रत रहे। पूर्ण शांत मन से ध्यान करने से, आपके आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जागृत होने लगती। आत्मा की सुषुप्त शक्तियां जिस भी मनुष्य की जागृत हो जाती है, उसके लिए हर कार्य आसान हो जाता हैं।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (देव दीपावली।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जीवन – संग्राम।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीवन – संग्राम। ♦

है जीवन में संग्राम बहुत,
लड़ते इनसे जाओ।
संग्राम बीज आराम भी है,
सोकर नहीं बिताओ।

जीवन के सुख दुख दो पहलू,
इनसे ना घबराओ।
सुख के खातिर बिछावना को,
नित्य बिछाते जाओ।

विजय बिछावना कर्मयोग का,
करतब समझ दिखाओ।
पेट के खातिर लोक समाज में,
कर्मयोग को अपनाओ।

लड़ाईया लड़ने की खातिर तुम,
खुद को तैयार करो।
जीवन एक संग्राम कठिन लेकिन,
पुरुषार्थ अपना दिखलाओ।

कभी पैदल और कभी गाड़ी से,
बाट गुजर जाएंगे।
कभी कंक्रीट, कभी वृक्ष छांव में,
सोकर बीत जाएंगे।

बचपन लड़कपन में बीत गया,
जवानी घर बिताएंगे।
लोरी जिन्हें पहले गाकर सुनाया,
आंख बुढ़ापे में दिखाएंगे।

कब से बच्चे – बच्चे वाले हो गए,
पता नहीं कर पाएंगे।
माता पिता, नाना नानी के अलावा,
दूसरा नहीं दिखाएंगे।

सोच-सोच कर नीद नहीं आएगी,
पूरी रात बिताएंगे।
फिर भी सच का पता नहीं चलेगा,
कर कुछ नहीं पाएंगे।

बड़का छोटका – छोटका बड़का,
कहते ही रह जाएंगे।
रिश्ते सारे सपने जैसे शहरों में गुम,
होकर खोते जाएंगे।

कभी कभी मिलेगी पुआ – मिठाई,
पर अभागे सो जाएंगे।
विविध तरह से यह जीवन चलता,
जिसे देख इठलाएंगे।

यह जीवन सतरंगी विरासत पर,
बेरहम धक्के खाएंगे।
जीवन ऐसो आराम में गुजरे फिर,
पैर पकड़ हिलाएंगे।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — मानव जीवन एक कड़वा संग्राम है यहां आराम भी है, दुःख भी है, सुख भी है, आत्म आनंद भी है। मौसम की तरह सुख दुःख आते जाते रहते है मानव जीवन में। लेकिन मेरा अनुभव कहता है की यह सुख और दुःख का सृजन मनुष्य का मन करता है। जिस मनुष्य का मन व आत्मशक्ति मजबूत हो वह मानव हर परिस्थिति में एक समान रहता है, चाहे दुःख हो या सुख। हमे अपने आप को मानसिक रूप से इतना मजबूत बनाना है की कोई भी परिस्थिति हमे बिचलित ना कर सके। हर एक मनुष्य आत्मा के अंदर अनंत शक्तियां, सुषुप्त अवस्था में निहित है, बस जरूरत है इन शक्तियों को जागृत कर, सही समय पर, सही जगह उपयोग करने की। किसी भी शक्ति के उपयोग में समय और जगह का उच्च स्थान होता है। सही समय व सही जगह पर उपयुक्त शक्ति का उपयोग करने पर हर कार्य सफलता पूर्वक पूर्ण हो। इस संसार में ऐसी कोई भी समस्या नहीं है जिसका समाधान ना हो। बस जरूरत है अपने नज़रिये को बदलने का। आपका सकारात्मक नजरिया आपके उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करेगा।

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यह कविता (जीवन – संग्राम।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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छठी मैया का व्रत।

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♦ छठी मैया का व्रत। ♦

आओ मिलकर सूर्य भक्ति में,
छठ की अलख जगायें।
करें वंदना चार दिनों तक,
दो दिन नमक न खाएं।

अस्ताचलगामी सूर्य देव को,
अर्घ्य प्रथम चढ़ाएं।
होते सवेरे दूसरे दिन फिर,
जाकर सूरज को मनाए।

कद्दू – लौकी के दूसरे दिन,
पूरी – खीर साथ में खाएं।
चना दाल अथवा गेहूं आटा,
हाथ से पीस के पकाएं।

पंचमी तिथि पर सायंकाल में,
सूर्य अर्घ्य देने जाएं।
चावल – गुड़ से बनी हुई खीर,
प्रसाद रूप में पाएं।

अन्य भक्तों में प्रसाद बांट कर,
‘खरना’ पर्व मनायें।
सायंकल, षष्टी तिथि, अस्ताचल,
सूर्य को अर्घ्य देने जाएं।

विविध पकवान और ऋतु फल से,
सूर्य की डलिया सजाएं।
धूपबत्ती कुमकुम देसी घी के दीप से,
भगवान सूर्य को मनायें।

सप्तमी तिथि के उषाकाल में अर्घ्य,
सूर्य देव को देकर आयें।
उगते सूरज की किरणों के संग में,
छठ की गीत सुनायें।

विविध कामना छठ से होती पूरी,
मईया कभी न रखती अधूरी।
पुत्र कामना के लिए जो व्रत करते,
छठ कृपा होती, मनौती पूरी।

कन्याकुमारी व्रत ना उठाएं,
इसको लीजिए मान।
अनादि काल से ही सूर्य देव ने,
आकर देते हैं वरदान।

व्रत किया था आदिशक्ति ने,
पाया आदि गणेश।
तेरी व्रत लीला में है पराल्प,
ना जाने कोई अल्पज्ञ।

देवी कुन्ती सूर्य उपासना की,
मिला दानवीर कर्ण।
सूर्य उपासना – छठ की पूजा,
लीजिए पांचों मान।

जिस जिस ने पूजा सूर्य देव को,
किया उनका कल्याण।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — छठी मैया का व्रत को कैसे करना है? छठी मैया का व्रत करने से अनादि काल से ही लोगों को सूर्यदेव से मन चाहा फल मिलता आया है। समय समय पर जिस किसी ने भी सच्चे मन से छठी मैया का व्रत रख कर सूर्य देव की आराधना की है उसे जरूर मनोवांछित फल मिलता है। इस व्रत को कुवारी कन्या नहीं रख सकती। जिस जिस ने पूजा सच्चे मन से सूर्य देव को किया उनका कल्याण सूर्य देव ने। आओ मिलकर सूर्य भक्ति में छठ की अलख जगायें। करें वंदना चार दिनों तक, दो दिन नमक न खाएं। अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य प्रथम चढ़ाएं। होते सवेरे दूसरे दिन फिर जाकर सूरज को मनाए।

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यह कविता (छठी मैया का व्रत।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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भाई दूज – यम द्वितीया पर्व।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भाई दूज – यम द्वितीया पर्व। ♦

भाई दूज पर करें विचार,
अकाल मृत्यु के इसमें उपाय।
जमुना में मिल करें स्नान,
भाई बहन सबका कल्याण।

दीपावली बाद आता त्यौहार,
अकाल मृत से बचाएं घर बार।
मत्स्य पुराण कथा के अनुसार
भाई – बहन का यह त्यौहार।

भाई बहन मिलकर जमुना में,
एक साथ करें स्नान।
इस घर अकाल मृत्यु नहीं होती,
इसमें है इसका निदान।

भाई को टीका चंदन लगाकर,
भारतीय बहन आरती उतारती।
भाई के स्वास्थ स्मृति की कामना,
कामयाबी की गुहार लगाती है।

भाई बहन को वस्त्र आभूषण आदि,
प्रेम पूर्वक दान में देता है।
मृत्यु के देवता यम की कृपा से उसे,
अकाल मृत्यु से बचाएं रखता है।

अकाल मृत्यु से परिवार बचाएं,
भैया द्वीज को यमुना में नहाएं।
सरसो तेल से द्वार के दीप जलाएं,
काला वस्त्र पहन कर न धाएँ।

प्राचीन काल से बहने भी,
भाई से लेती थी वरदान।
प्रेम पूर्वक भाई भी उनकी,
हमेशा रखते करते मान।

अलौकिक के मोह में अपना,
सुंदर जीवन न करें बेकार।
मैं की गठरी फेंको जाकर,
कूड़ा निस्तारण में लाकर।

चाहते अपना कल्याण गर,
लो शास्त्रों से ज्ञान पढ़कर।
सत्संग में जीवन बिताओ,
ईश्वर में जी ध्यान लगाओ।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — मत्स्य पुराण कथा के अनुसार भाई – बहन का यह त्यौहार, दीपावली के पंचम दिवस आता, अकाल मृत से बचाएं घर बार। जो भी भाई – बहन इस दिन मिलकर जमुना में एक साथ करें स्नान, उस घर में कभी भी अकाल मृत्यु नहीं होती, भाई दूज – यम द्वितीया पर्व है इसका निदान। इस दिन भाई को टीका चंदन लगाकर, भारतीय बहन आरती उतारती। भाई के स्वास्थ स्मृति की कामना और कामयाबी की गुहार लगाती है। भाई बहन को वस्त्र आभूषण आदि प्रेम पूर्वक दान में देता है। मृत्यु के देवता यम की कृपा से उसे अकाल मृत्यु से बचाएं रखता है।

—————

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यह कविता (भाई दूज – यम द्वितीया पर्व।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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गोवर्धन पूजा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गोवर्धन पूजा। ♦

बरसात कराने में इंद्र देव हैं बड़े शानी,
घमंड में कभी – कभी करते इंद्र देव मनमानी।
गोकुल वासियों के बीच किया करतानी,
जानकर दंग श्री कृष्ण पूजा से की मनमानी।

गोकुल में घोर बरसात कराने की ठानी,
कृष्ण ने किया इंद्र को पानी – पानी।
भगवान कृष्ण गोवर्धन लीला महान,
गोकुल वासियों ने देखा, आंखों विज्ञान।

छप्पन भोग, अंदर का पूजा पाठ करें,
जो सबका नायक है, उसका मान करें।
मैं के नाशक श्री कृष्ण का ध्यान धरें,
मंगल हो आप सभी की, प्रभु घ्यान धरें।

जब अपने शक्ति का घमंड हो जाता,
उसका हंता श्री कृष्ण जी तक आते।
इंद्र अपने भक्तों पर कहर, यदि न बरपाता,
श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत तब नहीं उठाते।

दीपावली के बाद यह त्यौहार आता,
अगले दिन ही इसे मनाया जाता।
मंगल करे आप सभी का यह पुनीत त्यौहार,
गोवर्धन धारी की लीला है दुनियां में अपरंपार।

श्रीमद् भगवद्गीता में है शुभ – शुभ सुविचार,
घमंड पर श्री कृष्ण का होता है जो वार।
सुंदर जीवन चलाने का यह ही एक पतवार,
मानव शरीर में आता है सुंदर – सुंदर विचार।

आयोजन में छुपा जीवन मंत्र का यादगार ,
चिंता और तनाव के नहीं होंगे शिकार।
गोवर्धन लीला न्यारी का जो करेगा विचार,
सत्य मार्ग पे चलने से उसमें बढ़ेगा संस्कार।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जब इंद्र देव के द्वारा बरसात बहुत ज्यादा हुआ वृन्दावन में उनका घमंड तोड़ने के लिए भगवान श्री कृष्ण को गोवर्धन लीला महान करना पड़ा गोकुल वासियों ने देखा अपने आंखों से अद्भुत विज्ञान। गोवर्धन लीला के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण जी ने ये संदेश दिया जो करेगा विचार, सत्य मार्ग पे चलने का उसमें बढ़ेगा संस्कार।

—————

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यह कविता (गोवर्धन पूजा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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दीपावली सुहावन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दीपावली सुहावन। ♦

झुर – झुर बहत पुरवइया दीपावली सुहावन,
दीप सजी अंगनैया है औ मिष्ठान लुभावन।
धरती का हर कोना सजा आसमान सुहावन,
झिलमिल झिलमिल दीप टिमटिमाते मनभावन।

कुंजों – उपवनों से शांति, सुख धाम दिखावन,
गुरुजन परिजन संग – संग दिखत ज्ञान लुटावत।
मंदिर – द्वार से हो रहा लक्ष्मी ध्यान मनावन,
काशी, मथुरा, अयोध्या, प्रयाग धाम सुहावन।

धनवंतरी पहले आए मोरा गांव – गांव बतावन,
माटी के दिए घी – तेल – बाती जलते दिखावन।
सखी संग भीतर बाहर साजन शोभा पाता पावन,
स्वार्थ सब भूल गए सुख दायक सुख शांति आंगन।

‘मंगल’ छवि मनमोहक कुंज कुनबा पर पावन,
गोरी छोरी मिलि दीप जलाए हरि मन को भावन।
गृह – गृह गगन मंडल जस गाते गीत सुहावत,
ताल तलैया तट समुद्र नदियां मोहक मनभावन।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — मंदिर द्वार से हो रहा लक्ष्मी ध्यान मनावन, हो काशी, मथुरा, अयोध्या, या प्रयाग धाम सुहावन। दीपावली महापर्व पर धरती का हर कोना सजा आसमान सुहावन, झिलमिल झिलमिल दीप टिमटिमाते मनभावन। शुभ दीपावली आत्मिक साधना के लिए सबसे सर्वोत्तम दिन होता है, इस दिन हम सभी को अपने आत्मिक उत्थान के लिए सच्चे मन से साधना करना चाहिए।

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यह कविता (दीपावली सुहावन।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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विकास मार्ग पर चला उत्तर प्रदेश।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विकास मार्ग पर चला उत्तर प्रदेश। ♦

जब से योगी सरकार उत्तर प्रदेश में आई,
लोकतंत्र की खुशियों में बहार लेकर छाई।
महाविद्यालय राज्य महाविद्यालय नये खुलवाई,
इंजीनियरिंग कॉलेज, आई टी आई खूब बढ़वाई॥

जब से योगी सरकार उत्तर प्रदेश में आई,
इंटर कॉलेजों का भाग्य जग गया तब से।
कस्तूरबा कॉलेज फल फूल रहा है कब के,
शिक्षा व्यवस्था में भारी परिवर्तन दिया दिखाई॥

योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में आई,
महिलाओं की मान सम्मान में चार चांद लगाए।
पीएसी और पुलिस की बटालियन बनवाई,
जबरन धर्म परिवर्तन पर बलकर रोक लगाई॥

योगी सरकार उत्तर प्रदेश में खुशियां लेकर आए,
महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान बढ़ाये।
रोमियो स्क्वाड गठन कराकर सुधार कराई,
स्वास्थ्य विभाग की महिलाओं के प्रति कानून बनाई॥

इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल विकास किया,
प्रदेश की हवाई पट्टी का जगह – जगह विस्तार किया।
नए – नए एयरपोर्ट संचालित कराकर प्रदेश में,
रक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया॥

मनरेगा में करोड़ों मजदूरों को बढ़ाकर सरकार ने,
मजदूर और गरीबों के महत्वपूर्ण काम किया।
भेदभाव रहित 800000 नौकरिया दिये,
योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में है आई॥

वायु प्रदूषण कम करने के लिए खूब प्रयास किया,
प्रदेश में चल रहे अवैध बूचड़खाने को बंद किया।
पूरे प्रदेश में पारंपरिक तरीके से वृक्ष लगवाया,
सोलर एनर्जी के कार्यक्रम को खूब चलाया॥

गंगा को निर्मल रखने के लिए जागरूकता फैलाया,
ऑर्गेनिक खेती करने के लिए मुहिम चलाया।
गौ आधारित खेती करवा कर किसानों की आय बढ़ाया,
जल और थल मार्ग से यात्रा करा के जनता को जगाया॥

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया,
आशा कार्यकर्तियों को उचित मानदेय दिलाई।
सांप्रदायिक शौचालय गांव – शहर में बनवाया,
योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में आई॥

किसानों की खुशहाली के लिए अनेक योजना लाई,
सरल फसली ऋण बैंकों से उपलब्ध कराई।
हर किसान ने किसान क्रेडिट कार्ड बनवाई,
जब से उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आई॥

प्रधानमंत्री सम्मान निधि पूरे प्रदेश में लागू कराई,
किसानों की फसलों का उचित मूल्य दिलवाई।
निरंतर किसानों को बिजली उपलब्ध कराई,
योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में है आई॥

जल संरक्षण का कार्यक्रम प्रदेशभर चलाएं,
गंगा के तट पर भी घोषणा गोष्ठयां करवाई।
महिलाओं को बैंक सखी बना सम्मान दिलाई,
पूर्वांचल की जब से योगी सरकार है आई॥

उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी का तोफा दिलाई,
फैक्ट्री और कारखाना बढ़ाने की योजना बनाई।
अवैध प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने का काम हुआ,
बंद सड़क आंखें खुली खुशहाली का माहौल बना॥

गुंडे और माफियाओं को लाल किला दिखलाये,
भ्रष्टाचारियों के ऊपर कठोर कदम उठाये।
ई टेंडरिंग के माध्यम से प्रदेश को आगे बढ़ाये,
नौजवान में कला कौशल का प्रशिक्षण कराये॥

गांव में दुग्ध सहकारी समितियों का क्रियान्वयन कराये,
पशुओं के संरक्षण के लिए विविध योजना लाये।
स्मारकों की सुरक्षा के लिए कदम बढ़ाए,
योगी आदित्यनाथ जी जब से प्रदेश सरकार में आए॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में है आई है तब से उत्तर प्रदेश में क्या – क्या मुख्य कार्य हुआ है उसका जिक्र किया है जैसे – महाविद्यालय राज्य महाविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, आई टी आई नये खुलवाई, महिलाओं की मान सम्मान में चार चांद लगाए। अलग से पीएसी और पुलिस की बटालियन बनवाई, जबरन धर्म परिवर्तन पर बलकर (बलपूर्वक) रोक लगाई। महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान बढ़ाये। रोमियो स्क्वाड गठन कराकर सुधार कराई, स्वास्थ्य विभाग की महिलाओं के प्रति कानून बनाई। और भी बहुत सारे कार्य किये। आओ हम सब मिलकर पुनः उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनाएं।

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यह कविता (विकास मार्ग पर चला उत्तर प्रदेश।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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दुनिया का प्यारा – राष्ट्र का दुलारा – काशी का बना सहारा – सांसद हमारा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दुनिया का प्यारा – राष्ट्र का दुलारा – काशी का बना सहारा – सांसद हमारा। ♦

चर्चित लोकप्रिय नेता जननायक के रूप में उभरे नरेंद्र मोदी की कीर्ति जनता के हृदय में सहानुभूति जगाती रही। अधिकांश लोग नरेंद्र मोदी को राष्ट्र धारक और जननायक के रूप में देखने लगे। घर में आर्थिक अभावों के कारण भी वह किसी पर बोझ बन कर नहीं जीना चाहते थे। जीवन में बहुत सारी परेशानियां आई उन्हें काटते झाड़ते जीवन का रास्ता खोजा और अपने संपूर्ण हाथ बल से परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए क्षितिज पर पहुंचे।

सारी दुनिया से मेल मिलाप करके वसुधैव कुटुंबकम का नारा लेकर विश्व बंधुत्व के लिए अलख जगाई। आज दुनिया उनकी ओर टकटकी लगाए देख रही है। यात्रा के बहुआयामी पड़ाव और उसके इस पद की स्वीकार्यता भारतीय समाज और लोकतंत्र की गौरव पूर्ण उपलब्धियों में से हैं।

संघर्षों के बाद यह ऊंचाई प्राप्त।

श्री नरेंद्र मोदी जी को अब्राहम लिंकन और एपीजे अब्दुल कलाम की तरह से संघर्षों के बाद यह ऊंचाई प्राप्त हुए। राष्ट्रीय निर्माण की उनके सपने और योजना में हम सभी भागीदार होकर भारत को फिर से सोने की चिड़िया जैसा बना सकते हैं। भारत में महान स्वप्न दृष्टा के रूप में भरनी वाले वास्तव उत्कृष्ट क्षमता हिंदी सपनों में व्याप्त है। गुजरात के उत्थान के उपरांत राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आने वाले व्यक्ति के धनी विकसित मानसीकता का लिए हुए संपूर्ण विश्व पर अपनी छाप छोड़ने का काम किया।

स्वास्थ्य, शिक्षा सशक्तिकरण।

स्वास्थ्य, शिक्षा सशक्तिकरण के इस युग में टेक्नॉलाजी और विज्ञान में गहन रुचि रखने वाले कर्मयोगी की भांति कुशलता पूर्वक नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं। हिंदी साहित्य हृदय के अंदर धारण करने वाले प्रबल आशावादी होने के साथ – साथ वास्तविक आबादी और आदर्शवादी भी हैं। माता – पिता के प्रति उनकी चिंता और संस्कारों का उनके ऊपर उत्तम प्रभाव रखता है।

नरेंद्र मोदी ने अपने जीवन का निर्माण धरा से गुरुदेव तक जुड़ते हुए किया है। धरती के प्रति उनकी आस्था है वह धरा से जुड़े हुए इंसान है। यह सूझ – बूझ को ही विशेष महत्व देते हैं। अभाव में रहने के बावजूद उनका कहना था कि हमारे पिता और माता जी कभी अपने को निर्धन नहीं मानते।

स्मरण शक्ति के धनी।

अपनी ईमानदारी और परिश्रम के बल पर हुआ पूरे परिवार का भरण पोषण करने वाले रहे हैं। स्मरण शक्ति के धनी प्रतिभावान व्यतीत स्वयं सेवक राष्ट्र भावना लिए हुए भारत की धरती पर विचरण करते हुए सूर्य की किरणों की भांति चमकते हुए सितारे है मोदी जी।

मोदी जी के राजनीतिक उपलब्धियों पर प्रकाश डालें तो सन 2001 से 2013 तक मुख्यमंत्री काल में तमाम उपलब्धियां देश विदेश से प्राप्त हुआ है जिनका जिक्र इस आलेख में नहीं करेंगे।

पहले 25 अक्टूबर 2021 को काशी वासियों को 5189 करोड़ रुपए की 28 परियोजनाओं की सौगात जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों से लोकार्पित होने हैं उन परियोजनाओं की सूची प्रस्तुत करता हूं।

इन 28 परियोजनाओं से काशी ही नहीं पूरा पूर्वांचल के माध्यम से पूरे प्रदेश का विकास होगा। 25 अक्टूबर 2021 को राजा तालाब के मेहदी गंज रिंग रोड किनारे आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी की जनसभा का आयोजन है जिनमें परियोजना का लोकार्पण कार्यक्रम है।

काशी से 5189 करोड़ की सौगात का लोकार्पण —

  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय में धनराज गिरि हास्टल ब्लाक निर्माण ₹• 28.78 (२८.७८) करोड़।
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय अगर हॉस्टल 200 सिटिंग रूम का निर्माण ₹• 28.78 (२८.७८) करोड़।
  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय राजपूताना ग्राउंड में छात्र गतिविधि केंद्र ₹• 27.82 (२७.८२) करोड़।
  • विवेकानंद हॉस्पिटल के पीछे आवासीय अपार्टमेंट का निर्माण ₹• 40 (४०) करोड़।

रोड निर्माण (Road Construction) —

  • वाराणसी गोरखपुर एन एच – 28 (२८), ₹• 3509.14 (३५०९.१४) करोड़।
  • वाराणसी से विरनों गाजीपुर तक 72.15 किलोमीटर राजमार्ग।
  • राजा तालाब से वाजिदपुर हरहुआ मार्ग रिंग रोड फेज – 2 (२), ₹• 1011.29 (१०११.२९) करोड़।
  • छावनी से पड़ाव तक सड़क चौड़ीकरण ( वाराणसी) ₹• 18.66 (१८.६६) करोड़।
  • गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट तक पर्यटन विकास लागत ₹• 10.78 (१०.७८) करोड़।

पुल (Bridge) —

  • वाराणसी के सेतु कोनिया सलारपुर वरुणा नदी पुल ₹• 26.21 (२६.२१) करोड़।
  • राजघाट से मालवीय पुल तक विकास कार्य ₹• 2.74 (२.७४) करोड़।
  • कालका धाम सेतु (बाबरपुर, कपसेठी, भदोही मार्ग) पुल कालिका धाम ₹• 19.14 (१९.१४) करोड़।

घाट (Pier) —

  • साढ़े ग्यारह घाटों का पुनरुद्धार ₹• 10.78 (१०.७८) करोड़।
  • शूलटंकेश्वर घाट का पर्यटन विकास कार्य ₹• 1.66 (१.६६) करोड़।
  • मारकंडेय महादेव घाट कैंची में गंगा नदी के तट पर घाट का निर्माण ₹• 5.14 (५.१४) करोड़।
  • गंगा गोमती संगम स्थल कैथी में संगम घाट का निर्माण ₹• 10.66 (१०.६६) करोड़।

कुंड / तालाब (Cistern/Pond) —

  • आठ कुंडों का सुंदरीकरण व संरक्षण कार्य ₹• 18.96 (१८.९६) करोड़।
  • चकरा तालाब का सुंदरीकरण व संरक्षण ₹• 2.59 (२.५९) करोड़।

नदी का चैनेलाइजेशन (Channelization of river) —

  • वरुणा नदी के चैनेलाइजेशन और नदी का विकास कार्य ₹• 201.66 (२०१.६६) करोड़।

मंडी (Mandi/Market) —

  • लाल बहादुर शास्त्री हाल और सब्जी मंडी बढ़िया का नवीनीकरण का कार्य ₹• 8.22 (८.२२) करोड़।

हॉस्पिटल (Hospital) —

  • आराजी लाइन के भादारसी में 50 बेड एक गीत आसमान हॉस्पिटल का निर्माण ₹• 6.41 (६.४१) करोड़।

पार्किंग (Parking) —

  • सर्किट हाउस परिसर में अंदर ग्राउंड पार्क का निर्माण लागत ₹• 26.77 (२६.७७) करोड़।
  • टाउन हॉल अंडर ग्राउंड पार्किंग और संरक्षण ₹• 23.31 (२३.३१) करोड़।

पशुधन एवं कृषि (Livestock and Agriculture) —

  • राजकीय पशुधन एवं कृषि क्षेत्र आराजी लाइन नवीनीकरण ₹• 1.70 (१.७०) करोड़।

औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Area) —

  • चांदपुर और औद्योगिक क्षेत्र में आंतरिक अवस्थापना विकास कार्य ₹• 10.85 (१०.८५) करोड़।

गौ आश्रय केंद्र (Cow shelter center) —

  • बायो CNG प्लांट शहंशाहपुर गौ आश्रय केंद्र लागत ₹• 23 (२३) करोड़।

सीवर लाइन (Sewer Line) —

  • रामनगर में 10 एम एल डी एस टी पी और इंटर सेप्टर सीवर लाइन लागत ₹• 72.91 (७२.९१) करोड़।

हाल (Hall) —

  • स्वर्गीय गिरजा देवी सांस्कृतिक संकुल चौका घाट बहुउद्देशीय हाल का उन्नयन कार्य लागत ₹• 6.94 (६.९४) करोड़।
  • कैंट स्टेशन पर ड्यूटी सुविधा के लिए वी आई पी लाउज निर्माण ₹• 1.5 (१.५) करोड़।

माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लोकार्पित की जाने वाली परियोजनाओं की सूची से कुछ परियोजनाओं को बाहर किया गया है इसमें जंगम बाड़ी राजमंदिर और दशाश्वमेध वार्ड में स्मार्ट सिटी के तहत कराए गए काम का लोकार्पण अगले महीने होने की संभावना है।

मेहंदी गंज, वाराणसी में होने वाली प्रधानमंत्री जी की जनसभा को पूर्ण रूप से एस पी जी के कब्जे में रखा गया। वहां हेली पैड का निर्माण किया गया जिसपर प्रधानमंत्री सहित कई हेली का0 उतारने की व्यवस्था की गई।

भाषण (Speech) —

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मेंहदी गंज के मैदान में मंच से घाटी बनारसी अंदाज में अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने भाषण की शुरुआत हर हर महादेव के नारे से की। प्रधानमंत्री का जय घोष सुनते ही पंडाल में जनता भी हर हर महादेव का नारा लगाने लगी। पूरा पंडाल और आसपास डमरु के निनाद और हर-हर महादेव के नारे से गूंज उठा। आवाज आकाश में बुझने लगी चारों तरफ हर हर महादेव गूंजने लगा। प्रधानमंत्री जी को जनता से इजाजत मांगने पड़ी कि अब मैं बोलूं!

प्रधानमंत्री जी ने कहा काशी के सभी बंधु एवं भगिनी लोगन के प्रणाम बा ………!
दीपावली, देव दीपावली, अन्नकूट, भैया दूज और प्रकाश उत्सव आवे वाले डाला छठ की आप सब लोगन के बहुत – बहुत शुभकामना।

इस शुभ अवसर पर उन्होंने 64000 करोड़ रुपए की pm आयुष्मान हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन का शुभारंभ किया। इसके जरिए देश के कोने कोने में इलाज के लिए पूरा सिस्टम विकसित किया जाएगा। रिसर्च संस्थानों को सशक्त बनाया जाएगा। इस सिस्टम को विकसित बनाने के बाद बीमारियों का पता लगाना आसान हो जाएगा। इसके अलावा 600 जिलो में क्रिटिकल केयर के लिए बेड तैयार होंगे।आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का माहौल बनेगा।

नए मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के 70 साल में देश को जीतने डाक्टर नहीं मिले आने वाले 10 – 12 साल में उतने ही और डाक्टर मिलने जा रहे हैं।

लोकल फार वोकल का नारा।

उन्होंने कहा कि अभाव से आगे बढ़ना ही भारत की पहचान है। अपने संसदीय क्षेत्र काशी कों पदार्पण 28 बार के 28 वें लोकार्पण समारोह में काशी को सौगात देने के साथ एक बार फिर लोकल फार वोकल का नारा बुलंद किया। उन्होंने कहा सिर्फ इसे दीयों तक ही सीमित ना रखी जाए। जिसमें हमारे देश वासियों का पसीना लगा है, जिसके उत्पादन में मेरे देश की मिट्टी की सुगंध है, वह मेरे लिए लोकल है।

कलाकारों, कारीगरों और कपड़े के जादूगरी बिखेरने वाले गुण करूं।

यदि हमारी आदत बन जाएगी देश की निर्मित चीजों को खरीदने की। उससे उत्पादन भी बढ़ेगा और रोजगार भी। गरीबों को काम भी मिलेगा और काम हम सब मिलकर कर सकते हैं। यह पूरा क्षेत्र कलाकारों, कारीगरों और कपड़े के जादूगरी बिखेरने वाले गुण करूं के लिए जाना जाता है।

सरकारी प्रयास से पांच सालों में वाराणसी में खादी और कुटीर उद्योग के उत्पादन में 60% और बिक्री में 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा एक बार मैं फिर देशवासियों से आग्रह करूंगा कि वह अपनी यहां देश की बनी हुई वस्तुओं का प्रयोग करने पर ध्यान दें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पहली बार 7 नवंबर 2014 को पहली दौरे पर बड़ा लालपुर मेरी फिसलटी सेंटर और टेक्सटाइल सेंटर की सौगात से बनारस के विकास को गति देने की शुरुआत की थी। हर एक दौड़ी में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को हजारों करोड़ की सौगात के साथ जनता से मिलते रहे।

एक छोटी सी रचना प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा हूं —

“जिसके अंदर प्रभु वास,
महाराज मांधाता सा हाथ।
हरिश्चंद्र सा त्याग भरा हो,
वह काशी को देता सौगात।

लोकार्पण के साथ-साथ,
मन में शिव का ध्यान।
विश्व बंधुत्व भावना जिसकी,
जन जन का रखता मान।

त्रिदेवों का जिसके सर हाथ,
उसकी बुद्धि में धरा उद्धार।
निकला करने आया उपकार,
जैसा चाहे वह करी विचार।”

प्रधानमंत्री ने कहा आज मैं काशी की धरती से 130 करोड़ देशवासियों को, हिंदुस्तान के कोने-कोने को, हिंदुस्तान के शहर को, हर किसी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। काशी आध्यात्मिक के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी एक अहम केंद्र है। काशी सहित संपूर्ण पूर्वांचल के किसान की उपज को देश विदेश के बाजार तक पहुंचाने के लिए बीते साल में सुविधाएं विकसित गई है।

काशी में परियोजनाओं की सौगात देकर 2014 ई. में अस्सी घाट से स्वच्छता अभियान की शुरुआत और बड़ा लालपुर मेरे फिसलती सेंटर की नींव रखी थी।

इसी प्रकार सन 2015 ईस्वी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय ट्रामा सेंटर को देश को समर्पित किया था। इसकी साथ 45 हजार करोड़ रुपए की भवन डेवलपमेंट की शुरुआत की। सन 2016 ईस्वी में पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर, हॉस्पिटल की आधारशिला रखी। सन 2018 ई. में 900 करोड रुपए की काशी के विकास कार्यों का तोहफा दिया। सन 2019 ईस्वी में काशी श्री काशी विश्वनाथ धाम की आधारशिला रखी और 15 जुलाई 2021 के दौरान प्रधानमंत्री ने 1500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया था।

दीपावली से पहले आई आई टी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में साथ और शिक्षकों को बड़ी सौगात दी। छात्र हॉस्टल, छात्र गतिविधि केंद्र और शिक्षकों के लिए आवासीय अपार्टमेंट का लोकार्पण भी मेहदी गंज, सभा स्थल से प्रधानमंत्री जी ने किया। प्रधानमंत्री के सभा स्थल के पास ही राष्ट्रीय राजमार्ग वक्त इससे संबंधित प्रोजेक्ट की प्रदर्शनी लगाई गई थी।

कोनियां बरुना नदी पर पुल का उद्घाटन होने से आवागमन के लिए यह मार्ग खुल गया, जिसे लगभग 25 से अधिक गांवों को विशेष लाभ हुआ। जिन गांवों को इसका विशेष लाभ होगा उसमें बरियासनपुर, रमना, कमौली, रमचंदीपुर, गोबरहा, दीनापुर, शंकरपुर, सलारपुर, मोकलपुर आदि गांव शहर से सीधे जुड़ जाएंगे।

रामनगर में लंबे समय से ही जल – मल समस्या से जनता गुजर रही थी। नगर महा-पालिका रामनगर से निकलने वाले जल – मल को गंगा में गिरने से समस्या दूर होगी। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगने के बाद ही बरखा शोधन कर पानी को सिंचाई के कार्य में लिया जाएगा। और कचरा से खाद का निर्माण किया जाना है। जैसे रामनगर की जनता को राहत मिल सकती है।

शहंशाहपुर में बायो CNG गैस प्लांट लगने से पास के किसानों से गोबर खरीदा जाएगा। जिससे किसानों का आर्थिक लाभ होगा। इस प्लांट से CNG गैस बनाई जाएगी साथ ही खाद भी तैयार किया जाएगा। जैविक खाद प्रयोगशाला के साथ जैविक खाद प्रशिक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराया गया।

इन सभी परियोजना के केंद्र में प्रधानमंत्री द्वारा काशी में प्रथम आगमन पर पूर्वांचल के साथ उपचार होती रही है उसको इनमें रखकर बहुत बड़ा कार्य हुआ है और आगे भी इस तरह के कार्य होने की संभावनाएं हैं। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री जी के मिशन में पूर्वांचल का भी अपना एक महत्व पूर्ण स्थान है। पूर्वांचल को उन्होंने महत्व दिया है। भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम बढ़ रहा है।

ज़रूर पढ़ें — इतिहास में मोदी को किस लिए जाना पहचाना जाएगा?

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख में समझाने की कोशिश की है — नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी के द्वारा किये गए पूर्वांचल के विकास के महान कार्यों का वर्णन किया है, इन कार्यों के लिए इतिहास में नरेंद्र मोदी जी को सदैव ही याद रखा जायेगा। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री जी के मिशन में पूर्वांचल का भी अपना एक महत्व पूर्ण स्थान है। पूर्वांचल को उन्होंने महत्व दिया है। भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम बढ़ रहा है। दुनिया का प्यारा – राष्ट्र का दुलारा – काशी का बना सहारा – सांसद हमारा। काशी का विस्तार हो, सड़क व ब्रिजों का निर्माण, हॉस्पिटल का निर्माण हो, उनका विस्तार किया जाना। इस तरह से बहुत सारे कार्यों के लिए इतिहास में नरेंद्र मोदी जी को सदैव ही याद रखा जायेगा। आओ हम सब मिलकर एक नए भारत के निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग दे।

—————

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यह लेख (दुनिया का प्यारा – राष्ट्र का दुलारा – काशी का बना सहारा – सांसद हमारा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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