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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

युद्ध की तबाही।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ युद्ध की तबाही। ♦

तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर आ खड़ा भव,
इस बारुदी फसलों में अब बम-बारूद उगायेंगे।
खून ही बोयेगें और लाशें ही उगायेंगे,
इस बसी-बसाई दुनिया को वीरान बनायेंगे।

हँसते-मुस्कुराते चमन के गुलाबों को,
बारूदी काले जादू से कलियों को।
अपनी उन्मुक्तता में झूमते बालियों को,
इठलाती बलखाती शोख फूलों के क्यारियों को।

नदियों समन्दरों की लहरों पहरा होगा,
कल-कल करते झरनों के स्वर पर पहरा होगा।
खग-वृंद के नटखट कलरव गुंजन पर,
मोर मैना भौंरो भृंगों के गुंजार पर पहरा होगा।

सब ओर धुंध-धुंआ बारूद बन छा जायेंगें,
कोयल का कुंजन रुदन बन चिल्लायेंगे।
पपीहे की प्रीत भी डर के साये में खो जायेंगें,
लुक-छुप कर गाने वाले मौत की नींद सो जायेंगे।

दामिनियों की कड़-कड़ भी इनके सामने अदने से,
चिंगारियां उठाती भकजोगनियां भी छिप जायेंगी।
झींगुरों-सियारों का रुदन ही हम सुन पायेंगे,
सब ओर सिमटकर खामोशी से तबाही के गीत गायेंगे।

गोलियों की बौछारों से सावन भी शरमायेंगे,
विनाश की अमराई घर गली चौराहों पर आयेंगें।
हर उपवन डाली पर बारूद अंगार बरसायेंगे,
नफरत घृणा लालच आगे-आगे डंका बजायेंगे।

आज तड़प रहा संस्कृति-संस्कारों का देश,
ऋषि-मुनियों और वेद पुराणों पर बना देश।
कहां गये कुरान की वो आयत जिसमें कहा था,
गये कहां यीशू-पैगम्बर शान्ति जो बतलाते थे।

इस युद्ध विभीषिका में नित नये अध्याय जुड़ रहे,
अपनी महत्वाकांक्षा के चलते इक सभ्यता निगल रहा।
हथियारों पर दंभ रखने वालों आगाह है तुमको,
नाको चने चबवाने को अदने भी अड़कर खड़े हैं।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — युद्ध से कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं होता। कहने को तो आज मानव अपने आपको बहुत बड़ा ज्ञानी कहता है, लेकिन उसके सोच व कर्म विकर्मी होते जा रहे हैं। पृथ्वी एक बार पुनः विनाश कि तरफ बढ़ रहा है, आज मानव ही मानव के खून का प्यासा हो गया हैं। कोई भी किसी कि कुछ भी सुनने को तैयार ही नहीं है, सभी अपनी-अपनी ही जोत रहे हैं, सभी एक दूसरे को मारने के लिए तैयार हैं। जरा सोचे क्या इसी दिन के लिए मानव सभ्यता का इतना विकास हुआ? क्या विकास का यह परिणाम होता हैं? अगर ऐसे ही मानव विकास होता है तो, इससे अच्छा तो प्राचीन सभ्यता ही अच्छा है आज से ५५०० वर्ष पूर्व का। अभी भी समय है समझदारी सभी अपना दिखाए और सभी मिलजुलकर रहे, नहीं तो मानव सभ्यता पूर्ण रूप से नष्ट हो जाएगा।

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यह कविता (युद्ध की तबाही।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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ना कर बन्दे तू जग में ईर्ष्या।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ना कर बन्दे तू जग में ईर्ष्या। ♦

ना कर बन्दे तू जग में ईर्ष्या,
तू भी एक दिन जल जाएगा।
माटी की काया है तेरी जग में,
एक दिन तु यहां मिल जाएगा।

ना कर ऐसे ईर्ष्या तू लोगों से,
तू भी इसका शिकार बन जाएगा।
प्रेम भाव को जीवन में अपना ले,
जीवन रंगीन फिर तेरा बन जाएगा।

ना कर बन्दे तू जग में ईर्ष्या……

जो है जितना ख़ुश रह उसमे,
मरने पर तू क्या साथ ले जाएगा।
खाली हाथ लेकर आया था यहां,
क्या साथ लेकर फिर तु जाएगा।

दूसरों की ख़ुशी को जब देखकर,
जब तु जलना शुरू हो जाएगा।
अंत समय में एक दिन खुद भी,
जल कर राख सा हो जाएगा।

♦ अजय नायर जी – कोच्चि, केरल ♦

—————

• Conclusion •

  • “अजय नायर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — आजकल लोगों को एक दूसरे से ईर्ष्या करने से फुर्सत ही नहीं मिलता हैं। लोगों की मानसिकता कितनी ख़राब हो गई है जो किसी की तरक्की देखा नहीं की ईर्ष्या करने से उन्हें कभी फुर्सत ही नहीं मिलता। एक बात मेरी याद रखें, “कभी भी किसी की तरक्की को देखकर उससे ईर्ष्या करने से आपकी आर्थिक, मानसिक, पारिवारिक या सामाजिक स्थिति में सुधार नहीं होगा।” इसलिए आपके अंदर जो ईर्ष्या करने कि आदत वाला वायरस है उसे नष्ट कर दे, तभी आपको सच्ची ख़ुशी व जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी।

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यह कविता (ना कर बन्दे तू जग में ईर्ष्या।) “अजय नायर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम अजय नायर है। मैं एक प्राइवेट मल्टीनेशनल कंपनी में पब्लिक रिलेशन ऑफीसर के पद पर चेन्नई में कार्यरत हूं। मुझे लिखने का शौक बचपन से रहा। १५ (15) वर्ष की आयु में हमने पहली कविता “दोस्त” इस नाम से लिखी जो पहली बार अखबार में प्रकाशित हुई। तब से आज तक करीबन ३५०० (3500) से अधिक कविता / गजल/ बाल कविताएं/ शेरो शायरी लिखी है। जो की भारत के सभी अखबारों में अब तक प्रकाशित हुई है। साहित्य संगम संस्थान के सभी मंचो से हमें श्रेष्ठ रचनाकार, श्रेष्ठ टिप्पणी कार, श्रेष्ठ विषय प्रवर्तक आदि सम्मानों से सम्मानित किया गया है। काव्य गौरव सम्मान, कलम वीर सम्मान, गौरव सम्मान, मदर टेरेसा सम्मान, बेस्ट ऑथर सम्मान, आदि सम्मान अलग अलग साहित्य जगत से प्राप्त हुआ है। हमारी पहली शेरो शायरी की पुस्तक का प्रकाशन संकल्प पब्लिकेशन द्वारा २०२१ (2021) में हुआ है। जो की सरल सुगम हिंदी भाषा में लिखा हुआ है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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योगी आदित्यनाथ की सरकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ योगी आदित्यनाथ की सरकार। ♦

“योगी आदित्यनाथ जी की 2022 की सरकार”
योगी जी ने अधिकारियों को अपना पैगाम सुनाया।
उत्तर प्रदेश में सुशासन कायम रखने पर ध्यान लगाया।
केंद्र सरकार के प्राप्त पत्र का उत्तर जल्द देना होगा,
अधिकारी को ज्ञापन पर तय सीमा में निर्णय लेना होगा॥

दुबारा संन 2022 में मुखिया प्रदेश का जनता ने बनाया,
15 करोड़ जरुरतमंद ने आगे राशन वितरण में पाया।
गरीब कल्याण अन्न योजना केंद्र ने सितम्बर तक बढ़ाया।
मोदी सरकार 80 करोड़ गरीबों में अन्न दान कराने वाले हैं,
मार्च 2022 के बाद भी इसी योजना को बढ़ाने वाले हैं॥

पिछड़ा प्रदेश सब, उत्तर प्रदेश अब भी नहीं कहा जाएगा,
योगी के शासन काल में भ्रष्टाचारी – गुंडा थर्रा जाएगा।
उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का योगी ने संकल्प लिया,
काशी मथुरा विंध्य और अयोध्या धाम का लोकार्पण किया॥

अयोध्या धाम को योगी ने इंद्रलोक की तरह जगमगाया,
तीर्थराज प्रयाग कुम्भ पर्व दुनियां में महान बनवाया।
आदिशक्ति भगवती दुर्गा के दरबार में शीश झुकाया है,
गोरखपुर के गोरखनाथ पीठ का साधु विंध्य दरबार में आया॥

योगी आदित्यनाथ जी का यह विजय का पथ प्रदर्शित करता,
चित्रकूट के रामपथ का स्वागत आभार प्रकट करने वाला चलता।
सुशासन दुबारा लाने में बुलडोजर के साथ समझाएगा,
उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने में मोदी मिशन चलाएगा॥

गांव गांव कोने-कोने में विधायक अब से भेजे जाएंगे,
भ्रष्टाचार पर प्रहार – कानून व्यवस्था में सुधार करेंगे।
केंद्र – प्रदेश की मंगलकारी योजना धरातल पर उतारेंगे,
आगे और सुधार करने की योजना पर विचार विमर्श करेंगे॥

विभाग ने रिक्त पद को भरने का नया एलान किया,
मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया।
किसान को हो रहे नुकसान से बचाने के कदम उठाएंगे,
गन्ना किसानों को 14 दिन में मूल्य का भुगतान कराएंगे॥

किसान मंडी को और सुलभ बनाने का कदम उठाएंगे,
किसान के अन्न का उचित मूल्य मिले योजनाएं लाएंगे।
सुविधा शुल्क लेने वाले लोगों पर अंकुश लगाएंगे?
ट्रांसफर पोस्टिंग में भ्रष्टाचार करने से अंकुश लगाएंगे॥

एम एस ए ई उत्पाद पर और अधिक प्रचार कर आएंगे,
उत्पादन का समुचित मूल्य दिलाने की योजना बनाएंगे।
स्टार्ट टप मैं बैंकों की अड़ंगेबाजी से लोगों को बचाएंगे,
वरुणा और गोमती कारीडोर के ऊपर ध्यान लाएंगे?

प्रोफ़ार्मिंग से ऊपर परिणाम लोकप्रिय और बनाएंगे,
छोटे – छोटे उद्योगों की खड़ी समस्या को सुलझाएंगे।
प्रीपेड बिजली के मीटर पर आगे भी काम चलाएंगे,
बिजली चोरी रोकने के प्रदेश में कठोर कदम उठाएंगे॥

राष्ट्रीय शिक्षा नीति उत्तर प्रदेश में भी अपनाएंगे,
गुरुकुल की पढ़ाई पर जनता का ध्यान आकर्षित करेंगे।
विद्यालयों गीता का पाठ पढ़ाने की व्यवस्था करेंगे?
प्रदेश की जनता में राष्ट्र प्रेम के लिए जागरुक करेंगे॥

अधूरा पड़ा कार्य प्रगति पर लाने का प्रयास करेंगे,
मेडिकल के क्षेत्र पर उत्तर प्रदेश में फोकस करेंगे।
स्वास्थ बीमा के कल्याणकारी मुहिम आगे भी चलेंगे,
जनता जनार्दन को लाभ पहुंचाने के कठिन प्रयास करेंगे॥

उत्तर प्रदेश में स्थिति अवैध अतिक्रमण ढाए जाएंगे,
नाला नाली और तालाब मुक्त करवाए जाएंगे।
सड़कों की किनारे बने अवैध निर्माण गिराए जाएंगे,
नदी और तालाब को साफ-सुथरा बनाये जाएंगे॥

उत्तर प्रदेश में स्थित अवैध अतिक्रमण ढाए जाएंगे,
नाला नाली और तालाब मुक्त करवाए जाएंगे।
सड़कों की किनारे बने अवैध निर्माण गिराए जाएंगे,
नदी और तालाब को साफ-सुथरा बनाये जाएंगे॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — फिर से उत्तर प्रदेश की जनता ने अपने प्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कार्यों और उत्तर प्रदेश के पूर्ण विकास के लिए उनपर अपना भरोसा दिखाया। पूर्ण बहुमत से फिर से एकबार अपना मुख्यमंत्री चुना। प्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी जनता के विश्वास को बनाये रखने के लिए दिन रात एक कर उत्तर प्रदेश का सम्पूर्ण विकास करेंगे, सभी को अपने मुख्यमंत्री पर विश्वास हैं। दुष्टों का होगा संहार, युवाओं को मिलेगा रोजगार, चारों तरफ होगा सुरक्षा का माहौल। किसानों को भी उनका पूर्ण हक़ मिलेगा समय से, उनके लिए केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओ का पूरा लाभ मिलेगा। शिक्षा के लिए काफी कुछ अच्छा किया जायेगा योगी सरकार में। प्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी पुनः अपनी प्रिय परिवार उत्तर प्रदेश के विकास के लिए कार्य करना शुरू कर दिया है। अब उत्तर प्रदेश पिछड़ा प्रदेश नहीं कहलायेगा।

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sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह कविता (योगी आदित्यनाथ की सरकार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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वीर देश हमारा हिंदुस्तान।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वीर देश हमारा हिंदुस्तान। ♦

देश हमारा हिंदुस्तान,
हमें जान से प्यारा है।
तिंरगा हमारी शान है,
ये हिंदुस्तान हमारा है।

कृष्ण राम तुलसी जैसे,
महापुरुषों की तपोभूमि।
धन्य है माटी हिंदुस्तान की,
ये हिंदुस्तान हमारा है।

सुभाष भगत राजगुरु जैसे,
वीर और निडर सपूत दिए।
सीने पर गोली खाकर वीरो ने,
ये आजादी हमे दिलवायी है।

शहीद हुए वीर जहाँ पर,
ये मेरा हिंदुस्तान है।
सरहद पर बैठे सीना ताने,
दुश्मन के आगे सर न झुकाए।

बैठे है देश के रक्षक बनकर,
ऐसे वीरो को सलाम है।
ये मेरा हिंदुस्तान है,
यहां सब रहते मिलजुलकर।

एकता भाई चारे की मिसाल है।
गुरु ग्रंथ साहिब गीता और कुरान है।

सारे विश्व मे मेरा भारत महान है।
सत्य अहिसा प्रेम का ये,
विश्व शांति का दूत है।
सबसे प्यारा सबसे निराला,
ये मेरा हिंदुस्तान है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भारत को महापुरुषों की धरती भी कहा जाता है। यहां पर ऋषि-मुनियों ने जन्म लिया, जिन्होंने वेदों का गान किया तथा उपनिषद् और पुराणों की रचना भी की, यहां श्रीकृष्ण का जन्म हुआ जिन्होंने गीता का ज्ञान देकर विश्व को कर्म का पाठ पढ़ाया। यहीं पर भगवान राम का जन्म हुआ था, जिन्होंने न्यायपूर्ण शासन का आदर्श स्थापित किया। यहीं पर महावीर और बुद्ध ने अवतार लिया जिन्होंने मानव को अहिंसा की शिक्षा दी। यहां पर बड़े-बड़े प्रतापी सम्राट अशोक, चन्द्रगुप्त मौर्य, विक्रमादित्य, महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, वीर शिवाजी महाराज आदि हुए जिनका नाम विश्व भर में व्याप्त है। लहराए तिरंगा प्यारा जिसकी शान में, गर्व से सिर ऊँचा हो जिसके सम्मान में। मैं रहता वीरों के देश हिंदुस्तान में। यही एकता की परिभाषा हिंदुस्तान में।

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यह कविता (वीर देश हमारा हिंदुस्तान।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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जीतना ही जीवन है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जीतना ही जीवन है। ♦

हर प्राण का अस्तित्व में आना,
तन के साथ कर्म कर्तव्य का भी जन्म।
संघर्ष दायित्वों का निर्वहन बस,
आधार धरा का धरणी का जन्म।

प्रबल वेग से प्राण का बनना,
प्रचंड प्रकृति के कामों को।
भाव मान प्रतिष्ठा मानक का बनना,
सिद्धी प्रसिद्धि बुद्ध प्रबुद्ध को।

सृष्टि चिर-काल से निर्धारित करती,
मनु के जीवन की लड़ाई।
संघर्ष मन-तन से सदैव करती,
आत्मविश्वास की अडिग लड़ाई।

आक्रान्त हो नहीं जीत सका कोई,
जीवन और व्यक्तित्व के युद्ध को।
शान्त शील दुर्धर समय की कोई,
सीमा परिशिष्ट काल के बुद्ध की।

जीतना है जीवन को तो संघर्ष करो,
आत्मबल सामर्थ्य को कर प्रबल।
बढ़कर सामना करो समय के दुर्दिन का,
विश्वास न घटने दो अंतस्-तल।

एकाग्रचित्त होकर प्रचंड प्रयास करो,
भंग न होने दो अन्तर को।
निभृत तन रखकर केंद्र का विस्तार करो,
दंभ अपने उद्योग के पुर को।

संघर्ष मुझे जीना सिखा दो,
लड़ना और जीतना बता दो।
लड़ूं मैं… अपने वजूद से निरंतर,
संघर्ष तुम मुझे जीतना सिखा दो।

इस मृत्युलोक में आया हूं,
तन मानव का पाकर जीने को।
बुद्धि और विवेक मुझे दे दो,
जीत सकूं इस संघर्ष भरे जीवन को।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — मनुष्य जीवन में उतार – चढ़ाव तो आते रहते है, असफलता सदैव ही कुछ सीखा कर जाती है। आजकल के मनुष्य का मानना है की जीवन के किसी भी क्षेत्र में जीतना ही जीवन है। मनुष्य चाहता है की वह जो भी कार्य करें, उसमे उसकी विजय हो, लेकिन हमेशा ऐसा ही हो ये जरूरी तो नहीं। मेरी एक बात सदैव ही याद रखे – की कोई भी बुरा या अच्छा समय लम्बे समय के नहीं आता। बुरा या अच्छा समय निर्भर करता है हमारे अच्छे कर्म, व्यवहार व नज़रिये पर। इसलिए मन से कभी भी हताश निराश होकर जीवन में बैठ न जाये, सदैव ही अच्छे कर्म करते रहे। जब आपके कर्म अच्छे होंगे तो देर से ही सही आपको जीत जरूर मिलेगी।

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यूक्रेन की तबाही!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ यूक्रेन की तबाही! ♦

रूसी सेना का सैन्य ऑपरेशन यूक्रेन में है जारी,
शहर शहर पर रूसी सेना कर रही है बमबारी।

क्रोमाटोस्क पर रूस ने मिसाइल गिरा दी भारी,
रूस के टैंक पर बम बरसा रहा यूक्रेन करारे।

यूरोपीय संसद ने रूस पर बैन लगाया करारी,
युद्ध यूक्रेन में जिसे बंद करने के लिए चेताया।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से रूस पहले से ही बाहर,
फिर भी न्यायालय में भारी उस पर लगाया पावर।

संयुक्त राष्ट्र की बड़की अदालत का ऐसा तेवर,
सैन्य अभियान तत्काल रुकने का फैसला सर!

अपना घर हम अपना ही कहते अपना अपनाना है।
रसिया ने भी ठाना है यूक्रेन को संदेश निभाना है।

खेरसन के रेलवे ट्रैक को पार करते दिखा रूसी टैंक,
सेना कर रही है जगह – जगह से भारी भरकम खर्च।

ला त विया में यूक्रेन सेना कर रही है पलटवार,
उधर बुल्गेरिया का रूस राजदूत को संदेश।

24 घंटे में उसके राजदूत छोड़ दें मेरा पूरा देश,
रूस के यूक्रेन की मदद करने वालों को कड़ा संदेश।

पुतिन ने यूक्रेन में जैविक लैब के किया दावा,
यू एन एस सी से चीन ने लैब जांच की मांग की!

आठ देशों का संगठन यूक्रेन के समर्थन में आया,
रूसी अरबपति की संपत्ति जप्त करने का फैसला सुनाया।

पुतिन ने tv पर आकर देश को किया संबोधित,
पश्चिमी देशों के समर्थक गद्दारों को यूक्रेन से निकाले!

सुमी में रूसी सेना ने किया भारी बमबारी,
ना जी को मेरे सामने लाओ पुतिन की है तैयारी।

यूक्रेन हमारा है हम उसमें जनता को बचाएंगे,
जलेस्की अपने हो अपने ही साथ तुम आओ।

आस्ट्रेलिया – स्वीडन की तर्ज पर कर्तव्य निभाओ,
अपनी बुद्धि का प्रयोग करके युक्रेन बचाओ।

उत्तर कोरिया ने शस्त्रागार आधुनिक कर रहा,
दक्षिण कोरिया उसे हवा ने विस्फोटों पर देखा।

उसका प्रक्षेपण नाकाम होने का दावा है ठोंका,
10 माह प्रक्षेपण उतर कोरिया दुनिया के सामने किया।

अमरीकी राष्ट्रपति जाे बाईडेन ने चीन को क्या चेताया,
ताइवान को लेकर चीन ने भी बिगुल बजाया।

ईरान हाल में इराक स्थित अमरीकी दूतावास,
पर सेना ने भारी मिसाइल दना दन गिराया।

कीव एयरपोर्ट पर हुई रूस की ओर से बमबारी,
कहां जाता है वहां अब तक सुरक्षित रहें अधिकारी।

रूस बम बस ऐसे बालक की जय हो खेल जैसी,
कालिया नाग पर जैसे ही देखें कूदे कृष्ण कन्हैया।

ओडिशा में एयरफोर्स विमान की होती थी मरम्मत,
रूसी सेना माइन बम गिराया यूक्रेन में दना दन।

सुखोई लड़ाकू विमान से रूस कर रहा है प्रहार,
यूक्रेनी सेना का शहर – शहर हो रहा है संहार!

यूक्रेनी सेना प्रमुख रूप से जगह जगह पलटवार,
कहीं कहीं रूसी सेना को खदेड़ने के समाचार।

रूसी सेना ने यूक्रेन के ड्रोन सेंटर पर बम बरपाया,
जिस से रूस पे हमले उसे नष्ट कर ने आया।

जेलेस्की ने नाटो में शामिल होने की झुठलाया,
हमारी इच्छा पुरी नहीं हो सकी सबको सुनाया।

यूक्रेन तात्कालिक स्थित देखकर मांग में आया,
अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी स्वीकार की बात दोहराया।

रूस ने कहा यूक्रेन आपने सेना वाला देश बनेगा,
दोनों देशों की प्राइवेट सेना का मदद करेगा।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — अत्यधिक घमंड चाहे व्यक्तिगत हो या राष्ट्रीय सदैव ही सर्वनाश का कारण बनता है। अभी जो माहौल रूस यूक्रेन संघर्ष युद्ध का चल रहा है, यह युद्ध पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है। संस्कृत का बहुत प्रसिद्ध लघु सूत्र है “अति सर्वत्र वर्जयेत्” जिसका हिंदी शब्दार्थ है कि “अति करने से हमेशा बचना चाहिए”, अति का परिणाम हमेशा हानिकारक होता है। वास्तव में अति किसी भी चीज की अच्छी नही होती। “लेकिन प्रश्न यहां पर यह है की – मासूम जनता की क्या गलती है?” कुछ भी बनाने में वर्षों का समय लग जाता है, लेकिन बर्बाद यूँ ही मिनटों में हो जाता है। जो कल तक लाखो – करोड़ों, घर दूकान, मकान, कार के मालिक थे, वो आज भिखारी बन गए। उन्हें तो समझ में ही नही आ रहा की आखिर किस गलती का भुगतान हम कर रहे है, गलती कौन करें – भरे कौन ? क्या ज़ेलेंस्की के द्वारा भड़काऊ भाषण यूक्रेन को पूर्ण रूपेण खंडहर में तब्दील करके ही छोड़ेगा?

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यह कविता (यूक्रेन की तबाही!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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कविता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कविता। ♦

सृजन करताओंं में कविता,
मार्गदर्शक बनकर आती।
नवीन द्वार खोल कर वह,
मुखोटा हटाके लहराती।

साहित्य में नव अभिव्यक्ति,
चिंतन शीलता की शक्ति।
गतिशील चलती कविता,
सत्ता से बढ़कर कविता?

कविता भी एक औजार,
समाज पर केन्द्रित विचार!
जीवन में खुशियां निखार,
प्रकृति छवि के बीच विचार।

तानाशाह पर है तलवार,
युग चेतना का संवाहक!
रूढ़ सिद्धांतो पर प्रहार,
करती है सच का प्रचार।

कविता को पोस्टर ना मानो,
जो दीवारों पर टांगे जाए!
खुद के स्वार्थ के वास्ते ही
जहां तहां लिख चिपका दें।

नवीन साहित्य सृजन करती,
अनियंत्रित – नियंत्रण करती।
संस्कृति उत्थान का आधार,
मानवता की रक्षक प्रचार।

सूर्य की किरणों सा अहसास,
रसानुभूती की लिए प्रबलता!
प्रेम की भाषा का शब्द उद्धार,
नवीन मुकाम का करती चुनाव।

इसमें भावना कल्पना के महत्व,
सरलता की होती है प्रधानता।
अनुभूतियां का सृजन मिश्रण,
सच्चाई से स्वागत चिंतन चित्रण।

यथार्थ को प्रकट करती कविता,
चिंता से ऊपर उठकर यह आती।
बौद्धिकता जीवन में सुख भरती,
निरंतर कविता आगे बढ़ती रहती।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — कविता दिल की एक सच्ची अनुभूति है, जो एक कवि के हृदय की गहराई से निकली हुई कृति है। भाव स्वरूप कविता तो होता है जीवन का एक प्रवाह, जो सदैव ही प्रेरित करता है कार्यशील होने के लिए। हृदय की गहराई से निकली हुई कृति में न तो होती उसमें कोई भी बनावट, होती बस दिल के उदगारों की सजावट है। याद रखें – केवल शब्दों को लयबद्ध करना ही नही काफी होता है, सार्थक अर्थ के बिना तो शब्दों के संग नाइंसाफी होता है। गहरे अर्थ लिए हुए शब्दों का इक आईना होती है कविता, जिसमें अति सुंदर भाव के साथ-साथ होता हर शब्द का मायना है। ये कविता प्रेम का गहरा समुद्र है, दरिया इश्क का भी, जिसमें करुणा, जज्बात का अहसास, मरहम होता अश्क का भी। कहते है इंसान जब भी इसमें खो जाए तो हर शह में ही कविता गुनगुनाए, फिर जज्बातों की कलम से सदैव ही ह्रदय पर भाव अंकित करता जाए।

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शहीदाें काे नमन हमारा।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शहीदाें काे नमन हमारा। ♦

शीश झुका कर प्रणाम करते हैं हम उनको,
उन शहीदों को शत – शत नमन हमारा।
जो शीश कटा दिये, अपने देश के लिये,
भुला सकते नहीं हम उन्हें स्वन्तत्रता जो दे गये।

मलय समीर बन बहते रहेंगें उर में हमारे,
देश पर मर मिटने की चाहतें थी उनकी।
हर इक में खून-ए-जिगर से आम हो गये,
देश लहू पुकारेगा हमेशा उन शहीदों को।

जरा सी गफलत-ए-शाम जब भी होगी,
रूह बनकर पुकारेगी शम्पायें वतन की।
जब भी शहीदों की याद आयेगी चमन से,
दहाड़ें मार कर रोयेंगी माटी वतन की।

कतरा भी गया जमीं का गर शत्रु के पास,
धिक्कार लगायेंगी लहू हमें शहीदों की।
उन्हे पिपासा थी वतन की आजादी की,
बेकल हो फिरते थे राहें वे वतन की।
हर-संभव प्रयास करते थे नौ-जवां क्रांति की।

दीवाने जो थे, वे जो चूमते फाँसी को।
नमन करते हैं हम सब, उन सब शहीदों को।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल`“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जान हथेली पर लेकर दुश्मन का चीर सीना दिया। फिर से वीर भारत माँ के शहीद हो गए। याद करेगा तुमको और वंदे मातरम् गायेगा। फिर से वीर भारत माँ के शहीद हो गए। 91 साल पहले यानी 23 मार्च 1931 को आज ही के दिन भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु, सुखदेव को फांसी दी गई थी। उनकी शहादत को देश का हर नागरिक सच्चे दिल से सलाम कर रहा है। भारत को आजाद कराने के लिए इन वीर सपूतों ने हंसते-हंसते मौत को गले लगा लिया था।

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यह कविता (शहीदाें काे नमन हमारा।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव `परिमल` जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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दुहागन रोटी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दुहागन रोटी। ♦

औरंगाबाद की पटरियों पर,
बिखरी रोटी आज शर्मिंदा है।
तार -तार है इज्जत उसकी,
खाने वाला ही न जिंदा है।

खून-पसीना बहा कर उसने,
मुश्किल से इसको पाया था।
क्षुधा नाशनी इस महासुंदरी से,
निवाला एक न खाया था।

पटरी पर थी बिखरी रोटी,
पटक रही थी अपने माथे।
जलमग्न नयन थे उस बेचारी के,
कहानी इश्क की बताते-बताते।

अपने बाबा को मेरे बारे,
गांव में सुना था उसने बतियाते।
फिदा हुआ था मुझ पर तब वह,
मेरे कदमों में बाबा थे शीश नमाते।

निकल पड़ा वह गांव छोड़कर,
शहर को मेरी तलाश में।
मैं पा के रहूंगा, उस महा प्रेयसी को,’
क्या, ताकत थी उसके विश्वास में?

वह ललचता रहा, मैं ललचाती रही,
वह भटकता गया, मैं भटकाती गई।
खूब थी खेली ठिठोली उससे,
मैं भी कितनी मदमाती रही?

मुझे पाने को देख सखी,
क्या-क्या पीड़ा न उसने झेली है?
शायद मेरे गुनाहों की सजा है,
आज पटरियों पर अकेली है।

न जाने क्यों सड़कों से डर कर,
पटरी पर वह आया था?
आज सरकार ने नचाया उसको,
जीवन भर मैंने नचाया था।

धूप – धार की होकर मैंने,
पीछा उससे करवाया था।
वह भी मोह में पड़कर मेरे,
गांव से शहर को आया था।

मुझे पाने की जद्दोजहद में,
उसने, खूब मेहनत से कमाया था।
एक से बढ़कर एक करतब,
दिखा कर, उसने मुझे रिझाया था।

मैं बंध चली थी उसके पल्लू में,
मेहनत का लोहा मुझसे मनवाया था।
चल दिए अब बिन भोगे मुझको,
क्यों मेरी जिंदगी में आया था?

बेवफा न कहना प्यारे मुझको,
मैंने कदम-कदम पर सताया था।
तेरे प्यार को हे प्रियतम प्यारे!
जी भर कर मैंने आजमाया था।

क्यों छोड़ दिया इसे हालत पर इसकी?
इसका जीवन क्या इतना सस्ता है?
वह रोटी है सिसक रही आज,
यह भी कैसी व्यवस्था है?

महबूब मेरे क्या मिलन हुआ यह?
देख रहा ये जमाना है।
किस्मत में मिलन था इतना ही शायद,
मौत तो महज एक बहाना है।

हो गई हूं अछूत सी अब मैं,
कोई मानुष न मुझको अब खाएगा।
कौन मिलेगा प्रीतम ऐसा?
जो तुझ सा मुझे कमाए गा।

तू जा प्यारे में जी लूंगी,
भूखा, चील-कौआ मुझे कोई नोचेगा।
है कौन सहारा, बेसहारा का अब?
जो मेरी इज्जत की इतनी सोचेगा।

आज मैं समझी प्रीतम-प्यारे,
सच्चा प्यार क्या होता है?
तू जिया मेरे लिए, मरा मेरे लिए,
मुझे पाने को हल तक जोता है।

बाकी तो खरीददार है सब,
चंद पैसा ही मोल मेरा होता है।
वे क्या जाने कीमत मेरी?
रोटी का मोल क्या होता है?

तेरी शहादत पर आज प्रिये,
मेरा जर्रा-जर्रा रोता है।
तेरा अरमान थी मैं, तेरा भगवान थी मैं,
मुझसे बढ़कर तेरा, और कोई न होता है।

खामोश है बिखरी रोटी बेचारी,
आंखों से अश्रुओं का सोता है।
किया प्रेम न जीवन में जिसने, वह क्या जाने?
मिलकर बिछड़ने का, दर्द क्या होता है?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — मैं रोटी हूं, हर किसी को मुझे देखकर बहुत ही खुशी होती है क्योंकि मैं हर किसी की भूख मिटा देती हूं। चाहे गरीब हो, चाहे अमीर हो, चाहे बच्चे हो, बूढ़े हो, नौजवान हो सभी को सदैव ही मेरी जरूरत होती है। मैं दूसरों के काम आती हूं हर किसी की मैं मदद करती हूं, भूखे बेसहारा लोगों के चेहरे पर पलभर में मुझे देखकर मुस्कान आ जाती है। मेरे लिए ही सब अपना घर बार छोड़कर गांव से शहर को आते है, लेकिन उन्हें कहाँ पता था की कोरोना रुपी राक्षस, असुर, दैत्य आएगा और हमें (मजदूरों) रुलाएगा। हमें क्या पता था की हम एक एक रोटी के लिए मोहताज हो जायेंगे।

—————

यह कविता (दुहागन रोटी।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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रंग पंचमी होली समापन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रंग पंचमी होली समापन। ♦

रंग पंचमी को होली का होता समापन,
महापर्व देवताओं को होते समर्पित।
नकारात्मक असर को करता नाश
सकारात्मक सोच का होता विकास।

आसमान में जो लोग गुलाल उड़ाते,
मनवांछित फल वही भक्त पाते हैं।
रखने से व्रत सभी दोष मिट जाए,
रंग पंचमी पर्व जो श्रद्धा से मनाते।

सभी अनिष्ट शक्तियां दूर ही रहती,
विघटन कारी शक्ति पास न आती।
रज – तम गुण दासी रूप में रहती,
सत्तवगुण जीवन में सुख शांति देते।

सगुण ऊपर पर्व विजय का प्रतीक,
आध्यात्मिक विकास करे भलीभूत।
पांच तत्वों का महापर्व देता प्रकाश,
किए धूलिवंदन विष्णु जी पालनहार।

त्रेता युग से चला आ रहा त्यौहार,
सांसारिक करते हैं इस पर विचार!
कृष्ण राधा को लगाते अबीर गुलाल,
लक्ष्मी जी की लाल करने से सत्कार।

तेजो मय ही है पूरा ब्रह्मांड हमारा,
विविध रंगों के घटक से भारी तारा।
गुलाल उड़ाकर देवों को हम पुकारें,
कल्याणकारी शक्ति होती हैं सहारा।

पारिवारिक कष्ट खत्म होवे समर्पण से,
ईश्वर की भक्ति होती है जल अर्पण से।
रंगपंचमी महापर्व मनाएं श्रद्धाभक्ति से,
सकारात्मक ऊर्जा आती ईश शक्ति से।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — रंग पंचमी का पर्व होली त्योहार के पांच दिन के बाद मनाया जाता है। होली का पर्व चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ हो जाता है और पंचमी तिथि तक चलता है। पंचमी के दिन मनाए जाने के कारण ही रंग पंचमी कहा जाता है। रंग पंचमी पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी धन, संपत्ति, ऐश्वर्य की देवी हैं। उनकी पूजा के साथ कनकधका स्तोत्र का पाठ करें। मां लक्ष्मी और श्रीहरि को लाल गुलाल अर्पित करें। इससे परिवार के समृद्धि में वृद्धि होगी। रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की पूजा करें। उन्हें गुलाल चढ़ाएं। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन की परेशानी खत्म होंगी। प्रेम संबंध मजबूत होंगे। वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए पति और पत्नी साथ में पूजा करें।

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यह कविता (रंग पंचमी होली समापन।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, सुखमंगल सिंह जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: holi poem in hindi, Poem on Rang Panchami in Hindi, poems of sukhmangal singh, poet sukhmangal singh, sukhmangal singh poems, रंग पंचमी - होली समापन, रंग पंचमी पर कविता, रंगपंचमी - कविता, सुखमंगल सिंह की कविताएं, होली कविता, होली पर कविता, होली पर कविता हिंदी में, होली पर कविताएं, होली पर गजल, होली पर रंगबिरंगी मजेदार कविताएं, होली पर लिखी बेहतरीन कविताओं से चुनिंदा अंश

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