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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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poetry by sukhmangal singh

अस्तित्व।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अस्तित्व। ♦

पीड़ा और शोक की कहानी,
आरोप-प्रत्यारोप की कहानी,
से बड़ी होती है।

संतोष और विवेक पूर्ण धरोहरों,
सुख शांति का एकमात्र साधन है।
अस्तित्व का कभी अंत नहीं होता।
वस्तु का ही सदा अंत होता है।

आत्मा न जन्म लेती है ना मरती।
जिसका जन्म नहीं होता,
उसकी मृत्यु नहीं होती है।
आत्मा का प्रारंभ ना और ना अंत।

इसलिए आत्मा की अमरता है।
जिसका कोई नहीं होता है।
उसकी मृत्यु नहीं होती है।

ब्रह्मांड में प्रकाशित होने वाला,
ब्रह्मांड के बगीचे का अंग है मनुष्य।

सब कुछ उसके अंदर होने के बावजूद।
प्रकृति और समाज पर निर्भर होता है मनुष्य।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।
इसलिए वह समाज में रहता है।

अपने अस्तित्व के लिए,
वह समाज पर निर्भर है।
मनुष्य समाज से अलग हो जाता है,
तो उसका विनाश संभव है।

अपने बारे में केवल विचार करके,
मनुष्य खुशहाल नहीं जि सकता।
व्यक्ति समाज से अलग,
रह कर सुखी नहीं होता।

संत पुरुष समाज से अलग,
रह कर ईश्वर से लगन लगाते हैं।
ईश्वर और ऋषि जब साथ होते हैं,
तो वह आनंदा की अनुभूति होती हैं।

मनुष्य को समाज के,
अनुसार चलना पड़ता है।
व्यक्तिगत सोच समाज के,
अनुसार ही रखनी पड़ती है।

सभी व्यक्ति अपनी सोच के अनुसार,
के लोगों के साथ रहना चाहते हैं।
जबकि सब के विचारों में विविधता होती है।

आत्मा का अर्थ होता है अस्तित्व,
अस्तित्व तो कभी मरता नहीं है।
यह पंच तत्वों से निर्मित,
शरीर भी अपनी नहीं है।

आत्मा जब शरीर को छोड़ देती है,
तब शरीर पंचतत्व में ही मिल जाती है।
विद्वान पुरुष आत्मा और शरीर में अंतर जानते हैं।
आत्मा न जन्म लेती है और न हीं मरती है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से, कविता के माध्यम से बखूबी समझाने की कोशिश की है – आत्मा का अर्थ होता है अस्तित्व, यह पंच तत्वों से निर्मित शरीर भी अपनी नहीं है। आत्मा के सभी गुणों का महत्व और रियलिटी को बताया हैं। मनुष्य क्या है और मनुष्य समाज में क्यों रहता है, इसे भी समझाया हैं।

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यह कविता (अस्तित्व।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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एक दिन फोन आया।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ एक दिन फोन आया। ♦

विश्व गाथा प्रकाशन से,
मुझे फोन आया।

अ हिंदी क्षेत्र गुजरात,
से भी विश्व गाथा का,
प्रकाशन होता बताया।

लखनऊ में आफिस को,
एक है गाथा का बताया।

हमने उनसे जब नाम,
श्रीमान का जानना चाहा।
उन्होंने प्यार से नाम अपना,
पंकज त्रिवेदी हमें बताया।

हमने कहा श्रीमान आपकी,
पारदर्शिता ही विश्व गाथा,
को ऊंचाई प्रदान किया है।

आगे बढ़कर हिम्मत जुटाया।
अवध निवासी सुख मंगल सिंह।
अपना नाम उन्हें दर्ज कराया।

सोमवंशी क्षत्री कुल मेरा फरमाया।
काशी में प्रवासी हुकुम मैं बताया।
मां भगवती और गंगा को मनाया।
बाबा विश्वनाथ में दिल लगाया।

त्रिवेदी जी के दीर्घायु की कामना।
हमने फोन पर ही उन्हें सुनाया।
नमस्कार बंदगी के दरमियान।
काशी से अपना नाता है सन पाया।

हां जहां तक मुझे याद आता है।
सितंबर 2017 की यह बात है।
बड़े लोगों से बात कभी होती है।
हृदय में उमंग विशेष होती है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – विश्व गाथा प्रकाशन से, फ़ोन कॉल आया, कवि ने कविता के माध्यम से प्रशंसा करना बताया। कैसे किसी की प्रशंसा करें, और शॉर्ट में अपना परिचय दिया। फोन कॉल के दौरान आपको कैसा व्यवहार करना चाहिए ये समझाया।

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यह कविता (एक दिन फोन आया।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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पुकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ पुकार। ♦

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढो।

समर सुनसान पड़ा है।
लूटते देख मां की लाज।
निज जंगी बेड़ा पास पड़ा।
बलिदान, बलिदान खड़ा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

कुर्बानी की जंग है लड़नी।
दुश्मन त ललकार रहा है।
फौलादी जंगी बेटा को,
तुम भी तो तैयार करो।

दुश्मन सीमा पर तैनात खड़ा है।
सीमा पर तैनात वह अड़ा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

खड़ा शहीदी जत्था भी,
तुझको आज पुकार रहा है।
सुनसान समर निहार रहा।
बलवीर पुंज बनकर उभरों री।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

त्याग तपस्या बलिदान का,
यही रहा है केंद्र बिंदु।
मंगल आज पुकार रहा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

चारों तरफ बिछी देख,
लाशों की जब ढेर।
झुकने देना कभी नहीं,
भारत मां का शीश।

होगा तो ढूंढो, पढ़ो बहादुर बढ़ो।
चढ़ो बहादुर बढ़ो, चलो वीर बढ़ो।

तपोभूमि हर ग्राम हमारे,
कवि की वाणी गाती है।
लोरी गाती शाम को,
माता गाय हमारी प्यारी है।

कहां सिंह बन गए खिलौने,
वाली रानी बलिदान खड़ा है।
पढ़ो बहादुर पढ़ो,
लड़ो बहादुर लड़ो।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – सैनिकों का उमंग – उत्साह बढ़ाते हुए कवि कहते है, चाहे कुछ भी हो जाये कभी भी झुकने ना देना भारत माँ का शीश। त्याग तपस्या बलिदान का, यही रहा है केंद्र बिंदु। उठो बहादुर उठो। बढ़ो बहादुर बढ़ो।

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ऐसे दोस्त।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ ऐसे दोस्त। ♦

Poem on True Friendship in Hindi

मौसम की तरह बदलते दोस्त को,
दोस्त बनाना नहीं चाहिए।
जीवन में आने वाली तकलीफ से,
कभी घबराना नहीं चाहिए।

सत्य से रूठने वाले लोगों को,
कभी मनाना नहीं चाहिए।
जो नजरों से गिर जाए तो उसे,
कहीं उठाना नहीं चाहिए।

पचे जो ना पेट मे खाद्य पदार्थ,
उसे खाना नहीं चाहिए।
बाते जो मानता न हो उसको,
समझाना नहीं चाहिए।

जहां क्रंदन होता हो सदा ही,
वहाँ जाना नहीं चाहिए।
कपट करने वालों से कभी भी,
नहीं मित्रता करनी चाहिए।

अपने सच्चे मित्र से मित्रवत,
व्यवहार करने चाहिए।
द्वेष करने वाले से प्रतीकार व,
मित्रों का हित करना चाहिए।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – कई सारे उदहारण देकर बताया है, किससे दोस्ती करना चाहिए, और कैसे दोस्त रखने चाहिए। जीवन में आने वाले समस्याओं से घबराना नहीं चाहिए। सच्चे मित्र का सदैव ही साथ निभाना चाहिए।

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उठे ज्वार, भटका पनिहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ उठे ज्वार, भटका पनिहार। ♦

हृदय में ताला कहां लटकता।
मन में केवल भ्रम पलता है।
मंजिल पर नजर टिकी हुई हों।
संवाद हकीकत होता ही है।

सूख गई स्याही हो तो भी।
दिल तो एक समंदर सा है।
आश्वासन में दुनिया चलती।
आमंत्रण में केवल बेचैनी है।

शब्द बाण से आंगन मेरा,
बुरी तरह पीट रहा।
बीच गगन टिमटिमाता दीपक।
जाने कब से दिख रहा।

असह्य वेदना परिपूर्ण भावना।
जब – जब निकले।
सुहाग छोटा ज्वार बृहद दिखता।
भाव – भक्ति में खोलें।

चरण जमी मन मंगल गगन उड़े।
तो वह जीवन बोले।
मानव मन की बस यही कहानी।
लड़ कर जो ले ले।

आंगन में आने वाले अंधियारे।
दिव्य प्रकाश ले रहा किनारे।
मंगलमय मंगल मनोहर गीत।
सुमधुर सुंदर प्रकृति सहारे।

आजकल लोगों को क्या हो गया है।
आख्यान से आंसू का मर गया है।
आकांक्षा इच्छाएं अनवरत बढ़ती गई।
आबरू उतार तार साहित्य में उतर गई।

दिल में जब जब चिराग जलता है।
देवासी समाज तब बनता है।
हाउस अली उमंग नेक काम करते हैं।
अपने और पराए का ख्याल रखते हैं।

मेरे गांव आते ही वह पाषाण हो गया।
मुखड़े बारिश के ठहराव आ गया।
मकान मन मंगल ऐसा बनाए जनाब।
छप्पर में पहले से ही रिसावर आ गया।

हंस कर अपना दिन काटिए जनाब।
सुख मंगल की तरह।
मिल गया हो दिल का कोई साथी।
गर समंदर की तरह।

जब – जब देखा एक गगन नारंग का।
जाने जीवन क्यों मगन था।
यूं तो कुछ कलियां निकली अधखुली।
मुरझाई पर अद्भुत सघन थीं।

अपने मीत गीत हम गुनगुनाते रहे।
सदा आपको हम याद आते रहें।
लोग इतनी करें काम मिलकर सभी।
गीत सुंदर सदा मिलकर गाते रहें।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – बहुत सारे उदाहरणों के माध्यम से कवि कहते है की कैसी भी विपरीत परिस्थिति क्यों न हो जीवन में कभी भी दुखी होकर बैठ न जाना। कोई भी दुःख लंबे वक्त के लिए नहीं ठहर सकता आपके जीवन में, इसलिए सदैव ही मुस्कुराते रहे। धैर्य से कार्य करते हुए आगे बढ़ते रहे जीवन में।

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कागद पे आखर आओ अंकित करें।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ कागद पे आखर आओ अंकित करें। ♦

दुस्साहस करने वालों की खोज खबर लें।
कोरे कागद पे आखर आओ अंकित करें।

•••

स्कन्द पुराण में उल्लिखित है श्री राम जन्म स्थान।
कितनी दूरी है और कहाँ अमुक स्थान।

जिला जज ने दिया फैसला वर्ष था अट्ठारह सौ छियासी।
हिंदुओं को पूजा करने की मिली इजाजत विधि सम्मत अविनाशी।

जन्म स्थान राम चबूतरा मुस्लिम पक्ष ने किया स्वीकार।
जब उन्होने कर लिया खूब गहन विचार।

जिलानी ने कहा उन्नीस सौ उनचास से पहले पूजा का नहीं है सबूत।
जस्टिस बोबरे ने पूछा वहाँ नमाज का कब रहा वजूद।

बाबर विध्वंसक था उसे न्याय संगत कैसे मानें।
मस्जिद खाली स्थान पर बनी, इसे कैसे जानें।

सिया वक्फ बोर्ड ने, नहीं दी कोई चुनौती।
सुन्नी वक्फ बोर्ड से विवाद हो गई एकलौती।

ब्रिटिस काल में था मिला पूजा करने का अधिकार।
सन उन्नीस सौ उनचास में, जैन के अनुसार।

जैन ने कहा हवाई अड्डे पर नमाज हो तो वहाँ कब्जा होगा।
विवादित स्थल पर नमाज के लिए जाना कब अच्छा होगा।

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष का आया यही बयान।
उसने मान लिया ‘राम चबूतरा ही है राम जन्म स्थान’।

सबकी दलील सुनकर सर्वोच्च न्यायालय ने दिया अपना निर्णय।
कि ‘राम जन्म भूमि वही है यह बात है तय’।

पाँच एकड़ अलग जमीन मुस्लिमों को सरकार दे।
और सरकार से वह जमीन मुस्लिम पक्ष पा ले।

इस तरह हुआ पाँच सौ साल के विवाद का समापन।
क्योंकि एक मत से पांचों जजों ने बनाया अपना मन।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – “श्री राम जन्म भूमि” विवाद में समय – समय पर होने वाले विवाद और उतार चढ़ाव, उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के सुप्रीम फैसले को क्रमबद्ध तरीके से कम शब्दों में कविता के रूप में पिरोकर सब कुछ समझाया है। इस कविता के माध्यम से आने वाली पीढ़िया “श्री राम जन्म भूमि” विवाद और सुप्रीम कोर्ट के सुप्रीम फैसले को समझ पाएंगे।

—————

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

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इतिहास को जीना होगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ इतिहास को जीना होगा। ♦

हमें इतिहास को फिर-फिर से जीना होगा।
तस्वीर बजरंग लॉकअप में ही सीना होगा।
आदिकालीन इतिहास पर फोकस करना होगा।
उन घटनाओं के विषय में धारणा पहचानना होगा।

यूं तो इतिहास को दो अर्थों में जाना जाता है।
कुछ लोगों द्वारा इसे कथानक रूप में माना जाता है।
एक को आदिकालीन इतिहास के रूप में पहचाना जाता है।
दूसरा उन घटनाओं के विषय में धारणाएं जानी जाती है।

ज्यादातर लोग इसे श्रुति स्मृति से आना – माना है।
जिस राजा – राज्य में कवि निर्धन है राजा अयोग्य कहाता है।
विद्वान और कवि निर्धनता के बावजूद समाज में पूजा जाता है।
ऐसी विद्वानों के अपमान की बात सोचना निरर्थक कहलाता है।

सच्चे सेनानियों को दुनिया से श्रद्धांजलि दिया जाता है।
काल काेठरी में भ्रष्टाचारियों को सर्वत्र धकेला जाता है।
समसामयिकी इतिहास रचने के लिए मेहनत करनी होती है।
आदिकालीन इतिहास का संरक्षण और संवर्धन करना होता है।

बेसिक शिक्षा का स्तर ऊंचा करने के लिए आगे चलना होता है।
जूता मोजा बस्ता पोशाक बच्चों को पहन चलना पड़ता है।
सभी बच्चे स्कूल जाएं सरकार को योजना करनी पड़ती है।
अभिभावक के खाते में आवश्यकता पूर्ति में रुपया देना होता है।

घूम रहे उठा जासूस एप, पर शक्ति करनी होती है।
बच्चों पर पड़े ना बुरा प्रभाव, ऐप बंद करना होता है।
पुलिस के चाल चेहरा और चरित्र को भी समझना होता है।
अनुभवहीन अधिकारियों को बदल ना होता है।

देश की योजना को कड़ाई से पालन करवाना पड़ता है।
जन औषधि केंद्र पर, केंद्रों पर भी निगरानी रखनी होती है।
हमें प्राचीन इतिहास को अपने फिर-फिर जीना होता है।
समय के साथ भारतीयता का इतिहास लिखना होता है।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – हम सभी को अपने इतिहास को फिर से जीना होगा, अपने वीरों को याद कर अपने उमंग उत्साह को कायम रखना होगा। आजकल के बच्चे जो अपने इतिहास से दूर होते जा रहे है उन्हें भी अपने इतिहास से सभी माता-पिता को अवगत कराना चाहिए। आदिकालीन इतिहास का संरक्षण और संवर्धन करना होगा, तभी आने वाली पीढ़ी को प्राचीन इतिहास से प्रैक्टिकली जोड़ पाएंगे।

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यह कविता (इतिहास को जीना होगा।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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कोरोना जाई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कोरोना जाई। ♦

बरसों से दुनिया में कोरोना है आइल।
जीवन में लोगों के साथ आग लगाइस।
करोड़ों दुनिया में हो गई धराशाई।
दूर देश से जाने कब कोरोना आइस।

रोटी और रोजगार को आफत लाई।
शहर से भाग रहे नगर को लोग भाई।
भूखे प्यासे दौड़ रहे हैं भाई और माई।
गांव शहर दे रहा है इसकी ही गवाही।

गांव-गांव में कलह मचल शासन काटे मलाई।
चुनाव प्रचार के चक्कर में निरीह मर रहा भाई।
घर भूजल भांग नहीं है, दारू की मची लड़ाई।
कैसा जहर कोरोना है, दुनियां में आइल।

श्री राम के प्रकट होने तक कोरोना न जाई ?
धनुष बाण के अनुसंधान पर त्राहिमाम उहै चिल्लाई।
बरसो समय मिला फिर भी कोरोना वापस गइल।
कोविसील के लगते ही वायरस होगा धराशाई?

प्रभु राम के अनुसंधान से दुष्ट बेदर होगा आसाई।
शास्त्री यही कहते हैं मानव सत्य धर्म करे भाई।
यज्ञ हवन पूजा पाठ कृमि नाशक है व करिश्माई।
कोरोना वायरस जाने क्यों भारत में है आइल।

यहां तुलसी नीम और पीपल जैसे वृक्ष हैं सुखदाई।
शिव – शंकर की जटा में उतरी मां गंगा है माई।
अमृत तत्व लेकर सूखेन वैद्य आएंगे धरा पर भाई ?
अनुसंधान से निकली कोविसील से ही होगी भलाई।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – कैसे कोरोना आया और एक ही झटके में रोटी और रोजगार को ख़त्म कर दिया। क्या गांव, क्या शहर कोरोना ने हर जगह कोहराम मचा रखा है। कोरोना से सभी वर्ग को नुकसान ही हुआ है। देखो अब वैक्सीन से राहत मिलता है या प्रभु श्री राम के आने (मंदिर निर्माण) पर राहत मिलेगा।

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भाऊजी खड़ा हो जा परधानी।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ भाऊजी खड़ा हो जा परधानी। ♦

अबकी सीट भईल महिला बा खड़ा हो जा परधानी।
नारी देश की आजादी दिलाने में बनी थीं दीवानी।

भारी भरकम रकम मिली पगार भी होगा शानी।
सौचालय का जलवा दिखाते करिहा ना मनमानी।

आगे पीछे कुछ लोग बुढ़ापे में भी होंगे दानी।
प्रदूषण नियंत्रण खातिर पेड़-पौधों मिलेंगे दानी।

अपने घर के आस पास उसको लगाया मनमानी।
चौंका विछावे के मिली रुपया बाट खाया रानी।

अबकी सीट भईल महिला की भौजी उठा पराधानी।
गांव में दारू पीने वाले मिल जैहै जानी पहचानी।

गली मोहल्ला दारू बेचवाकर उगाही होगी मनमानी।
सुपर मिली एक गांव में उस पर रखिहा निगरानी।

अपने घर को सजा के राखिहा भाड़ जाय परेशानी।
आधा पैसा कमा लिहा छोड़ दिहा ओका मनमानी।

राशन बांटे के जब आई हो जैहा तब सयानी।
कोटे दारों पर अंकुश लगाया उसमें भी मनमानी।

स्कूल में मिड डे मील खाने से निकली खर्चा खुरानी।
जितनी सुविधा मुहैया होगी उतनी करबू मनमानी।

पहले ही तू सोचत रहलू चुनाव कब परधानी?
पेपर पढ़ कर लिया खबर आई गइल बा सनसनी।

भौजी अबकी सीट भईल महिला की, का बा परेशानी।
उठा खड़ा हो जा, हाली होली में रंग चढ़ी जवानी।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – “महिला सीट परधानी हो गयल बा” भौजी खड़ा हो जा परधानी। क्या-क्या करना चाहिए और क्या-क्या नहीं, लेकिन न करिया तू मनमानी, परधानी पर अच्छी सीख़ देने वाली कविता लिखी हैं। प्रधानी के समय होने वाले उथल पुथल को भी समझाया है।

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यह कविता (भाऊजी खड़ा हो जा परधानी।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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सूरत दिल में जगह बनाई।

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♦ सूरत दिल में जगह बनाई। ♦

तेरी सूरत मेरे दिल में आई।
दिल कहता तू दिल में समाई।
झलक से मेरा दिल बहला ई।
काया उमंगी तो होती दिखाई।

अफसोस उफ करने की तनिक न दी दिखाई।
प्यारी चितवन और नशीली आंखें लेकर आई।
आंखों – आंखों से जब उसने अपने मिलाई।
जीवन जीने का अंदाज, साथ लेकर आई।

बेचैनी में दिन – रात हमने जब तलक बिताई।
खूबसूरत ख्वाब देखने झील में लेकर आई।
तेरी सूरत दिल के मेरे जब से दरवाजा खट-खटाई।
जीवन जीने का मजा होलिया तब से मेरे भाई।

मेरी आंख से आंख तूने अपनी है लड़ाई।
लगी दाग दिल में कभी भी मिट नहीं पाई।
आंखों में आंखें डाल कर जानम क्यों नहीं आई।
उम्मीदों की फायदे जाने क्यों दुख में गंवाईं।

प्यारी चितवन नशीली आंखों में समुद्र दिखाईं।
वादों की सुखद समुंदर में जाकर गोते लगाई।
मेरा दिल कहता है तू दिल में उतर है आई।
तेरी सूरत खूबसूरत मेरे दिल में आकर समाई।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – प्यार के दौरान मन के अंदर चलने वाले उथल – पुथल को “सूरत, चीत्त, दिल, व आँख से आँख मिलाना” का उदाहरण देकर बहुत ही सटीक वर्णन किया हैं।

—•—•—•—

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