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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Hindi Poems

वासनाओं की आजादी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Freedom Of Lust | वासनाओं की आजादी।

आशाओं के सब भंवर टूट गए,
तट विहीन हो रही मोह नदियां।
तृष्णाओं के जाले फैंक फैंक कर,
पकड़ रहे हैं विकारों की मछियां।

झुरमुट बन मद झाड़ है उपज रहे,
दब रही है जिनमें ज्ञान की फसलें।
प्रेम की खाद अब मिलती कहां है?
वासना रसायन में उलझे सब मसले।

फरिश्ते तो हो गए हैं दूर की कौड़ी,
रिश्ते ही नित निरन्तर जर्जरा रहे हैं।
प्रेमी प्रेमिका के तो भला क्या कहने?
भाई – बहन मदहोशी में सठिया रहे हैं।

छल छदम तो होते सदियों से आए हैं,
बेशर्मी तो इस युग में देखो आई नई है।
न बच्चों में तहजीब पहनावे बरतावे की,
न अभिभावकों में आज वह शेष रही है।

फिर कहते हैं क्यों टिकते नहीं रिश्ते?
यह प्रश्न तो शायद आज बेईमानी है।
शादी से पहले ही संबंधों को बनाना,
वासनाओं को प्रेम समझना नादानी है।

हम मानव हैं, समझते क्यों नहीं?
क्यों पशु की नकल सब करते हैं?
वासनाओं की आजादी, अमर्यादी,
निज पद में कुठाराघात क्यों करते हैं।

विकारों को समझना स्वर्ग से बढ़ कर,
वासनाएं ही क्यों पीयूष सी लगती है?
इनकी प्यास कहां बुझती है किसी की?
ये तो युगों युगों से यूं ही बस भभकी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आजकल समाज में आधुनिकता के नाम पर इंसान कितना गिर गया है वासनाओं के गर्त में? जिस्म की भूख में सब मर्यादाओं को भूल गया है आज का दानवी मानव क्यों? शादी से पहले ही संबंधों को बनाना और वासनाओं को ही प्रेम समझना नादानी है। हम मानव हैं, समझते क्यों नहीं? क्यों पशु की नकल सब करते हैं? वासनाओं की आजादी, अमर्यादी, निज पद में कुठाराघात क्यों करते हैं सभी? प्रेमी प्रेमिका के तो भला क्या कहने? भाई – बहन मदहोशी में सठिया रहे हैं आजकल। बेशर्मी तो इस युग में देखो आई नई है, न बच्चों में तहजीब पहनावे बरतावे की और न अभिभावकों में आज वह शेष रही है लाज – शर्म। वासनाओं के कारण मनुष्य का व्यक्तित्व सडऩे लगता है और काम वासना में बुरे से बुरा कर्म कर रहा है आज का जानवर से भी गया गुजरा मानव। विषयासक्ति की दुर्गंध हमारे व्यक्तित्व को इस तरह ढांप लेती है कि हम दानव बन जाते है। वासना पूरी तरह से यौन आकर्षण पर आधारित है, जबकि प्रेम भावनात्मक इच्छा पर।

—————

यह कविता (वासनाओं की आजादी।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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प्रकृति नियंता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Prakrti Niyanta | प्रकृति नियंता।

प्रकृति नियंता जग जीवों को,
प्राण वायु जीवन धन देता।
लेता नहीं किसी से कुछ भी,
दूषित वायु स्वयं पी लेता।

नदी – झील – झरना – वन – उपवन,
इनके कोमल अंग हैं प्यारे।
इनसे सृजन जलद का होता,
हारते प्यास धरा – जल – ढारे।

धरा – धाम के आभूषण ये,
‘मंगल’ मोद सदा भरते हैं।
समता के पोशाक हैं सारे,
भौतिक ताप सदा हरते हैं।

नीरव जननी में नभ – आंगन,
उद गण ज्योति जलाते रहते।
हरित गैस के कुप्रभाव से,
छिद्र ओजोन घटाते रहते।

शब्दार्थ: उद – उत्कर्ष, प्रकाश,

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — प्रकृति सभी तरह के जीवों को अपनी गॉड में पलटा है, सदैव ही सभी को प्राण वायु जीवन धन देता। प्रकृति कभी भी कुछ लेता नहीं किसी से कुछ भी, दूषित वायु स्वयं पी लेता। नदी-झील, झरना, वन-उपवन ये इनके कोमल अंग हैं प्यारे। इनसे ही सृजन जल का होता है सभी की प्यास बुझती है। धरा के आभूषण ये सदैव ही ऊर्जा प्रकृति में भरते है, सभी जीवों के लिए। मानव ने जो आधुनिकता के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर तापमान गर्म बना दिया है उसे भी प्रकृति काफी हद तक कम करती हैं। प्रकृति जननी है, सदैव ही प्रकाश व ऊर्जा से सभी जीवों का पोषण करती है। हरित गैस के कुप्रभाव से और छिद्र ओजोन घटाते रहते। इस प्रकृति का हम सबको ख्याल रखना है, तभी वर्तमान और आने वाली पीढ़िया रह पाएंगी इस धरा पर अच्छे से खुशहाल।

—————

यह कविता (प्रकृति नियंता।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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ज़रूर पढ़ें — प्रातः उठ हरि हर को भज।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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वो त्रिवेणी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Vo Trivenee | वो त्रिवेणी।

हाल ही में मैंने एक त्रिवेणी का देखा संगम,
जिनके अथाह प्रेम को देख आँखें गई थम।

एक विशालकाय नीम की जड़ की कोटर में,
जैसे आश्रय लिया दो साथियों ने उनके घर में।

मैंने इस सुंदर नजारे को देखा जब पास से,
पीपल के घने पत्ते लहराये थे बड़े होने की आस में।

मेरी भी खुशी का जब कोई ठिकाना न रहा,
जब मैंने पीपल के नीचे बरगद भी देखा वहां।

इस त्रिवेणी को देख प्रफुल्लित हुआ मेरा दिल,
सोचा कैसे पेड़ों ने भी बनाया खुद को एक दूसरे के काबिल।

एक नीम के तने में दोनो वटवृक्षों ने ले ली पनाह,
प्रकृति का अनुपम नजारा देख मुँह से निकला वाह।

इस संगम को देख दिल ने सजदे में सिर झुकाया,
इन त्रिवेणी के इस मेल पर खूब प्यार आया।

हर वर्ष इस बसंती माह में खूब त्रिवेणी लगाएंगे हम,
फिर इस धरा पर प्राण-वायु बिल्कुल न होगी कम।

काश! इंसान भी इस बोलती प्रकृति के गुण सीख जाए,
अपने गुणों को बस मानवता की भलाई में लगाए।

प्रकृति तो पग-पग पर ही अच्छी सीख सिखलाये,
बशर्ते इंसान भी इनसे प्रेम का रिश्ता ही निभाए।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जब प्रकृति खुशनुमा होती है तो इंसानी मन भी प्रसन्न होती है। अपने चारों तरफ सबकुछ अच्छा – अच्छा लगता है। प्रकृति की हरियाली हर एक मन को मोह लेता है और एक अलग ही सुखमय शांति की अनुभूति कराता है प्रकृति। एक विशालकाय नीम की जड़ की कोटर में, जैसे आश्रय लिया दो साथियों ने उनके घर में। मैंने इस सुंदर नजारे को देखा जब पास से, पीपल के घने पत्ते लहराये थे बड़े होने की आस में। इस त्रिवेणी को देख प्रफुल्लित हुआ मेरा दिल, सोचा कैसे पेड़ों ने भी बनाया खुद को एक दूसरे के काबिल। एक नीम के तने में दोनो वटवृक्षों ने ले ली पनाह, प्रकृति का अनुपम नजारा देख मुँह से निकला वाह।

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यह कविता (वो त्रिवेणी।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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नाचती बसंती।

Kmsraj51 की कलम से…..

Dancing Basanti | नाचती बसंती।

चानी के फूल खिले, चांदनी मंगन,
सुधियों के दीप जले राहों में,
नाचती बसंती रही बाहों में।

रुनुन – झुनुन भनक उठी पायलिया पांव,
महमहायि रजनी गन्धा रजनी के गांव।

चंचल चित्त चहक उठा चाहों में,
नाचती बसन्ति रही बाहों में।

छुवन चाहे अरुणायी अधर को हिलोरे,
खग कुल के कलरव में नाच उठी भोर।

प्रीति पगे द्रम – दल के छाहों में,
नाचती बसन्ति रही बाहों में।

अलसाये नयनों से सुषमा निहार,
भक्त जुटे नवरात्रि माता के द्वार।

‘मंगल’ कुहांस घिरे राहों में,
नाचती बसन्ति रही बाहों में।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — जब प्रकृति खुशनुमा होती है तो इंसानी मन भी प्रसन्न होती है। अपने चारों तरफ सबकुछ अच्छा – अच्छा लगता है। जब भी नवरात्री आती है भक्तों का उमंग उत्साह देखने लायक होता है, जैसे अभी सावन में शिव भक्तों का उमंग उत्साह देखने लायक देखने लायक है। प्रकृति की हरियाली हर एक मन को मोह लेता है और एक अलग ही सुखमय शांति की अनुभूति कराता है प्रकृति।

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यह कविता (नाचती बसंती।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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गौरैया सबको भाये।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gauraiya Sabko Bhaaye | गौरैया सबको भाये।

नीम डाल पर नाचूं गाऊं,
जीवन की बगिया महकाऊं।
घर आंगन में दाना चुगती,
चीं चीं करती सदा फुदकती।

बाज झपट्टा मार सके ना,
काठ नीड़ में करती मस्ती।
उठकर भोर पहर मैं धाऊं,
जीवन की बगिया महकाऊं।

भोर हुआ उठ जाओ बाबू ,
स्वस्थ रहो इठलाओ बाबू।
मात – पिता के प्यारे तुम हो,
सबका साथ निभाओ बाबू।

मंगलमय हो जीवन सबका,
यही सहारा सबसे पाऊं।
नीम डाल पर नाचूं – गाऊं,
जीवन की बगिया महकाऊं।

टंगा काठ का बना घोसला,
संरक्षण का बढ़ा हौसला।

कुशल क्षेम की बात न पूछो,
संरक्षण का यही सिलसिला।
गौरैया हूं सबको भाऊं,
नीम डाल पर नाचूं – गाऊं,
जीवन की बगिया महकाऊं।

♦ सुख मंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

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— Conclusion —

  • “सुख मंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — गौरैया हमारे घर-आँगन का पक्षी है। यह ‘ची-ची’ करके बोलती है। गौरैया बहुत सामाजिक पक्षी होती हैं। वे आमतौर पर छतों, पुलों और पेड़ के खोखले में अपने घोंसले का निर्माण करते हैं। शहरों में तो ये इंसानों के घरों के खिड़की के ऊपर या फिर घरों के छत पर अपना घोसला बना लेते हैं। सवेरा होने पर इनका कलरव सुनाई देता है। धर्म पुराणों के अनुसार, गौरैया पक्षी साहस और सावधानी के प्रतीक के रूप में माना जाता है। यह पक्षी आपको जीवन की परेशानियों में साहस दिखाना सिखाता है। साथ ही खुशियों की अहमियत याद दिलाने के लिए ये पक्षी आपके जीवन में आते हैं। कुछ अन्य जानकारों का मानना है कि पक्षी घर में सद्भावना का संदेश लेकर आते है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक गौरैया का मनुष्य जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। गौरैया जिस घर में अपना घोंसला बनाती है, वहां सभी तरह के वास्तु दोष दूर हो जाते हैं। घर की उत्तर दिशा और ईशान कोण में गौरैया अपना घोंसला बनाती है, तो यह अत्यंत शुभ होता है।

—————

यह कविता (गौरैया सबको भाये।) “सुख मंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें, व्यंग्य / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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हाल सुनाता परिभाषा।

Kmsraj51 की कलम से…..

Haal Sunata Paribhasha | हाल सुनाता परिभाषा।

तुमको अपनी व्यथा सुनाता हूं आज,
बगैर मेरे समाज के पूर्ण होवे न कोई काज।

व्यथा सुनाने के लिए जरूरी नही कोई शब्द, न ही भाषा की,
देखो मेरा हाल बखान करता मेरी परिभाषा ही।

मेरे बच्चों की मुस्कान दिल को नित्य उत्साह से भरती,
उनकी खुशी को ढूंढने को जिंदगी हरसंभव प्रयास करती।

मेरे फटेहाल कपड़े और काली हुई त्वचा धूप से,
मेरे बच्चों की मुस्कान का मेल न मेरे रूप से।

हर दिन मालिकों की डांट में भी सदा मुस्कराता,
अपने जख्मों को हर समय मरहम लगाता।

न धूप की, बारिश की और तूफान की परवाह,
गरीबी की हर ओर बस दिखाई देती आह।

बस अपने कर्म में दिल लगाए मैं तो मजदूर हूँ,
बस परिवार के भरण पोषण में चूर हूँ।

मैं बेबस नहीं, मजबूर नहीं हूँ लाचार,
हमने ही तो लगाए सब ऐशो-आराम के तार।

समय मिले तो कभी….

कभी मेरी अंतर्मन की पीड़ा भी झांक कर देखना तुम,
कभी किसी कामगार पर स्वार्थ की रोटी न सेकना तुम।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — मजदूर कहते हैं मैं आराम करने लगूं तो गजब हो जाएगा। मेरे लिए आराम हराम है। मैं खेतों से अन्न उपजाने का काम करता हूं। मैं आराम करने लगूं तो लाखों लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हो जाएंगे। मजदूर कहते हैं — मैं मजदूर हूं। मैंने प्राचीन काल से लेकर आज तक सभ्यता की सीढ़ियां मैंने गढ़ी है। जमाना बदला लेकिन मैंने ज़मीन पर पीठ तक नहीं टिकाई। मैंने नदियों के बहाव को रोका है और उन पर विशाल पूलों का निर्माण किया है। मैंने बड़ी-बड़ी इमारतों को बनाया है । इन लंबी लंबी सड़कों को किसने बनाया? कश्मीर की क्यारियों में केसर किसने उगाई ? खेतों में फसलें किसने पैदा की ? मैंने ! केवल मजदूर ने। दिन सोता था। रात सोती थी, लेकिन मजदूर जगता था। मजदूर ने पहाड़ों को कांटा, चट्टानों को खोदा, खदानों में पहुंचा और वहां से सोना, चांदी लोहा, कोयला, हीरा सब कुछ निकाला। मजदूर कहता है… मैंने वनों को काटा, पथरीली जमीन को खोद-खोद कर नरम बनाया। मुझे अंग्रेज भारत से मारीशस, फीजी आदि अफ्रीकी घने जंगलों में ले गए। वहां सूर्योदय से सूर्यास्त तक काम किया।

—————

यह कविता (हाल सुनाता परिभाषा।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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मजदूर दिवस का इतिहास।

Kmsraj51 की कलम से…..

History of Labor Day | मजदूर दिवस का इतिहास।

देखो मजदूर दिवस है आया,
1 मई 1886 का दिन याद है आया।
अमेरिका का मजदूर सड़कों पर उतर आया,
15-16 घंटे काम न करने का बीड़ा उठाया।

वहां की सरकार ने मजदूर पर कहर था ढाया,
पुलिस वालों की गोलियों से मजदूरों को भूनवाया।
बहुतों की जान गई 100 के करीबों को घायल पाया,
3 साल बाद इतिहास मे एक बदलाव आया।

1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन बुलाया,
8 घंटे काम करने का फैसला सम्मेलन में सुनाया।
1 मई को श्रमिक दिवस और छुट्टी का ऐलान करवाया,
फिर क्या था कई देशों ने इसे अपनाया।

भारत में इसके 34 साल बाद ये दिवस मनाया,
लेबल किसान पार्टी आफ हिंदुस्तान ने बीड़ा उठाया।
1 मई 1923 को चेन्नई में मजदूर दिवस मनाया,
ऐसा करके मजदूरों की उपलब्धियों का ज्ञान कराया।

शोषण को रोक उनके अधिकारों को बतलाया,
झोपड़ी से लेकर महलों तक मजदूरों ने है सजाया।
खुद कच्चे में रहा लोगों को महलों में बैठाया,
दुनिया के हर पहलू में मजदूर को है पाया,
क्या जीवन और क्या मृत्यु? सबमें मजदूर को पाया।

विजय, ने मजदूर दिवस पर लिखने को कलम को उठाया।
पर लिखते हुए श्रमिकों में खो गई खुदको निशब्द पाया।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

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  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए; इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — मजदूरों के नाम समर्पित यह दिन 1 मई है। मजदूर दिवस को लेबर डे, श्रमिक दिवस या मई डे के नाम से भी जाना जाता है। श्रमिकों के सम्मान के साथ ही मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के उद्देश्य से भी इस दिन को मनाते हैं, ताकि मजदूरों की स्थिति समाज में मजबूत हो सके। मजदूर किसी भी देश के विकास के लिए अहम भूमिका में होते हैं। मजदूरों के नाम समर्पित आंदोलन के तीन साल बाद 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की बैठक हुई। जिसमे तय हुआ कि हर मजदूर से केवल दिन के 8 घंटे ही काम लिया जाएगा। इस सम्मेलन में ही 1 मई को मजदूर दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया, साथ ही हर साल 1 मई को छुट्टी देने का भी फैसला लिया गया।

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यह कविता (मजदूर दिवस का इतिहास।) “विजयलक्ष्मी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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परिंदों की प्यास बुझाए।

Kmsraj51 की कलम से…..

Parindon Ki Pyas Bujhae | परिंदों की प्यास बुझाए।

हम तो है सरकारी स्कूल के प्यारे बच्चें,
जुबां से बहुत भोले, दिल के है सच्चे।

शिक्षा के संग पर्यावरण का भी रखते ध्यान,
इन बेजुबान पक्षियों की प्यास का रखे मान।

न जाने कितने परिंदे प्यास से तड़प कर मरते,
आओं सब मिलकर परिंडों में पानी रखते।

समय – समय पर जब इनका रखें हम ख्याल,
तभी इनका मधुर कलरव हमको करता निहाल।

इन पक्षियों की आवाजों ने तो मधुर स्वर-संसार सजाया,
इनके गुणों पर ही हम सबको तो प्यार आया।

तर हो जाये गला जब इन पक्षियों का पानी पीकर,
अच्छा लगे इनको भी हम इंसानों संग जीकर।

दिल में यही एक बात हमने भी ठानी है,
गर्मी आते ही पक्षियों के लिए रखना पानी है।

शिक्षा संग इन गुणों को भी हम अपनाएंगे,
नेक कर्मों से सबके दिलों में ये प्रेम जगायेंगे।

परिंडों = मिटटी वाला पानी का पात्र

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

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  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — गर्मियों में कई परिंदों व पशुओं की मौत पानी की कमी के कारण हो जाती है। लोगों का थोड़ा सा प्रयास घरों के आस पास उड़ने वाले परिंदों की प्यास बुझाकर उनकी जिंदगी बचा सकता है। सुबह आंखें खुलने के साथ ही घरों के आस-पास गौरेया, मैना व अन्य पक्षियों की चहक सभी के मन को मोह लेती है। एक बात याद रखें – प्रकृति के पांचो तत्वों पर इन बेजुबान परिंदों का भी पूरा हक़ हैं, तो इनके लिए गर्मियों में जगह – जगह पेड़ों पर, घर के छत पर व पार्क वगैरह में जरूर स्वच्छ पानी रखें।

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यह कविता (परिंदों की प्यास बुझाए।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी (राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षिका व अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार) है। शिक्षा — डी•एड, बी•एड, एम•ए•। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

  • अनेक मंचों से राष्ट्रीय सम्मान।
  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
  • काव्य श्री सम्मान — 2023
  • “Most Inspiring Women Of The Earth“ – Award 2023
    {International Internship University and Swarn Bharat Parivar}
  • Teacher’s Icon Award — 2023
  • राष्ट्रीय शिक्षा शिल्पी सम्मान — 2021
  • सावित्रीबाई फुले ग्लोबल अचीवर्स अवार्ड — 2022
  • राष्ट्र गौरव सम्मान — 2022
  • गुरु चाणक्य सम्मान 2022 {International Best Global Educator Award 2022, Educator of the Year 2022}
  • राष्ट्रीय गौरव शिक्षक सम्मान 2022 से सम्मानित।
  • अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ लेखिका व सर्वश्रेष्ठ कवयित्री – By — KMSRAJ51.COM
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शिक्षक गौरव सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान — 2022
  • राष्ट्रीय शक्ति संचेतना अवार्ड — 2022
  • साउथ एशिया टीचर एक्सीलेंस अवार्ड — 2022
  • 50 सांझा काव्य-संग्रहों में रचनाएँ प्रकाशित (राष्ट्रीय स्तर पर)।
  • 70 रचनाएँ व 11+ लेख और 1 लघु कथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित (KMSRAJ51.COM)। इनकी 6 कविताएं अब तक विश्व स्तर पर प्रथम और द्वितीय स्थान पा चुकी है, जिनके आधार पर इनको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री व पर्यावरण प्रेमी का खिताब व वरिष्ठ लेखिका का खिताब की प्राप्ति हो चुकी है।
  • इनकी अनेक कविताएं व शिक्षाप्रद लेख विभिन्न प्रकार के पटल व पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं।
  • 3 महीने में तीन पुस्तकें प्रकाशित हुए। जिसमें दो काव्य संग्रह “समर्पण भावों का” और “भाव मेरे सतरंगी” और एक लेख संग्रह “एक नजर इन पर भी” प्रकाशित हुए। एक शोध पत्र “आओं, लौट चले पुराने संस्कारों की ओर” प्रकाशित हुआ। इनके लेख और रचनाएं जन-मानस के पटल पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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जहरीली जिंदगी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Toxic Life | जहरीली जिंदगी।

कभी हसीं रुकती नहीं थी,
अब छुप छुप कर आंसू पीता हूँ,
लोग मजे लेंगे दर्द भरी दास्तान सुनकर,
किसी को कुछ कहता नहीं।

बेज़ान जिस्म लेकर ही जीता हूँ,
एक ज़माना था मम्मी पापा का,
हर जिद्द होती थी पूरी,
गुजरी यादों को बसा लिया सीने में।

याद आती है हर वो बात,
जहर जिन्दगी का यूं ही पीता हूँ।
लगता था सभी अपने हैं,
रिश्तों की अहमियत कोई क्या जाने।

लोग सभी मौसम की तरह बदलते हैं,
सपनों में रहने वाले स्वार्थी लोग।
एक दिन खुद ही सबसे रिश्ता तोड़ते हैं,
आंसूं रुकती नहीं मेरी।

अफसोस की चादर में मुँह ढक लिया हूँ,
दुनिया का रस्मों रिवाज़ देखकर।
औरों के लिए आया कफ़न, ख़ुद ओढ़ लिया है,
मुझे अंजाम की ख़बर नहीं।

फिर भी मेरी शराफत तो देखो,
झूठे लोगों के शहर में,
सच की ज़ुर्रत तो देखो।
सत्य बोलने की हिम्मत है,
“भोला” की हिमाकत तो देखो।

♦ भोला शरण प्रसाद जी – सेक्टर – 150 / नोएडा – उत्तर प्रदेश ♦

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  • “भोला शरण प्रसाद जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आज का रोता हुआ इंसान यूँ ही बेज़ान सा जिस्म लेकर ही जीता हैं, वह भी एक ज़माना था मम्मी पापा का, हर जिद्द होती थी पूरी अपनी, गुजरी यादों को अब बसा लिया मैंने सीने में। याद आती है हर वो बात, जहर जिन्दगी का यूं ही पीता हूँ अब मैं। मुझे लगता था की सभी अपने हैं, रिश्तों की अहमियत कोई क्या जाने आजकल के ज़माने में। अब लोग सभी मौसम की तरह बदलते हैं, सपनों में रहने वाले स्वार्थी लोग, एक दिन खुद ही सबसे रिश्ता तोड़ते हैं, आंसूं रुकती नहीं मेरी अब। अफसोस की चादर में मुँह ढक लिया हूँ, दुनिया का रस्मों रिवाज़ देखकर। औरों के लिए आया कफ़न, ख़ुद ओढ़ लिया है, मुझे अंजाम की ख़बर नहीं।

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यह कविता (जहरीली जिंदगी।) “भोला शरण प्रसाद जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं भोला शरण प्रसाद बी. एस. सी. (बायो), एम. ए. अंग्रेजी, एम. एड. हूं। पहले केन्द्रीय विघालय में कार्यरत था। मेरी कई रचनाऍं विघालय पत्रिका एंव बाहर की भी पत्रिका में छप चूकी है। मैं अंग्रेजी एंव हिन्दी दोनों में अपनी रचनाऍं एंव कविताऍं लिखना पसन्द करता हूं। देश भक्ति की कविताऍं अधिक लिखता हूं। मैं कोलकाता संतजेवियर कालेज से बी. एड. किया एंव महर्षि दयानन्द विश्वविघालय रोहतक से एम. एड. किया। मैं उर्दू भी जानता हूं। मैं मैट्रीकुलेशन मुजफ्फरपुर से, आई. एस. सी. एंव बी. एस. सी. हाजीपुर (बिहार विश्वविघालय) बी. ए. (अंग्रेजी), एम. ए. (अंग्रेजी) बिहार विश्वविघालय मुजफ्फरपुर से किया। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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डॉ भीमराव अम्बेडकर।

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Dr. Bhimrao Ambedkar | डॉ भीमराव अम्बेडकर।

बुद्धि से तेज,
विचारों से श्रेष्ठ,
ज्ञान में ज्ञानी।

सहनशीलता की मिशाल,
जला दी जिसने अलख ज्ञान की,
आओ करें नमन उस महान ज्ञानी को।

किताब, कलम को बना ढाल,
छा गए जो महान,
करोड़ों दिलों पर जिसका राज।

रख नारी को संग,
दिला कर महिलाओं को,
शिक्षा का अधिकार,
बने नारी रक्षक।

गरीबों वंचितों को दिया उठा,
समानता का पढ़ाया पाठ,
सहकर कठोर यातनाएं।

रख शिक्षा को आगे,
आम से बने खास,
लिख दिया जिसने संविधान।

कहलाए वे…
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,
नमन मातृभूमि के लाल को।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — डॉ भीमराव अम्बेडकर एक महान देशभक्त , न्याय के पुजारी , शिक्षाविद और दलितों के मसीहा थे। भारत के संविधान के निर्माता के रूप में देश भर में वो प्रसिद्ध है। अम्बेडकर का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा संघर्षपूर्ण रहा , उन्हें छुआछूत , ऊंच नीच आदि का बचपन से ही सामना करना पड़ा। भीमराव रामजी अम्बेडकर , (जन्म 14 अप्रैल, 1891, महू, भारत- मृत्यु 6 दिसंबर, 1956, नई दिल्ली), दलितों के नेता (अनुसूचित जाति; पूर्व में अछूत कहलाते थे) और भारत सरकार के कानून मंत्री (1947-51)। भारत के इतिहास में महानतम नेताओं में से एक थे बाबा साहेब भीमराव रामजी अम्बेडकर। उन्हें भारतीय संविधान का जनक माना जाता है।

—————

यह कविता (डॉ भीमराव अम्बेडकर।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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