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sushila devi

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद।

Kmsraj51 की कलम से…..

Novel Samrat Munshi Premchand | उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद।

हिंदी और उर्दू के महानतम,
भारतीय लेखकों में, जिसने,
हिंदी साहित्य का प्रकाश फैलाया।
नमन मुंशी प्रेमचंद जी को,
जिनका नाम इस लेखनी में,
उच्च शिखर पर आया।

लेखनी में अपनी जिसने,
एक आम आदमी के,
हर वर्ग के दुखों को समेटा।
हर दृष्टि से पारिवारिक, सामाजिक,
राजनैतिक पहलुओं को साहित्य में लपेटा।

लेखक प्रेमचंद अपनी कथाओं,
कहानियों में खुद ही पात्र बनाए।
तभी आज भी वो अपनी कथा,
कहानियों में जीवंत नजर आए।

दलित, किसानों, गरीबों का,
लेखक मसीहा बनकर आए।
कल्पना नहीं कोई, सीधे ही,
दिल की भावनाओं से जुड़ जाये।

साहित्य में मुंशी प्रेमचंद ने,
हिंदी और उर्दू की पताका है लहराई।
लोकनाट्य व नौटंकी को दोबारा,
स्थापित करने में अहम भूमिका है निभाई।

वो तो आधुनिक हिंदी,
कहानी के पितामह कहलाये।
अपनी लेखनी से, उपन्यास सम्राट,
की उपाधि से सज आये।

साहित्य के मील का पत्थर भी,
महान सम्राट प्रेमचंद जी कहलाये।
उनको शत-शत नमन करके,
आओं, हम उनके साहित्य मील का,
एक सूक्ष्म कंकड़ ही बन जाये।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — प्रेमचंद का जन्म वाराणसी के निकट, लमही नाम के गांव में 31 जुलाई, 1880 को हुआ था। प्रेमचंद के पिताजी मुंशी अजायब लाल और माता आनन्दी देवी थी। मुंशी प्रेमचंद जी का मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। इन्होंने अपने प्रिय मित्र मुंशी दयानारायण निगम के सुझाव पर अपना नाम धनपतराय की जगह प्रेमचंद रखा और इसी नाम से कहानियों और उपन्यासों के रूप में अपने विचारों और भावों को अभिव्यक्ति दी। उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी, दो बैलों की कथा आदि तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। उनमें से अधिकांश हिन्दी तथा उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हुईं। प्रेमचंद को मुंशी प्रेमचंद के नाम से जाना जाता है जो कि एक सचेत नागरिक, संवेदनशील लेखक और सकुशल प्रवक्ता थे।

—————

यह कविता (उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: munshi premchand, munshi premchand ki kahani par kavita, munshi premchand par poem, Novel Samrat Munshi Premchand, Smt. Sushila Devi poems, sushila devi, sushila devi poems, उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद - सुशीला देवी, कवयित्री सुशीला देवी की कविताएं, सुशीला देवी, सुशीला देवी की कविताएं

हे भोले सुनो पुकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hey Bhole Suno Pukaar | हे भोले सुनो पुकार।

तेरा सावन का महीना जैसे ही आया।
मेघों ने खूब जम के जल बरसाया॥

तेरे भक्त चले शिवलिंग का जल लाने।
तुझे हर्षित कर तेरे आशीष को पाने॥

माना की बंधी है गंगा जटाओं में तेरी।
पर काल ने न जाने कैसी माला है फेरी॥

चहुँ ओर हो रहा है सब कुछ जल मगन।
केवल सताए एक जीवन जीने की लगन॥

लगे ऐसा जैसे तुमने जटाओं को हो खोला।
जैसे भक्ति को कलयुग में शायद हो तोला॥

सावन में पानी ने इस कदर नहीं की थी मनमानी।
जुबां कहे न आंखों के आंसू, कहे दर्द की जुबानी॥

हे भोले भंडारी!
समा लो अपनी जटाओं में इस पानी की लीला को।
माफ कर देना इंसान के गुनाहों के हर गिला को॥

पानी के तांडव को रोक लो कोई जीवन राग गाकर।
डमरू की तान पर मोहक अपना नृत्य दिखाकर॥

अभिषेक तो तेरे शिवलिंग पर प्रकृति ने सर्वप्रथम किया।
सावन आते ही जो इतना जल, जो धरा पर बरसा दिया॥

हे महादेव!
उसी जलाभिषेक को स्वीकार सुंदर सावन दे दो माह।
खुशी में बदल जाए पानी से त्रस्त दिलों की आह॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सावन के महीने को भगवान शिव की भक्ति का भी महीना कहते हैं। यह ग्रीष्म ऋतु के बाद आता है और लोगों को गर्मी के कहर से राहत देता है। सावन के महीने में बहुत बरसात होती है जिससे मौसम सुहावना हो जाता है। सावन माह में भोले के भक्ति में डूबकर, शिवलिंग पर “जल अभिषेक” करना बड़े ही पुण्य का कर्म है। मौसम सुहावना हो तो लोग ऐसे ही वक्त पर अपने परिवार के साथ बाहर घूमते हैं और सावन के खुशनुमा मौसम का आनंद लेते हैं।

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यह कविता (हे भोले सुनो पुकार।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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वो माँ ही तो है।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vo Maa Hi Toh Hai | वो माँ ही तो है।

लाती जो अपने सन्तान की होठों पर मुस्कान है।
माँ की ममता में मुस्कराता ये जहान है।
वो माँ ही तो है॥

खुद गीले में सोकर बच्चें को सूखा देती बिछोना।
जिसको कभी पसंद न आये अपने बच्चों का रोना।
वो माँ ही तो है॥

संतान की खातिर टकरा जाए जो भगवान से।
सुखों का कोहिनूर ढूंढ लाये हीरों की खान से।
वो माँ ही तो है॥

जिसके आंचल का साया पाना चाहे भगवान भी।
जिसकी गोद में खेलने का रखे अरमान भी।
वो माँ ही तो है॥

जिसके त्याग, तप से ब्रह्मांड भी गुंजायमान है।
जिसकी ममता के आगे तो झुकता भी भगवान है।
वो माँ ही तो है॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माँ से ही इस संसार का अस्तित्व है। माँ को धन्यवाद देने और आदर के लिये हर साल 5 मई को मातृ दिवस के रुप में मनाया जाता है। माँ वह है जो हमें जन्म देती है, यहीं कारण है कि संसार में हर जीवनदायनी वस्तु को माँ की संज्ञा दी गयी है। यदि हमारे जीवन के शुरुआती समय में कोई हमारे सुख-दुख में हमारा सदैव ही ध्यान रखती है तो वो माँ ही तो है। मां हमारा पालन-पोषण करके हमें सक्षम बनाती है, हमारे शरीर को बल देती है जिससे हम अपने भविष्य को संवारने की क्षमता प्राप्त करते हैं। जब कभी हम उदास और हतास होते हैं तो मां ब्रह्मांड की उस ऊर्जा की तरह काम करती है जो प्रत्यक्ष रूप से हमारे अंदर आकर बस तो नहीं सकती पर हमें ऊर्जावान अवश्य बना देती है। भगवान से भी बढ़कर। माँ वह शक्ति है जिसके गर्भ से स्वयं भगवान भी जन्म लेकर माँ की गोद में खेलना चाहते है। इस संसार में अगर आपसे कोई निस्वार्थ प्रेम करता है तो वो माँ ही तो है। हर बच्चे को सच्चे तन मन से अपने माता – पिता का सदैव आदर, सम्मान व सेवा करनी चाहिए इस धरा पर माता – पिता ही भगवान है इस बात को भूल ना जाए आप सभी। जय माता दी!

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यह कविता (वो माँ ही तो है।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Maa Status in Hindi, sushila devi, sushila devi poems, माँ पर कविता इन हिंदी, माँ पर कविता और शायरी, माँ पर कुछ पंक्तियाँ, माँ पर कुछ लाइन्स, मां पर बेस्ट कविता, वो माँ ही तो है, वो माँ ही तो है - सुशीला देवी, सुशीला देवी, सुशीला देवी की कविताएं

वो त्रिवेणी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vo Trivenee | वो त्रिवेणी।

हाल ही में मैंने एक त्रिवेणी का देखा संगम,
जिनके अथाह प्रेम को देख आँखें गई थम।

एक विशालकाय नीम की जड़ की कोटर में,
जैसे आश्रय लिया दो साथियों ने उनके घर में।

मैंने इस सुंदर नजारे को देखा जब पास से,
पीपल के घने पत्ते लहराये थे बड़े होने की आस में।

मेरी भी खुशी का जब कोई ठिकाना न रहा,
जब मैंने पीपल के नीचे बरगद भी देखा वहां।

इस त्रिवेणी को देख प्रफुल्लित हुआ मेरा दिल,
सोचा कैसे पेड़ों ने भी बनाया खुद को एक दूसरे के काबिल।

एक नीम के तने में दोनो वटवृक्षों ने ले ली पनाह,
प्रकृति का अनुपम नजारा देख मुँह से निकला वाह।

इस संगम को देख दिल ने सजदे में सिर झुकाया,
इन त्रिवेणी के इस मेल पर खूब प्यार आया।

हर वर्ष इस बसंती माह में खूब त्रिवेणी लगाएंगे हम,
फिर इस धरा पर प्राण-वायु बिल्कुल न होगी कम।

काश! इंसान भी इस बोलती प्रकृति के गुण सीख जाए,
अपने गुणों को बस मानवता की भलाई में लगाए।

प्रकृति तो पग-पग पर ही अच्छी सीख सिखलाये,
बशर्ते इंसान भी इनसे प्रेम का रिश्ता ही निभाए।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जब प्रकृति खुशनुमा होती है तो इंसानी मन भी प्रसन्न होती है। अपने चारों तरफ सबकुछ अच्छा – अच्छा लगता है। प्रकृति की हरियाली हर एक मन को मोह लेता है और एक अलग ही सुखमय शांति की अनुभूति कराता है प्रकृति। एक विशालकाय नीम की जड़ की कोटर में, जैसे आश्रय लिया दो साथियों ने उनके घर में। मैंने इस सुंदर नजारे को देखा जब पास से, पीपल के घने पत्ते लहराये थे बड़े होने की आस में। इस त्रिवेणी को देख प्रफुल्लित हुआ मेरा दिल, सोचा कैसे पेड़ों ने भी बनाया खुद को एक दूसरे के काबिल। एक नीम के तने में दोनो वटवृक्षों ने ले ली पनाह, प्रकृति का अनुपम नजारा देख मुँह से निकला वाह।

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यह कविता (वो त्रिवेणी।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बरखा तेरा बरसना।

Kmsraj51 की कलम से…..

Barakha Tera Barsana | बरखा तेरा बरसना।

कभी धूप, कभी उमस भरे मौसम को सहना,
ऐसे में बारिश का आना, वाह! क्या कहना।

रात भर से काला आसमां जी भरकर रोता रहा ,
धरती ने इसके इन विरह के आंसुओं को सहा।

बयान करना चाह रहे ये आंसू अपनी खुशी को,
वनस्पति धुलकर लहलहा कर दर्शाती हंसी को।

कभी बारिश धीमी~धीमी तो कभी तेज होती,
किसी को चैन की नींद तो कोई आंख रात-भर रोती।

खैर, भोर होते~होते मौसम साफ हो गया,
धरती~आसमां का कहा~सुना माफ हो गया।

बादलों की गड़गड़ाहट रातभर डराती रही,
कुछ आंखें इनकी आवाज सुन कराहती रही।

किसी को तो रात भर खुशी नही इनके बरसने की,
कुछ दुख सजा देता ऐसे मौसम में भी तरसने की।

सुबह का मौसम धुला~धुला सा प्रतीत हुआ,
आसमां ने खुश होकर जमीं को प्रेम से छुआ।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — वर्षा ऋतु में कड़कड़ाती और चिलचिलाती धूप से निजात मिलता है। धरती पर पानी के मुख्य स्रोत जैसे नदियाँ, तालाब, झरने और कुँवों में वर्षा ऋतु के होने से पानी भर जाता है जिससे वातावरण में ठंडी हवाएँ चलने लगती है। वर्षा ऋतु के सुहाने मौसम के आने से गर्मी से इंसानों, जानवरों, जीव-जंतुओं एवं पेड़-पौधे सभी को राहत मिलती है। कड़कड़ाती गर्मी के बाद जून और जुलाई के महीने में वर्षा ऋतु का आगमन होता है और लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलती है। वर्षा ऋतु एक बहुत ही सुहाना ऋतु है। वर्षा ऋतु आते ही लोगों में खासकर के किसानों में खुशियों का संचार हो जाता है। वर्षा ऋतु सिर्फ गर्मी से ही राहत नहीं देता है बल्कि यह खेती के लिए वरदान है।

—————

यह कविता (बरखा तेरा बरसना।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
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  • Teacher’s Icon Award — 2023
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  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
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  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
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  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
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  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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हाल सुनाता परिभाषा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Haal Sunata Paribhasha | हाल सुनाता परिभाषा।

तुमको अपनी व्यथा सुनाता हूं आज,
बगैर मेरे समाज के पूर्ण होवे न कोई काज।

व्यथा सुनाने के लिए जरूरी नही कोई शब्द, न ही भाषा की,
देखो मेरा हाल बखान करता मेरी परिभाषा ही।

मेरे बच्चों की मुस्कान दिल को नित्य उत्साह से भरती,
उनकी खुशी को ढूंढने को जिंदगी हरसंभव प्रयास करती।

मेरे फटेहाल कपड़े और काली हुई त्वचा धूप से,
मेरे बच्चों की मुस्कान का मेल न मेरे रूप से।

हर दिन मालिकों की डांट में भी सदा मुस्कराता,
अपने जख्मों को हर समय मरहम लगाता।

न धूप की, बारिश की और तूफान की परवाह,
गरीबी की हर ओर बस दिखाई देती आह।

बस अपने कर्म में दिल लगाए मैं तो मजदूर हूँ,
बस परिवार के भरण पोषण में चूर हूँ।

मैं बेबस नहीं, मजबूर नहीं हूँ लाचार,
हमने ही तो लगाए सब ऐशो-आराम के तार।

समय मिले तो कभी….

कभी मेरी अंतर्मन की पीड़ा भी झांक कर देखना तुम,
कभी किसी कामगार पर स्वार्थ की रोटी न सेकना तुम।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मजदूर कहते हैं मैं आराम करने लगूं तो गजब हो जाएगा। मेरे लिए आराम हराम है। मैं खेतों से अन्न उपजाने का काम करता हूं। मैं आराम करने लगूं तो लाखों लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हो जाएंगे। मजदूर कहते हैं — मैं मजदूर हूं। मैंने प्राचीन काल से लेकर आज तक सभ्यता की सीढ़ियां मैंने गढ़ी है। जमाना बदला लेकिन मैंने ज़मीन पर पीठ तक नहीं टिकाई। मैंने नदियों के बहाव को रोका है और उन पर विशाल पूलों का निर्माण किया है। मैंने बड़ी-बड़ी इमारतों को बनाया है । इन लंबी लंबी सड़कों को किसने बनाया? कश्मीर की क्यारियों में केसर किसने उगाई ? खेतों में फसलें किसने पैदा की ? मैंने ! केवल मजदूर ने। दिन सोता था। रात सोती थी, लेकिन मजदूर जगता था। मजदूर ने पहाड़ों को कांटा, चट्टानों को खोदा, खदानों में पहुंचा और वहां से सोना, चांदी लोहा, कोयला, हीरा सब कुछ निकाला। मजदूर कहता है… मैंने वनों को काटा, पथरीली जमीन को खोद-खोद कर नरम बनाया। मुझे अंग्रेज भारत से मारीशस, फीजी आदि अफ्रीकी घने जंगलों में ले गए। वहां सूर्योदय से सूर्यास्त तक काम किया।

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यह कविता (हाल सुनाता परिभाषा।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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परिंदों की प्यास बुझाए।

Kmsraj51 की कलम से…..

Parindon Ki Pyas Bujhae | परिंदों की प्यास बुझाए।

हम तो है सरकारी स्कूल के प्यारे बच्चें,
जुबां से बहुत भोले, दिल के है सच्चे।

शिक्षा के संग पर्यावरण का भी रखते ध्यान,
इन बेजुबान पक्षियों की प्यास का रखे मान।

न जाने कितने परिंदे प्यास से तड़प कर मरते,
आओं सब मिलकर परिंडों में पानी रखते।

समय – समय पर जब इनका रखें हम ख्याल,
तभी इनका मधुर कलरव हमको करता निहाल।

इन पक्षियों की आवाजों ने तो मधुर स्वर-संसार सजाया,
इनके गुणों पर ही हम सबको तो प्यार आया।

तर हो जाये गला जब इन पक्षियों का पानी पीकर,
अच्छा लगे इनको भी हम इंसानों संग जीकर।

दिल में यही एक बात हमने भी ठानी है,
गर्मी आते ही पक्षियों के लिए रखना पानी है।

शिक्षा संग इन गुणों को भी हम अपनाएंगे,
नेक कर्मों से सबके दिलों में ये प्रेम जगायेंगे।

परिंडों = मिटटी वाला पानी का पात्र

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — गर्मियों में कई परिंदों व पशुओं की मौत पानी की कमी के कारण हो जाती है। लोगों का थोड़ा सा प्रयास घरों के आस पास उड़ने वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी बचा सकता है। सुबह आंखें खुलने के साथ ही घरों के आस-पास गौरेया, मैना व अन्य पक्षियों की चहक सभी के मन को मोह लेती है। एक बात याद रखें – प्रकृति के पांचो तत्वों पर इन बेजुबान परिंदों का भी पूरा हक़ हैं, तो इनके लिए गर्मियों में जगह – जगह पेड़ों पर, घर के छत पर व पार्क वगैरह में जरूर स्वच्छ पानी रखें।

—————

यह कविता (परिंदों की प्यास बुझाए।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
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  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
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  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
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  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हनुमान जन्मोत्सव।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hanuman Janmotsav | हनुमान जन्मोत्सव।

प्रकट दिवस हनुमान जी का आया आज।
श्रीराम का बन भक्त सबके सँवारे काज॥

माँ वैष्णों का तो ये तो है राज दुलारा।
सिंह वाहिनी का ले लाल झंडा चले ये पुत्र प्यारा॥

चैत्र माह की पूर्णिमा का दिन शुभ हो आया।
पावन दिन हनुमान जन्म के संजोग समाया॥

सेवक न होय कोई इस बजरंग बली जैसे।
उर में समाए जो भगवान को ऐसे॥

इनकी सेवक भक्ति ही जग को राह दिखाए।
हनुमान चालीसा हर बला को दूर भगाए॥

अपने प्रभु की सहज कही हर बात को गले लगाया।
हर असम्भव को संभव कर दिखलाया॥

हे पवनपुत्र हनुमान तेरी भक्ति, शक्ति को नमन हमारा।
जग की नकारात्मकता को दूर कर फैला दो उजियारा॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — देश भर में आज, 6 अप्रैल 2023 को हनुमान जयंती मनाई जा रही है। श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी ज्ञान, बुद्धि, विद्या और बल का प्रतीक माने जाते हैं। दरअसल जयंती और जन्मोत्सव का अर्थ भले ही जन्मदिन से होता है। लेकिन जयंती का प्रयोग ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है, जो संसार में जीवित नहीं है और किसी विशेष तिथि में उसका जन्मदिन है। लेकिन जब बात हो भगवान हनुमान की तो इन्हें कलयुग संसार का जीवित या जागृत देवता माना गया है। हनुमान आठ चिरंजीवी में से एक हैं।

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यह कविता (हनुमान जन्मोत्सव।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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आखिर हँसी लौट ही आई!

Kmsraj51 की कलम से…..

Aakhir Hansi Laut Hee Aai | आखिर हँसी लौट ही आई!

हर समय चेहरे पर मुस्कान लिए वो सभी को खुशी बांटती फिरती।
पर ये क्या? आज उसकी हँसी पर किसने ग्रहण लगाया?

वो काम तो सब कर रही थी पर उसकी आवाज़ की खनक कुछ ऐसे गायब थी जैसे किसी ने पायल से घुंघरुओं की छम-छम छीन ली हो। घर में किसी सदस्य से भी उसकी अनबन हुई क्या? पर नही ऐसा नही लगता क्योंकि सभी सदस्यों के सामने तो वो प्यार व अपनेपन से पेश आ रही थी। लेकिन उसकी निगाहें हर वक्त किसी चीज को तलाश करती नज़र आ रही थी।जब देखो तभी वो अपने काम को निबटा कर ऐसे कुछ ढूंढती नजर आती जैसे कोई बहुत ही कीमती चीज उसकी आँखों से ओझल हो गयी हो, पर समझ नही आ रहा था क्या…..?

अब उसका हर रोज का काम हो गया था कि समय मिलते ही कभी अलमारी, कभी बेड, कभी दराज में तो कभी ड्रैसिंग को खोलकर सारा सामान बार-बार करीने से सजा रही थी। पता नही ? ऐसा क्या कीमती सामान खो गया? जो उसकी होठों की हँसी ले गया और उसकी आँखों की चमक भी।

दिन पर दिन बीते जा रहे थे और ऐसा लग रहा था कि उसकी आशा भी उसे हर बार निराशा का ही जवाब दे रही थी। अब उसकी शारीरिक हालत में बुखार ने भी सोने पर सुहागा कर दिया था। एक बात और परिवार का कोई भी सदस्य उसको कुछ नही कह रहा था बस हँसी में इतनी बात जरूर कह देते याद करो कहाँ पर रखा था? तुमने उस वस्तु को। और इस प्रकार की बात भी उसके सीने में तीर की तरह लगती…… वह सोचने पर विवश हो जाती कि अब उसकी याददाश्त (स्मरण-शक्ति) धीरे-धीरे मध्यम हो गयी क्या? और हो भी क्यूँ ना, सबकी जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने खुद को काम की रेल जो बनाया था!

पर उसको तो पता था कि उम्मीद पर दुनिया कायम है, इसलिए हर रोज वो घर के मंदिर में दिल की खुशी के लिए नतमस्तक होती। कई दिनों के बाद एक बार फिर उसने आशा का दामन थामे अपनी अर्जी अपने इष्टदेव को लगा ही दी। पर अब उसको लगाए हुए भी तीन दिन बीत ही गए थे। घर में तो सब सामान्य व्यवहार था क्योंकि वो तो अपना हर फर्ज लग्न से निभा रही थी।

चौथे दिन इसी उधेड़बुन में उसने फिर एक बार अपनी अलमारी को टटोलना शुरू किया तब सामान को इधर-उधर करते हुए अचानक ही उसकी आवाज़ से घर में वो खुशी की खनक पैदा हुई जो कितने दिनों से खो गयी थी, क्योंकि उसको वो अपने सोने के कंगनों का बॉक्स मिल चुका था, जिसने उसकी रात की नींद और दिन का चैन गायब कर दिया था। वो खुशी का बॉक्स जिसे अलमारी ने चुपके से अपने कोने में छिपाकर उसका हरपल इम्तिहान लिया था और ऐसा लग रहा था जैसे आज उसने ही उसको पास कर दिया हो।

कितने कीमती होते हैं एक औरत के लिए उसके आभूषण बिल्कुल उसके गुणों की ही तरह। आज वो अपने परिवार के सदस्यों के साथ इतनी ही प्रसन्नता का अनुभव कर रही थी जितना कि उन आभूषणों के घर आने पर थी।

उसकी आध्यात्मिकता ने एकदम से उसका सिर भगवान के सजदे में झुका दिया। ऐसा लग रहा था जैसे आँखों में वही चमक लिए उसकी आवाज की खनक से घर का हर कोना-कोना खुशी से भर गया हो।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लघुकथा के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — क्योंकि उसको वो अपने सोने के कंगनों का बॉक्स मिल चुका था, जिसने उसकी रात की नींद और दिन का चैन गायब कर दिया था। कितने कीमती होते हैं एक औरत के लिए उसके आभूषण बिल्कुल उसके गुणों की ही तरह। आज वो अपने परिवार के सदस्यों के साथ इतनी ही प्रसन्नता का अनुभव कर रही थी जितना कि उन आभूषणों के घर आने पर थी। उसकी आध्यात्मिकता ने एकदम से उसका सिर भगवान के सजदे में झुका दिया। ऐसा लग रहा था जैसे आँखों में वही चमक लिए उसकी आवाज की खनक से घर का हर कोना-कोना खुशी से भर गया हो।

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यह लघुकथा (आखिर हँसी लौट ही आई!) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लघुकथा सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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प्रकृति के रंग।

Kmsraj51 की कलम से…..

Prakriti Ke Rang | प्रकृति के रंग।

फिर से वही मौसम आया,
जिसने प्रकृति को खुशनुमा बनाया।

सतरंगी रंगों की छटा बिखेरी है इस कदर,
जिसे देख नई नवेली दुल्हन भी शर्माए।

कहीं पर खेतों में गेहूं की दुधिया बाली,
पवन संग इठलाती झूम~झूम जाए।

कहीं पर दिखाई दे पत्तों से ज्यादा फूल,
अपनी खुशबू की बाहें फैलाए।

आम के पेड़ तो हरे~हरे बौर से,
धरती को गले मिलने आए।

कोयल भी अब तैयार होकर,
मस्त कुहू ~कुहू के स्वर सुनाए।

चिड़िया भी भोर होने से पहले ही,
ची~ची करती मधुर सुर सजाए।

जिधर देखो उधर ही इस बसंत ने,
अपने खूबसूरत पांव है फैलाए।

हर पेड़ की डाली पर नई कोपलें,
पेड़ से निकल दुनिया देखना चाहे।

धरा भी वही आसमां भी वही है,
प्रकृति भी बसंत में अपना रूप दिखाए।

इस प्रकृति में छिपे हैं वो रंग हजार,
जिसे अपनाकर इंसान हर पल मुस्कराए।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — वसंत ऋतु फूलों और त्योहारों का मौसम है, इस प्रकार यह बहुत सी खुशियाँ और आनंद लाता है। रंग-बिरंगे और सुन्दर फूल पूरी तरह से दिल जीत लेते हैं और हरी घास हमें टहलने के लिए अच्छा मैदान देती है। सुबह या शाम को सुन्दर तितलियाँ प्रायः हमारे ध्यान को खिंचती है। दिन और रात दोनों ही बहुत सुहावने और ठंडे होते हैं। ऐसा लगता है आम के पेड़ तो हरे~हरे बौर से, धरती को गले मिलने आए। कोयल भी अब तैयार होकर, मस्त कुहू ~कुहू के स्वर सुनाए।चिड़िया भी भोर होने से पहले ही, ची~ची करती मधुर सुर सजाए। जैसे पेड़ों पर पतझड़ आता है उसी तरह इंसान के जीवन में भी बहुत उतार – चढ़ाव आता है, अगर दुःख है तो, बहुत जल्द ही सुखी समय भी आएगा।

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यह कविता (प्रकृति के रंग।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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