• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for सतीश शेखर श्रीवास्तव – परिमल

सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

इक प्रयास।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ इक प्रयास। ♦

इक प्रयास। / पार्ट – 2

इक प्रयास (एक प्रयास)।

छैल छबीली जिसके बाँहों में, सफेद झूठ उसके बोल,
कुछ क्षण का साथ है, और कुछ क्षण का मेल।

गहराई थी अतल की, वितल था दो मील,
बादल उसे पी गया, देखती रह गई झील।

जन्मों-जन्म प्यासी रही, घट-घट पिलाया नीर,
‘परिमल’ ऐसा दान तो, नदिया दे तो क्षीर।

बंदूकों के नोक पर, मचाये कौन शोर,
गली-गली में पहरेदार हैं, घर को लूटे घर के चोर।

बागों में आई नहीं, बहारों की बयार रास,
उपवन में बस गई, फूल-पंखुड़ियों की बास।

सीमा को छू न पाया, दानवीरों का दान,
भूखों को ले गया घर, इक नंगा-भूखा इंसान।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (इक प्रयास। / पार्ट – 2) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: kavi satish shekhar srivastava parimal, poem on life in hindi, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', इक प्रयास पार्ट - 2 - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, जीवन एक चुनौती पर कविता, जीवन मूल्य पर कविता, वर्तमान समाज पर कविता, संघर्षमय जीवन पर कविता, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

इक प्रयास।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ इक प्रयास। ♦

इक प्रयास। / पार्ट – 1

इक प्रयास (एक प्रयास)।

हममें है सृजनकार भी, हुए कहीं-कहीं लाचार,
बोलना तो आसान है, खामोश रहना दुश्वार।

‘परिमल’ चंड शीत का, खुश्क है इसका इतिहास,
अपगा मेरे आगार की, कलकल करती हर मास।

प्यारे-प्यारे लोग हैं, प्यारा-प्यारा सा संग,
चंपई जैसा रंग है, पंखुड़ियों जैसा अंग।

दाता की देन है, ये उसका नहीं जवाब,
पवन जैसी नींद है, झंझा जैसे ख्वाब।

जब महका उसका तन, आया अनजाना ख़याल,
नागिन जैसी चाल में, बजते हैं कई सुर-ताल।

सावन की बरसात है, रिमझिम सा अहसान,
सतरंगी को मिल गई, इंद्रधनुषी सी मुस्कान।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (इक प्रयास। / पार्ट – 1) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: kavi satish shekhar srivastava parimal, poem on dreams in hindi, Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', इक प्रयास, इक प्रयास - kmsraj51, इक प्रयास - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, इक प्रयास बेस्ट हिन्दी प्रेरक कविता, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, सपनों पर हिन्दी कविता

शोर मचाती जब-तब।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शोर मचाती जब-तब। ♦

गा रहे पल हरदम,
गुनगुनाती सी शाम है।
उजाले में कशमशा कर,
मचाती शोर जब-तब।

दूर किसी झरोखे से झाँक,
देख रही सदा ये जिंदगी।
कानों में आ-आकर,
कहती कथा कोई पुरागी।

रहती ओट में सदा,
लुक-छिपकर कोलाहल करती है।

अंत:करण की मूक आवाजें,
कलरव करती साँसों में।
थम-थम सी जाती धमनियों को,
चेता जाती आती-जाती आहों में।

खामोश रहती चुपचुप,
गुमसुम-सी चंचल रहती है।

झुरमुट की झँझरी छिदी-छिदी,
झरझर हो गई प्रत्याशा।
क्षणभंगुर-सा जीने को,
राग वेदना गाती शाशा।

सरगम के सुर-तालों में,
वेदना व्यथा बतलाती है।

नोट: शाशा – मनमुख(मन), पुरागी – दफन।
(ये शब्द मैनें कबीलाई भाषा से ली है।)

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (शोर मचाती जब-तब।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: kavita in hindi, poem on life in hindi, Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', short poem in hindi, मोटिवेशनल कविता हिंदी में, शोर मचाती जब-तब, शोर मचाती जब-तब - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, सुंदर कविता हिंदी में

लें संकल्प पुनरावर्तन का।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ लें संकल्प पुनरावर्तन का। ♦

अंतस् का विश्वास यह स्वर्ण-चक्र रुके नहीं,
मानस की सुमंगली कुंकुम कभी चुके नहीं।

प्रवाह रहे झिलमिल,
जैसे आदित्य की थाल।
वृन्तों पर अतीत के,
खिले आगम श्रीवास।
नैनों में धूप रक्तिम,
रंग उन अधरों की।
जिसके गातों तनुरूह में,
सिन्धुनंदनी की कली।

छाँव में पलकों के कलाधार कभी थके नहीं,
मानस की सुमंगली कुंकुम कभी चुके नहीं।

मन-आत्मा का अटल विश्वास,
धरा में जैसे ज्वाल रहे।
नजरों की अँगड़ाईयों में,
जैसे अदृश्य मनुहार रहे।
मिट्टी की खुशबू जल में,
विटप-वृंद में बयार रहे।
विचारों की शुचीर्य की,
पैदावार बारंबार रहे।

उर-अंतस्-प्राणों के संघर्षों में वेदनायें कभी दुखे नहीं,
मानस की सुमंगली कुंकुम कभी चुके नहीं।

भावी समय के पन्थ मिले,
अल्पना की कल्पना रंग भरे।
यामित रक्षित कंगूरों पर,
देश भविष्य का दीप धरे।
श्रद्धा आलंब आधार पर,
कभी न धूमिल साँझ घिरे।
आयुष्य प्रखर सुर-ताल बने,
युगों – युगों तक विश्व में,
भारत की जय गान बजे।

चरणों में अनाचार के मनु-आर्य के कभी झुके नहीं,
मानस के सुमंगली कुंकुम कभी चुके नहीं।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (लें संकल्प पुनरावर्तन का।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: hindi poem, motivational poem in hindi, Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', उत्साह बढ़ाने वाली कविता, प्रसिद्ध प्रेरक कविता, प्रेरणा देने वाली कविता, लें संकल्प पुनरावर्तन का - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, सीख देने वाली कविता, हौसला बढ़ाने वाली प्रेरक कविता

तुम्हारे लिए।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ तुम्हारे लिए। ♦

सरगम की लय ताल में अलाप जगाये,
गीतों काव्यों को मुखड़े का अंतराल बनाये।
जो धुन सजाये गाने की वो भी गाये,
बसंत बहार के मधु की उपमायें भी लाये।
तुम्हारे लिए संगीत के सुर-ताल सजाये है हमनें।

कौतुक – विनोद सुन अश्रुधार गिरे,
दर्द – वेदना सुन कहकहे लगे।
रुदन राग जगाये हमनें सुर आलाप देकर,
अभी कण्ठों को रुलाया है हमने।
रुँधे स्वर को सुलाया है हमने,
तुम्हारे लिए संगीत के सुर-ताल सजाये है हमनें।

तुम्हारे सङ्केत पर अभी राग सौंदर्य उठा सकता हूँ,
जिसे सुन कर नयन मद में मुँदने लगे।
जागने लगे स्वप्न मदहोशी से आने लगे,
हँसने लगे दीप सदा मेरी देखकर।
आग सुलगने लगे चित्त की बात होने लगे,
तुम्हारे लिए संगीत के सुर-ताल सजाये है हमनें।

खामोश अधर भी जैसे मुस्कुराने लगे,
वेदना कसकती है मन के कोने में।
देखी नहीं अभी कही अनकही बातें,
तुम अगर चाहो तो कह सकता हूँ।
सुनकर जिसे बुझने लगे आग,
जलने लगे जिसे सुनकर राख।
तुम्हारे लिए संगीत के सुर-ताल सजाये है हमनें।

इक तेरी ही नहीं और बातें हैं भी बहुत,
रह-रहकर जो मुझे उदास करती हैं।
दर्द आदमी का आदमी को मालूम नहीं,
कितनी साँसें बिन जिंदगी जिया करते हैं।
भव रहे इकतार भैरवी राग मुझे गाने दो,
जिसे सुनकर झुकने लगे चंदा भी।
बवंडर भी उठने लगे धूल बनकर,
तुम्हारे लिए संगीत के सुर-ताल सजाये है हमनें।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (तुम्हारे लिए।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: heart touching poem in hindi, Poem in Hindi on music, तुम्हारे लिए, तुम्हारे लिए - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, प्यार पर हिंदी कविता, संगीत पर कविता - Sangeet Par Kavita, संगीत पर हिंदी कविता, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

आँखों में अश्रु भरे।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ आँखों में अश्रु भरे। ♦

रख काँधे पर सर अपना,
अँखियों में अश्रु भरे हुए।
पहन अँधियारों को,
दर्द – पीड़ा की सुबकी लेते।
हर्ष – कर्ष की बातों में,
अब्धुमन की वीरानी खाती।

किसकी आहट सुनें,
पास कौन आयेगा।
अतिथि की आँखों को,
जो आँसू दे जायेगा।
किससे हम अनुरक्त हो,
भेजते उर-वेदना की पाती।

क्यूँ करे कोई याद,
इष्ट अपना यहाँ कौन।
जग इक बंधन है,
अनुराग इक सपन।
विचार कर अकुलाए,
अंत: करण को ढाँढ़स दे जाती।

है चंदा भी अकेला,
अकेली है उसकी चाँदनी।
मुग्ध हो हँसी दोनों,
ले ली है हृदय पर अपनी।
खाली मन प्राणों से,
मीत-प्रीति की चुटकियाँ ले आती।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (आँखों में अश्रु भरे।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: motivational poem in hindi, poem on life in hindi, Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', poetry in hindi on life, short poem in hindi, आँखों में अश्रु भरे, आँखों में अश्रु भरे - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, कविता हिंदी में, जीवन जीने की प्रेरणा देने वाली कविता, प्रेरणादायक कविता, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

बीते काल की थकन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बीते काल की थकन। ♦

तू चल नये आगाज,
मिटा अपने तन-मन की थकन;
कर कथन अपने मन,
क्षुधा लिप्सा को कर अंतर्मन।
रे पंछी! न परवाज कर,
छोड़ अपने नीड़-चमन।

इस सृष्टि का कहीं न अन्त,
तू विश्राम कर आना – जाना।
पंखों को ले अपने समेट,
थकन तू अपनी ले मिटा।
रे तरंग! न सहला चल,
तू गुदगुदाते अपने पन्थ।

दिखे सब में प्रीति नेह विश्वास,
तटनी की भूल भुला दे।
वो कौन एक है जो,
छोड़े अपने शीलपन।
रे पवन! न हहर चल तू,
मौन हो संग-संग।

जग द्रोह से है भरा,
मोह तू छोड़ जरा।
ज्ञान-विज्ञान के लिये लड़ा,
क्यूँ जीवन – प्राण से भिड़ा।
प्रचंड प्रज्वलित रहा,
खुद में आनंद प्रसन्न रहा।
रे अंतस्! न विलासी तू,
तापस अंग को सुसुप्त कर।

जीवन का सकल आसय,
न ढो अब भ्रमित भाव से।
निष्कर्ष तू निकाल अभी,
मन को न तोल हार-जीत से।
अनगन न कर,
महा-वृन्त तू बन।
रे स्वरूप! न बिगाड़ तू,
संवार निरता का कर सृजन।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (बीते काल की थकन।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: motivational poem in hindi, poem in hindi, poem on life in hindi, Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', short poem in hindi, बीते काल की थकन, बीते काल की थकन - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव – परिमल

अब सोने दो।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अब सोने दो। ♦

केशों में निशा की सवारी है अभी,
पिधान में तेज धारी है अभी।
सुरमयी रंग पे न गया कोई निखार,
विभावरी तो मधु – कुँवारी है अभी।

कौमूदी के पथ पर साथ तुम हो ना,
प्रीति हमारी युगों तक अमर होगी ना।
चाहे विष पिला देना तुम कल मुझको,
पर अमृततरंगिणी में प्रेम की बात होगी ना।

क्या सारंगों के इशारे हैं उस पर गौर करो,
कह रही बसंत बयार क्या जरा ध्यान दो।
जीवन तृषित खड़ी है चौखट पर तुम्हारे,
आज मिलन का पर्व प्रीति का दान दो।

कोमल केश लहरायें मचल-मचल कर,
गहन पलक लजा कर तनिक उठ गई।
जैसे किसी कामिनी कुँज की अब्धि पैठ पर,
घटायें झुक-झुक गई झूम कर छा गई।

झूम लिया सुप्तविग्रही श्वांसों को स्थिर करने दो,
अब तक गुमनाम था थोड़ा गुमराह होने दो।
आज छाई आँखों की पलकों पर छाँह छबीली,
चिर-निद्रित इन अँखियों को अब सोने दो।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (अब सोने दो।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', अब सोने दो, अब सोने दो - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

समर्पित नव वर्ष को।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ समर्पित नव वर्ष को। ♦

नयन में चंचला दीप्ति है,
बाँहों में बीजल धनु मण्डित।
केयूर स्थिरता चरण में,
उर में श्रद्धा अखंडित।

प्राणों में जलती ज्वालामुखी,
ड़मरु-मध्य हथेली पर सँभाले।
जा रहा है जो संभाग,
ध्वजस्तंभ को गगन में उछाले।

सुदर्शन विजय उद्घोष कर,
युग निर्माण में अभिनव बढ़ा है।
युधान को ललकारता जो,
शिखर शैलाधिराज पर चढ़ा है।

दर्प भी कन्दर्प का,
मुख कांति का देख मर्दित।
देश के उस ज्वान को,
मेरी काव्य संजीवनी समर्पित।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (समर्पित नव वर्ष को।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: nav varsh poems, Poems of Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', नए साल पर कविता, नव वर्ष पर कविता, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, समर्पित नव वर्ष को, समर्पित नव वर्ष को - kmsraj51, समर्पित नव वर्ष को - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल

भूलने के लिए सौ जनम तो चाहिए।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ भूलने के लिए सौ जनम तो चाहिए। ♦

सुरमयी शाम कब की विदा हो गई,
न भूल पाये चंपई गंध को हम सारे।
भूलने के लिये सौ जनम तो चाहिए,
नैन संबंध जुड़े क्षण भर को हमारे।

प्रभात किरणों की गुलाबी-गुलाबी छुअन,
निद्रा के भ्रमरंगों को स्वप्न दे गई।
निशा को देकर शबनमी से रतजगे,
खिलखिला कर मोहित मन को कर गई।

याद करते रहे थरथराते अधर,
सौगंध हृदय की आरक्त हो गये हमारे।

उठती प्रभात से नीली साँझ तक,
तपिस सहते रहे प्राण सलिलज से।
बदन जलाती रही धूमिल बदलियाँ,
अंग-अंग सुलगते रहे उजयाली रैन से।

अनछुई चाहतों को न छोड़ पाए हम,
खंड-खंड कर गई आसक्त आबंध हमारे।

सरगम गाती मुस्कुराती हुई परी,
देखते – देखते अनजान हो गई।
मृदुल पलकों में जलते चराग सो गये,
झिलमिलाती हुई ज्योति खो गई।

लहरों सी चली अश्रुओं की मचलती तरंगिणी,
बड़े योग से बँधे मन के गुबार तोड़े तटबंध हमारे।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

यह कविता (भूलने के लिए सौ जनम तो चाहिए।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: भूलने के लिए सौ जनम तो चाहिए - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल

« Previous Page
Next Page »

Primary Sidebar

Recent Posts

  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.