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2025 - KMSRAJ51 की कलम से

मां ने छोड़ी अन्तिम सांसें।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mother Breathed Her Last | मां ने छोड़ी अन्तिम सांसें।

मां ने छोड़ी अन्तिम सांसें, इस तन से सब रिश्ता – नाता टूटा।
वह चली गई परलोक गमन पर, धरती का सब यहीं पर छुटा।

एक टक गाड़ी आंखे छत पर, नयनों से त्यागे अन्तिम प्राण।
जिव्हा लट गई, श्वासें उखड़ी, टूटी नाड़ी, झूल गए दोनों कान।

अजीब तड़प हुई तन में थी, मौत ने लिया ये कैसा इम्तेहान?
टूटी सांसों की डोरी क्षण भर में, छूट गया यह सकल जहान।

दुनियां का मिलता सब हाट बाट में, पर मां तो नहीं मिलती।
खुशियां हैं लाख यहां, मां की गोद सी खुशियां नहीं मिलती।

था ममता का साया अब तक उनका, अब तो संबल रहा नहीं।
ऐसा कौन सा दुख था जीवन में, जो मां ने शायद सहा नहीं?

पिता का जाना, भैया का देह त्यागना, बहना भी तो चली गई।
ऐसे में मां की ममता की छाया, हम पर अब तक बनि रही।

इस संसार में देह धार कर, मां के गर्भ से ही तो मैं आया था।
अंगुली पकड़ कर पथ पर चलना, मां ने ही तो सिखाया था।

सूना कक्ष अब मां हो गया, घर लगता कुछ खाली – खाली है।
मां-बाप, गुरु के रिश्ते ही तो सच्चे हैं, बाकी तो सब जाली हैं।

इस रहस्य भरे संसार में, जन्म-मरण का अजीब सा खेला है।
मौत का मातम देख के लगता है, जीव जग कारा में धकेला है।

आठ जुलाई दो हजार पच्चीस को, सांय, मां का जाना हुआ।
बोलते – बोलते वह चली गई, खत्म ज़िन्दगी का अफसाना हुआ।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता एक संकलित भावनात्मक श्रद्धांजलि है, जिसमें कवि ने एक मां के निधन से उपजी पीड़ा, खालीपन और यादों को गहराई से व्यक्त किया है। मां ने 8 जुलाई 2025 को अंतिम सांस ली, और उसी क्षण से कवि का संसार अकेला, सूना और अधूरा हो गया। कवि ने मां के अंतिम क्षणों का मार्मिक चित्रण किया है — उनकी अंतिम सांस, नाड़ी का टूटना, शरीर का जड़ होना, ये सब देखकर कवि को लगा जैसे मौत ने बहुत कठोर इम्तहान लिया हो। वह बताता है कि इस संसार में सब कुछ मिल सकता है, पर मां दोबारा नहीं मिलती। मां की गोद में जो सुकून था, वह किसी चीज़ में नहीं मिलता। कवि याद करता है कि जीवन के दुखों — पिता, भाई और बहन के निधन — को भी मां ने धैर्य से सहा, और अपने बच्चों पर ममता की छाया बनाए रखी। मां ने ही उसे चलना सिखाया, जीवन की राह दिखाई। अब जब मां नहीं रही, तो घर का हर कोना सूना लगने लगा है। वह कहता है कि माता-पिता और गुरु के रिश्ते ही सच्चे होते हैं, बाकी सब संबंध क्षणभंगुर हैं। अंत में वह मृत्यु की निस्सारता और जीवन के अनिश्चय की बात करता है — यह संसार एक रहस्यमयी जेल जैसा है, जिसमें जन्म और मृत्यु की लुका-छिपी चलती रहती है। मां के जाने से उसकी ज़िन्दगी का एक अध्याय समाप्त हो गया है।

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यह कविता (मां ने छोड़ी अन्तिम सांसें।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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कुदरत का कहर तो बरपेगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kudrat Ka Kahar Tho Barapega | कुदरत का कहर तो बरपेगा।

उजड़ रही है देखो बस्तियां आज,
उजड़ रहे हैं सब खेत – खलियान।
वह दिन भी शायद दूर नहीं अब,
जब बन जाएगी धरती ही श्मशान।

न कार रहेगी, न कोठियां तब,
न घर रहेंगे और न ही तो मकान।
नदी नालों में बहती लाशें दिखेगी,
पहाड़ बनेंगे सब सपाट मैदान।

विकास के नाम पर लूट मचाई है,
भ्रष्टाचार की अब खुल गई दुकान।
जर्रा जर्रा कुदरत का ताण्डव करेगा,
क्या तब समझेगा ये पागल इंसान?

हां बात और भी काम की है एक,
बताना जरूरी सनातन वो विधान।
नए दौर के नए लोगों में बिल्कुल भी,
दिखता न जिसका है नामों – निशान।

देवी पूजी न देवता, साधु – सन्त माना न,
वाहेगुरु न गॉड, खुदा न ही तो भगवान।
खनन माफिया और वन माफिया मिलकर,
कर रहे हैं अवैध खनन और अवैध कटान।

सरकारें सोई है कुंभकर्णी नींद में,
उनका न इधर है तनिक भी ध्यान।
अधिकारी मिले हैं माफियाओं से,
जनता बेचारी होती है परेशान।

न्याय मांगे भी तो वह किससे मांगे?
नीचे से ऊपर तक हेलो का घमासान।
शिकायत करें तो वह भी किससे करें?
मिलता ही नहीं कहीं कोई समाधान।

सत्ताधीश सब सत्ता में चूर, क़ानून की,
महकमें उड़ाते धज्जियां शहर ए आम।
खुल्लमखुल्ला लूट पड़ी है चहुं ओर को,
मूकधर्मी जनता की भी है बन्द ज़ुबान।

कुदरत का कहर तो बरपेगा ही,
और क्या करेगा फिर भगवान?
अभी वक्त है, सम्भल ओ लोलुप !
जरा आँखें खोल ले पागल इन्सान।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता प्रकृति के विनाश और मानवीय लालच पर करारा प्रहार करती है। कवि कहता है कि इंसान ने विकास के नाम पर बस्तियां, खेत-खलिहान और पहाड़ तक उजाड़ दिए हैं। यदि यही स्थिति रही तो एक दिन पूरी धरती श्मशान बन जाएगी। कविता में भ्रष्टाचार, खनन माफिया और वन माफिया द्वारा प्रकृति के दोहन को उजागर किया गया है। सरकारें और अधिकारी माफियाओं से मिलीभगत करके मौन हैं, और आम जनता असहाय है। न्याय की कोई उम्मीद नहीं, क्योंकि हर स्तर पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। कवि इस पतनशील समाज को यह याद दिलाता है कि सनातन धर्म, आस्था, और आध्यात्मिकता से भी लोग दूर हो गए हैं — ना देवी-देवता पूजे जाते हैं, न साधु-संतों को सम्मान दिया जाता है। अंततः यह कविता एक जागरूकता का संदेश है — कि अगर अब भी इंसान नहीं संभला, तो प्रकृति का कहर निश्चित है। इसलिए कवि चेतावनी देता है:  ”

    “अभी भी वक्त है, जाग जा ओ पागल इंसान!”

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यह कविता (कुदरत का कहर तो बरपेगा।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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समझो बरसात लगी है आने।

Kmsraj51 की कलम से…..

Samjho Barasat Lagi Hai Aane | समझो बरसात लगी है आने।

चहुं ओर जब बादल लगे छाने
रिमझिम वर्षा की बौछार लगी जब आने
तो समझो बरसात लगी है आने।

अंबर धरती को लगे जब छूने
आसमानी बिजली भी लगे चमचमाने
तो समझो बरसात लगी है आने।

खड नालों में जब पानी लगे आने
बाढ़ और भूस्खलन का डर लगे सताने
तो समझो बरसात लगी है आने।

मेंढक लगे जब टर्टराने
मोर भी जब नाच लगे दिखाने
तो समझो बरसात लगी है आने।

कीट पतंगें घर की रोशनी की ओर जब लगे आने
जुगनू भी रात को अपनी जगमगाहट लगे दिखाने
तो समझो बरसात लगी है आने।

आमों को चूसने का मजा जब लगे आने
जामुन भी पकने को जब लगे आने
तो समझो बरसात लगी है आने।

मक्की की फसल खेतों में लगे लहराने
धान भी खेतों में जब लगे लगाने
तो समझो बरसात लगी है आने।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता बरसात के आगमन के सुंदर प्राकृतिक संकेतों का वर्णन करती है। जब आसमान में बादल छा जाते हैं, बिजली चमकने लगती है और रिमझिम फुहारें गिरती हैं — तब समझ लेना चाहिए कि बरसात आने वाली है। कविता में मेंढकों की टर्राहट, मोरों का नाच, कीट-पतंगों और जुगनुओं की सक्रियता, आम और जामुन का पकना — ये सभी प्रकृति द्वारा दिए गए मानसून के संकेत हैं। साथ ही मक्की की लहलहाती फसल और धान की रोपाई की तैयारी भी इसी ओर इशारा करती है कि वर्षा ऋतु का स्वागत हो चुका है। कुल मिलाकर, यह कविता प्रकृति के बदलते रंगों और जीवन में लाए उल्लास को दर्शाती है, जो बरसात के मौसम के आगमन से जुड़ा है।

—————

यह कविता (समझो बरसात लगी है आने।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पिता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Father| पिता।

पिता होते है
घर की शान,
इनकी छत्र छाया में
हंसता खिलता है जहांन।

शाम को थके हारे जब
घर में प्रवेश करते,
सारे घर को
खुशियों से भर देते।

घर में कोई समस्या
जब है आती,
हल ढूंढने तक चैन
भी चली जाती।

संतान की पढ़ाई लिखाई के
खातिर करता मेहनत मजदूरी,
उनकी हर ख्वाहिश को
करता जैसे तैसे पूरी।

संतान तो उनके लिए
संतान है होती,
चाहे वो खुशियां लाती
या दुःख है देती।

संतान के पालन पोषण में
नहीं छोड़ता कोई कसर,
अपने स्वास्थ्य पर क्यों न
पड़ जाए चाहे विपरीत असर।

इतना कुछ करने पर पिता
को कई बार खरी खोटी सुनना है पड़ता,
बस यही बातें उन्हें
जल्दी बुढ़ापे में है जकड़ती।

संतान कई बार पिता के
त्याग को भूल है जाती,
इन्हीं बातों पर पिता को
वृद्धाश्रम की राह नज़र है आती।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता पिता के त्याग, संघर्ष और परिवार के प्रति उनके अटूट प्रेम को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है। कवि बताते हैं कि पिता घर की शान होते हैं, जिनकी छाया में पूरा परिवार सुकून और खुशियों से भर जाता है। पिता दिनभर मेहनत करने के बाद जब शाम को घर लौटते हैं, तो अपने साथ मुस्कान और ऊर्जा लेकर आते हैं। वे परिवार की हर समस्या का समाधान ढूंढ़ने में लगे रहते हैं, और विशेष रूप से अपनी संतान की पढ़ाई, ज़रूरतों और ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए हर प्रकार की मेहनत और त्याग करते हैं — भले ही इसका असर उनके अपने स्वास्थ्य पर क्यों न पड़े। फिर भी, कई बार उन्हें संतानों से तिरस्कार या कठोर बातें सुननी पड़ती हैं। यह उपेक्षा और अपमान उन्हें भीतर से तोड़ देती है और उन्हें जल्दी बुढ़ापे की ओर धकेल देती है। कविता अंत में एक दर्दनाक सच्चाई को उजागर करती है — कि अक्सर संतान अपने पिता के बलिदानों को भूल जाती है, और यही उपेक्षा उन्हें वृद्धाश्रम तक पहुँचा देती है।

—————

यह कविता (पिता।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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ये कैसी यात्रा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Ye Kaisi Yatra | ये कैसी यात्रा।

कोई चला अपनों से मिलने,
तो कोई अपनों से मिलकर चला आया,
न मिलने वाला मिल पाया,
न मिलकर गया वापिस आ पाया।

कोई अपना व्यवसाय विदेश करने चला,
तो कोई परिवार सहित घूमने निकला।

न ही व्यवसाय हो पाया,
न ही घूमने का आनंद ले पाया,
मन में अपनों से मिलने के सपने लगे थे आने,
पता नहीं था मौत आज आ बैठी है सिरहाने।

प्रशिक्षु चिकित्सक कर रहे थे खाने की तैयारी,
मालूम न था कि खाना किस्मत में नहीं है हमारी,
एक ने अपने आप को न जाने कैसे बचाया,
लगा ऐसे मानों मौत के मुंह से वापिस आया।

जिंदगी कौन सा खेल कब खेल जाए,
आज तक ये रहस्य कोई जान न पाए।
दोस्तो गुमान किस बात का करना,
पता नहीं अगले पल किसे है मरना।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

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  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता जीवन की अनिश्चितता और मृत्यु की अकस्मात उपस्थिति को मार्मिक ढंग से व्यक्त करती है। इसमें बताया गया है कि कुछ लोग अपनों से मिलने निकले थे, कुछ घूमने या व्यवसाय के लिए, लेकिन न वे मिल पाए, न लौट पाए — क्योंकि अचानक आई मौत ने सब कुछ छीन लिया। कविता में एक दुखद दृश्य चित्रित किया गया है जहाँ प्रशिक्षु चिकित्सक भोजन की तैयारी कर रहे थे, पर उन्हें यह ज्ञात नहीं था कि उनकी किस्मत में वह भोजन नहीं लिखा था। उनमें से एक किसी तरह बच गया, मानो मौत के मुंह से लौट आया हो। अंत में कवि एक गहरी सीख देता है कि जीवन बहुत अस्थिर और अनिश्चित है — न जाने कौन सा पल आखिरी हो। इसलिए घमंड, लालच या अभिमान करने का कोई अर्थ नहीं है, क्योंकि अगले ही पल क्या हो जाए, यह कोई नहीं जानता।

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यह कविता (ये कैसी यात्रा।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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पर्यावरण का नुकसान।

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Paryavaran Ka Nuksan | पर्यावरण का नुकसान।

मेरी रूह रोती है कांप – कांप कर,
देखा के पर्यावरण का नुकसान।
चिन्ता लगी है मन में इक भरी कि,
हो न जाए कहीं यह धरती शमशान।

दया आती है तेरी करणी पर,
तू कर क्या रहा है ओ इंसान?
सृष्टि रचाने वाले से डर जरा,
तू क्यों बना है खुद भगवान?

नदियां नाल हो रही है ,
पर्वत हो रहे हैं मैदान ।
जंगल हो रहे हैं वन विहीन सारे ,
बंजर हो रहे हैं हर खेत – खलियान।

दया आती है तेरी करनी पर ,
तू कर क्या रहा है ओ इंसान?
सृष्टि रचाने वाले से डर जरा,
तू क्यों बना है खुद भगवान?

चारों ओर है शोर ही शोर बस ,
शांति के लिए ना है कोई स्थान ।
कंक्रीट के जंगल को देख बोले वन प्राणी,
बात हम कहां जाए ओ पागल इंसान?

दया आती है तेरी करनी पर,
तू कर क्या रहा है ओ इन्सान?
सृष्टि रचाने वाले से डर जरा,
तू क्यों बना है खुद भगवान?

मौसम के भी मिजाज है बिगड़े,
कहीं सूखा तो कहीं आंधी -तूफान ।
प्रदूषण के कहर से कुदरत है रोती,
क्यों बढ़ रहा है धरती का तापमान?

दया आती है तेरी करनी पर,
तू कर क्या रहा है ओ इंसान?
सृष्टि रचाने वाले से डर जरा,
तू क्यों बना है खुद भगवान?

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में कवि ने पर्यावरण के लगातार हो रहे विनाश पर गहरा दुःख और चिंता व्यक्त की है। कवि बार-बार इंसान से कहता है कि इंसान की स्वार्थपूर्ण और विनाशकारी गतिविधियों के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। नदियाँ गंदे नालों में बदल रही हैं, जंगल खत्म हो रहे हैं, पर्वत समतल होते जा रहे हैं और खेत बंजर हो गए हैं। कवि इंसान को चेतावनी देता है कि वह खुद को भगवान समझने की भूल कर रहा है और सृष्टि को नष्ट कर रहा है। हर ओर शांति के स्थान पर शोर है, और वन्य प्राणी भी बेघर हो गए हैं। मौसम अस्थिर हो गए हैं — कहीं सूखा तो कहीं तूफान — और प्रदूषण के कारण धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है। कवि बार-बार इंसान से कहता है कि वह अपने कर्मों पर विचार करे और सृष्टि के रचयिता से डरे, क्योंकि जिस रास्ते पर वह चल रहा है, वह धरती को विनाश की ओर ले जा रहा है। कविता एक गहरी चेतावनी है — कि अगर इंसान नहीं सुधरा, तो यह धरती एक दिन शमशान बन जाएगी।

—————

यह कविता (पर्यावरण का नुकसान।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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देश भक्ति देख तुम्हारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Desh Bhakti Dekh Tumhari | देश भक्ति देख तुम्हारी।

वाह रे सोफिया और व्योमिका,
कभी तुम बेटी बनी तो कभी मां,
पत्नी बनकर चमका दिया दो घरों का जहां।
चूल्हे चौके से लेकर देश सेवा का फर्ज़ निभाया,
तुमने दुनियां को दिखा दिया दुश्मनों का कैसे हो सफाया।

तुम्हारी कुशलता का नहीं कोई जबाब,
आड़े नहीं आने दिया कभी नारी स्वभाव।
दिन रात अपना फर्ज़ अदा कर रही हो तुम,
देश भक्ति देख तुम्हारी दुश्मनों के होश हुए गुम।

आज हर नारी अपने में तुम्हें है देखती,
अरे सोफिया और व्योमिका महान हो तुम ये हैं कहती।
ये हौंसला ये जज्बा कहां से है तुमने पाया,
दुश्मन है कांपते जब नज़र आता है तुम्हारा साया।

सोफिया-व्योमिका बोल उठी मां भारती,
तुम जैसी नारी की उतारे यहां सब आरती।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में सोफिया और व्योमिका जैसे बहादुर महिलाओं की वीरता और साहस की सराहना की गई है। कवि ने इन्हें उस आदर्श नारी का प्रतीक माना है, जो बेटी, मां, पत्नी और देशभक्त सभी रूपों में चमकती है। उन्होंने न केवल अपने घरों को संभाला, बल्कि देश की सेवा में भी अपना योगदान दिया, दुश्मनों का सामना करते हुए अपने कर्तव्यों को बखूबी निभाया। कविता में नारी की कुशलता, दृढ़ता और साहस को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है, जो कभी अपने नारीत्व को रुकावट नहीं बनने देतीं। उनकी देशभक्ति इतनी प्रबल है कि दुश्मन उनका नाम सुनते ही कांप उठते हैं। अंत में, कवि कहता है कि ऐसी नारी का सम्मान करना हर किसी का कर्तव्य है, और मां भारती खुद इन वीरांगनाओं को नमन करती है, जो नारी शक्ति का प्रतीक हैं।

—————

यह कविता (देश भक्ति देख तुम्हारी।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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दर्द – ए – कश्मीर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dard-E-Kashmir | दर्द – ए – कश्मीर।

क्यूँ मारा बेगुनाहों को,
वो तो तेरे मेहमान थे,
जिनकी मदद से घर चलता था,
किसी को गाड़ी पे घुमाया,
किसी को खाना खिलाया।

कुछ तो तेरे होटल में ठहरे थे,
कुछ को तुमने घोड़े पे घुमाया,
जिसके घर के दिये से रौशन था तेरा घर,
उस दिये को तुमने किस बेरहमी से बुझाया,
हर कोई कुछ तुम्हें देने आया।

कुछ नहीं तुमसे लेना था,
मांगी थी मोहब्बत,
तुमने बदले में गोलियाँ बरसाया,
छुट्टी मनाने वालों को,
इस जहां से विदा कर दिया।

किसी का पिता छीना, किसी का पुत्र,
किसी का सुहाग मिटाया,
किसी अजनबी का घर उजाड़ने में मजा आया,
तेरा फैसला होगा खुदा के सामने।

तुमने कलमा पढ़वा या, बंदूक दिखाया,
सबने सिर झुका दिया,
तुझे हैवान कहूँ या कहूँ शैतान,
तुम खुद सजा पाओगे,
ये देश है वीर-जवानों का,
जिसे कहते हैं हिंदुस्तान।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

—————

  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता निर्दोष लोगों पर हुए क्रूर आतंकी हमलों की मार्मिक कहानी बयान करती है। कवि आतंकियों से सवाल करता है कि उन्होंने उन मासूम लोगों को क्यों मारा, जो उनके मेहमान थे, जिनकी मदद से उनका व्यापार चलता था। कुछ पर्यटक उनके होटल में रुके थे, कुछ ने उनके घोड़ों की सवारी की, और कुछ ने उनकी सेवाओं का लाभ उठाया, लेकिन बदले में उन्हें मौत मिली। कवि इस अमानवीय कृत्य की निंदा करते हुए बताता है कि आतंकवादियों ने उन मासूम लोगों को निशाना बनाया, जो केवल प्यार और शांति की तलाश में आए थे। उन्होंने किसी का पिता, किसी का पुत्र, किसी का सुहाग छीन लिया और निर्दोषों के घर उजाड़ दिए। आखिर में, कवि यह चेतावनी देता है कि इन पापों का न्याय अवश्य होगा, और आतंकवादी खुदा के सामने सजा पाएंगे। भारत जैसे वीर और साहसी देश में ऐसी बर्बरता के लिए कोई जगह नहीं है, और अंततः सत्य की विजय होगी।

—————

यह कविता (दर्द – ए – कश्मीर।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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ऑपरेशन सिंदूर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Operation Sindoor | ऑपरेशन सिंदूर।

धर्म पूछ कर गोली दागना,
किस देश के संविधान में लिखा है?
ओ आतंकवाद के आकाओं!,
तुमने यह पाप कहां से सिखा है?

धर्म नहीं सिखाता दहशत फैलाना,
ये तो तुम्हारे जहन की खुराफातें हैं।
बने फिरे जो धर्म के ठेकेदार हैं तुम,
आदमी से आदमी को ही लड़ाते हैं।

पहलगांव की शहादत का बदला,
लो, भारत का ऑपरेशन सिंदूर है ।
अब भी हद में गर रहना न सिखा तो,
फिर तबाही का मंज़र भी न दूर है।

अरे लड़ना है तो सेना से लडो दिलजलों!
बेगुनाह जनता का कहां कोई कसूर है?
पर कायराना हरकत के आदि जो हो तुम,
निहत्थों पर वार करने के लिए मजबूर है।

तुमने उजाड़ा जो सिन्दूर निहत्थों का,
तो हमने भी किया बदले में प्रहार हैं।
समझो मानवता के नापाक दुश्मनों,
यह न किसी की जीत हुई न हार है।

यह अदला बदली का खेल है घिनौना,
तुमने ही की शुरुआत इसकी हर बार है।
भारत की शान्ति को क्रान्ति में न बदलो,
इस नफ़रत की आंधी में घना अंधकार है।

जो उकसा रहे हैं तुमको पीछे से,
वे खिलाड़ी है, शातिर चालक है।
वे हितैषी नहीं हैं तुम्हारे भी असली,
उनके इरादे लोलुप और नापाक है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता आतंकवाद और धर्म के नाम पर की जाने वाली हिंसा की कड़ी निंदा करती है। कवि ने आतंकियों से सवाल किया है कि किस संविधान में निर्दोषों पर अत्याचार करना लिखा है और कैसे उन्होंने धर्म के नाम पर नफरत फैलाना सीख लिया। धर्म कभी भी आतंक की शिक्षा नहीं देता, बल्कि यह तो मानवता का संदेश देता है। कविता में पहलगाम की शहादत का जिक्र करते हुए कहा गया है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए दृढ़ है और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। साथ ही, कवि चेतावनी देते हैं कि आतंक का यह घिनौना खेल न केवल बेगुनाहों के लिए बल्कि खुद आतंकियों के लिए भी विनाशकारी है। आखिर में, यह कविता उन शक्तियों को बेनकाब करती है जो आतंकवादियों को उकसाती हैं, यह बताते हुए कि वे केवल अपने स्वार्थ के लिए इस हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि सच्चे हितैषी कभी ऐसा नहीं कर सकते।

—————

यह कविता (ऑपरेशन सिंदूर।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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संघर्ष है कहानी हर जीवन की।

Kmsraj51 की कलम से…..

Sangharsh Hai Kahani Har Jeevan Ki | संघर्ष है कहानी हर जीवन की।

Struggle is The Story of Every Life

ऊंचे शिखर से निकली नदियां,
कहां सागर से पहले रुकती हैं?
लाख दीवारों से रोके चाहे कोई,
वे डैम फांदती हैं न कि झुकती हैं।

कौन बनाता है कहां राहें कब उनको?
वे खुद ही अपनी राहें नित बनाती हैं।
कहीं चलती हैं सीधी धारा सी मैदानों में ,
कहीं पहाड़ों में टकरा कर बलखाती हैं।

सीधी चलना नदी की सरलता है होती,
बलखाना जीवन संघर्षों से टकराना है।
नदी का स्वभाव है हमेशा आगे बढ़ना,
रोकने में लगा रहता सदा ही जमाना है।

हो मंजिल कितनी अनजान या दूर,
वे बेपरवाह हो, अपना जल बहाती हैं।
लेती कहां है विश्राम वे राह में तब तक ?
जब तक वे प्रिय सागर में न मिल जाती है।

मंजिल को पाने की हो होड़ नदी सी तो,
सफलता क्यों किसी के कदम न चूमेगी?
हो सूरज सी नियमावली गर जीवन में तो,
दुनियां फिर उसके चारों ओर क्यों न घूमेंगी?

झुकती नहीं है दुनियां आज, कौन कहता है?
झुकती है पर इसको झुकाने वाला चाहिए।
समझती नहीं है दुनियां आज, कौन कहता है?
समझती है पर इसको समझाने वाला चाहिए।

ज्यों सागर में मिलकर विलीन है वे होती,
त्यूं जीवन अन्त में परम में मिल जाता है।
संघर्ष है कहानी हर जीवन की इस जग में,
खुशी का फुल संघर्ष धर्म में खिल जाता है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता नदी के प्रतीक के माध्यम से जीवन के संघर्ष, आत्मविश्वास और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। इसमें बताया गया है कि जैसे ऊँचे शिखरों से निकलने वाली नदियाँ कभी अपनी मंजिल (सागर) से पहले नहीं रुकतीं, वैसे ही मनुष्य को भी बाधाओं से डरना नहीं चाहिए। चाहे रास्ते में कितनी भी दीवारें हों, संघर्ष से जूझते हुए आगे बढ़ते रहना ही जीवन का सार है। नदी कभी सीधे रास्ते पर बहती है तो कभी पहाड़ों से टकराकर बल खाती है, जो दर्शाता है कि जीवन में कभी सरलता होती है तो कभी कठिनाइयाँ आती हैं। लेकिन नदी का स्वभाव है निरंतर बहते रहना, और यह हमें सिखाता है कि लक्ष्य की प्राप्ति तक कभी रुकना नहीं चाहिए। कविता यह भी कहती है कि दुनिया को झुकाने या समझाने के लिए पहले खुद में दृढ़ता और नेतृत्व होना चाहिए। यदि हमारे जीवन में नियम सूर्य जैसे हों और मंजिल को पाने की ललक नदी जैसी हो, तो सफलता हमारे कदम जरूर चूमेगी। अंत में, जैसे नदी सागर में विलीन हो जाती है, वैसे ही मनुष्य का जीवन अंततः परम तत्व (ईश्वर) में विलीन हो जाता है। जीवन एक संघर्ष है, लेकिन इस संघर्ष में ही सच्ची खुशी और सफलता का फूल खिलता है।

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यह कविता (संघर्ष है कहानी हर जीवन की।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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