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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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2024-KMSRAJ51 की कलम से

मधुमास सा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Madhumas Sa | मधुमास सा।

Having created Radha in the heart, Krishna yearns in the firm universe. The burning night and the longing for the day, speaking while uttering Radhey-Radhey. kmsraj51

प्रेम अमृत रस पान करके,
इश्क चले अब धारण करने।
शीर्षक याद लिख कर गीत,
व्रत एकाकी का पारण करने।

अलंकार से सुसज्जित कर,
स्वयं को स्वयं में लज्जित कर।
इच्छाओं की गांठ बाँधकर चले,
भाव करुण का कारण धरने।

सुनकर धड़कनों की आवाज,
तुम्हारे प्रेम का सुनाती आगाज।
तुम कहीं वही तो नहीं हो प्रेमी,
जो आये हो मुझे तारण करने।

राधा बनाकर ह्दय-पटल में,
कृष्ण तड़पे ब्रह्मांड अटल में।
निशा की दहक दिवस की तरस,
बोलते राधे-राधे उच्चारण करने।

मन करता है श्वास को लिख दूँ,
उभरते हर भाव-प्यास लिख दूँ।
आह निकली नयनों से जब-तब,
आते गम, तन्हाई, मारण करने।

प्रार्थना करती प्राणेश्वर हरीश,
जन्मों का साथी मिला मरीच।
मधुमास सा सौन्दर्य खिला ये,
प्रतिभा का दुख जारण करने।

♦ प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति‘ जी – चेन्नई ♦

—————

  • “प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश: कविता प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण के भावों से ओत-प्रोत है। इसमें प्रेम को अमृत के समान दिव्य और शुद्ध बताया गया है, जो आत्मा को जागृत करता है। कवयित्री ने प्रेम को राधा-कृष्ण के अद्वितीय प्रेम से जोड़ा है, जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। कविता में इच्छाओं पर नियंत्रण और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश है। यह दर्शाती है कि प्रेम में समर्पण और त्याग से आध्यात्मिक शांति मिलती है। कवयित्री अपने प्रेम की गहराई और उसके प्रभाव को व्यक्त करते हुए यह कहती है कि प्रेमी की उपस्थिति उसकी पीड़ा और तन्हाई को हर लेगी। अंततः कविता में ईश्वर से प्रार्थना की गई है कि जीवन में सच्चे साथी का साथ मिले, जो सुख-दुख में साथ खड़ा रहे और हर कठिनाई को पार करने में सहायक हो।

—————

Pratibha Pandey - A Author of kmsraj51.comयह कविता (मधुमास सा।) ” प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/घनाक्षरी /कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बज गया जीत का डंका।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baj Gaya Jeet Ka Danka | बज गया जीत का डंका।

In that period a savior emerged from Madwan, the drowning man found a straw and the boat crossed the sea. The trumpet of victory was sounded.

बज गया, आज जीत का डंका,
जलने वाली है, भ्रष्टाचार की लंका।
फिर हुआ कलयुग में कृष्णावतार,
बंशी की धुन से तिरहुत का हुआ नैया पार।
शिक्षकों की बात अब सड़क से सदन तक,
पहुंचाने आए सूबे के कर्णधार रखकर सबकुछ ताक।

जीत नहीं स्वाभिमान की जंग छिड़ी है,
जुल्म ढाने वालों की होनी किरकिरी है।
कहा जाता शिक्षक समाज का दर्पण होता,
मगर यहां उसे ही है सताया जाता।
याद कीजिए वो दिन जब हम शिक्षामित्र हुआ करते थे,
वेतन के लिए मुखिया जी की जी हुजूरी किया करते थे।

उस दौर में उदय हुआ मड़वन से एक तारणहार,
डूबते को मिला तिनके का साथ हुआ बेड़ा पार।
शिक्षामित्र से नियोजित बने लिए हाथ में हाथ,
संघर्ष का कारवां आगे बढ़ा।
जुझारू अग्रदर्शी बंशी की बजी धुन,
मिला चाइनीज वेतनमान ताना बाना बुन।

जिसके बारे में सोचा न था उसे दिलाया,
शिक्षकों को वेतनमान का स्वाद चखाया।
पूर्ण वेतनमान की चली लंबी लड़ाई के थे सूत्रधार,
मोगैंबो के खौफ से सब थे सन्न लगाई दहाड़ पाया पार।
विखंडित शिक्षक समाज को लाया एक मंच,
शिक्षकों की एकता पर जिसने कसा तंज,
बंशीधर का पड़ा उसपर तगड़ा पंच।

ये मात्र जीत नहीं आगाज है,
अभी तो शुरुआत है अंजाम का इंतजार है।
ये जीत नहीं मिशाल है आलाधिकारियों के लिए काल है,
बज गया आज जीत का डंका,
जलने वाली है भ्रष्टाचार की लंका।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है —कविता में शिक्षक समाज के संघर्ष और उनकी जीत का वर्णन किया गया है। भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ाई को रावण की लंका के जलने से तुलना की गई है। शिक्षक समुदाय को जागरूक और संगठित करने में एक नेता, जिसे “मड़वन से तारणहार” कहा गया है, की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई है। इस संघर्ष में शिक्षकों को उनकी मेहनत का उचित वेतनमान और सम्मान दिलाने की दिशा में कई सफलताएं हासिल की गईं। कविता शिक्षक समुदाय की एकता, उनकी संघर्षशीलता और उनके अधिकारों की प्राप्ति की कहानी बयां करती है। यह जीत सिर्फ एक शुरुआत है, और इसे अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बताया गया है। कविता अंततः यह संदेश देती है कि शिक्षक समाज जब संगठित होकर प्रयास करता है, तो वह बदलाव और जीत का परचम लहरा सकता है।

—————

यह कविता (बज गया जीत का डंका।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हां मैं शिक्षक हूं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Haan Main Shikshak Hoon | हां मैं शिक्षक हूं।

A teacher is a guiding force who inspires curiosity, ignites minds, and shapes the future of their students by facilitating learning and discovery.

बुझ चुके चिरागों को फिर से,
जलाने की मुझमें ही तो क्षमता है।
मैं एक शिक्षक हूं, मुझमें पिता का प्यार,
और ममत्व भरी मां की ममता है।

इन्हें कहने दो मुझे जो कहना है,
शिक्षा का सूरज मुझसे ही चमका है।
वह झुग्गियों का चिराग भी आज,
मेरी निरन्तर सिखों से ही तो दमका है।

मैने ही तो पढ़ाया है दुनियां में,
प्यून से पी एम तक के लोगों को।
वे सब भोगते हैं अपनी क्षमतानुसार,
इस संसार के सभी भौतिक भोगों को।

मुझे मेरे ही पढ़ाए लोग ही न जाने,
कब – कब क्या – क्या कह देते हैं?
कुछ लोग तो मुझसे ही सीख कर,
मुझको ही वापिस सीख देते हैं।

मैने कक्षा, कक्ष में ही तो किया है,
संसार के सारे के सारे निर्माणों को।
विश्वाश नहीं होता है अगर किसी को,
तो पढ़ लो ऐतिहासिक के प्रमाणों को।

तकलीफ नही होती है मुझे तब भी,
जब मुझे कोई चेला ही टोकता है।
मैं इस तरह तर्क पैदा करता हूं चेले में,
जिसे आगे बढ़ने से जमाना रोकता है।

चेला मुझसे शिकायत करता है,
मैं ही तो उसको अच्छे से सुनता हूं।
मेरे ही मार्गदर्शन से ही वह आगे चल कर,
अपने भविष्य का जीवन पथ चुनता है।

मैं उसे कभी स्वाभाविक डांटता हूं,
शायद वह मुझसे तब कुछ रूठता है।
पर यह मेरे व्यक्तित्व की कला है शायद,
कि वह दूसरे दिन फिर से मुझे ही पूछता है।

हां मैं शिक्षक था, हूं और रहूंगा,
मुझे खुद के होने पर गर्व होता है।
जब चेला सफल होता है जीवन पथ पर,
तब मेरे लिए वह एक विशेष पर्व होता है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में शिक्षक की महिमा और उसकी भूमिका को दर्शाया गया है। एक शिक्षक वह है जो बुझ चुके चिरागों को फिर से जलाने की क्षमता रखता है और अपने छात्रों को सही मार्ग दिखाकर उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। शिक्षक के अंदर पिता का स्नेह और मां की ममता का संगम होता है। शिक्षक समाज के हर तबके, चाहे वह झुग्गियों का बच्चा हो या कोई उच्च पद पर आसीन व्यक्ति, को ज्ञान प्रदान करता है। उसका योगदान इतना महान है कि उसने दुनियाभर के बड़े निर्माण और सफल व्यक्तित्वों को गढ़ा है।शिक्षक अपने छात्रों को स्वाभाविक रूप से डांटता भी है और उनके सवालों का समाधान भी करता है। वह उनके भीतर तर्क और आत्मविश्वास पैदा करता है, ताकि वे अपने भविष्य की राह चुन सकें। शिक्षक की सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब उसका छात्र जीवन में सफल होता है। कवि ने गर्वपूर्वक यह कहा है कि शिक्षक होना एक गौरव का विषय है और यह एक विशेष उत्सव की तरह है जब उसके द्वारा सिखाया गया छात्र अपने जीवन में सफल होता है।

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यह कविता (हां मैं शिक्षक हूं।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Tamas Mitaye Chalo Deep Jalaye | तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

spread fragrance all around, gather courage and fight back, sharpen all skills, drive away fear from the mind, remove darkness, let's light a lamp.

आओ चलो चले दीप जलाएं,
काले अंधियारे को दूर भगाएं,
संग चले और घुलमिल जाएं,
मन के मैल को आज मिटाएं,
नकारात्मकता को परे हटाएं ,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

अज्ञानता से ज्ञान की ओर,
खुशबू फैलाएं चहुंओर,
कर साहस और प्रतिकार,
तेज करे सब कौशल धार,
डर को मन से दूर भगाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

बुराई से लड़े अच्छाई पर चले,
असत्य से हटे सत्य संग पले,
ईर्ष्या द्वेष घृणा सब भुलाए,
भाईचारा का पाठ पढ़ाएं,
हर तरफ खुशियां महकाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

भक्त प्रहलाद की पावन पुकार,
सुनकर आएं विष्णु नरसिंह अवतार,
होलिका, हिरण्यकश्यप का हुआ सर्वनाश,
पाप का हुआ नाश पुण्य बना खास,
जीवन में इस सबक को अपनाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

हर घर सब मिलकर दीप जलाएं,
दरिद्रता भगाएं लक्ष्मी जी बुलाएं,
अज्ञानता जाए सरस्वती जी आएं,
मन में अपने लिए एक दीप जलाएं,
बच्चे बड़े इको फ्रेंडली दिवाली मनाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में दीप जलाने के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता, प्रेम, ज्ञान और अच्छाई का संदेश दिया गया है। यह अंधकार (अज्ञानता, बुराई, नकारात्मकता) को दूर करने और ज्ञान, साहस, सत्य, और भाईचारे की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती है। कविता में पौराणिक कथाओं का भी संदर्भ है, जैसे प्रहलाद और नरसिंह अवतार की कथा, जो अच्छाई की जीत और बुराई के नाश का प्रतीक है। यह सबक देती है कि हर किसी को अपने जीवन में अच्छाई को अपनाना चाहिए और मन में सकारात्मक दीप जलाना चाहिए। अंत में, पर्यावरण का ध्यान रखते हुए, इको-फ्रेंडली दिवाली मनाने का संदेश भी दिया गया है।

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यह कविता (तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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दीपावली।

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Deepavali | दीपावली। (घनाक्षरी)

Joyful Deepavali 2024 greetings featuring colorful images and heartfelt quotes to celebrate the festival of lights.

मावस का तम घना
दिया आज शशि बना
तुलसी में दीप जला
रंगोली सजाइए

लाओ देशी फुलझड़ी
छोड़ परदेशी लड़ी
बना के दीपों की कड़ी
पर्व को मनाइए

गणपति बुद्धि दाता
लक्ष्मी हैं भाग विधाता
जिनसे वैभव आता
दीपक जलाइए

घर के हों पकवान
श्री जी हों विराजमान
भोजन और मिष्ठान
सब को खिलाइए

♦ वेदस्मृति ‘कृती‘ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस घनाक्षरी में समझाने की कोशिश की है — इस घनाक्षरी का सारांश है कि दिवाली के इस पर्व को अपनी संस्कृति और परंपराओं के अनुसार मनाना चाहिए। मावस की रात में दीपक जलाकर, तुलसी को सजाकर, और रंगोली बनाकर घर को रोशन करना चाहिए। विदेश से लाई गई लड़ियों के बजाय देशी फुलझड़ियों का उपयोग करना चाहिए और दीपों की कड़ी बनाकर पर्व का आनंद लेना चाहिए। कवयित्री जी गणपति और लक्ष्मी को सब समर्पित कर उनके आशीर्वाद से वैभव और बुद्धि की प्राप्ति की प्रार्थना करने को कह रही है। घर पर बने पकवान और मिष्ठान्न को सबको बांटकर, प्रेम और प्रसन्नता से इस महापर्व को मनाने का संदेश दिया गया है।

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यह घनाक्षरी (दीपावली।) ” वेदस्मृति ‘कृती‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/घनाक्षरी /कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई• आई• टी• शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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चलो दिवाली मनाएं।

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Poem on Diwali | चलो दिवाली मनाएं।

The divine light of Diwali guide you on your path to success and happiness.

चलो घी के दीपक जलाएं,
जलाएं नए ऊर्जा उत्साह से,
चलो दिवाली मनाएं ऐसे,
मनाएं एक नए अंदाज़ में।

जगमग जगमग रौशन हो,
ऐसे दीपक जलाएं हम,
चलो दिवाली मनाएं ऐसे,
मनाएं एक नए अंदाज़ में।

क्यूं न अज्ञानता को मिटाएं,
ज्ञान के नए दीप जलाएं,
चलो दिवाली मनाएं ऐसे,
मनाएं एक नए अंदाज़ में।

पटाखे फुलझड़ियों का प्रदूषण रोकें,
तेल घी के दीपक जलाएं,
घरों को रंगो की रोशनी से सजाएं,
दीवाली मनाएं नए अंदाज में।

♦ लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी  – बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — दिवाली को एक नए अंदाज़ में मनाने का आह्वान किया गया है। इसमें घी के दीपक जलाकर सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार करने का संदेश दिया गया है। कवि यह कहता है कि ज्ञान का प्रकाश फैलाकर अज्ञानता को मिटाना चाहिए और पर्यावरण को बचाने के लिए पटाखों और फुलझड़ियों का त्याग कर दीप जलाने चाहिए। इसके साथ ही घरों को रंगों और रौशनी से सजाकर दिवाली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाना चाहिए।

—————

यह कविता (चलो दिवाली मनाएं।) “श्री लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, लघु कथा, सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम लेफ्टिनेंट (डॉ•) जयचंद महलवाल है। साहित्यिक नाम — डॉ• जय अनजान है। माता का नाम — श्रीमती कमला देवी महलवाल और पिता का नाम — श्री सुंदर राम महलवाल है। शिक्षा — पी• एच• डी•(गणित), एम• फिल•, बी• एड•। व्यवसाय — सहायक प्रोफेसर। धर्म पत्नी — श्रीमती संतोष महलवाल और संतान – शानवी एवम् रिशित।

  • रुचियां — लेखक, समीक्षक, आलोचक, लघुकथा, फीचर डेस्क, भ्रमण, कथाकार, व्यंग्यात्मक लेख।
  • लेखन भाषाएं — हिंदी, पहाड़ी (कहलूरी, कांगड़ी, मंडयाली) अंग्रेजी।
  • लिखित रचनाएं — हिंदी(50), पहाड़ी(50), अंग्रेजी(10)।
  • प्रेरणा स्त्रोत — माता एवम हालात।
  • पदभार निर्वहन — कार्यकारिणी सदस्य कल्याण कला मंच बिलासपुर, लेखक संघ बिलासपुर, सह सचिव राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई, ज्वाइंट फाइनेंस सेक्रेटरी हिमाचल मलखंभ एसोसिएशन, सदस्य मंजूषा सहायता केंद्र।
  • सम्मान प्राप्त — श्रेष्ठ रचनाकार(देवभूमि हिम साहित्य मंच) — 2022
  • कल्याण शरद शिरोमणि सम्मान(कल्याण कला मंच) — 2022
  • काले बाबा उत्कृष्ट लेखक सम्मान — 2022
  • व्यास गौरव सम्मान — 2022
  • रक्त सेवा सम्मान (नेहा मानव सोसायटी)।
  • शारदा साहित्य संगम सम्मान — 2022
  • विशेष — 17 बार रक्तदान।
  • देश, प्रदेश के अग्रणी समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मेरा चांद मुझे आया है नजर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mera Chand Mujhe Aaya Hai Nazar | मेरा चांद मुझे आया है नजर।

she starts her fast by staying without water, she pleads to Karva Mata, may my beloved live a thousand or two thousand years, don't make me wait anymore, just show me your face. I have seen my moon.

कब आओगे,
कर रही इंतजार,
नैना हो रही लाचार,
सज संवर कर बैठी तैयार,
सजाकर माथे पर बिंदिया,
साथ में गले का हार,
रचा रखी हाथों में मेहंदी,
बस कर रही एक पुकार,
कब आओगे?

जिसका है इंतजार,
हर सुहागिन जिसकी करती आस,
दिल में बसा राखी विश्वास,
निर्जला रह, करती व्रत की शुरुआत,
करवा माता से लगाती गुहार,
पिया की उम्र हो हजार दो हजार,
अब न तरसाओ,
जरा दर्श तो दिखलाओ।

तेरे दीदार में मन हो रहा अधीर,
अब तो आ जाओ,
नयनों की प्यास बुझाओ,
पूरी कर दो मेरी आस,
आ जाओ मेरे पास।

क्यों रूठकर बैठे हो,
कहां छुपकर बैठे हो,
आ जाओ भी एक बार,
पुकार सुन,
शायद चांद को आई रहम,
जिस चांद का कर रही थी इंतजार,
वो चांद मुझे आया है नजर।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता एक सुहागन के इंतजार और प्रेम की गहराई को दर्शाती है। कविता में वह अपने पति के आगमन की प्रतीक्षा कर रही है, सज-धजकर तैयार बैठी है, माथे पर बिंदी और हाथों में मेहंदी रचाई है। उसका मन व्याकुल है, और वह लगातार अपने पति के लौटने की पुकार कर रही है। करवा चौथ के व्रत में वह निर्जला रहकर, करवा माता से अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर रही है।वह पति से रूठने या छुपने का कारण पूछती है, और उसे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पुकारती है। अंत में, उसे प्रतीक्षा में राहत मिलती है जब वह चांद को देखती है, जिसका उसे लंबे समय से इंतजार था।

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यह कविता (मेरा चांद मुझे आया है नजर।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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करवा चौथ का चाँद।

Kmsraj51 की कलम से…..

Karva Chauth Ka Chand | The moon of Karva Chauth| करवा चौथ का चाँद।

Small fights and arguments keep happening between husband and wife throughout the year, but on this special day of Karva Chauth, a new feeling of love and bonding arises between the two.

भले सारी दुनिया के लिए आम हूँ मैं,
मगर कोई है जिसके लिए ख़ास हूँ मैं।
लगाई है मेंहदी उनके नाम की आज मैंने,
जिनकी धड़कनों में बसा अहसास हूँ मैं।

मेरा दिन भर भूखे रहना उनके लिए सजा है,
किन्तु मेरे लिए इस भूख का अपना मज़ा है।
ये मेरे निश्चल प्रेम की अभिव्यक्ति का है ढंग,
इसलिए मेरी रजा में ही शामिल उनकी रजा है।

मेरा दिन भर कुछ न खाना – पीना भाता नहीं उन्हें,
अपने तर्कों से बार – बार व्रत की समीक्षा वो करते हैं।
शाम ढलते ही टकटकी लगाकर देखते हैं आसमान को,
मुझसे ज़्यादा आतुरता से चाँद की प्रतीक्षा वो करते हैं।

सुहागिनों के गजरे को छूकर बयार महक जाती है,
देख सँवरी सजनी सजना की तबियत बहक जाती है।
चूड़ी खनके, पायल छनके, माथे पर दमके बिंदिया,
पंछी सम कलरव कर सनम की चाहत चहक जाती है।

♦ वेदस्मृति ‘कृती‘ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस मुक्तक में समझाने की कोशिश की है — यह मुक्तक प्रेम और समर्पण की भावना को व्यक्त करती है। कवयित्री कहती है कि भले ही वह पूरी दुनिया के लिए साधारण हो, लेकिन किसी विशेष व्यक्ति के लिए उसका अस्तित्व बहुत खास है। उसने अपने प्रिय के नाम की मेहंदी लगाई है और उनके प्रेम का अहसास उसकी धड़कनों में बसा हुआ है।मुक्तक में करवा चौथ व्रत का संदर्भ दिया गया है, जहां भूखे रहना कवि के लिए एक सुखद अनुभव है, क्योंकि यह उसके प्रेम की अभिव्यक्ति है। वहीं, उसके प्रिय को यह भूखा रहना पसंद नहीं है और वे बार-बार इस व्रत पर तर्क करते हैं।शाम होते ही प्रियजन आकाश में चाँद के दर्शन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, और उनकी यह आतुरता व प्रेम अधिक प्रतीत होती है।अंत में, मुक्तक सजने-संवरने और सुहाग की प्रतीकों (जैसे गजरा, चूड़ी, पायल, बिंदिया) की महत्ता को रेखांकित करती है। ये सभी चीजें प्रेमी के मन को प्रसन्न कर देती हैं और उनके बीच की चाहत को और भी प्रबल बना देती हैं। मुक्तक प्रेम, उत्सव, और समर्पण की सुंदर भावनाओं का जीवंत चित्रण करती है।

—————

यह मुक्तक (करवा चौथ का चाँद।) ” वेदस्मृति ‘कृती‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई• आई• टी• शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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करवा चौथ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Karwa Chauth | Karva Chauth| करवा चौथ।

Karva Chauth - wife fasts for the long life and happiness of her husband.

करवाचौथ की पावन बेला में, भव्य भारत देश की शोभा है।
सजना की दीर्घायु का, व्रत रखती सजनी का जो योद्धा है।

निर्जल दिनभर रहती नारी, चन्द्र दर्शन पर ही जल पीती है।
सचमुच इस पर्व से लगता है, वह पति के खातिर जीती है।

वह साल भर का लगाई – झगड़ा, बदलता आज की पूजा में।
मेरी जिन्दगी में बस तुम ही हो सजना, और कोई न दूजा है।

वह छलनी से चांद को देखना, पति प्रेम का घूंट भर पानी है।
चेहरे से पत्नी के झलकता कि, वह तो पति की दीवानी है।

अरे जन्मना – मरना लड़ना – झगड़ना, जीवन की कहानी है।
करवाचौथ की रसम से आती, पति-पत्नी में फिर जवानी है।

हार – शृंगार से सजती सजनी, सजना भी भेंट कुछ लाता है।
विदेशी सभ्यताएं क्या जाने, भारत दाम्पत्य कैसे निभाता है?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता करवाचौथ के पर्व की पवित्रता और उसकी सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाती है। यह त्योहार भारत की दाम्पत्य परंपरा का प्रतीक है, जहाँ पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए उपवास रखती है। दिनभर बिना जल ग्रहण किए वह चंद्र दर्शन के बाद ही जल और भोजन करती है, जिससे उसकी पति के प्रति प्रेम और समर्पण झलकता है।कविता यह भी बताती है कि पति-पत्नी के बीच छोटे-छोटे झगड़े और खटपट साल भर चलते रहते हैं, लेकिन करवाचौथ के इस विशेष दिन पर दोनों के बीच प्रेम और जुड़ाव का नया एहसास जागता है। छलनी से चाँद को देखने और पति से पहला घूंट पानी पीने की रस्म में नारी का प्रेम झलकता है।इसके अलावा, कविता में यह संदेश भी दिया गया है कि भारतीय दाम्पत्य जीवन की गहराई को पश्चिमी सभ्यताएं नहीं समझ सकतीं। इस पर्व के माध्यम से जीवन में फिर से प्रेम की ताजगी आ जाती है और पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम को नये सिरे से अभिव्यक्त करते हैं।

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यह कविता (करवा चौथ।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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ये है धर्मशाला।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yeh Hai Dharamshala | ये है धर्मशाला।

The natural beauty, especially the rains, the Buddhist Guru's abode in McLeod Ganj, and the Bhagsu Falls, are all captivating.

धौलाधार है जहाँ की पहचान।
इन्द्रुनाग देव है वहाँ की शान॥

वर्षा हर किसी पल हो जाती है शुरू वहाँ।
इससे सुंदर शहर हो सकता है और कहाँ॥

मैकलोड़गंज में बौध गुरु का है वास।
भागसू जलप्रपात है वहाँ से थोड़ा ही पास॥

करेरी झील की सुंदरता मनमोहक है बड़ी।
पर सड़कों की चढा़ई है भी थोड़ी खड़ी॥

शहीद स्मारक शहीदों की याद है दिलाता।
दुश्मनों को कैसे खदेड़ा होगा ये अहसास है कराता॥

विश्व में बन रही है जिसकी पहचान।
वो क्रिकेट मैदान है यहाँ की जान॥

शिक्षक महाविद्यालय ने अपनी अलग सी पहचान है बनाई।
वहीं केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने भी शिक्षा की अलख है जगाई॥

सैलानी उत्सुक है आने को यहाँ।
उनके लिए शायद यह है अलग सा जहाँ॥

जिसको भी मौका मिलता है यहाँ आने का।
वो नाम ही नहीं लेता यहाँ से वापिस जाने का॥

♦ विनोद वर्मा जी / जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि एक ऐसे स्थान की सुंदरता और विशेषताओं का वर्णन कर रहे हैं, जिसकी पहचान धौलाधार पर्वतमाला और इन्द्रुनाग देव से है। वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, विशेषकर बारिश, मैकलोडगंज में बौद्ध गुरु का वास, और भागसू जलप्रपात, सभी मनमोहक हैं। करेरी झील की सुंदरता भी उल्लेखनीय है, हालांकि उसकी चढ़ाई थोड़ी कठिन है। शहीद स्मारक वीरों की शहादत की याद दिलाता है और दुश्मनों के खिलाफ उनकी बहादुरी का अहसास कराता है। विश्व प्रसिद्ध क्रिकेट मैदान भी यहाँ की पहचान है। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक महाविद्यालय और केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। सैलानियों के लिए यह जगह एक अद्वितीय अनुभव है, और जो भी यहाँ आता है, वह इस जगह को छोड़कर जाना नहीं चाहता।

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यह कविता (ये है धर्मशाला।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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