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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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हिंदी कविता

ध्यान – साधना करवा चौथ में।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ध्यान – साधना करवा चौथ में। ♦

विचार के मुक्ताकाश विचरण में,
मैं और तुम सदा समभाव संगी।
हम एक हृदय, आत्म-भावी पथिक,
हैं ज्ञात तुम्हें है, प्रेयसी तुम्हारी।

क्षीणकाय, जा रही बार्धक्य दिश,
बोले डाक्टर,” गुर्दे तुम्हारे अस्वस्थ।
निर्जल – व्रत है शत्रु वत् उसके हित,”
धर्म की परिभाषा बदल रही सतत।

परंपरा होती परिशोधित पर्यावरण से,
मेरा आज है मानस का ध्यान – व्रत।
प्रार्थना तुम्हारे दीर्घ जीवन की, हर,
क्षण, तुम्हारी आत्मोन्नति ही एक।

नव अनुभूति है, न होना तुम,
म्लान-मुख, सम्यक् ध्यान, प्रार्थना।
की शक्ति उच्चतर है, हूं, अव्रती,
मैं आज, निज स्वास्थ्य हित में।

ध्यान ध्वनि से परम प्रबुद्ध तुम,
शुभकामना करवा चौथ की।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — करवा चौथ व्रत के दौरान अपनी अंतर साधना के लिए उपयुक्त समय होता है। करवा चौथ के व्रत को एक सामान्य व्रत की जगह साधनामय दिन की तरह व्यतीत करें। अपने आंतरिक सुषुप्त आंतरिक शक्तियों का स्मरण कर उन्हें जागृत करें। इन आंतरिक शक्तियों का उपयोग कर जीवन के हर क्षेत्र में विकास करें।

—————

यह कविता (ध्यान – साधना करवा चौथ में।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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रोजगार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रोजगार। ♦

आयो मंगल आनंद भयो,
चाहूं ओर बाज्यो बधाई।

रघुवर वर्षों ईंट पाथार,
प्राण अनेकों गवायो।

तरु हिंदून आनंदित हित,
लगतय पौध मुरझाई।

गाल बगावत देश प्रीति,
तकि चूर भयो चतुराई।

झूठे झगड़े मंच मुहल्ले,
पेट की आग दिखाई?

चढ़ परवान भयंकर क्षोभ,
कौवा घर रोटी भाई।

वी टेक एम टेक गैंग मैन,
का ट्रेन में आग लगाई।

सबै गली गल चौर करत,
एम वी ए झाड़ू चलाई?

बरसी अब की रोजगार,
खेल अनेकों गौं समझाई।

आयु मंगल आनंद भयो,
चाहूं ओर बजी बधाई।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — रोजगार के नाम पर जो अफवाह है उसकी सच्चाई को बया किया है। कुछ राजनीतिक लोग इतना ज्यादा गिर गए है की वह आये दिन देश विरोधी हरकते कर रहे है, इनके मन में देश प्रेम से ज्यादा गद्दारी भरा हुआ है। इनके सारे बयान और कार्य देश विरोधी हो रहे है। इनका बस चले तो देश के सभी व्यवस्था को ठप कर दे। इनका इरादा हर तरफ कोहराम मचाने का है।

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यह कविता (रोजगार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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विकास मार्ग पर चला उत्तर प्रदेश।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ विकास मार्ग पर चला उत्तर प्रदेश। ♦

जब से योगी सरकार उत्तर प्रदेश में आई,
लोकतंत्र की खुशियों में बहार लेकर छाई।
महाविद्यालय राज्य महाविद्यालय नये खुलवाई,
इंजीनियरिंग कॉलेज, आई टी आई खूब बढ़वाई॥

जब से योगी सरकार उत्तर प्रदेश में आई,
इंटर कॉलेजों का भाग्य जग गया तब से।
कस्तूरबा कॉलेज फल फूल रहा है कब के,
शिक्षा व्यवस्था में भारी परिवर्तन दिया दिखाई॥

योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में आई,
महिलाओं की मान सम्मान में चार चांद लगाए।
पीएसी और पुलिस की बटालियन बनवाई,
जबरन धर्म परिवर्तन पर बलकर रोक लगाई॥

योगी सरकार उत्तर प्रदेश में खुशियां लेकर आए,
महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान बढ़ाये।
रोमियो स्क्वाड गठन कराकर सुधार कराई,
स्वास्थ्य विभाग की महिलाओं के प्रति कानून बनाई॥

इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल विकास किया,
प्रदेश की हवाई पट्टी का जगह – जगह विस्तार किया।
नए – नए एयरपोर्ट संचालित कराकर प्रदेश में,
रक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया॥

मनरेगा में करोड़ों मजदूरों को बढ़ाकर सरकार ने,
मजदूर और गरीबों के महत्वपूर्ण काम किया।
भेदभाव रहित 800000 नौकरिया दिये,
योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में है आई॥

वायु प्रदूषण कम करने के लिए खूब प्रयास किया,
प्रदेश में चल रहे अवैध बूचड़खाने को बंद किया।
पूरे प्रदेश में पारंपरिक तरीके से वृक्ष लगवाया,
सोलर एनर्जी के कार्यक्रम को खूब चलाया॥

गंगा को निर्मल रखने के लिए जागरूकता फैलाया,
ऑर्गेनिक खेती करने के लिए मुहिम चलाया।
गौ आधारित खेती करवा कर किसानों की आय बढ़ाया,
जल और थल मार्ग से यात्रा करा के जनता को जगाया॥

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया,
आशा कार्यकर्तियों को उचित मानदेय दिलाई।
सांप्रदायिक शौचालय गांव – शहर में बनवाया,
योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में आई॥

किसानों की खुशहाली के लिए अनेक योजना लाई,
सरल फसली ऋण बैंकों से उपलब्ध कराई।
हर किसान ने किसान क्रेडिट कार्ड बनवाई,
जब से उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आई॥

प्रधानमंत्री सम्मान निधि पूरे प्रदेश में लागू कराई,
किसानों की फसलों का उचित मूल्य दिलवाई।
निरंतर किसानों को बिजली उपलब्ध कराई,
योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में है आई॥

जल संरक्षण का कार्यक्रम प्रदेशभर चलाएं,
गंगा के तट पर भी घोषणा गोष्ठयां करवाई।
महिलाओं को बैंक सखी बना सम्मान दिलाई,
पूर्वांचल की जब से योगी सरकार है आई॥

उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी का तोफा दिलाई,
फैक्ट्री और कारखाना बढ़ाने की योजना बनाई।
अवैध प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने का काम हुआ,
बंद सड़क आंखें खुली खुशहाली का माहौल बना॥

गुंडे और माफियाओं को लाल किला दिखलाये,
भ्रष्टाचारियों के ऊपर कठोर कदम उठाये।
ई टेंडरिंग के माध्यम से प्रदेश को आगे बढ़ाये,
नौजवान में कला कौशल का प्रशिक्षण कराये॥

गांव में दुग्ध सहकारी समितियों का क्रियान्वयन कराये,
पशुओं के संरक्षण के लिए विविध योजना लाये।
स्मारकों की सुरक्षा के लिए कदम बढ़ाए,
योगी आदित्यनाथ जी जब से प्रदेश सरकार में आए॥

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — योगी सरकार जब से उत्तर प्रदेश में है आई है तब से उत्तर प्रदेश में क्या – क्या मुख्य कार्य हुआ है उसका जिक्र किया है जैसे – महाविद्यालय राज्य महाविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, आई टी आई नये खुलवाई, महिलाओं की मान सम्मान में चार चांद लगाए। अलग से पीएसी और पुलिस की बटालियन बनवाई, जबरन धर्म परिवर्तन पर बलकर (बलपूर्वक) रोक लगाई। महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान बढ़ाये। रोमियो स्क्वाड गठन कराकर सुधार कराई, स्वास्थ्य विभाग की महिलाओं के प्रति कानून बनाई। और भी बहुत सारे कार्य किये। आओ हम सब मिलकर पुनः उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनाएं।

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यह कविता (विकास मार्ग पर चला उत्तर प्रदेश।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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करवा चौथ और चाँद।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ करवा चौथ और चाँद। ♦

करवा चौथ व्रत से पहले दिन बाजारों की देखो शान,
मेहंदी लगवाने बैठी है सुहागिनें बाजार में लार-पतार।

साड़ी, सूट और लंहगा, चूनी लाल, हरे रंग से दुकानों की बढ़ा रहे हैं शान,
बाजार शोभा लगती है न्यारी जैसे स्वर्ग से अप्सरा है आई उतर।

अगले दिन सुबह सरगी खाकर व्रत का करती है अनुष्ठान,
सारा दिन कुछ न खाकर भजन कीर्तन से मौज मस्ती करती है सारी।

सज – संवर कर कथा सुनती है सास के चरणों में दिल कर अर्पन,
शिव – पार्वती और गणेश की पूजा कर फिर करती है आरती सारी।

सबको खिला – पिला कर राह तके चांद की लगा टकटकी आसमान,
ए चांद कहां छुपे हो इक झलक दिखला जाओ सुहागिनें करती है गुहार।

इक चांद पलकों में है इक बादलों में लुका – छिपी कर करता है परेशान,
ए – चांद – चांदनी को चंद लम्हे करो अर्पण सुहागिनें उतारे आरती तिहारी।

कहां छिपे हो निर्मोही दर्शन की बाट लिए थक गए हैं हमारे नयन,
चांद का दिल पसीज आता है सुन सुहागिनों की पुकार।

खुश हो सुहागिनें सारी चांद की करती है पूजा अर्चना पति के संग,
पति के हाथों से जल ग्रहण करती है चांद की आरती उतार।

हां पिया ही तो है उसकी खुशियों का सारी भू-धरा और असमान,
लंबी आयु की दुआ मांगे भावुकता से हो भाव विभोर।

उसके लिए तो बस पिया ही है दुनिया में दोनो जहान,
करवाचौथ का व्रत है सभी सुहागिनों का प्यारा – प्यारा त्यौहार।

॥ आप सभी बहनों को करवाचौथ पर — हार्दिक शुभकामनाएं ॥

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूती देने वाले पर्व करवा चौथ के बारे में विस्तार से बताया है। तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर, सजने का इनका सलीका होगा। चाँद और नारी के गुणों व पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार का सुंदर मधुर वर्णन किया है। पति-पत्नी एक दूसरे के पूरक होते है इसलिए संगनी का आधार, पिया का गुरुर, बनाता संबंध मजबूत। एक दूसरे का कर सम्मान, अर्धनारीश्वर यही कराता भान, जीवन संगनी के प्यार से संघर्षमय जीवन, हो जाता आसान।

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यह कविता (करवा चौथ और चाँद।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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करवा चौथ।

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♦ करवा चौथ। ♦

भले सारी दुनिया के लिए आम हूँ मैं,
मगर कोई है जिसके लिए ख़ास हूँ मैं।
लगाई है मेंहदी उनके नाम की आज मैंने,
जिनकी धड़कनों में बसा अहसास हूँ मैं।

मेरा दिन भर भूखे रहना उनके लिए सजा है,
किन्तु मेरे लिए इस भूख का अपना मज़ा है।
ये मेरे निश्चल प्रेम की अभिव्यक्ति का है ढंग,
इसलिए मेरी रजा में ही शामिल उनकी रजा है।

मेरा दिन भर कुछ न खाना – पीना भाता नहीं उन्हें,
अपने तर्कों से बार – बार व्रत की समीक्षा वो करते हैं।
शाम ढलते ही टकटकी लगाकर देखते हैं आसमान को,
मुझसे ज़्यादा आतुरता से चाँद की प्रतीक्षा वो करते हैं।

सुहागिनों के गजरे को छूकर बयार महक जाती है,
देख सँवरी सजनी सजना की तबियत बहक जाती है।
चूड़ी खनके, पायल छनके, माथे पर दमके बिंदिया,
पंछी सम कलरव कर सनम की चाहत चहक जाती है।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस मुक्तक/कविता में समझाने की कोशिश की है — पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूती देने वाले पर्व करवा चौथ के बारे में विस्तार से बताया है। तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर, सजने का इनका सलीका होगा। चाँद और नारी के गुणों व पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार का सुंदर मधुर वर्णन किया है। पति-पत्नी एक दूसरे के पूरक होते है इसलिए संगनी का आधार, पिया का गुरुर, बनाता संबंध मजबूत। एक दूसरे का कर सम्मान, अर्धनारीश्वर यही कराता भान, जीवन संगनी के प्यार से संघर्षमय जीवन, हो जाता आसान। सुहागिनों के गजरे को छूकर बयार महक जाती है, देख सँवरी सजनी सजना की तबियत बहक जाती है।

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यह मुक्तक/कविता (करवा चौथ।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार। ♦

पति पत्नी का प्यार, जीवन का है आधार,
प्यार और सम्मान से जग में मिलता मान।
दोनों का त्याग, समर्पण और विश्वास, इसे बनाया आगढ़,
संगनी का आधार, पिया का गुरुर, बनाता संबंध मजबूत।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आता, पावन दिन हरबार,
शिव पार्वती की जिसपर कृपा है होती, वही मनाता त्योहार।
सौभाग्यवती सुहागिन को ही मिलता, ये मौका अधिकार,
पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य, सौभाग्य की कामना करती अपार।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

दो शब्दों का संगम है हमारा यह महात्योहार,
करवा यानी मिट्टी के बर्तन, चौथ यानी चतुर्थी।
सच्चे मन से जो यह रखता, व्रत का उपवास,
करवा माता उसे है देती, सदा सुहागन का वरदान।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

व्रत करने वाली स्त्री का सूर्योदय से इसका होता आगाज,
निराहार नहीं निर्जला उपवास से मिलता, सार्थक फल बेमिसाल।
ॐ शिवायै नमः से पार्वती का, ॐ नमः शिवाय से शिव का,
ॐ सोमाय नमः से छुपे चंद्र का, होता है दीदार।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

छुपे चांद का पिया संग सजनी, करती है इंतजार,
चांद भी इस दिन भाव दिखलाते, लेते सब्र का इम्तहान।
आंखों में सजनी का पिया के प्रति देखकर प्यार,
द्रवित हो चंद्रदेव देते दर्शन, जग को अपरम्पार।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

सब्र का होता बेड़ा पार, चंद्रदेव का होता दीदार,
संगनी संग पिया के चेहरे पर उभरती, मंद-मंद मुस्कान।
चंद्रदेव का दर्शन कर, हर संगनी पिया का छलनी से करती दीदार,
पिया के हाथों जल ग्रहण कर, पूरा होता व्रत महान।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

यह त्योहार एक दिन का ही नहीं, जन्मोजनम के प्यार का,
एहसास दिलाता, दोनों के संबंध को करता और प्रगाढ़।
एक दूसरे का कर सम्मान, अर्धनारीश्वर यही कराता भान,
जीवन संगनी के प्यार से संघर्षमय जीवन, हो जाता आसान।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

विवेक का सभी पतियों से निवेदन है इस बार,
पत्नी का निश्छल प्रेम और विश्वास की डोर का, करें हम सम्मान।
जीवन रूपी पावन कच्चे डोर को पक्का कर,
अपनी संगनी को दे प्यार का, भरोसा एवं विश्वास।
पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार, यही है करवाचौथ त्योहार॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूती देने वाले पर्व करवा चौथ के बारे में विस्तार से बताया है। तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर, सजने का इनका सलीका होगा। चाँद और नारी के गुणों व पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार का सुंदर मधुर वर्णन किया है। पति-पत्नी एक दूसरे के पूरक होते है इसलिए संगनी का आधार, पिया का गुरुर, बनाता संबंध मजबूत। एक दूसरे का कर सम्मान, अर्धनारीश्वर यही कराता भान, जीवन संगनी के प्यार से संघर्षमय जीवन, हो जाता आसान।

—————

यह कविता (पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पावन रिश्ता।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पावन रिश्ता। ♦

कार्तिक की चतुर्थी पर…
ए चाँद देख लेना तेरा नूर भी फीका होगा।

तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर,
सजने का इनका सलीका होगा।

पर तेरी चाँदनी का ही दर्श पाने के बाद,
आएगी सबको अपने चाँद की याद।

तेरे दर्श की शीतलता,
रिश्तों में मिठास भर जायेगी।

तेरा दीदार ही सुहागिनों की,
माँग प्यार से भर जाएगी।

मेहंदी का शगुन होगा, कलाइयाँ,
रंग-बिरंगे चूड़ियों पर इतरायेगी।

होगी सिंदूरी मांग, गजरे की कलियां,
भी अपनी सुगंध बिखेर जाएगी।

पावन कथा सुन सूर्य को,
भी जल अर्पित कर देगी।

इसकी किरणें भी सबके जीवन में,
खुशियों का उजाला भर देगी।

बस प्रेम … प्रीत कर ले,
पावन रिश्ते में बसेरा।

सबके वैवाहिक जीवन में,
हो सुखों का सवेरा…।

श्रृंगार तो हो बस हमसफ़र की,
प्रीत का, तो क्या कहने।

पर सोने पर सुहागा होता,
जब पत्नी प्यार और विश्वास के पहने गहने।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से — पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूती देने वाले पर्व करवा चौथ के बारे में विस्तार से बताया है। तेरी चंद्र कलाओं से भी सुंदर, सजने का इनका सलीका होगा। चाँद और नारी के गुणों व पति के प्यार संग सोलह श्रृंगार का सुंदर मधुर वर्णन किया है।

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यह कविता (पावन रिश्ता।) “श्रीमती सुशीला देवी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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वह चिल्लाता!

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ वह चिल्लाता! ♦

वह चिल्लाता! (व्यंग्य)

आंखों में सरसो फूल रहे हैं जब से,
आधा तीतर, आधा बटेर बुलाते तब से?

मानो उन पर आसमान टूट पड़ता,
जहां राष्ट्र – भक्ति की बातें चलती।

आसमान पर थूकना चाहते वही,
आस्तीन के सांप पाल बैठे कहीं?

उल्टी गंगा बहाना चाहता जो भी,
संदेह और अंगुली उठाता है वही।

एड़ी चोटी का पसीना एक किया कभी,
उल्टी माला फेर रहा है कौन अजी?

ओखली में सिर ना डालें लोग कहीं,
ऐसी – तैसी करने उतरे उनकी सभी।

कंगाली में आटा गीला ना होवे,
कागज काला करने से कलम बचालें।

जाति – मजहब से सैनिक दूर रहता,
इसलिए वह राष्ट्रभक्त कहलाता।

खुशहाली देखकर जो मुरझा जाता,
बुरी आत्मा से जाकर हाथ मिलाता।

आफत विपत्तियों को समझ न पाता,
बदनाम करने की केवल युक्ति बनाता।

निर्दोष को दोषी करार दे चिल्लाता,
चाहता अशुभ पर अंदर से घबराता।

भाग दौड़ में मात्र अशुभ फल मिलता,
जानबूझकर मुसीबत घर ले कर आता।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस व्यंग्य में समझाने की कोशिश की है — कुछ राजनीतिक लोग इतना ज्यादा गिर गए है की वह आये दिन देश विरोधी हरकते कर रहे है, इनके मन में देश प्रेम से ज्यादा गद्दारी भरा हुआ है। इनके सारे बयान और कार्य देश विरोधी हो रहे है। इनका बस चले तो देश के सभी व्यवस्था को ठप कर दे। इनका इरादा हर तरफ कोहराम मचाने का है।

—————

sukhmangal-singh-ji-kmsraj51.png

यह व्यंग्य (वह चिल्लाता!) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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ना मांगा मैं धन दौलत।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ ना मांगा मैं धन दौलत। ♦

ना मांगा मैं धन दौलत,
ना मांगा तुमसे हार सनम।
ना मांगा मैं हीरे मोती,
ना कोई उपहार सनम।

एक तेरी बोली सुनने को,
हरदम मैं बेताब सनम।
दिन – रात सोते जाग बस,
देखूं तेरा ख़्वाब सनम।

क्यों गई ना पता मुझे,
थी क्या खता तू बता मुझे।
होगी कुछ मजबुरी फिर,
या नापसंद था बता मुझे।

तू अभागीन किस्मत की,
या मेरे प्यार की कमी सनम।
मेरे हंसते नैनों में,
क्यों छोड़ गई तू नमी सनम।

एक तेरे जाने से जानम,
गया मैं फिर से हार सनम।
नाम तेरा लेकर सब मुझको,
करते हैं दुत्कार सनम।
नाम तेरा लेकर सब मुझको,
करते हैं दुत्कार सनम….

♦ अमित प्रेमशंकर जी — एदला-सिमरिया, जिला–चतरा, झारखण्ड ♦

—————

Conclusion

  • “अमित प्रेमशंकर“ जी ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — एक प्यार करने वाला सदैव ही अपनी प्रेमिका से केवल सच्चा प्रेम ही चाहता है। जब भी इंसान किसी से बेहद प्यार करते, जो दिल के बहुत करीब होते है और वो अपना बनने वाला होता है, लेकिन अपना बनने से पहले ही हमसे दूर चला जाता है उस समय मन की क्या परिस्थिति, मन में क्या उथल – पुथल चलता है, इसका बहुत सटीक वर्णन किया है।

—————

यह कविता (ना मांगा मैं धन दौलत।) “अमित प्रेमशंकर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। आपकी ज्यादातर कविताएं युवा पीढ़ी को जागृत करने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

नाम: अमित प्रेमशंकर
पता: एदला – सिमरिया
जिला: चतरा (झारखण्ड)
सम्प्रति: कवि, गीतकार व ढोलक वादक।

प्रकाशित पुस्तकें: आत्म सृजन, काव्य श्री, एक नई मधुशाला १, एक नई मधुशाला २, भावों के मोती, व अक्षर पुरूष।
प्रकाशित रचनाएं: देश के अलग-अलग पत्र पत्रिकाओं मे लगभग दो सौ रचनाएं प्रकाशित व समय समय पर सामाचार पत्रों के माध्यम से पत्राचार।
विशेष: “सीता माता सी कोई नहीं” तथा “आज राम जी आएंगे” महाराष्ट्र के वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओ. सी. पटले द्वारा पोवारी भाषा में अनुवाद।

प्राप्त सम्मान: काव्य श्री साहित्य सम्मान, आत्म सृजन साहित्य सम्मान, सरदार भगतसिंह साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत कृति सम्मान, साहित्य कर्नल सम्मान, रैदास साहित्य सम्मान, द फेस ऑफ इंडिया सम्मान, दिल्ली युथ डेवलपमेंट से सम्मानित।
प्रकाशनार्थ: मन की धारा

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आप सभी का प्रिय दोस्त

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, अमित प्रेमशंकर जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: love poems in hindi, poet Amit Premshankar, poet amit premshanker, romantic love poems, romantic love poems in hindi, romantic love poems in hindi for girlfriend, romantic love poems in hindi for her, अमित प्रेमशंकर की कविताएं, ना मांगा मैं धन दौलत

अम्बे शुभ प्रभात।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अम्बे शुभ प्रभात। ♦

शुभ प्रभात, माँ ब्रह्मचारिणी,
पूजन जननी श्वेताम्बरा का।
युग प्रेरणा माँ तपस्विनी,
स्वयंप्रभा प्रिय स्वरूप इक।
हाथ जपत माल, बाम धरें॥

कमंडल, करें ज्ञान-विज्ञान,
साहित्य संवर्धन सतत।
नवदृष्टि जागृत करें,
तप: जल से मात।
प्रक्षालित करें, नव-मानव,
हृदय को……॥

तत्वज्ञान नि:स्वार्थ सेवा,
का दें भाव आज मात।
फल आराधन का, तप,
त्याग, वैराग्य, सदाचार।
संयम दें, लें अर्घ्य में,
स्वार्थ, मोह हर भारत,
समूह का……॥

नाम जिनका अपर्णा,
अशन करें धरा।
स्पर्शी बेलपत्र, निज
दुष्कर तप का।
लघु अंश दान करें,
माँ, युवा वर्ग चेतना को॥

तपबल से, अम्बे के
जीती भरत कन्याएं।
दृष्टि से अम्बे दें,
आशीष, जीवन।
निर्माण का, राष्ट्र सेवा,
से हों ऊर्जा भावित,
वे आज……॥

मुझे दो कमंडल, मैं,
इक सेविका आपकी।
ले खड्ग हाथ, विनाश,
कर कामना, असंयम,
अहंकार……॥

अम्ब ब्रह्मचारिणी,
तप भाव करें, संचार दें।
विवेक, कल्याण दीक्षा मंत्र,
इस महोत्सव को, लक्ष्य,
प्रेरित रखें सदा……॥

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से महानवरात्रि व माँ ब्रह्मचारिणी के बारे में बताने की कोशिश की है— महानवरात्रि के दूसरे दिन पूजा माँ ब्रह्मचारिणी स्वीकार करें। हे माँ तत्वज्ञान नि:स्वार्थ सेवा का दें भाव आज मात। फल आराधना का तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार संयम दें माँ। लें अर्घ्य में, स्वार्थ, मोह हर भारत, समूह का। माँ ब्रह्मचारिणी का आओ हम सब मिलकर पूजन करें।

—————

यह कविता (अम्बे शुभ प्रभात।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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