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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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sushila devi poems

भीमराव अंबेडकर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भीमराव अंबेडकर। ♦

गूंज उठा आर्यव्रत का जन जन,
उनके पद चिन्हों पर बढा कदम।
अंबेडकर का हम करें स्मरण,
बाबा भीमराव जी को करें नमन।

जिसने किया रांची में था अनशन,
मराठों जैसे लगने वाले थे एकदम।
भाव भरा था हिंदू का उनके तन मन,
हम हिंदुस्तानी हैं करें उन्हें नमन।

रमा और सविता ने निभाया साथ,
अंबेडकर ने किया दो था व्याह।
75 बरसो में हम सब पढ़ लिए पाठ,
छुआछूत पर हुआ कुठाराघात।

दारू वाला क्यों नहीं पीता उनकी बात,
जिससे होने वाला देश का उद्धार।
एक पीढी तक ही चाहते थे आरक्षण,
दूसरी बार सभी हो जाएंगे सवर्ण?

वेद उपनिषद हिंदुत्व का हिस्सा माना,
मनुस्मृति में उलझ कर बौद्ध के बाना।
प्रजातंत्र में बौद्ध की ले ली सौगात,
भीमराव का साथ दिए साहू महाराज।

उच्च शिक्षा ग्रहण करने साहू भेजे,
महाराज कोल्हापुर के से सम्राट।
गरीबों को ऊपर उठाना सरकारी काम,
मोदी और योगी ने दिया अन्न दान।

कांग्रेसी, गांधी दियो अछूत को हरिजन नाम,
विरोध में उतरे भीमराव अंबेडकर नंगे पांव।
कांग्रेस उन्हें रक्षा कमेटी में सलाहकार बनाया,
फिर भी अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया।

सुदेश कानून व्यवस्था के बनाए गए प्रथम मंत्री,
कानून का पालन कराने के लिए उतरे मानों संत्री।
कानून बनाने के उद्देश्य पर राजेंद्र बाबू का साथ,
भीमराव अंबेडकर ने भी अपने स्तर से किया प्रयास।

हम सभी हिंदुस्तानी हैं करें उन्हें हमेशा याद,
गूंज उठा है आर्यावर्त में कानून का राज।
मध्य प्रदेश की धरती पर कीचड़ से खिला गुलाब,
पूरा देश बाबा अंबेडकर को कह रहा सावास।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए साहू जी महाराज कोल्हापुर के सम्राट ने विदेश भेजे। गरीबों को ऊपर उठाना सरकारी काम, मोदी और योगी ने दिया अन्न दान। सत्ता के लोभ में नेताओं ने जात पात की रूढ़ भावना को अभी तक खींचते आ रहे है। जिस कारण अमीर और अमीर व गरीब और गरीब होता चला जा रहा हैं। इस जातिगत आरक्षण के कारण एकता और भाईचारा ख़त्म हो गया हैं। संविधान में तो इस भेद भाव को मिटाने की बात की गई है। जबकि संविधान में आरक्षण का प्रावधान मात्र 10 साल तक प्रभावी रखने के निर्देश संविधान निर्माताओं ने दिए थे। लेखक का मानना है कि संसार में मात्र दो ही जातियां हैं, एक स्त्री और दूसरी पुरुष। जो प्रकृति ने सृष्टि संचालन के उद्देश्य से अपना सहयोग करने के लिए बनाई है। बाकी सब मानव मस्तिष्क की खुराफत है।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (भीमराव अंबेडकर।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बर्बाद बाबा का सपना कर दिया।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बर्बाद बाबा का सपना कर दिया। ♦

बर्बाद बाबा का सपना कर दिया,
कुछ खुदगर्ज मिजाजी लोगों ने।
आरक्षण का रबड़ कुछ यूं खेंचा,
कि भूले समता सत्ता के भोगों में।

जात पात का जो जहर था भारत में,
उसको और भी ज्यादा बढ़ावा दिया।
अमीर तो अमीर ही बनता गया बस,
दलित होने का महज दिखावा किया।

आरक्षण तो बाबा ने भारत की विधि में,
सिर्फ समता के खातिर ही अपनाया था।
आजादी के अगले दशक में बाबा जी ने,
इसे हटाने का विकल्प भी सुलझाया था।

सत्ता सागर में नहाने वालों ने ही तो इसे,
स्वार्थ हेतु दशक दर दशक बढ़ाया था।
नुकसान हुआ असली पिछड़े दलित को,
जिसको हर लाभ से वंचित करवाया था।

उच्च दलित की पीढ़ियां तो उठती ही गई,
निम्न दलित निरन्तर त्यों ही पीसता रहा।
आर्थिक विषमता की लौ में भूनता भारत,
जाति धर्म के झगड़ों में एडियां घिसता रहा।

कन्याकुमारी से ले कर काश्मीर तलक,
समूचे भारत में जाति धर्म का नाम न हो।
मानव धर्म का पालन करे राष्ट्र की जनता,
ऊंच नीच से ग्रसित शेष कोई भी ग्राम न हो।

शायद यही था सपना बाबा भीम का, पर,
उनके सपनों पर उड़ेली सियासी मिट्टी है।
रह गया दफन सपना संविधान में शायद,
जो कानूनों की किताब बाबा ने लिखी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — सत्ता के लोभ में नेताओं ने जात पात की रूढ़ भावना को अभी तक खींचते आ रहे है। जिस कारण अमीर और अमीर व गरीब और गरीब होता चला जा रहा हैं। इस जातिगत आरक्षण के कारण एकता और भाईचारा ख़त्म हो गया हैं। संविधान में तो इस भेद भाव को मिटाने की बात की गई है। जबकि संविधान में आरक्षण का प्रावधान मात्र 10 साल तक प्रभावी रखने के निर्देश संविधान निर्माताओं ने दिए थे। लेखक का मानना है कि संसार में मात्र दो ही जातियां हैं, एक स्त्री और दूसरी पुरुष। जो प्रकृति ने सृष्टि संचालन के उद्देश्य से अपना सहयोग करने के लिए बनाई है। बाकी सब मानव मस्तिष्क की खुराफत है।

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यह कविता (बर्बाद बाबा का सपना कर दिया।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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बाबा साहेब को नमन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बाबा साहेब को नमन। ♦

बाबा साहेब को नमन जो सविंधान निर्माता कहलाये।
अप्रैल 14 को भारत रत्न भीमराव की अम्बेडकर जयंती मनाये॥

एक ऐसे समाज में कोहिनूर हीरा चमका।
जिसके तेज से फिर पूरा देश ही दमका॥

शिक्षा की एक सच्ची राह दिखाई जिसने।
सबमें मानव-धर्म की अलख जगाई उसने॥

दिव्य आकाश का जो चमकता सितारा बना।
बस ऐसा ही डॉ भीमराव शिक्षा का प्यारा बना॥

जिन्होंने अपने ह्रदय में केवल एक ही बात ठानी।
शिक्षा को सर्वोपरि मान सुप्त जन-चेतना जगानी॥

उम्रभर किताबों को ही रखा सच्चा दोस्त बनाये।
दिखा दिया दुनिया को शिक्षा में ही सर्वगुण समाये॥

शिक्षा-ज्ञान ही मानवता के सब गुण भर जाए।
भेदभाव के अवगुण का तिमिर हर ले जाये॥

धन्य थे इनके मात-पिता जो शिक्षा को माने वरदान।
सिखलाया जिन्होंने पढ़-लिख कर बनो देश की शान॥

शिक्षित बन संगठित रहकर करो संघर्ष यही उनका प्रिय ये नारा।
शिक्षा से ही देश-विदेश में पूजनीय भीमराव प्यारा॥

शिक्षा के इस आलौकिक मन्त्र से अपने दिलों को जगमगाये।
कोटिशः वन्दन से श्रद्धा-पुष्प अर्पित कर आज ये दिवस मनाये॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आन्दोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। बाबासाहब आम्बेडकर जी ने शिक्षा को ही सदैव सर्वोपरि माना और शिक्षा के दम पर सब कुछ करके दिखाया।

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यह कविता (बाबा साहेब को नमन।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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नवरात्रि की पावन बेला आई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नवरात्रि की पावन बेला आई। ♦

बधाई हो! बधाई हो!

मंगल गीत गाओं, शुभ मंगल घड़ी आई।
सुख बरसाने नवरात्रि की पावन बेला आई॥

भक्तों, चैत्र माह में प्रतिपदा से सब माँ की पावन जोत जगा लो।
जगजननी माँ से फिर तुम मुहमांगी मुरादें पा लो॥

खूब तेरे नाम की मस्ती में हम झूमेंगे।
तेरी पावन चरण-रज को ही हम चूमेंगे॥

माँ, तेरा ये पावन पर्व सबकी झोली भर जायेगा।
इस जग के सारे संकटों को हर जायेगा॥

माँ, बस तेरे ही नाम की प्रेम – धुन हमें लगी रहें।
दिन – रात भक्तों के दिल में ये नवरात्रि सजी रहें॥

माँ तेरे सच्चे दरबार से सबकों हार्दिक बधाई।
तेरे आगमन से ही नववर्ष की बेला आई॥

कुमकुम के पगों से, हर भक्त के घर तू आएगी।
आओ माँ, तेरे आगमन का हर शह मंगल – गीत गायेगी॥

मंगल – गान से अम्बे माँ तेरा आगमन होगा।
तेरे वरहस्त से जीवन का सुंदर चमन होगा॥

माँ, तेरे जैसा अनुपम, अद्वितीय सौंदर्य और कहाँ।
तेरे रूप की ज्योति से होता है रोशन ये जहां॥

हे अष्ट भुजा दात्री, तेरी अनेक कलाएं इन हस्तों में रची।
तेरे हार श्रृंगार से ही ये दुनिया आज अनुपम सजी॥

तेरी लाल चुनरी लाल चोला सदैव ही करता कमाल दाती।
तू इस रूप में जब देने पर आती, दे जाती बेमिसाल तू दाती॥

सिंहासन पर विराजमान जो आज अनोखा रूप तेरा।
हे विश्व विनोदिनी माँ! सारा ब्रह्माण्ड झुकें तुझकों कोटिशः वन्दन मेरा॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नवरात्र के प्रथम दिन छोटी देवकाली मंदिर में मां भगवती की आराधना और पूजन की जाती है। मां भगवती के आशीर्वाद से ही सभी मनोकामना पूर्ण होती है। पहले दिन छोटी देवकाली मंदिर में माता के शैलपुत्री स्वरूप का दर्शन किया जाता है। माता के 9 रूपों को देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र देकर महिषासुर को वध करने का निवेदन किया। शस्त्र धारण करके माता शक्ति संपन्न हो गई। कहते हैं कि नौ रूपों को प्रकट करने का क्रम चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चला। इसीलिए इन 9 दिनों को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। हे विश्व विनोदिनी माँ! सारा ब्रह्माण्ड झुकें तुझकों कोटिशः वन्दन मेरा।

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यह कविता (नवरात्रि की पावन बेला आई।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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सबको बाँटो नववर्ष की बधाई।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सबको बाँटो नववर्ष की बधाई। ♦

आई जो नूतन वर्ष की ये पावन बेला।
समय बना जाए बस सबका अलबेला।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

आज कितनी शुभघड़ी है ये आई।
सब ओर फैलेगी अब तो बस रोशनाई।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

सतयुग में इसी दिन से सृष्टि का हुआ आगाज।
पावन ग्रंथ खोलते है इसका राज।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

हिन्दू नववर्ष चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा को आये।
सनातन धर्म सदैव अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाये।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

वैष्णों के आगमन पर नवरात्रि की धूम मचेगी।
धरा भी माँ से मिलने दुल्हन सी सजेगी।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

सब नए बही-खातों का आज होगा शुभारम्भ।
विवाह, समारोह के दिनों का भी होगा आरंभ।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

प्रकृति भी कहती रंगीन फूलों से भरकर हाथ अपने।
हे सर्वस्व तू पूरे करना इंसानों के सुंदर सपने।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

हे सर्वशक्तिमान, तू ही सब जगह विध्यमान।
इस धरा को दे जाना खुशियों का वरदान।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

अपनी भारतीय संस्कृति में लीन होकर गुनगुनाये।
नवपीढ़ी को इस नूतन वर्ष का गुण बताये।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

हे मेरे आराध्य!
सुन लेना अबकी बार भी ये करुण पुकार।
बरसा देना बस अपनी ममता का प्यार।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

नववर्ष में बरसे तेरी कृपा का इतना नूर।
अन्न, धन, जल के भंडार करना भरपूर।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

घर मे पाँच घी के दिये जलाकर तेरा स्वागत करेगें हम।
नववर्ष तू खुशियाँ बरसाते आना छम-छम।
सबको बाँटो नववर्ष की बधाई॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — Hindu Calendar Vikram Samvat 2079, 2 अप्रैल, शनिवार से चैत्र नवरात्रि शुरू होने जा रहे हैं और इसी के साथ नया हिंदू वर्ष नवसंवत्सर 2079 भी आरंभ हो जाएगा। हर वर्ष चैत्र प्रतिपदा शुक्ल पक्ष को हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है। चैत्र का महीना हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है। इसका प्रारंभ सम्राट विक्रमादित्य ने किया था, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरु होता है। इस बार 02 अप्रैल को हिंदू नववर्ष 2079 या विक्रम संवत 2079 का प्रारंभ होगा। हिंदू नववर्ष को विक्रम संवत, नव संवत्सर, गुड़ी पड़वा, उगाड़ी आदि नामों से भी जाना जाता है। विक्रम संवत के प्रथम दिन से ही बसंत नवरात्रि का प्रारंभ होता है, जो चैत्र नवरात्रि के नाम से लो​कप्रिय है।

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यह कविता (सबको बाँटो नववर्ष की बधाई।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

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हर्षाती कविता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हर्षाती कविता। ♦

विश्व कविता दिवस पर।

कविता तो होता जीवन का एक प्रवाह है।
होता जिसमें हर भाव ही बस वाह है॥

कविता दिल की एक सच्ची अनुभूति है।
कवि के हृदय से निकली हुई कृति है॥

न तो होती उसमें कोई भी बनावट है।
होती बस दिल के उदगारों की सजावट है॥

केवल शब्दों को लयबद्ध करना ही नही काफी है।
सार्थक अर्थ के बिना तो शब्दों के संग नाइंसाफी है॥

गहरे अर्थ लिए हुए शब्दों का इक आईना है।
जिसमें अति सुंदर होता हर शब्द का मायना है॥

प्रेम का गहरा समुद्र है, दरिया इश्क का भी।
करुणा, जज्बात का अहसास, मरहम होता अश्क का भी॥

इंसान जब इसमें खो जाए हर शह में ही कविता गुनगुनाए।
फिर जज्बातों की कलम से ह्रदय पर भाव अंकित करता जाए॥

थाम कर कलम अपने लफ्ज़ो में किसी बात को कहना चाहे।
सच मानो दोस्तों स्वतः ही तैयार हो जाये लेखन की राहें॥

फिर हर किसी का दुख, सुख अपना लगता है।
लेखन उस मुकाम पर पहुँचा दे जो सपना लगता है॥

सभी कवियों के ह्रदय का करते हैं हम अभिनन्दन।
चेहरों पर खुशी लाने वाली हर कलम को मेरा वन्दन॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता दिल की एक सच्ची अनुभूति है, जो एक कवि के हृदय की गहराई से निकली हुई कृति है। भाव स्वरूप कविता तो होता है जीवन का एक प्रवाह, जो सदैव ही प्रेरित करता है कार्यशील होने के लिए। हृदय की गहराई से निकली हुई कृति में न तो होती उसमें कोई भी बनावट, होती बस दिल के उदगारों की सजावट है। याद रखें – केवल शब्दों को लयबद्ध करना ही नही काफी होता है, सार्थक अर्थ के बिना तो शब्दों के संग नाइंसाफी होता है। गहरे अर्थ लिए हुए शब्दों का इक आईना होती है कविता, जिसमें अति सुंदर भाव के साथ-साथ होता हर शब्द का मायना है। ये कविता प्रेम का गहरा समुद्र है, दरिया इश्क का भी, जिसमें करुणा, जज्बात का अहसास, मरहम होता अश्क का भी। कहते है इंसान जब भी इसमें खो जाए तो हर शह में ही कविता गुनगुनाए, फिर जज्बातों की कलम से सदैव ही ह्रदय पर भाव अंकित करता जाए।

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यह कविता (हर्षाती कविता। – विश्व कविता दिवस पर।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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तुझें बजानी होगी डमरू की मधुर तान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तुझें बजानी होगी डमरू की मधुर तान। ♦

भोलेबाबा आ गया तेरे पूजन का पावन त्यौहार।
तू सुन कर ही जाना भक्तों की करुण पुकार॥

तेरे जयकारे को सुनने को कितने हम तरसे।
अब तो तेरी मधुर डमरू की धुन ही बरसे॥

हेभोलेनाथ! गंगा-माँ जो समाई है जटाओं में तेरी।
बरसा दे पावन जल इसका हो जाये सुविचारों की फेरी॥

तेरा त्रिशूल करें त्रिदोष पापों का नाश समूल।
हे भोलेबाबा सब माफ कर जाना हमारी भूल॥

हे जटाधारी तेरा भोलापन सब भक्तों को ही भाए।
विषपान कर तू इस ब्रह्मांड को अमृत बरसाए॥

सुमधुर नृत्य होता जब डमरू-संग तेरा।
ब्रह्मांड में होता तब नवजीवन का सवेरा॥

बहुत तरसे भक्तों के नयन भोले अब दर्शन दो।
शिवलिंग पर दूध-जल अभिषेक से तू प्रसन्न हो॥

भक्ति से खुश होकर तू सबके दुख लेता हर।
सुर-असुर सबको ही तू प्रसन्न हो दे जाए वर॥

बसंत ऋतु में तेरा आगमन दिल को हर्षाये।
तेरे स्वागत में प्रकृति भी पुष्पों को बरसाए॥

दिलों के श्रद्धा-सुमन स्वीकार कर धरा को पावन कर जाना।
डमरू की मधुर तान पर प्रसन्नता बरसाने वाला नृत्य करते आना॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भगवान शिव के करोड़ों भक्त महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिवजी की चार पहर की पूजा-अर्चना करते हैं, महादेव उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है। इस दिन भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को सच्चे मन से दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना चाहिए। जो भी भक्त सच्चे मन से इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना व ध्यान करता है उसकी सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। महाशिवरात्रि मतलब पावन रात्रि वह रात्रि जिसमे अपने सम्पूर्ण विकारों को जलाकर भष्म कर भगवान शिवजी से सर्व सद्गति प्राप्त करने की रात्रि। आओ हम सब मिलकर सच्चे मन से महापर्व महाशिवरात्रि को मनाए।

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यह कविता (तुझें बजानी होगी डमरू की मधुर तान।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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आओं! गले मिल आते हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आओं! गले मिल आते हैं। ♦

आओं! आज हम सब रिश्तों के गले मिल कर आते हैं।
जो रिश्ते रूठ गए उनको अपने भाव अर्पण कर जाते हैं॥

भारतीय संस्कृति ने ही तो विश्व में अपना डंका बजाया।
फिर इसके गुणों को ही हमने क्यूँ इस कदर भुलाया॥

हर खुशी-गम को गले लग कर लेते थे बाँट।
फिर मिल-बैठ हर समस्या को हँस कर देते थे काट॥

अपने बच्चों को संस्कारों के गले मिलाकर ले आयें।
तब सच में ही हम अपनी संस्कृति को अपनायें॥

रिश्तों को गले लगाना ही सब गिले-शिकवे को देता मात।
सुख भरे सवेरे में तब तब्दील हो जाती हर दुख की रात॥

संयम, सब्र, संतोष को आलिंगन बद्ध करते हैं।
स्वयं की झोली ही आज खुशियों से भरते हैं॥

अपनी प्रीत केवल श्रीकृष्ण-सुदामा जैसी बना पायें हम।
सच्ची दोस्ती को ही इस कदर गले लगा मिटाए जीवन के तम॥

बस निस्वार्थ भाव से अपने गुणों की खुशबू हम फैलायें।
आओं! आज हम सब मानवता के गुणों को गले लगाए॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — गले मिलना अपनत्व का अहसास दिलाकर सुकून महसूस करवाता है दिलों दिमाग तक। गले मिलना भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही चला आ रहा है, जो आज मॉडर्न ज़माने में Hug Day के नाम से जाना जाता है। आखिरकार हमारी ही प्राचीन संस्कृति को नए नाम से हमे परोसा जा रहा है, क्योकि हम अपने प्राचीन संस्कृति और संस्कार को भूलते जा रहे है, और पश्चिमी सभ्यता वाले इसी का फायदा उठा रहे है। हमें हमारी ही प्राचीन संस्कृति को नए नाम से हमे सीखाने की कोशिश कर रहे है। इसी तरह की बहुत सारी प्राचीन भारतीय संस्कृति है जो हम छोड़ने की गलती कर रहे है और इसी का फायदा सदैव से ही पश्चिमी सभ्यता वाले उठा रहे है। अब भी समय है संभल जाओ और अपने प्राचीन भारतीय संस्कृति, सभ्यता व संस्कार का पूर्ण तन, मन से पालन करों। वर्ना पश्चिमी सभ्यता द्वारा हम पर हमारी ही प्राचीन संस्कृति, संस्कार को नए नाम के साथ थोपा जायेगा अपना अविष्कार बताकर।

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यह कविता (आओं! गले मिल आते हैं।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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सूर्य देव! आओ तुम्हारा स्वागत है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सूर्य देव! आओ तुम्हारा स्वागत है। ♦

हाथ जोड़ नमस्कार कर तेरा स्वागत करते है हम।
हे देव! तेरे दर्शनों के बिना सब आँखें हो गयी थी नम॥

हे सूर्य देव! लगभग एक महीने में दर्शन दिए हैं तुमने।
अपनी प्रकाश भरी किरणों से सराबोर किये तुमने॥

नमन तुझकों बारम्बार तुम्हारी बहुत बाट निहारी हमने।
दर्शन देकर ठंड से ठिठुरती हर जिंदगी सँवारी तुमने॥

इस बर्फीले मौसम में हर इंसान का खून भी जम सा गया था।
जरूरी कार्यों को करने का दौर भी थम सा गया था॥

तेरी रोशनी बिखराती किरणों ने उजियारा भर दिया।
जन-जन के दिलों के अंदर ऊर्जा का संचार कर दिया॥

छंट गया अब सब अंधकार धुंध, कोहरे, बरसात का।
ये सब चमत्कार है तेरे आने की करामात का॥

पचहत्तर करोड़ लोगों ने भी तुझें एक साथ नमस्कार किया।
नमन को स्वीकार कर तूनें अपनी रहमत को बरसा ही दिया॥

जो गुहार लगाई थी हर दिल ने तेरे आने की।
धन्य किया तुमने कृपा की जो धूप बरसाने की॥

हे सूर्य देव! हर अंधेरे को हरने वाली तेरी प्रकाशित किरणों को कोटिशः नमन मेरा।
अपने दर्शन देकर कर दिया तूनें हर घर – आँगन सुखों का सवेरा॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आधा से ज्यादा भारत में सर्द मौसम का कहर और उसके ऊपर बारिश का कहर और तो और सूर्य देव का यूँ लुकाछुपी, अचानक से मौसम में सर्द-गर्म होने की वजह से लोगों में ठिठुरन के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सर्दी – जुकाम, बुखार का होना। सर्दी से ठिठुरन के कारण जरूरी कार्यों को भी समय से न कर पाना। इस तरह की और भी बहुत सारी समस्याएं थी, लेकिन अभी “तेरी रोशनी बिखराती किरणों ने उजियारा भर दिया। जन-जन के दिलों के अंदर ऊर्जा का संचार कर दिया। छंट गया अब सब अंधकार धुंध, कोहरे, बरसात का। ये सब चमत्कार है तेरे आने की करामात का।” पचहत्तर करोड़ लोगों ने भी तुझें एक साथ नमस्कार किया। नमन को स्वीकार कर तूनें अपनी रहमत को बरसा ही दिया।

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यह कविता (सूर्य देव! आओ तुम्हारा स्वागत है।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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राष्ट्रीय पराक्रम दिवस।

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♦ राष्ट्रीय पराक्रम दिवस। ♦

नेता जी को राष्ट्रीय पराक्रम दिवस का पहनाए ताज।
इनके हौंसले, वीरता भरे जज्बातों को शीश झुकाए आज॥

स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता कहलायें सुभाष चन्द्र बोस।
जो भी नारा दिया बना बाद में वहीं आजादी का विजय-घोष॥

विरासत में मिला इनको दमन चक्र के विरोध का जज़्बा।
इनके पिता जी ने भी ठुकराया था रायबहादुर के पद का रुतबा॥

अंग्रेजों से आजादी दिलाने चले राष्ट्र-प्रेम का संकल्प लेकर।
सेना में जोश भरते आजादी के नए-नए नारों का विकल्प देकर॥

राष्ट्रसेवा के पथ से विचलित न होना कभी दिया पिता ने मूलमंत्र।
समभाव, निडरता से एकता के सूत्र में बांधा जनतंत्र॥

सच्चाई, कर्तव्य, बलिदान देकर ही देश के प्रति बने वफादार।
नेताजी की प्यारी बातों को समाहित कर दिखलाए सच्चा राष्ट्र-प्यार॥

उनके विचारों में तो संघर्ष भरा जीवन ही संग अपने समाधान लायें।
संघर्षहीन व कायरता युक्त जीवन तो स्वादहीन कहलायें॥

सुभाषचंद्र जी ने तो लेखन से भी भारतीयों को शब्द-क्रांति सिखलाई।
इनकी पुस्तक भारत का संघर्ष फिर लंदन से प्रकाशित हो आई॥

“तुम मुझें खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” ये प्रसिद्ध उनका था नारा।
ऐसे वीर देशभक्त को सदैव नमन करेगा राष्ट्र हमारा॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कड़वा है मगर सत्य है ऐसे महापुरुष सदी में एक दो ही जन्म लेते है… इस कविता के माध्यम से नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के पराक्रम, कर्तव्य व देश प्रेम को बताने की कोशिश की है। इनके साहस, हौंसले, वीरता भरे जज्बातों को शीश झुकाए आज भी हम सभी। हमे गर्व है अपने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के पराक्रम पर, जिनके नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम व आजादी का विजय-घोष हुआ। विरासत में मिला इनको दमन चक्र के विरोध का जज़्बा, इनके पिता जी ने भी ठुकराया था रायबहादुर के पद का रुतबा। अंग्रेजों से आजादी दिलाने के लिए चले राष्ट्र-प्रेम का संकल्प लेकर, सेना में सदैव जोश भरते आजादी के नए-नए नारों का विकल्प देकर। राष्ट्रसेवा के पथ से विचलित न होना कभी दिया पिता ने मूलमंत्र, समभाव, निडरता से एकता के सूत्र में बांधा जनतंत्र को। “तुम मुझें खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” ये प्रसिद्ध उनका था नारा। ऐसे वीर देशभक्त को सदैव ही नमन करेगा राष्ट्र हमारा।

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यह कविता (राष्ट्रीय पराक्रम दिवस।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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