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हिंदी कविता

इक प्रयास।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ इक प्रयास। ♦

इक प्रयास। / पार्ट – 2

इक प्रयास (एक प्रयास)।

छैल छबीली जिसके बाँहों में, सफेद झूठ उसके बोल,
कुछ क्षण का साथ है, और कुछ क्षण का मेल।

गहराई थी अतल की, वितल था दो मील,
बादल उसे पी गया, देखती रह गई झील।

जन्मों-जन्म प्यासी रही, घट-घट पिलाया नीर,
‘परिमल’ ऐसा दान तो, नदिया दे तो क्षीर।

बंदूकों के नोक पर, मचाये कौन शोर,
गली-गली में पहरेदार हैं, घर को लूटे घर के चोर।

बागों में आई नहीं, बहारों की बयार रास,
उपवन में बस गई, फूल-पंखुड़ियों की बास।

सीमा को छू न पाया, दानवीरों का दान,
भूखों को ले गया घर, इक नंगा-भूखा इंसान।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (इक प्रयास। / पार्ट – 2) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बिखरे पत्तों सी जिन्दगी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बिखरे पत्तों सी जिन्दगी। ♦

ये जिंदगी ताश के बिखरे पत्तों जैसी,
खेल की तरह ही जीतती हारती है वैसी।

कभी बादशाह जैसी अपनी हुकूमत दिखाती,
कभी रानी बन सुंदरता का आईना दर्शाती।

कभी जोकर बन सभी को हंसाए, रुलाए,
आंखों में आंसू, होठों पर कभी मुस्कान लाए।

बावन पत्तों सा रिश्तों का बना संसार,
एक भी गुम हो जाए तो जीवन लगे निराधार।

सभी भावनाऐं इस कदर इन पत्तों में समाई,
कभी ईंट, कभी हुकुम का इक्का ले आई।

कभी पान के पत्ते सी, कभी चिड़ी जैसे पंख लगाए,
भावनाएं ले ऐसी, ये जिंदगी सरसाये।

जो रंगीन पत्तों की बात करें, उल्टे या सीधे एक समान,
बावन के ढेर में छुपे जो, रंगीन ताश दिखाए रंगीन जहान।

अलग-अलग करीने से लगाने पर, ये खेल में खूब रंग लगाए,
इसमें ही खोने पर, ताश के पत्तों जैसी जिंदगी बिखर जाए।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जिंदगी के उतार-चढ़ाव उस दिमागी खेल की तरह हैं जिसमें कभी हार होती है तो कभी जीत। यदि हम खेल को कुशलतापूर्वक और ध्यान से खेलते हैं तो विजय मिलती है और ध्यान चूकने पर हार का सामना करना पड़ता है। जिंदगी में परेशानियों व विपत्तियों का आगमन व्यक्ति को हताश कर देता है और उसके जीवन में अंधकार भर देता है। लेकिन मानव जीवन का यही वो समय होता है जब उसे पूर्ण धैर्य से कार्य करना चाहिए और शांत मन से उचित निर्णय लेकर आगे बढ़ना चाहिए। मानव जीवन में परेशानियों व विपत्तियों का आगमन मनुष्य को मानसिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए आते है।

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यह कविता (बिखरे पत्तों सी जिन्दगी।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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इक प्रयास।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ इक प्रयास। ♦

इक प्रयास। / पार्ट – 1

इक प्रयास (एक प्रयास)।

हममें है सृजनकार भी, हुए कहीं-कहीं लाचार,
बोलना तो आसान है, खामोश रहना दुश्वार।

‘परिमल’ चंड शीत का, खुश्क है इसका इतिहास,
अपगा मेरे आगार की, कलकल करती हर मास।

प्यारे-प्यारे लोग हैं, प्यारा-प्यारा सा संग,
चंपई जैसा रंग है, पंखुड़ियों जैसा अंग।

दाता की देन है, ये उसका नहीं जवाब,
पवन जैसी नींद है, झंझा जैसे ख्वाब।

जब महका उसका तन, आया अनजाना ख़याल,
नागिन जैसी चाल में, बजते हैं कई सुर-ताल।

सावन की बरसात है, रिमझिम सा अहसान,
सतरंगी को मिल गई, इंद्रधनुषी सी मुस्कान।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (इक प्रयास। / पार्ट – 1) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जंगलों की बात।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जंगलों की बात। ♦

आंधी तूफानों के गहन थपेड़ों में,
हमने झेली सदा से हर पीड़ा है।
हिले डुले और टूटे कभी बिखरे,
उठाया जीव संरक्षण का बीड़ा है।

हम धरती के वंशज धरती से उपजे,
कहां किसने हमको खुद से उपजाया है?
जीये सदा से अम्बर पिता की छत के नीचे,
पालती पोषती सदा से हमे हमारी जाया है।

न जाने क्यों नर नृशंस ने संघारा फिर हमको?
हमने आखिर उसका कब और क्या खाया है?
उल्टा उसने ही है हमको हमेशा लूटा खसोटा,
फल, छाया, सांसें ली लकड़ी से घर बनाया है।

अंधा मानुष नासमझी में जाने अनजाने ही,
क्यों मारता खुद के ही पांव में कुल्हाड़ी है?
अपने ही प्राणदाता को जो नर मारे काटे,
वह मंद बुद्धि है, न के कोई बड़ा खिलाड़ी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हम पेड़ों ने आंधी तूफानों के गहन थपेड़ों में, हमने झेली सदा से हर पीड़ा है। हिले डुले और टूटे कभी बिखरे भी उठाया जीव संरक्षण का बीड़ा है। वनों में विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे, जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियाँ आदि होते हैं। उनमें से कई औषधीय मूल्य प्रदान करते हैं। हमें वनों से विभिन्न प्रकार के लकड़ी के उत्पाद भी प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, वे वायु में प्रदूषकों को हटाने में भी सहायक होते हैं, इस प्रकार वायु प्रदूषण को कम करने में वन अहम भूमिका निभाते हैं। फिर भी आज का मानव विकास के नाम पर वनों को सम्पूर्ण रूप से ख़त्म करता जा रहा है, आखिर कब समझेगा ये मानव की पेड़ों का हमारे जीवन व श्वास से गहरा तार जुड़ा है। आओ हम सब मिलकर ये संकल्प ले की प्रत्येक वर्ष एक बड़े पेड़ को जरूर लगाएंगे और उसका रख रखाव तब तक करेंगे जब तक वह अपना खुराक जमीं से खुद न लेने लगे।

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यह कविता (जंगलों की बात।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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लोहड़ी के त्यौहार उद्देश्य।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ लोहड़ी के त्यौहार उद्देश्य। ♦

सामान्तः त्यौहार प्रकृति में होने वाले परिवर्तन के साथ-साथ मनाये जाते हैं। जैसे लोहड़ी में कहा जाता हैं कि इस दिन वर्ष की सबसे लम्बी अंतिम रात होती हैं इसके अगले दिन से धीरे-धीरे दिन बढ़ने लगता है। लोहड़ी से आठ दिन पहले और आठ दिन बाद तक अत्यधिक ठंड रहती है जिन्हें स्थानीय बोली में मकर भी बोलते हैं साथ ही इस समय किसानों के लिए भी उल्लास का समय माना जाता हैं। खेतों में अनाज लहलहाने लगते हैं और मौसम सुहाना सा लगता हैं, जिसे मिल जुलकर परिवार एवम दोस्तों के साथ मनाया जाता हैं। इस तरह आपसी भाईचारा व एकता बढ़ाना भी इस त्यौहार का उद्देश्य हैं।

नामकरण: इस पावन पर्व का नाम लोई के नाम से पड़ा है और यह नाम महान संत कबीर दास की पत्नी जी का था। यह त्यौहार नए साल की शुरुआत में और सर्दियों के अंत में मनाया जाता है। इस त्यौहार के जरिए सिख समुदाय नए साल का स्वागत करते हैं और पंजाब में इसी कारण इसे और भी उत्साह पूर्ण तरीके से मनाया जाता है।

लोहड़ी का त्यौहार कब मनाया जाता हैं: लोहड़ी पौष माह की अंतिम रात से मकर संक्राति की सुबह तक मनाया जाता हैं। यह पर्व प्रति वर्ष मनाया जाता हैं। इस साल 2023 में यह त्यौहार 13 जनवरी कि रात व 14 जनवरी की सुबह को मनाया जायेगा। प्रत्येक त्यौहार भारत वर्ष की शान हैं। प्रत्येक प्रान्त के अपने कुछ विशेष त्यौहार हैं। इन में से लोहड़ी भी प्रमुख हैं। लोहड़ी पंजाब प्रान्त के मुख्य त्यौहारों में से एक हैं जिन्हें पंजाबी बड़े जोरो शोरो से मनाते हैं। लोहड़ी की धूम कई दिनों पहले से ही शुरू हो जाती हैं। देश के हर हिस्से में अलग-अलग त्यौहार मनाए जाते हैं जैसे मध्य भारत में मकर संक्रांति, दक्षिण भारत में पोंगल का त्यौहार एवम काईट फेस्टिवल भी देश के कई हिस्सों में मनाया जाता हैं। मुख्यतः यह सभी त्यौहार परिवार जनों के साथ मिल जुलकर मनाये जाते हैं, जो आपसी बैर को खत्म करते हैं।

लोहड़ी के त्यौहार की पौराणिक कथा: पुराणों के आधार पर इसे सती के त्याग के रूप में प्रतिवर्ष याद करके मनाया जाता हैं। कथानुसार जब प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति महादेव शिव का तिरस्कार किया था और अपने जामाता को यज्ञ में शामिल न करने से उनकी पुत्री ने अपने आपको को अग्नि में समर्पित कर दिया था। उसी दिन को एक पश्चाताप के रूप में प्रति वर्ष लोहड़ी पर्व मनाया जाता हैं और इसी कारण घर की विवाहित बेटी को इस दिन तोहफे दिये जाते हैं और भोजन पर आमंत्रित कर उसका मान सम्मान किया जाता हैं। इसी ख़ुशी में श्रृंगार का सामान सभी विवाहित महिलाओ को बाँटा जाता हैं।

लोहड़ी के पीछे एक ऐतिहासिक कथा: इस कथा का इतिहास दुल्ला भट्टी के नाम से जाना जाता हैं। यह कथा अकबर के शासनकाल की हैं उन दिनों दुल्ला भट्टी पंजाब प्रान्त का सरदार था, इसे पंजाब का नायक कहा जाता था। उन दिनों संदलबार नामक एक जगह थी, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा हैं। वहाँ लड़कियों की बाजारी होती थी। तब दुल्ला भट्टी ने इस का विरोध किया और लड़कियों को सम्मानपूर्वक इस दुष्कर्म से बचाया और उनकी शादी करवाकर उन्हें सम्मानित जीवन दिया। इस विजय के दिन को लोहड़ी के गीतों में गाया जाता हैं और दुल्ला भट्टी को याद किया जाता हैं। इन्ही पौराणिक एवम ऐतिहासिक कारणों के चलते पंजाब प्रान्त में लोहड़ी का उत्सव उल्लास के साथ मनाया जाता हैं।

लोहड़ी बहन बेटियों का त्यौहार: इस दिन बड़े प्रेम से घर से बिदा हुई बहन और बेटियों को घर बुलाया जाता हैं और उनका आदर सत्कार किया जाता हैं। पुराणिक कथा के अनुसार इसे दक्ष की गलती के प्रयाश्चित के तौर पर मनाया जाता हैं और बहन बेटियों का सत्कार कर गलती की क्षमा मांगी जाती हैं। इस दिन नव विवाहित जोड़े को भी पहली लोहड़ी की बधाई दी जाती हैं और शिशु के जन्म पर भी पहली लोहड़ी के तोहफे दिए जाते हैं।

लोहड़ी के साथ मनाते हैं नव वर्ष: किसान इन दिनों बहुत उत्साह से अपनी फसल घर लाते हैं और उत्सव मनाते हैं। लोहड़ी को पंजाब प्रान्त में किसान नव वर्ष के रूप में मनाते हैं। यह पर्व पंजाबी और हरियाणवी लोग ज्यादा मनाते हैं और यही इस दिन को नव वर्ष के रूप में भी मनाते हैं।

लोहड़ी का आधुनिक रूप: आज भी लोहड़ी की धूम वैसी ही होती हैं बस आज जश्न ने पार्टी का रूप ले लिया हैं। और गले मिलने के बजाय लोग मोबाइल और इन्टरनेट के जरिये एक दुसरे को बधाई देते हैं। बधाई सन्देश भी व्हाट्स एप और मेल किये जाते हैं।

लोहड़ी की विशेषता: लोहड़ी का त्यौहार सिख समूह का पावन त्यौहार है और इसे सर्दियों के मौसम में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पंजाब प्रांत को छोड़कर भारत के अन्य राज्यों समेत विदेशों में भी सिख समुदाय इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं।

सुकेत में लोहड़ी के गीठे का महत्व: गाँव व मोहल्ले में लोहड़ी के कई दिनों पहले से कई प्रकार की लकड़ियाँ इक्कट्ठी की जाती हैं। जिन्हें गांव या मोहल्ले के बीच के एक अच्छे स्थान पर जहा सभी एकत्र हो सके वहाँ सही तरह से जलाई जाती हैं और लोहडी की रात को सभी अपनों के साथ मिलकर इस गीठे के आस-पास बैठते हैं। कई गीत गाते हैं, खेल-खेलते हैं, आपसी गिले-शिक्वे भूलकर एक दुसरे को गले लगते हैं और लोहड़ी की बधाई देते हैं। इस लकड़ी के ढेर पर अग्नि देकर इसके चारों तरफ परिक्रमा करते हैं और अपने लिए और अपनों के लिये दुआयें मांगते हैं। विवाहित लोग अपने साथी के साथ परिक्रमा लगाते हैं। इस अलाव के चारों तरफ बैठ कर रेवड़ी, तिल के लड्डू, गजक आदि का सेवन किया जाता हैं।

सुकेत में आयोजन: सुकेत के गाँव-गाँव हर घर-घर में लोहड़ी का पर्व श्रद्धालुओं के अंदर नई ऊर्जा का विकास करता है और साथ ही में खुशियों की भावना का भी संचार होता है अर्थात-: यह त्यौहार सुकेत के प्रमुख त्योहारों में से भी एक है। लोहड़ी की रात और मकर संक्रांति की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में करसोग क्षेत्र सहित प्रत्येक गांव में लोग अपने चूल्हे की पूजा करते हैं। हवन सामग्री, पाजा की लकड़ी, गाय का घी, तिल, गुड़ से चूल्हा सभी सदस्यों के द्वारा पूजा जाता है। इस दिन भल्ले, बाबरू, पकवान, तिल के लड्डू बनाए जाते हैं। आस-पड़ोस रिश्तेदारों को पकवान मूंगफली गुड़ रेवड़ी बांधकर बड़ों का आशीर्वाद लेकर यह त्यौहार मनाया जाता है।

♦ आचार्य रोशन शास्त्री जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “आचार्य रोशन शास्त्री जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — लोहड़ी का पर्व हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है क्योंकि हर साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है इस प्रकार 13 जनवरी को लोहड़ी मनायी जाती है। ऐसा माना जाता है की उस समय से दिन छोटे और राते लम्बी होने लगती है। लोहड़ी के दिन सभी लोग नए-नए कपडे पहनते है और खुशी मनाते है। इस दिन सभी लोग नाचते व गाते है। लोहड़ी की संध्या को आग जलाई जाती है । लोग अग्नि के चारो ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं व आग मे रेवड़ी, मूंगफली, खीर, मक्की के दानों की आहुति देते हैं । आग के चारो ओर बैठकर लोग आग सेंकते हैं। लोहड़ी भारत के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक त्यौहार है। यह पंजाब का सबसे लोकप्रिय त्यौहार है जिसे पंजाबी धर्म के लोगो द्वारा प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।

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यह लेख (लोहड़ी के त्यौहार उद्देश्य।) “आचार्य रोशन शास्त्री जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आचार्य रोशन शास्त्री जी– राजकीय माध्यमिक पाठशाला, नौलखा, सुंदर नगर, जिला मंडी – हिमाचल प्रदेश।

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लोहड़ी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ लोहड़ी। ♦

Lohari

मौसम में बदलाव हुआ,
सर्दी से मिली थोड़ी राहत।
सूर्य देव ने बदली राह,
मिली उत्तरायण की सौगात।

मकरसंक्रांति का पर्व आया,
कहीं लोहड़ी के नाम से जाना जाता।
पोंगल कहलाता तमिलनाडु में,
खुशियों का त्यौहार आता।

पीले-पीले फूल खिले उपवन में,
बसंत ऋतु की बहार आयी।
उड़ती नभ में रंग बिरंगी पतंगे,
मन को आनंदित कर जाती।

सब लोक गीत मिल कर गाते,
तिल के व्यजनों का मजा उठाते।
प्रेम भाव से ये त्यौहार मनाते,
एकता का सबको सन्देश देते।

करते दान रेवड़ी, मूँगफली,
गरीबों को खाना खिलाते।
लकड़ी के उपलों के ढेर को,
जलाकर अग्नि के चारों ओर,
सब बीमारी को दूर भगाते।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — लोहड़ी का पर्व हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है क्योंकि हर साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है इस प्रकार 13 जनवरी को लोहड़ी मनायी जाती है। ऐसा माना जाता है की उस समय से दिन छोटे और राते लम्बी होने लगती है। लोहरी के दिन सभी लोग नए नए कपडे पहनते है और खुशी मनाते है। इस दिन सभी लोग नाचते व गाते है। लोहड़ी की संध्या को आग जलाई जाती है । लोग अग्नि के चारो ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं व आग मे रेवड़ी, मूंगफली, खीर, मक्की के दानों की आहुति देते हैं । आग के चारो ओर बैठकर लोग आग सेंकते हैं। लोहड़ी भारत के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक त्यौहार है। यह पंजाब का सबसे लोकप्रिय त्यौहार है जिसे पंजाबी धर्म के लोगो द्वारा प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।

—————

यह लेख (लोहड़ी।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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भक्त की अभिलाषा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भक्त की अभिलाषा। ♦

खुशी से वास्ता नहीं,
मुश्किलों से गहरा लगाव है।
मेरी जिंदगी कभी तपती दोपहरी,
कभी घनी छांव है।

अपनों ने दिए बेहिसाब दर्द,
मेरी कराहती वेदना की अपनी घाव है।
शब्द हुए अपाहिज,
दर्द से लथपथ पांव है।

रूह तक झुलस चूका हूं,
अपनों ने जलाए वही अलाव है।
पतझड़ के मौसम में जुर्रत नहीं,
बहार की ख्वाइश कैसे करूं।

आंखें नम हैं मेरी हे प्रभु,
लव पे तबस्सुम की ख्वाइस कैसे करूं।
इतना आसान नहीं मेरे लिए,
गुजरी बातों को भूल जाएं।

जिस राह पर चलूं मेरे प्रभु,
मेरे हिस्से में कंकड़।
अपनों के लिए फूल बन जाए।
एक स्वर गूंजता मार दूंगा,
क्यूं यही शोर सब ओर है।

समाज भ्रष्ट या फिर कमजोर है,
हे शिवशम्भू, कृष्णकन्हैया,
मां लक्ष्मी, चित्रगुप्त,।
मैं हूं निर्बल,,,
अब मेरी भी विनती सुन लो,
मंदिर-मंदिर माथा टेका,
पर कहीं भी मिली नहीं।

तुम्हारे दर्शन बिन प्रभु,
लगता है मन कहीं नहीं।
आश लगाए बैठा हूं,
माता, जगत पिता संग आयेगी,
बहुतेरे भक्त हैं तेरे,
दुःख हर कर, गले जरूर लगाएगी।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150/नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — एक सच्चा भक्त सदैव ही मानव कल्याण के लिए प्रभु से प्रार्थना करता है, वह अपने लिए कभी भी कुछ नहीं मांगता है। वह सदैव ही सभी के लिए सुख ही सुख की कामना करता है प्रभु से, चाहे दुनिया वाले या उसके अपने कितना भी उसे तकलीफ़ दे। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव तो लगा ही रहता है, इसका मतलब ये नहीं की अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी को भी तकलीफ़ दिया जाएं। एक बात सदैव ही याद रखें – विकर्म का फल सदैव ही तकलीफ़ देने वाला ही होगा, अच्छे कर्मों का फल देर से भले ही मिले लेकिन आपके लिए सुखदायी होता है। इसलिए अच्छे कर्म करे, मानवता को शर्मशार करने वाले कोई भी कर्म ना करें।

—————

यह कविता (भक्त की अभिलाषा।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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मुश्किल नहीं नामुमकिन है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मुश्किल नहीं नामुमकिन है। ♦

मानव मन के मतभेदों को, धरती से मिटाना मुश्किल है,
रामायण हुआ महाभारत हुआ, मानव मदहोशी वैसी है।
मानव ही कहलाया कभी देव तो कभी दानव या राक्षस,
जाति धर्म में बंटे इंसानों की, आज भी यह लड़ाई कैसी है?

उम्मीद तो जागती है अंधेरे में जुगनुओं की रोशनी से भी,
पर उनकी टिमटिमाहट से मुकमल उजाला नहीं होता है।
लगता तो है दूर से कि मानो टीका अंबर क्षितिज पर ही है,
पर असल में तो अंबर को किसी ने संभाला नहीं होता है।

मुश्किल नहीं नामुमकिन है इस दौर में नीति समझाना,
क्योंकि आज हर तरकश में तर्कों के तीखे तीर भरे हैं।
जब पूछते हो सब कोई सवाल यही कि “ईश्वर कहां है?”
“तुमने देखा क्या?” ऐसे माहौल में भगवान से कौन डरे हैं?

मूर्खता है आज कहना किसी से कि भगवान से तो डरो,
इतनी भी लूटपाट और अभद्रता बिल्कुल ठीक नहीं है।
आज हर कोई देता फिरता है जवाब यही कि “बस करो,
यह जमाना है प्रैक्टिकल का, जिन्दगी कोई भीख नहीं है।

फिर सोचता हूं कि होना चाहिए फिर से कोई महाभारत,
जो बेकाबू इंसान सातवें आसमान से जमीन पर आ जाए।
फिर से जाग उठे इन्सान के भीतर वही पुरानी इंसानियत,
आदमी फितरतों को छोड़कर भगवान से डर खा जाए।

आज वश में नहीं है समझाइश चांद सितारों के भी शायद,
आज तो फिर से दुनियां में ज्ञान का सूरज उगना चाहिए।
मकसद नहीं है महज किसी की जिन्दगी में उजाला लाना,
कोशिश यह है कि जग में अहम अंधकार ही डूबना चाहिए।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज का इंसान इंसानियत को बिलकुल भूल गया है, उसे अपने स्वार्थ के अलावा और कुछ दिखता ही नहीं है। अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए आज का इंसान कोई भी बड़े से बड़ा विकर्म करने से डरता नहीं है। उसे भगवान या उस अनंत सत्ता का भी डर भी अब नहीं रहा। क्या फिर से इंसान को सुधारने के लिए महाभारत की जरूरत है। आखिर क्यों आज का इंसान इतना स्वार्थी हो गया है। अपने अहंकार में डूबा आज का इंसान अपने विकर्मो के कारण अपना सर्वनाश करता जा रहा है। आने वाली पीढ़ी का भविष्य और भी ज्यादा अंधकारमय बना रहा है। अगर अब भी नहीं संभले और सुधरे तो तुम्हारा विनाश निश्चित है।

—————

यह कविता (मुश्किल नहीं नामुमकिन है।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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घोर कलयुग है आ गया क्या?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ घोर कलयुग है आ गया क्या? ♦

नेता है लेते लुत्फ सत्ता का, अधिकारी बने सहयोगी है।
भ्रष्टाचार और महंगाई हर राज में, जनता ने ही भोगी है।

यह पैट्रोल बढ़ा यह डीजल बढ़ा, यह तो बात पुरानी है।
सरकारी तन्त्र में भ्रष्टाचार की, सबको मालूम कहानी है।

बदसलूकों की महफिल में, शराफत की बात बेईमानी है।
नीचे से ऊपर ये सारे मिले हैं, किससे आवाज उठानी है?

खरीद तंत्र घोटाला, भर्ती घोटाला, सिर से ऊपर पानी है।
सब्सिडी लेती जनता भी देखो, हो गई कितनी शाणी है?

दुर्दशा देश की होती है तो होए, सबको अपनी चिन्ता है।
महा स्वार्थ के इस दौर में, हर मानव में कितनी हीनता है?

पंचायत से घोटाले संसद तक, जांच एजेंसियां भी डूबी है।
न्यायालयों के दरवाजों के आगे, विलम्ब की झाड़ उगी है।

गरीब जाए तो किधर को जाए? चारों ही ओर तो अंधेरा है।
वोट की चोट से हर राज है बदला, सबमें लुटेरों का डेरा है।

हम सब जानते सचाई पर जाने, कैसे इस आग में जिंदा है?
इसी में ढलना मजबूरी है सबकी, इस बात से मैं शर्मिंदा है।

घोर कलयुग है आ गया क्या? हर ओर जो आपाधापी है।
ऐसा है लगता, देखता हूं, इन्साफ की चौखट में बेइंसाफी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नेता बड़े मजे से सत्ता का आनंद ले रहे है, उनको जनता की फिक्र ही नहीं है। पंचायत से लेकर संसद तक सब तरफ घोटाला ही घोटाला हो रहा है, क्या नेता क्या अधिकारी सबके सब मिले हुए है। खरीद तंत्र घोटाला, भर्ती घोटाला, सिर से ऊपर पानी है। सब्सिडी लेती जनता भी देखो, हो गई कितनी शाणी है? किसी को भी देश की चिंता नहीं है, दुर्दशा देश की होती है तो होए, सबको अपनी चिन्ता है। महा स्वार्थ के इस दौर में, हर मानव में कितनी हीनता भर गई है? पंचायत से घोटाले संसद तक, जांच एजेंसियां भी इनमें डूबी है। न्यायालयों के दरवाजों के आगे खड़े बेचारे, विलम्ब की झाड़ उगी है।

—————

यह कविता (घोर कलयुग है आ गया क्या?) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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नववर्ष का आगाज।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नववर्ष का आगाज। ♦

आओ! करें नमन नववर्ष का,
भूल पुरानी यादों के समंदर को।
मना ले नवल का त्यौहार,
मिलजुल झूमे गीत गाए।

भूले दुःख-दर्द बीते वर्ष के,
माफ करे दिए कष्ट जिन्होंने।
इस नववर्ष की बेला पर,
बना लेते हैं शत्रु को भी मित्र।

चलेंगे संग में पुराने सखा,
भुला देंगे दुःख भरी यादों को।
अपनों का आशीर्वाद साथ में,
नववर्ष को लगा लो गले।

शीत-ऋतु की ठंड में करें आगाज,
मन के मतवाले बन छा जा जग में।
एक-दूजे का साथ निभा ले दोस्ती,
आलस त्याग संघर्ष को लगाओ गले।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — नया साल नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य और नए आइडियाज की उम्मीद देता है, इसलिए सभी लोग खुशी से इसका स्वागत करते है। ऐसा माना जाता है कि साल का पहला दिन अगर उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाए, तो पूरा साल इसी उत्साह और खुशियों के साथ बीतेगा। हालांकि हिन्दू पंचांग के अनुसार नया साल 1 जनवरी से शुरू नहीं होता।

—————

यह कविता (नववर्ष का आगाज।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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