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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

मां के नव रुपों का दर्शन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मां के नव रुपों का दर्शन। ♦

मां की महिमा है बड़ी निराली,
उनके रूपों में दर्शन देती मां काली।
नवरात्रा में मां के नव रूपों के दर्शन को है मन खाली,
तरस रही अंखियां, बजा रही ताली।
मां के नव रूपों में रचा बसा जग संसार,
जगत जननी मां जगदम्बा तेरी महिमा अपरम्पार।

मां अपने प्रथम रूप में,
पहाड़ की बेटी शैलपुत्री का दरस दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी शैलपुत्रयै नमः
मंत्र उनका, नंदी है वाहन जिनका।

मां अपने द्वितीय रूप में,
भक्ति और तपस्या की,
मां ब्रह्मचारिणी का भाव दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी ब्रह्मचारणयै नमः
मंत्र उनका, रुद्राक्ष की माला सुशोभित करता जिनका।

मां अपने तृतीय रूप में,
राक्षसों का नाश करने वाली,
चंद्रघंटा का रौद्र रूप दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी चंद्रघणटयै नमः
मंत्र उनका, बाघ है वाहन जिनका।

मां अपने चतुर्थ रूप में,
ब्रह्मांडीय अंडे की देवी का रूप दिखाती।
उच्चारित करें ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मंडायै नमः
मंत्र उनका, महाशक्ति का रूप है जिनका।

मां अपने पंचम रूप में,
मातृत्व और बच्चों की देवी,
स्कंदमाता का ममत्व दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी स्कंदमातायै नमः
मंत्र उनका, शेर है वाहन जिनका।

मां अपने षष्ठ रूप में,
शक्ति की देवी कात्यायनी का दरस दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
मंत्र उनका, योद्धा चरण में दुर्गा है जिनका।

मां अपने सप्तम रूप में,
शुभता और साहस की देवी,
कालरात्रि का दरस दिखाती।
उच्चारित करें ॐ देवी कलरात्रयै नमः
मंत्र उनका, गधा वाहन है जिनका।

मां अपने अष्टम् रूप में,
सौंदर्य और महिलाओं की देवी,
महागौरी का आभास कराती।
उच्चारित करें ॐ देवी महागौरयै नमः
मंत्र है उनका, बैल है वाहन जिनका।

मां अपने अंतिम नवम रूप में,
अलौकिक शक्तियों की देवी की छवि दिखाती।
उच्चारित करें ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धादतयै नमः
मंत्र उनका, कमल का फूल वाहन है जिनका।
मां के रूपों में रचा बसा जब संसार,
जगत जननी मां जगदम्बा तेरी महिमा अपरम्पार।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — माता रानी के नव रूपों व गुणों का मनोरम वर्णन किया हैं। आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

—————

यह कविता (मां के नव रुपों का दर्शन।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मां के नौ रूप।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मां के नौ रूप। ♦

विधा : भक्ति।

नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं,
उनके नौ रुपों का हम बखान करते हैं॥

पहली शैलपुत्री हैं तो दूसरी है ब्रह्माचारिणी,
भवसागर से सब लोगों को पार उतारनी॥

तीनों लोक मैया की जय जयकार करते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों………

तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कूष्माण्डा का रुप निराला है,
भक्त जनों की हर विपदा को मां ने टाला हैं॥

सभी भक्त जन मां के स्वरूप का श्रृंगार करते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों………

पांचवीं स्कंदमाता, छठी कात्यायनी का भवन निराला है,
सारे भक्तो को प्यार करे सबकी बुरी नजरो से टाला है॥

मां के भवन में जाकर भक्त जन उनका श्रृंगार करते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों………

सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी की पूजा करो सारे,
एकपल भी न लगाएं पापी दुष्टजनो को खड्ग से संहारे॥

जो सच्चे मन से मां को सुमरे उनके भाग जाग जाते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों………

नवीं सिद्धिदात्री मां को सच्चे मन से जिसने धाया है,
मन के मन्दिर में मां का दरबार सजाया है॥

मां के सभी नौ रूप बड़े प्यारे- प्यारे लगते हैं,
नवरात्रों के पावन पर्व पर मां को याद करते हैं॥
उनके नौ रुपों का हम बखान करते हैं।
हम बखान करते हैं………

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (मां के नौ रूप।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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माँ तेरी प्रीत निराली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ तेरी प्रीत निराली। ♦

अम्बे माँ, सदैव तेरी ही प्रीत की डोरी से बँधी रहूँ।
तेरे दिव्य अनुपम दर्शनों के अथाह सागर में बहूँ॥

तेरे आशीष के अमृतधारा से, ये प्यास बुझती रहे।
नैनों को तृप्त करने वाली, तेरी सलोनी सूरत सजती रहे॥

माँ, सदैव तेरा ही रूप सजा रहे, मेरे दिल के दर्पण में।
जिन्दगी में सर्वस्व तूही है, परम् आनंद है, तेरा तुझें समर्पण में॥

माँ तुझे और तेरे साकार रूप के चरणों में सब कुछ न्यौछावर।
अर्ज बस यही, ताउम्र इस नाचीज़ को लगाये रखना अपने दर॥

माँ, तेरा दुलार हमें इस कदर दीवाना कर गया।
तेरा प्रेम हमें बस इतना ही मस्ताना कर गया॥

कोई क्या कहेगा, नही होती अब इस बात की फिक्र।
अब हर कर्म में होता, बस एक तेरे नाम का जिक्र॥

जैसे मदमस्त हो, शमां के पास आकर परवाना।
कदम-कदम पर तेरे आशीष के शुकराने में, झूमें दिल मस्ताना॥

तेरी पावन वाणी से आशीष निकले, वो पूरा हो जाता है।
तेरे वरहस्त के वरों से ये जीवन सफल हो जाता है॥

हे जगदाती माँ!
तेरी कृपादृष्टि की छत्रछाया में सदैव हमारा बसेरा हो।
हे जगदाती तेरे नाम की ज्योति से, मेरा हर सवेरा हो॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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यह कविता (माँ तेरी प्रीत निराली।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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नवरात्रि।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ नवरात्रि। ♦

आया नवरात्रि का त्यौहार,
घर-घर में घट स्थापना हो रही है।
सजा माता का दरबार,
माता की पूजा अर्चना हो रही है।

सिंह पर सवार माता आयी,
भक्तों की सुनने पुकार।
छायी चारों तरफ खुशियां,
आयी मंदिरों में हो रही जय जयकार।

जो भी आता माँ के द्वार,
भक्ति श्रद्धा से शीश नवाता।
खाली झोली भरती माता,
मन चाहें मुरादें पाता।

माँ की महिमा को सबने गाया,
दुर्गा माँ ने पार लगाया।
माँ के चरणों में सुख,
समृद्धि, प्रेम का वरदान पाया।

कर लो माँ की नवरुपों में पूजा,
अर्चन भक्ति का उत्सव आया।
संसार मे माँ से बढ़कर,
कोई नहीं और पाया।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज हम बात कर रहे हैं हमारे देश के सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) द्वारा मनाये जाने वाले नवरात्रि त्यौहार की, इस त्यौहार को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं और आखिरी दिन मां की पूजा करके नौ कन्याओं को भोजन कराते हैं। यह त्यौहार अलग-अलग जगह पर अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। काफी जगह इस दिन लोग गरबा और डांडिया भी खेलते हैं। यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि साल में दो बार मनाया जाता है। नवरात्रि नौ दिनों के लिए निरंतर चलता है जिसमे देवी माँ के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते है। भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीको और विधियों के संग मनाई जाती है।

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विश्व साक्षरता दिवस।

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♦ विश्व साक्षरता दिवस। ♦

आठ सितंबर को सब मिलकर,
विश्व साक्षरता दिवस मनाएं,
हम सब मिलकर ऐसा अभियान चलाएं।
जीवन में पढ़ना, लिखना जरूरी है,
यह बात सबको बताएं,
इस अभियान में सबको शिक्षा का महत्व बताएं।

देश में कोई अनपढ़ न रहें,
यही बात बार-बार दोहराएं।
देश में सब शिक्षित हो,
भारत की शान बढ़ाएं।
जन जन को साक्षर बनाना है,
ऐसी अलख जगाएं,
देश में साक्षरता का ऐसा इंकलाब लाएं।

जब हम साक्षर होंगे,
देश हमारा आगे बढ़ेगा।
शिक्षित होगा समाज,
देश भी खुशहाल बनेगा।
देश के प्रति हम भी,
कुछ कर्तव्य निभाएं।
पढ़ लिख कर हम प्रगति,
करें देश का गौरव बढ़ाएं।
आओ सब मिलकर,
विश्व साक्षरता दिवस मनाएं।

हमको कितना कुछ देती है शिक्षा, शिक्षा हर इंसान को महान बनाता है॥
पहले तुम खुद को शिक्षित बनाओ, अपने बच्चों को तुम ख़ूब पढ़ाओ॥

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आठ सितंबर को सब मिलकर, विश्व साक्षरता दिवस मनाएं, हम सब मिलकर ऐसा अभियान चलाएं। जीवन में पढ़ना, लिखना जरूरी है, यह बात सबको बताएं। विश्व साक्षरता दिवस। इस दिन को शिक्षा के प्रचार के उद्देश्य से दुनिया भर में मनाया जाता है। किसी भी देश के विकास के लिए साक्षरता बहुत ही महत्वपूर्ण है। यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) के अनुसार, यह दिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को व्यक्तियों, समुदायों और समाजों के लिए साक्षरता के महत्व और अधिक साक्षर समाजों के लिए गहन प्रयासों की आवश्यकता की याद दिलाने के लिए मनाया जाता है।

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यह कविता (विश्व साक्षरता दिवस।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बलिदानी क्या सोचेंगे?

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बलिदानी क्या सोचेंगे? ♦

ओ पदवी के सब चाहवानों! अब तो पदवी का मोह छोड़ो।
अपनी गलती का ठीकरा प्यारो, दूसरों के सर पर न फोड़ों।

देश हमारा, हम सब हैं इसके, ध्रुवीकरण से इसे मत तोड़ो।
खैर जो चाहते हैं गर अपनी तो, जर्रा – जर्रा देश का जोड़ो।

रोप के पौधा आजादी का, पल्वित पुष्पित कर जो चले गए।
क्या बीतेगी दिल पर उनके? देखे सपने जो उनके छले गए।

जाति धर्म की बाट कहां जोही? समता ही जिनका स्वप्न रहा।
विषमता विश्व से मिटाने के खातिर, निरंतर कड़ा संघर्ष सहा।

वे बलिदानी क्या सोचेंगे? जब हमको लड़ता भिड़ता देखेंगे।
“बेकार हुई सब मेहनत हमारी,” हम पर तो लानत ही फेंकेंगे।

राष्ट्र बड़ा है स्वार्थ से पगलो, कभी कुछ तो खुद पे शर्म करो।
सत्ता के महल की नीव में यारो, ईमान – धर्म की कंक्रीट भरो।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — ओ पदवी के सब चाहने वालो, अब तो अपने पदवी का मोह छोड़ो और अपनी गलती का ठीकरा प्यारो, दूसरों के सर पर न फोड़ों। ये देश हमारा व हम सब हैं इसके, ध्रुवीकरण से इसे मत तोड़ो, अपनी सलामत अगर चाहते हैं तो, जर्रा – जर्रा देश का जोड़ो। रोप के पौधा आजादी का, पल्वित पुष्पित करके जो महानायक देशभक्त चले गए, जरा सोचों क्या बीतेगी दिल पर उनके? देखे सपने जो उनके छले गए तुम्हारे अपने निजी स्वार्थ के कारण। जाति धर्म से ऊपर उठकर सदैव समता ही जिनका स्वप्न रहा। नफ़रत को विश्व से मिटाने व आज़ादी के खातिर, निरंतर कड़ा संघर्ष सहा। कभी सोचा है की वे बलिदानी क्या सोचेंगे? जब हमको लड़ता भिड़ता देखेंगे। “बेकार हुई सब मेहनत हमारी,” हम पर तो लानत ही फेंकेंगे। एक बात याद रखना राष्ट्र बड़ा है स्वार्थ से पगलो, कभी कुछ तो खुद पे शर्म करो। अब तो सत्ता के महल की नीव में यारो, ईमान – धर्म की कंक्रीट भरो।

—————

यह कविता (बलिदानी क्या सोचेंगे।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हिन्दी का हित चाहने वालों को।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हिन्दी का हित चाहने वालों को। ♦

राष्ट्र का गौरव शोभित करने को,
फिर से हमको क्या लड़ना होगा?
राष्ट्र भाषा के सम्मानित पद पर,
शासित हिन्दी को करना होगा।

अमृत महोत्सव आजादी का भी,
मनाकर क्यों हम बस शर्मिंदा हैं?
दिला न सके जो न्याय मां को तो,
फिर हम बेटे भी काहे को जिन्दा है?

जुर्म हुए हैं और जलालत सही है,
दशकों से भारत में मां हिन्दी ने।
कभी अफगानी अंग्रेजी ने कुचला,
कभी अपमानित किया है सिंधी ने।

जापान में जापानी, चीन में चीनी,
तो भारत में हिन्दी राष्ट्र की भाषा हो।
भारत बने फिर विश्वगुरु, जो सोचा है,
हिन्दी ही पूर्ण करेगी इस आशा को।

मशाल जलाते हैं मिलकर के आओ,
हिन्दी के सम्मान, प्रचार – प्रसार की।
राष्ट्र भाषा का दर्जा दिलाने के खातिर,
आओ कुछ मदद लेते है सरकार की।

हिन्दी का हित चाहने वालों को अब,
मिलकर एक तो यारों होना ही होगा।
नहीं तो विदेशी भाषाओं का भार हमें,
सदियों तक यूं ही निरंतर ढोना होगा।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि हम सभी से पूछते हैं: राष्ट्र का गौरव शोभित करने को, फिर से हमको क्या लड़ना होगा? राष्ट्र भाषा के सम्मानित पद पर, शासित हिन्दी को करना होगा। अमृत महोत्सव आजादी का भी, मनाकर क्यों हम बस शर्मिंदा हैं? दिला न सके जो न्याय मां को तो, फिर हम बेटे भी काहे को जिन्दा है? जापान में जापानी, चीन में चीनी, तो भारत में हिन्दी राष्ट्र की भाषा हो। तब भारत बने फिर विश्वगुरु, जो सोचा है, हिन्दी ही पूर्ण करेगी इस आशा को। हिन्दी का हित चाहने वाले सभी उम्र के साथियों से आग्रह है की “मशाल जलाते हैं मिलकर के आओ, हिन्दी के सम्मान, प्रचार – प्रसार की। राष्ट्र भाषा का दर्जा दिलाने के खातिर, आओ कुछ मदद लेते है सरकार की। विशेषताओं से भरे भाषा का, प्रसार जो होना चाहिए हुआ नहीं। आओ हमसब मिलकर करें प्रचार, हिंदी का करें खूब विस्तार। तब मिलेगा इसे वाजिब हक और सम्मान, हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

—————

यह कविता (हिन्दी का हित चाहने वालों को।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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हिंदी मेरी जान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हिंदी मेरी जान। ♦

अभिव्यक्ति का माध्यम है हिन्दी,
दिल में प्रेम जगाती हिंदी।
जीवन सरस बनाती हिंदी,
हिंदी से ही है हमारी शान।
हिंदी ही हमारा अभिमान,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

हिंदी से होती हमारी पहचान,
इससे बढ़ता राष्ट्र का मान।
हर क्षेत्र में अपना सिक्का जमाती,
लोगों के मन को है लुभाती।
भाव का करती संचार,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

जो पूरे राष्ट्र को एकसुत्री धागा में है जोड़,
वो मजबूत डोर है हिंदी।
जन-जन की भाषा है हिंदी,
प्रेम भाईचारे का प्रतीक है हिंदी।
इतना बेमिसाल, जिसकी पहचान,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

विशेषताओं से भरे भाषा का,
प्रसार जो होना चाहिए हुआ नहीं।
आओ मिलकर करें प्रचार,
हिंदी का करें खूब विस्तार।
मिलेगा इसे वाजिब हक और सम्मान,
हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — अभिव्यक्ति का माध्यम है हिन्दी, दिल में सदैव ही प्रेम जगाती हिंदी, जीवन सरस बनाती हिंदी, हिंदी से ही है हमारी शान। हिंदी ही हमारा अभिमान, वह हिंदी मेरी जान है, हम इस पर कुर्बान। जो पूरे राष्ट्र को एकसुत्री धागा में है जोड़ती वो मजबूत डोर है हिंदी। जन-जन की भाषा है हिंदी, प्रेम भाईचारे का प्रतीक है हिंदी। इतना बेमिसाल, जिसकी पहचान, वह हिंदी मेरी जान। विशेषताओं से भरे भाषा का, प्रसार जो होना चाहिए हुआ नहीं। आओ हमसब मिलकर करें प्रचार, हिंदी का करें खूब विस्तार। तब मिलेगा इसे वाजिब हक और सम्मान, हिंदी मेरी जान, हम इस पर कुर्बान। 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया। पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर, 1953 को मनाया गया था।

—————

यह कविता (हिंदी मेरी जान।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बारिश का वो हमारा जमाना।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बारिश का वो हमारा जमाना। ♦

बरसाती को पहले ही अपने बस्ते में सजा के रखना।
अपने भीगने से ज्यादा उन कॉपी-किताबों का ध्यान धरना।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

छत के पानी के पतनाल के नीचे सिर भिगोना।
खुले आसमाँ के नीचे बारिश में खोना।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

मंद-मंद बारिश आते ही कॉपी के कागजों का फाड़ना।
फिर कागज की नाव का दूसरों की नाव से टकराना।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

बाजार में वो नई-नई बरसाती चप्पलों का आना।
उसमें से अपनी मनपसंद चप्पलों का ढूंढ लाना।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

बारिश के भरे पानी से कभी नही डरा हमारा बचपन।
तब उसमें कितना आनंदमय होता था वो बालमन।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

बारिश आते ही गीले कपड़ों की पंक्तियां लगती।
ऐसे लगता घर में ही जैसे कपड़ों की हॉट सजती।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

बारिश की बूंदों में बहते पानी के बीच ऐसे निकलते।
स्थान पर सुरक्षित पहुँचते ही किला फतह जैसे भाव निकलते।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

ओले के आने की प्रार्थना भी करते बर्फ देखने की चाह में।
नादान थे भोले थे नही जानते थे कितना दर्द देते ये आह में।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

छप-छप करके उस आसमान की फुहारों का आनंद लेते।
बिजली कड़कते ही माँ के आंचल की छाया में खुद को छुपा देते।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

डरते नही थे बारिश के कीचड़ से न इसके छम-छम बरसते पानी से।
प्रकृति के उन सुखद पलों को जिया हमने तभी सहेज रखा उनको जिंदगानी में।
बारिश का वो हमारा जमाना॥

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — बारिश का वो हमारा जमाना उसका क्या कहना? बरसात के आने से पहले ही, अपने भीगने से ज्यादा उन कॉपी-किताबों का ध्यान धरना, बरसाती को पहले ही अपने बस्ते में सजा के रखना। वर्षा का वो पानी जो छत के पानी के पतनाल के नीचे खड़े होकर सिर भिगोना, खुले आसमाँ के नीचे बारिश में खो जाना। मंद-मंद बारिश आते ही कॉपी के कागजों का फाड़ना और फिर उस कागज की नाव का दूसरों की नाव से टकराना, इस आनंद का लुफ्त उठाना मन को तरोताज़ा कर देता था। छप-छप करके उस आसमान की फुहारों का भरपूर आनंद लेते, जब भी बिजली कड़कते तुरंत ही माँ के आंचल की छाया में खुद को छुपा देते, माँ के आंचल में अपने आपको सदैव ही सुरक्षित महसूस (Feel safe) करते। कभी भी डरते नही थे बारिश के उन कीचड़ से न इसके छम-छम बरसते पानी से, प्रकृति के उन सुखद पलों को जिया हमने तभी सहेज रखा उनको जिंदगानी (यादों) में। बारिश का वो हमारा जमाना।

—————

यह कविता (बारिश का वो हमारा जमाना।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हां मुझे शिक्षक होने पर गर्व है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हां मुझे शिक्षक होने पर गर्व है। ♦

हां मुझे शिक्षक होने पर गर्व है,
राष्ट्र का निर्माता एवं भविष्य का रक्षक हूं।
हां मुझे गर्व है कि मैं एक शिक्षक हूं,
मैं वो कुम्हार हूं,
जो कच्ची मिट्टी से घड़ा बनाता है।

मैं वो तेल हूं,
जो ज्ञान का दीप जलाता है।
मैं वो मार्गदर्शक हूं,
जो भटके को राह दिखाता है।
मैं वो सत्य हूं,
जो शिक्षा की गंगा बहाता है।

मैं वो राह हूं,
जो बच्चे बूढ़े सब का हमसफर बन जाता है।
मैं वो कलाकार हूं,
जो बिन रंग के जीवन रंगीन बनाता है।
मैं उस पल को जीता हूं,
जब मुझे लोग निर्माता कहते है।

मैं वो सखा हूं,
जो हर पल सजग रहने का पाठ पढ़ाता है।
मैं किसी का मां तो किसी का पिता हूं,
किसी का आस किसी का विश्वास हूं।
कामयाबी की डोर,
उम्मीदों को उड़ान देने वाला पंख हूं।
हां, मैं एक शिक्षक हूं,
हां, मुझे शिक्षक होने पर गर्व है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में गुरु की जगह कोई भी नही ले सकता। एक सच्चा गुरु सदैव ही सन्मार्ग पर चलकर मर्यादा पुरुषोत्तम ज्ञान व ध्यान से भरपूर जीवन जीने की कला सीखाता है। गुरु सदैव ही जीवन के हर क्षेत्र में वृद्धि चाहते है, उन्नत और प्रगतिशील जीवन के सूत्रधार है गुरु। एक शिक्षक ही होते है जो हमे अच्छी और बुरी आदतों का पहचान करवाते है और वो हमारी बुरी आदतों को छोड़वाने का दिल से पूर्ण प्रयास भी करते हैं। हमें अच्छी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करते है, सदैव ही आगे बढ़ने का सही ज्ञान देते है।

—————

यह कविता (हां मुझे शिक्षक होने पर गर्व है।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

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